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ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2: 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा, बाघों के शिकार पर होगी सख्त कार्रवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान 56 बाघों की मौत के बाद वन विभाग ने शिकार और अवैध गतिविधियों पर सख्ती के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी टाइगर रिजर्व, वन मंडल और वन विकास मंडलों में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ चलाया जाएगा। इस विशेष अभियान के दौरान फील्ड स्तर पर सघन गश्त अनिवार्य होगी और शिकार की किसी भी घटना पर तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा इसको लेकर जारी निर्देश में कहा गया है कि हर वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में एक उपवन मंडल स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को जानकारी भेजेगा। ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप एक माह पांच दिन तक चलेगा। इस दौरान सभी वन मंडल इकाइयों में सघन गश्ती दिन और रात्रि में की जाएगी। सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी एवं अधीनस्थ अधिकारी गश्त करेंगे। साथ ही हफ्ते में दो दिन वन मंडल अधिकारी और उप वन मंडल अधिकारी वहीं एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक गश्त करेंगे। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ठंड के मौसम में शिकार की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं। फंदे और विद्युत करंट का उपयोग कर किए जाने वाले अवैध शिकार में बाघ, तेंदुआ, भालू और अन्य संरक्षित वन्य प्राणी भी फंस जाते हैं। बीते वर्ष बाघों की मौत के मामलों में शिकार की आशंका लगातार सामने आने के बाद विभाग ने विशेष निगरानी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ पूरे प्रदेश में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा। इसमें प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व, 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल शामिल होंगे। अभियान की अवधि में दिन और रात दोनों समय गश्त की जाएगी। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक वन मंडल, टाइगर रिजर्व और वन विकास मंडल में उपवन मंडल स्तर का एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेगा। गश्त के दौरान सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी और अधीनस्थ अधिकारी क्षेत्र में रहेंगे। दो दिन वन मंडल अधिकारी और उपवन मंडल अधिकारी, जबकि एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक द्वारा अनिवार्य निरीक्षण किया जाएगा। अभियान में प्रदेश के 9 डॉग स्क्वाड, 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड और एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड को सक्रिय रूप से लगाया जाएगा। संवेदनशील इलाकों, शिकारी और घुमक्कड़ समुदायों के डेरों, वन सीमा से सटे क्षेत्रों और विद्युत लाइनों के आसपास सघन सर्चिंग की जाएगी। मेटल डिटेक्टर उपकरणों का भी उपयोग किया जाएगा। यदि शिकार के फंदे में कोई वन्य प्राणी फंसा मिलता है, तो तत्काल रेस्क्यू कर उपचार की व्यवस्था और अपराध पंजीबद्ध करने के निर्देश हैं। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2014 से 2025 के बीच फंदे और विद्युत करंट से शिकार के 933 मामले दर्ज हुए। इनमें 39 बाघ, 101 तेंदुए, 36 भालू और 17 राष्ट्रीय पक्षी मोर शामिल हैं। सिर्फ वर्ष 2025 में ही 56 बाघों की मौत दर्ज की गई, जिनमें से 36 मामलों में शिकार की आशंका जताई गई है। अभियान के दौरान रोजाना स्तर पर वन मंडल अधिकारी समीक्षा करेंगे, जबकि साप्ताहिक समीक्षा मुख्य वन संरक्षक और क्षेत्र संचालकों द्वारा की जाएगी। वन विभाग का कहना है कि ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ का उद्देश्य केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि शिकार की घटनाओं को रोकना और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। गश्त को लेकर जारी निर्देश     प्रदेश में वर्तमान में 9 डॉग स्क्वाड हैं। इसका भी प्रयोग इस दौरान किया जाएगा।     गश्त के दौरान संवेदनशील क्षेत्र एवं शिकारी व घुमक्कड़ समुदाय के डेरों की चेकिंग, सर्चिंग कार्यवाही की जाएगी।     सर्चिंग के दौरान निकटतम डॉग स्क्वाड को साथ रखा जाएगा और मेटल डिटेक्टर उपकरण भी उपयोग में लाए जाएंगे।     गश्त के दौरान वन राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्र और बागड़, फेंसिंग में सर्चिंग की जाएगी।     प्रदेश में वर्तमान में 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड एवं एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड काम कर रहा है, इसको भी उपयोग में लाया जाएगा। गश्त के दौरान शिकार के लिए प्रयुक्त फंदे में वन्य प्राणी फंसा पाए जाने की स्थिति में तत्काल निकटतम रेस्क्यू स्क्वाड की सहायता से वन्य प्राणी के उपचार की उचित व्यवस्था की जाएगी। अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा। ऐसे मामले में अपराध में शामिल अपराधी का पता लगाकर तत्काल कार्यवाही की जाएगी।     वन भूमि या वन्य प्राणी क्षेत्र से जाने वाले विद्युत लाइन के नीचे और उसके आसपास गश्ती करने के लिए भी कहा गया है और आवश्यकता अनुसार विद्युत अमले को भी साथ रखने के लिए कहा गया है।     गश्त के दौरान शिकार के लिए लगाए गए फंदे में फैलाया गया विद्युत करंट, वायर वन भूमि या वन्य प्राणी क्षेत्र में पाए जाने पर प्रकरण में मिले साक्ष्य के आधार पर जब्त कर अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा और अपराध में शामिल अपराधी का पता लगाकर कार्यवाही की जाएगी।     गांव और शहर में पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी निगरानी पंजी में भी दर्ज की जाएगी।     ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप के अंतर्गत वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में की जा रही कार्यवाही की समीक्षा रोज वन मंडल अधिकारी करेंगे और हर सप्ताह संबंधित मुख्य वन संरक्षक, क्षेत्र संचालक, क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक के द्वारा भी इसकी समीक्षा की जाएगी। प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व, 11 परियोजना मंडल सभी मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक, क्षेत्रीय क्षेत्र संचालक, संचालक टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक वन विकास निगम, वन मंडल अधिकारी तथा संभागीय प्रबंधक वन विकास निगम को जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल हैं। ऐसे इलाकों में शिकारी और मांस के शौकीन लोगों द्वारा शिकार के जो तरीके अपनाए जाते हैं उससे बाघ, तेंदुए, हाथी, भालू आदि भी शिकार हो जाते हैं। विभागीय पोर्टल में दर्ज शिकार के प्रकरणों का विश्लेषण करने पर पाया गया है कि वर्ष 2014 से 2025 तक फंदे एवं विद्युत लाइन में तार फंसाकर शिकार से संबंधित कुल 933 प्रकरण … Read more

वन्यजीव संरक्षण में बड़ी उपलब्धि: मध्यप्रदेश से राजस्थान तक बाघिन का सुरक्षित स्थानांतरण

पेंच टाइगर रिज़र्व, मध्यप्रदेश से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व, राजस्थान में एक बाघिन का सफल स्थानांतरण भोपाल पेंच टाइगर रिज़र्व, सिवनी मध्यप्रदेश से 3 वर्ष आयु की एक बाघिन का राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व में सफलतापूर्वक स्थानांतरण किया गया है। यह स्थानांतरण भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर के माध्यम से सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ। स्थानांतरण अभियान विगत एक माह से सुव्यवस्थित योजना एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के तहत संचालित किया जा रहा था। पेंच टाइगर रिज़र्व प्रबंधन द्वारा उपयुक्त बाघिन की पहचान कर उसे उन्नत एआई आधारित कैमरा ट्रैप एवं मोशन सेंसर कैमरों के माध्यम से निरंतर ट्रैक एवं मॉनिटर किया गया। इस उद्देश्य से क्षेत्र में लगभग 50 कैमरे स्थापित किए गए थे। अभियान का समन्वय राजस्थान वन विभाग के साथ निकट सहयोग में किया गया। सुगनाराम जाट, मुख्य वन संरक्षक, राजस्थान तथा डॉ. तेजिंदर, पशु चिकित्सक, विगत एक माह से इस अभियान का समन्वय कर रहे थे एवं पिछले 8 दिनों से पेंच टाइगर रिज़र्व में उपस्थित रहकर अभियान की सतत निगरानी कर रहे थे। यह स्थानांतरण कार्य फील्ड डायरेक्टर देवप्रसाद जे. के सहयोग एवं उप संचालक रजनीश कुमार सिंह, पेंच टाइगर रिज़र्व के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। बाघिन का निश्चेतन डॉ. अखिलेश मिश्रा एवं डॉ. प्रशांत द्वारा वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन ट्रस्ट की टीम के साथ तथा डॉ. काजल एवं डॉ. अमोल (वेटरनरी कॉलेज, जबलपुर एवं फील्ड बायोलॉजिस्ट अनिमेष चव्हाण के सहयोग से किया गया। पेंच टाइगर रिजर्व से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व स्थानांतरण के दौरान पेंच टाइगर रिज़र्व से मिशन लीडर सहायक संचालक सुगुरलीन कौर (आईएफएस), वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. मिश्रा, पशु चिकित्सक डॉ. प्रशांत देशमुख (वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन ट्रस्ट) तथा रेंज अधिकारी लोकेश कुमार चौधरी, और दोनों प्रदेशों की टीम के साथ एमआई-17 हेलीकॉप्टर द्वारा बाघिन के सुरक्षित स्थानांतरण हेतु गए, जिससे अंतर-राज्यीय समन्वय एवं संचालन की प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सकी। इस अभियान की सफलता में पेंच टाइगर रिज़र्व के कुरई एवं रुखड़ रेंज के मैदानी अमले का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा। संबंधित कर्मचारियों द्वारा प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक, दिन में दो बार कैमरा ट्रैप की जांच, नियमित गश्त तथा चिन्हित बाघिन की गतिविधियों के संकेतों की सतत खोज कर अथक प्रयास किए गए। यह सफल स्थानांतरण अंतर-राज्यीय समन्वय, भारतीय वायुसेना के सहयोग तथा वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन के माध्यम से बाघ संरक्षण को सुदृढ़ करने और विभिन्न टाइगर लैंडस्केप में आनुवंशिक विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।  

नेशनल पार्क की खास पेशकश: बांधवगढ़ में सीमित समय के लिए फ्री सफारी

उमरिया   बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफारी की इच्छा रखने वालों के लिए गुड न्यूज है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 17 दिसंबर बुधवार से 1 सप्ताह के लिए टाइगर सफारी फ्री रहेगी. नेशनल पार्क के प्रबंधन ने ज्वालामुखी गेट से टाइगर सवारी के लिए प्रवेश निशुल्क कर दिया गया है. हालांकि, इसे लेकर कुछ नियम और शर्तें भी बताई गई हैं. ज्वालामुखी गेट में नो एंट्री फीस बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने पत्र जारी करते हुए बताया, '' पर्यटन व स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए ज्वालामुखी बफर जोन के लिए ये फैसला लिया गया है. पार्क भ्रमण के लिए जिप्सी से प्रवेश पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. ये संपूर्ण जिप्सी के टिकट लेने पर प्रभाव प्रभावित होगा, ये सुविधा 17 दिसंबर से 23 दिसंबर एक सप्ताह तक सुबह और दोपहर पार्क भ्रमण पर प्रभावी रहेगी. हालांकि, जारी पत्र में उन्होंने ये भी कहा है कि जिप्सी और गाइड का शुल्क प्रचलित नियमानुसार देना होगा. ये सुविधा पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दी जाएगी. इसके लिए टिकट काउंटर से संपर्क कर फ्री सेवा हासिल कर सकते हैं. साथ ही ये भी कहा गया है कि ये सुविधा सिर्फ ज्वालामुखी गेट के ऑफलाइन काउंटर से बुकिंग वाहनों के लिए उपलब्ध है. खास है बांधवगढ़ का ज्वालामुखी गेट बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ज्वालामुखी गेट बफर जोन में है और यहां पर मांसाहारी व शाकाहारी हर तरह के वन्य प्राणी देखने को मिलते हैं. इसके अलावा यहां प्रकृति का अद्भुत मनोरम दृश्य भी देखने को मिलता है. अगर आप भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व घूमने जाने वाले हैं, तो इस ऑफर का आनंद ले सकते हैं. बाघों का गढ़ है बांधवगढ़ नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों का गढ़ कहा जाता है, और यहां पर काफी संख्या में बाघ पाए जाते हैं. इसके अलावा अब तो ये हाथियों के भी पर्यटन का बड़ा जोन बन चुका है. पिछले कुछ सालों से काफी संख्या में यहां हाथी भी स्थाई रूप से रह रहे हैं, और पर्यटकों के रोमांच का कारण बन रहे हैं. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में टाइगर्स के अलावा कई तरह के शाकाहारी, मांसाहारी जीवों के साथ प्रकृति का अद्भुत मनोरम दृश्य भी देखने मिलता है. यहां अद्भुत वादियां, जंगल झरने, नदी तालाब और पुरातात्विक महत्व की चीजें भी देखने को मिलती हैं.

अक्तूबर-नवंबर में बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में पर्यटन बढ़ा, सैलानियों की संख्या 13% ऊपर

उमरिया  बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में इस साल का पर्यटन सत्र पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक उत्साहजनक साबित हो रहा है। अक्तूबर और नवंबर 2025 में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उद्यान प्रबंधन के अनुसार इस अवधि में सैलानियों की संख्या में करीब 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो कि संरक्षण और बेहतर प्रबंधन के प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है। बीटीआर क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि वर्ष 2024 के अक्तूबर में कोर क्षेत्र में 13,323 भारतीय और 1,331 विदेशी तथा बफर क्षेत्र में 928 देशी और 44 विदेशी पर्यटक पहुंचे थे। उसी महीने कुल 15,626 सैलानियों ने भ्रमण किया। नवंबर 2024 में आंकड़ों में और वृद्धि दिखी। कोर क्षेत्र में 14,666 भारतीय और 3,013 विदेशी पर्यटक आए, जबकि बफर क्षेत्र में 2,964 देशी और 99 विदेशी सैलानी शामिल हुए। इस प्रकार, अक्तूबर और नवंबर 2024 में कुल 36,368 पर्यटक उद्यान पहुंचे थे, जिनमें 31,881 देशी और 4,487 विदेशी शामिल थे। इस वर्ष पर्यटन ने नया अध्याय लिखा। 2025 के अक्तूबर में कोर क्षेत्र में 14,999 भारतीय और 1,697 विदेशी सैलानी आए, जबकि बफर क्षेत्र में 3,985 देशी और 143 विदेशी पर्यटक पहुंचे। वहीं नवंबर में कोर क्षेत्र में 15,425 भारतीय और 3,366 विदेशी तथा बफर क्षेत्र में 1,553 देशी और 151 विदेशी पर्यटक शामिल हुए। इस वर्ष इसी अवधि में कुल 41,319 पर्यटक बांधवगढ़ आए, जिनमें 36,962 भारतीय और 5,357 विदेशी पर्यटक शामिल रहे। तुलनात्मक रूप से देखें तो 2024 की तुलना में 2025 में 4,951 अधिक पर्यटक पहुंचे। इनमें 4,081 भारतीय और 870 विदेशी नागरिक थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े दर्शाते हैं कि बांधवगढ़ न केवल मध्यप्रदेश बल्कि भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में लगातार अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उद्यान की प्राकृतिक सुंदरता, बाघों की सक्रिय मौजूदगी और बेहतर प्रबंधन ने पर्यटकों को आकर्षित किया है। डॉ. सहाय ने कहा कि यह वृद्धि वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन संवर्धन मॉडल की सफलता को दिखाती है। बांधवगढ़ के जंगलों ने इस वर्ष फिर साबित किया है कि प्रकृति जब संजोई जाती है, तो दुनिया खुद उसे देखने चली आती है।  

मंदिर जाते श्रद्धालु टाइगर के ‘सडन शो’ से हुए रूबरू, पल भर में बढ़ा रोमांच और जोखिम

 सवाई माधोपुर रणथंभौर टाइगर रिजर्व स्थित प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को बुधवार सुबह एक रोमांचक और डराने वाला अनुभव हुआ। मंदिर मार्ग पर अचानक टाइगर के आने से कुछ देर के लिए श्रद्धालुओं की राह थम गई। बुधवार सुबह गणेश धाम से आगे मुख्य सड़क पर एक टाइगर आ गया और करीब 10 मिनट तक सड़क पर स्वतंत्र रूप से घूमता रहा। इससे त्रिनेत्र गणेश मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और वाहनों की लंबी कतारें दोनों तरफ लग गईं। लोग अपने चौपहिया वाहनों में बैठे-बैठे ही टाइगर को देखते रहे और कई श्रद्धालुओं ने उसकी तस्वीरें व वीडियो कैमरे में कैद किए। इस दौरान वन विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं दिखा, जिससे श्रद्धालुओं में चिंता भी बढ़ी। हालांकि थोड़ी देर बाद टाइगर खुद ही सड़क छोड़कर जंगल की ओर लौट गया, जिसके बाद आवाजाही पुनः शुरू हो गई। बुधवार होने के कारण सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु त्रिनेत्र गणेश मंदिर पहुंच रहे थे। वहीं वन विभाग के नियमों के अनुसार बुधवार को जोन नंबर 1 से 5 तक साप्ताहिक अवकाश होता है, जिसके चलते पर्यटकों की आवाजाही नहीं थी। जानकारी के अनुसार, यह टाइगर बाघिन सुल्ताना का मेल शावक बताया जा रहा है, जो हाल ही में गणेश धाम से दुर्ग क्षेत्र की टेरिटरी में सक्रिय रूप से विचरण करता दिख रहा है। आज भी उसके अचानक सड़क पर आ जाने से कुछ देर के लिए यातायात बाधित रहा।

पेंच में बना दुनिया का सबसे बड़ा बाघ स्टैच्यू, मोगली लैंड को पीछे छोड़ा मध्य प्रदेश में अनावरण: पेंच टाइगर रिजर्व में दुनिया की हाईएस्ट टाइगर प्रतिमा

सिवनी  मध्य प्रदेश के सिवनी पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन में कबाड़ के जुगाड़ से दुनिया का सबसे बड़ा बाघ का स्टेच्यू बनाया है. जिसका अनावरण बुधवार को मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने किया है. पेंच टाइगर रिजर्व का दावा है कि अब तक सबसे बड़ी बाघ की मूर्ति अमेरिका के जॉर्जिया प्रांत में थी लेकिन अब उससे बड़ी प्रतिमा कबाड़ के जुगाड़ से पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन के द्वारा तैयार करवाई गई है. अमेरिका को पछाड़कर बनाया सबसे बड़ा बाघ का स्टेच्यू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिवनी में आयोजित कार्यक्रम में सिंगल क्लिक से पेंच टाइगर रिजर्व के खवासा पर्यटन गेट पर लोहे के कबाड़ से बनाई गई 40 फीट लंबी, 8 फीट चौड़ी और 17.5 फीट ऊंची बाघ की मूर्ति का अनावरण किया. पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार ने बताया कि ''इंटरनेट में उपलब्ध वर्ल्ड रिकार्ड एकेडमी के अनुसार दुनिया में सबसे बड़ी बाघ की मूर्ति अब तक अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में है, जो 8 फिट ऊंची और 14 फिट लंबी है. जबकि इस लिहाज से अब सबसे बड़ी आकृति का तमगा हमारे पास है.'' मिशन लाइफ के तीन सूत्रों पर बनाई गई आकृति पेंच टाइगर रिजर्व के उपसंचालक रजनीश कुमार ने बताया कि, ''मिशन लाइफ के अंतर्गत पीएम द्वारा तीन आर (3R) सूत्रों, रिड्यूस (Reduce), रियूस (Ruse) एवं रिसाईकल (Recycle) के भावना के अंतर्गत पेंच टाइगर रिजर्व में लोहे के स्क्रैप मटेरियल से दुनिया की सबसे बड़ी बाघ प्रतिमा का निर्माण किया गया है. जनवरी में लोहे के अनुपयोगी सामग्रियों जैसे पुरानी साइकिल, पाइप, जंग लगी लोहे की चादरें जैसी कई सामग्रियों से प्रतिमा का निर्माण प्रारम्भ किया गया था. मेक इन इंडिया के लोगों से मिली थी प्रेरणा पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि, ''प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया का प्रतीक चिन्ह एक शेर को बनाया था और वह सिंह भी लोहे के कबाड़ से बना डिजाइन था. उसी से प्रेरणा लेकर लोहे के स्‍क्रैप मटेरियल के इस बाघ की कलाकृति बनाने का प्लान किया गया था.'' सामूहिक प्रयासों की मिसाल है मूर्ति पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन का कहना है कि, जो कभी कबाड़ था, आज वही 40 फीट का बल, 17.5 फीट की गरिमा और 8 फीट के गर्व के रूप में खड़ा है. खवासा गेट पर स्थानीय कलाकारों के साथ ऋषभ कश्यप के नेतृत्व में और वनकर्मियों के सहयोग से तैयार, कबाड़ से निर्मित विशाल बाघ मात्र एक मूर्ति नहीं, यह सामूहिक प्रयास की शक्ति का प्रतीक है. जिस प्रकार लोहे के छोटे-छोटे टुकड़ों ने मिलकर इस विशाल बाघ को आकार दिया, उसी प्रकार स्थानीय समुदायों, वन विभाग के कर्मचारियों, अधिकारियों और नागरिकों के छोटे-छोटे प्रयास मिलकर ही संरक्षण की महान कहानी रचते हैं. 12 नवम्बर को मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अनावरित यह अद्भुत सृजन हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के लिए सच्चे मन से उठाया गया एक छोटा कदम भी आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी विरासत बन सकता है.

टाइगर स्ट्राइक फोर्स के सरोठिया को global अवॉर्ड, मध्यप्रदेश ने बढ़ाया देश का मान

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश के  सरोठिया को मिला अंतर्राष्ट्रीय अवॉर्ड उत्कृष्ट कार्य के लिये यूनाइटेड नेशन ने किया पुरस्कृत भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर वन विभाग द्वारा वन, वन्य-जीव एवं जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नये आयाम स्थापित किये जा रहे हैं। वन विभाग के अंतर्गत गठित स्टेट टाइगर फोर्स मध्यप्रदेश के उप वन संरक्षक (भावसे)  रितेश सरोठिया को वन एवं वन्य-जीव अपराध की रोकथाम के लिये राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने के लिये यूनाइटेड नेशन द्वारा 'द एशिया एनवायरमेंटल इन्फोर्समेंट रिकगनिशन ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड 2024-25 प्रदान किया गया है। यह अवॉर्ड यूएनईपी द्वारा 17 अक्टूबर को बैंकाक (थाईलेंड) में हुए वर्चुअल समारोह में दिया गया। यूनाइटेड नेशन द्वारा उक्त अवॉर्ड उन व्यक्तियों, सरकारी संस्थाओं को प्रदान किया जाता है जो देश से सीमापार अपराध अन्वेषण में राष्ट्रीय कानूनों के प्रवर्तन में उत्कृष्ट नेतृत्व का प्रदर्शन करते हैं। इसमें वन्य-जीव और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, खनिजों और रेत का अवैध व्यापार परिवहन, अपशिष्ट रसायनों, कीटनाशक का अवैध व्यापार, ओजोन क्षयकारी पदार्थ और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन के अवैध व्यापार की रोकथाम के लिये दिया जाता है। अवॉर्ड चयन के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्तर की ज्यूरी, जिसमें प्रतिष्ठित संस्थाओं में यूएनईपी, इंटरपोल, यूएनओडीसी, वर्ल्ड बैंक, एसआईटीईएस और यूएनडीपी के प्रतिनिधि द्वारा गहन विचार-विमर्श के बाद दिया जाता है। इस वर्ष के अवॉर्ड में वन्य-जीवों के अवैध व्यापार पर प्रभावी रूप से नियंत्रण के लिये उत्कृष्ट कार्य करने वाले भारत चीन, इंडोनेशिया और सिंगापुर की कुल 7 कानून प्रवर्तन संस्था/अधिकारियों को विभिन्न श्रेणी में सम्मानित किया गया है। मध्यप्रदेश के स्टेट टाइगर फोर्स के प्रभारी  सरोठिया ने अंतर्राष्ट्रीय वन्य-जीव संगठित गिरोहों, जिनका नेटवर्क भारत, चीन, नेपाल, भूटान और म्यांमार में फैला है के विरुद्ध लगातार कार्यवाही की। उन्होंने कई कानून प्रवर्तन संस्थाओं से समन्वय स्थापित कर वन अपराधों में लिप्त सरगनाओं को गिरफ्तार किया।  सरोठिया ने सरगनाओं के विरुद्ध दर्ज प्रकरण का वैज्ञानिक अन्वेषण कर उन्हें सजा दिलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।  सरोठिया को वन, वन्य-जीव कानून प्रवर्तन में अहम भूमिका निभाने के लिये सम्मानित किया गया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन बल प्रमुख एवं वन संरक्षक वन्य-जीव के सतत मार्गदर्शन में कार्य करते हुए मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर फोर्स द्वारा  सरोठिया के नेतृत्व में विगत कुछ वर्षों में वन एवं वन्य-जीव अपराधों में लिप्त राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश कर लगभग 1500 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस इकाई द्वारा किये गये वन्य-प्राणी संरक्षण कार्य की सराहना न केवल प्रदेश, देश बल्कि देश के बाहर भी की गयी है। इंटरपोल द्वारा 4 बार मध्यप्रदेश एसटीएफ की प्रशंसा की गयी। इससे पूर्व भी  सरोठिया को 3 बार अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।  

बाघ ने ली किसान की जान, दहशत के साए में बेतिया के गाँव, सुरक्षा बढ़ाई गई

बेतिया बेतिया से बड़ी खबर है, जहां मंगुराहा वन क्षेत्र के खेखरिया टोला गांव में बाघ के हमले में एक किसान की मौत हो गई। मृतक की पहचान 61 वर्षीय किशुन महतो के रूप में हुई है। वे बुधवार शाम अपने मवेशियों को खेत में चरा रहे थे। इसी दौरान पंडई नदी के पास अचानक बाघ ने उन पर हमला कर दिया और घसीटते हुए खेत की ओर ले गया। ग्रामीणों ने काफी खोजबीन की, लेकिन शव नहीं मिला। इसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई। देर शाम वनकर्मियों ने शव को जंगल से बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए बेतिया जीएमसीएच भेज दिया। घटना के बाद गांव में भय और दहशत का माहौल है। ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ रातभर रतजगा कर अपने गांव की सुरक्षा कर रहे हैं। मृतक की पत्नी श्रीदेवी ने बताया कि उनके पति रोज की तरह मवेशी लेकर खेत गए थे और घर लौटते समय बाघ ने हमला कर दिया। वन विभाग की टीम बाघ के पगमार्क (पदचिह्न) के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रैक कर रही है। विभाग ने आशंका जताई है कि बाघ इंसानी खून का स्वाद चख चुका है, जिससे आगे भी खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जंगल से बाघ बार-बार गांव की ओर भटक कर आ रहे हैं, और कभी इंसानों तो कभी मवेशियों को शिकार बना रहे हैं। वन विभाग ने लोगों को हिदायत दी है कि वे खेतों और जंगल के आसपास सतर्क रहें तथा अकेले या मवेशियों के साथ खेतों में न जाएं, खासकर गन्ने के खेतों में सावधानी बरतें।  

मध्यप्रदेश के बाघ अब राजस्थान, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जंगलों में रौनक बढ़ाएंगे

भोपाल  टाइगर स्टेट का गौरव हासिल कर चुके मध्यप्रदेश के बाघ अब पड़ोसी राज्यों के जंगलों की शोभा बढ़ाएंगे। बांधवगढ़, कान्हा और पन्ना टाइगर रिजर्व से बाघों का ट्रांसलोकेशन राजस्थान, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में किया जाएगा। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के निर्देश पर इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। खर्च संबंधित राज्य उठाएंगे। कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) के क्षेत्र संचालक रविंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि कान्हा से से दो बाघों का ट्रांसलोकेशन होना है। अन्य नेशनल पार्क से भी बाघ भेजे जाएंगे। इसकी तैयारियां शुरू की जा रही है। कान्हा के बाघ कहां भेजे जाएंगे यह आने वाले एक दो दिन में तय हो जाएगा। अक्टूबर में होगा प्रशिक्षण बाघों के नए ठिकाने वाले टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को अक्टूबर में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें बाघों की देखभाल, ट्रैकिंग और संरक्षण की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद बाघों को सीसीटीवी युक्त विशेष ट्रक से भेजा जाएगा। ट्रक के साथ पशु चिकित्सक और अन्य विशेषज्ञ भी रहेंगे। रास्ते में भोजन, पानी और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था रहेगी। छत्तीसगढ़ को सबसे ज्यादा बाघ मप्र से राजस्थान को 3 छत्तीसगढ़ को 4 और ओडिशा को 3 बाघ भेजे जाएंगे। इनमें नर-मादा की जोड़ियां भी शामिल हैं। वर्तमान में मप्र में 785 बाघ हैं। संख्या के लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा टाइगर स्टेट है। बाघों की बढ़ती संख्या से टेरेटरी को लेकर आपसी संघर्ष बढ़ रहे हैं। मप्र के अलग-अलग टाइगर रिजर्व से कम घनत्व वाले क्षेत्रों में बाघों को भेजा जाएगा। कान्हा से ट्रांसलोकेशन के लिए दो बाघ तैयार रखने को कहा गया है। वे कहां जाएंगे, यह दो दिन बाद तय होगा।- रविंद्रमणि त्रिपाठी, क्षेत्र संचालक, कान्हा टाइगर रिजर्व

मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा, नौरादेही से बांधवगढ़ तक बनेगा टाइगर कॉरिडोर

सागर  वन्यजीव संरक्षण के लिए तरह-तरह के संरक्षित वन स्थापित किए जाते हैं. जिनमें टाइगर रिजर्व, वाइल्डलाइफ सेंचुरी और नेशनल पार्क जैसे संरक्षित वन क्षेत्र की स्थापना की जाती है. लेकिन वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर एक नये आयाम के तौर पर तेजी से उभरा है. वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि वन्य प्राणियों के संतति विकास के लिए जरूरी है कि उन्हें लंबे समय तक संरक्षित वन क्षेत्र में न रखा जाए. किसी भी प्राकृतिक क्षेत्र को लंबे समय तक बांधकर नहीं रखा जा सकता है. क्योंकि इससे कई तरह के नुकसान होते हैं. ऐसे में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का नया कॉन्सेप्ट सामने आया है. इसके तहत संरक्षित वन क्षेत्र को आपस में इस तरह से जोड़ा जाता है कि वन्य प्राणी एक दूसरे संरक्षित वन में आसानी से आ जा सकते हैं. मध्य प्रदेश में पिछले 2 सालों के भीतर 2 नए टाइगर रिजर्व अस्तित्व में आने से वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बनने की संभावना बढ़ी है. दरअसल नौरादेही, रातापानी को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद 4 टाइगर रिजर्व को जोड़कर वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर की संभावना है. जिसमें रातापानी, नौरादेही, पन्ना और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व शामिल हैं. संरक्षित वन क्षेत्र की समस्याएं वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वन क्षेत्र को ज्यादा समय तक बांध के रखने से उसमें रहने वाले वन्यजीवों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. साथ ही साथ वन्य जीव संरक्षण के उद्देश्य भी फलीभूत नहीं हो पाते हैं. क्योंकि लंबे समय तक एक ही तरह के माहौल और वातावरण में रहने के कारण वन्य जीवों की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है. वन्य जीवों के बीच में जेनेटिक फ्लो रुकता है, जिससे वन्य जीव की संतति विकास पर असर पड़ता है. इसके साथ ही वन्य जीवों की संख्या बढ़ने के कारण पॉपुलेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आने के साथ-साथ वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष बढ़ता है.  वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर एक नया आयाम संरक्षित वन क्षेत्र की इन समस्याओं के चलते वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का तेजी से नाम सामने आया है. विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षित वन क्षेत्र को इस तरह है आपस में जोड़ा जाए कि उनमें रहने वाले वन्य जीव एक दूसरे संरक्षित वन क्षेत्र में आसानी से विचरण कर सके. एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र में जाने से जहां वन्य क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ रही संख्या को नियंत्रित किया जा सकेगा, वहीं वन जीवन की संतति विकास में मदद मिलने के साथ-साथ एक संरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीवों के बीच होने वाले आपकी संघर्ष को रोकने में मदद मिलती है. जानकारों की मानें तो वाइल्ड लाइफ लाइफ कॉरिडोर से इन समस्याओं पर काबू करने में मदद मिलती है. अंतः प्रजनन अवसाद दूर करता है कॉरिडोर  कोई भी जीव लगातार निकट संबंधियों से प्रजनन करके अपनी संतति का विकास करता है तो भावी पीढ़ी पर कई तरह के दुष्परिणाम को देखने मिलते हैं. उनके जीवन जीने की क्षमता पर असर पड़ता है. उनसे जो संतति पैदा होती है, वह कमजोर होती है. इसके अलावा प्रजनन क्षमता भी गिरती है. लेकिन अगर जीव एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र में विचरण करते हैं, तो अपने ही तरह के दूसरे अनुवांशिक गुणों वाले जीवों से प्रजनन करके संतति विकास करते हैं. कॉरिडोर जीन प्रवाह में करता है मदद  अनुवांशिकी में जेनेटिक फ्लो यानि जीन प्रवाह का विशेष महत्व है. कोई भी जीव जब एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करता है तो भले ही एक ही संतति के जीव हो लेकिन उनकी आनुवंशिकी में अंतर पाया जाता है. ऐसे में जब वन्य जीव दूसरे वन क्षेत्र में जाकर प्रजनन करते हैं, तो उनकी संतति विविधता लिए होती है और नई पीढ़ी अच्छी और तंदुरुस्त नस्ल की होती है. वन्यजीव संघर्ष पर काबू  संरक्षित वन क्षेत्र में लगातार वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के कारण पॉपुलेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आती है और वन्यजीवों के बीच में आपसी संघर्ष बढ़ता है. ऐसी स्थिति में वाइल्डलाइफ कॉरिडोर काफी मददगार साबित होता है. क्योंकि किसी संरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या बढ़ती है तो उन्हें दूसरे संरक्षित क्षेत्र में वहां विस्थापित किया जा सकता है. जहां उनके लिए जीवन यापन की पर्याप्त व्यवस्था हो. 'कॉरिडोर बनाने की कोशिश में लगा है वन विभाग' नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए ए अंसारी कहते हैं कि "ये वन्य जीव संरक्षण का नया आयाम है. वाइल्डलाइफ कॉरिडोर से वन्यजीवों को कई तरह के फायदे हैं और उनके संरक्षण में काफी मदद मिलती है. क्योंकि किसी संरक्षित क्षेत्र को अनंत काल तक बांधकर नहीं रख सकते हैं. जब जानवर एक संरक्षित क्षेत्र से दूसरे संरक्षित क्षेत्र में आसानी से बिना बाधा के आ जा सकते हैं तो पॉपुलेशन मैनेजमेंट में आसानी होती है और जेनेटिक फ्लो में मदद मिलती है. इसके अलावा इनब्रीडिंग डिप्रेशन कम होता है. अच्छे और तंदुरुस्त नस्ल के जानवर हमें मिलते हैं. सबसे बड़ा फायदा ये है कि वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष कम होता है. यदि हमारे संरक्षित वन क्षेत्र आपस में जुड़े रहेंगे तो जानवर इधर से उधर प्राकृतिक तरीके से आ जा सकेंगे. लेकिन किसी संरक्षित वन क्षेत्र को ज्यादा समय तक बंद रखा जाएगा तो एक समय के बाद डिप्रेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आएगी." उन्होंने आगे कहा, "नौरादेही टाइगर रिजर्व के कारण संभावित कॉरिडोर अस्तित्व में आया है. नौरादेही के एक तरफ रातापानी, दूसरी तरफ पन्ना टाइगर रिजर्व हैं. इसके अलावा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भी कनेक्टिविटी है. वन विभाग इसको आईडेंटिफाई करने में लगा हुआ है. जब यह अस्तित्व में आ जाएगा तो वन्यजीव प्रबंधन आसान हो जाएगा."