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सुरक्षा से विकास तक: नक्सल प्रभावित इलाकों में बदली तस्वीर

बीजापुर बीजापुर जिले के थाना भोपालपटनम क्षेत्रान्तर्गत कैम्प कांडलापर्ती-2 और थाना फरसेगढ़ क्षेत्रान्तर्गत ग्राम पील्लूर में नवीन सुरक्षा और जन-सुविधा कैम्प की स्थापना की गई है. यह पहल छत्तीसगढ़ शासन की “नियद नेल्ला नार” योजना के अंतर्गत ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा और सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए की गई है. विपरीत मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए इन कैम्पों की स्थापना सफलतापूर्वक की. यह कदम न केवल सुरक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि क्षेत्रीय विकास की गति को भी सशक्त करेगा. अंतर्राज्यीय सम्पर्क और आधारभूत संरचना का विस्तार भोपालपटनम् से फरसेगढ़, सेण्ड्रा और गढ़चिरौली को जोड़ने की दिशा में यह एक अहम प्रगति है. आगामी समय में नेशनल पार्क क्षेत्र के ग्रामों को सड़क और अन्य सुविधाओं से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा. सुरक्षा और विकास का समन्वय कैम्प की स्थापना से स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पेयजल, पीडीएस दुकानें, मोबाइल नेटवर्क, सड़क और पुल-पुलिया जैसी सुविधाएं सुलभ होंगी. इससे माओवादियों की अंतर्राज्यीय गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा. नक्सल उन्मूलन में उल्लेखनीय उपलब्धियां वर्ष 2024 से अब तक बीजापुर जिले में कुल 21 सुरक्षा कैम्प स्थापित किए गए हैं. इन प्रयासों के फलस्वरूप 599 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, 196 माओवादी अलग अलग मुठभेड़ में मारे गए हैं तथा 986 माओवादियों को सुरक्षा बलो की कार्यवाही में गिरफ्तारी हुई है. सुरक्षा बलो के द्वारा किये जा रहे प्रयासों के फलस्वरूप बस्तर संभाग मे 210 माओवादियों ने हथियार के साथ आत्मसमर्पण किये है, यह नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी रणनीतिक सफलता है. प्रशासनिक नेतृत्व और सहयोग जिला बीजापुर के सुदूर अंचल क्षेत्रों में नक्सल उन्मूलन अभियान एवं विकासात्मक कार्यो में तेजी लाने के लिए बस्तर रेंज आईजी सुन्दरराज पी., शालिन महानिरीक्षक केरिपु ऑप्स छ.ग. सेक्टर रायपुर, कमलोचन कश्यप पुलिस उप महानिरीक्षक रेंज दंतेवाड़ा, बी0एस0नेगी उप महानिरीक्षक (परि) सीआरपीएफ रेंज बीजापुर के मार्ग-दर्शन एवं डॉ0 जितेन्द्र कुमार यादव पुलिस अधीक्षक जिला बीजापुर, मोहित कुमार कमांडेंट केरिपु 22 बटालियन, के डी जोशी कमांडेंट केरिपु 214 बटालियन, विजेंद्र सिंह कमांडेंट केरिपु 222 बटालियन, अमित कुमार, कमांडेंट 153 सीआरपीएफ अशोक कुमार कमांडेंट कोबरा 210, पुष्पेन्द्र कुमार कमांडेंट कोबरा 206, रविन्द्र कुमार मीणा अति0 पुलिस अधीक्षक ऑप्स बीजापुर, अमन कुमार झा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल ऑप्स बीजापुर, संजय ध्रुव अति0 पुलिस अधीक्षक, मनोज तिर्की उप पुलिस अधीक्षक, अनुविभागीय अधिकारी भोपालपटनम घनश्याम कामड़े, कुलदीप सिंह डीसी ऑप्स बीजापुर की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ शासन की ‘‘नियद नेल्ला नार’’ योजना के तहत जिला बीजापुर थाना भोपालपटनम क्षेत्र के ग्राम कांडलापर्ती-2 में दिनांक 24/10/2025 एवं थाना फरसेगढ़ क्षेत्रअंतर्गत ग्राम पिल्लूर मे दिनांक 27/10/2025 को नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किया गया. नवीन कैम्प स्थापित होने से क्षेत्र में माओवादियों के अन्तर्राज्यीय गतिविधियों पर अंकुश लगेगा व नक्सल विरोधी अभियान संचालन में तेजी आयेगी एवं आप-पास क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों को विकासात्मक कार्य एवं मूलभूत सुविधायें जैसे कि सड़क, पुल/पुलिया निर्माण, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सुविधा, पीडीएस दुकाने, अच्छी शिक्षा, मोबाईल कनेक्टिविटी का विस्तार आदि की सुविधायें मिल पायेगा. नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित होने से क्षेत्र के आम-जन उत्साहित है. विकास की गति वर्ष 2023-24 और 2024-25 में अब तक जिले में कुल 43 नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किए जा चुके हैं. “नियद नेल्ला नार” योजना के तहत इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल टावर, आंगनबाड़ी और अन्य जन-सुविधाओं का तीव्र विस्तार हुआ है.

अगर किसी में दिखें ये 6 लक्षण, तो समझ जाएं — भरोसा करना भारी पड़ेगा

लाइफ में हर किसी को उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं। अगर आपने कभी किसी इंसान से धोखा खाया है तो फ्यूचर में जरूर आप हर इंसान की पर्सनैलिटी को परखते होंगे। अगर किसी व्यक्ति की पर्सनैलिटी में ये 7 तरह के व्यवहार दिख रहे हैं तो फौरन संभल जाएं। इस तरह का व्यवहार करने वाले लोग खतरनाक प्रवृत्ति के होते हैं और साइकोलॉजी कहती है कि ऐसे इंसानों पर कम भरोसा करना चाहिए। अपने प्लान को सीक्रेट रखने वाले ऐसे इंसान जो अपने प्लान के बारे में किसी को भी नहीं बताते। हमेशा अपने मूव्स और प्लान को सीक्रेट रखते हैं तो इसका मतलब है कि ये दूसरों पर भरोसा नहीं करते। ऐसे इंसान की खुद की प्रवृत्ति दूसरों को धोखा देने वाली होती है। इसलिए दूसरों पर भी भरोसा नहीं करते। अपने इमोशन को कंट्रोल करते हैं ऐसे इंसान जो अपने इमोशन को पूरी तरह से कंट्रोल में करके रखते हैं और सबसे करीबी इंसान को भी इमोशन जाहिर नहीं करते। ऐसे लोगों की पर्सनैलिटी काफी डेंजरस मानी जाती है। ऐसे लोगों पर भरोसा कम करना चाहिए। ये हमेशा खुद के फायदे के बारे में ही सोचते हैं। स्ट्रांग आई कान्टेक्ट ऐसे इंसान सामने वाले से स्ट्रांग आई कान्टेक्ट बनाते हैं और जब तक वो नजरें ना झुका ले खुद का आई कान्टेक्ट नहीं हटाते। ऐसे लोग काफी ज्यादा डेंजरस माने जाते हैं। इनसे दूरी ही अच्छी होती है। अनप्रिडिक्टिबल होते हैं ऐसे लोग ऐसे इंसान जिनके व्यवहार या फिर किसी काम के बारे में ना पता हो। कब क्या करेंगे, क्या बोलेंगे? ऐसे इंसान डेंजरस होते हैं और इन पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए। अटेंशनसीकर होते हैं ऐसे इंसान लोगों का अटेंशन मांगते नहीं है बल्कि कुछ ऐसा करते हैं कि खुदबखुद लोग उन्हें देखें। उनके काम को पूछें और तारीफ करें। ऐसे लोगों पर भरोसा कम किया जा सकता है। बहुत कम बोलते हैं व्यवहार से डेंजरस इंसान बहुत कम बोलते हैं लेकिन अपने आसपास की चीजों को पूरी तरह से ऑब्जर्व करते हैं और खुद को पावरफुल दिखाते हैं।  

मुख्यमंत्री साय बोले – बस्तर में नए विश्वास और विकास की सुबह — माओवादी कैडर की मुख्यधारा में वापसी

रायपुर आज का दिन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक है। वर्षों तक हिंसा और भय की छाया में जी रहे 210 माओवादी कैडरों ने आज “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के अंतर्गत बंदूक छोड़कर संविधान को अपनाने का निर्णय लिया है। यह छत्तीसगढ़ में शांति, विश्वास और विकास के नए युग का शुभारंभ है। मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय ने आज जगदलपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो युवा कभी माओवाद की झूठी विचारधारा के जाल में उलझे हुए थे, वे आज लोकतंत्र की शक्ति, संविधान के आदर्शों और राज्य सरकार की संवेदनशील नीतियों पर विश्वास जताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कुल 210 आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य, एक रीजनल कमेटी सदस्य, 22 डिविजनल कमेटी सदस्य, 61 एरिया कमेटी सदस्य और 98 पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन पर कुल 9 करोड़ 18 लाख रुपये का इनाम घोषित था। समारोह में 210 माओवादी कैडरों ने कुल 153 हथियार समर्पित किए, जिनमें 19 AK-47, 17 SLR, 23 INSAS राइफलें, एक INSAS LMG, 36 .303 राइफलें, 4 कार्बाइन, 11 BGL लॉन्चर, 41 शॉटगन और एक पिस्तौल शामिल हैं। मुख्यमंत्रीसाय ने इस अवसर को अपने जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोषजनक क्षणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने बंदूकें नीचे रखकर संविधान को थामा, उन्होंने छत्तीसगढ़ के भविष्य में शांति और एकता के बीज बोए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है, भय और हिंसा से नहीं। राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025”, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी पहल आज न केवल बस्तर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में बदलाव की ठोस आधारशिला सिद्ध हो रही हैं। इन योजनाओं ने बंदूक और बारूद की जगह संवाद, संवेदना और विकास को स्थापित किया है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभूतपूर्व आत्मसमर्पण केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। पुलिस, सुरक्षा बल, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठन और नागरिक समाज — सभी ने मिलकर जिस समन्वित और निरंतर प्रयास से यह परिवर्तन संभव किया, वह बस्तर के इतिहास में मील का पत्थर है। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि यह दृश्य न केवल बस्तर बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा है — कि यदि नीयत साफ हो और नीतियाँ जनसंबंधी हों, तो हिंसा का अंत और शांति की शुरुआत संभव है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास की सबसे बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण हिंसा की जड़ को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम है। “अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर, जहाँ कभी भय का शासन था, वहाँ आज विश्वास का शासन है। जो कल जंगलों में छिपे थे, आज वे समाज के निर्माण में सहभागी बन रहे हैं,”।  मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि डबल इंजन सरकार की यह दृढ़ प्रतिज्ञा है कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा — “प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्रीअमित शाह जी के नेतृत्व में हम इस लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। बस्तर का यह परिवर्तन उसी संकल्प का प्रमाण है।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित कैडरों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वरोजगार, प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएंगे ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” के उस मूल भाव का विस्तार है, जो यह संदेश देता है कि परिवर्तन का मार्ग हिंसा नहीं, बल्कि विश्वास है। यह कार्यक्रम अब पूरे बस्तर क्षेत्र में पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुधार की दिशा में नई ऊर्जा लेकर आएगा। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि यह ऐतिहासिक घटना यह सिद्ध करती है कि जब सरकार की नीतियाँ संवेदनशील और जनकेंद्रित होती हैं, तब सबसे कठिन समस्याएँ भी सुलझाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा — “हमारा लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत नहीं, बल्कि एक नए बस्तर का निर्माण है — जहाँ हर घर में विश्वास और हर मन में विकास का उजाला हो।” मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की जनता, जनप्रतिनिधियों, मीडिया, सुरक्षा बलों और नागरिक समाज को इस परिवर्तन के सहयोगी बनने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि शांति, विकास और समृद्धि की यह यात्रा तभी स्थायी होगी जब समाज का प्रत्येक वर्ग इस परिवर्तन की भावना को आत्मसात करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बस्तर को नए उद्योग, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के माध्यम से आत्मनिर्भर क्षेत्र में परिवर्तित करेगी। जंगलों की हरियाली के साथ यहाँ के युवाओं के जीवन में भी उजाला फैलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के इतिहास में यह वह क्षण है, जब “बंदूक की गूंज” की जगह “विकास की गूंज” सुनाई दे रही है। यह उस बस्तर का पुनर्जन्म है, जहाँ अब भय नहीं, विश्वास और बंधुत्व का शासन होगा। अंत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा — “यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि आत्मजागरण की यात्रा है। यह छत्तीसगढ़ की नई पहचान है — शांति, विश्वास और विकास की। आने वाले समय में बस्तर न केवल नक्सल मुक्त होगा, बल्कि देश के लिए शांति और परिवर्तन का मॉडल बनेगा।   इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रीद्वयअरुण साव औरविजय शर्मा, सांसदमहेश कश्यप, जगदलपुर विधायककिरण सिंह देव, पुलिस महानिदेशकअरुणदेव गौतम, एडीजी सीआरपीएफअमित कुमार, एडीजी बीएसएफनामग्याल, एडीजी (एएनओ)विवेकानंद झा, बस्तर रेंज के आईजीसुंदरराज पी, बस्तर के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।