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RLM में भारी फेरबदल—प्रदेश व जिला इकाइयां भंग, कोर कमेटी की बैठक में मंजूरी

पटना  राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) की प्रदेश और सभी जिला इकाइयां तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई है। रविवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद उपेन्द्र कुशवाहा की अध्यक्षता में हुई कोर कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। जानकारी के मुताबिक फिलहाल पार्टी संगठन को सुचारू रूप से चलाने के लिए पांच सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया गया है। समिति का संयोजक मदन चौधरी को बनाया गया है। सुभाष चंद्रवंशी, प्रशांत पंकज, हिमांशु पटेल और आरके सिन्हा को सदस्य नामित किया गया है। समिति की जिम्मेदारी पार्टी के सभी कार्यक्रमों और गतिविधियों के संचालन से लेकर अंतरिम संगठनात्मक प्रबंधन तक रहेगी। रालोमो की कोर कमेटी की बैठक में उपेंद्र कुशवाहा की अध्यक्षता में हुई। जिसमें बैठक माधव आनंद, आलोक सिंह, रामपुकार सिन्हा, जंगबहादुर सिंह, अंगद कुशवाहा और स्मृति कुमुद सहित अन्य नेता उपस्थित रहे। आपको बता दें बिहार चुनाव में एनडीए की सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम 6 सीटों पर लड़कर 4 सीटें जीतने में सफल रही थी। कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता सासाराम सीट से जीतकर विधानसभा पहुंची हैं। वहीं बिना चुनाव लड़े कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को नीतीश कैबिनेट में जगह मिली है। उन्हें पंचायती राज मंत्री बनाया गया है।  

जांच में बड़ा खुलासा: शाहीन महिलाओं को आतंकी नेटवर्क से जोड़ने की फिराक में!

चंडीगढ़   दिल्ली बम विस्फोट से जुड़े ‘सफेदपोश' आतंकी मॉड्यूल मामले में गिरफ्तार डॉ. शाहीन सईद ने खुलासा किया है कि उसने आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने के लिए महिलाओं की भर्ती करने की योजना बनाई थी। फरीदाबाद पुलिस के सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़ी शाहीन को जांच के सिलसिले में वीरवार को विश्वविद्यालय परिसर में लेकर आई थी। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि उसने आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने के लिए महिलाओं की भर्ती करने की योजना बनाई थी। पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि एनआईए के अधिकारियों ने विश्वविद्यालय में शाहीन के छात्रावास के कमरे से 18.5 लाख रुपये नकद, कुछ सोने के बिस्कुट और विदेशी मुद्रा बरामद की। इस सप्ताह की शुरुआत में, जांच एजेंसी डॉ. मुजम्मिल को पहचान के लिए लाई थी और जल्द ही एनआईए डॉ. आदिल अहमद को भी पहचान के लिए विश्वविद्यालय ला सकती है। मुजम्मिल और आदिल अहमद लाल किला विस्फोट जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए दो अन्य संदिग्ध हैं। सूत्रों ने यह भी खुलासा किया कि शाहीन चार साल तक सऊदी अरब में भी रही थी। उसने 2014 से 2018 तक सऊदी अरब के एक मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में काम किया। परिसर में शाहीन से हुई पूछताछ के दौरान, एनआईए की टीम उसे मेडिकल वार्ड, कक्षा और उसके कक्ष में ले गई, ताकि उसकी गतिविधियों और संपर्कों का विवरण जुटाया जा सके।  एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने शनिवार को बताया कि एजेंसी ने उन लोगों की सूची तैयार की है, जिनसे शाहीन ने बातचीत की थी। एनआईए की टीम शाहीन को एक केमिकल की दुकान पर भी ले गई, जहां से डॉ. मुजम्मिल ने कथित तौर पर विस्फोटक बनाने के लिए सामग्री खरीदी थी। लगभग 4 घंटे की जांच और पूछताछ के बाद शाहीन को रात लगभग 9 बजे दिल्ली वापस ले जाया गया।

देश के एकमात्र माँ भद्रकाली शक्तिपीठ में उपराष्ट्रपति का दर्शन–पूजन, चढ़ाए चांदी के घोड़े

कुरूक्षेत्र हरियाणा के एकमात्र शक्तिपीठ देवीकूप भद्रकाली मंदिर कुरुक्षेत्र में आज अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल होने आए भारत देश के उपराष्ट्रपति सी .पी. राधाकृष्णन माँ भद्रकाली की विशेष पूजा करने पहुंचे।  भव्य रूप से सजे शक्तिपीठ में सर्वप्रथम पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा व टीम के द्वारा उपराष्ट्रपति का पुष्प गुच्छे से स्वागत किया गया। उपराष्ट्रपति के साथ हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मंदिर पहुंचे थे। ततपश्चात उपराष्ट्रपति की मंत्रोचारण, पान पत्तों व कमल पुष्पों के साथ देवीकूप पर पूजा करवाई गई, जिस प्रकार महाभारत युद्ध से पहले पांडवों ने भगवान कृष्ण के साथ यहां पूजा की थी, उसी तरह आज धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव में शामिल होने आए उपराष्ट्रपति ने भी माँ भद्रकाली के दर्शन कर इसी परम्परा को निभाया और विशेष पूजा के साथ परिक्रमा कर चांदी घोड़े माँ के चरण में अर्पित किए। इस दौरान अर्जुन कृत मंत्रों का पाठ किया गया। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ाने की दिशा में किए व्यापक प्रयास

निवेश मित्र के जरिए सेवाओं के डिजिटलीकरण से उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाने में मिली मदद लखनऊ उत्तर प्रदेश को 'उद्यम प्रदेश' के रूप में परिवर्तित कर 'विकसित उत्तर प्रदेश' के विजन को साकार करने में जुटी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए हैं। प्रशासनिक प्रणाली को अधिक दक्ष, तकनीक आधारित व पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने व्यापक सुधारों को लागू किया है, जिनका सीधा लाभ निवेशकों व उद्यमियों को मिल रहा है। राज्य सरकार द्वारा लागू 4,675 प्रशासनिक सुधार, 2,500 व्यवसाय केंद्रित बदलाव तथा निवेश मित्र के माध्यम से सेवाओं का डिजिटलीकरण उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को अधिक सरल और बाधारहित बनाने में सहायक सिद्ध हुए हैं। इसके साथ ही इंटेंट फाइलिंग, लेटर ऑफ अप्रूवल और अन्य अधिकतर नियामक प्रक्रियाएं अब डिजिटल माध्यम से उपलब्ध हो गई हैं। इससे निवेशकों को किसी भी भौतिक परेशानी या दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह सुधारमूलक दृष्टि प्रदेश को देश के सबसे निवेशक अनुकूल राज्यों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। डिजिटल नवाचार, पारदर्शी निर्धारण प्रक्रिया तथा प्रदर्शन आधारित प्रशासनिक संस्कृति ने प्रदेश को उद्योगों के लिए नई ऊर्जा व मजबूत आधार प्रदान किया है। व्यापक प्रशासनिक सुधारों से प्रक्रियाएं हुईं सरल और पारदर्शी निवेशकों को अनावश्यक सरकारी बाधाओं का सामना न करना पड़े, इस उद्देश्य से योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में व्यापक स्तर पर सुधार किए। कुल 4,675 सुधारों के माध्यम से मंजूरी, पंजीकरण और अनुपालन से जुड़ी जटिलताओं में प्रभावी कमी आई है। 2,500 व्यवसाय केंद्रित सुधारों ने उद्योग स्थापना को सहज और समय तथा लागत की दृष्टि से अधिक व्यवहारिक बनाया है। राज्य सरकार ने उपयोगकर्ता केंद्रित और भाषा सुगमता आधारित प्रणालियों को भी बढ़ावा दिया है, जिससे प्रक्रियाओं को समझना और पूरा करना निवेशकों के लिए और अधिक सुलभ हुआ है। यूपीसीडा में केपीआई आधारित कार्य संस्कृति लागू, निवेशकों के भरोसे में वृद्धि योगी सरकार की कार्यप्रणाली में जवाबदेही व प्रदर्शन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) में की पॉइंट इंडिकेटर्स (केपीआई) आधारित पदोन्नति और मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई है। इससे अधिकारियों की जिम्मेदारी और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आवेदन प्रोसेसिंग की गति भी इसके परिणामस्वरूप बढ़ी है। आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018-19 में जहां 625 आवेदन प्रोसेस हुए थे, वहीं 2025-26 में आवेदन प्रोसेसिंग की संख्या बढ़कर 3,059 हो गई है। यह 389 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि है। निवेशकों की संतुष्टि दर भी 96.32 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो यह दर्शाती है कि यूपीसीडा की सेवाएं समयबद्ध और निवेशक अनुकूल हैं। यह परिवर्तन बताता है कि योगी सरकार की निवेशक केंद्रित नीतियां प्रशासनिक ढांचे में प्रभावशाली बदलाव ला रही हैं। निवेश मित्र के जरिए सरल व पारदर्शी हुई प्रक्रिया निवेशकों की सुविधा के लिए विकसित निवेश मित्र ने प्रदेश में निवेश प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़कर सरल और पारदर्शी बनाने में बड़ी सफलता हासिल की है। प्रदेश में निवेश मित्र 2.0 क्रियान्वित है और जल्द ही निवेश मित्र 3.0 को लागू किए जाने की दिशा में कार्य जारी है। उल्लेखनीय है कि निवेश मित्र पोर्टल कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डैशबोर्ड पर कार्य करता है, जो रीयल टाइम डाटा विश्लेषण, विभिन्न रुझानों और निर्णयात्मक जानकारी को उपलब्ध कराता है। इस पोर्टल में शिकायत निवारण की मजबूत प्रणाली है, जो व्हाट्सऐप, एसएमएस और ईमेल के माध्यम से निवेशकों को निरंतर अपडेट भेजती है। कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म उपयोगकर्ता केंद्रित, गतिशील और भाषा अनुकूल है, जबकि केवाईए यानी नो योर अप्रूवल्स सुविधा निवेशकों को आवश्यक अनुमोदनों की संपूर्ण जानकारी प्रदान करती है। निवेश मित्र 3.0 के माध्यम से निवेशकों को जीआईएस आधारित लैंड बैंक तथा औद्योगिक भूखंडों की लाइव मैपिंग की सुविधा भी उपलब्ध करायी जाएगी, जिससे भौतिक जांच की आवश्यकता समाप्त होगी तथा नोडल एजेंसियों के साथ पारदर्शी समन्वय सुनिश्चित होगा। वर्तमान में, निवेश मित्र के जरिए 43 से अधिक विभागों की 525 से अधिक सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध हैं जिससे लाइसेंसिंग, अनुमोदन, प्रमाणन और अन्य सभी प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी व समयबद्ध तरीके से पूर्ण हो रही हैं।

यूपी में स्किल इंडिया और डीडीयू ग्रामीण कौशल्य विकास अभियान के तहत 5.66 लाख से अधिक युवाओं को मिला प्रशिक्षण

डिजिटल, एआई और ग्रीन जॉब्स पर फोकस, उत्तर प्रदेश को स्किल हब बनाने का लक्ष्य लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार की युवा-केंद्रित नीतियों ने न केवल राज्य के युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के नए द्वार खोले हैं, बल्कि उनमें स्वरोजगार, उद्यमिता और इनोवेशन का भी विकास किया है। एक ओर राज्य सरकार स्किल इंडिया मिशन और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना के तहत युवाओं को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक तकनीकि में प्रशिक्षित कर रही है, वहीं दूसरी ओर रोजगार मेलों और इंक्युबेशन सेंटरों के माध्यम से रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रही है। वर्ष 2017 के बाद से प्रदेश में आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तक किया गया है, तो वहीं उच्च तकनिकी के इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सीएम योगी आदित्यनाथ की ये युवा केंद्रित पहलें विकसित यूपी, विकसित भारत- 2047 के विजन को सफल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही हैं।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में वर्ष 2017 से अबतक स्किल इंडिया मिशन और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना के तहत 5 लाख 66 हजार से अधिक आईटीआई और पॉलिटेक्निक प्रशिक्षित युवाओं को मिशन रोजगार के माध्यम से नौकरियां प्राप्त हुई हैं। इसके साथ ही अप्रैल 2025 तक 2,800 से अधिक प्रशिक्षण केंद्रों के जरिए युवाओं को उद्योग उन्मुख कौशल प्रदान किया गया है, जिससे बेरोजगारी की दर में उल्लेखनीय कमी आई है। साथ ही सीएम युवा उद्यमी योजना के तहत युवाओं को स्व रोजगार और स्टार्ट अप भी विकसित करने के लिए हर संभव मदद की जाती है।  उत्तर प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास व गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए 1,747 सक्रिय ट्रेनिंग पार्टनर्स का चयन किया गया है। जिनके माधयम से युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल प्रदान किया जाता है। साथ ही इनक्युबेशन सेंटरों के माधयम से उन्हें अत्याधुनिक तकनीकों जैसे डिजिटल मार्केटिंग, ईवी मैन्युफैक्चरिंग और एआई के साथ व्यवसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। यही नहीं समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा कौशल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जिसमें युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलता है। कौशल प्रशिक्षण अभियानों और प्रतियोगिताओं में रिकॉर्ड संख्या में प्रदेश के युवाओं की भागीदारी ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया है, साथ ही उन्हें प्रगति की नई राह भी दिखाई है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ के प्रयासों से प्रदेश में मेडिकल और इंजीनियरिंग संस्थानों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां वर्ष 2016-17 में यूपी में मात्र 42 मेडिकल कॉलेज थे, वर्तमान में ये संख्या बढ़कर, निजी व सरकारी को मिलाकर 80 हो चुकी है। इससे न केवल प्रदेश में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आया है। इसी तरह उच्च तकनीकि प्रशिक्षण के लिए इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी सीटों की संख्या में बढ़ोत्तरी की गई है। साथ ही इन संस्थानों में बनाये गये स्टार्टअप इंक्यूबेटर्स के जरिए युवा उद्यमिता को बढ़ावा मिला। ये पहलें न केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंची हैं, बल्कि महिलाओं, ओबीसी और एससी/एसटी समुदायों के लिए आरक्षण सुनिश्चित कर समावेशी विकास को भी सुनिश्चित कर रहीं हैं। रोजगार सृजन की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ का सबसे प्रभावी कदम हैं नियमित रोजगार मेलों का आयोजन है। इसी क्रम में अगस्त 2025 में लखनऊ के तीन दिवसीय 'रोजगार महाकुंभ' में 100 कंपनियों ने 50,000 से अधिक नौकरियों के अवसर प्रदेश के युवाओं को प्रदान किये। इन रोजगार मेलों में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों जैसे- एसबीआई, एचडीएफसी, स्विगी, जोमैटो, अमेजन और महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल होती है। आने वाले दिनों में लखनऊ, गोरखपुर, झांसी, वाराणसी और मुजफ्फरनगर में रोजगार मेलों का आयोजन होने जा रहा है। जिसमें 100 से अधिक कंपनियों की भागीदारी व 15,000 रोजगार के अवसरों के सृजन की संभावना है।साथ ही प्रत्येक जिले में मासिक प्लेसमेंट ड्राइव अभियान भी चलाया जाता है, जो युवाओं को सीधे नियोक्ताओं से जोड़ता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक आने वाले वर्षों में डिजिटल, एआई और ग्रीन जॉब्स पर फोकस के साथ उत्तर प्रदेश को स्किल हब बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी से आत्मीय मुलाकात: हमारे परिवार के लिए जीवनभर याद रहने वाला क्षण

रायपुर  यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की हमारे परिवारजनों से हुई मुलाकात जीवन भर याद रहने वाला प्रेरक अनुभव है। अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच जिस आत्मीयता से मोदीजी ने सबका हाल‑चाल पूछा, बच्चों से सहज होकर बात की और आशीर्वाद दिया, वह अविस्मरणीय है। माननीय प्रधानमंत्री के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान परिवार की तीन पीढ़ियों को एक साथ उनके सान्निध्य में बैठने का अवसर मिला, यह हमारे लिए भावुक कर देने वाला क्षण था। इस गरिमामय और आत्मीय भेंट के लिए प्रधानमंत्री जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।

अमरिंदर सिंह का बड़ा बयान—पंजाब में 2027 फतह के लिए BJP–अकाली गठबंधन अनिवार्य

चंडीगढ़  कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इंडिया टुडे को दिए साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट कहा कि पंजाब में बीजेपी की जीत केवल शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन से ही संभव है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि बीजेपी को अभी पंजाब की सामाजिक और राजनीतिक संरचना की गहरी समझ नहीं है। उन्होंने कहा. “अगर आप 2027 का चुनाव जीतना चाहते हैं, तो अपना कैडर मजबूत करना होगा, लेकिन इसमें दो-तीन चुनाव लगेंगे। अकाली दल के साथ गठबंधन ही जीत का एकमात्र रास्ता है।” 2027 चुनाव लड़ने को पूरी तरह तैयार कैप्टन ने यह भी कहा कि वे पूरी तरह फिट हैं और 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए सक्रिय राजनीति में पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने बताया, “मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं और 2027 के चुनावों के लिए तैयार हूं।” अकाली दल–बीजेपी गठबंधन पर फिर जोर पूर्व मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब में बीजेपी को सत्ता में लाने का रास्ता केवल SAD के साथ मिलकर ही खुल सकता है। उन्होंने कहा, “सरकार बनाने का दूसरा कोई रास्ता ही नहीं है, अकाली दल के साथ ही जाना होगा।” बता दें, भाजपा व अकाली दल का लंबे समय तक गठबंधन रहा। इस दौरान दोनों दलों ने सत्ता का स्वाद चखा, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के कारण दोनों दलों के बीच दूरी हो गई। किसान बहुल पंजाब में किसान कृषि कानूनों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। ऐसे में अकाली दल को भाजपा के साथ रहना मुश्किल हो रहा था। इसी कारण अकाली दल ने भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया था। लेकिन, इस गठबंधन के टूटने के बाद राज्य में दोनों दल अकाली दल व भाजपा हाशिये पर आ गए।

यूक्रेन-रूस टकराव का नया मोर्चा: तेल टैंकरों पर हमले से तुर्की के हितों को खतरा

तुर्की  तुर्की सरकार ने काला सागर में रूसी शैडो फ्लीट के दो तेल टैंकरों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। तुर्की विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ओंकू केसेली ने कहा कि केरोस (Koeros) और विराट (Virat) नामक जहाजों पर हुए हमले तुर्की के विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) के अंदर हुए थे। इन हमलों से क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा, मानव जीवन, संपत्ति और पर्यावरण को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। शनिवार देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट में केसेली ने लिखा कि तुर्की यूक्रेन युद्ध को काला सागर के पार फैलने से रोकने और अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी संबंधित पक्षों से लगातार संपर्क और बातचीत कर रहा है।   ओपनसैंक्शंस डेटाबेस (जो प्रतिबंधों से बचने वाले व्यक्तियों और संगठनों पर नजर रखता है) के अनुसार, ये दोनों जहाज़ उस शैडो फ्लीट का हिस्सा हैं जिसका उपयोग 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण आक्रमण के बाद लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए किया जा रहा है। तुर्की के समुद्री मामलों के महानिदेशालय ने बताया कि शुक्रवार रात तुर्की तट से लगभग 28 समुद्री मील दूर नोवोरोसिस्क (रूस) की ओर जा रहा खाली केरोस टैंकर अचानक बाहरी आघात के कारण जल उठा। जहाज पर सवार सभी 25 क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं और बचाव दल उन्हें वापस लाने की तैयारी कर रहे हैं। तुर्की के यातायात एवं आधारभूत संरचना मंत्रालय ने बाद में स्पष्ट किया कि जहाज पर सवार सभी नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। यह जहाज मिस्र से रूस की ओर जा रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यदि आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो जहाज डूब सकता है। दूसरे जहाज विराट के बारे में महानिदेशालय ने कहा कि टैंकर विराट का चालक दल ने सूचना दी कि तुर्की तट से करीब 35 समुद्री मील दूर जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। इंजन रूम में भारी धुआं भर गया था। बचाव दल और एक व्यापारी जहाज को मौके पर रवाना कर दिया गया है। विराट के 20 क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं। गौरतलब है कि यूक्रेन ने स्वीकार किया है कि उसने शुक्रवार दोपहर तुर्की के काला सागर तट के निकट इन दोनों टैंकरों पर लगातार हमले के लिए अपने सर्फेस नौसैनिक ड्रोन का इस्तेमाल किया था। बता दें कि यूक्रेन ने युद्ध के दौरान रूसी नौसेना के जहाजों पर कई सफल ड्रोन हमले किए हैं, खासकर विस्फोटक से लदे समुद्री ड्रोनों के जरिए। हालांकि अब तक यूक्रेनी अभियान मुख्य रूप से उत्तरी काला सागर तक ही सीमित रहे थे।

चक्रवाती तूफान दितवाह का खतरा बढ़ा—भारत के बेहद करीब, श्रीलंका में तबाही से 200 जानें गईं

चेन्नई  श्रीलंका में भारी तबाही मचाने के बाद चक्रवाती तूफान दितवाह भारत पहुंचने वाला है। तमिलनाडु से अभी करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर है। दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी तमिलनाडु-पुडुचेरी के ऊपर चक्रवाती तूफान दितवाह की वजह से 30 नवंबर को तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश होने वाली है। 30 नवंबर और एक दिसंबर को तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, रायलसीमा, तेलंगाना में भी बहुत भारी बरसात की चेतावनी है। श्रीलंका में दितवाह की वजह से करीब 200 लोगों की जान गई है।   चक्रवाती तूफान दितवाह आज सुबह साढ़े आठ बजे पुडुचेरी से 110 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, चेन्नई से 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था और तेज गति से दक्षिण के तटों की ओर बढ़ रहा। अब यह चेन्नई से महज 80 किमी की दूरी पर है। यह आज दोपहर और शाम तक क्रमश: तमिलनाडु-पुडुचेरी तट से न्यूनतम 60 किलोमीटर और 30 किलोमीटर की दूरी पर बंगाल की खाड़ी पर केंद्रित होगा। मौसम विभाग के अनुसार, दितवाह की वजह से 30 नवंबर और एक दिसंबर को तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है। 30 नवंबर को केरल, माहे में, 30 नवंबर को उत्तरी तटीय तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटी यआंध्र प्रदेश के दक्षिण जिलों में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा, उत्तरी तमिलनाडु में कहीं-कहीं गरज, बिजली और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट है। बता दें कि मौसम विभाग ने रविवार को उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और आस-पास के दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। IMD के रविवार सुबह 5:30 बजे के अपडेट के अनुसार, साइक्लोन दितवाह पिछले छह घंटों में 7 किलोमीटर की स्पीड से लगभग उत्तर की ओर बढ़ा और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और आस-पास के उत्तरी तमिलनाडु-पुडुचेरी तटों पर केंद्रित था। श्रीलंका में करीब 200 लोगों की जान ले चुका है तूफान तूफान दितवाह की वजह से आई भयानक बाढ़, लैंडस्लाइड और तबाही के बाद श्रीलंका ने रविवार को भी भारत की मदद से राहत और बचाव का काम जारी रखा। दितवाह में करीब श्रीलंका में 200 से लोग मारे गए हैं। श्रीलंका के डिज़ास्टर मैनेजमेंट सेंटर (DMC) द्वारा रविवार दोपहर 12 बजे जारी किए गए नए आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार से अब तक 193 लोग मारे गए हैं और 228 लापता हैं। डीएमसी ने कहा कि खराब मौसम की वजह से 2,66,114 परिवारों के कुल 9,68,304 लोग प्रभावित हुए हैं। इस बीच, भारत की नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के लोग, इंडियन एयर फोर्स के साथ मिलकर, युद्ध स्तर पर कीमती जानें बचाने के लिए श्रीलंकाई अधिकारियों की मदद कर रहे हैं।  

‘T-Dome’ की धमक: ताइवान का नया हथियार चीन की रणनीति में भूचाल लाने को तैयार

ताइवान  ताइवान की सरकार ने चीन के किसी भी संभावित आक्रमण से निपटने के लिए अतिरिक्त 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रक्षा खर्च का प्रस्ताव रखा है। इस भारी-भरकम राशि का बड़ा हिस्सा टी-डोम (T-Dome) नामक एक बहु-स्तरीय (मल्टी-लेयर्ड) वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने पर खर्च होगा। यह प्रणाली ताइवान द्वीप को चीनी लड़ाकू विमानों, बैलिस्टिक/क्रूज मिसाइलों तथा ड्रोनों के हमलों से बचाने के लिए तैयार की जा रही है।   यह कदम अमेरिका के उस दबाव के बीच उठाया जा रहा है जिसमें वह ताइवान से अपने रक्षा खर्च को लगातार बढ़ाने की मांग कर रहा है। यह विशेष बजट 2026 से 2033 तक आठ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खर्च किया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रपति लाई चिंग-ते पहले ही रक्षा खर्च को जीडीपी के 5% तक ले जाने का वादा कर चुके हैं। वर्तमान में ताइवान ने 2026 के लिए अपना नियमित रक्षा बजट बढ़ाकर 31.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर कर दिया है, जिससे कुल रक्षा व्यय जीडीपी का 3.3% हो जाएगा। लाई ने बुधवार को ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में प्रकाशित अपने लेख में इस विशेष बजट का पूर्वानुमान देते हुए कहा था कि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से अमेरिका से हथियार खरीदने में होगा। रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू ने बुधवार को स्पष्ट किया कि 40 बिलियन डॉलर इस विशेष बजट की ऊपरी सीमा है। इसका उपयोग सटीक मारक मिसाइलें खरीदने तथा ताइवान-अमेरिका के बीच संयुक्त रूप से हथियार प्रणालियों के विकास और खरीद के लिए होगा। टी-डोम है क्या? राष्ट्रपति लाई ने 10 अक्टूबर को टी-डोम की औपचारिक घोषणा की थी और इसकी तुलना इजरायल की मशहूर 'आयरन डोम' से की थी। हालांकि दोनों में काफी अंतर हैं। ताइपे स्थित रक्षा विश्लेषक जे माइकल कोल के अनुसार, आयरन डोम छोटी दूरी के रॉकेट्स के खिलाफ है, जबकि टी-डोम को खतरों की बहुत व्यापक श्रेणी से निपटना होगा। इसमें पीएलए (चीनी सेना) के लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन सभी शामिल हैं। बता दें कि ताइवान के पास पहले से ही अमेरिकी पैट्रियट पीएसी-3, स्वदेशी स्काई बो तथा तियान कुंग प्रणालियां मौजूद हैं। वह अमेरिका से NASAMS (नेशनल एडवांस्ड सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम) की नई यूनिट्स की डिलीवरी का भी इंतजार कर रहा है। टी-डोम इन सभी मौजूदा प्रणालियों को आधुनिक रडार, सेंसर और कमांड सेंटर से जोड़कर एक एकीकृत नेटवर्क बनाएगा, ताकि 'तेज पता लगाने और प्रभावी अवरोधन' संभव हो सके।    ताइवान को इसकी जरूरत क्यों पड़ी? यूक्रेन युद्ध ने ताइवान को सिखाया है कि मजबूत वायु रक्षा प्रणाली ही लड़ाकू सेना, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और आम नागरिकों की जान बचा सकती है। पिछले दस साल में ताइवान ने अपनी सेना को आधुनिक बनाने और अमेरिकी हथियार खरीदने में अरबों डॉलर खर्च किए हैं, फिर भी चीन के साथ पूर्ण युद्ध में वह अभी भी हथियारों की संख्या और किस्म में काफी पीछे है। सु त्ज़ु-युन कहते हैं कि अगर अचानक चीनी मिसाइल हमले को 'निष्प्रभावी' करने की क्षमता होगी, तो बीजिंग को आक्रमण करने से पहले दस बार सोचना पड़ेगा। उनके अनुसार ताइवान के आसपास तैनात चीनी युद्धपोत और मुख्य भूमि पर मौजूद सैकड़ों मिसाइल लॉन्चर तीन मिनट के अंदर ही ताइवान के एयरफील्ड, रडार और सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों मिसाइलें दाग सकते हैं। इसी खतरे से निपटने के लिए एक एकीकृत, तेज़ प्रतिक्रिया वाली वायु रक्षा प्रणाली जरूरी है।