samacharsecretary.com

घर में न लगाएं ये पौधे वास्तु के अनुसार अशुभ पौधे

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में रखे पेड़-पौधे सिर्फ सजावट का सामान नहीं होते, बल्कि वे घर की ऊर्जा (Energy) पर गहरा असर डालते हैं.  जहाँ कुछ पौधे घर में सौभाग्य और खुशहाली लाते हैं, वहीं कुछ पौधे ऐसे भी हैं जिन्हें घर की सीमा के अंदर लगाना बहुत अशुभ माना जाता है. गलत पौधों का चुनाव न सिर्फ आपकी तरक्की रोक सकता है, बल्कि परिवार में झगड़े और पैसों की तंगी का कारण भी बन सकता है. अगर आपने भी अनजाने में ये पौधे लगाए हैं, तो इनके बारे में जान लेना जरूरी है. भूलकर भी न लगाएं ये अशुभ पौधे: गुलाब के पौधे को छोड़कर, घर के अंदर या मुख्य दरवाजे पर कभी भी कांटेदार पौधे जैसे कैक्टस नहीं लगाने चाहिए. वास्तु के अनुसार, ये पौधे घर के माहौल में  तनाव पैदा करते हैं. इससे परिवार के सदस्यों के बीच आपसी तालमेल बिगड़ता है और कड़वाहट बढ़ती है. बोनसाई के पौधे: बोनसाई के पौधे दिखने में तो बहुत सुंदर लगते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार इन्हें घर में रखना अच्छा नहीं माना जाता.  बोनसाई पौधों को बढ़ने से रोका जाता है ताकि वे छोटे रहें. माना जाता है कि इन्हें घर में रखने से परिवार के सदस्यों की प्रगति और करियर में भी रुकावटें आने लगती हैं.   इमली का वृक्ष: घर के आंगन या मुख्य परिसर के पास इमली का पेड़ होना अच्छा नहीं माना जाता. लोक मान्यताओं और वास्तु के अनुसार, इमली के पेड़ पर नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. इसे घर के पास लगाने से परिवार के लोगों में डर, घबराहट और मानसिक बेचैनी बढ़ सकती है. दुग्ध युक्त पौधे: ऐसे पौधे जिनकी शाखाओं को तोड़ने पर दूध जैसा सफेद तरल निकलता है (जैसे मदार या आक), घर में लगाने से बचना चाहिए.  ये पौधे धन की हानि का कारण बन सकते हैं और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालते हैं.   मुरझाए या सूखे पौधे: घर में कभी भी सूखे हुए पौधे न रखें.  वास्तु के अनुसार, सूखे पौधे शोक और नकारात्मकता का प्रतीक होते हैं, जो घर की जीवंतता और सकारात्मक ऊर्जा को पूरी तरह सोख लेते हैं.

घर में इन पौधों को लगाना माना जाता है अशुभ, जानें कारण

घर में लगे पौधे सिर्फ सजावट का हिस्सा नहीं होते, ये हमारे आसपास की ऊर्जा को प्रभावित भी करते हैं। कई लोग हरियाली बढ़ाने के लिए तरह-तरह के पौधे लगा लेते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार हर पौधा घर के लिए शुभ नहीं होता। कुछ पौधे ऐसे भी माने जाते हैं, जो अनजाने में नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकते हैं और घर के माहौल को प्रभावित कर देते हैं। मान्यता है कि ऐसे पौधे परिवार में तनाव, रुकावट और आर्थिक परेशानियों का कारण बन सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि सही जानकारी के साथ ही पौधों का चयन किया जाए। आइए जानते हैं किन पौधों को घर में लगाने से बचना चाहिए। कैक्टस और कांटेदार पौधे वास्तु के अनुसार, गुलाब को छोड़कर अन्य कांटेदार पौधों को घर में रखना उचित नहीं माना जाता। कहा जाता है कि ऐसे पौधे घर में तनाव और मतभेद बढ़ा सकते हैं। साथ ही ये तरक्की में भी बाधा डालते हैं। बोन्साई पौधा बोन्साई देखने में आकर्षक जरूर लगता है, लेकिन इसे घर में रखना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि यह पौधा जीवन में प्रगति को सीमित कर देता है और करियर की गति को धीमा कर सकता है। इमली का पेड़ इमली का पौधा या पेड़ घर के भीतर या आसपास लगाना भी अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव रहता है, जिससे घर में परेशानी बढ़ सकती है। दूध निकलने वाले पौधे ऐसे पौधे जिनसे दूध जैसा तरल पदार्थ निकलता है, उन्हें भी घर में लगाने से बचना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, ये पौधे आर्थिक तंगी और कर्ज बढ़ने का कारण बन सकते हैं। सूखे या मुरझाए पौधे घर में सूखे या खराब हो चुके पौधों को रखना भी अच्छा नहीं माना जाता। ऐसे पौधे नकारात्मकता का संकेत होते हैं और जीवन में रुकावटें ला सकते हैं। इसलिए इन्हें तुरंत हटा देना चाहिए। घर में कौन से पौधे लगाना शुभ होता है? वास्तु के अनुसार, कुछ पौधे सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। जैसे तुलसी, मनी प्लांट, जेड प्लांट, स्नेक प्लांट और शमी का पौधा। ये पौधे घर में सुख-शांति और खुशहाली लाने में सहायक माने जाते हैं।  

घर की सीलन और वास्तु दोष: जानिए कैसे प्रभावित होती है आर्थिक स्थिति

 घर की सीलन (नमी) को अक्सर लोग छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, सीलन सिर्फ दीवारों के लिए ही नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित कर सकती है. माना जाता है कि घर में बढ़ती नमी नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती है, जिससे धन हानि, खर्चों में बढ़ोतरी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस घर में लगातार सीलन रहती है, वहां मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है. खासतौर पर घर की उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) और उत्तर दिशा में सीलन आना शुभ नहीं माना जाता है. यह दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी होती है, इसलिए यहां सीलन आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है. सीलन का वास्तु में महत्व वास्तु शास्त्र के मुताबिक, सीलन की वजह से घर में बदबू, फंगस और गंदगी भी बढ़ती है, जो सकारात्मक ऊर्जा को कम करती है. इससे घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और काम में मन नहीं लगता है. धीरे-धीरे यह स्थिति आर्थिक नुकसान को न्योता देने लगती है. अगर आपके घर में कहीं भी दीवारें गीली रहती हैं या पेंट उखड़ने लगा है, तो इसे तुरंत ठीक कराना चाहिए. घर में अच्छी धूप और हवा का आना जरूरी है, क्योंकि इससे नमी कम होती है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. इसके अलावा, पानी के लीकेज को नजरअंदाज न करें और समय-समय पर घर की सफाई और मरम्मत करते रहें. नमक या कपूर का उपयोग भी नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मददगार माना जाता है. तो आइए जानते हैं कि सीलन आने से घर को कौन से वास्तु दोष लगते हैं. 1. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) का दोष अगर घर के उत्तर-पूर्व हिस्से में सीलन रहती है, तो इसे सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है. यह दिशा देवताओं और धन-दौलत की मानी जाती है. यहां सीलन होने से धन रुकावट, मानसिक तनाव और निर्णय लेने में कमजोरी आ सकती है. 2. उत्तर दिशा में नमी (धन दोष) उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा कहा जाता है. इस जगह सीलन आने से आर्थिक नुकसान, बचत में कमी और अचानक खर्च बढ़ सकते हैं. 3. दीवारों का गीला और खराब होना (ऊर्जा दोष) घर की दीवारों पर फंगस, पपड़ी या बदबू आना घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. इससे घर में कलह, आलस्य और काम में रुकावट आने लगती है. 4. दक्षिण-पश्चिम में सीलन (स्थिरता दोष) यह दिशा स्थिरता और रिश्तों से जुड़ी होती है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में नमी होने से रिश्तों में अस्थिरता और करियर में उतार-चढ़ाव आ सकता है. घर में सीलन आने से कौन से ग्रह होते हैं प्रभावित? वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में सीलन का संबंध मुख्य रूप से चंद्रमा और शुक्र ग्रह से माना जाता है. चंद्रमा (Moon) – चंद्रमा जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है. घर में सीलन आने से चंद्रमा कमजोर हो सकता है, जिससे मानसिक तनाव, बेचैनी और नींद की समस्या बढ़ सकती है. शुक्र (Venus)- शुक्र देवता सुख-सुविधा, वैभव और सुंदरता का कारक है. सीलन से शुक्र प्रभावित होता है, जिससे आर्थिक परेशानी, घर की रौनक कम होना और वैवाहिक जीवन में तनाव की समस्याएं आ सकती हैं. क्या करें उपाय? – घर में जहां भी लीकेज या सीलन है, उसे तुरंत ठीक कराएं. – घर में धूप और हवा का सही इंतजाम रखें. – नमक या कपूर रखकर नमी और नकारात्मक ऊर्जा कम करें. – उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा साफ और सूखा रखें.

विवाह में देरी का कारण हो सकता है वास्तु दोष, इन दिशाओं पर जरूर दें ध्यान

बढ़ती उम्र के कारण विवाह में देरी हो रही है. या फिर रिश्ते तो आ रहे हैं, लेकिन पसंद-नापसंद का झंझट हो रहा है. विवाह की बात बनते-बनते बिगड़ जाती है. यदि आपके घर में भी किसी के साथ ऐसी समस्या है तो अपने घर की कुछ विशेष दिशाओं पर ध्यान दें. इन दिशाओं का वास्तु दोष घर में मंगल कार्य, विवाह, अच्छे रिश्ते मिलने में दिक्कत पैदा कर सकता है. वैसे आजकल के सिंगल फैमिली के दौर में विवाह से संबंधित दिक्कतें आम हो गई हैं. पूर्व दिशा यदि आपकी बच्चे के लिए विवाह के रिश्ते नहीं आ रहे हैं तो घर में पूर्व दिशा को देखें कि यहां कोई वास्तु दोष तो नहीं. पूर्व दिशा आपके जीवन में सही रिश्तों को जोड़ने की दिशा है. यहां पीला रंग, टॉयलेट और रसोई का होना जीवन से ऐसे रिश्तों को दूर कर सकता है जो आपके लिए बेहतर हैं. ऐसे में लोग रिश्तों के लिए प्रयास तो करते हैं, लेकिन अच्छे रिश्ते आसानी से नहीं मिलते हैं. अच्छे और मनचाहे रिश्तों तक संपर्क ही नहीं हो पाता है. ऐसा घर की पूर्व दिशा में वास्तु दोष के कारण भी हो सकता है. इस दिशा में हरा रंग का होना अच्छा है.   दक्षिण-पूर्व दिशा आपने कई बार प्रयास किए, लेकिन घर में मंगल कार्य नहीं हो पाते हैं. जब भी सोचो कुछ न कुछ पेंच फंस जाता है. ऐसे में आपके घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में वास्तु दोष हो सकता है. ये विवाह ही नहीं, किसी भी प्रकार का मंगल कार्य होने में दिक्कत पैदा कर सकता है. दक्षिण-पूर्व दिशा में किसी भी प्रकार से गड्ढा, टॉयलेट, नीला या काला रंग वास्तु दोष पैदा करता है. इस दिशा में वास्तु दोष आपको धन संबंधी समस्या भी देता है. पैसे के कारण मंगल कार्य और विवाह में बाधा आती है. इनकम का फ्लो बिगड़ सकता है. दक्षिण-पश्चिम दिशा यह विवाह के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिशा है. विवाह होने के लिए और विवाह टिका रहने के लिए भी दक्षिण-पश्चिम दिशा का वास्तु रहित होना जरूरी है. यह पितरों की दिशा है. इस दिशा का क्षेत्र कभी डाउन नहीं होना चाहिए. किसी भी प्रकार से अंडरग्राउंड वॉटर टैंक, जमीन में गड्ढा भी इस दिशा में वास्तु दोष पैदा करता है. यहां रसोई-टॉयलेट और हरा-नीला-काला रंग वास्तु दोष पैदा करता है. इस दिशा का वास्तु दोष जीवन में स्थिरता नहीं रहने देता है. पृथ्वी तत्व की यह दिशा विवाह होने में आ रही दिक्कतों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. विवाह के बाद जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में समस्याएं रहती हैं, उन्हें भी अपने घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा के वास्तु दोष को अवश्य देखना चाहिए.

सेकेंड हैंड चीजों में छिपी हो सकती है नकारात्मक ऊर्जा, जानें शुद्धिकरण के आसान तरीके

 वास्तु शास्त्र के अनुसार पुराना सामान घर लाना नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकता है। किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किया हुआ सामान घर में परेशानियों का कारण भी बन सकता है। पैसे बचाने के चक्कर में सेकेंड हैंड सामान तो खरीद लेते हैं लेकिन ये नहीं पता होता कि सामान को इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति जीवित है या नहीं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी मृत व्यक्ति की पुरानी चीजों में उसकी ऊर्जा, भावनाएं और यादें मौजूद होती हैं, जो आपके ऊपर भी प्रभाव डाल सकती हैं। ऐसे में उस व्यक्ति की भावनात्मक ऊर्जा को हटाना बहुत जरूरी होता है। वास्तु गुरु मान्या जी के अनुसार, पुराना सामान खरीदना गलत नहीं है, लेकिन इन वस्तुओं का इस्तेमाल करने से पहले वास्तु के कुछ जरूरी नियमों का पालन जरूरी है। नमक से  सफाई अगर आप किसी मृत व्यक्ति की अलमारी या फर्नीचर का इस्तेमाल करने जा रहे हैं तो उसकी सफाई करना बहुत जरूरी है। इसके लिए पानी और सेंधा नमक के घोल से उसे अच्छे से साफ करें। नमक पुरानी और परेशान करने वाली यादों को सोखने का काम करता है। सूरज की रोशनी सूरज की रोशनी को शुद्धिकरण के लिए सबसे शक्तिशाली माना जाता है। ऐसे में पुरानी चीजों को कम से कम एक दिन तेज धूप में रखें। सूर्य की तेज किरणों से उस सामान में मौजूद पुरानी और नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी और उसमें सकारात्मक ऊर्जा भर जाएगी। गंगा जल का छिड़काव हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र दोनों में गंगा जल को अत्यंत शुद्ध और पवित्र माना गया है। नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने की इसमें अद्भुत शक्ति होती है। ऐसे में गंगा जल का छिड़काव करने से पुराने मालिक के दुख और तनाव का असर उस वस्तु पर से पूरी तरह खत्म हो जाता है। कपूर और लोबान का प्रयोग कपूर और लोबान घर की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करने का काम करता है। ऐसे में पुरानी चीजों के पास भीम सेनी कपूर या लोबान जलाना चाहिए। इसका धुआं रुकी हुई ऊर्जा को हटाकर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने का काम करता है। इसके साथ ही वहां धूप बत्ती भी जला सकते हैं। पुराने फर्नीचर को पेंट करवाएं घरों में अकसर पूजा के समय घंटी बजाने की परंपरा का पालन किया जाता है। घंटी की ध्वनि नकारात्मक ऊर्जा को तोड़ने का काम करती है। इसकी कंपन से वहां मौजूद नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। संभव हो तो पुराने फर्नीचर और सामान को फिर से पेंट करवा दें। नया रंग उस वस्तु को नई पहचान देने और पुरानी ऊर्जा को खत्म करने का काम करता है। वास्तु गुरु की सलाह जब आप ये उपाय कर रहे हों, तो मन में ये प्रार्थना करें 'मैं इस सामान को पुरानी दुख भरी यादों से आज़ाद करता हूं और इसे नया प्यार और शांति के साथ अपना रहा हूं।'  

वास्तु विज्ञान के अनुसार घर के कोनों का सही उपयोग बढ़ाता है सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि

वास्तु विज्ञान के अनुसार, घर की दीवारें और उनके कोने ऊर्जा के सबसे बड़े केंद्र होते हैं. यदि ये कोने खाली, अंधेरे या गंदे हों, तो वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है. इन कोनों में नकारात्मकता बढ़ने लगती है. जिस तरह शरीर में रक्त का संचार रुकने से बीमारी होती है, वैसे ही कोनों का वास्तु बिगड़ने से घर में कलह और कंगाली आती है. आइए जानते हैं कि कोनों को कैसे सजाएं कि वे आपके लिए सौभाग्य खींचने वाले चुंबक बन जाएं. ईशान कोण उत्तर-पूर्व का कोना खाली रखना सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है. यहां ऊर्जा सबसे शुद्ध होती है, इसलिए यहां मंदिर स्थापित करें या जल से भरा कलश रखें.  इससे घर में सकारात्मक विचारों का संचार होता है.  बच्चों की बुद्धि तेज होती है. नैऋत्य कोण दक्षिण-पश्चिम कोना घर के मुखिया का स्थान है.  इसे खाली छोड़ने से आत्मविश्वास में कमी आती है. यहां भारी सामान या ठोस सजावटी वस्तुएं रखने से जीवन में स्थिरता आती है, इससे घर का नेतृत्व मजबूत बना रहता है. आग्नेय कोण दक्षिण-पूर्व का कोना अग्नि का स्थान है. इसे खाली या ठंडा रखने से घर के सदस्यों में आलस्य बढ़ता है. यहाँ एक लाल बल्ब, किचन या तांबे की वस्तु रखने से उत्साह बना रहता है. इससे आर्थिक तंगी दूर होती है. उत्तर दिशा उत्तर दिशा का कोना खाली रहने पर धन संचय में बाधा आती है. यहां लक्ष्मी-कुबेर की प्रतिमा या हरे पौधे लगाने से आय के नए रास्ते खुलते हैं. यह कोना जितना व्यवस्थित रहेगा, व्यापार और नौकरी में उतनी ही वृद्धि होगी. वायव्य कोण उत्तर-पश्चिम कोना चंद्रमा और वायु से जुड़ा है. इसे खाली छोड़ने से मानसिक अशांति और पड़ोसियों से विवाद हो सकता है.  यहाँ कोई चलती हुई वस्तु (जैसे विंड चाइम) या सफेद शोपीस रखने से समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ता है.

“गर्मी में AC-कूलर और फ्रिज से जुड़े वास्तु नियम: गलत दिशा से हो सकता है धन और स्वास्थ्य पर असर”

गर्मी से राहत पाने के लिए हम AC और कूलर का सहारा तो लेते हैं, लेकिन वास्तु की अनदेखी हमें महंगी पड़ सकती है. वास्तु विज्ञान मानता है कि बिजली से चलने वाले ये उपकरण ऊर्जा का एक विशेष चक्र बनाते हैं. यदि इन्हें सही दिशा न मिले, तो यह सकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर देते हैं, जिससे घर में बिना वजह कलह और धन की हानि होने लगती है. अगर आप भी इस गर्मी में खुद को और अपनी जेब को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो इन उपकरणों को रखने से पहले वास्तु के ये नियम जरूर जान लें. एसी (AC) और कूलर वास्तु विज्ञान की दृष्टि से देखें तो एसी और कूलर का सीधा संबंध वायु और अग्नि के संतुलन से है. चूंकि ये बिजली से चलते हैं, इसलिए इनमें अग्नि तत्व है और चूंकि ये हवा देते हैं, इसलिए इनमें वायु तत्व भी समाहित है. सबसे उत्तम दिशा: एसी लगाने के लिए उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) दिशा को सबसे श्रेष्ठ माना गया है.  चूँकि यह वायु की ही दिशा है, इसलिए यहां लगा एसी घर में शीतलता के साथ-साथ मानसिक शांति भी लाता है. दूसरा विकल्प: आप इसे दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में भी लगवा सकते हैं, क्योंकि यह बिजली के उपकरणों का प्राकृतिक स्थान माना जाता है. यहाँ भूलकर भी न लगाएं: एसी को कभी भी पश्चिम दिशा की दीवार पर न टांगें.  माना जाता है कि इस दिशा में लगा एसी सुख-सुविधाओं पर फिजूलखर्ची बढ़ाता है और घर की बरकत को धीरे-धीरे खत्म कर देता है. टपकता पानी है खतरे की घंटी: ध्यान रखें कि आपके एसी से पानी का रिसाव (Leakage) न हो रहा हो.  वास्तु के अनुसार, टपकता हुआ पानी आर्थिक नुकसान और घर के सदस्यों में स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत होता है. रेफ्रिजरेटर (Fridge): आज के दौर में फ्रिज को हम अन्नपूर्णा का आधुनिक रूप मान सकते हैं, क्योंकि यह हमारे भोजन को सुरक्षित और ताजा रखता है. इसकी गलत दिशा न केवल खाने की गुणवत्ता बल्कि घर के सदस्यों की सेहत को भी सीधे तौर पर प्रभावित करती है. उत्तम स्थान: वास्तु के अनुसार फ्रिज रखने के लिए पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा सबसे उत्तम है. दरवाजे का नियम: फ्रिज को इस तरह रखें कि उसका दरवाजा खोलते समय उसका मुख हमेशा पूर्व (East) की ओर हो. पूर्व दिशा से आने वाली सकारात्मक ऊर्जा भोजन की सात्विकता और शुद्धता को बनाए रखती है. ईशान कोण से दूरी: फ्रिज को कभी भी उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में न रखें. यह कोना पूजा-पाठ और ध्यान के लिए समर्पित होता है; यहां भारी मशीन रखने से घर की उन्नति रुक सकती है. दीवार से सटाकर न रखें: फ्रिज को कभी भी दीवार से एकदम चिपकाकर नहीं रखना चाहिए. ऊर्जा का प्रवाह निर्बाध बना रहे, इसके लिए फ्रिज और दीवार के बीच कम से कम एक फीट की दूरी जरूर रखें.

बुद्ध पूर्णिमा 2026: घर में बुद्ध की मूर्ति रखने का सही तरीका और महत्व

 आज बुद्ध पूर्णिमा का बड़ा ही पावन दिन है. आज ही के दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ, उन्हें ज्ञान मिला और आज ही उन्होंने निर्वाण भी प्राप्त किया. दुनिया भर में लोग आज के दिन को शांति और भाईचारे के प्रतीक के रूप में मनाते हैं. ऐसे में बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर घर में बुद्ध की मूर्ति लाना बहुत शुभ माना जाता है. लेकिन घर में बुद्ध की मूर्ति लगाते वक्त ध्यान रखना जरूरी है कि यह सिर्फ सजावट की चीज़ नहीं है, बल्कि घर में एक सकारात्मक ऊर्जा और सुकून लेकर आती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बुद्ध की हर मूर्ति का अपना एक खास मतलब होता है? आज इस खास मौके पर चलिए जानते हैं कि आपको अपने घर के लिए कौन सी बुद्ध प्रतिमा चुननी चाहिए और उसे रखने का सही तरीका क्या है. बुद्ध की अलग-अलग मुद्राएं: किसका क्या है मतलब? बुद्ध की हर प्रतिमा में उनके हाथों की स्थिति (मुद्रा) एक अलग संदेश देती है. इसलिए अपनी जरूरत के हिसाब से सही मूर्ति चुनना बेहद जरूरी है. ध्यान बुद्ध (Meditating Buddha): अगर आप चाहते हैं कि घर में शांति रहे और आपका मन काम में लगे, तो पद्मासन में बैठे बुद्ध की यह मूर्ति बेस्ट है. इसे घर के किसी शांत कोने या पूजा घर में रखें. अभय बुद्ध (Protection Buddha): इस मूर्ति में बुद्ध का दाहिना हाथ उठा हुआ होता है. यह आशीर्वाद और सुरक्षा का प्रतीक है.  अगर आपको डर लगता है या आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है, तो इसे घर के मुख्य द्वार के पास रखें. भूमिस्पर्श बुद्ध (Earth Touching Buddha): इसमें बुद्ध का हाथ ज़मीन को छू रहा होता है. यह मुद्रा अटूट विश्वास और सच्चाई को दर्शाती है. यह ज्ञान की तलाश करने वालों के लिए बहुत शुभ है. लेटे हुए बुद्ध (Reclining Buddha): यह मूर्ति बुद्ध के निर्वाण काल को दर्शाती है. यह आंतरिक शांति और सद्भाव का प्रतीक है.  इसे अपने लिविंग रूम में इस तरह रखें कि उनका चेहरा दाईं  ओर हो. वरद मुद्रा (Medicine Buddha): इसमें बुद्ध का हाथ नीचे की ओर खुला होता है. अगर घर में कोई बीमार रहता है या आप अच्छी सेहत चाहते हैं, तो यह प्रतिमा उपचार और करुणा का प्रतीक मानी जाती है. बुद्ध सिर या बुद्ध प्रतिमा (Buddha Bust/Head Statue): बुद्ध का सिर या बस्ट प्रतिमा उनके अपार ज्ञान और बुद्धत्व  को दर्शाती है.  यह हमें हमेशा याद दिलाती है कि शांति की शुरुआत हमारे दिमाग और सोच से होती है. कहाँ रखें: अगर आपके पास छोटी बुद्ध हेड प्रतिमा है, तो इसे किसी मेज या वेदी पर रख सकते हैं.  वहीं, अगर आप बड़ी प्रतिमा ला रहे हैं, तो इसे अपने घर या ऑफिस के हॉल के बीचों-बीच एक सेंटरपीस के तौर पर लगाएं. यह न केवल माहौल को सुंदर बनाती है, बल्कि वहाँ आने-जाने वालों को शांति का अहसास भी कराती है.  कैसी होनी चाहिए मूर्ति की बनावट ? आप मूर्ति कहाँ रख रहे हैं, उसके हिसाब से सही धातु या चीज़ का चुनाव करें. धातु : घर के अंदर के लिए पीतल या तांबे की मूर्तियाँ सबसे शुभ मानी जाती हैं. पत्थर : अगर आप बालकनी या बगीचे  में बुद्ध को स्थापित करना चाहते हैं, तो पत्थर की मूर्ति ही चुनें. लकड़ी : प्राकृतिक अहसास और घर के माहौल को हल्का रखने के लिए लकड़ी की मूर्तियाँ बेहतरीन होती हैं. वास्तु का रखें ध्यान: कहाँ रखें और कहाँ नहीं? मूर्ति को घर में स्थापित करते समय इन 3 बातों का गांठ बांध लें. ऊंचाई पर रखें: बुद्ध को कभी भी सीधे ज़मीन पर न रखें.  उन्हें हमेशा आंखों के स्तर पर किसी ऊंची टेबल, स्टैंड या वेदी पर ही जगह दें. सही दिशा: मूर्ति का चेहरा हमेशा पूर्व  दिशा की ओर होना चाहिए.  अगर संभव न हो, तो इसे घर के मुख्य द्वार की तरफ रखें ताकि सकारात्मक ऊर्जा अंदर आए. इन जगहों से बचें: भूलकर भी बुद्ध की प्रतिमा को बेडरूम, बाथरूम या किचन में न रखें.  उन्हें हमेशा साफ-सुथरी और शांत जगह पर ही रखें.

वास्तु शास्त्र: घर का फर्श भी तय करता है भाग्य, गलत रंग से बढ़ सकता है वास्तु दोष

रसोई, किचन, बेडरूम, ड्रॉइंग रूम और यहां तक कि मकान का फर्श भी वास्तु दोष के लिए बहुत रिस्पॉन्सिबल होता है. (Photo: ITG) वास्तु के शुभ और अशुभ परिणामों का असर उसमें रहने वाले लोगों पर ही पड़ता है. फिर चाहे मकान अपना हो या फिर किराए का. घर की हर दिशा में वास्तु मौजूद है. रसोई, किचन, बेडरूम, ड्रॉइंग रूम और यहां तक कि मकान का फर्श भी वास्तु दोष के लिए बहुत रिस्पॉन्सिबल होता है. आचार्य कमल नंदलाल कहते हैं कि घर का फर्श इंसान की तरक्की और बर्बादी दोनों के लिए जिम्मेदार हो सकता है. इसलिए घर के फर्श को कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए. ज्योतिषविद ने बताया कि आजकल लोग घरों में फ्लोर बनाने के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. लोग फ्लोर बनाने के लिए सेरेमिक टाइल्स या ग्रेनाइट मार्बल का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि फ्लोर पर मार्बल का इस्तेमाल आदमी को नुकसान दे सकता है. दरअसल, मार्बल को फर्श पर लगाने से चंद्रमा छठे भाव में प्रभाव छोड़ने लगता है जो अपने आप में वास्तु दोष क्रिएट करता है. इस तरह का वास्तु दोष आपके जीवन में न्यूरो से जुड़ी समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है. डार्क कलर के फर्श का जादू ज्योतिषविद ने बताया कि घर के फर्श पर कभी भी सफेद रंग का फ्लोर न बिछाएं. इस तरह का फर्श इंसान को आसमान से जमीन पर ला सकता है. वास्तु के दृष्टिकोण से गहरे हरे रंग का फर्श सबसे उत्तम होता है. यह बुध ग्रह का प्रतीक होता है. काल पुरुष सिद्धांत के अनुसार छठे भाव का कारक ही बुध है. इसके अलावा आप काले, नीले या भूरे रंग का फर्श भी बनवा सकते हैं. किस दिशा में बनवाएं कौन सा फर्श? वास्तु के अनुसार, घर की उत्तर-पूर्व दिशा में भूरे रंग का फर्श बनवाना चाहिए. यहां बृहस्पति स्थिति को बैलेंस रखते हैं. घर की पूर्व दिशा में हमेशा काले रंग का फर्श बनवाना चाहिए. क्योंकि यह शनि को छठे या सातवें भाव में रखकर सूर्य को बलवान बनाता है. दक्षिण-पूर्व दिशा की बात करें तो यहां गहरे नीले रंग का फर्श बनवाना चाहिए. दक्षिण दिशा में काले रंग का फर्श बनवाना चाहिए. इससे शनि और मंगल की स्थिति ठीक रहती है. दक्षिण-पश्चिम दिशा में नीले या भूरे रंग का फर्श बनवाना चाहिए. पश्चिम दिशा में ग्रे या हल्के ब्राउन कलर का फर्श बनवाना चाहिए. जबकि उत्तर दिशा में डार्क ग्रीन कलर का फर्श बनवाना चाहिए. इससे इंसान के लाइफस्टाइल में सुधार बना रहता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार रहता है. छत पर हमेशा ग्रे और तह खानों में डार्क ब्राउन या नीले रंग का फ्लोर बनवाना चाहिए.

वास्तु शास्त्र: छाया वेध और कोण वेध से घर-व्यापार पर पड़ सकता है नकारात्मक असर

घर या किसी भी व्यवसायिक स्थान, दुकान पर किसी भी वस्तु की छाया आना दोषपूर्ण होता है। घर पर किसी भी टॉवर, वृक्ष या धार्मिक स्थल में बने ऊंचाई की छाया पड़ती है तो ऐसे में घर में रहने वाले या व्यवसायिक स्थल पर काम करने वालों को पर्याप्त धन लाभ होते हुए भी नित नई-नई परेशानियों और तनावों का सामना करना पडता है। वास्तुशास्त्र के नियमों को मानें तो छाया वेध के कारण घर में आकस्मिक घटनाएं घटने की सम्भावनाऐं बढ़ जाती हैं, यही छाया वेध व्यवसाय स्थल पर होने से वहां कार्य करने वालों को भी तनाव में रखता है, जिससे लाभ की अपेक्षा घाटे की सम्भावनाऐं बढ़ जाती हैं। कुल मिलाकर छाया वेध से घर व व्यवसायिक मालिक के लिए रोग, धन-यश नाशक दरिद्रजनक स्थिति होती है, अतः घर या दुकान खरीदते समय इस बात पर अवश्य ध्यान दें कि कहीं आपके घर, दुकान पर किसी की छाया तो नहीं पड़ रही। कोण वेध- कोण वेध भी वास्तु शास्त्र के निमयों के अनुसार अनिष्टकारक होता है, जैसे दुकान या व्यवसाय स्थल के प्रवेश द्वार के ठीक सामने अन्य किसी इमारत का कोना आ जाता है, उसे कोण वेध कहते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए प्रवेश द्वार को परिवर्तित कर देना चाहिए और यदि ऐसा करना संभव न हो तो द्वार को गोलाई युक्त करवा देने से भी कोण वेध कम हो जाता है। द्वार वेध- द्वार संबंधी किसी भी रुकावटे या बाधा, असुविधा या विकृति को द्वार वेध कहा जाता है। यह अक्सर हानि, दुख और अपयश का कारण बनता है। यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि समस्त द्वार खुलते और बंद होते समय भूमि में रगड़, किसी प्रकार की आवाज, उपयोग करते समय भारी होना, कठोर होना या तेज गति से खुलना बंद होना द्वार वेध होता है, इससे प्रगति, सुख, व्यवसाय मार्ग के रास्ते अवरोधित हो जाते हैं, अतः समस्त प्रकार के वेध अवरोध से बचना चाहिए।