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पतंजलि को HC की सख्त टिप्पणी: डाबर की याचिका पर कोर्ट में गर्म बहस

नई दिल्ली बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है। पतंजलि आयुर्वेद ने अपने च्यवनप्राश के विज्ञापन में दूसरी कंपनियों के उत्पादों के लिए धोखा शब्द का इस्तेमाल किया था। इसे लेकर डाबर ने आपत्ति जताई है और हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल हुई। इसी पर सुनवाई करते हुए बेंच ने पतंजलि आयुर्वेद से सवाल किया कि आखिर आप कैसे दूसरी कंपनियों के उत्पाद को धोखा कह सकते हैं। जस्टिस तेजस करिया ने कहा, 'आखिर आप कैसे सभी दूसरी कंपनियों की ओर से बनाए गए च्यवनप्राश को धोखा कह सकते हैं।'   जज ने कहा कि पतंजलि की ओर से यह दावा किया जा सकता है कि उसका उत्पाद सर्वोत्तम है, लेकिन वह किसी अन्य के सामान को फ्रॉड नहीं कह सकते। बेंच ने कहा, 'आप गुणवत्ता की बात कहिए। इसमें क्या समस्या है। लेकिन इस तरह की बात नहीं कहनी चाहिए। आप कह रहे हैं कि बाकी सब धोखा है और मैं सही हूं। आखिर आप कैसे अपने अलावा अन्य सभी च्यवनप्राश को धोखा कह सकते हैं। आप कह सकते हैं कि आपकी क्वॉलिटी बेहतर है, लेकिन किसी को फ्रॉड कहना सही नहीं है। क्या धोखा के अलावा शब्दकोश में कोई और शब्द नहीं है, जिसका इस्तेमाल किया जा सके।' अदालत ने कहा कि धोखा तो एक नकारात्मक शब्द है, जिसका आप प्रयोग कर रहे हैं। बेंच ने कहा, 'धोखा एक नकारात्मक और अपमानजनक शब्द है। आप कह रहे हैं कि वे लोग धोखेबाज हैं और लोगों के साथ धोखा हुआ है।' दरअसल इस विज्ञापन को लेकर डाबर ने पतंजलि आयुर्वेद पर मुकदमा किया है। डाबर का कहना है कि आपका विज्ञापन मानहानि वाला है। आपने इसके माध्यम से प्रतिस्पर्धा के नियमों को तोड़ा है और अपमानजनक बातें कही हैं। शिकायत में कहा गया है कि पतंजलि के विज्ञापन में च्यवनप्राश का बाबा रामदेव प्रचार करते हैं। वह कहते हैं कि च्यवनप्राश के नाम पर ज्यादातर लोगों के साथ धोखा हो रहा है। इसके आगे विज्ञापन में कहा गया है कि पतंजलि के च्यवनप्राश में ही आयुर्वेद की असली ताकत है और यही असली है। डाबर का कहना है कि यह विज्ञापन हमारे लिए मानहानि जैसा है। कंपनी का कहना है कि हमारा उत्पाद तो 1949 से ही बाजार में है और इसकी काफी प्रतिष्ठा है। डाबर ने अपनी अर्जी में कहा कि च्यवनप्राश के बाजार में हमारी हिस्सेदारी 61 फीसदी है। पतंजलि का यह विज्ञापन हमारी प्रतिष्ठा को धूमिल करता है और यह मानहानि वाला है। डाबर ने कहा कि यह विज्ञापन तो च्यवनप्राश तैयार करने वाली सभी कंपनियों के प्रति आपत्तिजनक बात करता है। यही नहीं डाबर ने पतंजलि के दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें उसने कहा कि उसके उत्पाद में 51 जड़ी-बूटियों का मिश्रण है।  

घाना, वियतनाम और श्रीलंका के साथ सहयोग पर की चर्चा

भोपाल  वर्ल्ड ट्रैवल मार्ट (WTM) लंदन 2025 का दूसरा दिन मध्य प्रदेश के लिए बेहद सार्थक और सफल रहा. इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग के नए अध्याय जोड़ने के लिए भारत और विदेश के कई प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात की। इन सभी चर्चाओं में मध्य प्रदेश की समृद्ध विरासत, वन्य जीवन, आध्यात्मिकता और संस्कृति की झलक दिखाई दी, जिसने एक बार फिर इस बात को सिद्ध किया कि मध्य प्रदेश "अतुल्य भारत का हृदय" है। राज्य मंत्री श्री लोधी ने घाना की पर्यटन मंत्री सुश्री अबला द्ज़िफा गोमाशी के साथ सांस्कृतिक साझेदारी और वियतनाम के संस्कृति मंत्री श्री गुयेन वैन हंग के साथ विरासत-आधारित पर्यटन एवं संयुक्त प्रचार अभियानों को बढ़ावा देने पर गहन विमर्श किया। अंतर्राष्ट्रीय के साथ अंतर-राज्यीय संबंधों को मजबूती देते हुए, राज्य मंत्री श्री लोधी ने आंध्र प्रदेश के पर्यटन मंत्री श्री कंदुला दुर्गेश से मुलाकात की और आपसी सांस्कृतिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। श्रीलंका के साथ हुई बैठक विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। वहाँ के पर्यटन मंत्री श्री विजिथा हेराथ के साथ हुई बातचीत का मुख्य केंद्र, मध्य प्रदेश के बौद्ध सर्किट को श्रीलंका में लोकप्रिय बनाना और बदले में, श्रीलंका के रामायण ट्रेल से भारतीय यात्रियों को परिचित कराना था। इस महत्वपूर्ण साझेदारी को औपचारिक रूप देने के लिए, राज्य मंत्री श्री लोधी ने भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के माध्यम से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा। राज्य मंत्री श्री लोधी ने बकिंघमशायर काउंसिल की मेयर सुश्री प्रेरणा भारद्वाज से भी भेंट की। इस मुलाकात का उद्देश्य ब्रिटेन में बसे भारतीय समुदाय के साथ सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधों को प्रगाढ़ करना था। ये सभी बैठकें अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर मध्य प्रदेश की बढ़ती साख और साझा विरासत व टिकाऊ यात्रा अनुभवों को बढ़ावा देने की उसकी गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।  

ब्रेन हेमरेज से गई जान, पर रिश्वत की मांग नहीं रुकी! मध्यप्रदेश में दिल दहला देने वाली घटना

भोपाल मध्य प्रदेश में मनरेगा योजना के अंतर्गत कार्यरत रहे संविदा उपयंत्री नवीन खरे की मौत ने फिर प्रशासनिक संवेदनहीनता की गहराई को उजागर कर दिया है। वर्ष 2006 में जनपद पंचायत शिवपुरी में संविदा उपयंत्री के रूप में नियुक्त नवीन खरे को वर्ष 2012 में सेवा से पृथक कर दिया गया। इस निर्णय के खिलाफ उन्होंने ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। न्यायालय ने जुलाई 2024 में उनके पक्ष में निर्णय देते हुए पुनः पदस्थापना के निर्देश दिए, लेकिन जिला प्रशासन ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए उन्हें ज्वाइनिंग नहीं दी। मनरेगा अभियंता संघ के प्रांत अध्यक्ष सतीश कुमार समेले ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिवपुरी जिले के अधिकारियों द्वारा ज्वाइनिंग दिलाने के नाम पर एक लाख की रिश्वत की मांग की गई थी। इस कथित मांग और लगातार प्रशासनिक उपेक्षा से नवीन खरे मानसिक रूप से टूट गए थे। तनाव और निराशा की इसी स्थिति में उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ और इलाज के दौरान भोपाल एम्स में उनकी मृत्यु हो गई। 55 वर्षीय खरे अपने पीछे माता-पिता, सासू मां और दो बच्चों को छोड़ गए हैं।   कोर्ट के आदेश का पालन ही नहीं हुआ परिवार का कहना है कि यदि न्यायालय के आदेश का पालन किया गया होता, तो आज नवीन जीवित होते। मृतक के परिजनों और साथियों ने विदिशा के दुर्गा चौक पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया तथा शिवपुरी कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और मनरेगा आयुक्त पर कार्रवाई की मांग की। उधर, राज्यभर में 1335 संविदा उपयंत्री अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर 85 दिनों से आंदोलनरत हैं। आंदोलन के दौरान अब तक चार संविदा उपयंत्रियों की मौत हो चुकी है, जबकि वर्ष 2010 से अब तक 49 अभियंता असमय मौत का शिकार बने हैं।

चुनाव की गर्मी चरम पर: पहले चरण में 60% से अधिक मतदान, बेगूसराय नंबर-1

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का मतदान सम्पन्न हो चुका है। प्रदेश के 121 विधानसभा सीटों को पर खड़े प्रत्याशियों का भविष्य ईवीएम बॉक्स में बंद हो गया है। जनता ने तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, अनंत सिंह, मैथिली ठाकुर, सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा जैसे बड़े नेताओं की किस्मत का फैसला कर दिया है। एनडीए कम से कम 75% सीटों पर आगे- मनोज तिवारी बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के काफिले पर हुए हमले पर बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा, महागठबंधन के अराजक तत्वों ने कई जगहों पर लगातार ऐसी हरकतें की हैं। हालांकि, कुछ जगहों पर मामले सामने आए हैं, लेकिन कई जगहों पर नहीं। उनकी निराशा अब दिख रही है क्योंकि आज हुए मतदान में एनडीए कम से कम 75% सीटों पर आगे है। पहले चरण का मतदान थमा, साल 2000 के बाद रिकॉर्ड वोटिंग बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान खत्म हो चुका है। बिहार के 18 जिलों के 121 विधानसभा सीटों पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान हुआ। एक-दो स्थानों को छोड़ दें, तो लगभग सभी जगहों पर शांतिपूर्ण ढंग से मतदान संपन्न हुआ। शाम 5 बजे तक 60.13 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो साल 2000 के बाद अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है। पहले चरण में शाम 5 बजे तक 60.13 प्रतिशत मतदान बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदाताओं ने जमकर वोट डाले हैं। शाम 5 बजे तक 18 जिलों में 60.13 प्रतिशत मतदान हो चुका है। चुनाव प्रतिशत के मामले में बेगुसराय और समस्तीपुर सबसे आगे हैं। इन जिलों में 67.32 प्रतिशत और 66.65 प्रतिशत वोट पड़े हैं। जबकि पटना भोजपुर और शेखपुरा में सबसे कम मतदान हुआ है। शखेपुरा में मात्र 52.36 प्रतिशत,  भोजपुर में 53.24 प्रतिशत और पटना में 55.02 प्रतिशत वोट डाले गए हैं। 

स्टेशन के पास इंटरसिटी ट्रेन में तकनीकी खराबी, धुएं से घबराए यात्री

बाराबंकी गोंडा से लखनऊ की ओर जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस में आज एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहाँ बुढ़वल रेलवे स्टेशन के समीप रामनगर-फतेहपुर मार्ग के ओवरब्रिज के पास ट्रेन के एक बोगी से अचानक धुआं निकलने लगा जिससे पूरी ट्रेन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के समय जब ट्रेन ओवरब्रिज के करीब पहुंची तो एक बोगी के पहिये के आसपास से धुआं उठता देख यात्रियों में दहशत फैल गई। सतर्क यात्रियों ने फौरन लोको पायलट को इसकी जानकारी दी। लोको पायलट ने समझदारी दिखाते हुए आनन-फानन में ट्रेन को रोक लिया। ट्रेन के रुकते ही डर से सहमे यात्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बोगियों से उतरकर पटरी के किनारे इकट्ठा हो गए। मामले की सूचना पाते ही रेलवे के तकनीकी स्टाफ और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची। जांच-पड़ताल में सामने आया कि पहिये में ब्रेक शू फंस जाने की वजह से धुआं निकल रहा था। तकनीकी टीम ने तुरंत ब्रेक शू की मरम्मत की और खराबी दूर करने के बाद ट्रेन को आगे की यात्रा के लिए रवाना कर दिया गया। जीआरपी चौकी के प्रभारी जयंत दुबे ने बताया कि यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चेन पुलिंग की गई थी। उन्होंने राहत की बात बताते हुए कहा कि इस घटना में किसी भी यात्री को कोई चोट नहीं आई है और हालात पूरी तरह काबू में हैं।  

सरकारी कर्मचारियों की खुशखबरी: नई वेतन संरचना से 3 गुना तक बढ़ सकता है पे-स्केल!

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशखबरी आई है। लंबे इंतज़ार के बाद आखिरकार आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का गठन औपचारिक रूप से कर दिया गया है। यह आयोग सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, भत्ते और अन्य वित्तीय लाभों की समीक्षा करेगा और ज़रूरी सुधारों की सिफारिश केंद्र को सौंपेगा। इस फैसले से करीब 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा फायदा पहुंचने की संभावना है। आयोग का काम क्या होगा? सरकार ने आयोग के साथ उसका टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) भी जारी किया है। इसके तहत आयोग को कई अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं — मौजूदा वेतन ढांचे, सेवा शर्तों और रिटायरमेंट लाभों की गहन समीक्षा करना। देश की आर्थिक स्थिति, मुद्रास्फीति (महंगाई) और विकास दर को ध्यान में रखते हुए वेतन और पेंशन में संशोधन के सुझाव देना। सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ और कर्मचारियों की आय — दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना। हर 10 साल में सरकार नया वेतन आयोग गठित करती है ताकि कर्मचारियों की आय को महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समायोजित किया जा सके। कब लागू होंगे नए वेतन नियम? पिछला, यानी सातवां वेतन आयोग, 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुआ था। उसी क्रम में माना जा रहा है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती हैं। सरकार ने आयोग को 18 महीने का समय दिया है ताकि वह सभी मंत्रालयों, विभागों और कर्मचारी संगठनों से विचार-विमर्श कर रिपोर्ट सौंप सके। अगर रिपोर्ट में देरी होती है, तो कर्मचारियों को एरियर (arrears) के रूप में बढ़ा हुआ वेतन मिल सकता है। कितना बढ़ेगा वेतन और पेंशन? कर्मचारियों के लिए सबसे अहम रहेगा फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) — यानी पुराने वेतन से नए वेतन में कितनी गुना बढ़ोतरी होगी। सातवें वेतन आयोग में यह 2.57 था। जानकारों का अनुमान है कि इस बार यह 2.8 से 3.0 के बीच रह सकता है। अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों के बेसिक पे (Basic Pay) में उल्लेखनीय इज़ाफा देखा जा सकता है। इसके साथ ही, महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य Allowances में भी बदलाव संभव है, जिससे पेंशनर्स को भी सीधा लाभ मिलेगा।    क्यों अहम है यह फैसला? सरकार का उद्देश्य है कि वेतन वृद्धि आर्थिक रूप से टिकाऊ (Fiscally Sustainable) हो — यानी न तो सरकारी बजट पर असंतुलित दबाव पड़े और न ही कर्मचारियों की वास्तविक आय घटे। 8वां वेतन आयोग इसलिए खास है क्योंकि यह एक ऐसे दौर में आ रहा है जब महंगाई दर बढ़ रही है, और सरकारी कर्मचारियों के लिए यह राहत भरी खबर साबित हो सकती है।  

आप तो बहुत ग्लो करते हैं सर… हरलीन देओल की बात पर शरमा गए प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने पहली बार विश्व विजय करने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम की चैंपियन खिलाड़ियों से अपने आवास पर मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने चैंपियन खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। इस दौरान खिलाड़ियों से खेल के साथ-साथ उनके टैटू से लेकर इंस्टा अकाउंट की खास बातों तक तमाम चीजों पर चर्चा की। महिला क्रिकेटरों ने भी इस दौरान पीएम मोदी से सवाल किए। इस दौरान हंसी-ठहाके भी देखने को मिले। शीर्ष क्रम की बल्लेबाज हरलीन देओल ने तो पीएम मोदी से उनके ग्लो करने का राज पूछ लिया, जिस पर वह थोड़े शरमाते हुए भी दिखे और पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा।   हरलीन देओल ने पूछा, ‘सर मेरे को आपकी स्किनकेयर रूटीन पूछनी है। आप बहुत ग्लो करते हो सर।’ इस पर वहां मौजूद सभी खिलाड़ी ठहाके लगाने लगीं और पीएम मोदी शरमाते हुए अपने दाहिने हाथ से चेहरे को छिपाते हुए नजर आए। कुछ क्षण रुकने के बाद उन्होंने इसका जवाब दिया और इसे देशवासियों के प्यार से जोड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके आवास पर मुलाकात के दौरान भारतीय महिला क्रिकेटरों ने न सिर्फ विश्व कप में अपने विजयी अभियान पर बातचीत की बल्कि इस दौरान टैटू और यहां तक ​​कि त्वचा की देखभाल को लेकर भी चर्चा हुई। भारत ने पिछले सप्ताह नवी मुंबई में फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर अपना पहला वैश्विक खिताब जीता था। इसके बाद टीम ने मुख्य कोच अमोल मजूमदार और भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष मिथुन मन्हास के साथ बुधवार को यहां प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री द्वारा गुरुवार को साझा किए गए बातचीत के वीडियो में कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा, ‘मुझे अभी भी याद है जब हम 2017 में आपसे मिले थे। उस समय हम ट्रॉफी लेकर नहीं आए थे। लेकिन यह हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है कि इस बार हम ट्रॉफी यहां लेकर आए हैं जिसके लिए हम इतने वर्षों से कड़ी मेहनत कर रहे थे।’ उन्होंने कहा, ‘हमारा लक्ष्य है कि हम भविष्य में आपसे बार-बार मिलें तथा आपके और आपकी टीम के साथ बार-बार तस्वीरें लें।’ भारतीय महिला टीम 2017 में महिला विश्व कप फाइनल में इग्लैंड से नौ रन से हार गयी थी, जिसके बाद टीम ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। मोदी ने कहा, ‘आपने बहुत अच्छा काम किया है। भारत में क्रिकेट सिर्फ़ एक खेल नहीं है। एक तरह से यह भारत के लोगों की ज़िंदगी बन गया है। अगर क्रिकेट में कुछ अच्छा होता है तो भारत को अच्छा लगता है और अगर क्रिकेट में थोड़ा सा भी कुछ ग़लत होता है, तो पूरे भारत को बुरा लगता है।' इसके बाद प्रधानमंत्री ने टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी दीप्ति शर्मा से उनके हनुमान वाले टैटू के बारे में पूछा जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। लेकिन जिस क्षण पूरा हॉल ठहाकों से गूंजा, वह तब था जब शीर्ष क्रम की बल्लेबाज हरलीन देओल ने मोदी से उनकी त्वचा की देखभाल की दिनचर्या के बारे में पूछा। मोदी ने इस पर हंसकर जवाब दिया, ‘मैं इन सब चीजों के बारे में नहीं सोचता हूं।’

अनिल अंबानी पर ED का दबाव, पहले 7500Cr की संपत्ति कुर्क की गई

मुंबई  अनिल अंबानी की मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही हैं. बीते कुछ दिनों से उनके नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप पर ED की कार्रवाई जारी है और 7500 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की की जा चुकी है. अब प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी को 14 नवंबर को ईडी कार्यालय में बुलाया है. ये दूसरी बार है जबकि ईडी ने उन्हें तलब किया है.  लगातार जारी है ED का एक्शन  गौरतलब है कि 31 अक्टूबर 2025 को PMLA की धारा 5(1) के तहत कुर्की के आदेश जारी किए गए थे. इसके तहत रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) द्वारा जुटाए गए सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 40 से ज्यादा संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की गई हैं. ईडी ने जिन 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया है, उनमें मुंबई के बांद्रा वेस्ट, पाली हिल में स्थित उनका एक आवास भी शामिल है. ईडी की कार्रवाई के बाद हालांकि, Anil Ambani Reliance Group की ओर से स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया गया कि इससे उनके बिजनेस पर कोई असर नहीं पड़ा है. कंपनी की ओर से कहा गया कि ईडी द्वारा कुर्क की गईं ज्यादातर संपत्तियां रिलायंस कम्युनिकेशन की हैं, जो छह साल से कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही है. रिलांयस पावर और रिलायंस इंफ्रा की परफॉर्मेंस पर भविष्य में भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. अगस्त में भी हुई थी अनिल अंबानी की पेशी अनिल अंबानी के रिलायंस समूह पर ईडी की जांच लंबे समय से चल रही है. इससे पहले 5 अगस्‍त को ED ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को कथित लोन फ्रॉड केस की चल रही जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया था. वहीं उनकी कंपनियों पर तलाशी अभियान भी कई चरण में चलाया जा चुका है.  अनिल अंबानी की मुश्किलों को बढ़ाने वाला मनी लॉन्ड्रिंग क यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल के जरिए जुटाए गए सार्वजनिक धन को अनिल अंबानी समूह से जुड़ी संस्थाओं से जुड़े लेन-देन के दौरान डायवर्ट और लॉन्ड्रिंग किया गया था.  दिल्ली, मुंबई से हैदराबाद तक एक्शन बता दें हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कुर्की की कार्रवाई जिन संपत्तियों पर की गई है. उनमें मुंबई के पाली हिल स्थित आवास, नई दिल्ली स्थित रिलायंस सेंटर की संपत्ति और दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई (कांचीपुरम समेत) और पूर्वी गोदावरी में स्थित कई अन्य इन संपत्तियों में कार्यालय परिसर, आवासीय इकाइयां और प्लॉट शामिल हैं. 

CJI गवई का सरकार पर बड़ा सवाल: क्या अदालत को भी रिटायरमेंट डेट तय करनी पड़े?

नई दिल्ली  ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट मामले में सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर केंद्र सरकार को फटकार पड़ी है। CJI यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने स्थगन की मांग पर आपत्ति जताई है। इससे पहले भी उन्होंने मामले को बड़ी बेंच के पास भेजे जाने के अनुरोध को लेकर केंद्र पर सवाल उठाए थे और कहा था कि लगता है सरकार मौजूदा पीठ से बचना चाह रही है। बार एंड बेंच के अनुसार, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने मामले में स्थगन की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने एएसजी ऐश्वर्या भाटी की तरफ से यह अनुरोध पेश किया गया था। इस पर सीजेआई गवई ने सवाल उठा दिया कि क्या सरकार उनके रिटायरमेंट होने का इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा, 'हम दो बार पहले ही आपकी बात मान चुके हैं। कितनी बार और? अगर आप यह 24 नवंबर के बाद चाहते हैं, तो हमें बता दें। यह कोर्ट के साथ बहुत अन्याय है। हर बार आप मध्यस्थता के लिए सुविधा मांगते हैं। आपके कई वकील हैं और आप बड़ी बेंच की मांग को लेकर आधी रात में आवेदन दाखिल करते हैं।' उन्होंने कहा, 'जब हम हाईकोर्ट में थे, तो जो भी ब्रीफ हमें छोड़ने पड़ते थे, उसके लिए हम यहां आते थे। हम शीर्ष संवैधानिक अदालत का बहुत सम्मान करते हैं। हम कल और कोई केस नहीं लिया। हमने सोचा था कि हम कल सुनवाई करेंगे और वीकेंड पर फैसला लिख देंगे।' पहले भी भड़का था कोर्ट सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उस अर्जी पर कड़ा रुख अपनाया, जिसमें अधिकरण सुधार (सुव्यवस्थीकरण एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 2021 प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को वृहद पीठ के पास भेजने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि अंतिम सुनवाई के आखिरी चरण में सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी। सीजेआई गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने इस बात को लेकर नाराजगी जताई कि केंद्र अब इस मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजना चाहता है। पीठ ने इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता मद्रास बार एसोसिएशन सहित विभिन्न याचिकाकर्ताओं की ओर से अंतिम दलीलें पहले ही सुन ली हैं। पीठ ने कहा, 'पिछली तारीख (सुनवाई की) पर, आपने (अटॉर्नी जनरल) ये आपत्तियां नहीं उठाईं और आपने निजी कारणों से सुनवाई टालने का अनुरोध किया। आप पूरी सुनवाई के बाद ये आपत्तियां नहीं उठा सकते… हम केंद्र सरकार से ऐसी तरकीब अपनाने की उम्मीद नहीं करते हैं।' नाराज नजर आ रहे प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'यह ऐसे समय हुआ है जब हमने एक पक्ष की पूरी बात सुन ली है और अटॉर्नी जनरल को निजी कारणों से छूट दी है।' सीजेआई ने कहा था कि ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार मौजूदा पीठ से बचना चाहती है। सीजेआई गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव का असर सरहद पार? पाकिस्तान में भी उठे सियासी सवाल

नई दिल्ली  बिहार विधानसभा चुनाव में भले ही अब तक पाकिस्तान की चर्चा नहीं हुई है, लेकिन पाकिस्तान में जरूर बिहार की चर्चा है। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने अपने पहले पन्ने पर आज बिहार विधानसभा चुनाव को जगह दी है। अखबार ने लिखा है कि बिहार इलेक्शन मोदी सरकार के लिए लिटमस टेस्ट की तरह है। अखबार लिखता है कि मोदी की सरकार फिलहाल अल्पमत में है और सहयोगी दलों के सहारे ही चल रही है। इनमें नीतीश कुमार की जेडीयू अहम है। यदि बिहार चुनाव में नतीजा थोड़ा अलग रहा और नीतीश कुमार के साथ रिश्ते बदले तो फिर केंद्र सरकार भी खतरे में हो सकती है। 'बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की JDU मोदी सरकार को सहारा देने में अहम है। भाजपा 2024 के आम चुनावों में 240 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। इसके बाद जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी ने समर्थन किया था और सरकार ने 272 के आंकड़े को छुआ है। नीतीश कुमार की जेडीयू 12 सांसदों के साथ और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू 16 तेलुगु देशम सांसदों के साथ मोदी का भाग्य अपने हाथों में पकड़े हुए हैं। एनडीए का नेतृत्व कर रहे पीएम मोदी के पास साधारण बहुमत से केवल 21 सांसद ऊपर हैं। बिहार और आंध्र प्रदेश के दो सहयोगी मिलकर 28 सांसदों का समर्थन देते हैं।' अखबार लिखता हैं कि ऐसी स्थिति में नीतीश और चंद्रबाबू दोनों ही अहम हैं। ऐसी स्थिति में यदि नीतीश कुमार की सरकार पर खतरा आया तो वे रास्ता बदलकर दांव चल सकते हैं। भाजपा ऐसी स्थिति नहीं चाहेगी क्योंकि चंद्रबाबू नायडू भी हार्ड बारगेनर हैं। यही नहीं पाकिस्तानी अखबार लिखता है कि राहुल गांधी के लिए भी यह चुनाव अहम हैं। डॉन का कहना है कि राहुल गांधी ने 2024 के चुनाव में अच्छी वापसी की थी और वह अब नेता विपक्ष हैं। खासतौर पर यूपी में कांग्रेस, सपा के प्रदर्शन का जिक्र डॉन ने किया है। अखबार लिखता है कि यूपी में कमजोर प्रदर्शन के चलते ही केंद्र में मोदी सरकार का समर्थन कम हुआ है।