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ODI स्क्वॉड का ऐलान, लेकिन वर्ल्ड कप चैंपियन खिलाड़ी को नहीं मिली जगह; फैसले पर उठे सवाल

सिडनी  क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए स्क्वॉड का ऐलान कर दिया है। जोश इंग्लिस पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश दौरे पर भी ऑस्ट्रेलियाई टीम के कप्तान रहेंगे, क्योंकि मिचेल मार्श अभी भी चोट से परेशान है। मार्श टखने की चोट के कारण समय पर ठीक नहीं हो पाए, लेकिन वे T20I की तैयारी के लिए ढाका में ग्रुप के साथ जुड़ेंगे। वहीं वर्ल्ड कप विनिंग टीम का हिस्सा रहें ट्रैविस हेड को पहले बांग्लादेश के खिलाफ वनडे और टी20 टीम के लिए चुना गया था, मगर नेशनल सिलेक्टर टोनी डोडेमेड के अनुसार उन्हें दोनों सीरीज के लिए पर्सनल लीव दे दी गई है। ओलिवर पीक और मैट शॉर्ट को बांग्लादेश ODI के लिए रखा गया है, जिन्हें पहले सिर्फ पाकिस्तान ODI के लिए चुना गया था। टॉड मर्फी को भी शामिल किया गया है। वह तनवीर संघा की जगह लेंगे, जो लेग स्पिनर हैं, उन्हें लाहौर में दूसरे ODI के दौरान हैमस्ट्रिंग में चोट लग गई थी। बेन ड्वारशुइस और जेवियर बार्टलेट भी टीम में शामिल हुए हैं, जो राइली मेरेडिथ और बिली स्टैनलेक की जगह लेंगे। मेरेडिथ T20I में वापसी करेंगे। मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड के पहले से ही बाहर होने से, ODI टीम में हमेशा की तरह अनुभव की कमी है, लेकिन इंग्लिस को उम्मीद है कि इससे नए सदस्यों के लिए मौके बनेंगे। पीक और शॉर्ट, दोनों को शुरू में सिर्फ पाकिस्तान ODIs के लिए चुना गया था, अब मार्श और हेड की गैरमौजूदगी में बांग्लादेश की राजधानी में होने वाले तीन ODIs के लिए दोनों ही रहेंगे। शॉर्ट ने पाकिस्तान में बल्ले (पहले ODI में अर्धशतक) और गेंद (आखिरी दो ODIs में अपनी ऑफ़-स्पिन से चार विकेट) दोनों से प्रभावित करने के बाद अपनी जगह बनाए रखी है। फिर भी, ऑस्ट्रेलिया के दो सबसे सीनियर ODI बल्लेबाज़ों की गैरमौजूदगी का सबसे ज़्यादा फ़ायदा पीक को हो सकता है। 19 साल के पूर्व U19 वर्ल्ड कप कप्तान को लंबे समय से ऑस्ट्रेलिया के हाल के सबसे होनहार बल्लेबाज़ों में से एक माना जाता था, लेकिन पाकिस्तान में उनका इंटरनेशनल डेब्यू ज़्यादातर उम्मीदों से ज़्यादा तेजी से हुआ। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच पहला वनडे मंगलवार 9 जून को ढाका में खेला जाएगा। इसके बाद के मैच 11 और 14 तारीख को उसी जगह पर खेले जाएंगे। T20Is 17 जून से शुरू होंगे। बांग्लादेश ODIs के लिए ऑस्ट्रेलिया टीम जोश इंग्लिस (कप्तान), ज़ेवियर बार्टलेट, एलेक्स कैरी, कूपर कोनोली, बेन ड्वारशुइस, नाथन एलिस, कैमरून ग्रीन, मैथ्यू कुहनेमन, मार्नस लाबुशेन, टॉड मर्फी, ओलिवर पीक, मैथ्यू रेनशॉ, लियाम स्कॉट, मैट शॉर्ट, एडम जैंपा बांग्लादेश T20Is के लिए ऑस्ट्रेलिया टीम मिशेल मार्श (कप्तान), ज़ेवियर बार्टलेट, कूपर कोनोली, टिम डेविड, जोएल डेविस, नाथन एलिस, कैमरून ग्रीन, एरॉन हार्डी, जोश इंग्लिस, स्पेंसर जॉनसन, मैथ्यू कुहनेमन, रिले मेरेडिथ, जोश फिलिप, मैथ्यू रेनशॉ, एडम ज़म्पा

बिहार की बेटी मिताली ने पर्वतारोहण में रचा इतिहास, केदारकांठा पर लहराया परचम

  नालंदा बिहार के नालंदा की रहने वाली और पटना यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा मिताली प्रसाद ने अपनी पर्वतारोहण यात्रा में एक और खूबसूरत उपलब्धि जोड़ ली है. मिताली ने 12,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित माउंट केदारकांठा पर सफलतापूर्वक फतह हासिल की है. उन्होंने बीते मई माह में इस चोटी पर चढ़ाई करने में सफलता हासिल की है. इस उपलब्धि के बाद प्रभात खबर से बात करते हुए मिताली प्रसाद ने इस गौरवपूर्ण पल को साझा किया. मिताली प्रसाद ने कहा, इस चोटी पर खड़े होकर मुझे बिहार का प्रतिनिधित्व करने पर बेहद गर्व महसूस हुआ. यह इस बात का सबूत है कि हम सभी में किसी भी ऊंचाई को पार करने का अटूट जज्बा है. उन्होंने इस कामयाबी के बाद ‘जय बिहार’ का नारा भी बुलंद किया. दक्षिण अमेरिका की ऊंची चोटी पर भी फहराया है तिरंगा मिताली प्रसाद का पर्वतारोहण में काफी शानदार ट्रैक रिकॉर्ड रहा है. वे साल 2020 में दक्षिण अमेरिका की 6,962 मीटर ऊंची चोटी ‘माउंट एकांकागुआ’ (Mt. ACONCAGUA) को अकेले (Solo) फतह करने वाली भारत की पहली बेटी बनी थीं. इसके अलावा उन्होंने साल 2022 में ‘माउंट कुन’ (7077 मीटर) और एवरेस्ट बेस कैंप की चढ़ाई पूरी की थी. वे साल 2019 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो (5895 मीटर) और साल 2020 में दक्षिण अमेरिका के माउंट बोनेटे (5400 मीटर) पर भी तिरंगा फहरा चुकी हैं. मार्शल आर्ट्स इंटरनेशनल प्लेयर और एनसीसी कैडेट भी रही हैं मिताली राजनीति विज्ञान से पोस्ट ग्रेजुएट मिताली प्रसाद बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं. पर्वतारोहण के क्षेत्र में कदम रखने से पहले वे कराटे में ब्लैक बेल्ट (2nd डैन) होल्डर और इंटरनेशनल प्लेयर रह चुकी हैं. इसके साथ ही वे एनसीसी (Air Sqn) की ‘ए’ ग्रेड कैडेट रही हैं और पैरा बेसिक कोर्स (आगरा) भी पूरा कर चुकी हैं. किसान परिवार की बेटी का अब प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना प्रभात खबर से बात करते हुए मिताली ने कहा कि कतरीसराय के पास मायापुर उनका पैतृक गांव है. उनके माता-पिता किसान हैं और साथ में अन्य घरेलू उद्योग में भी लगे हैं. फिलहाल वो बिहार के स्कूली बच्चों को पर्वतारोहण की बारीकियां सीखा रही हैं. साथ ही बिहार प्रशासनिक सेवा की तैयारी भी कर रही हैं. अब तक दो बार मुख्य परीक्षा में भी शामिल हुई हैं. आगे उनका सपना बिहार के बच्चों, खासकर बेटियों को पर्वतारोहण के प्रति जागरुक करना है. वो माउंट एवरेस्ट भी फतह करना चाहती हैं. हालांकि इसके लिए फंड की कमी बड़ी बाधा बन रही है.

दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना: 80% से अधिक अंक पर छात्रों की माताओं को हर महीने 2100 रुपये

हिसार  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड व सीबीएसई से मान्यता प्राप्त सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे 10वीं-12वीं की परीक्षा में 80 प्रतिशत या इससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं तो मां को दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत महिलाओं को हर माह 2100 रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी। इसके लिए शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के 148 पीएमश्री व माडल संस्कृति स्कूलों की लिस्ट जारी की है। मुख्यालय ने आदेश दिए हैं कि सूची में शामिल स्कूलों में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों की लिस्ट तैयार की जाए जिन्होंने इस साल 10वीं-12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत व इससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। हिसार जिले के 12 स्कूलों का नाम इसमें शामिल है। 17 प्वाइंटों पर मांगी होनहार की रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय ने इसके लिए 17 बिंदुओं का एक फार्म तैयार किया है। जिसे समस्त डीईओ को जारी कर दिया गया है। प्रति कालम में होनहार के बारे में पूछा गया है, जिसमें नाम, पता, स्कूल का नाम, प्राप्त अंक, जन्म सहित अन्य बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। उपरोक्त फार्म को कक्षा टीचर व स्कूल मुखिया की तरफ से सत्यापित कर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजनी होगी। जिसके बाद रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाएगी। प्रदेश स्तर पर स्कूलों की संख्या अंबाला से 8 स्कूल, भिवानी से 7 स्कूल, चरखी दादरी से 3 स्कूल, फरीदाबाद से 5 स्कूल, फतेहाबाद से 6, गुरुग्राम से 4, हिसार से 12, झज्जर से 7, जींद से 7, कैथल से 6 स्कूल, करनाल से 8, कुरुक्षेत्र से 5, नूंह से 12 स्कूल, पलवल से 7, पंचकूला से 6 स्कूल, पानीपत से 6 स्कूल, रेवाड़ी से 5 स्कूल, रोहतक से 6 स्कूल, सिरसा से 7 स्कूल, सोनीपत से 7 स्कूल और यमुनानगर से 9 स्कूल शामिल हैं, जो कि सरकारी स्कूल की श्रेणी में है।   मुख्यालय की ओर से हमें पत्र मिला था। जिसमें हमसे पीएमश्री व माडल संस्कृति स्कूलों में पढ़ने वाले उन बच्चों के नाम मांगे गए थे, जिन्होंने 10वीं व 12वीं परीक्षा में 80 प्रतिशत व इससे अधिक अंक प्राप्त किए हो। बीईओ को आदेश जारी कर दिए गए हैं।     – रामरतन, जिला शिक्षा अधिकारी, हिसार  

‘आपन सरस्वतिया’ अभियान: ड्रोन और श्रमदान से नदी को पुराना स्वरूप लौटाने की कोशिश

गढ़वा बिना किसी भारी-बरकम सरकारी बजट के, सिर्फ जनसहभागिता के दम पर गढ़वा की सरस्वतिया नदी को उसका पुराना गौरव लौटाने की कोशिशें अब एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी हैं. गढ़वा शहर में जहां अभियान के 14 दिन पूरे हो गए, वहीं मेराल में भी इस मुहिम ने एक हफ्ता (7 दिन) का सफर तय कर लिया. इस शानदार कामयाबी के बाद, आज सोमवार से शुरू हो रहे नए सप्ताह के साथ नदी को उसका प्राकृतिक स्वरूप देने और सफाई के काम को और तेज करने की तैयारी है. ड्रोन कैमरे और गूगल अर्थ से तैयार हो रही कार्ययोजना प्रशासन और आम जनता के इस साझा प्रयास की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन कैमरे और गूगल अर्थ की मदद से पूरी कार्ययोजना तैयार की जा रही है. गढ़वा के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने गढ़वा और मेराल दोनों इलाकों का खुद मुआयना किया. गढ़वा में इस मुहिम को गति देने के लिए सहीजना निवासी दीपक कुमार पाठक प्रमुख सहयोगी के रूप में सामने आए, जिनकी एसडीएम ने सराहना की. मेराल में 100 से अधिक लोग कर रहे हैं श्रमदान वहीं मेराल में बीडीओ सह अंचलाधिकारी यशवंत नायक के नेतृत्व में पूर्व जिला परिषद सदस्य संजय भगत, विधायक प्रतिनिधि लालमोहन और पूर्वी-पश्चिमी मेराल के मुखियाओं समेत लगभग 100 से अधिक लोग और स्थानीय मीडियाकर्मी इस अभियान में श्रमदान कर रहे हैं. सामाजिक आंदोलन बन चुका है ‘आपन सरस्वतिया’ एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि आपन सरस्वतिया’ अब सिर्फ एक सफाई कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बन चुका है. यह इस बात का सबूत है कि अगर समाज और प्रशासन साथ मिल जाएं, तो बिना किसी विशेष सरकारी बजट के भी इतने बड़े बदलाव किए जा सकते हैं. यह पूरी तरह से गढ़वा के लोगों की जिम्मेदारी और उनका अपना अभियान है. एसडीएम ने जिले के अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यवसायियों और सक्षम नागरिकों से अपील की है कि सोमवार से शुरू हो रहे नए हफ्ते में इस अभियान से और अधिक संख्या में जुड़ें ताकि सरस्वतिया नदी को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त और स्वच्छ बनाया जा सके. ‘आपन सरस्वतिया’ अभियान की 5 बड़ी बातें आधा दर्जन जेसीबी से सफाई:- नदी में सालों से जमी गाद (डी-सिल्टिंग), झाड़-झंखाड़, बांस और अन्य अवरोधों को हटाने के लिए 6 जेसीबी मशीनों और दो ट्रैक्टरों को काम पर लगाया गया है. अतिक्रमण पर चला पीला पंजा:- नदी के बहाव को रोकने वाली कई स्थाई और अस्थाई अवैध संरचनाओं (अतिक्रमण) को ध्वस्त कर दिया गया है. मेराल में 50 फीट चौड़ाई का लक्ष्य:- मेराल क्षेत्र में नदी को कम से कम 50 फीट या उससे अधिक की न्यूनतम चौड़ाई देने का काम तेजी से चल रहा है. हाईटेक मॉनिटरिंग: – तेनार गांव के नागेंद्र प्रजापति निशुल्क ड्रोन सेवा देकर नदी के प्रवाह क्षेत्र का डिजिटल मूल्यांकन करने में मदद कर रहे हैं. कॉर्पोरेट और जनता का साथ:- रेहला स्थित ग्रासिम इंडस्ट्री ने सफाई के बाद छिड़काव के लिए 20 बोरी ब्लीचिंग पाउडर उपलब्ध कराया है, ताकि नदी के किनारों को सैनिटाइज किया जा सके.  

यूपी: प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की प्रगति का होगा नया आकलन सिस्टम

लखनऊ उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में इस समय गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं। 20 मई से स्कूल बंद हैं और 15 जून तक बंद रहेंगे। 16 जून को सत्र का पहला दिन होगा। इस दिन स्कूलों में छात्र-छात्राओं का स्वागत तो होगा ही, नए शैक्षिक सत्र से परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से तीन तक के विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति का नियमित आकलन करने के लिए निपुण तालिका तैयार करना अनिवार्य कर दिया गया है। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत लागू की जा रही यह व्यवस्था बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। निपुण तालिका के माध्यम से शिक्षकों को प्रत्येक छात्र की सीखने की प्रगति का रिकॉर्ड तैयार करना होगा। इसमें पढ़ना, लिखना, समझना तथा गणितीय दक्षताओं से संबंधित विभिन्न बिंदुओं का मूल्यांकन किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन से छात्र निर्धारित दक्षताओं को प्राप्त कर चुके हैं और किन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता है। इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अभिभावक अपने बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक प्रगति को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इस व्यवस्था में परीक्षा परिणामों के बजाय बच्चों द्वारा अर्जित दक्षताओं के आधार पर प्रगति का आकलन किया जाएगा। 27 दिनों का दिया गया है ग्रीष्मकालीन अवकाश इस साल प्रदेश के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय में 20 मई से 15 जून तक के लिए ही विद्यालय बंद रखे गए हैं। इस तरह इस बार छात्रों को कुल 27 दिन ग्रीष्मकालीन अवकाश मिले हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन्स और आधिकारिक आदेश के मुताबिक 15 जून तक गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के बाद 16 जून 2026 से सभी स्कूल दोबारा खोल दिए जाएंगे। इस दिन से बच्चे पहले की तरह नियमित रूप से अपनी कक्षाओं में लौटेंगे। स्कूलों को इस शेड्यूल के हिसाब से तैयारी करने का आदेश दिया है। नए सत्र के लिए स्कूल परिसरों को पहले से साफ-सुथरा और व्यवस्थित कर लिया जाएगा। सत्र के पहले दिन हमेशा की तरह विद्यालय में विद्यार्थियों का स्वागत किया जाएगा। क्या बोले बेसिक शिक्षा अधिकारी गोरखपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) धीरेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि निपुण तालिका के प्रभावी क्रियान्वयन से प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इसके आधार पर शिक्षक कमजोर छात्रों की पहचान कर उन पर विशेष ध्यान दे सकेंगे।

भीषण गर्मी में राहत, पीएचईडी के विशेष अभियानों से जलापूर्ति सुधरी

जयपुर  भीषण गर्मी के बीच प्रदेशवासियों को स्वच्छ, पर्याप्त एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील नेतृत्व एवं दूरदर्शी निर्देशों का सकारात्मक असर पूरे राजस्थान में दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता के अनुरूप जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा संचालित विशेष राज्यव्यापी अभियानों ने पेयजल व्यवस्थाओं को नई मजबूती प्रदान की है तथा हजारों परिवारों को राहत पहुंचाई है। सात विशेष अभियानों में 19 हजार से अधिक कार्य, पेयजल व्यवस्थाओं में ऐतिहासिक सुधार 5 अप्रैल से 6 जून तक आयोजित सात विशेष राज्यव्यापी अभियानों के दौरान प्रदेशभर में कुल 19,072 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए। इनमें 3,766 हैंडपंपों की मरम्मत, 2,236 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्ती, 1,219 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान, 1,390 बाधित जलापूर्ति मामलों का निस्तारण, 290 कम अवधि की जलापूर्ति, 688 कम सप्लाई, 181 प्रदूषित जल तथा 29 समय-सारणी संबंधी शिकायतों का समाधान शामिल है। इसके अतिरिक्त 7,466 अन्य सुधारात्मक कार्यों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया गया। एक दिन में 3 हजार से अधिक कार्य, विशेष टीमों ने दिखाई तत्परता शनिवार को आयोजित सातवें विशेष अभियान के दौरान विभागीय विशेष टीमों ने जिलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों, पाइपलाइन नेटवर्क और जलापूर्ति व्यवस्थाओं का व्यापक निरीक्षण कर समस्याओं का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया। अभियान के तहत 689 खराब हैंडपंप पुनः चालू किए गए, 592 पाइपलाइन लीकेज दुरुस्त किए गए, 241 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया तथा 246 क्षेत्रों में बाधित जलापूर्ति बहाल की गई। इसके अलावा 60 कम अवधि की जलापूर्ति, 144 कम सप्लाई और 60 प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का भी त्वरित निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर एक ही दिन में 3,077 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए गए। अवैध जल कनेक्शनों पर सख्त कार्रवाई, जल संरक्षण को मिला नया बल जल संसाधनों के संरक्षण एवं प्रभावी प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने अवैध जल उपयोग के खिलाफ भी व्यापक कार्रवाई की। सातवें अभियान के दौरान 426 अवैध जल कनेक्शन हटाए गए, जिनमें होटल, ढाबे, सरस डेयरी बूथ एवं कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे अवैध कनेक्शन शामिल थे। गौरतलब है कि सात अभियानों के दौरान अब तक कुल 1,827 अवैध जल कनेक्शन हटाए जा चुके हैं, जिससे जल की बर्बादी पर प्रभावी अंकुश लगा है और आमजन के लिए उपलब्ध पेयजल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को मिली नई मजबूती हैंडपंपों एवं पाइपलाइनों की मरम्मत के साथ-साथ 619 अन्य पेयजल सुधार कार्यों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया गया है। इन प्रयासों से हजारों परिवारों को गर्मी के इस कठिन दौर में राहत मिली है और पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता एवं उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। 30 जून तक जारी रहेंगे विशेष अभियान उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए विशेष राज्यव्यापी अभियान लगातार संचालित किए जा रहे हैं। आमजन को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा गर्मी के मौसम में जलापूर्ति व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से ये अभियान 30 जून तक निरंतर जारी रहेंगे।

लखनऊ पहले, इंदौर दूसरे, पटना तीसरे स्थान पर स्वच्छता फीडबैक रैंकिंग में

 पटना  स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के तहत शहरों की साफ-सफाई और नागरिक सुविधाओं को लेकर लोगों से ऑनलाइन सिटिजन फीडबैक लिया जा रहा है। रविवार दोपहर तक जारी आंकड़ों में पटना ने सात लाख से भी अधिक सिटिजन फीडबैक के साथ देशभर में तीसरा स्थान हासिल कर राज्य का मान बढ़ाया है। वहीं, बिहार के अन्य तीन स्मार्ट सिटी इस मामले में काफी पीछे दिखाई दे रहे हैं। सबसे अधिक 9,03,240 सिटिजन फीडबैक के साथ लखनऊ पहले स्थान पर है। दूसरे स्थान पर इंदौर है, जहां से 8,63,752 लोगों ने अपनी राय दी है। पटना को अब तक 7,05,036 सिटिजन फीडबैक मिले हैं और वह देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। खास बात यह है कि बिहार के शीर्ष-300 शहरों में पटना अकेला शहर है, जिसने उल्लेखनीय भागीदारी दर्ज कराई है। पटना को छोड़ दें तो राज्य के अन्य तीन स्मार्ट सिटी नागरिक भागीदारी के मामले में काफी पीछे हैं। मुजफ्फरपुर को अब तक केवल 6,003 फीडबैक मिले हैं। भागलपुर में यह संख्या 4,828 रही, जबकि बिहारशरीफ की स्थिति सबसे कमजोर दिखी और वहां केवल 901 लोगों ने फीडबैक दिया। बता दें कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 के सिटीजन फीडबैक में पटना ने देशभर में चौथा स्थान हासिल किया था। रैंकिंग तय करने में अहम योगदान स्वच्छता सर्वेक्षण में नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शहर की सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक शौचालय, सड़क सफाई और अन्य सुविधाओं पर लोगों की राय के आधार पर रैंकिंग तय की जाती है। पटना नगर निगम प्रशासन भी अधिक से अधिक लोगों से ऑनलाइन फीडबैक देने की अपील कर रहा है, ताकि शहर की वास्तविक स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर तरीके से सामने आ सके। स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक किए गए कार्यों का मूल्यांकन किया जा रहा है। वर्तमान में चल रहा फील्ड असेसमेंट निगम के लिए अहम माना जा रहा है। इस दौरान सिटीजन फीडबैक पोर्टल भी सक्रिय है। पोर्टल व एप के माध्यम से नागरिक दे सकते हैं फीडबैक पोर्टल cf.sbmurban.org या स्वच्छता एमओएचयूए एप के माध्यम से नागरिक फीडबैक दे सकते हैं। एक मोबाइल नंबर से केवल एक बार फीडबैक दर्ज होगा। केंद्रीय टीम के आन-फील्ड सत्यापन के दौरान भी नागरिकों से यही प्रश्न पूछे जा रहे हैं, जिसके अंक स्वच्छता सर्वेक्षण के कुल स्कोर में जोड़े जाएंगे। पूछे जा रहे 13 महत्वपूर्ण सवाल स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत शहरवासियों से साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े 13 प्रश्न पूछे जा रहे हैं। इनमें घर-दुकान से कचरा उठाव, सूखा-गीला कचरा पृथक्करण, नियमित सफाई व्यवस्था, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता, सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति, आरआरआर (रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल) सेंटर की जानकारी तथा शिकायत निवारण व्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं। 12,500 अंकों पर तय होगी नगर निकायों की रैंकिंग नगर निकायों की रैंकिंग कुल 12,500 अंकों के आधार पर तय होगी। इसमें ओडीएफ, वाटर प्लस एवं गार्बेज फ्री सिटी जैसे सर्टिफिकेशन के लिए 2,000 अंक निर्धारित किए गए हैं। वहीं, आन-ग्राउंड असेसमेंट को सबसे अधिक महत्व देते हुए इसके लिए 9,500 अंक तय किए गए हैं। इसके अतिरिक्त नागरिकों की सहभागिता और संतुष्टि को ध्यान में रखते हुए सिटीजन फीडबैक के लिए 1,000 अंक निर्धारित किए गए हैं।

19,024 फीट पर बिहार का परचम, शिवेंद्र का कमाल

बांकेबाजार गयाजी जिले के बांकेबाजार प्रखंड के फुलवरिया गांव निवासी शिवेंद्र वर्मा ने साहस, जुनून और दृढ़ संकल्प का अद्भुत परिचय देते हुए विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है. उन्होंने बाइक से कठिन हिमालयी मार्गों को पार कर दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल दर्रे उम्लिंग ला पास तक पहुंचने का गौरव हासिल किया है. पांच दिनों तक लगातार बाइक चलाकर हासिल की मंजिल शिवेंद्र वर्मा ने लगातार पांच दिनों तक बाइक से सफर करते हुए लेह-लद्दाख क्षेत्र की कई दुर्गम और ऊंची चोटियों को पार किया. 3 जून को उन्होंने समुद्र तल से लगभग 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित उम्लिंग ला पास पहुंचकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की. दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल दर्रे तक बाइक से पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है. BRO ने किया सम्मानित उनकी इस असाधारण उपलब्धि को मान्यता देते हुए सीमा सड़क संगठन (BRO) ने उन्हें मेडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया. यह सम्मान शिवेंद्र वर्मा की मेहनत, साहस और समर्पण का प्रतीक माना जा रहा है. गांव से लेकर जिले तक खुशी का माहौल शिवेंद्र वर्मा की सफलता की खबर मिलते ही फुलवरिया गांव समेत पूरे बांकेबाजार और गया जिले में खुशी की लहर दौड़ गई. ग्रामीणों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है. अमेरिकी कंपनी में हैं मैनेजर शिवेंद्र वर्मा वर्तमान में फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं. पर्वतीय क्षेत्रों और साहसिक यात्राओं के प्रति उनकी विशेष रुचि रही है. इसी जुनून और तैयारी के दम पर उन्होंने यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की. युवाओं के लिए बने प्रेरणा शिवेंद्र वर्मा की यह सफलता युवाओं को यह संदेश देती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस और निरंतर प्रयास के बल पर किसी भी कठिन लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. उनकी उपलब्धि ने गया ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार का गौरव बढ़ाया है.

0-2 की शर्मनाक हार के बाद PCB का बड़ा एक्शन, यूनुस खान बन सकते हैं नए टेस्ट कोच

नई दिल्ली बांग्लादेश के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज में 0-2 की शर्मनाक हार ने पाकिस्तान क्रिकेट में भूचाल ला दिया है. जिस टीम के खिलाफ जीत की उम्मीद की जा रही थी, उसी के हाथों क्लीन स्वीप होने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) अब बड़े बदलावों की तैयारी में जुट गया है़. हालात ऐसे हैं कि टेस्ट कप्तान शान मसूद और मुख्य कोच सरफराज अहमद दोनों की कुर्सी खतरे में बताई जा रही है. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी इस हार से बेहद नाराज हैं और टेस्ट टीम में व्यापक बदलाव चाहते हैं. बोर्ड अब सिर्फ खिलाड़ियों के प्रदर्शन की समीक्षा नहीं कर रहा, बल्कि टीम की पूरी नेतृत्व व्यवस्था में बदलाव पर विचार कर रहा है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पूर्व कप्तान यूनुस खान और मोहम्मद हफीज से संपर्क किया है. दोनों से राष्ट्रीय टीम में अहम जिम्मेदारियां संभालने को लेकर बातचीत की गई है. सूत्रों के मुताबिक पीसीबी के भीतर यह प्रस्ताव रखा गया है कि सरफराज अहमद को टेस्ट टीम के मुख्य कोच पद से हटाकर फिर से अंडर-19 और पाकिस्तान 'ए' टीम की जिम्मेदारी दी जाए. सरफराज को बांग्लादेश दौरे से ठीक पहले टेस्ट टीम का कोच बनाया गया था, लेकिन टीम का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका. एक सूत्र ने बताया, 'यूनुस खान और मोहम्मद हफीज दोनों की पीसीबी अधिकारियों से बातचीत हुई है. हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. …तो ये दिग्गज बनेगा नया टेस्ट कोच! पाकिस्तान के सबसे सफल टेस्ट बल्लेबाजों में शामिल यूनुस खान को टेस्ट टीम का अगला कोच बनाने की तैयारी है. हालांकि बताया जा रहा है कि उन्होंने पीसीबी के सामने कुछ स्पष्ट शर्तें रखी हैं और जब तक उन पर सहमति नहीं बनती, कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होगी. पीसीबी का मानना है कि टीम को फिर से मजबूत टेस्ट यूनिट बनाने के लिए ऐसे व्यक्ति की जरूरत है, जिसके पास अनुभव भी हो और खिलाड़ियों पर प्रभाव भी. सिर्फ कोच सरफराज अहमद ही नहीं, कप्तान शान मसूद का भविष्य भी अधर में लटका हुआ है. बांग्लादेश के खिलाफ मिली हार के बाद उनकी कप्तानी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि मसूद ने आगामी वेस्टइंडीज और इंग्लैंड सीरीज तक खुद को मौका देने की अपील की है, लेकिन बोर्ड के भीतर बदलाव की मांग लगातार मजबूत होती जा रही है. ऐसे में उनकी कप्तानी पर फैसला जल्द लिया जा सकता है. पूर्व कप्तान मोहम्मद हफीज को मुख्य चयनकर्ता और इंटरनेशनल क्रिकेट डिपार्टमेंट का प्रमुख बनाने पर भी विचार किया जा रहा है. हालांकि पीसीबी के कुछ अधिकारी इस फैसले को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं. दरअसल, हफीज पिछले कुछ महीनों में टीम और बोर्ड की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाते रहे हैं. ऐसे में उनके बोर्ड से जुड़ने पर नई बहस छिड़ सकती है. बोर्ड ने इस बीच राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में 49 खिलाड़ियों के लिए रेड-बॉल और व्हाइट-बॉल कैम्प का भी ऐलान किया है. पीसीबी का कहना है कि यह कैम्प आने वाली अंतरराष्ट्रीय और घरेलू चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. खिलाड़ियों को फिटनेस, तकनीक और मानसिक मजबूती पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. साथ ही कोचों और मेडिकल स्टाफ के साथ व्यक्तिगत सत्र भी आयोजित किए जाएंगे.

अफगानिस्तान पर कहर बनकर टूटा भारत, मुल्लांपुर टेस्ट ने तोड़े 8 साल पुराने रिकॉर्ड

 मुल्लांपुर भारत और अफगानिस्तान के बीच मुल्लांपुर में खेला गया एकमात्र टेस्ट मैच भारतीय क्रिकेट इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। टीम इंडिया ने अपनी पहली पारी में 564 रनों का विशाल स्कोर खड़ा करने के बाद अफगानिस्तान को दोनों पारियों में बैक-टू-बैक बेहद सस्ते में समेट दिया। इस ऐतिहासिक और घातक प्रदर्शन की बदौलत भारत ने टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में रनों के लिहाज से अपनी अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। आइए नजर डालते हैं टेस्ट क्रिकेट में भारत की पारियों के अंतर से मिली 5 सबसे बड़ी जीतों पर। पारी और 300 रनों से जीत (बनाम अफगानिस्तान, मुल्लांपुर, 2026) भारतीय टेस्ट इतिहास की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत मुल्लांपुर के महाराजा यादवेंद्र सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ आई है। पहली पारी में 8 विकेट पर 564 रन बनाकर पारी घोषित करने के बाद, भारतीय गेंदबाजों ने अफगानिस्तान की पहली पारी को 152 रन और दूसरी पारी को महज 112 रन पर ढेर कर दिया। अपनी ही कप्तानी के डेब्यू मैच में शुभमन गिल की अगुवाई वाली इस टीम ने विपक्षी टीम को फॉलोऑन देते हुए एक पारी और 300 रनों के अविश्वसनीय अंतर से धूल चटाई जो भारत की टेस्ट इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी जीत है। पारी और 272 रनों से जीत (बनाम वेस्टइंडीज, राजकोट, 2018) इस ऐतिहासिक मैच से पहले रनों के मामले में भारत की सबसे बड़ी टेस्ट जीत का रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के खिलाफ था। साल 2018 में राजकोट के मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने कैरेबियाई गेंदबाजों की जमकर धुनाई की थी। भारत ने इस मैच को एक पारी और 272 रनों के विशाल अंतर से अपने नाम किया था जिसे अब मुल्लांपुर टेस्ट के शानदार प्रदर्शन ने दूसरे स्थान पर धकेल दिया है। पारी और 262 रनों से जीत (बनाम अफगानिस्तान, बेंगलुरु, 2018) अफगानिस्तान की टीम के खिलाफ भारत का दबदबा नया नहीं है। इससे पहले साल 2018 में जब अफगानी टीम अपना ऐतिहासिक डेब्यू टेस्ट मैच खेलने बेंगलुरु आई थी तब भी भारतीय टीम ने उन्हें संभलने का कोई मौका नहीं दिया था। एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए उस मैच को भारत ने महज दो दिनों के भीतर एक पारी और 262 रनों के बड़े अंतर से जीतकर अपने नाम किया था। पारी और 239 रनों से जीत (बनाम बांग्लादेश, मीरपुर, 2007) भारतीय टीम की चौथी सबसे बड़ी टेस्ट जीत पड़ोसी देश बांग्लादेश के खिलाफ आई थी। साल 2007 में मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम ने खेल के हर विभाग में दमदार प्रदर्शन किया था। राहुल द्रविड़ की कप्तानी में खेलते हुए भारतीय टीम ने बांग्लादेशी सरजमीं पर मेजबान टीम को एक पारी और 239 रनों के करारे अंतर से शिकस्त दी थी। पारी और 239 रनों से जीत (बनाम श्रीलंका, नागपुर, 2017) जीत के इसी अंतर (पारी और 239 रन) के साथ भारतीय टीम ने साल 2017 में श्रीलंका को भी पटखनी दी थी। नागपुर में खेले गए इस टेस्ट मैच में विराट कोहली के दोहरे शतक और गेंदबाजों के सामूहिक प्रदर्शन की बदौलत भारत ने श्रीलंकाई टीम को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया था। यह जीत आज भी रनों के लिहाज से संयुक्त रूप से भारत की पांचवीं सबसे बड़ी टेस्ट जीत के रूप में दर्ज है।