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एमपी के 61 युवाओं ने सरकारी स्कूलों से यूपीएससी परीक्षा में सफलता पाई, इतिहास रचा

भोपाल  संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) UPSC परीक्षा में इस बार मध्यप्रदेश ने इतिहास रच दिया। इसमें प्रदेश के 61 प्रतिभाशाली युवा चयनित हुए। खास बात यह है कि इनमें से अनेक युवाओं ने सरकारी स्कूलों-कॉलेजों में पढ़ाई की है। भारत की सबसे कठिन परीक्षा क्रेक कर इन युवाओं ने न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश में अपना नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 मार्च को इन सभी सफल अभ्यर्थियों को सम्मानित करेंगे। सीएम सभी युवाओं से चर्चा भी करेंगे। यूपीएससी परीक्षा में प्रदेश के हर वर्ग के युवाओं का चयन हुआ। इनमें कई छोटे गांवों के हैं ​जहां 24 घंटे बिजली भी उपलब्ध नहीं रहती। मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट का भी अभाव बना रहता है। इसके बावजूद युवाओं ने अपना हौसला नहीं खोया और जज्बा, जुनून के बल पर कामयाबी हासिल की। चयनित 15 युवाओं ने सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई की एमपी में शिक्षा के स्तर में लगातार इजाफा हो रहा है। चयनित युवाओं में अनेक सरकारी स्कूल, कॉलेजों में पढ़े हैं। यूपीएससी में चुने गए कुल 61 विद्यार्थियों में से 15 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने सरकारी कॉलेजों एवं यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त कर सफलता अर्जित की है। यह आंकड़ा प्रदेश के सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों की प्रतिभा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यूपीएससी में चयनित आशीष शर्मा, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के स्नातक हैं। पुलकित जैन, बीएससी उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल, प्राची चौहान, बीएससी, सुभद्रा शर्मा, शासकीय कन्या महाविद्यालय गंजबासौदा, सौम्या जैन बीए गांधी पीआर कॉलेज, भोपाल, आयुष स्वामी, बीए जेएलएन कॉलेज सोहागपुर नर्मदापुरम, निकित सिंह बीए अर्थशास्त्र अटल बिहारी बाजपेयी महाविद्यालय इंदौर, दीपक बघेल बीए जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर, राजवर्धन सिंह सिसोदिया बीए गुजराती समाज कॉलेज, इंदौर, प्राची जैन बीकॉम सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, भोपाल, रूपल बान बीएससी, एम उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल, रोहन जैन बीएससी मैथ्स शासकीय होल्कर साइंस कॉलेज इंदौर, अंकुश पाटीदार बीएससी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, गौरव जाट बैचलर ऑफ आर्ट्स देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, पवित्र मिश्रा बीएससी प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय विज्ञान महाविद्यालय रीवा, उज्ज्वल जैन बीए श्रीमंत माधवराव सिंधिया शासकीय महाविद्यालय कोलारस में पढ़े हैं। युवाओं ने अपना जज्बा, जुनून के बल पर कामयाबी हासिल की। 

कैंसर से संघर्ष और तीन नौकरियों का त्याग, दृष्टिबाधित संजय दहरिया ने UPSC को किया क्रैक

महासमुंद जुनून, लगन और हार न मानने की जिद। इन सबका जीता जागता उदाहरण हैं संजय दहरिया। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के संजय दहरिया ने छह साल तक कैंसर से जूझने और तीन नौकरियां छोड़ने के बाद अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की है। बेलटुकरी के एक किसान के 38 साल के इस पुत्र ने अपने परिवार और गांव के लोगों को अपार गर्व और खुशी दी है। दहरिया की शैक्षणिक यात्रा एक स्थानीय सरकारी स्कूल से शुरू हुई। कक्षा 5 में जवाहर नवोदय विद्यालय, माना (रायपुर) में चयन होने के बाद इसमें एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। दहरिया के लिए सिविल सेवाओं तक का सफर पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों ही दृष्टि से चुनौतियों से भरा था। पश्चिम बंगाल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 2009 से 2011 तक काम करने के बाद उन्होंने उच्च लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इस्तीफा दे दिया। हालांकि, 2012 में उन्हें लार ग्रंथियों के कैंसर का पता चला, जिसके कारण छह साल तक उनका कठिन इलाज चला। दृष्टिबाधित होने के बावजूद दहरिया ने हार नहीं मानी और सिविल सेवाओं में अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास जारी रखा। उन्होंने रायपुर के एक बैंक और महासमुंद डाकघर में काम करते हुए अपने करियर को आगे बढ़ाया। उन्होंने 2022 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में भाग लेना शुरू किया और अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होकर 2025 में तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की। दहरिया ने अपनी सफलता का श्रेय बीमारी के दौरान अपने परिवार और मार्गदर्शकों के अटूट समर्थन को दिया। उन्होंने कहा कि मैं सिविल सेवाओं के माध्यम से देश की सेवा करने की आशा रखता हूं। चाहे मुझे आईएएस कैडर मिले या कोई अन्य सेवा, लोक सेवा के प्रति मेरी प्रतिबद्धता दृढ़ रहेगी। महासमुंद के कलेक्टर विनय कुमार लांगेह और जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने दहरिया को बधाई देते हुए उनकी उपलब्धि की सराहना की, जो साहस और दृढ़ता का एक उदाहरण है।

चपरासी पिता की बेटी ने UPSC में 113वीं रैंक हासिल कर रच दिया इतिहास

बुलंदशहर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मेहनत, संघर्ष और हौसले की नई मिसाल पेश की है. यहां की बेटी ने सिविल सेवा परीक्षा में 113वीं रैंक हासिल कर न केवल परिवार का बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है. शिखा एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहां सुविधाएं बेहद कम और हौसले बहुत बड़े. उनके पिता चपरासी हैं. शिखा का रिजल्ट देखते उनके परिवार वालों के खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।  चपरासी की बेटी बनी अधिकारी  बता दें कि बुलंदशहर में ही एक इंटर कॉलेज में शिखा के पिता चपरासी का काम करते हैं. ऐसे में शिखा का सिविल सेवा परीक्षा पास करना बहुत कठिन था. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी की पढ़ाई में कभी किसी तरह की कमी नहीं होने दी. उनकी शुरुआती पढ़ाई बुलंदशहर के गांधी बाल निकेतन कन्या इंटर कॉलेज से हुई है. इसके बाद उन्होंने IP कॉलेज से BSC की परीक्षा पास की।   पहले प्रयास में मिली निराशा  कॉलेज पूरी करने के बाद से शिखा ने दिल्ली में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की. दो साल तैयारी करने के बाद जब उन्होंने पहला अटेम्प्ट दिया तो उन्हें निराशा हाथ लगी. लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने 113वीं रैंक हासिल की।  रिजल्ट देख खूब रोए दादा  पोती को UPSC एग्जाम में मिली सफलता की खबर जब शिखा के दादा को लगी तो, वह फूट-फूटकर रोने लगे. वहीं, शिखा के बड़े भाई ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा पास कर बहन ने पूरे परिवार का नाम रोशन कर दिया है. उनके माता-पिता अपनी बेटी के सफलता पर गर्व कर रहे हैं. एक बार निराशा हाथ आने के बाद भी शिखा ने हार नहीं मानी और लगातार अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करती रहीं। 

धार के लाल पक्षाल सेक्रेटरी ने UPSC में 8वीं रैंक हासिल कर देशभर में लहराया परचम

धार   धार जिले के छोटे कस्बे बाग के लिए गर्व की बात है कि यहां के होनहार युवा पक्षाल सेक्रेटरी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल कर क्षेत्र का नाम पूरे देश में रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे नगर में खुशी और गर्व का माहौल है। लोगों ने मिठाई बांटकर और आतिशबाजी कर खुशियां मनाईं। माता-पिता का आशीर्वाद पक्षाल सेक्रेटरी का कहना है कि माता-पिता का आशीर्वाद और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रही। उनके पिता निलेश जैन कपड़ा व्यवसायी हैं, जबकि माता दीप्ति जैन गृहिणी हैं। परिवार के अनुसार प्रक्षाल बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं और उन्होंने कड़ी मेहनत व लगन से यह मुकाम हासिल किया। पक्षाल की प्रारंभिक पढ़ाई बाग के महेश मेमोरियल स्कूल में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वे इंदौर चले गए और बाद में उन्होंने आईआईटी कानपुर से फाइनेंस में पढ़ाई की। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में जाने के बजाय देश सेवा का रास्ता चुना और सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। दिल्ली में रहकर तैयारी पक्षाल वर्ष 2022-23 के आसपास दिल्ली चले गए और वहीं रहकर यूपीएससी की तैयारी की। उनकी छोटी बहन क्रिया जैन ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। कई बार ऐसा समय भी आया जब वे रोजाना केवल 3 से 4 घंटे ही सोते थे और दिनभर लाइब्रेरी में पढ़ाई करते थे। प्रयास जारी रहा पहले प्रयास में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) मिलने की संभावना थी, लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस बनना था, इसलिए उन्होंने तैयारी जारी रखी। दूसरे प्रयास में वे प्रीलिम्स में ही रह गए, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक 8 प्राप्त की। तैयारी के दौरान कई चुनौतियां भी सामने आईं। एक बार इंटरव्यू से एक दिन पहले उनका पैर मुड़ गया था, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पक्षाल जैन की इस सफलता से बाग सहित पूरे क्षेत्र के युवाओं को प्रेरणा मिली है कि छोटे कस्बों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

हरियाणा: बीजेपी नेता के बेटे एकांश ढुल बने यूपीएससी के थर्ड टॉपर, पिछली बार मिला था 295वां रैंक

चंडीगढ़  यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएसई) की तरफ से सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया गया है. हरियाणा के भाजपा नेता के बेटे एकांश ढुल का देश भर में तीसरा रैंक हासिल किया है।जानकारी के अनुसार, भाजपा नेता कृष्ण ढुल के बेटे एकांश ढुल पहले भी दो बार यूपीएससी में चयनित हो चुके हैं और लगातार उन्होंने तीसरी बार चयन हुआ है। पंचकूला के सेक्टर-12 के रहने वाले भाजपा नेता कृष्ण ढुल के बेटे एकांश ने पिछली बार 2025 में यूपीएएसपी एग्जाम में 295वीं रैंक हासिल की है. वहीं, 2024 में एकांश ने 342वीं रैंक हासिल किया था. हालांकि, अब उन्होंने लंबी छलांग लगाते हुए अब तीसरा रैंक हासिल किया है।  2024 में एकांश ने 342वीं रैंक हासिल किया था. हालांकि, अब उन्होंने लंबी छलांग लगाते हुए अब तीसरा रैंक हासिल किया है। गौर रहे कि एकांश ढुल ने चंडीगढ़ के भवन विद्यालय सेक्टर-27 से 10वीं और सेंट कबीर स्कूल सेक्टर-26 से 12वीं की पढ़ाई की थी और फिर इसके बाद श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स दिल्ली से बीए ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की है और दिल्ली में कोचिंग भी ली थी. वह लगातार यूपीएएसी का एग्जाम दे रहे थे और थर्ड टॉपर बने हैं. उधऱ, सीएम नायब सिंह सैनी ने एकांश ढुल के पिता कृष्ण ढुल को फोन पर बधाई दी. इस दौरान सीएम ने एकांश ढुल की मां से भी फोन पर बात की और कहा कि वह घर आकर बेटे को बधाई दें. एकांश ढुल के पिता कृष्ण ढुल ने सीएम से कहा कि आपके भतीजे ने हरियाणा का नाम रौशन किया है. आपकी सरकार ने बिना खर्ची और पर्ची के बिना नौकरियां मिल रही हैं। कौन हैं एकांश के पिता कृष्ण ढुल गौरतलब है कि कांश के पिता कृष्ण ढुल भाजपा के वरिष्ठ नेता है और माता निर्मल ढुल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल सेक्टर-19 पंचकूला में बतौर प्रिंसिपल हैं. कृष्ण ढुल हरियाणा राज्य चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के पूर्व जनरल सेक्रेटरी भी रहे हैं और अभी भाजपा प्रवक्ता हैं. इसके अलावा, हरियाणा आर्चरी एसोशिएसन के अध्यक्ष भी हैं।

UPSC 2025: यूपी की आस्था जैन ने 9वीं और सुरभि यादव ने 14वीं रैंक के साथ किया राज्य का नाम रोशन

 शामली/अमरोहा संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए हैं. अनुज अग्निहोत्री ने देशभर में पहली रैंक हासिल कर परीक्षा में टॉप किया है. उत्तर प्रदेश के शामली की 23 वर्षीय आस्था जैन ने अद्भुत सुधार दिखाते हुए 9वीं रैंक प्राप्त की, जबकि पिछले साल वह 186वें स्थान पर थीं. वहीं, अमरोहा की सुरभि यादव ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 14वीं रैंक हासिल की। आयोग ने इस वर्ष विभिन्न श्रेणियों के कुल 958 उम्मीदवारों को नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया है. यह चयन प्रक्रिया अगस्त 2025 की मुख्य परीक्षा और फरवरी 2026 में संपन्न हुए इंटरव्यू के आधार पर पूरी हुई। यूपी की बेटियों ने पेश की मिसाल शामली की आस्था जैन ने महज एक साल के भीतर 186वीं रैंक से टॉप-10 (9वीं रैंक) तक का सफर तय किया. वहीं, अमरोहा की रहने वाली सुरभि यादव ने 14वीं रैंक पाकर सबको चौंका दिया. सुरभि ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक किया है और वे अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को देती हैं. सुरभि को वारली पेंटिंग और बेकिंग का भी शौक है। एक इंटरव्यू में सुरभि यादव ने बताया था कि वह अमरोहा जिले के एक छोटे से गांव सांगा की रहने वाली हैं. हालांकि, उनके पिता वाराणसी में पोस्टेड हैं जबकि वो खुद जिले से बाहर रह रही हैं. उन्होंने अपनी 12वीं की पढ़ाई आर्मी स्कूल बरेली से पूरी की थी. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली का रुख किया। टॉपर्स की लिस्ट और चयन का गणित परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री के बाद दूसरे स्थान पर राजेश्वरी सुवे एम और तीसरे पर अकांश धुल रहे. चयनित 958 उम्मीदवारों में 317 सामान्य वर्ग, 306 ओबीसी, 158 एससी, 104 ईडब्ल्यूएस और 73 एसटी वर्ग से हैं. केंद्र सरकार ने कुल 1087 पदों के लिए रिक्तियां निकाली थीं. उम्मीदवारों के व्यक्तिगत अंक अगले 15 दिनों में आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे।