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गंज थाने में हंगामा: महिला कार्यकर्ताओं ने स्याही फेंकी, पुलिस ने की कार्रवाई

अजमेर अजमेर में चर्चित स्याही कांड के बाद पुलिस अधिकारियों ने बड़ी कार्रवाई की है. कल, 30 नवंबर को अजमेर के गंज थाने में बीजेपी की महिला पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पुलिस के सामने ही एक कांग्रेस नेता के ऊपर स्याही फेंक दी थी. बीजेपी की कार्यकर्ताएं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बारे में अजमेर कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ के पदाधिकारी पीयूष सुराणा की एक पोस्ट का विरोध कर रहे थे. इसी मामले में पुलिस ने पीयूष सुराणा को हिरासत में लिया गया था. लेकिन पुलिस कस्टडी में ही कांग्रेस नेता के ऊपर स्याही फेंके जाने की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे. इसके बाद अब अजमेर के पुलिस अधीक्षक ने तत्काल एक्शन लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है. तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई अजमेर के एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल ने गुरुवार शाम को थाने में स्याही फेंके जाने की घटना के लिए गंज थाना प्रभारी महावीर सिंह, एक संतरी और ड्यूटी ऑफिसर को प्रथम दृष्टया ड्यूटी में लापरवाही मानते हुए लाइन हाजिर कर दिया है. इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है. साथ ही मामले की जांच की जा रही है. थाने में फेंक दी स्याही अजमेर कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ के पदाधिकारी पीयूष सुराणा को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ कथित अमर्यादित पोस्ट के मामले में गुरुवार को हिरासत में लिया गया था. यह कार्रवाई भाजपा पदाधिकारी की शिकायत पर गंज थाने में की गई. गिरफ्तारी के बाद भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारी गंज थाने पहुंचीं और विरोध प्रदर्शन के दौरान सुराणा पर स्याही फेंक दी. बीजेपी नेताओं पर मुकदमा थाने में स्याही फेंकने के मामले में सुराणा के छोटे भाई श्रेयांश सुराणा ने महिला मोर्चा से जुड़ी पदाधिकारियों के खिलाफ गंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया. अजमेर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सिटी) हिमांशु जांगीड़ ने बताया कि इस प्रकरण में दोनों पक्षों की ओर से मामले दर्ज किए गए हैं. दोनों मामलों की जांच दरगाह थाना प्रभारी दिनेश जीवनानी को सौंपी गई है. वहीं, पीयूष सुराणा ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि संबंधित फेसबुक पोस्ट से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उनकी आईडी का दुरुपयोग किया गया है.  पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है, जिसमें सोशल मीडिया अकाउंट की तकनीकी जांच भी शामिल है.

60+ उम्र वालों के लिए प्रीवेंटिव वैक्सीनेशन, रैबिज-हेपेटाइटिस बी टीका मुफ्त

देवघर स्वास्थ्य ही धन है। यह बात कोई आज की नहीं, जमाने से चली आ रही है। सेहत का ख्याल सबको करना चाहिए। कोरोना काल में असमय दुनियां को अलविदा कह गए लोगों से यह सीख मिली। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। भारत सरकार ने बच्चों का टीकाकरण शुरू किया। उसे अनिवार्य कर दिया गया। आज से चार दशक पहले बच्चों के टीकाकरण की कोई व्यवस्था नहीं थी। उस काल में जन्मे बच्चे जिनकी उम्र आज 50 से अधिक हो गयी है। उनको ध्यान में रखकर व्यस्कों का टीकाकरण शुरू हुआ है। एक ही छत के नीचे व्यस्क टीकाकरण की सुविधा एम्स देवघर में शुरू की गयी है। एम्स देवघर पूर्वी भारत का पहला व्यस्क टीकाकरण केंद्र बन गया है। जहां व्यस्कों का टीकाकरण होगा। कुत्ता व सियार के काटने का इंतजार क्यों, पहले ले लें टीका आपकी उम्र 60 से अधिक हो गयी है तो निमोनिया से लड़ने के लिए टीका ले लें। कुत्ता और सियार काट ले तभी टीका लें यह जरूरी नहीं। अपने जान की सुरक्षा के लिए पहले ही टीका ले लें। खासकर वे लोग जो कुत्ता को पालते हैं। चिड़ियाघर में काम करते हैं। जंगल-झाड़ी में जाना उनकी मजबूरी होती है। तो वह प्रीवेंटिव तौर पर पहले से टीका ले सकते हैं। इसके लिए उनको एम्स के टीकाकरण ओपीडी में संपर्क करना होगा। रैबिज, हेपटाइटिस बी का टीका मुफ्त में मिलता है। यह वीडियो भी देखें येलो फीवर का भी मिलेगा टीका आने वाले समय में येलो फीवर से बचने के लिए टीका मिल जाएगा। इसकी तैयारी भी एम्स में चल रही है। इस टीका की सुविधा शुरू होने पर अफ्रीका जाकर नौकरी करने वाले को देवघर में टीका लेने की सुविधा मिल जाएगी। सरकार का यह निर्देश है कि भारत से अफ्रीका जाकर नौकरी करने वाले मजदूर, ड्राइवर अथवा अन्य पहले ही यह टीका ले लें। कारण अफ्रीका में येलो फीवर के चपेट में लोग आते हैं। एम्स ओपीडी में निबंधन कराकर ले सकते टीका की सुविधा एम्स ओपीडी में दिखाने के लिए सबसे पहले निबंधन कराना होगा। निबंधन शुल्क 40 रुपया है। उसके बाद 30 रुपया का एक पर्ची कटेगा जो व्यस्क टीकाकरण के ओपीडी के लिए होगा। यहां डॉ. अरशद अयूब और डॉ. सुनील पाणिग्रही मरीज को देखेंगे। यदि उनको उस संबंधित टीका की जरूरत समझी जाएगी तो उनको टीका का डोज दिया जाएगा। सभी टीका का अलग अलग डोज होता है। मरीज का कार्ड बन जाएगा और वह तय तिथि पर डोज ले सकेंगे। वयस्क टीका केंद्र पर उपलब्ध टीका एम्स के एसोसियेट प्रोफेसर डॉ. अरशद अयूब ने बताया कि देवघर एम्स में व्यस्क टीका केंद्र शुरू हुआ है। यह पूर्वी भारत का पहला केंद्र है। जहां व्यस्कों को टीका दिया जाएगा। अभी रैबिज, टीडी, सर्वाइकल कैंसर, हेपेटाइटिस ए और बी। निमोनिया, चिकन पाक्स, इनफ्लूऐंजा, टायफाइड का टीका उपलब्ध है। लोगों को अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए प्रीवेंटिव में ही टीका ले लेना चाहिए। जैसे इनफ्लूऐंजा का वायरस म्यूट करता रहता है। डीएनए बदल जाता है। ऐसे में टीका लेकर स्वस्थ रहा जा सकता है।

अपराधियों की पहचान छिपाने से रोकने के लिए जयपुर पुलिस ने कड़ा निर्देश जारी

जयपुर  जयपुर में समेत राजस्थान के बड़े शहरों में किराए पर मकान देकर पैसे कमाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन जयपुर में अब बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किरायेदार रखे तो मकान मालिक को जेल जाना पड़ सकता है. जयपुर पुलिस ने इस मामले में सख्त हिदायत दी है. पुलिस का कहना है कि किरायेदार रखने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन जरूर करवाएं. दरअसल, पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि बाहरी राज्य के अपराधी जयपुर में अपनी पहचान छिपाकर फरारी काट रहे हैं. ऐसे में जाने-अनजाने में मकान मालिक ऐसे अपराधियों का सहयोग कर रहे हैं. ऐसे में पुलिस वेरिफिकेशन का मुद्दा काफी चर्चाओं में है. जयपुर में बिना पुलिस वेरिफ़िकेशन के किरायदार रखना आपको दुविधा में डाल सकता है. नियमानुसार किरायदार रखने से पहले उसका पुलिस वेरिफ़िकेशन करवाना बेहद ज़रूरी है. इसके लिए राज कॉप पुलिस सिटीज़न ऐप या संबंधित स्थानीय थाने में इसकी सूचना देना अनिवार्य है. लेकिन इसकी पालना धरातल पर नहीं हो रही. इसी का फ़ायदा अपराधी उठा रहे हैं. मकान मालिक पर BNS 188 के तहत होगी कार्रवाई पुलिस ने बताया कि पुलिस वेरिफ़िकेशन के दौरान किराएदार का नाम पता घर का एड्रेस पूरा बैकग्राउंड यहां तक कि आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में भी जानकारी मिल जाती है. लेकिन मकान मालिक द्वारा यह लापरवाही की जा रही है उधर पुलिस का कहना है कि बिना पुलिस वेरिफ़िकेशन किये बिना मकान देने पर मकान मालिक पर BNS 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी. जयपुर में पहले भी हो चुकी है घटना पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ऐसे कई अपराधी है जो बिना वेरिफ़िकेशन के जयपुर में रह रहे हैं और उनका मक़सद जयपुर में वारदात करना है. पिछले दिनों बिंदायका थाना पुलिस ने रोहित गोदारा गैंग से जुड़े कुछ शूटर को गिरफ़्तार किया था. वह बिना पुलिस वेरिफ़िकेशन के रह रहे थे तो वहीं जवाहर सर्किल में प्रेगनेंट महिला से छेड़छाड़ का आरोपी राहुल भी बिना पुलिस वेरिफ़िकेशन के अपनी पहचान छुपाकर किराये के मकान में रह रहा था. वहीं आतंकी खरगोश भी जयसिंह पुरा खोर इलाक़े में एक साल तक जयपुर में रहा वह सहजाद नाम से यहां पर रहा और उसका पुलिस वेरिफ़िकेशन नहीं करवाया गया था. वहीं दो दिन पहले वैशाली थाना पुलिस ने आरोपी अबू-बकर को गिरफ़्तार किया था जो म्यांमार का रहने वाला है, और बिना पुलिस वेरिफ़िकेशन के रह रहा था. इन सभी मामलों में मकान मालिक की लापरवाही सामने आयी इसके लिए अब जयपुर में पुलिस वेरीफिकेशन करवाना अनिवार्य कर दिया. अगर किरादार ने कोई बड़ी वारदात की तो इसकी ज़िम्मेदारी मकान मालिक की रहेगी पुलिस  मकान मालिक पर भी एक्शन लेगी.

डॉ. बी.आर. आंबेडकर मूर्ति विकास योजना: पार्कों में नई छत्र, बाउंड्री और रोशनी का प्रावधान

फिरोजाबाद  यूपी के फिरोजाबाद सुहागनगरी में कहीं पर बगैर छतरी के आंबेडकर की प्रतिमा है तो कहीं पर पार्क की बाउंड्रीवॉल टूटी पड़ी है, लेकिन अब इनकी दशा बदलेगी। फिरोजाबाद के करीब 50 पार्कों के दिन बदलने वाले हैं। यूपी सरकार का ध्यान अब आंबेडकर पार्क की तरफ गया है तथा डॉ.बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना के तहत इन पार्कों के सौंदर्यीकरण के निर्देश दिए हैं। यूपी सरकार के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने सभी मंडलायुक्त को पत्र भेजा है जो जिला स्तर पर भी पहुंच गया है। पत्र में कहा है कि समाज सुधारकों एवं सांस्कृतिक विभूतियों की मूर्तियां राष्ट्री की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत है। वर्तमान में कई प्रतिमाएं स्थापित हैं, लेकिन कहीं पर छत्र नहीं है तो कहीं पर बाउंड्री। मौसम की मार के साथ अतिक्रमण भी होता है। प्रतिमाओं की गरिमा भी प्रभावित होती है। इसे देखते हुए डॉ.बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना को लागू किया है। इसके तहत इनका सौंदर्यीकरण किया जाएगा। जिले स्तर पर भी इसके तहत कार्य किया जाएगा। इसके साथ में लोगों में जनजागरूकता फैलाई जाएगी, ताकि लोगों में सामाजिक न्याय के ध्वज वाहक डॉ.आंबेडकर एवं महान विभूतियों के प्रति सम्मान की भावना विकसित हो सके। कहीं मूर्ति हुई जीर्ण-शीर्ण तो लगाएंगे नई मूर्ति योजना के तहत निर्देश दिए हैं कि अगर कहीं पर पुरानी लगी हुई मूर्ति जीर्ण शीर्ण हो गईहै तो उसके स्थान पर नई मूर्ति भी लगाई जा सकती है। हर विधानसभा में दस-दस पार्क, मिलेंगे एक करोड़ योजना के तहत हर विधानसभा में दस-दस आंबेडकर पार्क का चयन किया जाएगा। एक पार्क के सौंदर्यीकरण पर करीब दस लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। हालांकि जिले को अभी तक बजट करीब एक करोड़ रुपये की ही स्वीकृति हुई है। बीते दिनों विभागीय बैठक में मंत्री ने इस संबंध में निर्देश दिए। इस स्थिति में जिला प्रशासन अपने स्तर से परीक्षण करेगा कि किस पार्क में कितनी धनराशि खर्च हो। स्थल निरीक्षण के बाद होगा चयन इसके लिए पहले आवेदन मांगे जाएंगे। इसके बाद में अधिकारी पार्क में पहुंच कर स्थिति का जायजा लेंगे। स्थलीय निरीक्षण के बाद आने वाले आवेदनों में विकास संबंधी आगणन डीएम द्वारा चिन्हित कार्यदायी संस्थाओं द्वारा किया जाएगा। जिसकी मांग शासन को भेजी जाएगी। यह होंगे कार्य ● टिकाऊ एवं मौसम प्रतिरोधी छत्र का निर्माण। ● अनाधिकृत प्रवेश रोकने के लिए पांच फीट ऊंची बॉउंड्रीवाल, रेलिंग या फेसिंग। ● हरित क्षेत्र का निर्माण। ● मूर्ति के प्लेटफॉर्म का निर्माण। ● बेंच एवं पाथ वे की व्यवस्था। ● रात्रि में प्रकाश की व्यवस्था। ● मूर्ति के नाम एवं इतिहास को संक्षिप्त रूप से प्रदर्शिता करता हुआ बोर्ड। लेखक के बारे में

रूस के फिल्ममेकर पाशा तलांकिन का ऑस्कर एयरपोर्ट पर गायब, सुरक्षा ने ट्रॉफी को हथियार समझा

रूस के फिल्ममेकर पाशा तलांकिन ने इस साल बेस्ट फीचर डॉक्यूमेंट्री का अवॉर्ड जीता था। उन्हें ‘मिस्टर नोबडी अगेंस्ट पुतिन’ के लिए ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था, लेकिन हाल ही में एक अजीब और चौंकाने वाली घटना हुई। जानिए क्या है पूरा मामला। सिक्योरिटी ने अवॉर्ड को समझा हथियार रूस के फिल्ममेकर पाशा तलांकिन, जो ऑस्कर जीतने वाली डॉक्यूमेंट्री ‘मिस्टर नोबडी अगेंस्ट पुतिन’ के को-डायरेक्टर हैं, उन्हें न्यूयॉर्क के जेएफके एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी ने अवॉर्ड के साथ फ्लाइट में चढ़ने नहीं दिया। बताया गया कि सिक्योरिटी अधिकारियों ने ऑस्कर ट्रॉफी को हथियार समझ लिया। यह ट्रॉफी करीब 3.8 किलो की होती है। तलांकिन ने कहा कि वह मार्च में अवॉर्ड जीतने के बाद कई बार फ्लाइट में इसे साथ ले जा चुके हैं, लेकिन पहले कभी कोई समस्या नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर ऑस्कर को हथियार कैसे माना जा सकता है। एयरलाइन के एक कर्मचारी ने मदद की कोशिश भी की, लेकिन सिक्योरिटी ने कोई भी बात मानने से इनकार कर दिया। पैक करके भेजने पर हुआ गायब आखिरकार, मजबूरी में तलांकिन को अपनी ट्रॉफी कार्गो में भेजनी पड़ी। एयरलाइन स्टाफ ने इसे बॉक्स में पैक कर भेजा, लेकिन जब वह जर्मनी के फ्रैंकफर्ट पहुंचे, तो उनका ऑस्कर वहां नहीं मिला। फिल्म की एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर रॉबिन हेसमैन ने बताया कि एयरलाइन के पास बॉक्स का रिकॉर्ड होने के बावजूद ट्रॉफी का पता नहीं चल पाया है। एयरलाइन ने इस मामले पर बयान जारी कर कहा कि उन्हें इस घटना का अफसोस है और वे ट्रॉफी को जल्द से जल्द ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। बता दें कि यह फिल्म इस साल बेस्ट फीचर डॉक्यूमेंट्री का ऑस्कर जीत चुकी है, जिसे डेविड बोरेनस्टीन और तलांकिन ने मिलकर बनाया है। 

पोटापोवा ने मैड्रिड ओपन में प्लिस्कोवा को हराकर नया कीर्तिमान स्थापित किया

 रायटर अनास्तासिया पोटापोवा ने निराशा को इतिहास में बदलते हुए डबल्यूटीए 1000 टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली खिलाड़ी बनकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने मैड्रिड ओपन में करोलिना प्लिस्कोवा को 6-1, 6-7(4), 6-3 से हराया। अब सेमीफाइनल में पोटापोवा का सामना मार्ता कोस्ट्युक से होगा, जिन्होंने लिंडा नोस्कोवा को 7-6(1), 6-0 से हराया। कोस्ट्युक ने पिछले साल मैड्रिड में चौथे दौर में पोटापोवा को हराया था। दिखाया शानदार खेल रूस में जन्मी ऑस्ट्रियाई खिलाड़ी ने मुख्य ड्रॉ में मिले अप्रत्याशित मौके का पूरा फायदा उठाया और उतार-चढ़ाव भरे मुकाबले में पूर्व विश्व नंबर-1 प्लिस्कोवा को चौंका दिया, जबकि उन्होंने तीन मैच प्वाइंट भी गंवाए। पोटापोवा के इस शानदार सफर में फ्रेंच ओपन की पूर्व चैंपियन जेलिना ओस्टापेंको और विश्व नंबर-2 एलेना रिबाकिना पर जीत भी शामिल है। जब उनसे पूछा गया कि क्या क्वालिफाइंग में हार के बाद उन्होंने सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद की थी तो बिना वरीयता वाली पोटापोवा ने कहा नहीं, बिल्कुल नहीं किसी भी कीमत पर नहीं। यही हमारे खेल को खूबसूरत बनाता है। मुझे दूसरा मौका मिला और अब मैं यहां हूं। मैं बहुत खुश हूं। इस समय मेरे जीवन में इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। प्लिस्कोवा ने की वापसी की कोशिश मैच में पहले सेट में आसानी से जीत हासिल करने के बाद पोटापोवा दूसरे सेट में तीन मैच प्वाइंट हासिल कर आसान जीत की ओर बढ़ती दिख रही थीं। लेकिन प्लिस्कोवा ने जोरदार वापसी करते हुए मैच को टाईब्रेक तक पहुंचाया और स्कोर बराबर कर दिया। निर्णायक सेट में पोटापोवा 3-1 से पीछे थीं, लेकिन उन्होंने लगातार पांच गेम जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया और 10वें ऐस के साथ जीत दर्ज की।  

पहली बार ऑनलाइन जनगणना सुविधा शुरू, 15 मई तक खुद भर सकेंगे नागरिक डेटा

जयपुर  राजस्थान में आज यानी 1 मई 2026 से जनगणना 2027 के पहले चरण 'हाउस लिस्टिंग' की शुरुआत हो गई है. प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) ने जयपुर में सबसे पहले अपना स्व-गणना (Self Enumeration) प्रपत्र भरकर इस राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया है. सीएम ने सोशल मीडिया के जरिए प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं. उन्होंने कहा, 'सटीक जानकारी ही सरकार की योजनाओं को हर पात्र नागरिक तक पहुंचाने में मदद करेगी.' सीएम ने खुद ऑनलाइन फॉर्म भरकर यह संदेश भी दिया कि तकनीक के माध्यम से समय की बचत की जा सकती है. आज से प्रदेश में प्रारंभ हो रही जनगणना के प्रथम चरण ‘हाउस लिस्टिंग' प्रक्रिया के अंतर्गत, मैंने अपना स्वयं-गणना (Self Enumeration) प्रपत्र भरा।  यह प्रक्रिया सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को हर पात्र नागरिक तक प्रभावी रूप से पहुँचाने तथा प्रदेश के समग्र विकास के लिए सटीक नीतियाँ… पहली बार घर बैठे खुद गणना करने की सुविधा इस बार की जनगणना बेहद खास है क्योंकि पहली बार नागरिकों को वेब पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी खुद भरने का विकल्प दिया गया है. सभी नागरिक 1 मई से 15 मई के बीच http://se.census.gov.in पर जाकर अपनी डिटेल खुद भर सकते हैं. अगर आप खुद फॉर्म भरते हैं, तो जब कर्मचारी आपके घर आएंगे, तो आपको लंबी कागजी कार्यवाही नहीं करनी होगी, बस अपनी SE ID दिखानी होगी. 16 मई से 14 जून तक कर्मचारी घर-घर जाकर डेटा वेरिफिकेशन और मकानों की लिस्टिंग करेंगे. तैयार रखें इन 33 सवालों के जवाब जनगणना कर्मचारी जब आपके घर पहुंचेंगे, तो वे आपसे कुल 33 सवाल पूछेंगे. इनमें प्रमुख हैं:- मकान का नंबर, फर्श, दीवार और छत किस सामग्री से बनी है? परिवार के मुखिया का नाम, जेंडर और क्या वे एससी/एसटी वर्ग से हैं? मकान अपना है या किराए का? परिवार के पास रहने के लिए कितने कमरे हैं? पीने के पानी और रोशनी का मुख्य स्रोत क्या है? शौचालय की सुविधा, गंदे पानी की निकासी और रसोईघर की क्या व्यवस्था है? खाना पकाने के लिए कौन सा ईंधन (LPG/PNG) इस्तेमाल होता है? घर में टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप, स्मार्टफोन, साइकिल, कार या बाइक जैसी कितनी सुविधाएं मौजूद हैं? परिवार मुख्य रूप से खाने में किस अनाज का इस्तेमाल करता है?

बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता: राजस्थान शिक्षा विभाग ने प्रार्थना सभा, पेयजल और पहनावे में बदलाव किए

जयपुर राजस्थान में आसमान से बरसती आग और झुलसा देने वाली लू के बीच स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश का शिक्षा विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। बुधवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी एक विशेष आदेश ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली को बदल दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक पारा नीचे नहीं आता, तब तक स्कूलों को नई गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा। अब भारी यूनिफॉर्म से आजादी इस नए आदेश के तहत सबसे बड़ी राहत बच्चों को उनके पहनावे में दी गई है। अब भीषण गर्मी में छात्रों को भारी-भरकम और गहरे रंग की स्कूल यूनिफॉर्म पहनने की मजबूरी नहीं होगी। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे बच्चों को हल्के सूती कपड़े पहनकर आने की अनुमति दें, ताकि गर्मी के कारण होने वाली घबराहट और हीटस्ट्रोक से बचा जा सके। आउटडोर गतिविधियों पर 'नो एंट्री' सूरज के तीखे तेवरों को देखते हुए स्कूलों में होने वाली तमाम आउटडोर एक्टिविटीज, खेलकूद और धूप में होने वाले कार्यक्रमों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अब मैदानों में पीटीआई क्लास या खेल प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं की जाएंगी। क्लासरूम में होगी प्रार्थना सभा और पानी की सख्ती स्कूलों में हर सुबह होने वाली प्रार्थना सभा के स्वरूप में भी बदलाव किया गया है। अब असेंबली का समय कम कर दिया गया है और स्कूलों को हिदायत दी गई है कि प्रार्थना या तो किसी छायादार स्थान पर कराएं या फिर सीधे क्लासरूम के भीतर ही आयोजित की जाए। विभाग ने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि छुट्टी के समय घर जाते वक्त बच्चों के पास ठंडे पानी की पर्याप्त उपलब्धता रहे। जल्दी छुट्टियों पर लगा विराम अभिभावकों और शिक्षकों के बीच जल्दी गर्मियों की छुट्टियों को लेकर जो उम्मीदें थीं, उन पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने फिलहाल विराम लगा दिया है। मंत्री दिलावर ने स्पष्ट किया है कि स्कूल अपने तय शेड्यूल के अनुसार ही चलेंगे। उन्होंने इसके पीछे शैक्षणिक लक्ष्यों का तर्क देते हुए कहा, 'हमारा लक्ष्य है कि छुट्टियों से पहले 20% सिलेबस पूरा कर बच्चों का टेस्ट लिया जाए, ताकि वे अवकाश के दौरान उसका रिवीजन कर सकें।' प्रदेश में स्कूल की छुट्टियां 16 मई से 21 जून तक ही रहेंगी, जबकि कॉलेजों में 1 मई से ही अवकाश शुरू हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग भी 'हाई अलर्ट' पर गर्मी के इस संकट से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग भी मैदान में उतर गया है। गुरुवार से शनिवार तक प्रदेश के सभी जिलों में विशेष स्वास्थ्य टीमें तैनात की गई हैं, जो अस्पतालों में लू से निपटने की तैयारियों और दवाओं के स्टॉक का निरीक्षण करेंगी। साथ ही, फूड सेफ्टी अधिकारी सार्वजनिक स्थानों और हॉस्टलों में खाने-पीने की गुणवत्ता की जांच करेंगे ताकि भीषण गर्मी में संक्रमण को रोका जा सके।

फेसबुक विज्ञापन से लखपति बनने का सपना बना जाल, ‘ट्रैक्टर नोट’ स्कैम का खुलासा

 अजमेर क्या आपके पास भी वह पुराना 5 रुपये वाला नोट है, जिसके पीछे ट्रैक्टर चलाता हुआ किसान बना है? अगर हां, तो सावधान हो जाइए! जिसे आप अपनी 'किस्मत की चाबी' समझ रहे हैं, वही आपकी जमा-पूंजी साफ करने का जरिया बन सकता है. राजस्थान के अजमेर जिले में एक महिला के साथ ऐसा ही हुआ, जहां एक फेसबुक विज्ञापन ने उसे लखपति बनाने का सपना दिखाकर लाखों का चूना लगा दिया. फेसबुक पोस्ट ने दिखाया '48 लाख' का सपना मामला अजमेर के पॉश इलाके शास्त्री नगर का है. यहां रहने वाली एक महिला ने फेसबुक पर एक लुभावना विज्ञापन देखा. विज्ञापन में दावा किया गया था कि अगर किसी के पास 'ट्रैक्टर वाला' पुराना 5 रुपये का नोट है, तो उसके बदले उसे 48 लाख रुपये मिल सकते हैं. महिला इस विज्ञापन के झांसे में आ गई और दिए गए नंबर पर संपर्क किया. ठगों ने बुना बातों का जाल महिला ने जैसे ही संपर्क किया, ठगों ने खुद को एक बड़ी पुरानी मुद्रा (Antique Currency) खरीदने वाली कंपनी का प्रतिनिधि बताया. उन्होंने महिला का भरोसा जीतने के लिए फर्जी दस्तावेज और आईडी कार्ड्स तक दिखाए. महिला को यकीन दिलाया गया कि उसका 5 रुपये का नोट वाकई 'दुर्लभ' है और उसे 48 लाख रुपये दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. किश्तों में पार किए 3.66 लाख रुपये ठगी का खेल तब शुरू हुआ जब ठगों ने 'प्रोसेसिंग फीस' के नाम पर पैसे मांगना शुरू किया. महिला से कभी GST, कभी रजिस्ट्रेशन शुल्क, तो कभी फाइल चार्ज और ट्रैवलिंग चार्ज के नाम पर किश्तों में पैसे ट्रांसफर करवाए गए. महिला को बार-बार आश्वासन दिया गया कि बस यह आखिरी चार्ज है, इसके बाद 48 लाख सीधे खाते में आ जाएंगे. लालच और उम्मीद में महिला पैसे भेजती रही. जब तक महिला को ठगी का अहसास हुआ, वह कुल 3 लाख 66 हजार रुपये ठगों के खातों में जमा कर चुकी थी. साइबर थाना जांच में जुटा जब महिला को न तो पैसे मिले और न ही प्रतिनिधि का फोन लगा, तब उसे ठगी का अहसास हुआ. पीड़िता ने अजमेर के साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है. डीवाईएसपी शमशेर खान ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जिन बैंक खातों में पैसे भेजे गए हैं, उनकी डिटेल खंगाली जा रही है.

राजस्थान में 70,000 छात्रों का AI से एग्जाम एनालिसिस, अब ‘स्कोर कार्ड’ की जगह ‘स्किल्स कार्ड’

जोधपुर राजस्थान के जोधपुर जिले में शिक्षा और तकनीक का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. जिले के सरकारी स्कूलों में शुरू की गई एक एआई (Artificial Intelligence) आधारित प्रायोगिक परियोजना ने छात्रों के मूल्यांकन और रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की पारंपरिक व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया है. अब शिक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए घंटों पसीना नहीं बहाना पड़ता, बल्कि एआई प्रणाली महज कुछ ही सेकंड में यह काम पूरा कर रही है. लाखों उत्तर पुस्तिकाओं का 'सुपरफास्ट' मूल्यांकन 'योग्यता-आधारित मूल्यांकन और स्कूल रिपोर्टिंग प्रायोगिक परियोजना' के दूसरे चरण के तहत एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है. अधिकारियों के मुताबिक, कक्षा 6 से 9 तक के 70,000 से अधिक छात्रों का मूल्यांकन किया गया. इसमें हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के 5 मुख्य विषयों (हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान) में कुल 3 लाख से अधिक टेस्ट पेपर जांचे गए. जहां पहले इस पूरी प्रक्रिया में कई हफ्ते लग जाते थे, वहीं अब शिक्षकों के जरिए ऐप से स्कैन की गई कॉपियों का परिणाम मात्र 3 दिनों केअंदर विस्तार  के साथ तैयार हो जाता है. स्कोर कार्ड नहीं, अब 'स्किल्स कार्ड' की बारी इस नई प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत इसका सूक्ष्म विश्लेषण है. अधिकारियों ने कहा कि कुल अंकों पर निर्भर रहने के बजाय, मूल्यांकन अब विशिष्ट दक्षताओं पर आधारित है. उदाहरण के तौर पर यदि कोई छात्र सांख्यिकी में बेहतर है लेकिन भाषा की समझ में कमजोर है, तो रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख रहता है. रिपोर्ट कार्ड में छात्र के सुधार के लिए विषय-वार विस्तृत जानकारी दी जाती है, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों को सटीक दिशा मिलती है. प्रशासन का विजन, 1000 स्कूलों तक विस्तार मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रजनी शेखावत ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम जिले के सभी 15 ब्लॉक के 1,000 से अधिक स्कूलों में लागू है. इसकी शुरुआत अक्टूबर 2025 में पहले चरण के रूप में जोधपुर ब्लॉक के अंग्रेजी माध्यम के 54 सरकारी स्कूलों में की गई थी, जिसमें छठी से आठवीं कक्षा तक के 3,000 से अधिक छात्रों को शामिल किया गया था. इस प्रक्रिया में शिक्षक एक विशेष ऐप के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करते हैं, जिसके बाद एआई प्रणाली उत्तरों का मूल्यांकन करती है.