samacharsecretary.com

इंदौर के पीथमपुर में विस्फोट से 4 की मौत, यूनियन कार्बाइड द्वारा कचरा निपटान में हुआ हादसा

 पीथमपुर  इंदौर जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में मंगलवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया है। तारपुरा स्थित रामकी एनवायरो कंपनी में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में 4 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी में भोपाल के भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े यूनियन कार्बाइड के कचरे के निपटान (जलाने) की प्रक्रिया चल रही थी, इसी दौरान अचानक विस्फोट हो गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि इसकी आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी और आसपास के क्षेत्र में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं। राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है, जबकि पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। फिलहाल विस्फोट के सटीक कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन खतरनाक कचरे के प्रबंधन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।  ग्रामीणों के अनुसार, एक के बाद एक कुल तीन धमाके हुए, जिनकी तीव्रता इतनी अधिक थी कि घरों में रखे बर्तन और अन्य सामान तक नीचे गिर गए। कई लोगों ने इसे भूकंप जैसे झटके बताया, जिससे लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए और कुछ समय के लिए क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस अमला मौके पर पहुंचा और पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल कंपनी के अंदर किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। नगर पुलिस अधीक्षक रवि सोनेर ने बताया कि कंपनी में विस्फोट की सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस टीम को तुरंत मौके पर तैनात किया गया। उन्होंने कहा कि हादसे में किसी के घायल होने या हताहत होने की सूचना अभी तक नहीं है।धमाकों के कारणों की जांच की जा रही है और विस्तृत रिपोर्ट जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।   स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि धमाके की आवाज तारपुरा और बजरंगपुरा गांव तक सुनाई दी, जहां लोगों ने सबसे पहले इसकी जानकारी दी। गौरतलब है कि रामकी एनवायरो कंपनी पहले भी चर्चा में रही है, जब भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े जहरीले कचरे के निष्पादन का कार्य यहां किया गया था। फिलहाल कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। 

सुप्रीम कोर्ट का यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे पर बड़ा निर्णय, याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट का रुख करने की दी सलाह

भोपाल भोपाल गैस त्रासदी के तीन दशक बाद भी यूनियन कार्बाइड संयंत्र का जहरीला कचरा कानूनी और पर्यावरणीय विवादों के केंद्र में है। सुप्रीम कोर्ट ने  इस कचरे को जलाने के बाद बची राख से पारे के संभावित रिसाव से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता संगठन भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति को राहत के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट की 20 साल पुरानी निगरानी का हवाला मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉय माल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यह संवेदनशील मामला पिछले दो दशकों से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सीधी निगरानी में चल रहा है। बेंच ने कहा कि तकनीकी साक्ष्यों और नई सामग्री के साथ हाईकोर्ट में आवेदन करना अधिक व्यावहारिक और उचित होगा। याचिका में दावा किया गया था कि कचरे के अवशेषों में भारी मात्रा में पारा हो सकता है, जो आसपास के भूजल और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है। क्या है विशेषज्ञों की राय? सुनवाई के दौरान अदालत ने तकनीकी बारीकियों पर टिप्पणी करने से परहेज किया। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि जब विशेषज्ञ समितियों और निजी विशेषज्ञों की राय अलग-अलग हो, तो कोर्ट सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता। याचिकाकर्ताओं ने डॉ. आसिफ कुरैशी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्रायल रन की पद्धति पर सवाल उठाए थे। यदि भविष्य में पारे के रिसाव से संबंधित कोई नई सामग्री या तकनीकी आपत्ति सामने आती है, तो याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के समक्ष आवेदन कर सकते हैं। हमें उम्मीद है कि हाईकोर्ट इस मुद्दे पर जल्द विचार करेगा। क्या है पूरा मामला? यह मामला पीथमपुर (धार) स्थित ट्रीटमेंट प्लांट और भोपाल के यूनियन कार्बाइड परिसर से जुड़ा है। दिसंबर 2024 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक नोटिस ने खलबली मचा दी थी, जिसमें दावा किया गया था कि जहरीले तत्व भूजल में रिस रहे हैं। याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि कंक्रीट की पेटियों में बंद राख की दोबारा जांच हो, जिसे फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया है।

भोपाल गैस त्रासदी के स्मरणार्थ यूनियन कार्बाइड परिसर में बनेगा मेमोरियल, हाई कोर्ट में सरकार ने किया खुलासा

भोपाल  दुनिया की सबसे भयावह औद्योगिक दुर्घटनाओं में गिनी जाने वाली भोपाल गैस त्रासदी को चार दशक से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इस हादसे से जुड़े कई मुद्दे आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल अब भी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में मौजूद जहरीले कचरे और प्रदूषण को लेकर है। इसी मामले में अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से फैक्ट्री परिसर की सफाई और पर्यावरण सुधार की पूरी योजना पेश करने को कहा है। अदालत ने पूछा है कि यूनियन कार्बाइड साइट पर मौजूद जहरीले कचरे को हटाने और जमीन-पानी को साफ करने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं। बता दें कि भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से दो व तीन दिसंबर 1984 की रात में जहरीली गैस का रिसाव होने से बड़ी त्रासदी हुई थी। मिथाइल आइसोसाइनेट नामक जहरीली गैस के रिसाव से बड़ी संख्या में हुई मौतों के कारण हुई इसे दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक आपदा माना गया। इसका असर आज भी कैंसर, सांस और दिव्यांगता जैसी बीमारियों के रूप में जारी है। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक कुमार सिंह और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने सुनवाई के बाद सरकार को निर्देश दिया कि निर्धारित प्रक्रिया को जारी रखा जाए और कार्ययोजना की विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए। जानें कब और किसने दायर की थी याचिका गौरतलब है कि वर्ष 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निस्तारण की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई स्वतः संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट में बताया गया था कि न्यायालय के आदेश के अनुसार यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का निस्तारण पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में सफलतापूर्वक कर दिया गया है। जहरीले कचरे से करीब 900 मीट्रिक टन राख और अवशेष एकत्रित हुए हैं। इस बीच हाईकोर्ट में दायर एक अन्य याचिका में कहा गया था कि जहरीले कचरे से निकली राख और अवशेषों में रेडियोएक्टिव तत्व सक्रिय हो सकते हैं, जो चिंता का विषय है। याचिका में यह भी कहा गया था कि राख में मरकरी मौजूद है, जिसे नष्ट करने की तकनीक फिलहाल केवल जापान और जर्मनी के पास है। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया कि आबादी वाले क्षेत्र से मात्र 500 मीटर की दूरी पर लैंडफिलिंग की जा रही है। हाईकोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ करने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने 8 अक्टूबर 2025 को जारी अपने आदेश में आबादी से मात्र 500 मीटर दूर लैंडफिलिंग के लिए तय स्थान पर रोक लगा दी थी। हालांकि बाद में सरकार के आवेदन पर अदालत ने यह आदेश वापस ले लिया था। पिछली सुनवाई में सरकार ने अदालत को बताया था कि जहरीले कचरे से निकली राख की लैंडफिलिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान भी सरकार की ओर से इसी संबंध में विस्तृत जानकारी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई।  सरकार ने कोर्ट में पेश की एक्शन टेकन रिपोर्ट इस मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के सामने एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल की है। रिपोर्ट में बताया गया कि, 3 मार्च को अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक बर्नवाल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (UCIL) के पुराने प्लांट की स्थिति, वहां मौजूद टॉक्सिक वेस्ट और फैक्ट्री परिसर की सफाई को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। सरकार ने अदालत को बताया कि, इस बैठक में अधिकारियों और विशेषज्ञों ने समयबद्ध रेमेडिएशन (Remediation) यानी प्रदूषित जमीन और पर्यावरण को साफ करने की योजना पर विचार किया। इसका उद्देश्य फैक्ट्री परिसर में मौजूद जहरीले कचरे को सुरक्षित तरीके से हटाना और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना है। जहरीले कचरे को हटाने की योजना पर चर्चा सरकारी रिपोर्ट के अनुसार यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में कई जगहों पर अभी भी जहरीला औद्योगिक कचरा और प्रदूषित मिट्टी मौजूद है। यह कचरा लंबे समय से पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इसलिए बैठक में यह तय किया गया कि फैक्ट्री परिसर से जहरीले कचरे को हटाने और उसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान करने के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध योजना बनाई जाए। सरकार ने कोर्ट को बताया कि, इस दिशा में संबंधित विभागों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है और जल्द ही पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। हाईकोर्ट ने मांगी स्पष्ट समयसीमा हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार से यह भी पूछा है कि, सफाई और पर्यावरण सुधार का काम कब तक पूरा किया जाएगा। अदालत का मानना है कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी अगर फैक्ट्री परिसर में जहरीला कचरा मौजूद है तो यह बेहद गंभीर मामला है। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस काम को जल्द से जल्द पूरा करना जरूरी है, ताकि आसपास रहने वाले लोगों को किसी तरह का स्वास्थ्य खतरा न रहे। 40 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ त्रासदी का असर दरअसल 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल में यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) नाम की जहरीली गैस का रिसाव हो गया था। इस गैस के फैलने से हजारों लोगों की तत्काल मौत हो गई थी और लाखों लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। यह हादसा दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में से एक माना जाता है। गैस के प्रभाव से प्रभावित लोगों में कई को आज भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा फैक्ट्री परिसर में मौजूद रासायनिक कचरे को लेकर भी लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। पर्यावरण और भूजल प्रदूषण का खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में लंबे समय तक पड़े जहरीले रसायनों के कारण मिट्टी और भूजल प्रदूषण का खतरा बना रहता है। कई रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अगर इस कचरे का समय पर निपटान नहीं किया गया तो इसका असर आसपास … Read more

हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड की राख पर अस्थाई रोक हटाई, समीक्षा आवेदन के बाद निर्णय

जबलपुर  हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण से निकली राख की लैंडफिलिंग पर लगी रोक को अस्थाई रूप से वापस ले लिया है. लैंडफिलिंग पर लगाई गई रोक के आदेश पर समीक्षा करने सरकार की ओर से आवेदन दायर किया था. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक कुमार सिंह व जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने आवेदन की सुनवाई करते हुए पूर्व में पारित आदेश के अनुसार आगे कार्यवाही करने के निर्देश जारी किए हैं. हाईकोर्ट ने लगाई थी लैंडफिलिंग पर रोक इस याचिका की सुनवाई 2004 में आलोक प्रताप सिंह द्वारा लगाई गई याचिका के साथ संयुक्त रूप से हो रही थी. 2004 में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा था. वहीं, सोमवार से पहले हुई कई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से कचरे की विनष्टीकरण की रिपोर्ट पेश करने को कहा था. इसके बाद रिपोर्ट देखकर हाईकोर्ट ने राख को घनी आबादी के पास लैंडफिल किए जाने पर रोक लगा दी थी. यूनियन कार्बाइड की राख पर हाईकोर्ट ने जताई थी चिंता 8 अक्टूबर 2025 को हाईकोर्ट ने कहा था कि जहरीले राख की लैंडफिलिंग के आदेश के बावजूद सरकार ने दूसरे स्थान के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी. सरकार द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किया गया है. राख अभी भी जहरीली है और अगर इसे ठीक से नहीं रोका गया तो भूकंप जैसी किसी प्राकृतिक आपदा के कारण उसे रोकने वाला स्ट्रक्चर गिरने पर एक और आपदा हो सकती है. ऐसे में राज्य सरकार को राख ऐसी जगहों पर ले जाने की संभावना पर विचार करना चाहिए जो इंसानी बस्तियों, पेड़-पौधों और पानी के सोर्स से बहुत दूर हों. कंटेनमेंट सिस्टम टूट भी जाए, तो भी इसके बुरे असर बहुत कम हों. हालांकि, अगली सुनवाई में इसे लेकर सरकार ने अपनी ओर से तर्क रखे. दो महीने के अंदर पूरी करें विनष्टीकरण की प्रक्रिया : हाईकोर्ट सरकार की ओर से इस मामले में फिर दलील दी गई कि जहरीली राख को रोकने के लिए जो स्ट्रक्चर बनाया है, उसे सबसे मॉडर्न सुरक्षा तकनीक से बनाया गया है. शुरुआत में कोर्ट राज्य सरकार की ओर से दिए गए इस तर्क से सहमत नहीं था. हालांकि, सोमवार को राज्य सरकार द्वारा आदेश पर समीक्षा करने के आवेदन पर युगलपीठ ने राहत दे दी. हाईकोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि पूर्व में पारित आदेश को देखने व मामले के तथ्यातक पहलुओं पर विचार करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे है कि 8 अक्टूबर 2025 के आदेश को अस्थाई रूप से स्थगित रखा जाए. राज्य सरकार को न्यायालय के द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की राय के अधीन दो माह की अवधि के अंदर पूर्व में पारित आदेशानुसार विनष्टीकरण की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी.

यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा भस्म किया गया, पीथमपुर में राख सुरक्षित रूप से दफन

इंदौर  पांच हजार से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुलाने वाले भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्टरी का 337 टन कचरा तो पीथमपुर के भस्मक में जला दिया गया, लेकिन उसकी राख हमेशा के लिए पीथमपुर में दफन होगी। इसका भविष्य में आसपास के इलाके में क्या असर होगा, यह तो भविष्य में पता चलेगा, लेकिन पंद्रह साल पहले भी 30 टन से ज्यादा राख पीथमपुर में लैंडफिल की गई थी। उस कारण भस्मक के समीप से निकलने वाली नदी का पानी काला हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उस पानी का उपयोग खेतों में नहीं करते। इससे फसल खराब हो जाती है। कचरा तो भस्म हो गया, लेकिन 900 टन राख उस त्रास्दी की याद दिलाती है। उसका निपटान भी नहीं हो पाया है। 900 टन राख बची कचरा जलाने के बाद पीथमपुर में रामकी कंपनी ने अपने प्लांट में 337 टन जहरीला कचरा छह माह में जलाया। उसके बाद बची राख को बीते पांच माह से कंपनी के परिसर में एक प्लेटफार्म पर रखा गया है। उस राख की भी विशेषज्ञों ने जांच की। राख को दफनाने के लिए एक तालाबनुमा गड्ढा खोदा गया है। बची हुई राख में मर्करी, निकल, जिंक, कोबाल्ट, मैग्जीन सहित अन्य तत्व है, जहां इस कचरे को दफन किया जाना है। उसके आधा किलोमीटर दायरे में आबादी क्षेत्र है। वहां के रहवासी बोरिंगों के पानी का उपयोग नहीं करते है, क्योकि बोरिंग भी दूषित हो चुके है। 900 टन राख के लिए काले रंग की एचडीपीई लाइनर बिछाई जा रही है,ताकि राख मिट्टी के संपर्क में न आए और राख का रिसाव जमीन में न हो। राख दफनाए जाने का मामला कोर्ट में भी है। 

सरकार ने पेश की हाईकोर्ट में रिपोर्ट, 850 मीट्रिक टन राख का क्या होगा?

जबलपुर  यूनियन कार्बाइड के 337 मीट्रिक टन जहरीले कचरे का विनष्टीकरण सफलतापूर्वक पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में कर दिया गया है। इस संबंध में जबलपुर हाईकोर्ट में सरकार ने एक रिपोर्ट पेश की है।  केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के विशेषज्ञों ने इस काम की निगरानी की। कचरे को जलाने के बाद 850 मीट्रिक टन राख और अवशेष जमा हुए हैं। MPPCB से अनुमति मिलने के बाद इसे एक अलग जगह पर नष्ट किया जाएगा। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल की बेंच ने सरकार को यह रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी। आलोक प्रभाव सिंह ने 2004 में दायर की थी याचिका  बता दें कि भोपाल निवासी आलोक प्रभाव सिंह ने 2004 में एक याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि भोपाल गैस त्रासदी में 4 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। इस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में लगभग 350 मीट्रिक टन जहरीला कचरा पड़ा हुआ है। याचिका में इस कचरे को नष्ट करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की मृत्यु हो जाने के बाद हाईकोर्ट अब इस मामले की सुनवाई खुद ही कर रहा है। ट्रायल के बाद जलाया कचरा सरकार ने कोर्ट को बताया कि 27 फरवरी से 12 मार्च तक कचरे को जलाने का ट्रायल किया गया था। इस दौरान 30 मीट्रिक टन कचरा जलाया गया। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, जहरीले कचरे को 270 किलो प्रति घंटे की दर से जलाकर नष्ट किया गया। 30 जून की रात 1 बजकर 2 मिनट तक यूसीआईएल (UCIL) के 337 मीट्रिक टन कचरे को नष्ट कर दिया गया था। यूसीआईएल से 19.157 मीट्रिक टन अतिरिक्त जहरीला कचरा मिला है। इसे 3 जुलाई 2025 तक नष्ट कर दिया जाएगा। सरकार ने हाईकोर्ट में सौंपी रिपोर्ट “हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए, संयंत्र स्थल से जहरीले कचरे को हटाने और संयंत्र से विषाक्त अपशिष्ट के निपटान के लिए राज्य सरकार ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम किया है।” कचरे को नष्ट करने के लिए कुछ खास इंतजाम किए गए थे।