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देवी-देवताओं की तस्वीरें भी ला सकती हैं नकारात्मक ऊर्जा! क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं

घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए लोग देवी-देवताओं की तस्वीरें और मूर्तियां स्थापित करते हैं। मान्यता है कि सही विधि और सही स्वरूप में की गई पूजा से घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है। हालांकि, वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार हर देवी-देवता की हर तस्वीर या मूर्ति घर में रखना शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ विशेष देवी-देवताओं के उग्र स्वरूप, खंडित प्रतिमाएं या युद्ध दर्शाती तस्वीरें घर में रखने से मानसिक तनाव, आपसी कलह और आर्थिक तंगी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। आइए जानते हैं किन देवी-देवताओं की तस्वीरें घर में रखने से बचना चाहिए और इसके पीछे क्या कारण बताए गए हैं। भगवान भैरव और नटराज की मूर्ति भगवान शिव के उग्र रूप भैरव महाराज की तस्वीर या मूर्ति घर के भीतर रखना शुभ नहीं माना जाता। शास्त्रों के अनुसार, भैरव तंत्र साधना के देवता हैं और उनकी पूजा मुख्य रूप से घर के बाहर या मंदिर में की जानी चाहिए। इसी तरह, नटराज स्वरूप में भगवान शिव तांडव मुद्रा में होते हैं, जो विनाश और प्रलय का प्रतीक मानी जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, इस स्वरूप की मूर्ति घर में रखने से अशांति और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। शनि देव की प्रतिमा शनि देव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी दृष्टि अत्यंत प्रभावशाली और उग्र मानी जाती है। यही कारण है कि शनि देव की मूर्ति या तस्वीर घर में लगाना उचित नहीं माना गया है। शनि देव की पूजा के लिए मंदिर या शनि पीठ में जाना शुभ माना जाता है। घर में उनकी प्रतिमा रखने से परिवार के सदस्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका बताई जाती है। देवी काली का उग्र स्वरूप मां काली शक्ति और संहार की देवी हैं, लेकिन घर में उनका अत्यंत उग्र या विकराल स्वरूप रखना शुभ नहीं माना जाता। ऐसी तस्वीरें जिनमें मां काली राक्षसों का संहार करती दिखाई दें या अत्यधिक उग्र रूप में हों, घर में नकारात्मक ऊर्जा और क्रोध को बढ़ा सकती हैं। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में मां लक्ष्मी, मां सरस्वती या मां दुर्गा के सौम्य और आशीर्वाद देते हुए स्वरूप की पूजा करना अधिक शुभ माना गया है। खंडित मूर्तियां या टूटी हुई तस्वीरें वास्तु शास्त्र में खंडित मूर्तियों को सबसे बड़ा दोष माना गया है। टूटी हुई मूर्ति, तस्वीर का टूटा या चटका हुआ कांच इन सभी को घर में रखना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि खंडित प्रतिमाएं दुर्भाग्य को आकर्षित करती हैं और घर की बरकत को रोक देती हैं। ऐसी मूर्तियों या तस्वीरों को तुरंत सम्मानपूर्वक हटा देना चाहिए। युद्ध या क्रोध मुद्रा वाली तस्वीरें किसी भी देवी-देवता की ऐसी तस्वीर जिसमें वे युद्ध करते हुए या अत्यधिक क्रोध में दिखाई दें, घर के वातावरण को तनावपूर्ण बना सकती है। उदाहरण के लिए, महाभारत युद्ध या अन्य संघर्ष दर्शाती धार्मिक तस्वीरें घर में शांति भंग कर सकती हैं। ऐसे दृश्य पूजा स्थान के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते। इन वास्तु नियमों का भी रखें ध्यान पीठ दिखाई न दे: भगवान की मूर्ति या तस्वीर इस तरह न रखें कि उनकी पीठ दिखाई दे। आमने-सामने न हों: एक ही देवी-देवता की दो मूर्तियां या तस्वीरें आमने-सामने न रखें। मंदिर की सही दिशा: घर का मंदिर हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में होना चाहिए। साफ-सफाई: पूजा स्थल को हमेशा स्वच्छ और व्यवस्थित रखें। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में देवी-देवताओं की सही तस्वीरें और मूर्तियां रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। वहीं, गलत स्वरूप या खंडित प्रतिमाएं घर की शांति और समृद्धि में बाधा बन सकती हैं। इसलिए पूजा स्थल की व्यवस्था करते समय इन नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है।

घर का मुख्य द्वार किस दिशा में हो तो मिले अपार धन और खुशहाली?

वास्तु शास्त्र में सभी दिशाओं का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि वास्तु के नियम का पालन करने से जातक का जीवन खुशियों से भरा रहता है। वास्तु की दृष्टि से घर के मुख्य द्वार एक अहम हिस्सा होता है, इसलिए मुख्य द्वार सही दिशा में होना चाहिए, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होगा। शुभ दिशा में घर का मुख्य द्वार होने से सकारात्मकता और मानसिक शांति बनी रहती है। साथ ही तनाव की समस्या दूर होती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि किस दिशा में होना चाहिए घर का मुख्य द्वार। कौन-सी दिशा मुख्य द्वार के लिए है शुभ?     वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार लिए उत्तर दिशा शुभ माना जाता है। इस दिशा को धन के देवता कुबेर का स्थान माना जाता है। इससे घर में धन का प्रभाव बना रहता है।     इसके अलावा पूर्व दिशा को भी घर के मुख्य द्वार के लिए उत्तम माना जाता है। यह दिशा सूर्य देव की है। इस दिशा में मुख्य द्वार होने से जातक को मान-सम्मान मिलता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।     अगर आप घर में शांति का माहौल चाहते हैं, तो घर का मुख्य द्वार ईशान कोण में होना चाहिए। इससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इन बातों का रखें ध्यान     मुख्य द्वार घर के अंदर की तरफ खुलना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।     इसके अलावा मुख्य द्वार घर के सभी दरवाजों से बड़ा चाहिए।     मुख्य पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। ऐसा माना जाता है कि मुख्य द्वार पर गंदगी होने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन नहीं होता है।     मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिन्ह लगाना शुभ माना जाता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है     मुख्य द्वार पर पेड़-पौधें लगाएं। इससे गेटिविटी दूर रहती है।     द्वारा पर हमेशा पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।     अगर आप वास्तु के इन नियम का पालन करते हैं, तो आपक घर में हमेशा खुशहाली और सकारात्मकता का वास होगा।  

क्या आप भी सुबह सबसे पहले ये 5 चीजें देखते हैं? हो सकता है इसी वजह से बिगड़ता हो आपका दिन

हम अक्सर कहते हैं कि "आज का दिन ही खराब है", लेकिन कभी इसके पीछे की वजह पर गौर नहीं करते। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारा शरीर और मन अत्यधिक संवेदनशील होता है। उस वक्त हम जो देखते हैं, उसका सीधा असर हमारी मानसिक ऊर्जा और भाग्य पर पड़ता है। प्राचीन वास्तु शास्त्र और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ चीजें नकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती हैं। अगर दिन की शुरुआत ही इन चीजों को देखकर हो, तो न केवल मानसिक तनाव बढ़ता है, बल्कि आर्थिक हानि के योग भी बनने लगते हैं। भूलकर भी न देखें ये 5 चीजें बंद घड़ी (रुका हुआ समय): वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक, सुबह उठते ही बंद घड़ी देखना बहुत अशुभ है। यह आपके जीवन में ठहराव और कार्यों में बाधा आने का संकेत है। यह दर्शाता है कि आपका अच्छा समय रुक गया है। शीशे में चेहरा देखना: बहुत से लोगों की आदत होती है जागते ही शीशा देखने की। वास्तु के अनुसार, रात भर की नकारात्मक ऊर्जा सुबह चेहरे पर होती है। शीशा देखने से वह ऊर्जा वापस आप में समा जाती है, जिससे दिनभर चिड़चिड़ापन रह सकता है। जूठे बर्तन: अगर आप सुबह उठकर किचन में सबसे पहले रात के जूठे बर्तन देखते हैं, तो यह सीधे तौर पर आर्थिक तंगी को न्योता देना है। इससे घर में दरिद्रता का वास होता है। अपनी या दूसरों की परछाई: सुबह-सुबह परछाई देखना (चाहे वह अपनी हो या किसी और की) राहु का प्रभाव बढ़ाता है। इससे मन में डर, भ्रम और कार्यों में उलझन पैदा होती है। जंगली जानवरों की तस्वीर: बेडरूम में कभी भी हिंसक जानवरों की फोटो न लगाएं। सुबह इन्हें देखने से स्वभाव में क्रोध बढ़ता है और परिवार में क्लेश होने की संभावना रहती है। धार्मिक ग्रंथों और वास्तु के जानकारों के अनुसार, इन नकारात्मक चीजों से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि सुबह उठते ही अपनी हथेलियों के दर्शन करें या किसी देवी-देवता की शांत तस्वीर देखें। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।  

वास्तु के अनुसार घर की घंटियां और विंड चाइम: जानें किस दिशा में लटकाना है सबसे शुभ

हवा के झोंकों के साथ जब घर में विंड चाइम या छोटी घंटियों की सुरीली आवाज गूंजती है, तो मन को एक अजीब सा सुकून मिलता है। लेकिन, क्या आपको पता है कि यह प्यारी सी आवाज सिर्फ सुनने में अच्छी नहीं लगती, बल्कि आपके जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सुख-समृद्धि के द्वार भी खोल सकती है? वास्तु शास्त्र में ध्वनि तरंगों का बहुत महत्व है। सही दिशा में लगी विंड चाइम सोई हुई किस्मत को जगाने का काम करती है। वहीं, गलत दिशा में लगी घंटी मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। दिशाओं का रखें खास ख्याल विंड चाइम खरीदते समय सबसे पहले उसकी दिशा और धातु पर ध्यान देना चाहिए। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आप पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में विंड चाइम लगाना चाहते हैं, तो धातु से बनी विंड चाइम का चुनाव करें। यह दिशा बच्चों के करियर और सौभाग्य के लिए उत्तम मानी जाती है। वहीं, अगर आप घर की पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा को सजाना चाहते हैं, तो लकड़ी या बांस से बनी विंड चाइम सबसे शुभ फल देती है। ऐसा माना जाता है कि लकड़ी का तत्व विकास और उन्नति का प्रतीक है। छड़ों की संख्या का जादुई अंक विंड चाइम में छड़ों  की संख्या का भी अपना महत्व है। घर में शांति और क्लेश दूर करने के लिए 7 या 8 छड़ों वाली विंड चाइम लगानी चाहिए। वहीं, अगर आप अपनी लोकप्रियता या सामाजिक दायरे को बढ़ाना चाहते हैं, तो 6 छड़ों वाली विंड चाइम को उत्तर-पश्चिम दिशा में लटकाना लाभकारी होता है। प्रवेश द्वार पर घंटी का महत्व सिर्फ विंड चाइम ही नहीं, घर के मुख्य द्वार पर छोटी पीतल की घंटी लटकाना भी सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। जब भी कोई दरवाजा खोलता है, तो घंटी की आवाज से घर की 'डेड एनर्जी' (रुकी हुई ऊर्जा) एक्टिव हो जाती है। यह आवाज घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक शक्तियों को बाहर ही रोक देती है। कहां न लगाएं विंड चाइम? वास्तु के अनुसार, कभी भी ऐसी जगह विंड चाइम न लगाएं, जहां उसके नीचे कोई बैठता हो या सोता हो। इसके अलावा, किचन या स्टोर रूम के अंधेरे कोनों में भी इसे लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि वहां इसकी ऊर्जा का सही प्रवाह नहीं हो पाता।  

घर के चित्र और किस्मत का कनेक्शन: जानिए कैसे बदलती है ज़िंदगी

नौकरी-व्यवसाय और पढ़ाई में सफलता पाने के लिए वास्तु के अनुसार कुछ उपाय किए जाते हैं। वास्तु के अनुसार चीजें सही नहीं होने से उनके दुष्प्रभाव भी देखे जा सकते हैं। ऐसे ही कुछ खास चित्रों को घर में लगाने से बेहद लाभ मिलता है। 7 सफेद दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में लगाने से सफलता को गति मिलती है। दौड़ते हुए सफेद घोड़ों की तस्वीर में खासतौर पर 7 घोड़ों का होना जरूरी है। ऐसी तस्वीर लगाना तरक्की पाने के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है, साथ ही 7 का अंक भी ज्योतिष के अनुसार शुभ माना जाता है। इस फोटो में 7 घोड़ों के होने के पीछे तर्क है कि इंद्रधनुष के 7 रंग, सप्त ऋषि, शादी के सात फेरे, सात जन्म को हिन्दू धर्म में बहुत शुभ माना जाता है। यह अंक प्राकृतिक और सार्वभौमिक माना गया है। वैसे ऐसी तस्वीर को घर और ऑफिस में कहीं पर भी लगा सकते हैं लेकिन इसे घर की पूर्व दिशा में लगाने से अधिक लाभ मिलता है। घर में प्रवेश करने के साथ ही आगंतुक की पहली नजर इस तस्वीर पर जानी चाहिए। खिलखिलाती हुई परिवार के सदस्यों की हंसती तस्वीरें जीवन में ढेरों खुशियों लेकर आती है, नकारात्मकता को कोसों दूर रखती हैं। वास्तु अनुसार जिस घर में तैरती हुई मछलियों का चित्र लगा होता है, वह सजीवता का परिचायक है। इससे फैमिली के सभी सदस्य लंबी उम्र भोगते हैं। घर में सूर्योदय, ऊंचे पहाड़ और पानी के झरने की तस्वीरें लगाना उत्तम विकल्प है। ये निराश जीवन में उम्मीद की किरण जगाती हैं।

वास्तु के अनुसार पर्दों के ये रंग बदल देंगे किस्मत, पॉजिटिव एनर्जी से भर जाएगा घर

वास्तु शास्त्र में घर की हर छोटी-बड़ी वस्तु का अपना महत्व होता है। अक्सर हम घर की दीवारों के रंग और फर्नीचर पर तो बहुत ध्यान देते हैं, लेकिन पर्दों को केवल सजावट की वस्तु समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु के अनुसार, पर्दे केवल धूप को नहीं रोकते, बल्कि वे घर में आने वाली ऊर्जा के प्रवाह को भी नियंत्रित करते हैं। सही दिशा में सही रंग के पर्दे लगाने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार पर्दों के रंगों का चयन कैसे करें और उनके नियम क्या हैं। दिशा के अनुसार पर्दों के रंगों का चुनाव वास्तु शास्त्र पंचतत्वों पर आधारित है। हर दिशा का एक प्रतिनिधि तत्व और रंग होता है। पूर्व दिशा पूर्व दिशा सूर्य की दिशा है, जो विकास और सामाजिक संबंधों का प्रतीक है। यहां हरे या हल्के नीले रंग के पर्दे लगाने चाहिए। हरा रंग ताजगी और विकास का प्रतीक है, जो परिवार के सदस्यों के बीच खुशहाली लाता है। पश्चिम दिशा यह दिशा लाभ और प्राप्ति की दिशा मानी जाती है। यहां सफेद, सुनहरा या पीले रंग के पर्दे सबसे अच्छे होते हैं। सफेद रंग शांति का प्रतीक है और यह दिशा में ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखता है। उत्तर दिशा उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है जो धन और करियर के अवसरों को दर्शाती है। यहां नीले या आसमानी रंग के पर्दे लगाने चाहिए। नीला रंग जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जो धन के आगमन के नए मार्ग खोलता है। दक्षिण दिशा यह दिशा अग्नि तत्व और यश की दिशा है। यहां लाल, नारंगी या गुलाबी रंग के पर्दे लगाना उत्तम रहता है।  ये गहरे रंग आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और घर के मुखिया के मान-सम्मान में वृद्धि करते हैं। कमरों के अनुसार पर्दों का चयन ड्राइंग रूम यह वह स्थान है जहां मेहमान आते हैं और परिवार एक साथ समय बिताता है। यहां क्रीम, हल्का पीला या भूरा रंग इस्तेमाल किया जा सकता है। यह रंग स्थिरता और मेलजोल को बढ़ावा देते हैं। बेडरूम दांपत्य जीवन में मधुरता और अच्छी नींद के लिए बेडरूम में गुलाबी, हल्का बैंगनी या पीच रंग के पर्दे लगाने चाहिए। लाल रंग के पर्दों से यहां बचना चाहिए क्योंकि यह उग्रता बढ़ा सकते हैं। पूजा घर पूजा घर में पवित्रता का होना अनिवार्य है। यहां पीले या केसरिया रंग के पर्दे सबसे शुभ माने जाते हैं। पीला रंग ज्ञान और एकाग्रता का प्रतीक है।  

वास्तु शास्त्र की चेतावनी: इस दिशा में बैठकर भोजन करने से बढ़ सकती हैं परेशानियां

अन्न को हिंदू धर्म में 'ब्रह्म' माना गया है और भोजन करने की प्रक्रिया को एक 'यज्ञ' के समान पवित्र माना गया है। अक्सर हम इस बात पर तो ध्यान देते हैं कि हम क्या खा रहे हैं, लेकिन हम 'किधर' मुंह करके खा रहे हैं, इसे नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, गलत दिशा में बैठकर किया गया भोजन न केवल बीमारियों को बुलावा देता है, बल्कि घर की सुख-शांति भी छीन सकता है। यदि आप भी बार-बार बीमार पड़ते हैं या घर में बरकत नहीं रहती, तो एक बार अपने भोजन करने की दिशा जरूर बदलें। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार भोजन करने की सही और गलत दिशाएं। 1. पूर्व दिशा वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा को देवताओं की दिशा माना गया है। यदि आप पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन करते हैं, तो इससे शरीर को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह दिशा मानसिक तनाव को दूर करती है और लंबी आयु प्रदान करती है। बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए इस दिशा में बैठकर खाना सबसे उत्तम माना गया है। 2. उत्तर दिशा उत्तर दिशा को कुबेर और मां लक्ष्मी की दिशा माना जाता है। इस दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से शरीर निरोगी और स्वस्थ रहता है। जो लोग करियर में सफलता चाहते हैं या धन प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, उन्हें उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करना चाहिए। विद्यार्थियों के लिए भी यह दिशा श्रेष्ठ है। 3. पश्चिम दिशा पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भोजन करना वास्तु में मिला-जुला परिणाम देता है, लेकिन अक्सर इसे पाचन के लिए ठीक नहीं माना जाता। इस दिशा में बैठकर खाना खाने से पाचन तंत्र (Digestion) खराब हो सकता है और व्यक्ति के मन में भौतिक इच्छाएं बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, जो मानसिक अशांति का कारण बनती हैं। 4. दक्षिण दिशा वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करना सबसे हानिकारक माना गया है। इस दिशा को यम की दिशा माना जाता है। दक्षिण दिशा में बैठकर खाना खाने से पेट संबंधी गंभीर रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, इससे मान-सम्मान में कमी और आर्थिक तंगी का सामना भी करना पड़ सकता है।

घर में अन्न की कमी दूर करेगी ये एक चीज़, बस चावल के डिब्बे में रखें

भारतीय संस्कृति और वास्तु शास्त्र में रसोई घर को घर का सबसे पवित्र स्थान माना गया है। रसोई केवल भोजन पकाने की जगह नहीं है, बल्कि यह वह ऊर्जा केंद्र है जो पूरे परिवार के स्वास्थ्य और भाग्य को नियंत्रित करता है। वास्तु के अनुसार, रसोई में रखी हर वस्तु और अनाज का अपना एक विशेष महत्व होता है। विशेष रूप से चावल, जिसे अक्षत कहा जाता है, हिंदू धर्म में पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। चावल का संबंध चंद्रमा और माता लक्ष्मी से है। वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसे विशेष उपाय बताए गए हैं जिन्हें यदि चावल के डिब्बे के साथ किया जाए, तो घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती। आइए जानते हैं कि चावल के डिब्बे में वह कौन सी गुप्त चीज है जिसे रखने से आपके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और इसके पीछे के ज्योतिषीय व वास्तु कारण क्या हैं। चावल के डिब्बे में क्या रखें ? वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि आप चाहते हैं कि आपके घर का भंडार हमेशा भरा रहे, तो अपने चावल रखने वाले कंटेनर या डिब्बे में 'लाल कपड़े में बंधे हुए 5 या 11 साबुत हल्दी की गांठें या चांदी का एक सिक्का रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। डिब्बे को कभी पूरी तरह खाली न होने दें वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि रसोई में चावल का डिब्बा कभी भी पूरी तरह खाली नहीं होना चाहिए। जैसे ही चावल खत्म होने वाले हों, उससे पहले ही नया स्टॉक भर दें। पूरी तरह खाली डिब्बा घर में कंगाली और अभाव का संकेत माना जाता है। यह परिवार की आर्थिक प्रगति में बाधा उत्पन्न करता है। सही दिशा का चुनाव रसोई में चावल और अन्य अनाज रखने की सबसे उत्तम दिशा वायव्य कोण मानी गई है। यदि आप उत्तर-पश्चिम दिशा में अनाज रखते हैं, तो घर में अन्न की आवक बनी रहती है और बरकत होती है। सफाई और स्वच्छता चावल के डिब्बे को हमेशा साफ-सुथरा रखें। डिब्बे के आसपास गंदगी या जाले नहीं होने चाहिए। गंदे डिब्बे में रखा अनाज राहु के दुष्प्रभाव को बढ़ाता है, जिससे घर में कलह और बीमारियां आती हैं। बरकत बढ़ाने के अन्य प्रभावी उपाय यदि संभव हो, तो चावल के डिब्बे में एक चांदी का सिक्का रखें। चांदी चंद्रमा को मजबूत करती है, जिससे धन का संचय बढ़ता है। 5 साबुत हल्दी की गांठों को पीले कपड़े में बांधकर चावल के डिब्बे में रखने से गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे सौभाग्य और समृद्धि आती है। यदि चांदी उपलब्ध न हो, तो तांबे का एक साफ सिक्का भी रखा जा सकता है। यह सूर्य की ऊर्जा प्रदान करता है।

कछुआ अंगूठी पहनने से पहले सावधान! इन राशि वालों को हो सकता है नुकसान

कछुए वाली अंगूठी आजकल एक फैशन बन गई है, लेकिन वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में इसका संबंध सीधे आपकी किस्मत और आर्थिक स्थिति से होता है। कछुए को भगवान विष्णु के 'कूर्म अवतार' का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे धारण करने से पहले कुछ नियमों को जानना बहुत जरूरी है। कछुए वाली अंगूठी पहनने के बड़े फायदे आर्थिक समृद्धि: शास्त्रों के अनुसार, कछुआ धन की देवी मां लक्ष्मी का प्रिय माना जाता है। इसे पहनने से घर में बरकत आती है और धन के नए स्रोत खुलते हैं। आत्मविश्वास में वृद्धि: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कछुआ धैर्य और शांति का प्रतीक है। इसे धारण करने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक तनाव कम होता है। सकारात्मक ऊर्जा: यह अंगूठी नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर जीवन में सकारात्मकता और सुख-शांति लाती है। किस धातु में पहनें अंगूठी? धातु का चुनाव आपकी राशि और इसके प्रभाव को तय करता है: चांदी : वास्तु शास्त्र के अनुसार, कछुए की अंगूठी के लिए चांदी सबसे उत्तम धातु मानी जाती है। यह मन को शांत रखती है और शुभ फल देती है। सोना या तांबा: अगर आपकी कुंडली अनुमति देती है, तो आप इसे सोने या तांबे में भी बनवा सकते हैं, लेकिन चांदी को सबसे प्रभावशाली माना गया है। पहनने की सही दिशा और तरीका कछुए का मुख: अंगूठी पहनते समय ध्यान दें कि कछुए का मुख हमेशा पहनने वाले की तरफ (अंदर की ओर) होना चाहिए। इससे धन आपकी ओर आकर्षित होता है। मुख बाहर की ओर होने से धन व्यय होने की संभावना रहती है।  

अगर आप भी दरवाजे के पीछे टांगते हैं कपड़े, तो हो जाएं अलर्ट!

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य दरवाजा सकारात्मक ऊर्जा (प्राणिक ऊर्जा) के प्रवेश का प्रमुख स्थान होता है। इसके पीछे कपड़े टांगना या कोई बाधा रखना शुभ नहीं माना जाता। मुख्य दरवाजे के पीछे कपड़े टांगना सही नहीं है क्योंकि यह ऊर्जा के प्रवाह को बाधित करता है। अन्य दरवाजों पर कपड़े टांगने में कोई बड़ी समस्या नहीं है, बशर्ते इसे सुव्यवस्थित और स्वच्छ रखा जाए। यदि यह आपकी आदत है और इसे बदलना संभव नहीं है, तो सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से सफाई और दरवाजे की देखभाल करें। आइए जानें, इससे जुड़े विभिन्न पहलु- दरवाजे के पीछे कपड़े टांगने के प्रभाव ऊर्जा का अवरोध: दरवाजे के पीछे कपड़े टांगने से दरवाजे का खुलना सीमित हो सकता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो सकता है, जिससे घर में तनाव या नकारात्मकता बढ़ सकती है। अव्यवस्था और मानसिक प्रभाव: दरवाजे के पीछे टंगे कपड़े अव्यवस्थित ऊर्जा (क्लटर एनर्जी) का निर्माण करते हैं। इससे घर के सदस्यों की मानसिक शांति और ध्यान भंग हो सकता है। मुख्य द्वार के पीछे टंगे कपड़े: यदि मुख्य द्वार के पीछे कपड़े टांगे जाते हैं तो यह विशेष रूप से अशुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार, यह धन और अवसरों के प्रवाह को रोक सकता है। बैडरूम और अन्य दरवाजों पर कपड़े: बैडरूम या अन्य दरवाजों के पीछे कपड़े टांगना उतना हानिकारक नहीं होता, लेकिन इसे नियमित रूप से व्यवस्थित करना चाहिए। वास्तु-अनुकूल उपाय दरवाजे पर बाधा न बनाएं: मुख्य दरवाजे के पीछे या किसी अन्य दरवाजे के पीछे ऐसी चीजें न रखें जो उसे पूरी तरह खुलने से रोकें। हुक या हैंगर का उपयोग: यदि कपड़े टांगना आवश्यक है, तो दरवाजे के ऊपरी हिस्से में हल्के और व्यवस्थित हुक का उपयोग करें। दरवाजे के पास स्वच्छता रखें: नियमित रूप से दरवाजे के पास साफ-सफाई और सुव्यवस्था बनाए रखें। दरवाजे के पास ऊर्जा बढ़ाने वाले उपाय: सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए मुख्य दरवाजे के पास तुलसी का पौधा, स्वस्तिक चिन्ह या तोरण लगाएं।