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खिवनी अभयारण्य में बाघ परिवार का दुर्लभ दृश्य, सड़क पर निकले, टूरिस्ट की सांसें 20 मिनट तक थमी रहीं

खिवनी खिवनी अभयारण्य में ऐसा नजारा सामने आया, जिसने जंगल सफारी के रोमांच को चरम पर पहुंचा दिया। घनी घास के बीच से अचानक निकला बाघ युवराज सड़क पर आकर ठहर गया और कुछ ही क्षणों में उसके पीछे बाघिन मीरा अपने तीनों शावकों के साथ नजर आई। देखते ही देखते पूरा बाघ परिवार एक साथ सडक़ पार करता दिखा, एक ऐसा दुर्लभ दृश्य, जिसे देख पर्यटक रोमांच और उत्साह से भर उठे। 20 मिनट तक थमा रहा रोमांच शाम करीब 5.30 बजे का समय था, जब यह अद्भुत दृश्य सामने आया। पर्यटकों के वाहन सुरक्षित दूरी पर रुक गए और सभी ने करीब 20 मिनट तक इस शाही परिवार के दीदार किए। इस दौरान एक पर्यटक ने पूरे परिवार को एक ही फ्रेम में कैद कर लिया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। दिन में विश्राम, शाम को शिकार की तैयारी देवास के खिवनी अभयारण्य के अधीक्षक विकास माहोरे के अनुसार, बाघ युवराज दिन में नाले के पास वाले क्षेत्र में अपने परिवार के साथ आराम करता है और शाम होते ही सक्रिय हो जाता है। बुधवार को भी वह अचानक सडक़ पर आकर रुका, मानो अपने साम्राज्य का निरीक्षण कर रहा हो, और फिर अपने परिवार के साथ आगे बढ़ गया। जंगल का ‘रॉयल मोमेंट’ बना यादगार बाघ परिवार का इस तरह एक साथ नजर आना बेहद दुर्लभ होता है। खिवनी अभयारण्य में यह दृश्य पर्यटकों के लिए किसी ‘रॉयल मोमेंट’ से कम नहीं रहा, जिसने उनके सफारी अनुभव को यादगार बना दिया। यह नजारा दुर्लभ और खास क्यों? वन विशेषज्ञों का कहना है, कि आमतौर पर बाघों को जंगलों में अकेले घूमते देखना आसान है, लेकिन परिवार के साथ खुले में रास्ता पार करते देखना एक बेहद दुर्लभ नजारा है। उनका कहना है कि सड़क पार कराते समय खास तौर पर बाघिन अपने बच्चों को लेकर सतर्क रहती है। नर बाघ अपने परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए आगे चलकर जहां तक नजर जाती है, वहां तक के पूरे एरिया को स्कैन कर लेता है। वन विभाग ने टूरिस्ट से की अपील शांत रहें इस दौरान वन विभाग के कर्मचारियों ने टूरिस्ट को अलर्ट कर दिया कि वे शांत रहें, उनकी जरा सी लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है या फिर ये दुर्लभ दृश्य देखने का मजा किरकिरा हो सकता है। ये भी जानें -विकास माहोरे बताते हैं कि खिवनी अभयारण्य मध्य प्रदेश के देवास और सीहोर जिले में फैला हुआ है। वहीं सतपुड़ा लैंडस्कैप का हिस्सा माना जाता है। इसका क्षेत्रफल करीब 130-140 वर्ग किमी है। -यहां ड्राय डेसिड्डुअस यानी पर्णपाती जंगल है। यहां स्थायी टाइगर रिजर्व जैसा आधिकारिक आंकड़ा नहीं होता है। लेकिन सतपुड़ा और आसपास के जंगलों से बाघों का मूवमेंट यहां तक हो जाता है। -मोहरे का कहना है कि यहां पिछले कुछ वर्षों में बाघों का मूवमेंट बढ़ा है। इसे बेहतर संरक्षण और सुरक्षित आवास का संकेत माना जाता है। वन्य जीव प्रेमियों के लिए खिवनी भी अब एक उभरता हुआ या कहें कि हिडन टाइगर स्पॉट बनता जा रहा है। जहां अचानक दुर्लभ नजारे वाइल्डलाइफ लवर्स को रोमांच से भर देते हैं।   

टाइगर कॉरीडोर बरेठा घाट को फोर-लेन बनाने के लिए मिली केंद्र से मंजूरी, 51 हादसों में 18 मौतें

बैतूल  मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के बरेठा घाट से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-46 (NH-46) के महत्वपूर्ण हिस्से को अब फोरलेन बनाने की मंजूरी मिल गई है। यह वही इलाका है, जहां पिछले दो साल में सड़क हादसे हुए और 18 लोगों की जान चली गई। लगातार बढ़ते हादसों और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस सड़क को चौड़ा और सुरक्षित बनाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यह सड़क ग्वालियर से बैतूल तक करीब 634 किलोमीटर लंबा एक अहम हाईवे है, जो पूरी तरह मध्यप्रदेश के अंदर आता है। यह राज्य के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ने वाला बड़ा मार्ग है और भोपाल से नागपुर जाने वाले कॉरिडोर का भी हिस्सा है। इस पर ज्यादातर काम पूरा हो चुका है, लेकिन बरेठा घाट समेत करीब 21 किलोमीटर का हिस्सा बाकी था।  हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू होगा काम  दरअसल, यह इलाका टाइगर कॉरिडोर में आता है, यानी यहां से जंगली जानवरों की आवाजाही होती है। इसी कारण 1 अप्रैल 2022 को हाईकोर्ट ने यहां सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को वन्यजीव और पर्यावरण से जुड़ी कई मंजूरियां लेनी पड़ीं। अब वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र सरकार से सभी जरूरी अनुमति मिल चुकी है। जैसे ही हाईकोर्ट से स्टे हटाने का अंतिम आदेश आएगा, निर्माण काम शुरू कर दिया जाएगा। संकरी और घुमावदार सड़क, लगता है जाम  बरेठा घाट का यह हिस्सा अभी केवल दो लेन का है, जो बहुत संकरा और घुमावदार है। यहां भारी वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। साथ ही, दो जगह ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां बार-बार हादसे होते हैं। कम चौड़ाई, तेज मोड़, ढलान और कम विजिबिलिटी इस रास्ते को और खतरनाक बनाते हैं। ब्लैक स्पॉट को ठीक करने भी बनाया प्लान  पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच यहां 51 एक्सीडेंट हुए, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और करीब 62 लोग घायल हुए। कई छोटे हादसे तो रिकॉर्ड में भी नहीं आ पाते, जिससे असली स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब इस पूरे हिस्से को 4 लेन में बदला जाएगा, जिससे सड़क चौड़ी होगी और ट्रैफिक आसानी से चल सकेगा। इसके साथ ही ब्लैक स्पॉट्स को ठीक करने के लिए खास प्लान बनाया गया है। यहां 3 छोटे पुल (माइनर ब्रिज), 38 बॉक्स कलवर्ट, 1 रेलवे अंडरब्रिज, 2 रोड ओवरब्रिज और 1 व्हीकल अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे ट्रैफिक सुचारू होगा और दुर्घटनाओं में कमी आएगी। वन्य जीवों की सुरक्षा का ख्याल, बनेंगे 10 अंडरपास, 1 ओवरपास  सबसे खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में वन्यजीवों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। जानवरों की आवाजाही के लिए 10 अंडरपास और 1 ओवरपास बनाए जाएंगे, ताकि वे बिना खतरे के सड़क पार कर सकें। इसके अलावा सड़क पर क्रैश बैरियर, साइन बोर्ड, रंबल स्ट्रिप, नॉइज बैरियर और फेंसिंग जैसी सुविधाएं भी लगाई जाएंगी, जिससे यात्रियों और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा हो सके। पर्यटन स्थलों पर पहुंच भी बेहतर होगी  इस परियोजना के पूरा होने से न सिर्फ सड़क हादसे कम होंगे, बल्कि व्यापार, पर्यटन और आवागमन भी आसान हो जाएगा। सांची, भीमबेटका, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी। साथ ही, उद्योगों और व्यापार को भी इसका बड़ा फायदा मिलेगा। कुल मिलाकर, बरेठा घाट का यह फोरलेन प्रोजेक्ट आम लोगों के लिए सुरक्षित और आसान सफर की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। 

इंदौर के जंगलों में बाघ लौटे, बन रहा है एक नया वाइल्डलाइफ कॉरिडोर

 इंदौर  वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे के मौके पर इंदौर वनमंडल से एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। यहां के जंगल इन दिनों बाघों और तेंदुओं के लिए तेजी से अनुकूल बनते जा रहे हैं। घने वन, पर्याप्त जल स्रोत और शिकार की उपलब्धता ने चोरल-महू-मानपुर क्षेत्र को फिर से बड़े वन्यजीवों का ठिकाना बना दिया है। जनवरी से फरवरी के बीच चोरल क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। कई स्थानों पर बाघ के पंजों के निशान और विष्ठा पाई गई है, जबकि तेंदुओं की गतिविधियां लगातार देखी जा रही हैं। उदयनगर से बड़वाह तक नया टेरीटरी विकसित कर रहे दिसंबर में हुई बाघ गणना के दौरान भी इंदौर वनमंडल के नाहरझाबुआ-भड़किया, उमठ-वेका और मलेंडी-मांगलिया क्षेत्रों में बाघ की हलचल दर्ज की गई। वन अधिकारियों के अनुसार बाघ अब उदयनगर से बड़वाह तक नया टेरीटरी विकसित कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि खिवनी अभयारण्य से लेकर उदयनगर-बड़वाह तक का क्षेत्र एक संभावित वाइल्डलाइफ कारिडोर के रूप में उभर रहा है। देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण कॉरिडोर मानता है। हालांकि, विकास परियोजनाओं के कारण जंगलों का दायरा प्रभावित हुआ है। नए सुरक्षित क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं इंदौर-खंडवा मार्ग, महू-सनावद रेल लाइन और अन्य परियोजनाओं से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास बाधित हुआ, जिससे वे नए सुरक्षित क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि 2022 से 2024 के बीच कई बार बाघ इन इलाकों में नजर आए हैं। चोरल, महू और इंदौर के कई क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाए वन विभाग ने बाघ और तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चोरल, महू और इंदौर के कई क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाए हैं। इनसे मिली तस्वीरों का अध्ययन देहरादून स्थित संस्थान में किया जा रहा है, ताकि बाघों की संख्या और मूवमेंट का सटीक आकलन हो सके। इसलिए बढ़ रही है गतिविधि विशेषज्ञों के अनुसार क्षेत्र में सांभर, चीतल, हिरण और नीलगाय जैसे शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ने से बाघों को पर्याप्त शिकार मिल रहा है। वहीं जंगलों में बढ़ती मानव गतिविधियों और निर्माण कार्यों के कारण वन्यजीव नए सुरक्षित आवास की तलाश में हैं। मांचल और मोरोद जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक और अन्य प्रस्तावित गतिविधियों से भी वनक्षेत्र पर दबाव बढ़ा है। सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती विशेषज्ञ अभय जैन का कहना है कि यदि इस उभरते कारिडोर को संरक्षित किया जाए तो बाघों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सकती है। इसके लिए विकास और संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी है।     सूचना तंत्र मजबूत किया जा रहा है और गर्मियों में आग, अतिक्रमण व अवैध कटाई को रोकने के लिए विशेष रणनीति बनाई जा रही है। इंदौर-चोरल-महू क्षेत्र में बाघों की बढ़ती मौजूदगी एक ओर जहां संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत है, वहीं यह जिम्मेदारी भी बढ़ाती है कि इन जंगलों और वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जाए।     -लाल सुधाकर सिंह, डीएफओ, इंदौर वनमंडल  

Bandhavgarh Tiger Reserve में बाघों की रहस्यमयी मौतें, 50% मामलों में समान कारण, हाईकोर्ट में सुनवाई

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर की ओर से एक स्टेटस रिपोर्ट जमा की गई. इस रिपोर्ट ने राज्य के वन्यजीव संरक्षण के दावों की पोल खोल दी है. रिपोर्ट के अनुसार, 21 नवंबर 2025 से 2 फरवरी 2026 के बीच रिजर्व और उसके आसपास के इलाकों में कुल 8 बाघों की मृत्यु हुई. रिपोर्ट में कहा गया है कि बाघ अभ्यारण्य के भीतर चारों बाघों की मौत का कारण प्राकृतिक था, जबकि शेष चार बाघों की मौत सामान्य वन क्षेत्र में बिजली के झटके से हुई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सभी बाघों के शव पूरी तरह से सुरक्षित थे. इस रिपोर्ट में बाघों की मौतों को दो हिस्सों में बांटा गया है. इसमें बताया गया है कि टाइगर रिजर्व के अंदर 4 मौतें हुई हैं. यहां हुईं सभी मौतें 'प्राकृतिक' बताई गई हैं. इनमें से 2 बाघ आपसी लड़ाई में मारे गए, एक की बीमारी से मौत हुई और एक कुएं में डूब गया. जबकि 4 मौतें जनरल फॉरेस्ट एरिया में हुईं. रिजर्व के बाहर सामान्य वन क्षेत्र में हुई ये सभी चार मौतें करंट लगने के कारण हुईं. 'संदिग्ध हालात' पर सवाल वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे की ओर से दायर याचिका में राज्य सरकार और वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. याचिका के अनुसार, 2025 में मध्य प्रदेश में 54 बाघों की मौत हुई, जो प्रोजेक्ट टाइगर शुरू होने के बाद से एक साल में सबसे बड़ा आंकड़ा है. आरोप है कि शिकारी बिजली के तारों का खुलेआम इस्तेमाल कर रहे हैं और विभाग का सर्विलांस सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है. याचिकाकर्ता का दावा है कि अधिकारी अक्सर संदिग्ध मौतों को Territorial fight बताकर पल्ला झाड़ लेते है.  बिजली विभाग को चेतावनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि वन विभाग ने बिजली विभाग को बार-बार पत्र लिखे हैं ताकि संवेदनशील इलाकों में बिजली की लाइनों को मजबूत किया जा सके और वाइल्डलाइफ स्टैंडर्ड का पालन हो, ताकि करंट लगने की घटनाओं को रोका जा सके. मध्य प्रदेश में बाघों की स्थिति  कुल बाघ (MP): 785 भारत में कुल बाघ: 3,167 2025 में मौतें: 54 (याचिका के अनुसार) जनवरी 2026 (प्रथम सप्ताह): 6 बाघों की मौत

बांधवगढ़ की बाघिन का राजस्थान में रिश्ता तय, हेलीकॉप्टर से विदाई और मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में शिफ्ट

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की बाघिन का रेस्क्यू सफल रहा. इस बाघिन को राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने की योजना है. फिलहाल बाघिन को ऑब्जरवेशन में रखा गया है. राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार के सामने मध्य प्रदेश से 3 टाइगर की डिमांड रखी थी. राजस्थान को एक ऐसी बाघिन की तलाश है, जो मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में कुनबा बढ़ा सके. एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान जाएगी बाघिन बांधवगढ़ की बाघिन एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान जाएगी. यहां से उसकी दुल्हन की तरह धूमधाम से विदाई होगी. इसकी तैयारी के लिए एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर का ट्रायल लैंडिंग भी हो चुका है. कुछ दिन पहले पेंच टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को इसी तरह एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व शिफ्ट किया गया था. रेस्क्यू के बाद बाघिन को रेडियो कॉलर पहनाया बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया "बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व प्रबंधन ने कक्ष क्रमांक RF-327, के दमना बीट के ताला परिक्षेत्र से एक बाघिन का रेस्क्यू किया है, जिसकी उम्र 3 से 4 वर्ष है. अब बाघिन के हर मूवमेंट पर नजर रहेगी. रेस्क्यू करने के बाद उसके स्वास्थ्य की जांच की गई है और रेडियो कॉलर पहनाया गया." बाघिन को अंडर ऑब्ज़र्वेशन रखने के लिए आगामी कुछ दिनों के लिए मगधी परिक्षेत्र के बहेरहा स्थित बाड़े में सुरक्षित रूप से रखा गया है. योजना के अनुसार सभी तरह की परमिशन मिलने के बाद बाघिन को राजस्थान भेजा जाएगा. मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की शान बनेगी बाघिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में भेजने की योजना है. इसकी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. इसी के तहत इस बाघिन का रेस्क्यू किया गया है. राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व को एक एडल्ट बाघिन चाहिए, जो बाघों का कुनबा बढ़ा सके. ऐसी बाघिन की उम्र 3 से 5 साल तक के बीच होनीचाहिए, जो प्रजनन करने योग्य हो. इस बारे में राजस्थान सरकार ने भारत सरकार के माध्यम से परमिशन लेकर मध्य प्रदेश से 03 टाइगर और महाराष्ट्र से 02 टाइगर मांगे हैं. इसी कड़ी में पेंच टाइगर रिजर्व से राजस्थान जा चुकी है. अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से बाघिन ले जाने की तैयारी है. 

कूनो नेशनल पार्क में चीतों के बीच बाघ की एंट्री, पहली बार कैमरे में कैद हुई तस्वीर

 श्योपुर देश-दुनिया में चीतों के घर के रूप में पहचान बनाने वाले मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में अब टाइगर की भी मौजूदगी है. एक दिन पहले कूनो नेशनल पार्क के टिकटोली गेट क्षेत्र के जंगल में एक बाघ नजर आया, जिसे पहली बार पर्यटकों ने देखा. इससे पहले कूनो में टाइगर की मौजूदगी के संकेत तो मिलते रहे थे, लेकिन यह पहला मौका है, जब पर्यटकों को बाघ का दीदार हुआ. गुरुवार सुबह टिकटोली गेट से निजी फ्लाइंग कैट सफारी के दौरान पर्यटक कूनो भ्रमण पर निकले थे. इसी दौरान जंगल क्षेत्र में एक टाइगर दिखाई दिया. बाघ बैठा हुआ था, लेकिन पर्यटकों की जिप्सी को देखकर चल पड़ा और कुछ ही देर में जंगल के भीतर ओझल हो गया. वन विभाग के अनुसार, यह बाघ राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व का टी-132 हो सकता है, जो करीब 6 महीने पहले रणथंभौर क्षेत्र से बाहर निकला था. इससे पहले भी कूनो में टाइगर के पगमार्क मिलने की पुष्टि हुई थी, लेकिन अब पहली बार उसकी प्रत्यक्ष मौजूदगी सामने आई है. कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर. थिरुकुराल ने आजतक को फोन पर बताया कि कूनो नेशनल पार्क में एक टाइगर की मौजूदगी काफी समय से मानी जा रही थी, लेकिन हाल के दिनों में वह नजर नहीं आया था. संभव है कि वही टाइगर टिकटोली गेट के पास दिखाई दिया हो. कूनो में अब बिग कैट की तीन प्रजातियां दुनियाभर में बिग कैट की 6 प्रजातियां- शेर, बाघ, जगुआर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता मानी जाती हैं. इनमें से अब कूनो नेशनल पार्क में तीन प्रजातियां मौजूद हैं. यहां पहले से ही तेंदुओं की अच्छी संख्या है. बीते साढ़े तीन साल से कूनो चीता प्रोजेक्ट का केंद्र बना हुआ है. अब बाघ की मौजूदगी ने पार्क की जैव विविधता को और समृद्ध कर दिया है.

मुकुंदपुर टाइगर सफारी प्रबंधन पर उठे सवाल, मादा तेंदुआ की मौत से मचा हड़कंप

व्हाइट टाइगर सफारी में जश्न, जू सेंटर में सवाल: दो दिन बाद सामने आई तेंदुआ की मौत मुकुंदपुर टाइगर सफारी प्रबंधन पर उठे सवाल, मादा तेंदुआ की मौत से मचा हड़कंप  उम्र पूरी होने का दावा, लेकिन निगरानी पर सवाल: मुकुंदपुर जू सेंटर में तेंदुआ की मौत सतना  नए साल के आगमन पर जहां मार्तंड सिंह व्हाइट टाइगर सफारी एवं जू सेंटर में पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली और करीब 18 हजार सैलानी विभिन्न प्रजातियों के वन्य जीवों का दीदार करने पहुंचे, वहीं दूसरी ओर जू सेंटर से जुड़ी एक गंभीर और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जू सेंटर में एक मादा तेंदुआ की मौत रहस्यमय परिस्थितियों में हो गई, जिसकी जानकारी प्रबंधन को दो दिन बाद लग पाई। इस घटना के सामने आने के बाद जू प्रबंधन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जू प्रबंधन से जुड़े सूत्रों के अनुसार मादा तेंदुआ की मौत करीब दो दिन पहले ही हो चुकी थी, लेकिन इसकी भनक प्रबंधन को सोमवार को लगी। हैरानी की बात यह है कि जू सेंटर में प्रत्येक जीव और प्राणी की नियमित निगरानी का दावा करने वाला प्रबंधन दो दिनों तक इस घटना से अनजान रहा। यह लापरवाही अपने आप में कई सवाल खड़े करती है, खासकर तब जब जू सेंटर में बड़ी संख्या में पर्यटक मौजूद थे और सुरक्षा एवं देखरेख के पुख्ता इंतजाम होने का दावा किया जाता रहा है। पहले इंकार अब कर रहे स्वीकार एसडीओ  इस पूरे मामले में उप वन मंडल अधिकारी रामेश्वर टेकाम को भी घटना की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी, जो व्यवस्थागत चूक की ओर इशारा करती है। जू सेंटर के अधिकारियों का कहना है कि मृत मादा तेंदुआ की उम्र करीब 20 वर्ष थी, जो तेंदुए की औसत आयु के आसपास मानी जाती है। जानकारी के अनुसार तेंदुआ ने 2 जनवरी की तड़के करीब 3 बजकर 48 मिनट में अंतिम सांस ली। मुकुंदपुर में तैनात पशु चिकित्सक डॉ नितिन गुप्ता का कहना है कि मादा तेंदुआ ने अपनी प्राकृतिक आयु लगभग पूरी कर ली थी और मौत सामान्य प्रतीत होती है। पन्ना से आई थी मादा पन्ना नाम से ही जानते थे सब बताया गया कि मादा तेंदुआ को वर्ष 2020 में पन्ना से मुकुंदपुर लाया गया था और तब से वह जू सेंटर का हिस्सा थी। हालांकि मौत को सामान्य बताया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से प्रबंधन को दो दिन तक इसकी जानकारी नहीं लग सकी और अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, उसने जू सेंटर की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। हालांकि मामला आने के बाद प्रबंधन ने आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर दिया गया। दबाएं रहा मामला  बहुप्रतीक्षित और प्रतिष्ठित मुकुंदपुर टाइगर सफारी, जो प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में अपनी पहचान बना चुका है, वहां इस तरह की लापरवाही सामने आना चिंताजनक है। वन्य जीव संरक्षण और उनकी देखरेख के दावों के बीच यह घटना व्यवस्थाओं की पोल खोलती नजर आ रही है। इसी मामले जू प्रबंधन को मामला दबाकर रखना।

ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2: 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा, बाघों के शिकार पर होगी सख्त कार्रवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान 56 बाघों की मौत के बाद वन विभाग ने शिकार और अवैध गतिविधियों पर सख्ती के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी टाइगर रिजर्व, वन मंडल और वन विकास मंडलों में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ चलाया जाएगा। इस विशेष अभियान के दौरान फील्ड स्तर पर सघन गश्त अनिवार्य होगी और शिकार की किसी भी घटना पर तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा इसको लेकर जारी निर्देश में कहा गया है कि हर वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में एक उपवन मंडल स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को जानकारी भेजेगा। ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप एक माह पांच दिन तक चलेगा। इस दौरान सभी वन मंडल इकाइयों में सघन गश्ती दिन और रात्रि में की जाएगी। सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी एवं अधीनस्थ अधिकारी गश्त करेंगे। साथ ही हफ्ते में दो दिन वन मंडल अधिकारी और उप वन मंडल अधिकारी वहीं एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक गश्त करेंगे। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ठंड के मौसम में शिकार की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं। फंदे और विद्युत करंट का उपयोग कर किए जाने वाले अवैध शिकार में बाघ, तेंदुआ, भालू और अन्य संरक्षित वन्य प्राणी भी फंस जाते हैं। बीते वर्ष बाघों की मौत के मामलों में शिकार की आशंका लगातार सामने आने के बाद विभाग ने विशेष निगरानी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ पूरे प्रदेश में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा। इसमें प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व, 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल शामिल होंगे। अभियान की अवधि में दिन और रात दोनों समय गश्त की जाएगी। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक वन मंडल, टाइगर रिजर्व और वन विकास मंडल में उपवन मंडल स्तर का एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेगा। गश्त के दौरान सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी और अधीनस्थ अधिकारी क्षेत्र में रहेंगे। दो दिन वन मंडल अधिकारी और उपवन मंडल अधिकारी, जबकि एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक द्वारा अनिवार्य निरीक्षण किया जाएगा। अभियान में प्रदेश के 9 डॉग स्क्वाड, 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड और एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड को सक्रिय रूप से लगाया जाएगा। संवेदनशील इलाकों, शिकारी और घुमक्कड़ समुदायों के डेरों, वन सीमा से सटे क्षेत्रों और विद्युत लाइनों के आसपास सघन सर्चिंग की जाएगी। मेटल डिटेक्टर उपकरणों का भी उपयोग किया जाएगा। यदि शिकार के फंदे में कोई वन्य प्राणी फंसा मिलता है, तो तत्काल रेस्क्यू कर उपचार की व्यवस्था और अपराध पंजीबद्ध करने के निर्देश हैं। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2014 से 2025 के बीच फंदे और विद्युत करंट से शिकार के 933 मामले दर्ज हुए। इनमें 39 बाघ, 101 तेंदुए, 36 भालू और 17 राष्ट्रीय पक्षी मोर शामिल हैं। सिर्फ वर्ष 2025 में ही 56 बाघों की मौत दर्ज की गई, जिनमें से 36 मामलों में शिकार की आशंका जताई गई है। अभियान के दौरान रोजाना स्तर पर वन मंडल अधिकारी समीक्षा करेंगे, जबकि साप्ताहिक समीक्षा मुख्य वन संरक्षक और क्षेत्र संचालकों द्वारा की जाएगी। वन विभाग का कहना है कि ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ का उद्देश्य केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि शिकार की घटनाओं को रोकना और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। गश्त को लेकर जारी निर्देश     प्रदेश में वर्तमान में 9 डॉग स्क्वाड हैं। इसका भी प्रयोग इस दौरान किया जाएगा।     गश्त के दौरान संवेदनशील क्षेत्र एवं शिकारी व घुमक्कड़ समुदाय के डेरों की चेकिंग, सर्चिंग कार्यवाही की जाएगी।     सर्चिंग के दौरान निकटतम डॉग स्क्वाड को साथ रखा जाएगा और मेटल डिटेक्टर उपकरण भी उपयोग में लाए जाएंगे।     गश्त के दौरान वन राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्र और बागड़, फेंसिंग में सर्चिंग की जाएगी।     प्रदेश में वर्तमान में 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड एवं एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड काम कर रहा है, इसको भी उपयोग में लाया जाएगा। गश्त के दौरान शिकार के लिए प्रयुक्त फंदे में वन्य प्राणी फंसा पाए जाने की स्थिति में तत्काल निकटतम रेस्क्यू स्क्वाड की सहायता से वन्य प्राणी के उपचार की उचित व्यवस्था की जाएगी। अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा। ऐसे मामले में अपराध में शामिल अपराधी का पता लगाकर तत्काल कार्यवाही की जाएगी।     वन भूमि या वन्य प्राणी क्षेत्र से जाने वाले विद्युत लाइन के नीचे और उसके आसपास गश्ती करने के लिए भी कहा गया है और आवश्यकता अनुसार विद्युत अमले को भी साथ रखने के लिए कहा गया है।     गश्त के दौरान शिकार के लिए लगाए गए फंदे में फैलाया गया विद्युत करंट, वायर वन भूमि या वन्य प्राणी क्षेत्र में पाए जाने पर प्रकरण में मिले साक्ष्य के आधार पर जब्त कर अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा और अपराध में शामिल अपराधी का पता लगाकर कार्यवाही की जाएगी।     गांव और शहर में पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी निगरानी पंजी में भी दर्ज की जाएगी।     ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप के अंतर्गत वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में की जा रही कार्यवाही की समीक्षा रोज वन मंडल अधिकारी करेंगे और हर सप्ताह संबंधित मुख्य वन संरक्षक, क्षेत्र संचालक, क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक के द्वारा भी इसकी समीक्षा की जाएगी। प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व, 11 परियोजना मंडल सभी मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक, क्षेत्रीय क्षेत्र संचालक, संचालक टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक वन विकास निगम, वन मंडल अधिकारी तथा संभागीय प्रबंधक वन विकास निगम को जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल हैं। ऐसे इलाकों में शिकारी और मांस के शौकीन लोगों द्वारा शिकार के जो तरीके अपनाए जाते हैं उससे बाघ, तेंदुए, हाथी, भालू आदि भी शिकार हो जाते हैं। विभागीय पोर्टल में दर्ज शिकार के प्रकरणों का विश्लेषण करने पर पाया गया है कि वर्ष 2014 से 2025 तक फंदे एवं विद्युत लाइन में तार फंसाकर शिकार से संबंधित कुल 933 प्रकरण … Read more

वन्यजीव संरक्षण में बड़ी उपलब्धि: मध्यप्रदेश से राजस्थान तक बाघिन का सुरक्षित स्थानांतरण

पेंच टाइगर रिज़र्व, मध्यप्रदेश से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व, राजस्थान में एक बाघिन का सफल स्थानांतरण भोपाल पेंच टाइगर रिज़र्व, सिवनी मध्यप्रदेश से 3 वर्ष आयु की एक बाघिन का राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व में सफलतापूर्वक स्थानांतरण किया गया है। यह स्थानांतरण भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर के माध्यम से सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ। स्थानांतरण अभियान विगत एक माह से सुव्यवस्थित योजना एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के तहत संचालित किया जा रहा था। पेंच टाइगर रिज़र्व प्रबंधन द्वारा उपयुक्त बाघिन की पहचान कर उसे उन्नत एआई आधारित कैमरा ट्रैप एवं मोशन सेंसर कैमरों के माध्यम से निरंतर ट्रैक एवं मॉनिटर किया गया। इस उद्देश्य से क्षेत्र में लगभग 50 कैमरे स्थापित किए गए थे। अभियान का समन्वय राजस्थान वन विभाग के साथ निकट सहयोग में किया गया। सुगनाराम जाट, मुख्य वन संरक्षक, राजस्थान तथा डॉ. तेजिंदर, पशु चिकित्सक, विगत एक माह से इस अभियान का समन्वय कर रहे थे एवं पिछले 8 दिनों से पेंच टाइगर रिज़र्व में उपस्थित रहकर अभियान की सतत निगरानी कर रहे थे। यह स्थानांतरण कार्य फील्ड डायरेक्टर देवप्रसाद जे. के सहयोग एवं उप संचालक रजनीश कुमार सिंह, पेंच टाइगर रिज़र्व के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। बाघिन का निश्चेतन डॉ. अखिलेश मिश्रा एवं डॉ. प्रशांत द्वारा वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन ट्रस्ट की टीम के साथ तथा डॉ. काजल एवं डॉ. अमोल (वेटरनरी कॉलेज, जबलपुर एवं फील्ड बायोलॉजिस्ट अनिमेष चव्हाण के सहयोग से किया गया। पेंच टाइगर रिजर्व से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व स्थानांतरण के दौरान पेंच टाइगर रिज़र्व से मिशन लीडर सहायक संचालक सुगुरलीन कौर (आईएफएस), वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. मिश्रा, पशु चिकित्सक डॉ. प्रशांत देशमुख (वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन ट्रस्ट) तथा रेंज अधिकारी लोकेश कुमार चौधरी, और दोनों प्रदेशों की टीम के साथ एमआई-17 हेलीकॉप्टर द्वारा बाघिन के सुरक्षित स्थानांतरण हेतु गए, जिससे अंतर-राज्यीय समन्वय एवं संचालन की प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सकी। इस अभियान की सफलता में पेंच टाइगर रिज़र्व के कुरई एवं रुखड़ रेंज के मैदानी अमले का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा। संबंधित कर्मचारियों द्वारा प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक, दिन में दो बार कैमरा ट्रैप की जांच, नियमित गश्त तथा चिन्हित बाघिन की गतिविधियों के संकेतों की सतत खोज कर अथक प्रयास किए गए। यह सफल स्थानांतरण अंतर-राज्यीय समन्वय, भारतीय वायुसेना के सहयोग तथा वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन के माध्यम से बाघ संरक्षण को सुदृढ़ करने और विभिन्न टाइगर लैंडस्केप में आनुवंशिक विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।  

नेशनल पार्क की खास पेशकश: बांधवगढ़ में सीमित समय के लिए फ्री सफारी

उमरिया   बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफारी की इच्छा रखने वालों के लिए गुड न्यूज है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 17 दिसंबर बुधवार से 1 सप्ताह के लिए टाइगर सफारी फ्री रहेगी. नेशनल पार्क के प्रबंधन ने ज्वालामुखी गेट से टाइगर सवारी के लिए प्रवेश निशुल्क कर दिया गया है. हालांकि, इसे लेकर कुछ नियम और शर्तें भी बताई गई हैं. ज्वालामुखी गेट में नो एंट्री फीस बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने पत्र जारी करते हुए बताया, '' पर्यटन व स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए ज्वालामुखी बफर जोन के लिए ये फैसला लिया गया है. पार्क भ्रमण के लिए जिप्सी से प्रवेश पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. ये संपूर्ण जिप्सी के टिकट लेने पर प्रभाव प्रभावित होगा, ये सुविधा 17 दिसंबर से 23 दिसंबर एक सप्ताह तक सुबह और दोपहर पार्क भ्रमण पर प्रभावी रहेगी. हालांकि, जारी पत्र में उन्होंने ये भी कहा है कि जिप्सी और गाइड का शुल्क प्रचलित नियमानुसार देना होगा. ये सुविधा पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दी जाएगी. इसके लिए टिकट काउंटर से संपर्क कर फ्री सेवा हासिल कर सकते हैं. साथ ही ये भी कहा गया है कि ये सुविधा सिर्फ ज्वालामुखी गेट के ऑफलाइन काउंटर से बुकिंग वाहनों के लिए उपलब्ध है. खास है बांधवगढ़ का ज्वालामुखी गेट बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ज्वालामुखी गेट बफर जोन में है और यहां पर मांसाहारी व शाकाहारी हर तरह के वन्य प्राणी देखने को मिलते हैं. इसके अलावा यहां प्रकृति का अद्भुत मनोरम दृश्य भी देखने को मिलता है. अगर आप भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व घूमने जाने वाले हैं, तो इस ऑफर का आनंद ले सकते हैं. बाघों का गढ़ है बांधवगढ़ नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों का गढ़ कहा जाता है, और यहां पर काफी संख्या में बाघ पाए जाते हैं. इसके अलावा अब तो ये हाथियों के भी पर्यटन का बड़ा जोन बन चुका है. पिछले कुछ सालों से काफी संख्या में यहां हाथी भी स्थाई रूप से रह रहे हैं, और पर्यटकों के रोमांच का कारण बन रहे हैं. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में टाइगर्स के अलावा कई तरह के शाकाहारी, मांसाहारी जीवों के साथ प्रकृति का अद्भुत मनोरम दृश्य भी देखने मिलता है. यहां अद्भुत वादियां, जंगल झरने, नदी तालाब और पुरातात्विक महत्व की चीजें भी देखने को मिलती हैं.