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‘नौवें बम’ मामले में सरवर और शाहबाज की स्टे अपील खारिज, जेल में रहेंगे उम्रकैद

 जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2008 में हुए जयपुर सीरियल बम धमाकों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दो दोषियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है. जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने शुक्रवार को मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद की उस अर्जी (स्टे एप्लीकेशन) को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी. क्या है 'नौवें बम' का मामला? 13 मई 2008 को जयपुर में हुए सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था. इन धमाकों में 71 बेगुनाहों की जान गई थी, और 185 लोग घायल हुए थे. पुलिस को चांदपोल बाजार के पास एक 9वां बम भी मिला था, जिसे फटने से महज 15 मिनट पहले डिफ्यूज कर दिया गया था. इसी 'जिंदा बम' मामले में विशेष अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है. 'जब 8 केस में बरी, तो यहां क्यों नहीं?' दोषियों के वकील ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट पहले ही मुख्य 8 ब्लास्ट मामलों में उन्हें बरी कर चुका है. ऐसे में 'जिंदा बम' मामले में भी उन्हें राहत मिलनी चाहिए. उन्होंने दलील दी कि अपील पर सुनवाई में लंबा समय लग सकता है, इसलिए उनकी सजा पर रोक लगाकर उन्हें जमानत दी जाए. ई-मेल बना मुख्य सबूत राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए इन दलीलों का पुरजोर विरोध किया गया. सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता और अतिरिक्त साक्ष्य मौजूद हैं. धमाकों के तुरंत बाद दो न्यूज चैनलों को ई-मेल भेजकर इन लोगों ने धमाकों की जिम्मेदारी ली थी. ई-मेल के जरिए धमाकों को 'सही' ठहराना इनके शामिल होने का बड़ा प्रमाण है. अदालत का फैसला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल सजा पर रोक लगाना सही नहीं होगा. इस फैसले के बाद अब सरवर और शाहबाज को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा.

बोकारो-हजारीबाग में डिजिटल सेंधमारी, रिटायर्ड कर्मियों के नाम पर फर्जी भुगतान

रांची  झारखंड के बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा जिलों में पुलिसकर्मियों के वेतन के नाम पर करोड़ों की अवैध निकासी ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है। सीआइडी की विशेष जांच टीम (SIT) की तफ्तीश में जो खुलासे हो रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। ऐसे हुआ 'डिजिटल सेंधमारी' का खेल जांच में सामने आया है कि इस पूरे महाघोटाले की धुरी 'ओटीपी' (OTP) और अधिकारियों का अपने अधीनस्थों पर अंधविश्वास रहा है। एसआइटी के अनुसार, पुलिसकर्मियों के वेतन निर्माण के लिए एक विशेष पोर्टल का उपयोग होता है, जिसमें जिले के स्वीकृत बल का पूरा डेटाबेस होता है। स पोर्टल पर किसी भी तरह के बदलाव- जैसे जन्मतिथि सुधारना या बैंक खाता नंबर बदलना। इसके लिए संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) के रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक ओटीपी आता है। कमजोर कड़ी बना दिया सुरक्षा चक्र को घोटालेबाजों ने इसी सुरक्षा चक्र को सबसे कमजोर कड़ी बना दिया। जांच में पाया गया कि जिले के डीडीओ (आमतौर पर डीएसपी स्तर के अधिकारी) अन्य पुलिसिंग कार्यों में व्यस्त रहते थे। बार-बार ओटीपी बताने के झंझट से बचने के लिए उन्होंने अपना मोबाइल और मास्टर लॉग-इन का एक्सेस लेखापालों (Accountants) को दे दिया। इसी भरोसे का फायदा उठाकर लेखापालों ने पूरा सिस्टम हैक कर लिया। रिटायर्ड कर्मी बन गए 'कमाऊ पूत' धोखाधड़ी का तरीका बेहद शातिर था। लेखापालों ने उन पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया जो रिटायर हो चुके थे।         जन्मतिथि में हेरफेर: मास्टर लॉगइन के जरिए रिटायर्ड कर्मियों की उम्र कागजों में 2 से 4 साल कम कर दी गई ताकि वे रिकॉर्ड में कार्यरत दिखें।         खाता नंबर का खेल: पोर्टल पर संबंधित कर्मी के मूल खाते की जगह लेखापाल ने अपने रिश्तेदारों और करीबियों के बैंक खाते फीड कर दिए।         दोहरा लाभ: हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ वह कर्मी अपने मूल दस्तावेजों पर पेंशन ले रहा था, वहीं दूसरी तरफ उसके फर्जी वर्किंग रिकॉर्ड के आधार पर वेतन की राशि सीधे घोटालेबाजों के खातों में जा रही थी। एसआइटी की रडार पर विश्वासघात बोकारो के गिरफ्तार लेखापाल कौशल कुमार पांडेय और हजारीबाग के शंभू कुमार से पूछताछ में इस मॉडस ऑपेरंडी (काम करने का तरीका) की पुष्टि हुई है। एसआइटी अब इस बिंदु पर जांच कर रही है कि क्या डीडीओ सिर्फ लापरवाह थे या फिर इस बंदरबांट में उनकी भी कोई गुप्त हिस्सेदारी थी। फिलहाल, प्रथम दृष्ट्या यह भारी विश्वासघात का मामला प्रतीत हो रहा है, जिसने सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया है। जांच टीम सच्‍चाई को खंगालने में जुटी हुई है।  

केंदुआ में नया गोफ बनने से धनबाद-बोकारो मार्ग बंद, प्रशासन अलर्ट

धनबाद  कोयलांचल में जारी भारी बारिश ने एक बार फिर तबाही के संकेत दे दिए हैं। केंदुआ थाना अंतर्गत धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग पर बुधवार को एक बार फिर भीषण भू-धंसान (गोफ) हो गया। लगातार दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के बीच पूर्व में बने गोफ के ठीक बगल में एक नया विशाल गड्ढा बन गया है। इस गोफ में बारिश का पानी तेजी से समा रहा है, जिससे भूमिगत आग धधकने और गोफ का दायरा बढ़ने की आशंका प्रबल हो गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मुख्य मार्ग को दोनों ओर से बैरिकेडिंग कर पूरी तरह बंद कर दिया है। महाप्रबंधक जीसी साहा ने कहा कि राजपूत बस्ती, पुराना जीएम बांग्ला एवं इसके आसपास के क्षेत्र में दरारें बढ़ रही है और खतरा बढ़ता जा रहा है। मालूम हो कि धनबाद बोकारो मुख्य सड़क से आवागमन 15 दिनों से ठप है यातायात, बढ़ी मुश्किलें ज्ञात हो कि यह मार्ग पिछले 15 दिनों से बंद है और वाहनों को अन्य रास्तों से डायवर्ट किया गया है। नए भू-धंसान ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी है, जिससे राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों की कमर टूट गई है। सड़क के अस्तित्व पर आए इस संकट ने धनबाद और बोकारो के बीच के संपर्क को पूरी तरह जोखिम में डाल दिया है। यह वीडियो भी देखें आक्रोश: प्रशासन और बीसीसीएल पर लापरवाही का आरोप बार-बार हो रही इन घटनाओं से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। जनप्रतिनिधियों ने इसके लिए जिला प्रशासन और बीसीसीएल (BCCL) प्रबंधन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। भाजपा विधायक राज सिन्हा, भाकपा माले के अरुप चटर्जी और आजसू नेता मंटू महतो समेत कई संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि अविलंब सड़क की मरम्मत और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। नेताओं का कहना है कि प्रबंधन सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है, जबकि आम जनता की जान जोखिम में है। खौफनाक इतिहास: गैस रिसाव से हो चुकी है मौतें     केंदुआ का यह इलाका लंबे समय से 'डेथ जोन' बना हुआ है।     15 अप्रैल: इसी स्थान पर सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया था।     पिछले साल 31 नवंबर: भूमिगत खदान में विस्फोट के बाद जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का रिसाव हुआ था, जिसकी चपेट में आने से तीन लोगों की जान चली गई थी। बीसीसीएल की चेतावनी: खाली करें इलाका बीसीसीएल प्रबंधन ने स्थिति को अनियंत्रित बताते हुए कहा है कि बारिश के कारण मिट्टी धंसने की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित क्षेत्र के पास रहना किसी बड़े हादसे को दावत देना है। अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की हिदायत दी है।     प्रबंधन और प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा जनता भुगत रही है। पहले गैस रिसाव से मौतें हुईं और अब पूरी सड़क पाताल में समाने को है। अगर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो हम चुप नहीं बैठेंगे। कृष्णा राउत, पार्षद प्रतिनिधि

रांची हाईकोर्ट सख्त: कस्टडी में मौत केस में जेल रिकॉर्ड न देने पर नाराजगी

 रांची  हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत में हिरासत में कथित यातना और मौत के मामले में दाखिल याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से जेल से युवक के स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। कहा गया कि जेल अधीक्षक के सेवानिवृत्त होने के कारण युवक के स्वास्थ्य से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सका है। उसे मंगवाने के लिए समय चाहिए। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते करते हुए मौखिक कहा कि दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बहाना नहीं बनाएं। अगर दस्तावेज ही प्रस्तुत करना था तो आज क्यों नहीं किया गया? अदालत ने 5 मई तक हर हाल में दस्तावेज पेश करने को कहा है। यदि दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया तो जेल आइजी और गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। मामले में सीजेएम पलामू ने मृतक युवक के खिलाफ दर्ज केस का मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत किया गया। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात सामने आई थी कि युवक को रिमांड पर लेने के लिए पलामू सीजेएम कोर्ट के यहां अस्पताल का प्रमाण पत्र दिया गया था उसमें कस्टडी के लिए फिट लिखा हुआ था, जिसके आधार पर पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया था। लेकिन सरकार के शपथ पत्र में छह मार्च 2025 को युवक का एक अन्य फिटनेस से संबंधित कागजात है, जिसमें युवक को घायल बताया गया है। कोर्ट ने इसको गंभीरता से लिया और सीजेएम पलामू से युवक के केस का मूल रिकार्ड मांगा था। प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया था कि एक मार्च 2025 को युवक महफूज अहमद को नवाबाजार में पुलिस पकड़ कर ले गई थी। हिरासत में लेकर उसके साथ मारपीट की गई। बाद में उसके खिलाफ पांकी थाना में केस दर्ज कर सीजेएम कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया। उस दौरान सीजेएम कोर्ट में पुलिस ने अस्पताल का एक सर्टिफिकेट भी प्रस्तुत किया था ,जिसमें युवक के घायल होने के बाद भी उसे फिट फार कस्टडी बताया गया था।

‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ ने फिर मारी बाज़ी, अनुपमा की घटती रेटिंग”

टेलीविजन पर हर हफ्ते कौनसे सीरियल का राज रहता है, इसकी जानकारी सामने आ चुकी है. गुरुवार को इस हफ्ते की टीआरपी रेटिंग्स का खुलासा हुआ है, जिसमें एक बार फिर एकता कपूर के सीरियल ने बाजी मारी है. क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2 सीरियल अपने सक्सेसफुल रन को कायम रखे हुए है. एकता के शो में इस हफ्ते हमने एक ऐसा ट्विस्ट देखा था, जिसने करोड़ों दर्शकों की दुनिया हिला दी थी. सीरियल में तुलसी के बेटे अंश गुजराल बने एक्टर आकाशदीप सहगल की एंट्री हुई. इस बार वो तुलसी के पोते बनकर आए और आते ही छा गए. हालांकि इस ट्विस्ट ने कई लोगों को सोचने पर मजबूर भी किया. उन्होंने मेकर्स की कास्टिंग चॉइस पर सवाल उठाए और उन्हें ट्रोल भी किया. टीआरपी लिस्ट में कौन कितने नंबर पर? इस हफ्ते की टीआरपी रेटिंग्स में क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2, 1.8 रेटिंग्स के साथ टॉप पर बना रहा. पिछले हफ्ते 2 रेटिंग के मुकाबले, इस बार दो अंकों का फर्क नजर आया. वहीं, जी टीवी के दो सीरियल्स वसुधा और गंगा माई की बिटिया 1.7 रेटिंग्स के साथ नंबर 2 और 3 पर बने दिखे. नंबर 4 और 5 पर स्टार प्लस के सीरियल अनुपमा और तुम से तुम तक थे, जिन्हें 1.6 रेटिंग्स मिली. वहीं इसके बाद- ये रिश्ता क्या कहलाता है 1.5, उड़ने की आशा 1.5, क्योंकि रिश्तों के भी रूप बदलते हैं 1.5 रेटिंग्स के साथ टॉप 10 में शामिल दिखे. नागिन 7, तारक मेहता का उल्टा चश्मा और लाफ्टर शेफ जैसे शोज ने भी इस हफ्ते की टीआरपी रेटिंग्स में अपनी जगह बनाई रखी. अनुपमा की घटती टीआरपी रूपाली गांगुली का शो अनुपमा हर हफ्ते टीआरपी के मामले में कम-ज्यादा होता नजर आता है. पिछले हफ्ते इसकी टीआरपी रेटिंग 1.8 थी, जो अब घटकर 1.6 हुई. एक समय था जब अनुपमा को टीआरपी चार्ट में कोई सीरियल टक्कर नहीं दे पाता था. यहां तक कि जब टीआरपी किंग कहा जाने वाला शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' टीवी पर आया था, तब भी अनुपमा टॉप पर था. लेकिन अब ये शो टॉप 3 में भी जगह बनाने के लिए स्ट्रगल करता दिख रहा है. मेकर्स की बनाई हुई कहानी शायद अब ऑडियंस को उतनी रास नहीं आ रही, जैसे पहले आती थी.

गर्मियों में आयुर्वेदिक स्किनकेयर: वात, पित्त और कफ के अनुसार सही देखभाल

गर्मी ने धीरे-धीरे अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। इस मौसम में मेरे पास आने वाले कई लोग ऑयलीनेस बढ़ने, मुंहासे से लेकर टैनिंग होने, सेंसिटिविटी बढ़ने और स्किन डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं लेकर आते हैं। आयुर्वेद कहता है कि इसके लिए कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की जगह चंदन, उशीरा, लोध्र, त्रिफला और यष्टिमधु जैसी औषधीय गुणों से भरपूर चीजों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक बरकरार रहने वाले सकारात्मक परिणाम पाए जा सकते हैं। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि आयुर्वेद सिर्फ ऊपरी चीजें देखकर इलाज नहीं करता, बल्कि वो पहले शरीर की प्रकृति को समझने पर जोर देता है और फिर उपचार शुरू करता है। यही वजह है कि इसका फायदा गहराई से मिलता है और प्रभाव लंबे समय तक नजर आता है। गर्मियों का स्किन पर असर अष्टाङ्गहृदयम् जैसे पौराणिक आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु एक ऐसा समय है, जब तेज गर्मी के कारण शरीर की ताकत और नमी धीरे-धीरे कम होती चली जाती है। इस दौरान शरीर में पित्त (शरीर की हीट एनर्जी) भी जमा होने लगता है। वातावरण में बढ़ती शुष्कता और पित्त का जमा होना, ये मिलकर ऐसा मेल बनाते हैं, जिससे त्वचा का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। इस मौसम में गर्मी के कारण पसीने भी ज्यादा आता है, जो स्रोतोरोध (स्किन के माइक्रोचैनल से जुड़े ब्लॉकेज) को जन्म देता है। अगर मौसम के अनुसार सही देखभाल न दी जाए, तो व्यक्ति को कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इनमें इन्फ्लेमेशन, रेडनेस, पिंपल्स और डलनेस आदि शामिल हैं। नतीजन अक्सर गर्मियों में लोगों की स्किन थकी, अनइवन और रिएक्टिव नजर आती है। प्रकृति के आधार पर कैसा हो गर्मियों में आयुर्वेदिक स्किनकेयर वात प्रधान वात प्रधान लोगों की त्वचा प्राकृतिक रूप से रूखी होती है। गर्मियों में बाहरी शुष्कता के कारण ये समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।     इस तरह की प्रकृति वाले लोग मुडगा (हरा चना) को जेंटल क्लीनिंग के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। ये बिना नैचरल ऑयल को डैमेज किए त्वचा की सफाई करता है।     यष्टिमधु (मुलेठी) को दूध में मिलाकर लगाने से स्किन के खोए हाइड्रेशन को वापस लाया जा सकता है। ये स्किन के टेक्सचर को भी बेहतर बनाता है।     लाइट टेक्सचर के ऑयल भी स्किन के मॉइस्चर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे गर्मी के कारण स्किन को कम नमी के चलते होने वाले नुकसान का जोखिम भी कम हो जाता है। पित्त प्रधान पित्त प्रधान स्किन आमतौर पर काफी ज्यादा सेंसिटिव होती है, जिस वजह से इन्हें मुंहासों की समस्या, रेडनेस, इन्फ्लेमेशन और पिगमेंटेशन होने की आशंका काफी ज्यादा रहती है। गर्मियों में ये जोखिम और बढ़ जाता है। इन समस्याओं को मैनेज करने के लिए स्किन को ठंडक देने वाले तरीके अपनाने की जरूरत होती है।   ठंडे पानी या गुलाब जल से चेहरा धोने पर जलन की समस्या कम करने में मदद मिलती है।   स्किन को शांत करने, गर्मी कम करने और रंगत को सुधारने के लिए चंदन, उशीरा और लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोसा) के क्लासिक कॉम्बिनेशन को इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। कफ प्रधान कफ प्रधान लोगों की स्किन काफी ऑयली होती है। इस वजह से स्किन के ऐसे पार्ट्स जहां पहले से ही ज्यादा नमी मौजूद होती है, वहां के पोर्स बंद होने का ज्यादा खतरा रहता है इस तरह की स्किन वाले आयुर्वेद लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोसा)और त्रिफला (आंवला, हरीतकी, बिभीतकी) का पाउडर लगा सकते हैं। ये स्किन को साफ रखने और ऑयल को सोखने में मदद करता है। इस औषधीय पाउडर के इस्तेमाल से जेंटल एक्सफोलिएशन होता है, जो त्वचा की गंदगी को साफ करता है और प्राकृतिक संतुलन को फिर से स्थापित करता है। इससे स्किन कंजेशन को रोकने में मदद मिलती है। औषधीय लेप से रखें गर्मी में त्वचा का ख्याल शार्ंगधर संहिता जैसे ग्रंथों में लेप को स्किनकेयर का एक अहम पहलू बताया गया है। आम फेसपैक के उलट, ये औषधीय गुणों से भरा फॉर्मूलेशन खास स्किन कंडीशन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है, ताकि असरदार रिजल्ट्स मिल सकें। उदाहरण के लिए:     चंदन-उशिरा-लोधरा से बना लेप शरीर की गर्माहट और गर्मी से हुई टैनिंग को मैनेज करने में मददगार साबित होता है।     लोधरा-त्रिफला का लेप मुंहासों वाली स्किन की समस्याओं के लिए असरदार माना जाता है।     रूखी त्वचा और डलनेस के लिए मुलेठी को दूध में मिलाकर लगाने की सलाह दी जाती है। इन्हें लगाने का सही तरीका भी काफी महत्व रखता है। लेप की पतली लेयर स्किन पर लगाएं और वो पूरी तरह से सूखे, उससे पहले उसे हटा लें। ऐसा करने से स्किन और ज्यादा ड्राई नहीं होगी।

हुड्डा सरकार पर नियम बदलकर भूखंड आवंटन में गड़बड़ी के गंभीर आरोप

पंचकूला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दायर कर दी है। आरोपों में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल हैं। इसमें धोखाधड़ी से धन का गबन और स्वयं या दूसरों के लिए आर्थिक लाभ प्राप्त करने का आरोप है। सीबीआई ने आरोप पत्र के साथ हरियाणा सरकार की केस चलाने की मंजूरी को भी चार्जशीट के साथ अदालत में जमा कराया है। इसमें हुड्डा के अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के पूर्व उप अधीक्षक बीबी तनेजा का नाम शामिल है। इस मामले में अदालत ने संबंधित लिपिक को दस्तावेजों की जांच कर चार जून को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सीबीआई ने यह मामला 19 मई 2016 को दर्ज किया था। चार्जशीट के मुताबिक भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब मुख्यमंत्री रहते हुए एचएसवीपी के अध्यक्ष थे तो उन्होंने पंचकूला में 14 औद्योगिक भूखंडों के लिए आवेदन मांगे थे। अपने चहेतों को प्लॉट देने के लिए हुड्डा ने आवेदन की तिथि बीत जाने के बाद नियमों में बदलाव कर दिया। इसमें अनुभव व योग्यता कम कर दी गई और मौखिक परीक्षा के अंक बढ़ा दिए गए। वित्तीय क्षमता के अंक 25 से घटाकर 10 कर दिए गए जबकि वाइवा-वॉइस के अंक 15 से बढ़ाकर 25 कर दिए गए। 14 भूखंडों के लिए 582 आवेदन आए थे। जांच के अनुसार 30.34 करोड़ रुपये के भूखंड 7.85 करोड़ रुपये में आवंटित किए गए। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सीबीआई ने कोर्ट में यह भी बताया कि डीपीएस नांगल के खिलाफ धारा 197 के तहत तो स्वीकृति मिल चुकी है मगर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मंजूरी का इंतजार है। मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से एक गवाह नरेंद्र कुमार सोलंकी की धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान भी सीलबंद लिहाफे में अदालत में पेश किया गया जिसे सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं। इन्हें बनाया गया आरोपी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा : पूर्व मुख्यमंत्री व हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन धर्मपाल सिंह नांगल : पूर्व आईएएस व हुडा के पूर्व मुख्य प्रशासक सुभाष चंद्र कांसल : हुडा के पूर्व मुख्य वित्तीय नियंत्रक भारत भूषण तनेजा : हुडा के डिप्टी सुपरिटेंडेंट वाईपीटी इंटरटेनमेंट हाउस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक रेनू हुड्डा : पूर्व सीएम की करीबी व उनके पैतृक गांव की निवासी अशोक वर्मा : कांग्रेस नेता अशोक काका के दामाद सिद्धार्थ भारद्वाज : कांग्रेस नेता संजीव भारद्वाज के बेटे कंवर प्रीत सिंह संधू : हुड्डा के सहपाठी डीडी संधू के बेटे डॉ. गणेश दत्त रतन : हुड्डा के दोस्त। मोना बेरी : हुड्डा के ओएसडी बलदेव राज बेरी डागर कात्याल : हुड्डा के दोस्त सुनील कात्याल के बेटे प्रदीप कुमार : हुड्डा के निजी सचिव राम सिंह के बेटे मनजोत कौर : हुड्डा की परिचित की बहू चंडीगढ़ साफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड के मालिक नंदिता हुड्डा : हुड्डा के पैतृक गांव की निवासी व कांग्रेस नेत्री    

गर्मी में बच्चों को हाइड्रेटेड रखने के 5 आसान ड्रिंक्स

न्यूट्रिशनिस्ट कहती हैं क‍ि बच्चे बड़ों की तुलना में जल्दी डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकते हैं, क्योंकि उनका मेटाबॉलिज्‍म तेज होता है और वे पसीने के जरिए ज्यादा मात्रा में पानी खो देते हैं। 1- कंसंट्रेशन पर असर पड़ सकता है डॉक्‍टर भावना आगे बताती हैं क‍ि शोध बताते हैं कि अगर बच्चों के शरीर में थोड़ी भी पानी की कमी हो जाए, तो इसका सीधा असर उनकी एनर्जी, ध्यान लगाने की क्षमता और ओवर ऑल हेल्‍थ पर पड़ सकता है। 2-हीट एग्जॉशन का रहता है खतरा एक्‍सपर्ट कहती हैं क‍ि शरीर का तापमान बनाए रखने, बच्‍चों को पाचन में मदद करने और पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचाने में पानी बहुत जरूरी होता है। गर्मी में ज्यादा पसीना आने से शरीर से पानी के साथ- साथ सोडियम और पोटेशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम हो सकते हैं। अगर इनकी पूर्ति न की जाए, तो थकान, चक्कर आना और गंभीर मामलों में हीट एग्जॉशन (गर्मी से थकावट) जैसी समस्या हो सकती है। 1. नींबू पानी सामग्री: नींबू का रस, पानी, एक चुटकी नमक, चीनी या गुड़ विधि: सभी सामग्रियों को ठंडे पानी में मिलाकर अच्छे से मिक्स करें। लाभ: यह विटामिन C से भरपूर, इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है। 2. छाछ सामग्री: दही, पानी, भुना जीरा पाउडर, नमक विधि: दही को पानी में मिलाकर उसमें मसाले डालें और अच्छे से फेंट लें। लाभ: पाचन में मदद करती है, शरीर को ठंडक देती है और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है। नार‍ियल का पानी और आम पन्‍ना नार‍ियल का पानी और आम पन्‍ना 3. नारियल पानी सामग्री: ताजा नारियल पानी विधि: सीधे ताजा परोसें, किसी तैयारी की जरूरत नहीं। लाभ: प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर, डिहाइड्रेशन से बचाता है और ऊर्जा बनाए रखता है। 4. आम पन्ना सामग्री: कच्चा आम, चीनी या गुड़, भुना जीरा पाउडर, काला नमक विधि: कच्चे आम को उबालकर उसका गूदा निकालें और बाकी सामग्री व पानी के साथ मिलाएं। लाभ: लू से बचाव करता है और विटामिन A व C से भरपूर होता है। 5. तरबूज का रस सामग्री: ताजे तरबूज के टुकड़े विधि: ब्लेंड करें और चाहें तो छान लें। लाभ: पानी की मात्रा अधिक होती है, शरीर को ठंडक देता है और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। ​ 6- घर का बना फ्रूट स्मूदी​ सामग्री: केला, आम या सेब, दूध या दही विधि: सभी चीजों को ब्लेंड करके स्मूदी तैयार करें। लाभ: ऊर्जा देता है, पोषक तत्वों से भरपूर होता है और बच्चों को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है। ​ बच्चों के डेली रूटीन में ये समर ड्रिंक्स शामिल करना उन्हें हाइड्रेटेड और पोषित रखने का एक आसान और असरदार तरीका है। कम सामग्री और सरल विधि से बने ये ड्र‍िंक्‍स गर्मी से प्राकृतिक रूप से बचाव करते हैं। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को इन ताजगी भरे ड्रिंक्स का नियमित सेवन कराएं, ताकि वे पूरे मौसम में स्वस्थ, ऊर्जावान और फिट बने रहें।

शहरी स्थानीय निकाय विभाग और कर्मचारी संघ में टकराव, सफाई व्यवस्था ठप होने की आशंका

चंडीगढ़ हरियाणा में शहरी स्थानीय निकाय विभाग और कर्मचारी संघ के बीच खींचतान अब बड़े टकराव का रूप ले चुकी है। चंडीगढ़ में निकाय विभाग के उच्च अधिकारियों और कर्मचारी नेताओं के बीच हुई मैराथन वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, आज से प्रदेश के करीब 30 हजार निकाय कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। वार्ता विफल होने के मुख्य कारण हरियाणा सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान और नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री के नेतृत्व में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीना के साथ मुलाकात की। वार्ता के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखा, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन न मिलने के कारण सहमति नहीं बन सकी। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें     पक्का करने की मांग: सीवरेज से संबंधित ठेका कर्मचारियों को नियमित किया जाए।     ठेका प्रथा का अंत: सीवरेज कार्य से जुड़े सभी ठेकों को तुरंत समाप्त किया जाए।     वेतन वृद्धि: सीवरेज कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन ₹30,000 निर्धारित हो।     बहाली की मांग: गुरुग्राम के 3,480 कर्मचारियों को वापस नौकरी पर रखा जाए और 26 आंदोलनकारी नेताओं की बर्खास्तगी रद्द हो। प्रशासन की अपील और संघ का रुख बैठक के दौरान विभाग के सचिव अशोक मीना ने प्रदेश में चल रहे विशेष सफाई अभियान का हवाला देते हुए कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की भावुक अपील की। हालांकि, कर्मचारी नेताओं ने इसे सिरे से नकार दिया। नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री ने बताया कि हमें लंबे समय से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, हड़ताल जारी रहेगी। आम जनजीवन पर असर की आशंका इस हड़ताल में सफाई कर्मचारी, सीवरेज कर्मी और अन्य निकाय कर्मचारी शामिल हैं, जिसके चलते प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था और सीवरेज प्रबंधन पूरी तरह ठप हो सकता है। वार्ता के दौरान निकाय विभाग के अतिरिक्त निदेशक वाईएस गुप्ता और कई दिग्गज कर्मचारी नेता भी मौजूद रहे। टोहाना में सफाई व्यवस्था ठप, 240 कर्मचारी दो दिन की हड़ताल पर नगर परिषद कार्यालय में दमकल कर्मचारियों की 24 दिन से जारी हड़ताल के बीच अब सफाई कर्मचारियों ने भी दो दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। इसके चलते शहर में डोर-टू-डोर कचरा उठाने का काम पूरी तरह ठप हो गया है। कर्मचारी नेताओं का दावा है कि इस हड़ताल में नगर परिषद के कच्चे, पक्के और डोर-टू-डोर वाले करीब 240 कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों ने शुक्रवार को नगर परिषद परिसर में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, परिवार सहित प्रदर्शन जारी रहेगा।   कर्मचारी नेता रविंद्र व सुरेश कुमार ने बताया कि ड्यूटी के दौरान दमकल कर्मचारी की मौत के बाद भी सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की। परिवार को मुआवजा और नौकरी देने की मांग को लेकर दमकल कर्मचारी 24 दिन से धरने पर हैं, लेकिन सरकार का रवैया उदासीन है। इसी के विरोध में सफाई कर्मचारियों ने भी काम बंद कर दिया है। नेताओं ने कहा कि फिलहाल यह हड़ताल दो दिन के लिए है। अगर इसके बाद भी सरकार नहीं जागी तो आंदोलन को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया जाएगा। हड़ताल के पहले दिन ही शहर की गलियों और बाजारों में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर परिषद बहादुरगढ़ के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, कामकाज प्रभावित बहादुरगढ़ में नगर परिषद के सभी कच्चे और पक्के सफाई कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आज हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों ने सुबह से ही काम बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके चलते शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने से आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को अवगत करा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उनकी प्रमुख मांगों में नौकरी की सुरक्षा, वेतन में बढ़ोतरी और ठेका प्रथा को खत्म करना शामिल है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

शाहरुख खान की ‘किंग’ के सेट से लीक वीडियो वायरल, एड शीरन की एंट्री की चर्चा तेज

बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म 'किंग' को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। शाहरुख ने साउथ अफ्रीका के केप टाउन में अपनी अगली फिल्म 'किंग' का अगला शेड्यूल शुरू करके फैंस को दीवाना बना दिया। शाहरुख ने इस हफ्ते उस सीन की शूटिंग शुरू की, जिसे फिल्म का क्लाइमैक्स सीन माना जा रहा है। शूटिंग के सिर्फ एक दिन बाद ही सेट से कुछ वीडियो ऑनलाइन लीक हो गए हैं। इन लीक वीडियोज में शाहरुख एक नए लुक में नजर आ रहे हैं। यही नहीं, दूसरे वीडियो में किंग खान एक कार में बैठे हैं और पीछे बज रहे गाने के साथ गाड़ी चलाने के लिए तैयार हैं। लेकिन इस दौरान लीक वीडियो में सबका ध्यान शाहरुख से ज्यादा किसी और ने खींचा। वीडियो में ब्रिटिश सिंगर एड शीरन नजर आ रहे हैं। ऐसे में अब लोगों की एक्साइटमेंट और भी ज्यादा बढ़ गई है। क्या शाहरुख की 'किंग' में होंगे एड शीरन? 'किंग' से लीक फुटेज से अब यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि स्पीकर्स पर बज रहा गाना शायद ब्रिटिश सिंगर एड शीरन का कोई Track हो सकता है। इसका मतलब शीरन के इस फिल्म में होने की खबर पूरी तरह से बेबुनियाद नहीं है, क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों से इंडस्ट्री में ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि शीरन इस फिल्म के साउंडट्रैक (Soundtrack) में अपना योगदान दे सकते हैं। हालांकि, अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एड शीरन ने 'किंग' के लिए एक गाना रिकॉर्ड किया है। ऐसे में फैंस यह जानने के लिए काफी उत्सुक हैं कि इस गाने को फिल्म में किस तरह से शामिल किया जाएगा। प्रेग्नेंसी के दौरान भी शूटिंग कर रही हैं दीपिका दीपिका पादुकोण भी 'किंग' की शूटिंग के लिए साउथ अफ्रीका पहुंच गई हैं। एक्ट्रेस अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी के दौरान भी फिल्म की शूटिंग कर रही हैं। सेट से कुछ तस्वीरें ऑनलाइन लीक हो गई हैं, जिसे देखकर अब फैंस फिल्म को लेकर काफी उत्साहित हैं। इस शेड्यूल के बाद दीपिका पादुकोण, अल्लू अर्जुन और एटली की फिल्म 'राका' की शूटिंग भी करेंगी। यह साइंस फिक्शन फिल्म 2027 की सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली फिल्मों में से एक है। 'किंग' के बारे में शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण के अलावा, इस फिल्म में सुहाना खान, अभिषेक बच्चन, अरशद वारसी और जयदीप अहलावत जैसे कलाकार भी नजर आएंगे। खास बात यह है कि 2024 में Netflix पर आई फिल्म The Archies के बाद, यह सुहाना खान की पहली थिएट्रिकल फिल्म होगी। इस फिल्म का निर्देशन सिद्धार्थ आनंद ने किया है और इसे Red Chillies Entertainment और Marflix Pictures ने प्रोड्यूस किया है। 'किंग', 24 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।