samacharsecretary.com

शहजाद भट्टी नेटवर्क का भंडाफोड़, टारगेट किलिंग और पीओके ट्रेनिंग का लालच

लखनऊ यूपी से पकड़े गए आईएसआई और पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के लिए काम करने वाले कृष्णा मिश्रा और दानियाल अशरफ को आईएसआईएस कैंप में ट्रेनिंग कराने और पीओके में कमांडर बनाने का लालच दिया गया था। इन्हें पुलिसकर्मियों और सेना के जवानों की टारगेट किलिंग के बाद वीडियो बनाकर शहजाद भट्टी को भेजनी थी, जिसके बाद इन्हें दुबई बुलाने का वादा किया गया था, साथ ही बड़ी रकम भी देनी थी। इसलिए ही दोनों ने भिवंडी थाना और यूपी के कुछ थानों की रेकी की थी। गजरौला में एक दरोगा की हत्या की कोशिश भी की थी, लेकिन ऐन मौके पर गोली नहीं चली। इससे पूर्व शहजाद भट्टी के माड्यूल से जुड़े 25 से ज्यादा लोगों को एसटीएफ वेसटयूपी से गिरफ्तार कर चुकी है। यूपी एटीएस और खुफिया एजेंसियों समेत स्पेशल सेल ने 5 मई को बाराबंकी के संदिग्ध आतंकी दानियाल अशरफ और कुशीनगर के कृष्णा मिश्रा को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों को शहजाद भट्टी ने हीं स्लीपर मॉड्यूल की तरह अपने नेटवर्क में शामिल किया था और देश में पुलिस और सेना के जवानों की टारगेट किलिंग का काम दिया था। दोनों को लालच दिया था कि जैसे ही काम पूरा होगा, इन्हें तुरंत दुबई भेजा जाएगा। वहां से आईएसआईएस के ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षित कराने के बाद पीओके यानी पाक अधिकृत कश्मीर में कमांडर बनाया जाएगा। बेशुमार पैसा देने का भी वादा किया गया था। इन आतंकी ट्रेनिंग कैंप की वीडियो भी कृष्णा और दानियाल को दिखाई गई थी। मॉड्यूल से जुड़े 25 लोग वेस्ट यूपी से हो चुके गिरफ्तार इसी नेटवर्क से जुड़े अजीम राणा को हापुड़ और मेरठ से आजाद अली को पकड़ा गया था। वहीं, कुछ दिन पहले ही एटीएस ने साकिब, अरबाब, लोकेश पंडित और विकास को एटीएस ने दबोचा था। इसके अलावा 23 अप्रैल को ही तुषार उर्फ हिजबुल्लाह और समीर की धरपकड़ हुई थी। इस नेटवर्क को खंगालने के दौरान एटीएस को कृष्णा मिश्रा और दानियाल अशरफ की सूचना मिली थी। इस माड्यूल से जुड़ा बिजनौर का संदिग्ध आतंकी आकिब दुबई में है उसका लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है। एटीएस अफसरों की मानें तो कृष्णा मिश्रा और दानियाल ने गजरौला में एक दरोगा को टारगेट किया था। फ्लाईओवर के नीचे दरोगा की हत्या का प्रयास किया गया था। शुक्र रहा कि इस दौरान गोली नहीं चल। चल पाई। आरोपियों की गोली हथियार में फंस गई थी, इसलिए टारगेट मिस हो गया।

हिंदूवादी नेताओं की हत्या और घरों पर ग्रेनेड हमले की साजिश रचने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ पाकिस्तानी अपराधी शहजाद भट्टी और आईएसआई के संपर्क में रहने वाले संदिग्ध आतंकी भारत में बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले थे। इन्होंने पांच हिंदूवादी नेताओं की गला रेतकर हत्या करने की साजिश रची थी। इन नेताओं के घरों पर ग्रेनेड से हमला करने की भी तैयारी में थे। एटीएस की जांच में इसका खुलासा हुआ है। अब एटीएस शुक्रवार से आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लेकर और गहनता से पूछताछ करेगी। एटीएस ने 23 अप्रैल को नोएडा से बागपत के तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्लाह अली खान व एटा के समीर को गिरफ्तार किया था। वर्तमान में तुषार मेरठ और समीर दिल्ली में रह रहा था। ये दोनों पाकिस्तानी अपराधी शजहाद भट्टी और आईएसआई एजेंट मेजर हमीद, मेजर इकबाल, मेजर अनवर, मोहम्मद हमाद बरकाती व आबिद जट के संपर्क में थे। उनके इशारे पर भारत में आतंकी वारदातों को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे। एटीएस की जांच में सामने आया कि आरोपियों को शहजाद भट्टी ने हिंदूवादी नेता दक्ष चौधरी, अभिषेक ठाकुर, पिंकी चौधरी, युद्धि राणा और गौरव राजपूत की हत्या करने का टास्क दिया था। ये टास्क शहजाद ने आबिद जट के माध्यम से दिया था। ये भी कहा गया था कि इन सभी के घरों पर ग्रेनेड भी फेंकने हैं जिससे दहशत फैल सके। तीन लाख में करनी थीं पांच हत्याएं पाकिस्तानी हैंडलर्स ने तुषार और समीर को इन सभी की हत्या करने के लिए तीन लाख रुपये देने का वादा किया था। साथ ही उन्होंने दोनों को आश्वासन दिया था कि पासपोर्ट बनवाकर दुबई भेजा जाएगा। वहीं पर सेटल कर दिया जाएगा जिससे भारत की जांच एजेंसी उन तक नहीं पहुंच पाएंगी। एक्स मुस्लिमों को कॉन्फ्रेंस कॉल पर दी थी धमकी एटीएस की जांच में पता चला कि तुषार और समीर ने एक्स मुस्लिम इमरोज आलम, अंजली आर्या, समीर व सलीम वास्तिक को व्हाट्सएप व अन्य सोशल मीडिया के जरिये कॉल की थी। कॉल में कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये शहजाद भट्टी भी जुड़ा था। उसने इन सभी को धमकी दी थी। इससे संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग भी मिली हैं। छह दिन की मिली कस्टडी रिमांड आतंकी साजिश की तह तक पहुंचने के लिए एटीएस ने आरोपियों की रिमांड मांगी थी। एनआईए की विशेष अदालत में अर्जी दी थी। बृहस्पतिवार को अर्जी पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश नीतू पाठक ने आरोपियों की छह दिन की कस्टडी रिमांड मंजूर की।  

3 लाख के लालच में टारगेट किलिंग की साजिश, नोएडा से दो आरोपी गिरफ्तार

 नोएडा उत्तर प्रदेश एटीएस ने नोएडा में एक बड़े ऑपरेशन के दौरान बागपत निवासी तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्लाह और दिल्ली के समीर खान को हिरासत में लिया है. इन दोनों युवकों को पाकिस्तानी हैंडलर्स और गैंगस्टर शहजाद भट्टी ने सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी बनाया था. गुरुवार को हुई इस गिरफ्तारी का मुख्य उद्देश्य राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ना और प्रभावशाली लोगों की हत्या करना था. आरोपियों ने पैसों के लालच में आकर संवेदनशील स्थानों की रेकी शुरू कर दी थी. पुलिस ने इनके पास से पिस्टल, कारतूस और चाकू बरामद कर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया है. सोशल मीडिया पर बुना गया मौत का जाल एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश के मुताबिक, पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय युवाओं को निशाना बना रहे थे. तुषार चौहान ने भट्टी का भरोसा जीतने के लिए कई आईडी बनाईं और सीधे संपर्क स्थापित किया. इन पाकिस्तानी हैंडलर्स ने युवाओं को उन लोगों को निशाना बनाने के लिए उकसाया जिन्होंने इस्लाम छोड़ दिया था. आरोपियों को आधुनिक हथियार मुहैया कराने और काम पूरा होने के बाद दुबई के रास्ते पाकिस्तान बुलाने का भी वादा किया गया था. 3 लाख का लालच और ग्रेनेड अटैक की तैयारी जांच में खुलासा हुआ कि शहजाद भट्टी ने तुषार को टारगेट किलिंग के लिए 3 लाख रुपये का लालच दिया था, जिसमें 50 हजार रुपये एडवांस तय थे. आरोपियों को हैंड ग्रेनेड से हमला करने का निर्देश मिला था। गिरफ्तार समीर खान को दीवारों पर 'TTH' यानी 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' लिखने और नए लड़कों को भर्ती करने की जिम्मेदारी दी गई थी. इन लोगों ने पिछले कुछ महीनों में कई लोगों को फोन पर जान से मारने की धमकी दी, जिसमें पाकिस्तानी हैंडलर भी कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़ते थे. यूपी के कई चर्चित चेहरे थे निशाने पर एटीएस की पूछताछ में पता चला है कि इनके निशाने पर यूपी के कई चर्चित लोग थे. पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट इन्हें टारगेट देने वाले थे. पकड़े गए आरोपियों से अब गहन पूछताछ की जा रही है ताकि इनके पूरे नेटवर्क और अन्य साथियों का पता लगाया जा सके. पुलिस अब इनकी रिमांड लेकर यह जानने की कोशिश करेगी कि इन्हें हथियारों की सप्लाई कहां से होने वाली थी और इनके अगले निशाने कौन थे. पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और ISI के सीधे संपर्क में थे आरोपी पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आईएसआई के सीधे संपर्क में थे. तुषार ने भट्टी से प्रभावित होकर इस्लाम कबूला और इंस्टाग्राम के जरिए उससे जुड़ा. उसे संवेदनशील स्थानों की रेकी और प्रभावशाली लोगों पर ग्रेनेड हमले का टास्क मिला था. आरोपी PTT (पुश टू टॉक) और कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स से बात करते थे. इनके पास से बरामद पिस्टल और कारतूस भी पाकिस्तान से ही भेजे गए थे.  आरोपियों ने नेटवर्क विस्तार के लिए अन्य लड़कों को भी जोड़ा था.

‘गजवा-ए-हिंद’ की साजिश नाकाम, पाकिस्तान और दुबई से जुड़े तार, संवेदनशील स्थलों की रेकी करने वाले गिरफ्तार

मरेठ उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) ने मेरठ और आसपास के इलाकों में सक्रिय एक खतरनाक आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार सीधे तौर पर सीमा पार पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं। इस जांच में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह मॉड्यूल न केवल भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल था, बल्कि पकड़े जाने से बचने के लिए हिंदू रंग-रूप और कोड नेम का इस्तेमाल कर रहा था। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पाकिस्तान में बैठे आकाओं ने अपने गुर्गों को सख्त हिदायत दी थी कि वे सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए स्थानीय हिंदू युवाओं को भर्ती करें और संवेदनशील स्थलों की रेकी के लिए उन्हें कवर के तौर पर इस्तेमाल करें। 'गजवा-ए-हिंद' का मिशन मीडिया  रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी शाकिब से हुई पूछताछ में यह बात सामने आई है कि वह पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के सीधे संपर्क में था। शाकिब को निर्देश दिए गए थे कि किसी भी परिस्थिति में मिशन अधूरा नहीं रहना चाहिए। हैंडलर्स ने उसे गजवा-ए-हिंद के एजेंडे पर काम करने और नेटवर्क का विस्तार इस तरह करने को कहा था जिससे कि सुरक्षा एजेंसियों को भनक तक न लगे। हैंडलर्स ने शाकिब को चेतावनी दी थी कि यदि भारत इस बार कोई ऑपरेशन करने की कोशिश करता है, तो हमें तैयार रहना होगा। इस साजिश के तहत शाकिब ने विकास और लोकेश नाम के दो हिंदू युवाओं को लालच देकर मॉड्यूल में शामिल किया। पहचान छिपाने के लिए उन्हें कोड नेम दिए गए। लोकेश को सलीम और विकास को जाहिद के नाम से बुलाया जाता था। हिंदू रंग-रूप को बनाया सुरक्षा का पास जांचकर्ताओं का कहना है कि शाकिब ने लोकेश (सलीम) का उपयोग उन संवेदनशील और धार्मिक स्थलों की रेकी करने के लिए किया, जहां एक विशेष समुदाय के व्यक्ति के रूप में प्रवेश करना मुश्किल हो सकता था। हिंदू पहचान होने के कारण लोकेश को सुरक्षा जांच में संदिग्ध नहीं माना जाता था, जिसका फायदा उठाकर उसने कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की टोह ली। इस मॉड्यूल का मुख्य उद्देश्य सैन्य ठिकानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों की जानकारी जुटाना था। एटीएस को पता चला है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स गूगल लोकेशन साझा करते थे, जिसके बाद शाकिब और उसके साथी उन स्थानों पर जाकर वीडियो रिकॉर्ड करते और वापस भेज देते थे। इस काम के बदले उन्हें विदेशी माध्यमों से भुगतान किया जाता था। दुबई कनेक्शन इस पूरे खेल की कड़ियां केवल पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका एक बड़ा सिरा दुबई से भी जुड़ा है। जांच में आकिब नाम के एक व्यक्ति की भूमिका सामने आई है, जो दुबई में बैठकर शाकिब और पाकिस्तानी हैंडलर्स के बीच सेतु का काम कर रहा था। आकिब इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का काम करता था। वह हथियारों (विशेषकर AK-47) के वीडियो और भड़काऊ कंटेंट साझा करता था ताकि युवाओं के मन में हिंसा के प्रति आकर्षण पैदा किया जा सके। एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) अमिताभ यश का कहना है कि शाकिब सीधे तौर पर दुबई स्थित आकिब के संपर्क में था। आकिब के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। यूपी में पनपते हाइब्रिड मॉड्यूल का पुराना पैटर्न जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश में ऐसे कई मॉड्यूल सामने आए हैं। यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है जिसे हाइब्रिड टेररिज्म कहा जा सकता है, जहां अपराधी अपनी धार्मिक और सामाजिक पहचान छिपाकर वार करते हैं। हाल ही में एटीएस ने बीड़ीएस (BDS) छात्र हारिस अली को गिरफ्तार किया था, जो आईएसआईएस (ISIS) की विचारधारा फैला रहा था और टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए पाकिस्तान से निर्देश ले रहा था।

UP ATS ने किया बड़ा खुलासा: नौसेना का जवान आदर्श कुमार ISI के लिए करता था जासूसी

आगरा आगरा में उत्तर प्रदेश एटीएस को बड़ी सफलता हासिल हुई है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए कथित जासूसी करने के आरोप में यूपी एटीएस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान आदर्श कुमार उर्फ लकी के रूप में हुई है, जो भारतीय नौसेना में लांस नायक के पद पर केरल में तैनात था. एटीएस ने 10 मार्च 2026 को उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।    कैसे सामने आया जासूसी का मामला? एटीएस के अनुसार उन्हें लगातार आसूचना मिल रही थी कि एक व्यक्ति पाकिस्तान बेस्ड ISI एजेंट के संपर्क में रहकर भारत से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा कर रहा है. इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले को पकड़ने के लिए एटीएस ने इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक सर्विलांस के जरिए जांच शुरू की. जांच के दौरान आगरा निवासी आदर्श कुमार उर्फ लकी का नाम सामने आया।  सर्विलांस में यह भी सामने आया कि आरोपी भारतीय नौसेना में लांस नायक के पद पर दक्षिणी नेवल कमांड, कोच्चि, केरल में तैनात था. जांच में संकेत मिले कि वह पाकिस्तान स्थित एजेंटों के संपर्क में था और उन्हें संवेदनशील सूचनाएं उपलब्ध करा रहा था।  संवेदनशील जानकारी और पैसों के लेनदेन के आरोप एटीएस की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर रणनीतिक महत्व की सूचनाएं साझा कीं. आरोप है कि उसने युद्धक पोतों और अन्य सैन्य गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील तस्वीरें और जानकारी पाकिस्तान बेस्ड एजेंटों को भेजी।  एटीएस का कहना है कि जांच के दौरान इस तरह के कई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सामने आए, जिससे आरोपी की गतिविधियों पर संदेह गहराया. अधिकारियों के मुताबिक, मामले की जांच आगे भी जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था।  आरोपी को भेजा गया न्यायिक अभिरक्षा में एटीएस ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आदर्श कुमार उर्फ लकी को 10 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया. गिरफ्तारी के बाद उसे नियमानुसार माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया. अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया. आरोपी का नाम आदर्श कुमार उर्फ लकी, उम्र 24 वर्ष बताया जा रहा है. उसके पिता का नाम बलवीर सिंह है जो कि ग्राम चीतापुर, पोस्ट व थाना कागारौल, जिला आगरा के निवासी है।  एटीएस की प्रेस नोट के अनुसार आरोपी की गतिविधियां देश विरोधी पाई गईं और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के नेटवर्क से उसके आपराधिक संबंधों के संकेत मिले हैं. मामले में आगे की विवेचना जारी है और एजेंसी पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।