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विवेकानंद स्कूल मोड़ से नयासराय तक 6.089 किमी सिक्स लेन सड़क, रांची में यातायात को मिलेगा नया स्वरूप

रांची झारखंड की राजधानी रांची में सड़क ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी परियोजना शुरू होने जा रही है. करीब 177 करोड़ रुपये की लागत से शहर का पहला सिक्स लेन स्मार्ट रोड बनाया जाएगा. यह परियोजना पथ निर्माण विभाग के तहत स्टेट हाईवे अथॉरिटी ऑफ झारखंड द्वारा क्रियान्वित की जाएगी. टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सितंबर तक इसे अंतिम रूप देने की योजना है. इसके बाद इसी वर्ष निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है. किन इलाकों से होकर गुजरेगी यह सड़क यह प्रस्तावित सिक्स लेन सड़क विवेकानंद स्कूल मोड़ से शुरू होकर जगन्नाथ मंदिर, झारखंड हाईकोर्ट के पास से गुजरते हुए नयासराय आरओबी तक जाएगी. कुल 6.089 किलोमीटर हिस्से को सिक्स लेन में विकसित किया जाएगा. इसके बाद नयासराय आरओबी से आगे रिंग रोड तक लगभग 2.12 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण किया जाएगा, जिसे टू लेन के रूप में विकसित किया जाएगा. आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा सड़क ढांचा इस स्मार्ट रोड परियोजना में सिर्फ सड़क चौड़ीकरण ही नहीं बल्कि आधुनिक शहरी सुविधाओं का भी समावेश किया गया है. सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड बनाए जाएंगे ताकि स्थानीय यातायात को सुगम बनाया जा सके. इसके साथ ही साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे शहर में सुरक्षित और व्यवस्थित आवागमन को बढ़ावा मिलेगा. सौर ऊर्जा से जगमगाएगी सड़क इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता सड़क किनारे लगाई जाने वाली सोलर लाइटिंग व्यवस्था है. पूरी सड़क को सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था से रोशन किया जाएगा, जिससे ऊर्जा की बचत होगी और पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्था विकसित की जा सकेगी. यह पहल रांची को स्मार्ट सिटी की दिशा में एक कदम और आगे ले जाएगी. सुरक्षा और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान परियोजना में उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री के उपयोग के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा. सड़क डिजाइन को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यातायात दबाव को आसानी से संभाला जा सके और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो. पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि काम की गुणवत्ता में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शहर के विकास में अहम भूमिका यह सड़क न केवल रांची के यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ने में भी मदद करेगी. इससे हाईकोर्ट, शैक्षणिक संस्थानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी. साथ ही, यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था और शहरी विकास को भी गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

बिहार को अर्बन चैलेंज फंड में 2,900 करोड़, नगर निकाय करेंगे एमओयू

पटना बिहार के शहरों को सुंदर, आधुनिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने केंद्र सरकार के 'अर्बन चैलेंज फंड' (यूसीएफ) मिशन में भागीदारी को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस खास मिशन के तहत अब बिहार के संबंधित नगर निकाय सीधे केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के साथ एमओयू कर सकेंगे। सरकार के इस कदम से बिहार के शहरी इलाकों में बुनियादी ढांचे का विकास करने, कमाई के नए जरिए ढूंढने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने में बहुत बड़ी मदद मिलने वाली है। बिहार के हिस्से आए 2,900 करोड़ रुपए इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड मिशन के लिए देशभर के शहरों को चमकाने के लिए एक लाख करोड़ रुपए की सहायता का प्रावधान किया है, जिसमें से बिहार के लिए पूरे 2,900 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। इस फंड से होने वाले कामों का पूरा पैसा सरकार अकेले नहीं देगी। किसी भी प्रोजेक्ट की कुल लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 25 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जो कुल मिलाकर 50 फीसदी होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि आधी रकम तो सरकार दे देगी, लेकिन बाकी बची हुई आधी (50 प्रतिशत) राशि संबंधित नगर निकायों को ऋण, बॉन्ड अथवा अन्य वित्तीय साधनों के माध्यम से खुद ही जुटानी होगी। लोन दिलाने के लिए हुडको को बनाया गया पार्टनर नगर निकायों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने और इस आधी रकम को जुटाने में सहायता के लिए भारत सरकार ने 'हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' (HUDCO) को नामित किया है, जिससे चयनित परियोजनाओं के लिए आसानी से लोन उपलब्ध कराया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन के तहत सिर्फ उन्हीं परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जो नगर निकायों के लिए लंबे समय तक राजस्व का मजबूत स्रोत बन सकें। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से बिहार के नगर निकाय आत्मनिर्भर और वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनेंगे, जिससे राज्य के शहरों में योजनाबद्ध और टिकाऊ विकास को एक नई गति मिलेगी।

उन्नाव में सड़क, शिक्षा और आवासीय विकास को नई रफ्तार, 101 योजनाओं का शुभारंभ

उन्नाव उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के विकास को आज एक नई रफ्तार मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिले को 570 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 101 विकास परियोजनाओं का बड़ा तोहफा मिला है. योजनाओं से उन्नाव के शहरी और ग्रामीण इलाकों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी. इन 101 परियोजनाओं में उन्नाव के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कई अहम काम शामिल हैं. किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?     आवासीय सुविधाएं: लोगों के रहने के लिए सरकारी आवासीय परिसरों का विस्तार.     सड़क और कनेक्टिविटी: जिले की सड़कों को चौड़ा और मजबूत करना ताकि आवागमन आसान हो सके.     शिक्षा का विकास: नए शिक्षण संस्थानों और कंपोजिट विद्यालयों का निर्माण.     ग्रामीण विकास: ग्राम पंचायतों में नए पंचायत भवनों का विकास.     रोजगार: युवाओं के लिए नौकरी और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने वाली योजनाएं. लोकार्पण होने वाली मुख्य परियोजनाएं उन्नाव सदर: ₹224 करोड़ की लागत से शहीद गुलाब सिंह लोधी प्रशिक्षण विद्यालय की क्षमता को दोगुना करने के लिए आवासीय और अनावासीय भवनों का निर्माण. साथ ही ₹75 करोड़ से अधिक की लागत से मंधना-गंगा बैराज-शुक्लागंज-पुरवा-मोहनलालगंज मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण. भगवंतनगर: ₹4 करोड़ से बीघापुर में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) में आधुनिक कार्यशाला और प्रशिक्षण कक्ष का निर्माण. इसके अलावा ₹3 करोड़ से अधिक की लागत से नगर पंचायत अचलगंज में कल्याण मंडपम का निर्माण. शिलान्यास होने वाली मुख्य परियोजनाएं उन्नाव सदर: ₹26 करोड़ से अधिक की लागत से धाना से जंगेश्वर होते हुए पावा मार्ग का सुदृढ़ीकरण कार्य. ₹24 करोड़ की लागत से चांदपुर में 'मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय' का निर्माण. इसके साथ ही ₹9 करोड़ से अधिक की लागत से नगर पालिका परिषद गंगाघाट में कार्यालय भवन का निर्माण कार्य. भगवंतनगर: ₹28 करोड़ की लागत से बिहार-सरेनी-चैनपुर-भगवंतनगर मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य. साथ ही ₹3 करोड़ से बक्सर (मां चंद्रिका देवी मंदिर) में बाईपास का निर्माण कार्य. इससे संबंधित कार्यक्रम आज यानी 18 जून, 2026 को सुबह 10:00 बजे आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ राज्य मंत्री (उच्च शिक्षा) रजनी तिवारी, उन्नाव के सांसद डॉ. स्वामी सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज, जिला पंचायत अध्यक्ष शकुन सिंह और क्षेत्र के कई विधायक व माननीय सदस्य मौजूद रहे.

ग्रामीणों को बड़ी राहत: दरियाबाद नहर पर नए पुल और सिंचाई व्यवस्था में सुधार को मंजूरी

बाराबंकी यूपी के बाराबंकी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश सरकार ने दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी देते हुए कुल 22 करोड़ 21 लाख 92 हजार रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी है। इनमें दरियाबाद समानान्तर शाखा पर दो जर्जर कदम पुलों का पुनर्निर्माण और प्रतापगंज रजबहा के आंतरिक सुधार और क्षतिग्रस्त पुलिया के पुनर्निर्माण का कार्य शामिल है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से तीन दर्जन से अधिक गांवों की करीब डेढ़ लाख से अधिक आबादी को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है। पुलों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। दरियाबाद समानांतर शाखा नहर पर बनेंगे दो पुल: दरियाबाद समानांतर नहर पर ग्राम बनियान के पास बना कदम पुल काफी जर्जर हो चुका है। इसी तरह इस नहर पर बना अचैचा कदम पुल भी जर्जर है। बनियाल पुल से भगौली, पलखा, गौरा, गजनी, थाल, खलीनगर, ससैलखिया आदि गांव के ग्रामीणों का आवागमन होता है। इसी तरह अचैचा पुल से मिठवारा, लहसी, भुंड,चक, कसियापुर, घतवापुर आदि गांवों के लोगों का आना जाना है। अनुमान के मुताबिक इन पुलों लाभ क्षेत्र की करीब डेढ़ लाख की आबादी को मिल रहा है। लेकिन यह दोनों पुल काफी जर्जर हो चुके है। जिससे हादसे का डर बना हुआ है। इसी नहर पर तालगांव का पुल भी जर्जर हो चुका है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने दरियाबाद समानांतर नहर पर जर्जर हो चुके बनियाल पुल व अचैचा पुल के पुर्ननिर्माण की स्वीकृति दी है। इस कार्य के लिए 12 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। लंबे समय से जर्जर हो चुके इन पुलों के कारण ग्रामीणों, किसानों, छात्रों और राहगीरों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है। दोनों पुलों के फाउंडेशन के निर्माण के लिए खोदाई का काम शुरू हो जाने से स्थानीय लोगों में उतसाह है। प्रतापगंज रजबहा की भी सुधरेगी दशा शासन ने प्रतापगंज रजबहा के आंतरिक सेक्शन सुधार, खड़ंजा निर्माण और किमी 17.250 पर स्थित क्षतिग्रस्त पुलिया के पुनर्निर्माण की मंजूरी दी है। इस कार्य पर नौ करोड़ 71 लाख 92 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। जिसकी मंजूरी शासन से मिली चुकी है। इस परियोजना के तहत प्रतापगंज रजबहा के सिंचाई तंत्र को मजबूत किया जाएगा। जिससे पानी के प्रवाह में सुधार होगा और किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि इन दोनों परियोजनाओं का लाभ दर्जनों गांवों की डेढ़ लाख से अधिक आबादी को मिलेगा। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर आवागमन भी अधिक सुरक्षित व सुगम होगा। स्थानीय किसानों के अनुसार नहरों और पुलों की जर्जर स्थिति के कारण वर्षों से समस्याएं बनी हुई थीं। अधीक्षण अभियंता सिंचाई विभाग लखनऊ प्रखण्ड इंजी. भानु प्रताप सिंह ने बताया कि नहरों पर पुल निर्माण का कार्य शुरू करा दिया गया है। जहां पर पुल बनने हैं वहां पर खुदाई और पुराने पुलों को तोड़ने का काम चल रहा है। कुछ स्थानों पर रेगुलेटर व पटरी के मरम्मत का कार्य भी होना है।

अलवर: केंद्र-राज्य योजनाओं और विकास कार्यों की मंत्री ने दी जानकारी

 जयपुर 12 साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के विषय पर आधारित तीन दिवसीय प्रदर्शनी का जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने सूचना एवं जन सम्पर्क कार्यालय, धौलपुर में प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की व्यापकता एवं प्रभावशीलता को समझने का अवसर प्रदान करती है। प्रदर्शनी के माध्यम से यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि सरकार की विभिन्न योजनाओं ने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, डिजिटल इंडिया, किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं तथा राज्य सरकार की जनहितकारी पहल, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों तथा विकास परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की गई। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास, रोजगार संवर्धन तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से संबंधित उपलब्धियों को भी प्रमुखता से दर्शाया गया। उन्होंने प्रदर्शनी के सफल आयोजन के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आमजन एवं प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने तथा विकास यात्रा को समझने का प्रभावी माध्यम हैं। उल्लेखनीय है कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी केंद्र एवं राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों तथा सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। प्रदर्शनी के माध्यम से नागरिकों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान जिला कलक्टर निधि बी टी, जिला अध्यक्ष राजवीर सिंह राजावत, गिर्राज सिंह, डॉ. शिवचरण कुशवाह, नीरजा शर्मा, मोतीलाल मीणा सहित अन्य जनप्रतिनिधि व कर्मचारी उपस्थित रहे।

WDFC बना लॉजिस्टिक्स गेमचेंजर: तेज माल परिवहन, कम लागत और नए रोजगार के अवसर

 जयपुर वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के माध्यम से देश-प्रदेश में औद्योगिक विकास तेजी से फास्ट्रेक पर दौड़ रहा है। इस कॉरिडोर से रेल आधारित लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण और आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता में बड़ा सुधार आ रहा है। कॉरिडोर में विशेषकर रेल-पर-ट्रक की सेवा से माल का आवागमन अधिक तेज और सुगम बना है। यह कॉरिडोर राजस्थान में आर्थिक विकास को गति देने एवं रोजगार बढ़ाने के साथ-साथ शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा सामाजिक बदलाव लाने को तैयार है। जवाहर लाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (जेएनपीटी) से दादरी तक फैले इस वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लम्बाई 1 हजार 506 किमी. एवं लागत 1 लाख 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। कॉरिडोर का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरता है। यह कॉरिडोर राजस्थान को भारत के उत्तरी एवं पश्चिमी बाजारों तक बेहतर संपर्क प्रदान करता है। कॉरिडोर के अंतर्गत जेएनपीटी से न्यू सफाले (वेतरणा) सेक्शन पर हाल ही में सफलतापूर्वक ट्रायल रन हो चुका है। इसके साथ ही, इस कॉरिडोर का काम पूर्ण हो चुका है। वहीं, कई सेक्शन में माल परिवहन पहले से ही प्रारंभ है। अजमेर में 1.5 मिलियन टन क्षमता का कार्गो टर्मिनल शुरू- यह कॉरिडोर राजस्थान के सीकर, रींगस, फुलेरा, ब्यावर, सिरोही से होकर गुजर रहा है। जिससे इन जिलों के साथ-साथ अन्य स्थानों के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। हाल ही में अजमेर के सराधना में नए गतिशक्ति मल्टी मॉडल कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन हुआ है। इस टर्मिनल में आधुनिक कार्गो हैंडलिंग अवसंरचना, वेयरहाउसिंग सुविधाएं तथा निर्बाध मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है, जिससे उद्योगों एवं व्यापारियों के लिए माल परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित एवं किफायती होगा। यह टर्मिनल प्रति माह लगभग 40 रेक (लगभग 1.5 मिलियन टन प्रति वर्ष) कार्गो हैंडल करने में सक्षम होगा, जिसमें मार्बल, ग्रेनाइट, खनिज तथा अन्य वस्तुएं शामिल हैं। यानि किशनगढ़ के मार्बल को कॉरिडोर के उच्च गति माल परिवहन नेटवर्क के माध्यम से जेएनपीटी, पीपावाव एवं मुंद्रा बंदरगाहों तक पहुंचाया जाएगा। इससे लोकल फॉर ग्लोबल का संकल्प साकार होगा। ट्रेन की लम्बाई लगभग दोगुनी, रफ्तार डेढ़ गुना से अधिक- यह कॉरिडोर लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को सुदृढ़ करने के साथ ही माल परिवहन को तेजी से बढ़ाने की दीर्घकालिक पहल है। सामान्य कॉरिडोर की तुलना में 66 प्रतिशत वृद्धि के साथ इस कॉरिडोर की ऊंचाई 7.1 मीटर और 14 प्रतिशत वृद्धि के साथ चौड़ाई 3,660 एमएम रखी गई है। ट्रेन की लम्बाई 1500 मीटर है, जबकि सामान्य कॉरिडोर में 700 मीटर ही होती है। वहीं, डबल कन्टेनर स्टेक और 2.4 प्रतिशत ट्रेन लोड की क्षमता भी इस कॉरिडोर में उपलब्ध है। इस कॉरिडोर में ट्रेन की रफ्तार भी औसतन 25 किमी. से बढ़ाकर 65 किमी. प्रति घण्टे की गई है।  रेल-पर-ट्रक की सुविधा, डीजल की खपत कम- डब्ल्यूडीएफसी की सबसे बड़ी विशेषता रेल-पर-ट्रक (टीओटी) सेवा है। यह रेलवे की दीर्घकालिक माल परिवहन परिवर्तन रणनीति के हिस्सा के रूप में बनाई गई है, जो बहु-मॉडल लॉजिस्टिक्स को सक्षम बनाता है। इस सेवा के तहत माल से लदे ट्रकों को विशेष रूप से संशोधित फ्लैट वैगनों पर समर्पित माल ढुलाई गलियारा के माध्यम से ले जाया जाता है। यह रेल-पर-ट्रक सेवा राजमार्गों की भीड़भाड़ को कम करने, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स लागतों को अनुकूलित करने में मदद करती है। इससे डीजल की खपत घटती है और सड़क अवसंरचना की क्षति में कमी आती है। टीओटी सेवा किसानों और उद्यमियों के लिए लाभकारी है। यह उन्हें अपनी फसलों और उत्पादों का तेजी से परिवहन करने की सुविधा प्रदान करती है। जैसे सीकर के प्याज को खेतों से नजदीकी टीओटी टर्मिनलों तक ले जाया जा सकता है, इसे समर्पित माल ढुलाई गलियारे के माध्यम से तेजी से स्थानांतरित किया जा सकता है, और सड़क मार्ग से दूर के उपभोक्ता केंद्रों तक न्यूनतम रख-रखाव और समय हानि के साथ पहुंचाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसमें पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतर्गत दादरी से जीएनपीटी एवं पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तहत लुधियाना से डंकुनी तक जोड़ा गया है। यह परियोजना देश का लगभग 70 प्रतिशत माल परिवहन करने के उद्देश्य से बनाई गई है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दोनों तरफ 150 किलोमीटर का प्रभाव क्षेत्र दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र और जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं

ग्रामीण महिलाओं के हाथ में विकास की कमान

पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारक एवं अंत्योदय कार्डधारक दो लाख लाभार्थी परिवारों को समूहों से जोड़ा जाएगा ग्रामीण महिलाओं को आवश्यकता अनुसार ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही, जिसे सरल किस्तों में चुकाने की मिलेगी छूट स्टार्ट-अप फंड, रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड बनेंगे विकसित यूपी का ग्रोथ इंजन लखनऊ, उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को विकास की धुरी बनाया जा रहा है। स्टार्ट-अप फंड, रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के जरिए महिलाओं को आर्थिक संबल देकर प्रदेश को नए ग्रोथ इंजन की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसी क्रम में पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारक एवं अंत्योदय कार्डधारकों के करीब दो लाख लाभार्थी परिवारों को समूहों से जोड़ा जाएगा। इस तरह मिलेगी जिम्मेदारी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को समूह सखी, बैंक सखी, ड्रोन सखी और आजीविका सखी जैसी जिम्मेदार भूमिकाएं दी जाएंगी। इससे जहां महिलाओं की आय बढ़ेगी, वहीं सरकारी योजनाओं का लाभ भी गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा। जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित 6.67 लाख परिवारों की महिलाओं को समूह से जोड़ने का अभियान तेज योगी सरकार पात्र गृहस्थी और अंत्योदय राशन कार्डधारकों के करीब दो लाख लाभार्थी परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने जा रही है। इसके साथ ही वीबी जीरामजी कार्डधारकों और जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित 6.67 लाख परिवारों की महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का अभियान तेज किया गया है। ग्रामीण महिलाओं को आवश्यकता अनुसार ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिसे सरल किस्तों में चुकाने की छूट होगी, ताकि वे बिना आर्थिक दबाव के स्वरोजगार शुरू कर सकें। वहीं, प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में महिलाओं को समूह से जोड़ने के लिए मेगा कैंपेन चलाया जाएगा। सशक्त गांव और सशक्त उत्तर प्रदेश की आधारशिला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सीधे बाजार से जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय उत्पादों को उचित मूल्य मिल सके। योगी सरकार का मानना है कि सशक्त महिला ही सशक्त परिवार, सशक्त गांव और सशक्त उत्तर प्रदेश की आधारशिला है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ विकसित यूपी के लक्ष्य को नई गति देगी।

सुरक्षा से विकास तक: नक्सल प्रभावित इलाकों में बदली तस्वीर

बीजापुर बीजापुर जिले के थाना भोपालपटनम क्षेत्रान्तर्गत कैम्प कांडलापर्ती-2 और थाना फरसेगढ़ क्षेत्रान्तर्गत ग्राम पील्लूर में नवीन सुरक्षा और जन-सुविधा कैम्प की स्थापना की गई है. यह पहल छत्तीसगढ़ शासन की “नियद नेल्ला नार” योजना के अंतर्गत ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा और सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए की गई है. विपरीत मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए इन कैम्पों की स्थापना सफलतापूर्वक की. यह कदम न केवल सुरक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि क्षेत्रीय विकास की गति को भी सशक्त करेगा. अंतर्राज्यीय सम्पर्क और आधारभूत संरचना का विस्तार भोपालपटनम् से फरसेगढ़, सेण्ड्रा और गढ़चिरौली को जोड़ने की दिशा में यह एक अहम प्रगति है. आगामी समय में नेशनल पार्क क्षेत्र के ग्रामों को सड़क और अन्य सुविधाओं से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा. सुरक्षा और विकास का समन्वय कैम्प की स्थापना से स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पेयजल, पीडीएस दुकानें, मोबाइल नेटवर्क, सड़क और पुल-पुलिया जैसी सुविधाएं सुलभ होंगी. इससे माओवादियों की अंतर्राज्यीय गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा. नक्सल उन्मूलन में उल्लेखनीय उपलब्धियां वर्ष 2024 से अब तक बीजापुर जिले में कुल 21 सुरक्षा कैम्प स्थापित किए गए हैं. इन प्रयासों के फलस्वरूप 599 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, 196 माओवादी अलग अलग मुठभेड़ में मारे गए हैं तथा 986 माओवादियों को सुरक्षा बलो की कार्यवाही में गिरफ्तारी हुई है. सुरक्षा बलो के द्वारा किये जा रहे प्रयासों के फलस्वरूप बस्तर संभाग मे 210 माओवादियों ने हथियार के साथ आत्मसमर्पण किये है, यह नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी रणनीतिक सफलता है. प्रशासनिक नेतृत्व और सहयोग जिला बीजापुर के सुदूर अंचल क्षेत्रों में नक्सल उन्मूलन अभियान एवं विकासात्मक कार्यो में तेजी लाने के लिए बस्तर रेंज आईजी सुन्दरराज पी., शालिन महानिरीक्षक केरिपु ऑप्स छ.ग. सेक्टर रायपुर, कमलोचन कश्यप पुलिस उप महानिरीक्षक रेंज दंतेवाड़ा, बी0एस0नेगी उप महानिरीक्षक (परि) सीआरपीएफ रेंज बीजापुर के मार्ग-दर्शन एवं डॉ0 जितेन्द्र कुमार यादव पुलिस अधीक्षक जिला बीजापुर, मोहित कुमार कमांडेंट केरिपु 22 बटालियन, के डी जोशी कमांडेंट केरिपु 214 बटालियन, विजेंद्र सिंह कमांडेंट केरिपु 222 बटालियन, अमित कुमार, कमांडेंट 153 सीआरपीएफ अशोक कुमार कमांडेंट कोबरा 210, पुष्पेन्द्र कुमार कमांडेंट कोबरा 206, रविन्द्र कुमार मीणा अति0 पुलिस अधीक्षक ऑप्स बीजापुर, अमन कुमार झा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल ऑप्स बीजापुर, संजय ध्रुव अति0 पुलिस अधीक्षक, मनोज तिर्की उप पुलिस अधीक्षक, अनुविभागीय अधिकारी भोपालपटनम घनश्याम कामड़े, कुलदीप सिंह डीसी ऑप्स बीजापुर की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ शासन की ‘‘नियद नेल्ला नार’’ योजना के तहत जिला बीजापुर थाना भोपालपटनम क्षेत्र के ग्राम कांडलापर्ती-2 में दिनांक 24/10/2025 एवं थाना फरसेगढ़ क्षेत्रअंतर्गत ग्राम पिल्लूर मे दिनांक 27/10/2025 को नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किया गया. नवीन कैम्प स्थापित होने से क्षेत्र में माओवादियों के अन्तर्राज्यीय गतिविधियों पर अंकुश लगेगा व नक्सल विरोधी अभियान संचालन में तेजी आयेगी एवं आप-पास क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों को विकासात्मक कार्य एवं मूलभूत सुविधायें जैसे कि सड़क, पुल/पुलिया निर्माण, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सुविधा, पीडीएस दुकाने, अच्छी शिक्षा, मोबाईल कनेक्टिविटी का विस्तार आदि की सुविधायें मिल पायेगा. नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित होने से क्षेत्र के आम-जन उत्साहित है. विकास की गति वर्ष 2023-24 और 2024-25 में अब तक जिले में कुल 43 नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किए जा चुके हैं. “नियद नेल्ला नार” योजना के तहत इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल टावर, आंगनबाड़ी और अन्य जन-सुविधाओं का तीव्र विस्तार हुआ है.

मुख्यमंत्री साय बोले – बस्तर में नए विश्वास और विकास की सुबह — माओवादी कैडर की मुख्यधारा में वापसी

रायपुर आज का दिन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक है। वर्षों तक हिंसा और भय की छाया में जी रहे 210 माओवादी कैडरों ने आज “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के अंतर्गत बंदूक छोड़कर संविधान को अपनाने का निर्णय लिया है। यह छत्तीसगढ़ में शांति, विश्वास और विकास के नए युग का शुभारंभ है। मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय ने आज जगदलपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो युवा कभी माओवाद की झूठी विचारधारा के जाल में उलझे हुए थे, वे आज लोकतंत्र की शक्ति, संविधान के आदर्शों और राज्य सरकार की संवेदनशील नीतियों पर विश्वास जताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कुल 210 आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य, एक रीजनल कमेटी सदस्य, 22 डिविजनल कमेटी सदस्य, 61 एरिया कमेटी सदस्य और 98 पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन पर कुल 9 करोड़ 18 लाख रुपये का इनाम घोषित था। समारोह में 210 माओवादी कैडरों ने कुल 153 हथियार समर्पित किए, जिनमें 19 AK-47, 17 SLR, 23 INSAS राइफलें, एक INSAS LMG, 36 .303 राइफलें, 4 कार्बाइन, 11 BGL लॉन्चर, 41 शॉटगन और एक पिस्तौल शामिल हैं। मुख्यमंत्रीसाय ने इस अवसर को अपने जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोषजनक क्षणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने बंदूकें नीचे रखकर संविधान को थामा, उन्होंने छत्तीसगढ़ के भविष्य में शांति और एकता के बीज बोए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है, भय और हिंसा से नहीं। राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025”, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी पहल आज न केवल बस्तर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में बदलाव की ठोस आधारशिला सिद्ध हो रही हैं। इन योजनाओं ने बंदूक और बारूद की जगह संवाद, संवेदना और विकास को स्थापित किया है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभूतपूर्व आत्मसमर्पण केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। पुलिस, सुरक्षा बल, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठन और नागरिक समाज — सभी ने मिलकर जिस समन्वित और निरंतर प्रयास से यह परिवर्तन संभव किया, वह बस्तर के इतिहास में मील का पत्थर है। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि यह दृश्य न केवल बस्तर बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा है — कि यदि नीयत साफ हो और नीतियाँ जनसंबंधी हों, तो हिंसा का अंत और शांति की शुरुआत संभव है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास की सबसे बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण हिंसा की जड़ को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम है। “अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर, जहाँ कभी भय का शासन था, वहाँ आज विश्वास का शासन है। जो कल जंगलों में छिपे थे, आज वे समाज के निर्माण में सहभागी बन रहे हैं,”।  मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि डबल इंजन सरकार की यह दृढ़ प्रतिज्ञा है कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा — “प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्रीअमित शाह जी के नेतृत्व में हम इस लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। बस्तर का यह परिवर्तन उसी संकल्प का प्रमाण है।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित कैडरों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वरोजगार, प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएंगे ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” के उस मूल भाव का विस्तार है, जो यह संदेश देता है कि परिवर्तन का मार्ग हिंसा नहीं, बल्कि विश्वास है। यह कार्यक्रम अब पूरे बस्तर क्षेत्र में पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुधार की दिशा में नई ऊर्जा लेकर आएगा। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि यह ऐतिहासिक घटना यह सिद्ध करती है कि जब सरकार की नीतियाँ संवेदनशील और जनकेंद्रित होती हैं, तब सबसे कठिन समस्याएँ भी सुलझाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा — “हमारा लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत नहीं, बल्कि एक नए बस्तर का निर्माण है — जहाँ हर घर में विश्वास और हर मन में विकास का उजाला हो।” मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की जनता, जनप्रतिनिधियों, मीडिया, सुरक्षा बलों और नागरिक समाज को इस परिवर्तन के सहयोगी बनने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि शांति, विकास और समृद्धि की यह यात्रा तभी स्थायी होगी जब समाज का प्रत्येक वर्ग इस परिवर्तन की भावना को आत्मसात करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बस्तर को नए उद्योग, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के माध्यम से आत्मनिर्भर क्षेत्र में परिवर्तित करेगी। जंगलों की हरियाली के साथ यहाँ के युवाओं के जीवन में भी उजाला फैलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के इतिहास में यह वह क्षण है, जब “बंदूक की गूंज” की जगह “विकास की गूंज” सुनाई दे रही है। यह उस बस्तर का पुनर्जन्म है, जहाँ अब भय नहीं, विश्वास और बंधुत्व का शासन होगा। अंत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा — “यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि आत्मजागरण की यात्रा है। यह छत्तीसगढ़ की नई पहचान है — शांति, विश्वास और विकास की। आने वाले समय में बस्तर न केवल नक्सल मुक्त होगा, बल्कि देश के लिए शांति और परिवर्तन का मॉडल बनेगा।   इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रीद्वयअरुण साव औरविजय शर्मा, सांसदमहेश कश्यप, जगदलपुर विधायककिरण सिंह देव, पुलिस महानिदेशकअरुणदेव गौतम, एडीजी सीआरपीएफअमित कुमार, एडीजी बीएसएफनामग्याल, एडीजी (एएनओ)विवेकानंद झा, बस्तर रेंज के आईजीसुंदरराज पी, बस्तर के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।