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एशिया कप 2025: आकाश चोपड़ा की भविष्यवाणी – जानिए कौन करेगा ट्रॉफी अपने नाम

नई दिल्ली एशिया कप 2025 का आगाज 9 सितंबर से यूएई में होने जा रहा है। मेजबान यूएई और भारत के अलावा इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, ओमान और हॉन्ग-कॉन्ग की टीमें हिस्सा ले रही हैं। टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले क्रिकेट पंडित तरह-तरह की भविष्यवाणियां कर रहे हैं। इस कड़ी में पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज और मौजूदा एक्सपर्ट आकाश चोपड़ा ने टूर्नामेंट के विजेता उप-विजेता से लेकर हाईएस्ट रन स्कोरर और सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी को लेकर बड़ी भविष्यवाणी कर दी है। एशिया कप 2025 में इन 8 टीमों को 4-4 के ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप-ए में भारत-पाकिस्तान के साथ यूएई और ओमान है। वहीं ग्रुप-बी में श्रीलंका-अफगानिस्तान के साथ बांग्लादेश और हॉन्ग-कॉन्ग की टीमें हैं। आकाश चोपड़ा के अनुसार इस बार भी एशिया कप का खिताब टीम इंडिया ही जीतेगी, मगर फाइनल में श्रीलंका और पाकिस्तान जैसी बड़ी टीमें नहीं होगी, बल्कि भारत का खिताबी मुकाबले के लिए सामने अफगानिस्तान से होगा। अफगानिस्तान ने पिछले कुछ मल्टी नेशनल टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है। आकाश चोपड़ा का मानना है कि सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहेंगे, वहीं सबसे ज्यादा विकेट वरुण चक्रवर्ती चटकाएंगे। रही बात प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट की तो इसके लिए भी उन्होंने एक भारतीय खिलाड़ी चुना है। यह खिलाड़ी और कोई नहीं बल्कि स्टार हरफनमौला हार्दिक पांड्या है। बता दें, आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2026 को देखते हुए एशिया कप 2025 टी20 फॉर्मेट में खेला जा रहा है। यह मात्र तीसरा मौका है जब एशिया कप इस फॉर्मेट में खेला जाएगा। 2016 में पहली बार जब एशिया कप 20-20 ओवर का हुआ था तो एमएस धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया चैंपियन बनी थी, वहीं दूसरी बार 2022 में श्रीलंका ने खिताब उठाया था। एशिया कप 2025 के लिए भारतीय स्क्वॉड- सूर्यकुमार यादव (कप्तान), शुभमन गिल (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव, संजू सैमसन (विकेटकीपर), हर्षित राणा और रिंकू सिंह। स्टैंडबाय खिलाड़ी: यशस्वी जयसवाल, प्रसिद्ध कृष्णा, वॉशिंगटन सुंदर, रियान पराग, ध्रुव जुरेल।  

आपातकाल की चेतावनी! नायर अस्पताल के डीन को ईमेल के जरिए धमकी

मुंबई  रविवार को मुंबई शहर के नायर अस्पताल में बम धमाके की नई धमकी मिलने से पुलिस अलर्ट पर रही। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शनिवार देर रात लगभग 11 बजे अस्पताल के डीन को एक ईमेल मिला, जिसमें अस्पताल परिसर को उड़ाने की बात कही गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (BDDS) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया। हालांकि जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली और धमकी को झूठा घोषित कर दिया गया। यह घटना ठीक दो दिन बाद सामने आई है, जब एक फोन कॉल में दावा किया गया था कि 34 “ह्यूमन बम” 400 किलो आरडीएक्स के साथ मुंबई में अलग-अलग वाहनों में लगाए गए हैं। कॉल करने वाले ने खुद को लश्कर-ए-जिहादी संगठन का सदस्य बताया था। पुलिस ने उस समय भी व्यापक तलाशी ली थी, लेकिन धमकी झूठी साबित हुई। गणेश विसर्जन के दौरान सुरक्षा को देखते हुए मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी थी। सिर्फ मुंबई में ही 21,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। हाल के महीनों में मुंबई को लगातार बम धमाकों की झूठी धमकियां मिल रही हैं। पिछले हफ्ते ठाणे के कलवा रेलवे स्टेशन को उड़ाने की धमकी देने वाले 43 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। अगस्त में गिरगांव स्थित इस्कॉन मंदिर को ईमेल के जरिए धमकी मिली, जो फर्जी निकली। जुलाई में छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 को लेकर भी ऐसी धमकी दी गई थी। पुलिस ने बताया कि नायर अस्पताल से जुड़ी धमकी पर भी मामला दर्ज कर जांच जारी है।  

भारी भीड़ और बिजली का खतरा: मुंबई में गणपति विसर्जन के दौरान हादसा, 5 अस्पताल में भर्ती

मुंबई  महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गणपति विसर्जन जुलूस के दौरान रविवार को एक दुखद घटना घटी। रास्ते में लटक रहा बिजली का तार मूर्ति को टच कर गया, जिससे 6 भक्त घायल हो गए और उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल लाए जाने पर एक व्यक्ति को डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया, जिसकी पहचान 36 वर्षीय बिनु सुकुमारन कुमरन के तौर पर हुई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अनुसार, बाकी पांच घायल भक्तों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह घटना साकीनाका इलाके में खैरानी रोड पर सुबह करीब 10.45 बजे हुई, जब बिजली का एक तारगणपति की मूर्ति को छू गया। अधिकारी ने बताया कि 5 घायलों (सुभांशु कामत, तुषार गुप्ता, धर्मराज गुप्ता, करण कनौजिया और अनुष गुप्ता) को पैरामाउंट अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी हालत स्थिर बताई गई है। राज्य में बड़े पैमाने पर बप्पा को विदाई देने के दौरान कुछ जगहों से हादसों की भी खबर आई। पालघर में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान तीन लोग बह गए थे। हालांकि, उन्हें बचा लिया गया। विसर्जन शोभायात्रा के दौरान भारतीय तटरक्षक बल के एक हेलीकॉप्टर और मुंबई पुलिस के ड्रोन ने हवाई निगरानी बनाए रखी। गणेश मंडलों की प्रतिमाओं का विसर्जन लालबागचा राजा सहित प्रमुख सार्वजनिक गणेश मंडलों की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाए जाने की शोभायात्राएं अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शनिवार को शुरू हुईं और रात भर जारी रहीं। ये प्रतिमाएं रविवार तड़के समुद्र तट पर पहुंची जिसके बाद विसर्जन संबंधी प्रक्रिया प्रारंभ हुई। लालबागचा राजा सहित सार्वजनिक मंडलों की कम से कम आधा दर्जन गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन गिरगांव चौपाटी पर किया जा रहा है। इसके पूरा होने में कुछ समय लगने की संभावना है। लालबागचा राजा की मूर्ति को एक विशेष रूप से निर्मित मंच पर ले जाने के प्रयास जारी हैं और फिर उसे विसर्जन के लिए गहरे समुद्र में ले जाया जाएगा।  

यूक्रेन की राजधानी पर रूस का भीषण हमला, सरकारी बिल्डिंग्स ध्वस्त

यूक्रेन  युद्धविराम के लिए चल रहे प्रयासों के बीच रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक रूस ने सैकड़ों ड्रोन अटैक किए हैं। हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए। यूक्रेनी अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। कीव नगर प्रशासन के प्रमुख तैमूर तकाचेंको ने बताया कि मृतकों में एक साल का बच्चा भी शामिल है। उसका शव बचावकर्मियों ने मलबे से निकाला। वहीं रूस के ड्रोन अटैक में कीव की एक सरकारी इमारत में भी आग लग गई। कीव के मेयर विटालि क्लिट्स्को के अनुसार, रूसी ड्रोन का मलबा स्वियातोशिन्स्की जिले और डार्नित्स्की जिले में एक आवासीय इमारत पर गिरा। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को खत्म करने के लिए कई प्रयास कर चुके हैं। हालांकि अब तक उन्हें कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई है। बीते दिनों राष्ट्रपति पुतिन ने अलास्का में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इसके बाद ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी बातचीत की। हालांकि रूस और यूक्रेन दोनों ही अपने शर्तों पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं। एक दिन पहले ही यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि सितंबर के पहले छह दिनों में ही रूस ने 1300 से ज्यादा ड्रोन अटैक किए हैं। इसके अलावा 900 गाइडेड हवाई बम और 50 से ज्यादा मिसाइलें दागी गई हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध थमने की बजाय जोर पकड़ रहा है।  

संसद के सामने विरोध का बवंडर: ब्रिटेन में भारी प्रदर्शन, 400 से ज्यादा लोग हिरासत में

ब्रिटेन  ब्रिटेन की संसद के बाहर बड़ी संख्या में लोगों ने फिलिस्तीन एक्शन समूह पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 400 से ज्यादा लोगों गिरफ्तार कर लिया। ब्रिटेन की सरकार ने फिलिस्तीन एक्शन समूह को आतंकवादी संगठन घोषित किया है और इसी के विरोध में प्रदर्शनकारी संसद के बाद इकठ्ठा हुए थे। इन लोगों ने जमकर नारेबाजी भी की। विरोध प्रदर्शन का आयोजन करने वाले समूह डिफेंड अवर ज्यूरीज ने कहा कि लंदन में प्रदर्शन में 1500 लोग शामिल हुए। उन्होंने ‘मैं नरसंहार का विरोध करता हूं, मैं फिलिस्तीनी कार्रवाई का समर्थन करता हूं’ जैसे नारे लिखे हुए पोस्टर लिए हुए थे। कुछ ही मिनटों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया, जबकि राहगीर ‘शर्म करो’ और ‘मेट पुलिस, एक पक्ष चुनो, न्याय या नरसंहार’ के नारे लगा रहे थे। किन धाराओं में हुई गिरफ्तारी विरोध प्रदर्शन शुरू होने के 8 घंटे बाद पुलिस ने कहा कि उसने 425 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें से 25 से अधिक को अधिकारियों पर हमला करने या सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन के लिए और बाकी को आतंकवाद अधिनियम के तहत अरेस्ट किया गया। इस बीच, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने शनिवार को सभी स्तरों के मंत्रिस्तरीय पदों में बड़े फेरबदल किया। इसके तहत महिला सांसदों को मंत्रिमंडल के सबसे सीनियर पदों पर नियुक्त किया है। पाकिस्तानी मूल की शबाना महमूद की गृह मंत्री के पद पर पदोन्नति हुई। गृह कार्यालय की पूर्व अधिकारी यवेट कूपर को विदेश मंत्री नियुक्त किया गया। चांसलर रेचल रीव्स के साथ-साथ शीर्ष तीन सरकारी पदों का नेतृत्व पहली बार महिलाओं के हाथ में होगा।  

आपदा पीड़ितों के लिए राहत सामग्री हुई रवाना, मनोहर लाल ने किया शुभारंभ

पंजाब  पंजाब में आई भीषण बाढ़ ने जन-जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रदेश के 23 जिलों के सैकड़ों गांव पानी में डूबे हुए हैं। खासकर फिरोजपुर, तरनतारन, मोगा, गुरदासपुर और जालंधर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। खेत-खलिहान, घर और सड़कें पानी में डूबने से लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। इस त्रासदी की घड़ी में केंद्र सरकार पूरी संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ पंजाब सरकार और बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है। इसी क्रम में रविवार को केंद्रीय शहरी विकास, आवास एवं ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सोनीपत भाजपा कार्यालय से राहत सामग्री से भरे ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन ट्रकों में कपड़े, खाद्य सामग्री, पानी की बोतलें, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान शामिल है, जिन्हें सीधे बाढ़ प्रभावित जिलों में भेजा जाएगा। मनोहर लाल ने कहा कि संकट की इस घड़ी में हरियाणा के लोग पंजाब के साथ खड़े हैं। भाजपा संगठन और कार्यकर्ता लगातार प्रभावित गांवों में पहुंचकर मदद पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनका उत्साह बढ़ाया और सहयोग जारी रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर सोनीपत के मेयर राजीव जैन, विधायक निखिल मदान, राई से विधायक कृष्णा गहलोत सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने मिलकर राहत सामग्री चढ़ाने और उसके वितरण की तैयारी में हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हमेशा प्राकृतिक आपदाओं में देशवासियों की चिंता की है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से पंजाब के प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत मिलेगी और हालात सामान्य होंगे।

भयावह बाढ़ पंजाब में: 13,000 करोड़ से अधिक का आर्थिक और मानविक संकट

पंजाब पंजाब में बाढ़ ने तबाही मचा दी है। राज्य के 23 जिलों के 1960 गांव बाढ़ की मार झेल रहे हैं, जहां 1.74 लाख हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई हैं और 46 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, लाखों लोगों के घर और सामान का नुकसान हुआ है। पंजाब सरकार के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, राज्य को बाढ़ से अब तक 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने शनिवार को चंडीगढ़ में केंद्रीय टीम के सदस्यों के साथ बैठक में यह आंकड़े साझा करते हुए राज्य के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की। केंद्रीय टीम को बताया गया कि किसानों के पशुधन का भी काफी नुकसान हुआ है। लगभग एक दर्जन जिलों की सड़कें, पुल, बिजली ट्रांसफार्मर, स्कूल, स्वास्थ्य संस्थान और कई अन्य बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान गुरदासपुर और अमृतसर में हुआ है। अधिकारियों ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के मुआवजा नियमों में संशोधन की मांग भी की, ताकि पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जा सके। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल क्षति के लिए 6800 रुपये प्रति एकड़ के बजाय 50 हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जाने चाहिए। जनहानि के लिए 4 लाख रुपये के बजाय 8 लाख रुपये दिए जाने चाहिए। इसके अलावा, विकलांगता के लिए 1.5 लाख रुपये और दुधारू पशु की मौत पर 75 हजार रुपये दिए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की छतें गिर गई हैं, उनके मुआवजे में भी वृद्धि की जानी चाहिए। हालांकि, पंजाब सरकार के विभिन्न विभाग बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं और अंतिम रिपोर्ट बाढ़ खत्म होने के बाद ही तैयार की जाएगी। गौरतलब है कि केंद्रीय अधिकारियों की एक टीम 4 सितंबर को पंजाब पहुंची थी और उसने दो दिनों तक विभिन्न बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा किया।    

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत! 3% DA बढ़ने वाला है, तारीख सामने आई

नई दिल्ली  त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को तोहफा देने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3% की बढ़ोतरी का ऐलान करने वाली है। इस फैसले से देशभर में 1.2 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी लाभान्वित होंगे। जानकारी के अनुसार, इसका औपचारिक ऐलान अक्टूबर के पहले हफ्ते में किया जा सकता है। अभी कितना भत्ता मिल रहा मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इस बार घोषणा का समय खास तौर पर दिवाली के समय करेगी। ताकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को त्योहारी मौसम में अतिरिक्त राहत मिल सके। बता दें कि संशोधन के बाद कर्मचारियों का डीए 55% से बढ़कर 58% हो जाएगा। यह बढ़ोतरी जुलाई 2025 से लागू मानी जाएगी यानी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जुलाई से सितंबर तक के तीन महीने का एरियर (बकाया) भी मिलेगा, जो अक्टूबर की सैलरी के साथ दिए जाने की संभावना है। कब-कब होता है डीए रिवीजन? केंद्र सरकार हर साल दो बार डीए में बढ़ोतरी करती है। पहला संशोधन होली से पहले (जनवरी-जून अवधि के लिए)। दूसरा संशोधन दिवाली से पहले (जुलाई-दिसंबर अवधि के लिए)। पिछले साल अक्टूबर 2024 में सरकार ने दिवाली से करीब 2 हफ्ते पहले डीए बढ़ाने का ऐलान किया था। इस साल दिवाली 20-21 अक्टूबर 2025 को है और उसी को देखते हुए इसे कर्मचारियों के लिए त्योहारी तोहफा माना जा रहा है। डीए कैसे तय होता है? डीए की गणना 7वें वेतन आयोग के तहत औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है। इसका फार्मूला 12 महीने के CPI-IW औसत पर आधारित होता है। जुलाई 2024 से जून 2025 तक CPI-IW औसत 143.6 रहा, जिसके आधार पर डीए दर 58% तय हुई है। यानि अब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता 3% बढ़कर 58% हो जाएगा, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक राहत और त्योहारी सीजन में अतिरिक्त लाभ मिलेगा। सैलरी और पेंशन पर असर अगर किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन ₹50,000 है, तो पहले 55% डीए के हिसाब से उसे ₹27,500 मिल रहा था। अब 58% डीए लागू होने पर यह बढ़कर ₹29,000 हो जाएगा। यानी हर महीने कर्मचारी को ₹1,500 अतिरिक्त मिलेंगे। इसी तरह, यदि किसी पेंशनभोगी की बेसिक पेंशन ₹30,000 है, तो पहले 55% डीआर के तहत उसे ₹16,500 मिल रहा था। अब 58% पर यह राशि बढ़कर ₹17,400 हो जाएगी। यानी पेंशनभोगी को हर महीने ₹900 ज्यादा मिलेंगे। हालांकि, यह बढ़ोतरी व्यक्ति की सैलरी या पेंशन पर निर्भर करेगी, लेकिन सामूहिक रूप से देखें तो करोड़ों परिवारों की आय में अच्छा-खासा इजाफा होगा। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि फिलहाल यह डीए बढ़ोतरी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अल्पकालिक राहत देती है, लेकिन असली बदलाव 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद दिखेगा।  

कब और कैसे हुआ GST सुधार का आगाज़? जानें वित्त मंत्री की बारीक बातें

नई दिल्ली  जीएसटी में व्यापक सुधार रातों-रात नहीं हुआ बल्कि इसकी शुरुआत माल एवं सेवा कर परिषद की पिछले साल दिसंबर में जैसलमेर में हुई बैठक से पहले ही हो गयी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को फोन कर जीएसटी को व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाने और दरों को युक्तिसंगत बनाने को कहा था, जिसके बाद इस पर काम तेजी से आगे बढ़ा। यह बात स्वयं सीतारमण ने बतायी। इसके परिणामस्वरूप सरल जीएसटी प्रणाली का रास्ता साफ हुआ जिसमें कर की दरें कम हैं। इससे एक तरफ जहां कंपनियों के लिए अनुपालन का बोझ कम हुआ है वहीं रोजमर्रा के इस्तेमाल के समेत लगभग 400 वस्तुओं पर कर दरें कम हुई हैं। सीतारमण ने पीटीआई-भाषा को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘वास्तव में जीएसटी में व्यापक सुधारों का काम पहले ही शुरू हो चुका था। राजस्थान के जैसलमेर में हुई पिछली जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही, प्रधानमंत्री ने मुझे फोन करके कहा था,‘एक बार आप जीएसटी को देख लो, व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाओ और दरों पर इतने सारे भ्रम की स्थिति क्यों है? मुझे लगता है कि नौ महीने पहले हुई जैसलमेर बैठक से पहले की बात है।'' उन्होंने कहा, ‘‘फिर, बजट के दौरान, जब हम आयकर उपायों पर चर्चा कर रहे थे, तो उन्होंने मुझे (प्रधानमंत्री) याद दिलाया कि ‘आप जीएसटी के ऊपर काम कर रही हैं न।' यह एक चीज थी।'' सीतारमण ने कहा, ‘‘दूसरा, मंत्री समूह (जीओएम) डेढ़ साल से काम कर रहे थे और मैं उनमें से प्रत्येक की सराहना करती हूं कि उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की और उनके सुझाव सामने आए।'' उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद मैंने यह निर्णय लिया कि अब समय आ गया है कि हम जीएसटी के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करें, न केवल दरों की, न केवल स्लैब की संख्या की, बल्कि इस दृष्टिकोण से भी देखें कि एक व्यवसाय, लघु या मझोले व्यवसाय के लिए यह कितना और बेहतर होगा'' वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हमने इन सब बातों पर गौर किया। वस्तुओं के वर्गीकरण को देखा जिससे काफी भ्रम पैदा हो रहा था… फिर, स्वभाविक रूप से दर पर भी गौर किया। एक फरवरी, 2025 से लेकर लगभग 15 मई तक हम इसकी अध्ययन समीक्षा आदि का काम करते रहे।'' सीतारमण ने कहा, ‘‘मई के मध्य में… मैं प्रधानमंत्री के पास गयी, उन्हें जानकारी दी और बताया कि हम कदम उठाने के करीब हैं। यह एक प्रस्ताव का रूप ले सकता है और उनसे समय देने का अनुरोध किया…। उसके बाद उन्होंने कहा कि आप देखिये इसे कैसे जीएसटी परिषद में ले जा सकती हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘फिर मैं टीम के साथ बैठी और तय किया कि यह केंद्र का प्रस्ताव होगा, जो जीओएम को भेजा जाएगा, क्योंकि जीओएम में राज्यों के मंत्री हैं। मैं वहां नहीं हूं। वास्तव में हम चाहते थे कि यह स्पष्ट हो जाए कि हम जीओएम द्वारा किए गए सभी कार्यों का सम्मान करते हैं। लेकिन यहां एक प्रस्ताव विशेष रूप से केंद्र की ओर से आ रहा है, जो परिषद में एक-तिहाई भागीदार है।'' वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘नियमानुसार, हमने मंत्री समूहों को प्रस्ताव दिया और मंत्री समूहों ने उस पर विचार करना शुरू कर दिया। इस बीच, और उससे भी पहले, जैसलमेर में, वित्त राज्यमंत्री को क्षतिपूर्ति उपकर पर गठित मंत्री समूह का चेयरमैन बनाया गया था और वह उस पर विचार कर रहे थे। लेकिन वहां भी, क्षतिपूर्ति उपकर के बाद, अगर वह उसे समाप्त करने का फैसला लेते हैं, तो उन मदों का क्या होगा जो क्षतिपूर्ति उपकर के अंतर्गत आती हैं? अब वे कहां जाएंगी? यह दरों को युक्तिसंगत बनाने का मामला है। इसलिए मंत्रिसमूह ने यह निर्णय लिया कि उपकर और उसे समाप्त करने के संबंध में, उन्हें हर नियम एवं शर्तों पर काम करना होगा। लेकिन इसके अलावा, दरें तय करने के लिए गठित मंत्रियों का समूह दरों को युक्तिसंगत बनाने पर विचार कर रहा था। इसलिए, मंत्रिसमूह के सदस्यों की सहमति से, यह तय किया गया कि उपकर पर काम कर रहे सदस्य भी दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समूह समिति में भाग लेंगे…।'' फिर दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समिति जिसकी शुरुआत वास्तव में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज सोमप्पा बोम्मई से हुई थी और जिसका नेतृत्व बाद में बिहार के उपमुख्यमंत्री ने किया, ने मंत्रिसमूह द्वारा किए गए कार्यों के अलावा, केंद्र द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर भी विचार किया। सीतारमण के अनुसार, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बेहतर होगा कि यह पूरा मामला परिषद में ही रखा जाए, बजाय इसके कि वे इस प्रस्ताव पर आगे विचार करें। फिर यह सब परिषद के पास आया और परिषद ने इसे स्वीकार कर लिया। जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह बुधवार को माल एवं सेवा कर के चार स्लैब की जगह दो स्लैब करने का फैसला किया। अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी जबकि विलासिता एवं सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के तहत टेलीविजन एवं एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता उत्पादों के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामान समेत करीब 400 वस्तुओं पर दरें कम की गयी हैं।  

सरकार की बड़ी पहल: हरियाणा को मिलेंगी 450 इलेक्ट्रिक बसें, कम कीमत में सफर

हरियाणा  देशभर में प्रदूषण की समस्या से निपटने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने ‘पीएम-ई-बस सेवा योजना’ के तहत 10 हजार इलेक्ट्रिक बसें राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में रियायती दरों पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत हरियाणा को 450 ई-बसें स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 100 बसें अकेले गुरुग्राम जिले को आवंटित होंगी। यह निर्णय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने, सार्वजनिक परिवहन को सशक्त बनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है। केंद्र की यह पहल न सिर्फ़ प्रदूषण नियंत्रण में मदद करेगी, बल्कि लोगों को किफायती, आरामदायक और आधुनिक यातायात सुविधा भी प्रदान करेगी। केंद्रीय शहरी विकास, आवास एवं उर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसकी पुष्टि की है। दरअसल, केंद्र ने अगस्त-2023 में इस योजना की शुरूआत की थी। योजना को लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ देशभर में लागू किया जा रहा है। अहम बात यह है कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत बसों का संचालन होगा। केंद्र द्वारा तय शर्तों के तहत 12 मीटर लंबी स्टैंडर्ड बस के लिए 24 रुपये प्रति किमी, 9 मीटर मिडी बस के लिए 22 रुपये तथा 7 मीटर मिनी बस के लिए 20 रुपये प्रति किलोमीटर की केंद्रीय सहायता तय की है। चार्जिंग स्टेशन व डिपो के लिए भी मदद साथ ही, चार्जिंग स्टेशन, बस डिपो और अन्य नागरिक ढांचे के निर्माण पर भी केंद्र की ओर से 100 प्रतिशत तक की मदद दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि योजना के तहत हरियाणा को 450 बसों का कोटा मिला है। इनमें से गुरुग्राम को 100 इलेक्ट्रिक बसें दी जाएंगी। गुरुग्राम को इसलिए प्राथमिकता दी गई है क्योंकि यहां दिल्ली से सटे क्षेत्रों में वाहनों की संख्या सबसे अधिक है और वायु प्रदूषण भी लगातार चिंता का विषय रहा है। अनुबंध में देरी से लटकी डिलीवरी योजना की घोषणा को दो साल बीत चुके हैं, लेकिन गुरुग्राम में 100 ई-बसों का संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। सूत्रों के अनुसार, राज्य परिवहन विभाग और निजी ऑपरेटर के बीच अनुबंध पूरा न होने की वजह से बसों की डिलीवरी अटक गई है। बताते हैं कि अब राज्य सरकार इस परियोजना को लेकर गंभीर हो गई है। जल्द ही इसे सिरे चढ़ाया जाएगा ताकि हरियाणा को उसके हिस्से की सभी बसें मिल सकें। रोजगार के अवसर भी मिलेंगे विश्व संसाधन संस्थान का अनुमान है कि यह योजना देशभर में 45 से 55 हजार नए रोजगार पैदा कर सकती है। वहीं, इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन की रिपोर्ट बताती है कि अब तक चल रही 3,800 से ज्यादा ई-बसों से करीब 1,200 टन नाइट्रोजन ऑक्साइड और 700 टन कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है। इसका सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ेगा।