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सिलेंडर के पीछे पॉलिथीन रखना बन सकता है आर्थिक और मानसिक संकट का कारण

अक्सर हम अपनी रसोई किचन को बाहर से तो चकाचक रखते हैं, लेकिन सिलेंडर के पीछे की  छोटी सी जगह को स्टोर रूम समझ लेते हैं. हम अक्सर सिलेंडर के पीछे कई चीजें ठूंस देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी सी आदत घर की सुख-शांति को भंग कर सकती है, यहां तक की आपका बैंक बैलेंस जीरो हो सकता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह लापरवाही न केवल धन की हानि कराती है, बल्कि बड़े संकट को भी न्योता देती है. सिलेंडर के पीछे पॉलिथीन रखना क्यों है भारी भूल? 1. राहु और मंगल का खतरनाक मेल वास्तु में गैस चूल्हा और सिलेंडर अग्नि (मंगल) के प्रतीक हैं.  वहीं, प्लास्टिक और कचरा राहु का प्रतीक माना जाता है. जब आप सिलेंडर के पास या उसके पीछे पॉलिथीन और कबाड़ रखते हैं, तो मंगल और राहु का मेल होता है. इससे घर में अचानक गुस्सा, लड़ाई-झगड़े और मानसिक तनाव बढ़ने लगता है. 2. लक्ष्मी के आने का रास्ता रुक जाता है रसोई को मां अन्नपूर्णा का वास माना जाता है. अग्नि देव के स्थान के आसपास गंदगी या रद्दी जमा होने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है. बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि जिस रसोई में सिलेंडर के पास कचरा होता है, वहां पैसा पानी की तरह बहने लगता है. 3. सेहत पर पड़ता है बुरा असर रसोई में अग्नि का स्थान जितना साफ रहेगा, घर के सदस्यों की सेहत उतनी ही अच्छी रहेगी.  सिलेंडर के पीछे की गंदगी से घर में नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर घर की महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है. ये चीजें लाती है मुसीबत झाड़ू: वास्तु शास्त्र में झाड़ू को लक्ष्मी का रूप माना जाता है, लेकिन इसे रखने के खास नियम हैं.  झाड़ू का काम गंदगी साफ करना है और सिलेंडर (अग्नि) का काम पोषण देना है. जब आप झाड़ू को अग्नि के स्थान पर रखते हैं, तो घर की बरकत भी जलने लगती है.  माना जाता है कि चूल्हे या सिलेंडर के पास झाड़ू रखने से घर के मुखिया पर कर्ज बढ़ता है. यह स्थिति घर में पैसा टिकने नहीं देती.  झाड़ू पैरों में आने वाली चीज है, जबकि रसोई पूजनीय है. इन दोनों को एक साथ रखना मां अन्नपूर्णा का अनादर माना जाता है. पुराने कपड़े या रद्दी: सिलेंडर के पीछे अक्सर हम बेकार पड़े बोरे, पुराने पोंछे या अखबार , पॉलिथीन की रद्दी ठूंस देते हैं. वास्तु में फटे-पुराने कपड़े और रद्दी राहु और शनि की नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हैं.  अग्नि के पास इनका होना घर में कलह (झगड़े) पैदा करता है. बिना वजह परिवार के सदस्यों में चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है. जूते-चप्पल: कई बार हम स्टोर रूम या सिलेंडर वाली जगह को इग्नोर करते हैं और वहां पुराने जूते-चप्पल उतार देते हैं.  जूते-चप्पल बाहर की नकारात्मक ऊर्जा और धूल-मिट्टी लेकर आते हैं. रसोई जैसे पवित्र स्थान पर, जहाँ हमारा भोजन बनता है, वहां इन्हें रखना बीमारियों को न्योता देना है.  वास्तु के अनुसार, रसोई में जूते-चप्पल होने से घर का भाग्य कमजोर होता है. यह घर के सदस्यों के सम्मान और सफलता में कमी लाता है.  पैर और जूते शनि से जुड़े हैं. इन्हें मंगल (अग्नि) के स्थान पर रखना आपके बनते हुए कामों को बिगाड़ सकता है. सुरक्षा का भी है बड़ा खतरा वास्तु को एक पल के लिए किनारे भी रख दें, तो सुरक्षा के लिहाज से यह जानलेवा हो सकता है. गैस सिलेंडर से हल्की सी भी लीकेज होने पर ये पॉलिथीन और कागज आग को तेजी से पकड़ सकते हैं. हवा के आने-जाने का रास्ता रुकने से सिलेंडर के आसपास गर्मी बढ़ सकती है, जो किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है. क्या करें? रसोई घर में गैस चूल्हा (अग्नि तत्व) दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) में रखा जाना सबसे शुभ और उत्तम माना जाता है. आज ही सिलेंडर के पीछे और आसपास की जगह को खाली करें.वहां जमी धूल-मिट्टी को साफ करें.कोशिश करें कि सिलेंडर वाली जगह हवादार हो.

घर की अलमारियों का सही उपयोग और दिशा से जुड़ा वास्तु प्रभाव

अक्सर हम अपने घर में जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तरह की अलमारियां रखते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार इन अलमारियों का असर हमारी जिंदगी पर भी पड़ता है. अलमारियां सिर्फ सामान रखने की जगह नहीं होती हैं, बल्कि ये बचत, सुरक्षा और सुख-समृद्धि का प्रतीक भी मानी जाती हैं. माना जाता है कि घर की अलग-अलग अलमारियों का संबंध अलग-अलग ग्रहों से होता है. अगर इन्हें सही तरीके से रखा जाए और व्यवस्थित रखा जाए, तो जीवन में सुख, समृद्धि और स्थिरता बनी रहती है. 1. कपड़ों की अलमारी कपड़ों की अलमारी का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है. अगर यह अलमारी साफ और व्यवस्थित रहती है, तो घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है. – कपड़ों की अलमारी में कपड़े ही रखें. – इसमें रुपया-पैसा या गहने रखने से बचें, क्योंकि मान्यता है कि इससे धन टिकता नहीं है. – जरूरी दस्तावेज या महत्वपूर्ण कागज इसमें रखे जा सकते हैं. – अलमारी हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें. 2. रसोई की अलमारी रसोई की अलमारी का संबंध सूर्य ग्रह से माना जाता है. इसमें बर्तन, मसाले और रसोई का सामान रखा जाता है. – रसोई की अलमारी को हमेशा साफ रखें. – मसाले और अनाज अलग-अलग रखें. – कांच और धातु के बर्तन अलग रखने चाहिए. – कोशिश करें कि रसोई की अलमारी पूरी तरह बंद न हो, हल्के पारदर्शी दरवाजे वाली अलमारी बेहतर मानी जाती है. – महीने में कम से कम एक बार इसकी अच्छी तरह सफाई जरूर करें. मान्यता है कि अगर रसोई की अलमारी अस्त-व्यस्त रहती है, तो घर में तनाव और छोटी-छोटी परेशानियां बढ़ सकती हैं. 3. पैसे की अलमारी जिस अलमारी में पैसा, गहने और कीमती सामान रखा जाता है, उसका संबंध बृहस्पति ग्रह से माना जाता है. – धन की अलमारी घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है. – अलमारी का दरवाजा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर खुलना अच्छा माना जाता है. – धन की अलमारी का रंग काला नहीं होना चाहिए. – अलमारी पर लाल रंग का स्वस्तिक बनाना शुभ माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर घर की अलमारियां सही दिशा में और व्यवस्थित रखी जाएं, तो इससे घर में सुख, शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है.

घर में सुख-शांति और धन वृद्धि के लिए 9 शुभ पौधों का सही दिशा में चयन जरूरी

 भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर शांति की तलाश करते हैं.  इसी शांति की तलाश लिए कई लोग अपने घरों में कई सारे पौधे भी लगाते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में वे यह भूल जाते हैं कि हर पौधा शुभ नहीं होता. वास्तु शास्त्र के अनुसार, प्रकृति में हर समस्या का समाधान है, बशर्ते आपका चुनाव सही हो. अक्सर हम बिना सोचे-समझे कोई भी पौधा घर के किसी भी कोने में रख देते हैं, जबकि वास्तु में दिशाओं का चयन ही सबसे महत्वपूर्ण है. गलत दिशा में रखा गया एक कीमती पौधा भी आपके जीवन में तनाव पैदा कर सकता है, वहीं सही दिशा में लगा एक छोटा सा पौधा आपकी बंद किस्मत के ताले खोल सकता है. अगर आप भी घर में सुख, शांति और धन की आवक बढ़ाना चाहते हैं, तो इन 9 पौधों को उनकी सही दिशा में जरूर लगाए. 1. तुलसी: हिंदू धर्म और वास्तु में तुलसी को हरिप्रिया कहा गया है. यह पौधा जिस घर के आंगन में हरा-भरा रहता है, वहां वास्तु दोष टिक नहीं पाता. इसे हमेशा उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखें.  यह न केवल ऑक्सीजन का भंडार है, बल्कि मानसिक शांति के लिए भी अनिवार्य है. 2. मनी प्लांट जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह शुक्र ग्रह से संबंधित है. वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, इसे घर के दक्षिण-पूर्व कोण (आग्नेय कोण) में लगाने से धन का ठहराव बढ़ता है.  ध्यान रहे, इसकी बेलें जमीन को नहीं छूनी चाहिए, उन्हें हमेशा ऊपर की ओर चढ़ाएं. 3. शमी: शनि देव और महादेव को प्रिय शमी का पौधा न्याय और विजय का प्रतीक है. इसे घर के मुख्य द्वार पर इस तरह लगाएं कि बाहर निकलते समय यह आपके दाहिने हाथ की ओर हो. यह व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है. 4. लकी बैंबू: फेंगशुई और वास्तु दोनों में बांस के पौधे को बेहद भाग्यशाली माना गया है. यह सकारात्मक ऊर्जा (Chi) को अपनी ओर खींचता है. इसे घर के लिविंग रूम के पूर्व या उत्तर-पूर्व कोने में रखने से सुख-समृद्धि और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है. 5. अपराजिता: नीले फूलों वाली अपराजिता की बेल को साक्षात लक्ष्मी का रूप माना जाता है.  इसे उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाने से घर में बरकत बनी रहती है. इसके फूलों को शनिवार या शुक्रवार को विष्णु जी पर चढ़ाना भी अत्यंत शुभ है. 6. स्नेक प्लांट: आज के प्रदूषण भरे दौर में स्नेक प्लांट एक वरदान है. यह रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है. वास्तु के अनुसार, इसे घर के दक्षिण या पूर्व कोने में रखने से यह मानसिक तनाव और इलेक्ट्रॉनिक रेडिएशन को खत्म कर शांति का माहौल बनाता है. 8. जेड प्लांट: इसे फ्रेंडशिप ट्री भी कहा जाता है. छोटे गोल पत्तों वाला यह पौधा ऑफिस डेस्क (उत्तर दिशा) या घर के मुख्य प्रवेश द्वार के दाईं ओर रखना चाहिए. यह धन लाभ के नए अवसरों को आकर्षित करता है . 9. पीस लिली: अगर घर में तनाव रहता है, तो पीस लिली को लगाएं. यह पौधा आपसी कलह को खत्म कर प्रेम को बढ़ावा देता है. इसे पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना सबसे उत्तम है, खासकर बेडरूम में. पौधों को सिर्फ लगाना काफी नहीं है, उनकी देखभाल भी जरूरी है.  अगर कोई पौधा सूख जाए, तो उसे तुरंत हटा दें, क्योंकि मुरझाए पौधे तरक्की में बाधा बन सकते हैं.

मच्छरों से बचाव के लिए वास्तु अनुसार लगाएं ये पौधे, मिलेगा प्राकृतिक सुरक्षा कवच

गर्मी के साथ मच्छरों का आतंक भी बढ़ जाता है. इनसे छुटकारा पाने के लिए अक्सर हम केमिकल वाले कॉइल्स, जहरीले स्प्रे या बिजली वाले मैट जलाकर खुद को और अपने परिवार को धुएं के घेरे में कैद कर लेते हैं, जो हमारी सेहत के लिए खतरनाक हैं. पर क्या आपने कभी सोचा है कि इसका समाधान वास्तु शास्त्र में है. वास्तु शास्त्र और आयुर्वेद का एक अद्भुत संगम है एंटी-मॉस्किटो प्लांट्स. अगर इन खुशबूदार और गुणकारी पौधों को घर की सही दिशा में जगह दी जाए, तो ये न केवल मच्छरों को रोकते हैं, बल्कि घर के वास्तु दोष मिटाकर तरक्की के बंद दरवाजे भी खोल देते हैं.   1. सिट्रोनेला (Citronella) यह एक सुगंधित बारहमासी घास है,गर्मी में चलने वाली गर्म हवाओं के साथ मच्छर घर में घुसते हैं. सिट्रोनेला को घर की उत्तर-पश्चिम दिशा में रखें. यह दिशा वायु की है. यहां रखा सिट्रोनेला हवा को शुद्ध करता है. यह पौधा घर में घुसने वाले कीड़ों को प्रवेश द्वार पर ही रोक देता है. 2. पुदीना (Mint): गर्मी के मौसम में पुदीना ठंडक देता है. वास्तु के अनुसार इसे अपनी रसोई या डाइनिंग एरिया की पूर्व दिशा में रखें. पूर्व दिशा सूर्य की है. यहां पुदीना रखने से घर की ऊर्जा ताज़ा रहती है.  इसकी खुशबू से मच्छर और चींटियां रसोई से कोसों दूर रहते हैं. 3. रोजमेरी (Rosemary): रोजमेरी  तेज गर्मी और कड़ी धूप में खिलता है, ठीक एक कैक्टस की तरह. इसे घर की दक्षिण दिशा में मिट्टी के गमले में रखें. यह मच्छरों के लिए एक प्राकृतिक लक्ष्मण-रेखा का काम करता है. 5. कैटनिप (Catnip): अगर आप इसे पानी भरे कांच के बर्तन (मटका या वास) में उगा रहे हैं, तो इसे उत्तर दिशा में रखें. उत्तर दिशा धन और स्वास्थ्य की है. जल तत्व के साथ कैटनिप का मेल घर में समृद्धि तो लाता ही है मच्छरों को पनपने से भी रोकता है.  

गर्मी में घर को ठंडा और सकारात्मक रखने के लिए पर्दों के सही रंग चुनें

गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है. गर्मी का मौसम शुरू होते ही घर की खिड़कियां, छत, दरवाजे और कमरे तपने लगते हैं, जिनसे बचाव के लिए पर्दे लगाए जाते हैं. ये पर्दे गर्मी रोकने के साथ साथ घर में हल्की ठंडक भी बरकरार रखते हैं. लेकिन, ये ठंडक पर्दे के रंग पर बहुत ही ज्यादा निर्भर करती है. पर्दे किसी भी घर का जरूरी हिस्सा होते हैं क्योंकि ये घर को सुंदर भी बनाते हैं और काम के भी होते हैं. जिस तरह से पर्दे सूरज की गर्मी रोकते हैं, उसी तरह वास्तु शास्त्र में भी पर्दे बहुत ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं. वास्तु के अनुसार, पर्दों का सही रंग चुनना बहुत विशेष माना गया है. सही रंग के पर्दे घर में अच्छी व पॉजिटिव ऊर्जा लाते हैं और नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखते हैं. कमरे की सही दिशा और उसके उपयोग के अनुसार पर्दे चुनने से जल, अग्नि, वायु और आकाश जैसे तत्वों में बैलेंस बना रहता है. इससे घर का माहौल अच्छा रहता है, रिश्ते मजबूत होते हैं और शांति बनी रहती है. सही रंग के पर्दे लगाकर आप अपने घर को सकारात्मक ऊर्जा से भर सकते हैं. वहीं, गहरे रंग के पर्दे घर में तनाव स्थिति पैदा करते हैं जिसका सीधा सीधा असर पैसे की स्थिति पर पड़ता है. वास्तु के हिसाब से पर्दों के रंग का असर घर के माहौल और हमारी सोच पर पड़ता है. तो आइए जानते हैं हर रंग का मतलब. – सफेद पर्दे वास्तु शास्त्र के मुताबिक, सफेद रंग शांति का प्रतीक माना जाता है. इस रंग के पर्दे घर में भी शांति और साफ-सुथरा माहौल बनाते हैं. यह पर्दे पूजा घर में और लिविंग रूम में लगाए जा सकते हैं. – हल्के नीले पर्दे इस रंग के पर्दे मन को शांत करते हैं, गुस्सा और टेंशन कम करते हैं. बेडरूम और पढ़ाई वाले कमरों में इन्हें लगाना ठीक रहता है. – हरे पर्दे इस रंग के पर्दे ताजगी और पॉजिटिव फीलिंग देते हैं. घर में अच्छा माहौल और एनर्जी लाते हैं. पीले पर्दे वास्तु शास्त्र के अनुसार, पीले रंग का पर्दा खुशी और अच्छा मूड बनाते हैं. बच्चों के कमरे और स्टडी रूम के लिए बढ़िया हैं. नारंगी पर्दे इस रंग के पर्दे लोगों के बीच बातचीत और मेलजोल बढ़ाते हैं. खाने वाले कमरे में अच्छे रहते हैं. गुलाबी पर्दे इस रंग के पर्दे प्यार और अपनापन बढ़ाते हैं. बेडरूम के लिए यह रंग बहुत ही अच्छा माना जाता है. क्रीम या बेज पर्दे इस रंग के पर्दे बहुत शांत और सादा माहौल देते हैं. घर को आरामदायक बनाते हैं. लाल पर्दे लाल पर्दे ज्यादा एनर्जी देते हैं, लेकिन इन्हें संभलकर लगाना चाहिए क्योंकि ये गुस्सा या तनाव भी बढ़ा सकते हैं. लैवेंडर पर्दे इस रंग के पर्दे दिमाग को शांत करते हैं और आराम देते हैं. ध्यान या पढ़ाई के लिए अच्छे हैं. ग्रे पर्दे इस रंग के फोकस बढ़ाते हैं, लेकिन घर में ज्यादा इस्तेमाल करने से माहौल थोड़ा फीका लग सकता है. भूरे पर्दे सुरक्षा और स्थिरता का एहसास देते हैं. बेडरूम में अच्छे रहते हैं. घर की ये छोटी-छोटी चीजें, जैसे पर्दों का रंग, सौफे का रंग, सभी आपके घर के माहौल पर असर डालती हैं. सही रंग धीरे-धीरे आपके मन और सोच को प्रभावित करता है. सही जगह पर सही रंग के पर्दे लगाने से अच्छी नींद आती है, तनाव कम होता है और मन भी शांत रहता है. जब घर का माहौल सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है, तो जिंदगी भी आसान और खुशहाल लगने लगती है. जिससे पैसा भी आने लगता है और आर्थिक स्थिति अच्छी हो जाती है.

वास्तु शास्त्र: घर में छिपकली का दिखना शुभ या अशुभ? जानिए संकेत

गर्मियों के मौसम शुरू होने के साथ ही घर की दीवारों पर छिपकलियां नजर आने लगती हैं. जिन्हें देखकर अक्सर लोग बहुत ही ज्यादा डर जाते हैं. बड़े बुजुर्गों की मानें तो घर की दीवार पर मोर का पंख लगाने से चिपकली चली जाती है. लेकिन, चिपकली को कुछ लोग शुभ संकेत बोलते हैं और कुछ लोग अशुभ. लेकिन, यह इस बात पर निर्भर करता है कि छिपकली का रंग क्या है? दरअसल, काली रंग की छिपकली को लोग अशुभ मानते हैं. हल्के पीले रंग की छिपकली शुभ मानी जाती है. वास्तु शास्त्र में भी इस बात का जिक्र है कि घर में चिपकली का आना शुभ संकेत भी हो सकता है. क्योंकि छिपकली को मां लक्ष्मी का स्वरूप ही माना जाता है. कहा जाता है कि अगर घर में हल्के पीले रंग की छिपकली है तो यह मां लक्ष्मी के आगमन का संकेत है और घर में सुख-समृद्धि आने वाली है. तो आइए ज्योतिर्विद प्रीतिका मजूमदार जी से जानते हैं कि घर में छिपकली दिखने के कौन से शुभ संकेत और कौन से अशुभ होते हैं. दीवार और फर्श पर रेंगती छिपकली का दिखना वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर छिपकली दीवार पर चलती हुई दिखाई दे, तो इसे अच्छे समाचार माना जाता है. वहीं, अगर फर्श पर रेंगती हुई दिखे, तो इसे धन लाभ से जोड़ा जाता है. नौकरी या बिजनेस करने वालों के लिए भी इसे तरक्की और लाभ का संकेत माना जाता है. जो लोग नौकरी की तलाश में हैं, उनके लिए यह नए अवसर मिलने का इशारा हो सकता है. अनाज वाली पर जगह पर छिपकली का दिखना वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर छिपकली अनाज रखने की जगह, जैसे चावल या गेहूं के डिब्बे के पास दिखे, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है. ऐसी स्थिति में घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होने और धन-धान्य में वृद्धि के संकेत माने जाते हैं. अगर दो छिपकलियां एक साथ दिखाई दें, तो इसे पुराने दोस्तों से मुलाकात या रिश्तों में सुधार का संकेत माना जाता है. पति-पत्नी के बीच चल रही समस्याएं भी धीरे-धीरे सुलझने लगती हैं. काली छिपकली का दिखना वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर घर में काली रंग की छिपकली नजर आए, खासकर मंदिर या पूजा वाले स्थान के आसपास, तो कुछ लोग इसे अच्छा संकेत नहीं मानते हैं. क्योंकि काला रंग नकारात्मकता फैलाता है. जो यह संदेश देता है कि घर में कुछ परेशानियां आने वाली हैं. ऐसे में लोग सतर्क रहने और घर के माहौल को सकारात्मक बनाए रखने की सलाह भी दी जाती है. वहीं दूसरी तरफ, सामान्य तौर पर पूजा स्थान के पास छिपकली का दिखना कई मान्यताओं में शुभ भी माना जाता है. खासकर अगर यह शुक्रवार के दिन दिखाई दे, तो इसे मां लक्ष्मी की कृपा से जोड़कर देखा जाता है. लोगों का मानना है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है और आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है. शरीर के इन अंगों का छिपकली का गिरना होता है शुभ – वास्तु शास्त्र के अनुसार, कमर के बीच में अगर छिपकली गिरे तो पैसों से जुड़ा लाभ होता है. – पेट पर छिपकली गिरना भी शुभ कहलाता है. – नाभि पर छिपकली गिरने से इच्छाएं पूरी होती हैं. – दाहिनी हाथ पर छिपकली गिरे तो धन लाभ मिलता है. लेकिन, बाएं हाथ पर छिपकली गिरने से संपत्ति से जुड़ा कोई नुकसान हो सकता है. – दाहिनी आंख पर छिपकली गिरने का मतलब किसी से मुलाकात होगी. बाईं आंख पर छिपकली गिरने का मतलब होता है बड़ी हानि होना.

घर में न लगाएं ये पौधे वास्तु के अनुसार अशुभ पौधे

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में रखे पेड़-पौधे सिर्फ सजावट का सामान नहीं होते, बल्कि वे घर की ऊर्जा (Energy) पर गहरा असर डालते हैं.  जहाँ कुछ पौधे घर में सौभाग्य और खुशहाली लाते हैं, वहीं कुछ पौधे ऐसे भी हैं जिन्हें घर की सीमा के अंदर लगाना बहुत अशुभ माना जाता है. गलत पौधों का चुनाव न सिर्फ आपकी तरक्की रोक सकता है, बल्कि परिवार में झगड़े और पैसों की तंगी का कारण भी बन सकता है. अगर आपने भी अनजाने में ये पौधे लगाए हैं, तो इनके बारे में जान लेना जरूरी है. भूलकर भी न लगाएं ये अशुभ पौधे: गुलाब के पौधे को छोड़कर, घर के अंदर या मुख्य दरवाजे पर कभी भी कांटेदार पौधे जैसे कैक्टस नहीं लगाने चाहिए. वास्तु के अनुसार, ये पौधे घर के माहौल में  तनाव पैदा करते हैं. इससे परिवार के सदस्यों के बीच आपसी तालमेल बिगड़ता है और कड़वाहट बढ़ती है. बोनसाई के पौधे: बोनसाई के पौधे दिखने में तो बहुत सुंदर लगते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार इन्हें घर में रखना अच्छा नहीं माना जाता.  बोनसाई पौधों को बढ़ने से रोका जाता है ताकि वे छोटे रहें. माना जाता है कि इन्हें घर में रखने से परिवार के सदस्यों की प्रगति और करियर में भी रुकावटें आने लगती हैं.   इमली का वृक्ष: घर के आंगन या मुख्य परिसर के पास इमली का पेड़ होना अच्छा नहीं माना जाता. लोक मान्यताओं और वास्तु के अनुसार, इमली के पेड़ पर नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. इसे घर के पास लगाने से परिवार के लोगों में डर, घबराहट और मानसिक बेचैनी बढ़ सकती है. दुग्ध युक्त पौधे: ऐसे पौधे जिनकी शाखाओं को तोड़ने पर दूध जैसा सफेद तरल निकलता है (जैसे मदार या आक), घर में लगाने से बचना चाहिए.  ये पौधे धन की हानि का कारण बन सकते हैं और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालते हैं.   मुरझाए या सूखे पौधे: घर में कभी भी सूखे हुए पौधे न रखें.  वास्तु के अनुसार, सूखे पौधे शोक और नकारात्मकता का प्रतीक होते हैं, जो घर की जीवंतता और सकारात्मक ऊर्जा को पूरी तरह सोख लेते हैं.

घर में इन पौधों को लगाना माना जाता है अशुभ, जानें कारण

घर में लगे पौधे सिर्फ सजावट का हिस्सा नहीं होते, ये हमारे आसपास की ऊर्जा को प्रभावित भी करते हैं। कई लोग हरियाली बढ़ाने के लिए तरह-तरह के पौधे लगा लेते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार हर पौधा घर के लिए शुभ नहीं होता। कुछ पौधे ऐसे भी माने जाते हैं, जो अनजाने में नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकते हैं और घर के माहौल को प्रभावित कर देते हैं। मान्यता है कि ऐसे पौधे परिवार में तनाव, रुकावट और आर्थिक परेशानियों का कारण बन सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि सही जानकारी के साथ ही पौधों का चयन किया जाए। आइए जानते हैं किन पौधों को घर में लगाने से बचना चाहिए। कैक्टस और कांटेदार पौधे वास्तु के अनुसार, गुलाब को छोड़कर अन्य कांटेदार पौधों को घर में रखना उचित नहीं माना जाता। कहा जाता है कि ऐसे पौधे घर में तनाव और मतभेद बढ़ा सकते हैं। साथ ही ये तरक्की में भी बाधा डालते हैं। बोन्साई पौधा बोन्साई देखने में आकर्षक जरूर लगता है, लेकिन इसे घर में रखना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि यह पौधा जीवन में प्रगति को सीमित कर देता है और करियर की गति को धीमा कर सकता है। इमली का पेड़ इमली का पौधा या पेड़ घर के भीतर या आसपास लगाना भी अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव रहता है, जिससे घर में परेशानी बढ़ सकती है। दूध निकलने वाले पौधे ऐसे पौधे जिनसे दूध जैसा तरल पदार्थ निकलता है, उन्हें भी घर में लगाने से बचना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, ये पौधे आर्थिक तंगी और कर्ज बढ़ने का कारण बन सकते हैं। सूखे या मुरझाए पौधे घर में सूखे या खराब हो चुके पौधों को रखना भी अच्छा नहीं माना जाता। ऐसे पौधे नकारात्मकता का संकेत होते हैं और जीवन में रुकावटें ला सकते हैं। इसलिए इन्हें तुरंत हटा देना चाहिए। घर में कौन से पौधे लगाना शुभ होता है? वास्तु के अनुसार, कुछ पौधे सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। जैसे तुलसी, मनी प्लांट, जेड प्लांट, स्नेक प्लांट और शमी का पौधा। ये पौधे घर में सुख-शांति और खुशहाली लाने में सहायक माने जाते हैं।  

घर की सीलन और वास्तु दोष: जानिए कैसे प्रभावित होती है आर्थिक स्थिति

 घर की सीलन (नमी) को अक्सर लोग छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, सीलन सिर्फ दीवारों के लिए ही नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित कर सकती है. माना जाता है कि घर में बढ़ती नमी नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती है, जिससे धन हानि, खर्चों में बढ़ोतरी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस घर में लगातार सीलन रहती है, वहां मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है. खासतौर पर घर की उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) और उत्तर दिशा में सीलन आना शुभ नहीं माना जाता है. यह दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी होती है, इसलिए यहां सीलन आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है. सीलन का वास्तु में महत्व वास्तु शास्त्र के मुताबिक, सीलन की वजह से घर में बदबू, फंगस और गंदगी भी बढ़ती है, जो सकारात्मक ऊर्जा को कम करती है. इससे घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और काम में मन नहीं लगता है. धीरे-धीरे यह स्थिति आर्थिक नुकसान को न्योता देने लगती है. अगर आपके घर में कहीं भी दीवारें गीली रहती हैं या पेंट उखड़ने लगा है, तो इसे तुरंत ठीक कराना चाहिए. घर में अच्छी धूप और हवा का आना जरूरी है, क्योंकि इससे नमी कम होती है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. इसके अलावा, पानी के लीकेज को नजरअंदाज न करें और समय-समय पर घर की सफाई और मरम्मत करते रहें. नमक या कपूर का उपयोग भी नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मददगार माना जाता है. तो आइए जानते हैं कि सीलन आने से घर को कौन से वास्तु दोष लगते हैं. 1. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) का दोष अगर घर के उत्तर-पूर्व हिस्से में सीलन रहती है, तो इसे सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है. यह दिशा देवताओं और धन-दौलत की मानी जाती है. यहां सीलन होने से धन रुकावट, मानसिक तनाव और निर्णय लेने में कमजोरी आ सकती है. 2. उत्तर दिशा में नमी (धन दोष) उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा कहा जाता है. इस जगह सीलन आने से आर्थिक नुकसान, बचत में कमी और अचानक खर्च बढ़ सकते हैं. 3. दीवारों का गीला और खराब होना (ऊर्जा दोष) घर की दीवारों पर फंगस, पपड़ी या बदबू आना घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. इससे घर में कलह, आलस्य और काम में रुकावट आने लगती है. 4. दक्षिण-पश्चिम में सीलन (स्थिरता दोष) यह दिशा स्थिरता और रिश्तों से जुड़ी होती है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में नमी होने से रिश्तों में अस्थिरता और करियर में उतार-चढ़ाव आ सकता है. घर में सीलन आने से कौन से ग्रह होते हैं प्रभावित? वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में सीलन का संबंध मुख्य रूप से चंद्रमा और शुक्र ग्रह से माना जाता है. चंद्रमा (Moon) – चंद्रमा जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है. घर में सीलन आने से चंद्रमा कमजोर हो सकता है, जिससे मानसिक तनाव, बेचैनी और नींद की समस्या बढ़ सकती है. शुक्र (Venus)- शुक्र देवता सुख-सुविधा, वैभव और सुंदरता का कारक है. सीलन से शुक्र प्रभावित होता है, जिससे आर्थिक परेशानी, घर की रौनक कम होना और वैवाहिक जीवन में तनाव की समस्याएं आ सकती हैं. क्या करें उपाय? – घर में जहां भी लीकेज या सीलन है, उसे तुरंत ठीक कराएं. – घर में धूप और हवा का सही इंतजाम रखें. – नमक या कपूर रखकर नमी और नकारात्मक ऊर्जा कम करें. – उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा साफ और सूखा रखें.

विवाह में देरी का कारण हो सकता है वास्तु दोष, इन दिशाओं पर जरूर दें ध्यान

बढ़ती उम्र के कारण विवाह में देरी हो रही है. या फिर रिश्ते तो आ रहे हैं, लेकिन पसंद-नापसंद का झंझट हो रहा है. विवाह की बात बनते-बनते बिगड़ जाती है. यदि आपके घर में भी किसी के साथ ऐसी समस्या है तो अपने घर की कुछ विशेष दिशाओं पर ध्यान दें. इन दिशाओं का वास्तु दोष घर में मंगल कार्य, विवाह, अच्छे रिश्ते मिलने में दिक्कत पैदा कर सकता है. वैसे आजकल के सिंगल फैमिली के दौर में विवाह से संबंधित दिक्कतें आम हो गई हैं. पूर्व दिशा यदि आपकी बच्चे के लिए विवाह के रिश्ते नहीं आ रहे हैं तो घर में पूर्व दिशा को देखें कि यहां कोई वास्तु दोष तो नहीं. पूर्व दिशा आपके जीवन में सही रिश्तों को जोड़ने की दिशा है. यहां पीला रंग, टॉयलेट और रसोई का होना जीवन से ऐसे रिश्तों को दूर कर सकता है जो आपके लिए बेहतर हैं. ऐसे में लोग रिश्तों के लिए प्रयास तो करते हैं, लेकिन अच्छे रिश्ते आसानी से नहीं मिलते हैं. अच्छे और मनचाहे रिश्तों तक संपर्क ही नहीं हो पाता है. ऐसा घर की पूर्व दिशा में वास्तु दोष के कारण भी हो सकता है. इस दिशा में हरा रंग का होना अच्छा है.   दक्षिण-पूर्व दिशा आपने कई बार प्रयास किए, लेकिन घर में मंगल कार्य नहीं हो पाते हैं. जब भी सोचो कुछ न कुछ पेंच फंस जाता है. ऐसे में आपके घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में वास्तु दोष हो सकता है. ये विवाह ही नहीं, किसी भी प्रकार का मंगल कार्य होने में दिक्कत पैदा कर सकता है. दक्षिण-पूर्व दिशा में किसी भी प्रकार से गड्ढा, टॉयलेट, नीला या काला रंग वास्तु दोष पैदा करता है. इस दिशा में वास्तु दोष आपको धन संबंधी समस्या भी देता है. पैसे के कारण मंगल कार्य और विवाह में बाधा आती है. इनकम का फ्लो बिगड़ सकता है. दक्षिण-पश्चिम दिशा यह विवाह के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिशा है. विवाह होने के लिए और विवाह टिका रहने के लिए भी दक्षिण-पश्चिम दिशा का वास्तु रहित होना जरूरी है. यह पितरों की दिशा है. इस दिशा का क्षेत्र कभी डाउन नहीं होना चाहिए. किसी भी प्रकार से अंडरग्राउंड वॉटर टैंक, जमीन में गड्ढा भी इस दिशा में वास्तु दोष पैदा करता है. यहां रसोई-टॉयलेट और हरा-नीला-काला रंग वास्तु दोष पैदा करता है. इस दिशा का वास्तु दोष जीवन में स्थिरता नहीं रहने देता है. पृथ्वी तत्व की यह दिशा विवाह होने में आ रही दिक्कतों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. विवाह के बाद जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में समस्याएं रहती हैं, उन्हें भी अपने घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा के वास्तु दोष को अवश्य देखना चाहिए.