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मुरैना में यूजीसी विरोध में बाजार बंद, 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात, 2 बजे के बाद खुलेंगी दुकानें

मुरैना  यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज ने आज मुरैना बंद का ऐलान किया था, इसी के चलते आज मुरैना शहर के सभी प्रतिष्ठान बंद नजर आए। यह बंद सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक रहेगा। शादियां होने के कारण दोपहर 2 बजे से बाजार खोलने के लिए आंदोलन कर्ताओं और प्रशासन में बनी सहमति।  सवर्ण समाज की ओर से आज यूजीसी कानून का विरोध करते हुए मुरैना शहर का बाजार बंद कराया। सदर बाजार, हनुमान चौराहा, मिर्च बजरिया, मार्कण्डेश्वर बाजार, एम एस रोड, सिकरवारी बाजार, तेलीपाड़ा, नाला नंबर एक सभी मुख्य बाजार पूर्ण रूप से बंद दिखे। व्यापारियों ने भी इस बंद में खुल कर सहयोग करते हुए बाजार को बंद रखा। दोपहर 2 बजे तक रहेगा बंद सवर्ण समाज के द्वारा यूजीसी कानून का विरोध करते हुए बाजार बंद की घोषणा के बाद पुलिस प्रशासन ने कल आंदोलन कर्ताओं से बैठक की थी, जिसमें शादियों का सीजन देखते हुए बंद सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखने का निश्चय हुआ था। इस पर व्यापारियों ने भी सहमती दी थी। 100 से अधिक जवान अधिकारी तैनात सीएसपी दीपाली चन्दौरिया के अनुसार यूजीसी कानून के विरोध में मुरैना शहर बंद कराया गया है इस पर 100 पुलिस जवान अधिकारी शहर में चप्पे चप्पे पर मौजूद है । बज्र रिजर्व फोर्स किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए तैयार है । अभी यह सिर्फ संकेत सर्वण समाज सदस्य और ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश दंडोतिया ने बताया कि यूजीसी कानून के विरोध में सांकेतिक बंद है, सभी व्यापारियों का सहयोग मिल रहा है। स्वेच्छा से बंद में शामिल है। बुधवार को जिला प्रशासन की बैठक में भी हमसे और प्रशासनिक अधिकारियों से बहस हुई थी लेकिन हम अपनी बात पर अड़े थे। शादियां होने के कारण हमने दोपहर दो बजे के बाद व्यापारियों भाइयों को बाजार खोलने की सहमति भी दी है।

शिक्षा जगत में बदलाव: UGC गाइडलाइन पर उच्च शिक्षा विभाग का नया आदेश

भोपाल  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइन को लेकर उठे विवाद और सुप्रीम कोर्ट से रोक लगाए जाने के बाद अब पुरानी गाइडलाइन लागू रहेगी। उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कहा कि पुरानी गाइडलाइन लागू रहेगी। छात्रों की शिकायतों का निवारण यूजीसी विनियम, 2023 को सख्ती से लागू कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त विभाग ने मध्यप्रदेश की सभी शासकीय- अशासकीय विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग तथा संबद्ध कॉलेजों को नियमों पालन करने के आदेश दिए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश संस्थानों में लोकपाल की नियुक्ति तो कर दी गई है, लेकिन यूजीसी 2023 के प्रावधानों के अनुरूप अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे छात्रों की शिकायतें लंबित रहती हैं और उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। अब इस लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की जा सकती है। छात्रों को बताएं शिकायत कहां करना है जारी आदेश के अनुसार प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज को अपनी वेबसाइट और प्रोस्पेक्टस में एसजीआरसी के सदस्यों के नाम, पदनाम, संपर्क विवरण और लोकपाल का नाम, पता, ई-मेल आईडी तथा कार्यकाल स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर छात्र को यह जानकारी हो कि शिकायत कहां और किस प्रक्रिया से दर्ज करनी है। हर संस्थान को छात्रों के लिए ऑनलाइन शिकायत पोर्टल विकसित करना होगा। शिकायत प्राह्रश्वत होने के 15 दिनों के भीतर उसे स्क्रिप्ट के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। प्रवेश से 60 दिन पहले प्रोस्पेक्टस जारी करना होगा प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से कम से कम 60 दिन पूर्व प्रोस्पेक्टस का ऑनलाइन प्रकाशन अनिवार्य किया गया है। प्रोस्पेक्टस में पाठ्यक्रमों का विवरण, सीटों की संख्या, योग्यता मानदंड, चयन प्रक्रिया, पूरी फीस संरचना, रिफंड नीति, जुर्माना, संकाय की योग्यता, बुनियादी ढांचा, हॉस्टल, लाइब्रेरी और रैगिंग-रोधी नियमों की जानकारी देना अनिवार्य होगा। गलत या भ्रामक जानकारी पाए जाने पर छात्र सीधे एसजीआरसी और लोकपाल से शिकायत कर सकेंगे।

न्यायधानी में UGC नियमों के विरोध का बंद फ्लॉप, सवर्ण संगठनों ने जताई नाराज़गी

बिलासपुर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के विरोध में आज देशभर में सवर्ण समाज ने बंद का आह्वान किया है. हालांकि, छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में बंद बेअसर नजर आया और मुख्य बाजार सामान्य दिनों की तरह खुले रहे. लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है. सामान्य वर्ग के समाज प्रतिनिधियों, शिक्षकों, छात्रों और विभिन्न संगठनों ने UGC के नए नियमों पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि ये शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के हितों के खिलाफ है. सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों की अनदेखी की जा रही है. यूजीसी कानून विरोध आंदोलन के संयोजक डॉ प्रदीप शुक्ला ने कहा कि जब तक इन नियमों को रद्द नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. आज शहर में बड़ी रैली निकालने और प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी है. फिलहाल, पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे. जानिए क्यों हो रहा UGC के नियमों का विरोध बता दें, UGC ने यह नियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी की कथित जातिगत भेदभाव के कारण हुए हत्या मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार किए थे, ताकि कैंपस में जातिगत और अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को जड़ से खत्म किया जा सके. लेकिन नियम लागू होते ही देशभर में सवर्ण समाज ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. विवाद की मुख्य वजहें और विरोधियों के तर्क सामान्य वर्ग (S-4 जैसे संगठन) और कई शिक्षक समूहों द्वारा विरोध के पीछे निम्नलिखित तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं:     OBC को शामिल करना: विरोधियों का तर्क है कि SC-ST के साथ अब OBC को भी इन कड़े सुरक्षा प्रावधानों में शामिल करना नियमों के दुरुपयोग की संभावना को बढ़ाता है.     झूठे आरोपों का डर: सवर्ण संगठनों का मानना है कि ‘इक्विटी स्क्वाड’ और ‘समता दूत’ जैसी व्यवस्थाओं से निर्दोष छात्रों और शिक्षकों को आपसी रंजिश के चलते झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है.     असमान सुरक्षा: तर्क दिया जा रहा है कि नियम केवल आरक्षित वर्गों की सुरक्षा की बात करते हैं, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए भेदभाव से सुरक्षा का कोई स्पष्ट ढांचा इसमें नहीं दिखता. सुप्रीम कोर्ट ने नए नियम पर लगाई रोक चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इन नियमों पर रोक लगाते हुए कहा कि ‘भेदभाव’ की परिभाषा वर्तमान रेगुलेशन में बहुत धुंधली है.नियमों को और अधिक समावेशी बनाने की जरूरत है ताकि यह देखा जा सके कि ये ‘समानता के अधिकार’ का उल्लंघन तो नहीं कर रहे. कोर्ट ने कहा कि जब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं आता, 2012 के पुराने यूजीसी नियम ही प्रभावी रहेंगे.

सड़कों पर उतरी करणी सेना, UGC नीति के विरोध में 1 फरवरी को देशव्यापी बंद

इंदौर विश्विद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के द्वारा नई नीति के विरोध में करणी सेना आ गई है। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के स्थित देवी अहिल्या बाई विश्विद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और साथ कुलपति को ज्ञापन भी सौंपा। परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ किया देवी आहिल्या बाई विश्वविद्यालय के आरएनटी मार्ग स्थित परिसर में करणी सेना के कार्याकर्ताओं द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इस दौरान करणी सेना अध्यक्ष अनुराग प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार को हनुमान जी सरकार सद्बुद्धि दें। हम लोग शिक्षा में समानता के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। 1 फरवरी को भारत बंद का ऐलान अनुराग सिंह ने बताया कि यूजीसी के प्रस्ताव के खिलाफ हम एक फरवरी को भारत बंद करेंगे। इसके बाद दो फरवरी को मध्यप्रदेश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंपकर, उनसे पूछेंगे कि वह यूजीसी के इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं या समर्थन करते हैं। अगर वह विरोध करते हैं तो उनके लिखित में आश्वासन लेंगे कि वह केंद्र सरकार के सामने हमारी बात को रखें। वहीं, यूजीसी के प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों को चूड़ियां भेंट की जाएंगी और उनकी अर्थी भी निकालेंगे। सभी जगह समर्थन करने वाले सांसदों का विरोध किया जाएगा। दरअसल, यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस’ नाम से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। जिसमें 15 जनवरी से देशभर की यूनिवर्सिटीज-कॉलेज में लागू कर दिया गया है। इसको लेकर सरकार ने दावा किया है कि इससे कॉलेजों में जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, जन्मस्थान, विकलांगता के आधार पर होने वाला भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। साथ ही नए नियम के अनुसार, हर यूनिवर्सिटी-कॉलेज को ईओसी बनाना जरूरी होगा।

सवर्ण होने के बावजूद UGC नियमों के पक्ष में उतरे गुरु रहमान, बोले– शिक्षा में बदलाव ज़रूरी

पटना विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए समानता नियमों को लेकर बिहार समेत देश भर में हंगामा मचा है। खासकर सवर्ण वर्ग के लोग इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। इस बीच पटना के चर्चित कोचिंग शिक्षक गुरु रहमान ने यूजीसी के नए इक्विलिटी रूल्स का समर्थन किया है। उनका कहना है कि वह खुद सवर्ण हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी में उन्होंने धर्म, लिंग, जाति के आधार पर भेदभाव होते देखा है। इसलिए समानता लाने के लिए ये नियम जरूरी हैं।   बातचीत में गुरु रहमान ने मंगलवार को कहा, "मैं खुद सवर्ण हूं, बावजूद इसके जिस यूनिवर्सिटी से मैंने पढ़ाई की, वहां देखा है कि लोगों के साथ भेदभाव होता है। इसलिए मैं यूजीसी के नए नियमों का समर्थन करता हूं। समानता तभी आएगी जब लोगों के मन में भय रहेगा। भय का वातावरण इसलिए पैदा किया गया है ताकि कोई किसी के खिलाफ न बोले। जब कोई किसी के विरूद्ध नहीं बोलेगा तो अपने आप समानता आ जाएगी।" गुरु रहमान ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया और कहा कि सरकार का यह फैसला ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि जिस परिस्थिति में यूजीसी इक्विटी बिल लाया गया है, सवर्ण चाहे इसका विरोध करे, उनका भी विरोध करे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। बता दें कि यूजीसी ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी स्टूडेंट्स के साथ भेदभाव को रोकने के लिए इक्विटी नियम लागू किए हैं। सवर्ण वर्ग इसका विरोध कर रहा है। जनरल कैटगरी के छात्र-छात्राओं और लोगों क कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग किया जा सकता है। देश भर में इस पर हंगामा मचा हुआ है। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। उत्तर प्रदेश में एक भाजपा नेता और एक अधिकारी ने पद से इस्तीफा भी दे दिया।  

कहां जाएं शिकायत लेकर सवर्ण? UGC रूल्स को चुनौती, SC में पहुंचा मामला

नई दिल्ली यूजीसी रूल्स के खिलाफ बढ़ रहे विरोध के बीच यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि ऐसे नियम गलत हैं। इसके तहत सवर्ण छात्रों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। अर्जी में सवाल उठाया गया है कि आखिर जनरल कैटेगरी के छात्रों को पीड़ित की परिभाषा में जगह क्यों नहीं दी गई है। यदि उनके साथ किसी तरह का भेदभाव या फिर दुर्व्यवहार होता है तो वहां शिकायत करेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 को लागू किया था। यह सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू होना है।   याचिका में कहा गया कि नए नियम उन समुदायों के छात्रों को अपने खिलाफ होने वाले शोषण के खिलाफ शिकायत करने के अधिकार से वंचित किया गया है, जो एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग से ताल्लुक नहीं रखते हैं। अर्जी में कहा गया कि आखिर सवर्ण छात्रों के साथ किसी तरह का भेदभाव होता है तो वह कहां जाएंगे। इसके अलावा अहम सवाल यह भी है कि यदि ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के किसी छात्र की शिकायत को गलत पाया गया तो उनके खिलाफ कोई ऐक्शन क्यों नहीं होगा। दरअसल नए नियमों शिकायत के झूठे मामलों में कार्रवाई का प्रावधान ही हटा दिया गया है। लखनऊ से दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन, UGC दफ्तर के बाहर हल्लाबोल अदालत से मांग की गई है कि इन नियमों को वापस लिया जाए। मौजूदा प्रारूप के तहत इन्हें लागू नहीं किया जा सकता। अर्जी में कहा गया कि ये नियम तो सवर्णों के साथ ही एक तरह से भेदभाव वाले हैं और यह भेदभाव एक तरह से सरकार ने ही किया है। बता दें कि यह मामला देश भर में लगातार तूल पकड़ रहा है। दिल्ली में यूजीसी दफ्तर के बाहर इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा लखनऊ यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन हो रहे हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में इस मसले पर विरोध प्रदर्शन और बढ़ सकते हैं। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से अब तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।  

देश में रैगिंग के मामले में एमपी तीसरे स्थान पर, UGC रिपोर्ट और हेल्पलाइन आंकड़ों ने बयां किया हाल

भोपाल   एतिहासिक धरोहर और संस्कृति वाला राज्य मध्य प्रदेश लगातार तीन सालों से रैगिंग के मामले में दूसरे स्थान पर बना हुआ है. ना मुंबई ना दिल्ली ना बैंगलोर बल्कि भारत के इस दूसरे सबसे बड़े राज्य मध्य प्रदेश में रैंगिग के मामलों में कोई कमी दर्ज नहीं की गई है. वर्तमान में यहां औसतन हर चौथे दिन रैगिंग की एक शिकायत यूजीसी की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन पर दर्ज हुई है. इस मामले में मेडिकल कॉलेज जबलपुर, बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी भोपाल जैसे प्रतिष्ठित संस्थाओं का नाम शामिल है.  रैगिंग के मामलों में इन राज्यों को पीछे किया एमपी अगर आप ये सोच रहे कि पूरे देश में रैगिंग के मामले में कौन सा राज्य नंबर वन है तो इसका जवाब है उत्तर प्रदेश. यूपी की यूनिवर्सिटी रैगिंग के मामले में नंबर वन है वहीं मध्य प्रदेश लगातार दूसरे नंबर पर टिका हुआ है. इस लिस्ट में बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के संस्थानों के भी नाम शामिल है.  रैगिंग के मामले भोपाल, रतलाम समेत प्रदेश के कई तकनीकी कॉलेजों से आ रहे हैं। कई बार विद्यार्थियों के आगे आने पर रैगिंग सामने आती है। कई बार कॉलेजों में ही दबा दिया जाता है, लेकिन यूजीसी हेल्पलाइन के आंकड़ों ने स्थिति बयां कर दी है। रैगिंग के मामलों में मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है। राष्ट्रीय एंटीरैगिंग हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के मुताबिक सितंबर तक देश से 510 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 140 शिकायतों के साथ उत्तरप्रदेश पहले नंबर पर है। 84 शिकायतों के साथ बिहार दूसरे और 82 शिकायतों के साथ मध्यप्रदेश तीसरे नंबर पर है। मप्र में 13 शिकायतें अकेले सितंबर में ही आईं हैं। एमपी के किन संस्थानों ने रैगिंग के ज्यादा मामले 1 जनवरी 2025 से अब तक पूरे देश से रैगिंग के 789 शिकायत दर्ज हुई है. इसमें यूपी से 124 मध्य प्रदेश में 81, बिहार में 79, पश्चिम बंगाल में 66 और महाराष्ट्र में 49. वहीं मध्य प्रदेश के इन टॉप 5 संस्थाओं से रैगिंग केस ज्यादा सामने आए हैं. इनमें मेडिकल कॉलेज जबलपुर में 23, आरजीपीवी भोपाल में 14, बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी भोपाल4, खुशीलाल आयुर्वेद कॉलेज 3 और NLIU से 2 केस शामिल है.  एमपी के संस्थानों में रैगिंग पर लगाम कब कॉलेज रैगिंग के अंतर्गत जारी हुए आंकड़े साफ तौर पर यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की लापरवाही को उजागर करते हैं. यूनिवर्सिटी प्रबंधक की ओर से हर बार इस दिशा में कार्य करने की बात कही जाती है लेकिन साल दर साल बढ़ते आंकड़े प्रबंधकों के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है. एक दशक पहले के सर्वे को गौर से देखा जाए तो 10 साल पहले भी एमपी रैगिंग के मामले में टॉप 5 राज्यों में शमिल था. अब सवाल ये है कि आखिर कब तक कॉलेज स्टूडेंट रैगिंग का शिकार होते रहेंगे..आखिर कब तक वे ये प्रताड़ना झेलते रहेंगे और कब तक कॉलेज प्रबंधक अपने दावों पर अमल करेंगे.  सितंबर में मप्र में दर्ज प्रमुख घटनाएं – 1 सितंबर: खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज, भोपाल में जूनियर से दूसरी बार मारपीट। – 3 सितंबर: एम्स भोपाल में जूनियर छात्र से दुर्व्यवहार। – 3 सितंबर: जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में झगड़ा। – 4 सितंबर: जेपी यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग में विवाद। – 5 सितंबर: राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि में सीनियर छात्राओं ने किया दुर्व्यवहार। – 8 सितंबर: जीवाजी विवि ग्वालियर में जूनियर से रैगिंग। – 8 सितंबर: पीपुल्स मेडिकल यूनिवर्सिटी भोपाल में जूनियर से दुर्व्यवहार किय गया। – 9 सितंबर: एनएलआइयू भोपाल में जूनियर को मेंडोरा ले जाकर पीटा। – 9 सितंबर: श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जबलपुर में जूनियर से विवाद। – 10 सितंबर: आरजीपीवी भोपाल, छात्रों से दुर्व्यवहार। – 11 सितंबर: केंद्रीय विवि सागर में छात्रों से मारपीट। – 15-16 सितंबर: आरजीपीवी में दो बार नकाबपोश सीनियरों ने जूनियर से मारपीट की। कागजों में ही सख्ती राज्य सरकार और विवि प्रशासन ने एंटी-रैगिंग कमेटी व हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं बना रखी हैं। इसके बाद भी शिकायतों से साफ है कि जमीन पर सब ठीक नहीं। विशेषज्ञों का कहना है, कॉलेजों में कागज पर सब पुता है, लेकिन हकीकत में जूनियर-सीनियर की निगरानी की व्यवस्था लचर है।

महात्मा गांधी चित्रकूट विश्वविद्यालय को UGC ने दी श्रेणी-1 की मान्यता, बढ़ेगा अकादमिक अधिकार

यूजीसी ने महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय को श्रेणी-1 की स्वायत्तता दी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय को UGC से मिला श्रेणी-1 का दर्जा, मिली पूर्ण स्वायत्तता महात्मा गांधी चित्रकूट विश्वविद्यालय को UGC ने दी श्रेणी-1 की मान्यता, बढ़ेगा अकादमिक अधिकार मंत्री परमार ने दी बधाई भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने प्रदेश के चित्रकूट स्थित महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय को, 'विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा “श्रेणीबद्ध स्वायत्तता” अंतर्गत श्रेणी-1 की स्वायत्तता अर्जित करने की महत्वपूर्ण उपलब्धि मिलने पर उच्च शिक्षा विभाग एवं विश्वविद्यालय परिवार शुभकामनाएं एवं बधाई दी हैं। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि यह उपलब्धि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे सतत् एवं व्यापक प्रयासों का प्रमाण है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सतत् नवीन आयाम स्थापित हो रहे हैं। राज्य सरकार, विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारमूलक उच्च शिक्षा प्रदान करने की दिशा में प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के समग्र विकास एवं प्रगति के साथ शैक्षणिक एवं अकादमिक स्तर पर गुणवत्ता की उत्कृष्टता के लिए उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। मंत्री परमार ने कहा कि यह कीर्तिमान राज्य सरकार की उच्च शिक्षा शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। अब विश्वविद्यालय, अपनी स्वायत्तता के अनुरूप शिक्षण-प्रशिक्षण, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देते हुए विद्यार्थियों को गुणवतापूर्ण उच्च शिक्षा के माध्यम से सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित कर सकेगा। परमार ने कहा कि श्रेणी-1 की स्वायत्तता मिलने से विश्वविद्यालय को अकादमिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्तर पर अधिक स्वतंत्रता प्राप्त होगी जिससे पाठ्यक्रम, शोध, नवाचार एवं मूल्यपरक शिक्षा को और अधिक मजबूती मिलेगी। यह उपलब्धि, विश्वविद्यालय को गुणवत्तापूर्ण और नवाचारोन्मुखी शिक्षा के लिए आत्मनिर्भरता प्रदान करेगी और नव अवसरों का सृजन करने में सहायक सिद्ध होगी। ज्ञातव्य है कि चित्रकूट स्थित महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, प्रदेश के विश्वसनीय एवं प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक है। विश्वविद्यालय ने, वर्ष 2024 में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा "A++" ग्रेड प्रत्ययित होकर देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों की श्रेणी में स्थान बनाया है। विश्वविद्यालय ने निरंतर प्रगति और नवाचारयुक्त कार्यप्रणाली के फलस्वरूप विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित मानकों पर खरा उतरकर, यूजीसी द्वारा (स्वायत्तता प्रदान करने हेतु विश्वविद्यालयों का श्रेणीकरण) विनियम, 2018 के अंतर्गत ग्रेड-वन में सम्मिलित होकर श्रेणीबद्ध स्वायत्तता की मान्यता प्राप्त की है। महात्मा गाँधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय को अब 'विश्वविद्यालय अनुदान आयोग' द्वारा स्वायत्तता की श्रेणी-1 में वर्गीकृत किया गया है।