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सास-बहू के रिश्ते में सुधार के लिए वास्तु टिप्स, घर में बढ़ेगी शांति और प्यार

सास बहू का रिश्ता खट्टी मिठी नोकझोंक का है। यह रिश्ता सिर्फ प्यार और तकरार का संगम है। सास बहु की बात बात पर लड़ाई झगड़ा अधिक होता है तो घर में भी नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार के बाकी सदस्यों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सास बहू के रिश्ते में अगर ज्यादा अनबन रहती है तो वास्तु के कुछ सरल उपाय अपनाकर आप रिश्तों को बेहतर बना सकते हैं। आइए जानते हैं सास बहु के रिश्ते को बेहतर बनाने की वास्तु टिप्स। सास बहु के रिश्ते में सुधार लाने की वास्तु टिप्स 1) वास्तु गुरु मान्या बताती है कि अगर सास बहू के रिश्ते में रोज रोज लड़ाई झगड़ा होता है और क्लेश आदि ज्यादा रहता है तो अपने घर की किचन की दिशा चेक करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के उत्तर पूर्व दिशा यानि ईशान कोण में रसोई नहीं होनी चाहिए। रसोई का ईशान कोण में होना वास्तु दोष माना जाता है। ऐसे में सास बहू की लड़ाई की वजह यह भी हो सकती है। अगर आप अपना किचन नहीं बदल पा रहे हैं तो अपने चूल्हे के नीचे पीले रंग का जैसलमेर स्टोन रखें ताकि फायर एलिमेंट बैलेंस हो सकें। 2) अगर घर दक्षिण पूर्व दिशा ज्यादा गर्म रहती है या वहां पर कोई बैलेंस नहीं रहता है तो घर की महिलाओं में कलह क्लेश बना रहता है। ऐसे में इस एरिया में आप हल्का लाल या नारंगी कलर करवा लें। 3) दक्षिण-पूर्व की पूर्व दिशा को भी वास्तु में महत्वपूर्ण दिशा कहा गया है। अगर यह दिशा डिस्टर्ब होती है तो व्यक्ति को तनाव और चिंता बनी रहती है। साथ ही व्यक्ति के मन में हमेशा बेचैनी भी बनी रहती है। ऐसे में इस दिशा को ठीक रखने के लिए यहां पर नीला या काला, लाइट क्रीम या हरे रंग का प्रयोग करें। 4) सास बहू के रिश्तों में सुधार के लिए और ठंडक बनाकर रखने के लिए बहु को अपनी सास को चांदी की पायल तोहफे में देनी चाहिए। चांदी चांद का प्रतीक मानी जाती है यह रिश्तों में शांति बनाकर रखती है। 5) इसके अलावा अगर बेटा बहू का कमरा दक्षिण पूर्व दिशा में है तो उन्होंने चावल का सेवन करना चाहिए यह रिश्तों में ठंड़क बनाता है। क्योंकि, वास्तु में दक्षिण पूर्व दिशा को एग्रेशन की दिशा बताया गया है। 6) सास बहू में अगर अधिक लड़ाई रहती है तो बहु को अपनी सास के हाथों से थोड़ा चावल लेने चाहिए और उन चावलों को अपने कमरे की उत्तर दिशा में रखना चाहिए। ऐसा करने से आपको सास से आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख शांति बनी रहती है। साथ ही सास का आशीर्वाद भी बना रहता है और सुख शांति रहती है। 7) अपने घर के उत्तर पूर्व दिशा को हमेशा साफ रखें। ताकि रिश्तों में पारदर्शिता बनी रहे। इसके अलावा सास ससुर का कमरा वास्तु के अनुसार, दक्षिण पश्चिम दिशा में होना चाहिए। यह दिशा रिश्तों में स्थिरता लेकर आती है। 8) वास्तु शास्त्र के अनुसार, फैमिली फोटो दक्षिण पश्चिम दिशा में ही लगाएं। ऐसे करने से परिवार के सभी सदस्यों के बीच रिश्ता मजबूत होता है। 9) वास्तु के अनुसार घर के अंदर कांटेदार पौधा बिल्कुल भी न लगाएं। इनकी जगह बांस का पौधा या तुलसी का पौधा लगाएं। 10) अपने घर की रसोई में काले रंग की टाइल्स और काले रंग का पत्थर प्रयोग करने से बचें क्योंकि, काला रंग नकारात्मकता लाता है। जिसका असर रिश्तों पर भी देखने को मिलता है।

घर में पानी के मटके रखने के वास्तु नियम: सुख-समृद्धि और धन की बढ़ोतरी के लिए

गर्मी के मौसम में भारतीय घरों में सदियों से पानी के मटकों का इस्तेमाल होता रहा है। मिट्टी के घड़े में रखा हुआ पानी सेहत के लिए अमृत के समान माना जाता है। वास्तु शास्त्र में भी पानी के मटके को घर में रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। मिट्टी का घड़ा घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मदद करता है। अगर वास्तु के अनुसार पानी का मटका रखा जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और आर्थिक परेशानियों से छुटकारा मिलेगा। आइए वास्तु गुरु मान्या जी से जानते हैं कि पानी के मटकों के घर में रखना के क्या वास्तु नियम हैं। घर में पानी का मटका रखने की सही दिशा वास्तु शास्त्र के अनुसार, पानी का मटका हमेशा घर की उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। घर के ईशान कोण को सबसे शुभ माना जाता है। ईशान कोण को धन के देवता कुबेर का स्थान माना जाता है। ऐसे में घर की इस दिसा में पानी का मटका रखना सुख-समृद्धि लाता है और आर्थिक परेशानियों को दूर करता है। इस दिशा में न रखें पानी का मटका पानी के मटके को कभी घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं रखना चाहिए। इसे वास्तु दोष माना जाता है और यह आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है। इसके अलावा पानी के मटके को बाथरूम के पास या सीढ़ियों के नीचे रखना भी अशुभ माना जाता है। मटका कभी भी खाली न रखें वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, पानी के मटके को कभी भी खाली नहीं रखना चाहिए। इसे हमेशा पानी से भरा रखना चाहिए। पानी से भरा हुआ मटका घर में सुख-समृद्धि का कारक माना जाता है और घर में कभी धन की कमी नहीं होती है। मटके के आस-पास साफ सफाई बनाए रखनी चाहिए। घर में टूटा हुआ घड़ा न रखें घर में टूटा हुआ या चटका हुआ मटका रखना अशुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार, खंडित मटका नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और घर में आर्थिक परेशानियां बढ़ने लगती है। ऐसे में इसे तुरंत हटा देना चाहिए। मटके से पानी का टपकना धन की बर्बादी का कारण माना जाता है। मटका खरीदने का शुभ दिन वास्तु के अनुसार, मिट्टी का घड़ा घर में सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। बुधवार और गुरुवार को पानी का मटका खरीदना सबसे शुभ फल देने वाला होता है। इसके अलावा मंगलवार को शनिवार के दिन मटका नहीं खरीदना चाहिए। वहीं, वैशाख मास में घड़ा खरीदना और दान करना दोनों ही शुभ माने जाते हैं। सबसे जरूरी बात सबसे जरूरी बात नया मटका घर लाने के बाद उसको साफ करने बेहद जरूरी है। सबसे पहले उसपर गंगा जल का छिड़काव करें और साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद पीने का पानी भरें। ध्यान रखें की मटके में पहली बार भरा हुआ पानी पौधों में डाल दें। इसके बाद मटके को भरकर पीने के लिए इस्तेमाल करें।

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में विंड चाइम लगाने के सही तरीके और दिशा

वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर में विंड चाइम्स लगाना बहुत शुभ होता है। इसे घर में पॉजिटिव एनर्जी बढ़ाने और नेगेटिविटी को दूर करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। जिसके प्रभाव से घर में सुख और उन्नति को बढ़ावा मिलता है। अगर विंड चाइम्स को वास्तु अनुसार, सही तरीके से लगाया जाए तो इससे घर में बरकत और शांति बनी रहती है। वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, विंड चाइम घर में लगाने से पहले इसके धातु, सही दिशा, स्थान, आवाज और रॉड की संख्या पर भी ध्यान देना आवश्यक होता है। आइए विस्तार से जानें विंड चाइम लगाने के वास्तु टिप्स। विंड चाइम की दिशा और धातु का रखें ख्याल वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, घर में विंड चाइम्स लगाने से पहले इस बात पर ध्यान अवश्य देना चाहिए की वह किस धातु का है। फिर, उसी के अनुसार सही दिशा में विंड चाइम लगाना चाहिए।     माना जाता है कि अगर विंड चाइम लोहे या पीतल का हो, तो उसे पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में लगाना शुभ होता है। इसे भाग्य में वृद्धि और करियर के लिए अच्छा माना जाता है।     अगर आप घर में लकड़ी या बांस से बने विंड चाइम्स लगाने के बारे में सोच रहे हैं, तो इसे पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। ऐसा करने से घर में स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है।     वास्तुशास्त्र के अनुसार, सिरेमिक वाले विंड चाइम्स को घर की दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से आसपास का माहौल भी सुखद रहता है। विंड चाइम में लगी रॉड की संख्या पर भी दें ध्यान वास्तु गुरु मान्यता बताती हैं कि विंड चाइम्स में लगी रॉड की संख्या का घर और आसपास के माहौल पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। अगर विंड चाइम में 6 या 8 रॉड हों तो इसे शुभ माना जाता है। यह करियर में उन्नति और भाग्य में वृद्धि करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। वहीं, 5 रॉड होने पर इसे घर से नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष को दूर करने में प्रभावशाली माना जाता है। अगर विंड चाइम में 9 रॉड हों, तो इससे परिवार के बीच आपसी तालमेल, प्रेम और खुशियां बनी रहती हैं। विंड चाइम कहां लगाएं और कहां न लगाएं?     ​वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर में विंड चाइम लगाते समय स्थान पर ध्यान देना भी बेहद आवश्यक होता है। इसे हमेशा ऐसे स्थान पर लगाना चाहिए जहां हवा का फ्लो अच्छा बना रहता हो। ऐसे में आप विंड चाइम को घर की बालकनी, खिड़की या मेन दरवाजे के आसपास लगा सकते हैं।     कहां न लगाएं : माना जाता है कि भूलकर भी विंड चाइम को घर के मंदिर या किचन में नहीं लगाना चाहिए। साथ ही, इसके आसपास वाले स्थान पर भी विंड चाइम नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से घर की ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। विंड चाइम लगाते वक्त इन बातों का भी रखें ध्यान     वास्तु के अनुसार, विंड चाइम को कभी भी अपने बेड के ऊपर वाले स्थान पर नहीं लगाना चाहिए। साथ ही, इसके नीचे बैठना भी शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है।     विंड चाइम खरीदते समय इस बात का ख्याल जरूर रखें की इसकी आवाज मधुर और कानों को सुकून देने वाली होनी चाहिए। कभी भी तेज और कानों को चुभने वाले आवाज का विंड चाइम नहीं लेना चाहिए।     अगर आप घर में गृह क्लेश या नेगेटिविटी महसूस करते हैं, तो इसके लिए मुख्य द्वार के पास 5 रॉड वाला विंड चाइम लगाना चाहिए। ऐसा करना उत्तम माना जाता है और साथ ही, यह बरकत भी बढ़ाता है।  

बार-बार चाबी खोना सिर्फ आदत नहीं, जानिए वास्तु और मान्यताओं का संकेत

घर की चाबियां छोटी सी चीज़ हैं, लेकिन रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सबसे ज़रूरी भी. फिर भी कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें हर दिन चाबी ढूंढनी पड़ती है कभी टेबल पर, कभी बैग में, तो कभी घर के किसी कोने में. अगर आपके साथ भी ऐसा बार-बार हो रहा है, तो इसे सिर्फ लापरवाही मानकर नजरअंदाज न करें. कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह आपकी आदतों के साथ-साथ घर की ऊर्जा और जीवन की स्थिति से जुड़ा संकेत भी हो सकता है. धार्मिक मान्यताओं में क्या माना जाता है? धार्मिक दृष्टि से बार-बार चाबी खोना सामान्य बात नहीं माना जाता. इसे जीवन में चल रही अव्यवस्था या अस्थिरता का संकेत माना जाता है. चाबियां सुरक्षा और नियंत्रण का प्रतीक होती हैं, इसलिए उनका बार-बार खोना इस बात की ओर इशारा कर सकता है कि व्यक्ति अपने कामों या फैसलों पर पूरी पकड़ नहीं बना पा रहा है.  कुछ मान्यताओं में इसे नकारात्मक ऊर्जा या ग्रहों के असंतुलन से भी जोड़कर देखा जाता है, खासकर तब जब घर में चीज़ें लगातार खोने लगें. वास्तु शास्त्र के अनुसार, चाबियों के लिए एक तय और सही स्थान होना बेहद जरूरी है.     चाबियां उत्तर या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है.     घर के मुख्य दरवाजे के पास दीवार पर की-होल्डर लगाना अच्छा रहता है.     चाबियां हमेशा ऐसी जगह रखें जो आसानी से दिखे और पहुंच में हो.     ध्यान रखें कि चाबियाँ जमीन के बहुत पास या गंदी जगह पर न हों.  इन गलतियों से बचें     चाबियां किचन, गैस स्टोव या बाथरूम के पास न रखें     बेड या तकिए के नीचे चाबी रखना अशुभ माना जाता है     चाबियों को अलग-अलग जगहों पर बिखरा कर न रखें     पुरानी, टूटी या बेकार चाबियाँ घर में जमा न करें सिर्फ धार्मिक या वास्तु कारण ही नहीं, बल्कि बार-बार चाबी खोना आपकी दिनचर्या, तनाव और फोकस की कमी का भी संकेत हो सकता है.

घर में मकड़ी के जाले सिर्फ गंदगी नहीं, वास्तु में माने जाते हैं अशुभ संकेत

गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका है. इस मौसम में घरों के कोनों या छिपी हुई जगहों पर मकड़ी के जाले तेजी से नजर आने लगते हैं. गर्म और सूखे मौसम में मकड़ियां ज्यादा दिखने लगती हैं, जिससे घर के कोनों, दीवारों और छत पर जाले बनना आम हो जाता है. अक्सर लोग इन्हें मामूली गंदगी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, मकड़ी के ये जाले नकारात्मक ऊर्जा का संकेत भी माने जाते हैं. यही बात हम अक्सर अपने बड़े-बुजुर्गों से भी सुनते आए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के अलग-अलग स्थानों पर लगे मकड़ी के जाले जीवन पर अलग-अलग तरह से असर डालते हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में. बेडरूम में मकड़ी का जाला वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर आपके बेडरूम में मकड़ी का जाला है, तो इसे तुरंत साफ कर देना चाहिए. बेडरूम में जाले होने से दांपत्य जीवन में भी तनाव बढ़ सकता है. इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली कम होती है और रिश्तों में खटास आ सकती है. छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने की संभावना भी बढ़ जाती है. घर के कोनों में मकड़ी का जाला अक्सर घर के ऊंचे कोनों में मकड़ी के जाले लग जाते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि वे आसानी से साफ नहीं हो पाते हैं. लेकिन वास्तु के अनुसार, घर के कोनों में जाले होना आर्थिक परेशानियों का संकेत माना जाता है. यह धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति को कमजोर कर सकता है, इसलिए समय-समय पर इन्हें साफ करना जरूरी है. मंदिर में मकड़ी का जाला घर के मंदिर को साफ-सुथरा रखना बहुत जरूरी होता है. कई बार सफाई की अनदेखी के कारण मंदिर में भी मकड़ी के जाले लग जाते हैं. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, मंदिर में जाला लगना दुर्भाग्य का संकेत माना जाता है. इसलिए रोजाना पूजा से पहले मंदिर की साफ-सफाई करना बेहद जरूरी है. किचन में मकड़ी का जाला किचन घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जहां अन्नपूर्णा विजारती हैं और भोजन तैयार किया जाता है. अगर यहां मकड़ी का जाला लगा हुआ है, तो यह सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है. वैज्ञानिक रूप से भी यह सही नहीं है, क्योंकि जाले और गंदगी से बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे घर के लोग बीमार पड़ सकते हैं. इसलिए किचन की नियमित सफाई बेहद जरूरी है. क्या करें उपाय? वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर आपके घर में मकड़ी के जाले लगते हैं, तो रोजाना उनकी सफाई करें और उन्हें तुरंत कूड़े में फेंक दें. रोज या हफ्ते में 2-3 बार झाड़ू-पोंछा करें. छत, कोनों और फर्नीचर के पीछे भी सफाई करें. पुराने जाले तुरंत हटा दें. मकड़ी के जाले हटाने के लिए आप चाहें तो घर में रोजाना धूप और दीपक जला सकते हैं, इस एक उपाय को करने से नकारात्मक ऊर्जा और कीट-पतंगे दूर रहते हैं.

मुख्य द्वार से जुड़े वास्तु टिप्स: सही दिशा और नियम से घर में बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि

वास्तुशास्त्र में मुख्य द्वार को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इसका सही स्थान और दिशा में होना अति आवश्यक होता है। क्योंकि, मेन गेट से होते हुए ही घर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। साथ ही, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मुख्य द्वार से ही माता लक्ष्मी का भी आगमन होता है। ऐसे में वास्तु दोष से बचाव व घर में पॉजिटिविटी के लिए घर का मेन गेट बनवाते समय वास्तु की कुछ बातों और नियमों का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। साथ ही, इसके आसपास मौजूद चीजों का प्रभाव भी घर और परिवार के सदस्यों पर पड़ता है और वास्तु दोष का कारण बन सकता है। ऐसे में आइए विस्तार से जानें मुख्य द्वार किस दिशा में होना चाहिए और इससे जुड़े जरूरी वास्तु नियम। मुख्य द्वार दिशा वास्तु अनुसार वास्तु गुरु मान्या और वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार उत्तर दिशा में होना चाहिए। अगर ऐसा संभव न हो तो आप पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा में भी मेन गेट बनवा सकते हैं। इस दिशा को मुख्य द्वार के लिए सबसे उत्तम माना गया है। वास्तु गुरु बताती हैं कि मेन गेट उत्तर दिशा 5 डिग्री से 346 डिग्री पर, पूर्व दिशा 90 डिग्री पर, दक्षिण दिशा 180 डिग्री पर और पश्चिम दिशा 270 डिग्री पर होना सबसे उत्तम होता है। इसका सकारात्मक प्रभाव परिवार पर भी देखने को मिलता है। मुख्य द्वार से जुड़े वास्तु नियम     घर के मुख्य द्वार के पास किसी भी प्रकार का कचरा या कबाड़ नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से इसका प्रतिकूल प्रभाव घर के अंदर के माहौल पर पड़ सकता है।     माना जाता है कि भूलकर भी मुख्य द्वार के आसपास भारी सामान नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा, दरवाजे के पीछे, मुख्य द्वार के रास्ते में या आसपास भी किसी भी प्रकार की भारी वस्तु न रखें।     वास्तुशास्त्र के अनुसार, मेन गेट के ठीक सामने बिजली का खंभा या किसी भी प्रकार का पिलर नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, इसके आसपास बड़ा पेड़ होना भी शुभ नहीं माना जाता है। ये घर में सकारात्मक ऊर्जा को प्रवेश करने में बाधा का कारण बन सकते हैं।     इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि घर का मुख्य द्वार कभी भी रोड के टी-पॉइंट पर न हो। ऐसे स्थान की ऊर्जा बहुत अधिक और सीधी होती है जो घर के अंदर की शांति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।     नाली, गटर या जहां गंदा पानी इकट्ठा होता हो, ऐसे स्थानों के सामने या आसपास मुख्य द्वार नहीं बनवाना चाहिए। ऐसे स्थानों के पास मेन गेट मौजूद होने से पॉजिटिव एनर्जी अंदर प्रवेश नहीं कर पाती है।     मुख्य द्वार के पास आप तुलसी, मनी प्लांट जैसे शुभ और खूबसूरत दिखने वाले पौधे लगा सकते हैं। साथ ही, मेन गेट के दोनों तरफ साफ-सफाई का विशेष ध्यान जरूर रखना चाहिए। यह सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।     घर के मेन गेट पर गोल्डन कलर का बल्ब जलाकर रखना शुभ माना जाता है। इससे आसपास का माहौल सकारात्मक बना रहता है। साथ ही, शाम के समय मुख्य द्वार पर कभी भी अंधेरा नहीं रखना चाहिए।     वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, घर का मुख्य द्वार बनवाते समय इस बात का ख्याल जरूर रखें कि उसके ठीक सामने कोई शीशा न लगा हो। ऐसा होने से सकारात्मक ऊर्जा शीशे से टकरा कर वापस बाहर चली जाती है।     घर के मुख्य द्वार पर दो पल्ले वाला दरवाजा लगाना सबसे शुभ माना जाता है। साथ ही, आप गेट के पास लोबान जला सकते हैं जिससे वहां का माहौल आनंददायक बना रहे।     मुख्य द्वार बनवाते समय इस बात का ख्याल जरूर रखें की यह घड़ी की दिशा में यानी क्लॉक वाइज ही खुलना चाहिए। मुख्य द्वार से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण टिप्स अपने घर के मेन गेट बनवाते समय इस बात का ख्याल जरूर रखना चाहिए कि इसकी सीध में पूजा घर न हो। ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है। मुख्य द्वार के बिल्कुल सीध यानी सामने कभी भी रसोई घर नहीं बनवाना चाहिए। साथ ही, चूल्हा भी मेन गेट के सामने दिखना शुभ नहीं माना जाता है। वास्तु के अनुसार, कभी भी शौचालय या बाथरूम के सामने मेन गेट नहीं बनवाना चाहिए। ऐसा करना सही नहीं माना गया है। साथ ही, मुख्य द्वार के सामने सीढ़ियां भी नहीं होनी चाहिए।  

घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के आसान फेंगशुई उपाय

दिनभर की थकान और दफ्तर की भागदौड़ के बाद जब हम घर की दहलीज पर कदम रखते हैं, तो उम्मीद होती है कि वहां सुकून मिलेगा. लेकिन क्या कभी आपने ये महसूस किया है कि घर पहुंचते ही बिना वजह भारीपन, उदासी या चिड़चिड़ापन महसूस होने लगे? अगर हां, तो यह आपके घर का वास्तु या फेंगशुई दोष हो सकता है. अक्सर लोग फेंगशुई के नाम पर महंगे शो-पीस खरीदने लगते हैं, लेकिन असल में फेंगशुई ऊर्जा के सही संतुलन का नाम है. आइए जानते हैं कि कैसे आप अपनी जेब से एक चवन्नी खर्च किए बिना अपने आशियाने को खुशियों से भर सकते हैं. 1. कबाड़ को हटाएं फेंगशुई का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण नियम है सफाई.  रुकी हुई ऊर्जा अक्सर पुराने कबाड़, टूटे हुए सामान या लंबे समय से बंद पड़ी अलमारियों में जमा हो जाती है. यदि आपके घर में ऐसी चीजें हैं जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते, तो उन्हें हटा दें. खाली जगह का मतलब है नई ऊर्जा के लिए रास्ता बनाना. जैसे ही आप घर का कोना-कोना साफ करते हैं, आप खुद को हल्का और मानसिक रूप से शांत महसूस करेंगे. 2. ताजी हवा और प्राकृतिक रोशनी सूरज की रोशनी और ताजी हवा प्राकृतिक रूप से नकारात्मकता को नष्ट करती है. रोज सुबह कम से कम 20 मिनट के लिए अपने घर की खिड़कियां और दरवाजे जरूर खोलें. फेंगशुई में माना जाता है कि चलती हुई हवा ऊर्जा के प्रवाह को सुचारू बनाती है. अगर आपके घर के किसी कोने में हमेशा अंधेरा रहता है, तो वहां रोशनी की व्यवस्था करें ताकि ऊर्जा सही हो जाए. 3. मुख्य द्वार फेंगशुई के अनुसार, 'ची' यानी ऊर्जा मुख्य द्वार से ही घर में प्रवेश करती है. बिना खर्च किए इसे बेहतर बनाने के लिए बस अपने मुख्य द्वार को साफ रखें.  वहां रखे पुराने जूते-चप्पल हटा दें. ये सुनिश्चित करें कि दरवाजा खुलते समय आवाज न करे.  एक साफ और सुंदर प्रवेश द्वार न केवल मेहमानों को, बल्कि सुख-समृद्धि को भी आकर्षित करता है. 4. शीशों का सही इस्तेमाल आपके घर में मौजूद पुराने शीशे भी फेंगशुई का बड़ा टूल बन सकते हैं. बस उनकी दिशा बदलें.  यदि आपके घर के किसी खिड़की के बाहर हरियाली या सुंदर दृश्य है, तो उसके सामने शीशा लगाएं. इससे बाहर की सकारात्मक ऊर्जा परावर्तित  होकर घर के अंदर आएगी. ध्यान रहे, शीशा कभी भी मुख्य द्वार या बिस्तर के ठीक सामने न रखें, वरना यह ऊर्जा को वापस बाहर भेज सकता है या नींद में खलल डाल सकता है. 5. पानी और नमक घर की निगेटिविटी सोखने के लिए नमक सबसे सस्ता और असरदार तरीका है.  पोंछे के पानी में थोड़ा सा समुद्री नमक या सेंधा नमक मिलाकर घर की सफाई करें. इसके अलावा, बाथरूम या घर के अंधेरे कोनों में एक कटोरी में नमक भरकर रखें.  यह वातावरण की दूषित ऊर्जा को सोख लेता है.  हर हफ्ते इस नमक को बदल दें.  यह छोटा सा बदलाव घर के माहौल को काफी सकारात्मक बना देता है.

सुबह उठते ही आईना देखना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें वास्तु के नियम

 हममें से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि सुबह नींद खुलते ही सबसे पहले आईना देखते हैं. बालों को ठीक करना हो या बस चेहरा देखना, हमें लगता है इसमें बुरा क्या है? लेकिन वास्तु शास्त्र की मानें तो ये छोटी सी आदत आपके पूरे दिन को खराब कर सकती है.   चेहरे पर होती है रात भर की सुस्ती वास्तु कहता है कि जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारे शरीर में आलस और नकारात्मक ऊर्जा भरी होती है. आपने गौर किया होगा कि सुबह चेहरा थोड़ा सूजा हुआ और बुझा-बुझा सा दिखता है.  जैसे ही आप आईना देखते हैं, वो नकारात्मक तरंगें आपकी आंखों के जरिए वापस शरीर में चली जाती हैं. नतीजतन पूरा दिन भारीपन और चिड़चिड़ेपन में बीतता है.  खुद को देखने से अच्छा है ईश्वर को याद करना शास्त्रों में सुबह के समय को ब्रह्म मुहूर्त के आसपास का सबसे पवित्र समय माना गया है. धर्मग्रंथों के अनुसार, सुबह उठते ही सबसे पहले अपने इष्ट देव का स्मरण करना चाहिए या अपनी हथेलियों के दर्शन करने चाहिए. हथेलियों के दर्शन का रहस्य हथेलियों को देखते समय इस मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है. "कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥" इसका अर्थ है कि हाथ के अग्र भाग में माँ लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल भाग में भगवान विष्णु (या ब्रह्मा) का वास होता है. जब आप आईना देखते हैं, तो आप इस दैवीय ऊर्जा के बजाय अपनी शारीरिक माया से जुड़ जाते हैं, जिसे अध्यात्म में मोह-माया का प्रतीक माना गया है. बेड के सामने आईना? अगर आपके बेड के ठीक सामने ड्रेसिंग टेबल है और आपकी आंख खुलते ही सबसे पहले अपनी शक्ल दिखती है, तो ये वास्तु के हिसाब से बड़ा दोष है. धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि सोते समय हमारी आत्मा का एक सूक्ष्म अंश शरीर से बाहर विचरण करता है, और आईना उस ऊर्जा को भ्रमित कर सकता है.  इससे घर में तनाव बढ़ता है. तो फिर सुबह उठकर क्या करें? आईने को ढक दें: अगर बेडरूम में आईना है और उसे हटा नहीं सकते, तो रात को सोते समय उस पर एक साफ पर्दा या सफेद कपड़ा डाल दें. यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखने से रोकता है. धार्मिक चित्रों के दर्शन: अपने कमरे में ऐसी जगह पर भगवान, उगते हुए सूरज या चहचहाते पक्षियों की तस्वीर लगाएं जहाँ सुबह सबसे पहले आपकी नजर पड़े. शास्त्रों में इसे मंगल दर्शन कहा गया है. हथेलियां चूमकर दिन शुरू करें: बिस्तर छोड़ने से पहले अपनी हथेलियों को देखें, उन्हें अपने चेहरे पर फेरें. इससे हाथों की सकारात्मक ऊर्जा आपके शरीर में प्रवाहित होती है. चेहरा धोने के बाद ही देखें आईना: जब आप फ्रेश हो जाएं, नहा लें या कम से कम ठंडे पानी से आंखें धो लें, तब आईना देखना सुरक्षित माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि जल से शुद्ध होने के बाद शरीर का आभामंडल (Aura) स्वच्छ हो जाता है.

गर्मी में घर में सांप आने का कारण और वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके संकेत

तपती गर्मी और उमस के कारण जमीन के अंदर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे बचने के लिए सांप अक्सर ठंडी जगहों की तलाश में इंसानी बस्तियों या घरों का रुख करते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र में सांपों के आगमन को केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं माना जाता. इसे घर की ऊर्जा और वास्तु दोषों से जोड़कर देखा जाता है. क्या कहता है वास्तु शास्त्र? वास्तु के अनुसार, सांप का घर में आना राहु और केतु ग्रहों के प्रभाव को दर्शाता है. यदि आपके घर में राहु का दोष है, तो ऐसे जीव घर की ओर आकर्षित हो सकते हैं. विशेष रूप से घर का नैऋत्य कोण (South-West) यदि दूषित हो या वहां गंदगी रहती हो, तो यह राहु को सक्रिय करता है, जो सांपों के आगमन का कारण बन सकता है. इन दिशाओं से निकलना है खतरे की घंटी अगर सांप बार-बार घर की उत्तर-पश्चिम (Vayavya) या दक्षिण-पश्चिम दिशा से प्रवेश कर रहा है, तो यह घर में अस्थिरता और मानसिक तनाव का संकेत हो सकता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के नीचे दरारें होना या दहलीज का टूटा होना भी नकारात्मक ऊर्जा और रेंगने वाले जीवों को निमंत्रण देता है. पितृ दोष और कालसर्प दोष का संकेत पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सांपों का संबंध हमारे पूर्वजों से भी माना गया है. यदि किसी को सपने में बार-बार सांप दिखें या गर्मियों में अचानक घर के आंगन में सांप आ जाए, तो यह पितृ दोष या कुंडली में कालसर्प दोष का संकेत हो सकता है. यह इस बात की ओर इशारा करता है कि घर में किसी विशेष पूजा या शुद्धि की आवश्यकता है. वास्तु दोष दूर करने के उपाय गर्मियों में सांपों को घर से दूर रखने और वास्तु दोष को शांत करने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं: सफाई का महत्व: घर के ईशान कोण (North-East) को हमेशा साफ और खाली रखें. यहां कबाड़ जमा होने से राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है. सर्पगंधा का पौधा: घर के मुख्य द्वार के पास या बगीचे में सर्पगंधा या लेमन ग्रास का पौधा लगाएं. इनकी सुगंध से सांप दूर रहते हैं और वास्तु भी ठीक रहता है. चंदन की धूप: घर में नियमित रूप से चंदन की धूप या अगरबत्ती जलाएं. इसकी महक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. शिव उपासना: चूंकि सांप भगवान शिव के आभूषण हैं, इसलिए घर में महामृत्युंजय मंत्र का जाप या शिव चालीसा का पाठ करने से भय और दोष दोनों दूर होते हैं.

सूखी तुलसी भी बदल सकती है किस्मत, वास्तु के 3 चमत्कारी उपाय

 पारा 40 डिग्री के पार है, लू के थपेड़े और चिलचिलाती धूप ने न सिर्फ इंसानों का बुरा हाल कर रखा है, बल्कि घर के आंगन में लगी तुलसी भी इस तपिश को झेल नहीं पा रही है. लाख जतन के बाद भी अगर इस भीषण गर्मी में तुलसी सूख गई है, तो निराश होकर उसे फेंकने की गलती बिल्कुल न करें. वास्तु शास्त्र में माना गया है कि जो तुलसी चिलचिलाती धूप में सूख जाती है, उसकी सूखी लकड़ियों में भी चमत्कारिक शक्तियां होती हैं. ये सूखी लकड़ियां न केवल आपके घर की नकारात्मकता को सोख सकती हैं, बल्कि आर्थिक तंगी और वास्तु दोष जैसी समस्याओं के लिए रामबाण इलाज साबित हो सकती हैं. आइए जानते हैं कि इस भीषण गर्मी में सूखी हुई तुलसी की लकड़ियों के वो 3 अचूक उपाय, जो आपके जीवन में खुशहाली की ठंडी बयार ला सकते हैं. 1. मुख्य द्वार पर बांधें लकड़ी वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर घर में आए दिन क्लेश होता है या आपको लगता है कि घर को किसी की नजर लग गई है, तो सूखी तुलसी की छोटी सी लकड़ी उठाएं. इसे एक साफ लाल कपड़े में लपेटकर कलावा की मदद से घर के मुख्य द्वार पर बीचों-बीच लटका दें. माना जाता है कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. 2. तिजोरी में रखें एक टुकड़ा: खिंची चली आएंगी लक्ष्मी अगर कड़ी मेहनत के बाद भी पैसा हाथ में नहीं टिक रहा या फिजूलखर्ची बढ़ गई है, तो सूखी तुलसी की लकड़ी या उसकी जड़ का एक छोटा सा टुकड़ा लें.  इसे गंगाजल से पवित्र करके पीले कपड़े में बांध कर अपनी तिजोरी या धन रखने वाली अलमारी में रख दें.  मान्यता है कि यह उपाय धन को आकर्षित करता है . इससे कंगाली दूर होती है. 3. तुलसी दीप से प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. किसी भी शुभ तिथि या एकादशी के दिन जब आप घी का दीपक जलाएं, तो उसमें सूखी तुलसी की एक छोटी सी लकड़ी डाल दें. इसे तुलसी दीप कहा जाता है. ऐसा करने से घर के वास्तु दोषों का नाश होता है, रुके हुए काम बनने लगते हैं. भूलकर भी न करें ये गलती     तुलसी को हिंदू धर्म में पूजनीय माना गया है, इसलिए पौधा सूखने के बाद भी उसकी लकड़ियों का अपमान न करें.     इन्हें कभी भी गंदे हाथों से न छुएं.     लकड़ियों को इधर-उधर कचरे या नाली में न फेंकें.     उपाय करने के बाद बची हुई लकड़ियों को गमले की मिट्टी में ही दबा दें या पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें.