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पुणे पोर्श हादसे में नया मोड़, आरोपी पर किशोर के तौर पर चलेगी सुनवाई

पुणे  पुणे पोर्श एक्सीडेंट के बहुचर्चित मामले में अब एक अहम मोड़ सामने आया है। किशोर न्याय बोर्ड ने मंगलवार को यह स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में 17 वर्षीय आरोपी पर नाबालिग की तरह मुकदमा चलाया जाएगा, न कि वयस्क की तरह, जैसा कि पुणे पुलिस की मांग थी। यह हादसा 19 मई को पुणे में हुआ था, जहां एक तेज रफ्तार पोर्श कार ने मोटरसाइकिल सवार दो आईटी प्रोफेशनल्स, अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा, को कुचल दिया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। आरोपी किशोर कथित तौर पर नशे की हालत में था और बगैर ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चला रहा था। पुणे पुलिस ने इस घटना को जघन्य अपराध करार देते हुए किशोर पर एक वयस्क की तरह मुकदमा चलाने की मांग की थी। पुलिस का तर्क था कि केवल दो लोगों की जान लेना ही नहीं, बल्कि आरोपी ने सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश भी की थी, जिससे उसकी मंशा और गंभीरता साफ जाहिर होती है। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि उसे नाबालिग की तरह ही देखा जाना चाहिए। इसके बाद, किशोर न्याय बोर्ड ने पुलिस की याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया कि आरोपी पर नाबालिग की तरह ही मुकदमा चलेगा। बोर्ड के फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि आरोपी पर एक नाबालिग की तरह मुकदमा चलेगा। यह मामला शुरुआत से ही विवादों में रहा है। घटना के बाद जब आरोपी को सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने जैसी शर्तों के साथ जमानत दी गई, तो देशभर में भारी आलोचना हुई। सोशल मीडिया से लेकर राजनैतिक गलियारों तक इस पर सवाल उठे। आलोचना के बाद आरोपी की जमानत रद्द करते हुए उसे सुधार गृह में भेज दिया गया था। इस बीच, 25 जून 2024 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने किशोर न्याय बोर्ड के सुधार गृह भेजने के फैसले को अवैध करार देते हुए लड़के की तत्काल रिहाई के आदेश दिए। अदालत ने कहा कि किशोरों के मामलों में कानून का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और न्याय प्रक्रिया में कोई जल्दबाजी या दबाव नहीं होना चाहिए।

कार्टून विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, हेमंत मालवीय को अंतरिम राहत

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और आरएसएस कार्यकर्ताओं के कथित आपत्तिजनक कार्टून सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोपी एक कार्टूनिस्ट के माफीनामे के बाद, गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने सोशल मीडिया पर बढ़ती आपत्तिजनक पोस्ट पर भी चिंता व्यक्त की और इस पर अंकुश लगाने के लिए न्यायिक आदेश पारित करने की आवश्यकता पर बल दिया। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने कहा, ‘लोग किसी को भी, कुछ भी कह देते हैं। हमें इस बारे में कुछ करना होगा।’ इस बीच, पीठ ने कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को मध्य प्रदेश में दर्ज प्राथमिकी के मद्देनजर राज्य की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया। मालवीय की वकील वृंदा ग्रोवर ने आश्वासन दिया कि इस मामले में माफी मांग ली गई है। हालांकि, पीठ ने आगाह किया कि अगर कार्टूनिस्ट सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डालते रहे, तो राज्य सरकार कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने ‘एक्स’ पर न्यायपालिका के खिलाफ भी मालवीय के कुछ अन्य पोस्ट का जिक्र किया, जिसके बाद पीठ ने कहा, ‘यदि याचिकाकर्ता सोशल मीडिया पर कोई आपत्तिजनक पोस्ट डालते हैं, तो प्रतिवादी राज्य (मध्य प्रदेश) को कानून के अनुसार आगे बढ़ने की स्वतंत्रता होगी।’ ग्रोवर ने विधि अधिकारी की दलील का विरोध करते हुए कहा, ‘इससे तो समस्याओं का पिटारा खुल जाएगा।’ ग्रोवर ने इससे पहले सुनवाई में कहा, ‘यह खराब और गंदी भाषा का मामला है। मैं खुद से पूछती हूं कि क्या यह आपराधिक मामला है या अवैध भाषा का मामला है।’ पीठ ने कहा, ‘मुद्दा यह है कि आपने कोई बात किस तरह कही। आपने जो किया, वो स्पष्ट रूप से अपराध है।’ शीर्ष अदालत ने मालवीय के एक ट्वीट का जिक्र करते हुए कहा कि इस पर ‘सभी तरह के दंडनीय प्रावधान लागू हो सकते हैं’। इस बीच, पीठ ने कार्टूनिस्ट की सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की याचिका स्वीकार नहीं की और सुनवाई अगस्त में तय कर दी। कार्टूनिस्ट मालवीय ने तीन जुलाई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार करने के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। वकील और आरएसएस कार्यकर्ता विनय जोशी द्वारा दायर एक शिकायत पर मई में इंदौर के लसूड़िया थाने में मालवीय के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जोशी ने आरोप लगाया कि मालवीय ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करके हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ा। दलील दी गई कि यह मुद्दा कोविड-19 महामारी के दौरान 2021 में बनाए गए एक कार्टून से संबंधित है। उन्होंने कहा, ‘यह अरुचिकर हो सकता है। मैं कहती हूं कि यह अशोभनीय है। मैं यह भी कहने को तैयार हूं। लेकिन क्या यह अपराध है? माननीय न्यायाधीश ने कहा है, यह आपत्तिजनक हो सकता है, लेकिन यह अपराध नहीं है। मैं सिर्फ कानून की बात कर रही हूं। मैं किसी भी चीज को सही ठहराने की कोशिश नहीं कर रही हूं।’ ग्रोवर ने कथित आपत्तिजनक पोस्ट को हटाने पर सहमति जताई। जस्टिस धूलिया ने तब कहा, ‘हम इस मामले में चाहे जो भी करें, लेकिन यह निश्चित रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग है।’ प्राथमिकी में कई ‘आपत्तिजनक’ पोस्ट का ज़िक्र है, जिनमें भगवान शिव पर कथित रूप से अनुचित टिप्पणियों के साथ-साथ कार्टून, वीडियो, तस्वीरें और मोदी, आरएसएस कार्यकर्ताओं व अन्य लोगों के बारे में टिप्पणियां शामिल हैं।  

एक जिला-एक उत्पाद मध्यप्रदेश को मिला रजत पदक, म.प्र. के उत्पादों को मिला वैश्विक बाजार

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में "एक जिला-एक उत्पाद" योजना के अंतर्गत प्रदेश के उत्पादों की वैश्विक बाजारों में उपस्थिति दर्ज हो रही है।  मध्यप्रदेश ने अपनी विशिष्टता और योजनाओं के उत्कृष्ट क्रियान्वयन का प्रमाण प्रस्तुत करते हुए एक जिला एक उत्पाद पुरस्कार 2024 में राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश श्रेणी में रजत पुरस्कार प्राप्त किया। नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित भारत मंडपम में एक भव्य समारोह में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने पुरस्कार प्रदान किया। यह पुरस्कार राज्य में एक जिला एक उत्पाद योजना के प्रभावशाली क्रियान्वयन, स्थानीय उत्पादों के ब्रांड निर्माण, रोजगार सृजन, और ग्रामीण व शहरी उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयासों को मान्यता देने के लिए प्रदान किया गया। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता और भारत सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों एवं विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित थे। मध्यप्रदेश की ओर से यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उद्योग विभाग, वाणिज्य एवं निवेश प्रोत्साहन नीति विभाग की उप सचिव, श्रीमती रूही खान ने प्राप्त किया। प्रदेश अब लोकल से ग्लोबल की ओर एक जिला-एक उत्पाद योजना में म.प्र. के उत्पादों को वैश्विक बाजार मिल रहा है। प्रदेश स्थानीय से ग्लोबल की ओर बढ़ रहा है। स्थानीय स्तर पर निर्यातकों का बड़ा समूह तैयार हो रहा है। कई उत्पादों को जी.आई. टैग मिला है जिसमें इन उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ी है। हस्तशिल्प एवं कृषि और खाद्य उत्पादों की पहचान बढ़ने के साथ कारीगरों और निर्माताओं के जीवन स्तर में भी सुधार हो रहा है। ओडीओपी योजना में विशेष उत्पादों को उनके भौगोलिक, जैविकीय, प्राकृतिक या उत्पादन की विशेषताओं के कारण शामिल किया गया है। सभी जिलों में ओडीओपी योजना संचालित है, जिनमें हरी सब्जी, मोटे अनाज, क्राफ्टकला हथकरघा, हस्तशिल्प, उपकरण शामिल है। स्थानीय कलाकारों और उत्पादों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। अलग-अलग जिलों के 19 विशिष्ट उत्पादों को अब तक जीओ-ग्राफिकल इंडीकेशन्स (जीआई) टैग प्रदान किये गये है। इसमें चंदेरी साड़ी, बाग प्रिंट, नागपुरी संतरा, रतलामी सेंव, कड़कनाथ मुर्गा, चिन्नौर चावल, बुटिक प्रिंट, स्टोन क्राफ्ट, लेदर टॉय, बेल मेटल वेअर, महेश्वरी साड़ी, महोबा देशवारी पान, मुरैना गजक, सुंदरजा आम, शरबती गेहूँ, गोंड पेंटिंग, रॉट आयरन क्राफ्ट, हेन्डमेड कारपेट, वारासिवनी की हेंडलूम साड़ी शामिल है। इनमें से 7 उत्पाद ओडीओपी योजना में भी शामिल है। मध्यप्रदेश ने "एक जिला-एक उत्पाद" के अंतर्गत विश्व के प्रमुख बाजारों में अपनी पहचान बनाई है। वैश्विक बाजार तक पहुँचाने की दिशा में ठोस कदम भी उठाए हैं। राज्य के विभिन्न जिलों के उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। बुरहानपुर के उच्च गुणवत्ता वाले केले, रायसेन का सुगंधित बासमती चावल, और बालाघाट का प्रसिद्ध चिनौर चावल इन उत्पादों में प्रमुख हैं। मध्यप्रदेश के उत्पादों की पहचान अब सीमित नहीं रही, बल्कि ये राज्य की आर्थिक प्रगति, रोजगार अवसरों और निर्यात क्षमता को मजबूती दे रहे हैं। "एक जिला-एक उत्पाद योजना अब एक जनभागीदारी आधारित आंदोलन बन चुकी है। इसमें कारीगरों, महिला समूहों, एफपीओ, स्टार्टअप्स और स्थानीय उद्यमियों की सक्रिय भूमिका रही है। राज्य सरकार ने एक जिला-एक जिला उत्पाद को स्थानीय से वैश्विक बनाने की दिशा में अनेक कदम उठाए हैं। उत्पाद आधारित प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और पैकेजिंग सुधार, डिजिटलीकरण और निर्यात को प्रोत्साहित करने हेतु लॉजिस्टिक सहयोग भी राज्य शासन द्वारा दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश न केवल संस्कृति और शिल्प की धरती है, बल्कि एक उभरता हुआ औद्योगिक और निर्यातक राज्य भी है। मध्यप्रदेश सरकार की यह उपलब्धि "स्थानीय हाथों से वैश्विक मंच तक" की परिकल्पना को साकार कर रही है और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम है। प्रदेश में इतने विविध उत्पाद हैं जिन्हें विश्व स्तर पर ले जा सकते हैं। “एक जिला, एक उत्पाद” एक अनूठी पहल है और किसी अन्य देश में ऐसा नहीं है। प्रत्येक जिले की अपनी अलग विरासत है। उत्पादों की ब्रांडिंग और गुणवत्ता पर काम किया जा रहा है। पैकेजिंग और ब्रांडिंग में सुधार किया जा रहा है ताकि उत्पादों को उनकी उच्च गुणवत्ता के लिए दुनिया भर में सम्मान मिले। ओडीओपी पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद करेगा। ओडीओपी उत्पादों को आगे बढ़ाने के तरीके सीखने और अनुकरण करने में मदद के लिए एक सर्वोत्तम प्रथाओं का संग्रह तैयार किया गया है। केंद्र, सरकार ने 750 से अधिक जिलों से 1,200 से अधिक अनूठे उत्पादों की पहचान की है, जो कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, हथकरघा, हस्तशिल्प आदि क्षेत्रों में हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य मूल्य संवर्धन, विपणन को बढ़ावा देना और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ना है। सिंगापुर, न्यूयॉर्क, वैंकूवर, मिलान, कुवैत, बहरीन और जापान में ओडीओपी वॉल्स स्थापित किए गए हैं। ओडीओपी उत्पाद अब सिंगापुर के मुस्तफा सेंटर और सेंटर पॉइंट मॉल जैसे खुदरा दुकानों पर उपलब्ध हैं। ओडीओपी पुरस्कारों के लिए 1 अप्रैल से 11 जून 2024 के बीच राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से कुल 641 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें जिलों से 587, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से 31 और विदेशों में भारतीय मिशनों से 23 प्रविष्टियां शामिल थीं। 

ऊर्जा मंत्री तोमर नई दिल्ली में मंत्रियों के समूह और विद्युत नियामक आयोगों की बैठक में हुए शामिल

भोपाल केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा विद्युत वितरण कम्पनियों की वित्तीय स्थिरता से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिये मंत्री समूह की बैठक मंगलवार को नई दिल्ली में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता विद्युत एवं आवास तथा शहरी मामलों के राज्य मंत्री श्री श्रीपद नाइक ने की। बैठक में ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मध्यप्रदेश नियामक आयोग द्वारा बिजली उपभोक्ताओं के हित में लिये जा रहे निर्णयों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में ऊर्जा विभाग द्वारा किये जा रहे नवाचारों से भी अवगत कराया। बैठक में विद्युत वितरण कम्पनियों की वित्तीय स्थिरता, पारदर्शिता एवं संचालन क्षमता को सुदृढ़ बनाने पर गहन चर्चा हुई। केन्द्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्री नाइक ने कहा कि हमारा संकल्प है कि ऊर्जा व्यवस्था को और मजबूत, पारदर्शी और जन-हितैषी बनायें, जिससे सभी को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। बैठक में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु एवं उत्तरप्रदेश के ऊर्जा मंत्री तथा केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग एवं राज्य विद्युत नियामक आयोगों के अध्यक्ष एवं सदस्य शामिल हुए।  

सुप्रीम कोर्ट की यूपी सरकार को फटकार, कांवड़ मार्ग पर QR कोड क्यों जरूरी?

नई दिल्ली यूपी और उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों और रेस्तरां संचालकों को आदेश दिया गया है कि वे क्यूआर कोड लगाएं और नाम भी लिखें। यह मामला मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने पूछा कि आखिर इसकी जरूरत क्या है। अब इस केस की अगली सुनवाई 22 जुलाई तय की गई है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और शिक्षाविद अपूर्वानंद झा व अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख तय की। शीर्ष अदालत ने पिछले साल भाजपा शासित उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश द्वारा जारी इसी तरह के निर्देशों पर रोक लगा दी थी, जिसमें कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों को अपने मालिकों, कर्मचारियों के नाम और अन्य विवरण प्रदर्शित करने के लिए कहा गया था। उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा 25 जून को जारी एक प्रेस रिलीज का हवाला देते हुए झा ने कहा, ‘नए उपायों में कांवड़ मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों पर क्यूआर कोड प्रदर्शित करना अनिवार्य है, जिससे मालिकों के नाम और पहचान का पता चलता हो। इस तरह उसी भेदभावपूर्ण तरीके से पहचान की बात हो रही है जिस पर पहले इस अदालत ने रोक लगा दी थी।’ याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार का निर्देश, जिसमें दुकान मालिकों को ‘कानूनी लाइसेंस आवश्यकताओं’ के तहत धार्मिक और जातिगत पहचान बताने के लिए कहा गया है, दुकान, ढाबा और रेस्टोरेंट मालिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण महीने में शिवलिंगों का जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगा और अन्य नदियों से जल लेकर आते हैं। कई श्रद्धालु इस महीने में मांसाहार से परहेज करते हैं। कई लोग तो प्याज और लहसुन युक्त भोजन भी नहीं खाते। कांवड़ यात्रा का प्रचलन पश्चिम उत्तर प्रदेश के अलावा सूबे के अन्य हिस्सों और कुछ और राज्यों में भी बढ़ा है।  

डिग्री से आगे स्किल की पहचान: 50 हजार युवाओं को CM युवा योजना से लाभ

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुशल युवा ही आत्मनिर्भर भारत की असली ताकत हैं। अगर प्रदेश को विकसित बनाना है, तो यहां के युवाओं को उनकी रुचि और योग्यता के अनुसार प्रशिक्षित कर सक्षम बनाना होगा। मंगलवार को विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर उन्होंने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय कौशल मेला एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है। कार्यक्रम में प्रदेश के 75 जिलों से आए युवाओं ने अपनी प्रतिभा और प्रशिक्षण का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर 15 अभ्यर्थियों को ‘यूथ आइकान’ सम्मान और पांच स्किल रथों को रवाना किया। युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का युवा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलाजी और थ्री डी प्रिंटिंग जैसे क्षेत्रों में खुद को साबित कर रहा है। इस दिशा में सरकार ने अब तक 50 लाख युवाओं को टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित कर उन्हें डिजिटल रूप से सशक्त बनाया है। 150 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आइटीआइ) को न्यू-एज टेक्नोलाजी से जोड़ा गया है। इसके अलावा 400 से अधिक सरकारी और 3000 निजी आइटीआइ में युवाओं को कम शुल्क में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल रहा है। निजी आइटीआइ में पढ़ने वाले छात्रों को छात्रवृत्ति और अन्य प्रोत्साहन भी मिल रहे हैं। योगी ने कहा कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने ‘सीएम युवा योजना’ शुरू की है। इसके तहत आइटीआइ, पालिटेक्निक और डिग्रीधारी युवाओं को पांच लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त कर्ज दिया जा रहा है। अब तक 50,000 से अधिक युवा इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। कर्ज का मूलधन युवा लौटाएंगे जबकि ब्याज सरकार वहन करेगी। साथ ही 7.5 लाख रुपये तक का अतिरिक्त कर्ज भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतर चुके हैं। इससे लाखों युवाओं को रोजगार मिल रहा है। नई पहल के तहत अब युवा इंडस्ट्री में प्रोजेक्ट वर्क करेंगे। उन्हें पीएम व सीएम इंटर्नशिप योजना के तहत 5000 रुपये मासिक स्टाइपेंड भी मिलेगा। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना के माध्यम से 1.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। वहीं ‘मुख्यमंत्री विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ के अंतर्गत एक लाख से ज्यादा पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण और टूलकिट प्रदान की गई है। आइटीआइ में विदेशी भाषाओं का मिले प्रशिक्षण मुख्यमंत्री ने विदेश में यूपी के कुशल युवाओं के लिए बढ़ते अवसर को देखते हुए सुझाव दिया कि आइटीआइ में जर्मनी, जापानी जैसे विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था होनी चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) से अब छात्र सामान्य शिक्षा के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकते हैं। डुअल डिग्री और सर्टिफिकेट कोर्स युवाओं को रोजगार के लिए बेहतर रूप से तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं की सफलता की कहानियों को प्रेरणादायक बताया और कहा कि यदि युवा सही दिशा में प्रयास करें, तो रोजगार की कोई कमी नहीं है। सम्मान और साझेदारी का संदेश कार्यक्रम में उद्योग प्रतिनिधियों को ‘इंडस्ट्री एम्बेसडर’ सम्मान भी दिया गया। साथ ही मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, प्रयागराज के साथ नालेज पार्टनर के रूप में एमओयू किया गया। व्यावसायिक शिक्षा व कौशल विकास राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि उद्योगों की मांग के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, सही से प्रशिक्षण लेने के बाद कोई भी युवा बेरोजगार नहीं रहेगा। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शााही, सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान, श्रम व सेवायोजन राज्य मंत्री मनोहर लाल मन्नु, मुख्य सचिव मनोज सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, प्रमुख सचिव डा. हरिओम सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

डीजीपी मकवाना ने मुख्यमंत्री के संदेश एवं अभियान के पोस्टर का किया विमोचन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नशा एक सामाजिक बुराई है। जो युवाओं, परिवार और समाज की जड़ों को खोखला बना रही है। नशे की जद में आकर कई परिवार उजड़ जाते हैं। नशा नाश की जड़ है, जो न केवल स्वास्थ्य को खत्म करता है बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में मंगलवार से 30 जुलाई तक प्रारंभ हुए नशामुक्ति अभियान – "नशे से दूरी है जरूरी" के शुभारंभ अवसर पर वीडियो संदेश के माध्यम से यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अत्यंत दु:खद है कि युवाओं के बीच नशे का चलन तेजी से बढ़ रहा है। युवा देश का भविष्य हैं, उन्हें इस दलदल से बचाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह संकल्पित है। "नशे से दूरी है जरूरी" अभियान चलाने का उद्देश्य न केवल नशे को रोकना है बल्कि समाज में नई चेतना जागृत करना भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से म.प्र. पुलिस द्वारा संचालित नशा मुक्ति अभियान को सफल बनाने का आहवान किया है। डीजीपी ने किया अभियान का शुभारंभ पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना ने पुलिस मुख्यालय, भोपाल में मंगलवार को वृहद नशा मुक्ति जन-जागरूकता अभियान ‘’नशे से दूरी-है जरूरी’’ का शुभारंभ किया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के वीडियो संदेश तथा अभियान के पोस्टर का विमोचन भी किया। विशेष पुलिस महानिदेशक सी.आई.डी. श्री पवन श्रीवास्तव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्स श्री के.पी. वेंकटेश्वर, पुलिस महानिरीक्षक ए.एन.ओ. डॉ. आशीष, पी.एस.ओ.टू. डीजीपी श्री विनीत कपूर, सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्री संजीव कुमार कंचन एवं एसओ टू डीजीपी श्री मलय जैन उपस्थित थे। डीजीपी श्री मकवाना ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रेरणा से समाज में नशे की प्रवृत्ति की प्रभावी रोकथाम के लिए यह जनजागरूकता अभियान ‘’नशे से दूरी-है जरूरी’’ मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों का सेवन युवाओं को खोखला कर उनके परिवारों को भी बर्बाद कर रहा है। देश एवं प्रदेश के शीर्षस्थ राजनैतिक नेतृत्व भी इस विकराल समस्या से चितिंत एवं इसके निदान के लिये प्रयासरत है। समाज की ये नैतिक जिम्मेदारी है कि नशे के दुष्प्रभावों से विशेषकर किशोर बच्चों और युवाओं को अवगत कराएँ और नशे से दूर रखें। उन्होंने कहा कि ‘’हमारा है यही संदेश- नशा मुक्त हो मध्यप्रदेश’’। अभियान में उच्च शिक्षा, ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय, खेल एवं युवा कल्याण, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, नगरीय विकास एवं आवास और स्कूल शिक्षा विभागों सहित एनजीओ और धार्मिक संस्थान की सक्रिय सहभागिता रहेगी। हर दिन होंगी जागरूकता की गतिविधियां अभियान के अंतर्गत पूरे प्रदेश में प्रतिदिन विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी जिनमें स्थानीय रेडियो और एफएम चैनलों के माध्यम से प्रसारण, सार्वजनिक स्थलों पर बैनर, पोस्टर, होर्डिंग्स का प्रदर्शन और पंपलेट का वितरण शामिल है। प्रिंट मीडिया, बस अड्डों और प्रमुख चौराहों पर डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से वीडियो प्रचार किया जाएगा। सफाई वाहनों पर लगे पीए सिस्टम से नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर हैशटैग #नशे_से_दूरी_है_जरूरी, #Say No To Drugs, #NashamuktMP के माध्यम से व्यापक संदेश भी प्रसारित किए जाएंगे। अभियान के दौरान प्रत्येक आयोजन स्थल पर नशामुक्ति से संबंधित ‘सेल्फी पॉइंट’ बनाए जाएंगे जिससे आमजन की भागीदारी को और प्रोत्साहन मिल सके। नारकोटिक्स से संबंधित शिकायतों और परामर्श के लिए हेल्पलाइन नंबर 1933 एवं 14446 और वेबसाइट https://ncbmanas.gov.in का व्यापक प्रचार किया जाएगा। अभियान में प्रचार सामग्री जैसे कैप्स, रिस्ट बैंड्स, बैजेस, पोस्टर और बैनर भी वितरित किए जाएंगे। प्रदेश के सभी स्कूलों और कॉलेजों के छात्रावासों में ‘छात्रावास नशामुक्ति समितियों’ का गठन किया जाएगा। अभियान में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था, अखिल भारतीय गायत्री परिवार, आर्ट ऑफ लिविंग, हार्टफुलनेस जैसे सामाजिक व धार्मिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई है। सामाजिक न्याय एवं एमएसएमई विभाग द्वारा प्रशिक्षित "मास्टर वॉलंटियर्स" नागरिकों व छात्रों को नशामुक्ति के लिए प्रेरित करेंगे। "कला पथक दल" द्वारा नुक्कड़ नाटक, गीत, संगीत के माध्यम से भी जनजागरूकता फैलाई जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं जैसे Alcoholics Anonymous और Narcotics Anonymous भी इस अभियान में अपना योगदान देंगी। शिक्षा विभाग द्वारा संचालित "युवा संगम" के अंतर्गत "प्रहरी क्लब"/ "ओजस क्लब" और "उमंग मॉड्यूल" के माध्यम से छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित "Manhit App" के माध्यम से नशा पीड़ित व्यक्तियों को चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। मेडिकल और टेक्नीकल कॉलेजों सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के सहयोग से पोस्टर, शॉर्ट मूवी और जागरूकता संदेश साझा किए जाएंगे।  

1200 लोगों पर किए गए अध्ययन से पता चला है कि 21 फीसदी दुर्घटनाएं नींद के कारण हुईं

देहरादून उत्तराखंड में सड़क हादसों का कारण नींद और इससे संबंधित बीमारियां हैं। एम्स के मनोरोग विभाग के शोध में यह बात सामने आई है। अक्टूबर 2021 से अप्रैल 2022 तक 1200 लोगों पर किए गए अध्ययन से पता चला है कि 21 फीसदी दुर्घटनाएं नींद आने या नींद से संबंधित समस्या के कारण हुईं हैं। नशे को दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण माना जाता रहा है, लेकिन इस शोध ने नींद को एक अहम कारक बताया है।  मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एम्स के मनोरोग विभाग के निद्रा प्रभाग के चिकित्सकों के शोध में यह बात सामने आई है। उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण नशे को माना जाता है। चिकित्सकों ने शोध से साफ कर दिया किया है कि नींद व नींद से संबंधित समस्या उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि 32 फीसदी दुर्घटनाओं का कारण नशा था, लेकिन इनमें से कई चालक नींद की समस्या से पीड़ित थे, जिससे नशा करने पर उनकी समस्या और बढ़ गई।  डॉक्‍टरों ने अक्टूबर 2021 से अप्रैल 2022 तक करीब 1200 लोगों पर शोध किया। ये सभी लोग कई इलाकों में वाहन दुर्घटना में घायल हुए थे, जो इलाज के लिए एम्स में भर्ती हुए थे। इनमें से 575 घायल वाहन चालक थे। इन वाहन चालकों में 75 फीसदी संख्या दोपहिया व तिपहिया वाहन चालकों की थी। शोध निर्देशक व डॉक्टर ने बताया कि 21 फीसदी दुर्घटनाएं वाहन चलाते समय नींद आना या नींद से संबंधित समस्या के चलते हुई। वहीं अत्यधिक थकान से आने वाली नींद भी 26 फीसदी दुर्घटनाओं का कारण बनी। 32 फीसदी दुर्घटनाओं का कारण नशा था, लेकिन इनमें ज्यादातर वे चालक शामिल थे जो नींद व नींद से संबंधित समस्या से भी ग्रसित थे और नशा करने से उनकी यह समस्या और अधिक बढ़ गई और दुर्घटना का कारण बनी।  शोध में कहा गया है कि नींद की समस्या के चलते होने वाली करीब 68 फीसदी दुर्घटनाएं सीधी सपाट व रोजमर्रा में प्रयोग होने वाली सड़कों पर हुई हैं। ज्यादातर दुर्घटनाएं शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच हुईं। क्योंकि कुछ लोग शाम को शराब का सेवन भी करते हैं और ऐसे में नींद से संबंधित समस्या और बढ़ जाती है। शोध के मुताबिक 68 फीसदी दुर्घटनाएं सीधी सड़कों पर हुईं। प्रशासन नशे के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाता है। अभियान के तहत एल्कोमीटर से वाहन चालकों की जांच की जाती है। यह शोध अमेरिका के क्यूरियस मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।  

धमतरी में वनांचल क्षेत्र के युवाओं को मिली नई दिशा, पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक सम्पन्न

धमतरी  धमतरी जिले के नगरी विकासखंड अंतर्गत डमकाडीह मिनी स्टेडियम में दिनांक 11 जुलाई से 15 जुलाई 2025 तक पाँच दिवसीय फिजिकल एवं मेडिकल प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया था। यह शिविर धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा के मार्गदर्शन एवं खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया। आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र के ग्रामीण एवं वनांचल युवाओं को सैन्य, पुलिस, एस एस सी, अर्धसैनिक बलों आदि की भर्ती परीक्षाओं हेतु शारीरिक और चिकित्सकीय रूप से तैयार करना था। शिविर में नगरी, नगरी क्षेत्र के दूरस्थ गांवों वनांचल से बड़ी संख्या में युवक-युवतियों ने भाग लिया। शिविर के आयोजन को लेकर युवाओं में उत्साह का वातावरण रहा और कुल मिलाकर 232 से अधिक प्रतिभागियों ने इस अवसर का लाभ उठाया। प्रशिक्षण की विशेषता यह रही कि शिविर में प्रतिभागियों को भर्ती परीक्षाओं में होने वाले दौड़ (1600 मीटर), ऊँची, लंबी कूद, पुशअप्स, बीम, संतुलन अभ्यास, बॉडी मापदंड, ठडप् टेस्ट आदि विषयों पर विस्तारपूर्वक अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही युवाओं को स्वास्थ्य परीक्षण (मेडिकल फिटनेस) की जानकारी भी गई जिसमें कद, वजन, दृष्टि परीक्षण आदि सम्मिलित थे।           शिविर में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हवलदार जीवन निषाद ने अत्यंत अनुशासनपूर्वक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से प्रशिक्षण प्रदान किया। उनके अनुभव और मार्गदर्शन ने युवाओं को सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए तैयार होने हेतु आवश्यक आत्मविश्वास एवं प्रेरणा दी,साथ ही स्थानीय व्यायाम शिक्षक खेमराज साहू, अशोक गजबल्ला, खोमन सिंह सहरे,विकास सिंह ठाकुर, कमलेश साहू, सैमुअल मसीह ने भी पूरे समय उपस्थित रहकर प्रशिक्षण प्रक्रिया में अपना सहयोग प्रदान किया।शिविर में भाग ले रहे युवाओं ने प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन, समर्पण एवं आत्मविश्वास का परिचय दिया। विशेष रूप से युवतियों की भागीदारी उल्लेखनीय रही, जो यह दर्शाता है कि अब बेटियाँ भी देश सेवा के लिए सशक्त रूप से तैयार हो रही हैं। धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने इस अवसर पर युवाओं को संदेश देते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं में देशसेवा की भावना जागृत करना है। ग्रामीण व वनांचल क्षेत्र के युवाओं में अपार संभावनाएँ हैं, जिन्हें सही दिशा एवं संसाधनों के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है। जिला प्रशासन भविष्य में भी इस प्रकार के प्रयास करता रहेगा।“इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविरों का मुख्य उद्देश्य युवाओं को शारीरिक रूप से दक्ष बनाना और उन्हें सैन्य, पुलिस तथा अन्य सेवाओं की भर्ती प्रक्रियाओं हेतु तैयार करना है। ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है उन्हें उचित मार्गदर्शन और अवसर देने की। विभाग भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का नियमित आयोजन करता रहेगा ताकि अधिक से अधिक युवा लाभान्वित हो सकें।“             वहीं जिला खेल अधिकारी पीयूष तिवारी ने कहा इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविरों का मुख्य उद्देश्य युवाओं को शारीरिक रूप से दक्ष बनाना और उन्हें सैन्य, पुलिस तथा अन्य सेवाओं की भर्ती प्रक्रियाओं हेतु तैयार करना है। ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है उन्हें उचित मार्गदर्शन और अवसर देने की। विभाग भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का नियमित आयोजन करता रहेगा ताकि अधिक से अधिक युवा लाभान्वित हो सकें। सहायक जिला खेल अधिकारी जगतपति देव ने प्रशिक्षक भूतपूर्व सैनिक, व्यायाम शिक्षकों, पत्रकार साथियों एवं प्रशिक्षण में उपस्थित युवाओं का आभार व्यक्त किया की उनके सहयोग से यह शिविर सफल हो पाया। इस तरह के प्रयास ग्रामीण युवाओं के जीवन में सार्थक बदलाव लाते हैं। साथ ही भविष्य में भी इस प्रकार के निःशुल्क प्रशिक्षण शिविरों के आयोजन का आश्वासन दिया गया।

शादी का झांसा और झूठी पहचान: युवती के साथ दुष्कर्म का आरोप

सागर दूसरे समुदाय की युवती को झूठे नाम और झूठे वादों के जाल में फंसा कर एक युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने खुद को अविवाहित बताया, जबकि सच्चाई सामने आने पर युवती को ब्लैकमेल कर बदनाम करने की धमकी देने लगा। पीड़िता की शिकायत पर मोतीनगर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार, जैसीनगर थाना क्षेत्र की रहने वाली एक युवती सागर में रहकर पढ़ाई कर रही थी। इस दौरान गांव से सागर आते-जाते समय उसकी मुलाकात एक बस के कंडक्टर से हुई, जिसने अपना नाम राज बताया। धीरे-धीरे दोनों में नजदीकियां बढ़ीं और फोन पर बातचीत शुरू हो गई। कुछ समय बाद युवती की नौकरी भोपाल में लग गई। वहां आरोपी ने उस पर दबाव डालकर नौकरी छुड़वा दी और उसे शादी का झांसा देकर भोपाल में किराए के मकान में साथ रहने के लिए मना लिया। इस दौरान युवक ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। युवती को यकीन था कि वह उससे शादी करेगा। करीब आठ महीने बाद जब युवती को सच्चाई का पता चला, तो उसके होश उड़ गए। उसे जानकारी मिली कि आरोपी का असली नाम अकरम खान है, न कि राज। इतना ही नहीं, वह शादीशुदा है और दो बच्चों का पिता भी है। यह जानने के बाद युवती ने उससे सारे रिश्ते तोड़ दिए और भोपाल छोड़कर अपने गांव वापस आ गई। लेकिन आरोपी ने पीछा नहीं छोड़ा। गांव आने के बाद भी वह फोन पर उसे परेशान करने लगा। कुछ दिन पहले आरोपी ने उसके साथ बिताए पलों की आपत्तिजनक तस्वीरें भेजकर भोपाल लौटने का दबाव बनाया। युवती के इनकार करने पर उसने धमकी दी कि वह इन तस्वीरों को इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर देगा। डरी-सहमी युवती ने आखिरकार अपने परिजनों को सारी बात बताई। इसके बाद परिजनों के साथ मोतीनगर थाना पहुंचकर उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। चूंकि यह घटना भोपाल में हुई थी, इसलिए पुलिस ने मामले को जीरो पर पंजीबद्ध कर आगे की जांच भोपाल स्थानांतरित कर दी है। मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह राजपूत ने बताया कि युवती की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस अब आरोपी की तलाश में जुट गई है।