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बसंत पंचमी 2026: जानिए किस दिशा में करें मां सरस्वती की स्थापना, पढ़ाई-करियर में मिलेगा लाभ

वैदिक पंचांग के अनुसार, 23 जनवरी को बसंत पंचमी को मनाई जाएगी। यह दिन विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मां सरस्वती अवतरित हुई थीं। इसलिए इस तिथि पर बसंत पंचमी का पर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद लोग घरों में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि गलत दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने से साधक पूजा के पूर्ण फल की प्राप्ति से वंचित रहता है। इसलिए शुभ दिशा में मां सरस्वती की मूर्त स्थापित करनी चाहिए। साथ ही मूर्ति को घर लाने से पहले वास्तु शास्त्र के नियम के बारे में जरूर जान लें। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं किस मुद्रा में होनी चाहिए मां सरस्वती की मूर्ति और स्थापित करने की सही दिशा। ये हैं शुभ दिशा     वास्तु शास्त्र के अनुसार, मां सरस्वती की मूर्ति को स्थापित करने के लिए पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। इस दिशा में सरस्वती की मूर्ति को स्थापित कर पूजा करने से साधक को ज्ञान की प्राप्ति होती है और मां सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है।     इसके अलावा उत्तर पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति को स्थापित करने से धन में वृद्धि होती है और करियर में सफलता के मार्ग खुलते हैं।     सुख-समृद्धि में वृद्धि के लिए मां सरस्वती की मूर्ति को उत्तर दिशा में स्थापित कर सकते हैं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है और करियर और जॉब में सफलता मिलता है। किस मुद्रा में होनी चाहिए मूर्ति     बसंत पंचमी की पूजा के लिए कमल के फूल पर बैठी हुई मां सरस्वती मूर्ति की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस मुद्रा को एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है।     मां सरस्वती के चेहरे पर प्रसन्नता का भाव होना चाहिए। घर में उदास मुद्रा वाली मुद्रा नहीं रखनी चाहिए।     मां सरस्वती के दो हाथों में वीणा हो, जो संगीत और कला का प्रतीक माना जाता है।  

कहीं आप भी तो नहीं कर रहे झाड़ू से जुड़ी यह भूल? मां लक्ष्मी हो सकती हैं रुष्ट

 सनातन धर्म में झाड़ू का विशेष महत्व है। इसका संबंध मां लक्ष्मी और घर की स्वच्छता से है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, झाड़ू के द्वारा घर की दरिद्रता बाहर निकलती है और धन आगमन के मार्ग खुलते हैं। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में साफ-सफाई रहती है। वहीं, धन की देवी मां लक्ष्मी वास करती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, झाड़ू को घर की उत्तम दिशा में रखना चाहिए। झाड़ू से जुड़ी गलती करने से व्यक्ति को जीवन में कंगाली का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही मां लक्ष्मी की नाराजगी का सामान करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं कि घर की किस दिशा में झाड़ू रखनी चाहिए और इससे जुड़े नियम के बारे में। वास्तु शास्त्र में झाड़ू से जुड़े नियम के बारे में विस्तार से बताया गया है। वास्तु के अनुसार, झाड़ू को घर की उत्तम दिशा में रखने से आर्थिक स्थिति ठीक बनी रहती है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है, लेकिन झाड़ू को गलत दिशा में रखने से जातक को धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। किस दिशा में रखें झाड़ू? वास्तु के अनुसार, झाड़ू रखने के लिए पश्चिम दिशा को उत्तम माना जाता है, क्योंकि इस दिशा को धन और प्रसिद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिशा में झाड़ू को रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम दिशा में भी झाड़ू को रख सकते हैं। यह दिशा स्थिरता प्रदान करती है। भूलकर भी न रखें इस दिशा में झाड़ू झाड़ू को भूलकर भी उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में झाड़ू रखने से घर में दरिद्रता का आगमन होता है। साथ ही धन की कमी हो सकती है। अगर आप भी इस तरह की गलती कर रहे हैं, तो आज ही इसमें सुधार करें। इसके अलावा झाड़ू को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना वर्जित है। इस दिशा में झाड़ू को रखने से घर में क्लेश की समस्या बन सकती है। इन बातों का रखें ध्यान     घर या ऑफिस में झाड़ू को किसी की नजरों से दूर रखना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।     घर में टूटी हुई झाड़ू का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस गलती को करने से घर में दरिद्रता का वास होता है और इंसान को कई परेशानियां घेर लेती हैं।    

घर के मंदिर में न रखें ये मूर्तियां, धन हानि का संकेत

घर का मंदिर वह पवित्र कोना होता है जहां से पूरे परिवार को सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है। हम अपनी श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ ईश्वर की मूर्तियां स्थापित करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत स्वरूप या दोषपूर्ण मूर्तियों का चुनाव आपके जीवन में अशांति और आर्थिक तंगी का कारण बन सकता है। वास्तु शास्त्र और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हर मूर्ति की अपनी एक विशिष्ट ऊर्जा होती है और घर के भीतर केवल सौम्य और आशीर्वाद देने वाली ऊर्जा का ही वास होना चाहिए। अक्सर हम अनजाने में या केवल सुंदरता देखकर ऐसी मूर्तियां घर ले आते हैं जो गृहस्थ जीवन के लिए उपयुक्त नहीं होतीं। शास्त्रों का स्पष्ट मानना है कि यदि मंदिर में रखी गई मूर्तियों की ऊर्जा घर के वातावरण से मेल नहीं खाती, तो यह तरक्की में बाधा, स्वास्थ्य हानि और आपसी कलह का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। तो आइए जानते हैं कि पूजा घर में भूलकर भी कैसी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। खंडित या टूटी हुई मूर्तियां वास्तु शास्त्र का सबसे पहला नियम है कि पूजाघर में कभी भी खंडित मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। चाहे वह थोड़ी सी ही क्यों न चटक गई हो, ऐसी मूर्ति की पूजा करना अशुभ माना जाता है। यह मानसिक तनाव और कार्यों में बाधा का कारण बनती है। ऐसी मूर्तियों को पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। देवी-देवताओं का रौद्र रूप घर के मंदिर में हमेशा शांत और सौम्य मुद्रा वाली मूर्तियां रखनी चाहिए। देवी काली का विकराल रूप, भगवान शिव का तांडव करते हुए स्वरूप या भगवान हनुमान का लंका दहन वाला चित्र घर में नहीं रखना चाहिए। माना जाता है कि रौद्र रूप वाली मूर्तियां घर के सदस्यों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन और क्रोध बढ़ाती हैं। एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियां अक्सर लोग श्रद्धावश एक ही भगवान की कई मूर्तियां रख लेते हैं। वास्तु के अनुसार, एक ही देवी-देवता की तीन या उससे अधिक मूर्तियां या चित्र एक ही जगह पर नहीं होने चाहिए। इससे घर में गृह-क्लेश की स्थिति पैदा हो सकती है और धन का आगमन रुक सकता है। आमने-सामने न हों मूर्तियां मंदिर में मूर्तियों को इस तरह न रखें कि वे एक-दूसरे के आमने-सामने हों। विशेष रूप से गणेश जी की पीठ कभी भी दिखाई नहीं देनी चाहिए, क्योंकि उनकी पीठ में 'दरिद्रता' का वास माना जाता है। मूर्तियों का मुख हमेशा सामने की ओर या साधक की ओर होना चाहिए। पूर्वजों की तस्वीरें कई लोग भगवान के साथ ही अपने मृत पूर्वजों की तस्वीरें भी रख देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, देवता और पितर दोनों पूजनीय हैं लेकिन उनके स्थान अलग होने चाहिए। भगवान के मंदिर में पूर्वजों की तस्वीर रखने से देव-दोष लगता है, जिससे घर की उन्नति रुक सकती है। युद्ध या विनाश दर्शाने वाली तस्वीरें महाभारत के युद्ध का दृश्य या किसी असुर का वध करते हुए उग्र तस्वीरें पूजाघर में रखने से बचें। ऐसी तस्वीरें परिवार में कलह और अशांति का माहौल पैदा करती हैं।

अगर सोई किस्मत जगानी है तो अपनाएं कपूर के ये वास्तु उपाय, शिव मंत्र से मिलेगा लाभ

नई दिल्ली घर सिर्फ ईंट-पत्थर की दीवारें नहीं होता, बल्कि वहां मौजूद ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य, करियर और रिश्तों पर गहरा असर डालती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कभी-कभी घर में बिना किसी ठोस कारण के तनाव, भारीपन या कलह रहने लगती है। इसका मुख्य कारण घर में जमा 'नकारात्मक ऊर्जा' हो सकती है। इसे दूर करने के लिए कपूर और महादेव का एक सरल मंत्र अचूक उपाय माना जाता है। कपूर का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व वास्तु में कपूर को शुद्धता और सकारात्मकता का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है। इसकी खुशबू न केवल मन को शांत करती है, बल्कि वातावरण में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं और नकारात्मक तरंगों को भी नष्ट करती है। उपयोग करने का सही तरीका: प्रतिदिन आरती: सुबह और शाम पूजा के समय कपूर जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं। इससे घर का 'ऑरा' (Aura) साफ होता है। मुख्य द्वार पर प्रयोग: घर के मुख्य दरवाजे पर कपूर का धुआं दिखाने से बाहर की बुरी नजर और नकारात्मकता घर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाती। बेडरूम की शुद्धि: अगर सोते समय बुरे सपने आते हों, तो सोने से पहले कमरे में कपूर जलाएं। इससे मानसिक शांति मिलती है और नींद अच्छी आती है। शिव मंत्र की असीम शक्ति भगवान शिव को 'नकारात्मकता का संहारक' माना जाता है। कपूर जलाते समय अगर "ॐ नमः शिवाय" का जाप किया जाए, तो इसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। इस मंत्र की ध्वनि से निकलने वाले कंपन घर के कोने-कोने से डर, दरिद्रता और उदासी को बाहर निकाल देते हैं। घर की सुख-शांति के लिए छोटे बदलाव सफाई का ध्यान: घर में टूटा हुआ कांच या बंद घड़ियां न रखें, ये तरक्की रोकती हैं।

घर के मंदिर में मौजूद 5 वस्तुएं रोक सकती हैं धन आगमन, आज ही हटाएं

सनातन धर्म में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। इसमें मंदिर से जुड़े नियम के बारे में विस्तार से बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि वास्तु के नियम का पालन न करने से साधक को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में कुछ चीजों को रखने से साधक को पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है। साथ ही घर में मां लक्ष्मी वास नहीं करती हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल आपको बताते हैं कि मंदिर में किन चीजों को रखने से बचना चाहिए। टूटी मर्तियां मंदिर में भूलकर भी देवी-देवताओं की टूटी हुई मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, टूटी हुई मूर्तियों की पूजा करने से नकारात्मकता बढ़ती है और साधक को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही पूजा का फल नहीं मिलता। ऐसे में टूटी हुई मूर्तियां को पवित्र नदी में बहा दें। पितरों की तस्वीर वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि मंदिर में पितरों की तस्वीर भी नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि शास्त्रों में पितरों और देवताओं का स्थान अलग-अलग बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर में पितरों की मूर्ति लगाने से घर में अशांति का माहौल हो सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूर्वजों की तस्वीर को घर की दक्षिण दिशा में लगाना चाहिए। सूखे हुए फूल रोजाना पूजा के दौरान प्रभु को फूल अर्पित किए जाते हैं और अगले दिन सुबह उन फूलों को प्रभु के दौरान शृंगार के दौरान हटा दिया जाता है, लेकिन उन फूलों को मंदिर में न रखें। ऐसा माना जाता है कि मंदिर में सूखे हुए फूलों को रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसलिए सूखे हुए फूलों को पवित्र नदी में बहा दें या फिर किसी पेड़ के नीचे दबा दें। कटी-फटी धार्मिक पुस्तक मंदिर में भूलकर भी कटी-फटी धार्मिक पुस्तकों को नहीं रखना चाहिए। इससे वयक्ति के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नुकीली चीजें वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में कैंची और चाकू जैसी नुकीली चीजों को नहीं रखना चाहिए, क्योंकि नुकीली चीजों को नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए वास्तु शास्त्र में वर्णित नियम का पालन करने की सलाह दी जाती है।  

बाथरूम वास्तु दोष: सरल और असरदार समाधान

अगर आप अपने घर में वास्तु नियमों की अनदेखी करते हैं, तो इससे आपको वास्तु दोष का सामना करना पड़ सकता है, जिससे धन की बर्बादी और लड़ाई-झगड़े जैसी कई समस्याओं उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कि बाथरूम से जुड़ी किन गलतियों को करने से बचना चाहिए, वरना इससे आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस तरह लगता है वास्तु दोष वास्तु शास्त्र में माना गया है कि बाथरूम को हमेशा घर की पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनवाना चाहिए। इसे दक्षिण, दक्षिण-पूर्व या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बनाने से बचें। अगर आपका बाथरूम किचन के ठीक सामने है, तो यह वास्तु दोष की वजह बन सकता है। इसके साथ ही अगर आपके बाथरूम में टपकता हुआ नल है, तो इसे तुरंत ठीक करवा लेना चाहिए। साथ ही बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखना चाहिए। इन नियमों की अनदेखी करने पर नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। रखें इन बातों का ध्यान वास्तु दोष को दूर करने के लिए, बाथरूम को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। साथ ही आप बाथरूम में एक नीली बाल्टी भी रख सकते हैं, जो वास्तु की दृष्टि से फायदेमंद माना गया है। बाथरूम में हल्के रंग की टाइल्स लगाएं। इसके साथ ही पर्याप्त वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी का भी ध्यान रखना चाहिए। इस सभी बातों का ध्यान रखने से आपको वास्तु दोष से राहत देखने को मिल सकती है। जरूर करें ये काम वास्तु दोष से राहत पाने के लिए आप बाथरूम के कोनों में एक कांट की कटोरी में समुद्री नमक या फिटकरी भी रख सकते हैं, जिसे समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मकता ऊर्जा भी बढ़ती है। वास्तु दोष से छुटकारा पाने के लिए कपूर जलाना भी एक फायदेमंद उपाय है।  

करोड़पति बनने का वास्तु राज़: एक सही दिशा और बदल सकती है आपकी किस्मत

वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह हमारे आसपास की ऊर्जा को संतुलित करने का एक प्राचीन विज्ञान है। कई बार हम कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन सफलता और पैसा हमारे हाथ नहीं लगता। वास्तु के अनुसार, इसका कारण घर में मौजूद ऊर्जा का अवरोध हो सकता है। आज हम बात करेंगे वास्तु के उस सबसे बड़े सीक्रेट की, जिसे अपनाकर आप अपने जीवन में धन के प्रवाह को बढ़ा सकते हैं। वास्तु का सबसे बड़ा सीक्रेट वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना गया है। इस दिशा का सीधा संबंध आपके करियर, नए अवसरों और पैसे की आवक से होता है। यदि आपके घर की उत्तर दिशा दोषपूर्ण है, तो पैसा आएगा तो सही लेकिन टिकेगा नहीं। वह एक बदलाव जो बदल सकता है आपकी किस्मत अगर आप करोड़पति बनने का सपना देखते हैं, तो अपने घर की उत्तर दिशा में नीले रंग के पानी का फव्वारा या बहते हुए पानी की तस्वीर लगाएं। यह एक छोटा सा बदलाव धन की ऊर्जा को चुंबक की तरह खींचता है। धन वृद्धि के लिए 5 अचूक वास्तु नियम मुख्य द्वार घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से लक्ष्मी का आगमन होता है। मुख्य द्वार हमेशा साफ-सुथरा और चमकदार होना चाहिए। द्वार पर चांदी का स्वास्तिक लगाएं या दहलीज पर तांबे के सिक्के दबाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती। तिजोरी की सही दिशा आप अपना पैसा और गहने जहां रखते हैं, वह स्थान आपकी आर्थिक स्थिति तय करता है। अपनी तिजोरी या अलमारी को हमेशा घर के दक्षिण-पश्चिम  कोने में रखें लेकिन इसका मुंह उत्तर की ओर खुलना चाहिए। उत्तर की ओर खुलती हुई तिजोरी कुबेर के खजाने का स्वागत करती है। रसोई घर और अग्नि का संतुलन रसोई घर में अग्नि का वास होता है, जो समृद्धि का प्रतीक है। यदि आपकी रसोई दक्षिण-पूर्व में नहीं है, तो वहां एक लाल रंग का बल्ब जलाएं। कभी भी रसोई में जूठे बर्तन रात भर न छोड़ें क्योंकि यह लक्ष्मी को रुष्ट करता है। कबाड़ और मकड़ी के जाले वास्तु में राहु का वास गंदगी और कबाड़ में माना गया है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहते हैं, उसे हमेशा खाली और साफ रखें। यहाँ भारी सामान या कूड़ा रखने से बुद्धि भ्रष्ट होती है और धन का नुकसान होता है। मनी प्लांट और धातु का कछुआ  इसे हमेशा घर के अंदर दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाएं। ध्यान रहे कि इसकी बेलें जमीन को न छुएं, उन्हें ऊपर की ओर सहारा दें। उत्तर दिशा में एक पीतल के बर्तन में पानी भरकर उसमें पीतल का कछुआ रखें। यह स्थिरता और निरंतर धन लाभ का प्रतीक है।

क्या आपके घर में है वास्तु दोष? इन सरल उपायों से तुरंत पाएं राहत

वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे घर की ऊर्जा का हमारे जीवन, स्वास्थ्य और धन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। साथ ही वास्तु शास्त्र में यह भी बताया गया है कि घर में वास्तु दोष होने पर आपको कुछ संकेत मिल सकते हैं, जिन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि घर में वास्तु दोष होने पर आप किन उपायों से इससे मुक्ति पा सकत हैं। मिलता है ये संकेत     घर में बिना वजह घर में क्लेश की स्थिति बने रहना भी वास्तु दोष का ही एक लक्षण है।     कड़ी मेहनत के बाद भी तरक्की नहीं मिलती।     घर में तनाव की स्थिति बनी रहती है। जिसका कारण वास्तु दोष हो सकता है।     वास्तु दोष के कारण घर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं।     धन संबंधित समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। हो सकते हैं ये कारण वास्तु शास्त्र में टपकता हुआ नल आर्थिक नुकसान और वास्तु दोष (Vastu Dosh) की ओर इशारा करता है। घर के जिन कोनों में प्राकृतिक रोशनी नहीं पहुंचती, वहां अक्सर नकारात्मक ऊर्जा का बसेरा हो जाता है, जो वास्तु दोष का कारण बनता है। घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में टॉयलेट होने पर भी आपको वास्तु दोष का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही घर और मुख्य द्वार को गंदा रखने पर भी व्यक्ति को वास्तु दोष झेलना पड़ सकता है। कर सकते हैं ये उपाय वास्तु दोष से मुक्ति पाने के लिए आपको वास्तु शांति का पाठ करवाना चाहिए। शाम के समय घर में कपूर जलाकर घुमाएं, जो वास्तु दोष दूर करने का एक कारगर उपाय माना जाता है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार व तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं। इन कार्यों को करने से आपको वास्तु दोष से राहत मिल सकती है। अगर घर में यदि नेगेटिविटी बढ़ गई है, तो इसके लिए घर में नमक का पोछा लगाएं। साथ ही खिड़कियां और दरवाजे खोलकर रखें, वहीं शौचालय के दरवाजे को हमेशा बंद रखें।  

क्या रात में कपड़े धोने से आती है नकारात्मक ऊर्जा? वास्तु शास्त्र की चेतावनी

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष विज्ञान में दिनचर्या से जुड़े हर कार्य के लिए एक निश्चित समय और नियम बताया गया है। अक्सर आधुनिक जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी सुविधा के अनुसार काम करते हैं। इन्हीं में से एक है रात के समय कपड़े धोना। आजकल वर्किंग कपल्स या व्यस्त दिनचर्या वाले लोग समय बचाने के लिए रात में वॉशिंग मशीन चला देते हैं और कपड़े धोकर रात भर के लिए बाहर सुखा देते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, रात में कपड़े धोना और उन्हें खुले आसमान के नीचे सुखाना आपके जीवन में गंभीर आर्थिक और मानसिक परेशानियां ला सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि वास्तु के अनुसार रात में कपड़े धोना क्यों वर्जित है और इसका आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। वास्तु शास्त्र और नकारात्मक ऊर्जा का संबंध वास्तु शास्त्र के अनुसार, सूर्यास्त के बाद वातावरण में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है। दिन के समय सूर्य की पराबैंगनी किरणें वातावरण को शुद्ध करती हैं और कीटाणुओं के साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा का भी नाश करती हैं। इसके विपरीत, रात के समय चंद्रमा की शीतलता होती है, लेकिन बाहरी वातावरण में तामसिक ऊर्जा का वास होता है। आर्थिक तंगी और दरिद्रता का वास धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद लक्ष्मी जी के आगमन का समय होता है। इस समय घर में साफ-सफाई, शांति और भक्ति का माहौल होना चाहिए। रात में कपड़े धोने से घर में 'कलह' और 'अशांति' का वातावरण बनता है, जिससे माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। इससे घर की बरकत रुक जाती है और बेवजह के खर्चे बढ़ने लगते हैं। स्वास्थ्य पर बुरा असर वैज्ञानिक और वास्तु दोनों ही दृष्टिकोणों से रात में कपड़े सुखाना सेहत के लिए हानिकारक है। रात के समय ओस गिरती है और धूप न होने के कारण कपड़ों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणु मर नहीं पाते। जब हम इन कपड़ों को पहनते हैं, तो त्वचा संबंधी रोग और सांस की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। वास्तु के अनुसार, ऐसे कपड़ों को पहनने से व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा कमजोर होती है। नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि खुले आसमान के नीचे रात भर सूखे कपड़े नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेते हैं। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार रात में अदृश्य नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं। गीले कपड़ों में उनकी ऊर्जा जल्दी समाहित हो जाती है, जिससे व्यक्ति के स्वभाव में चिड़चिड़ापन, तनाव और डरावने सपने जैसी समस्याएं आ सकती हैं। कपड़ों की चमक और आयु कम होना प्राकृतिक रूप से देखा जाए तो सूर्य की रोशनी कपड़ों के लिए प्राकृतिक कीटाणुनाशक का काम करती है। रात में कपड़े धोने से वे पूरी तरह नहीं सूख पाते और उनमें एक अजीब सी गंध रह जाती है। यह गंध और नमी आपके व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

कहीं आपकी किचन का डस्टबिन तो नहीं बुला रहा नकारात्मक ऊर्जा? जरूर पढ़ें

सहूलियत के लिए कुछ लोग किचन में कूड़ेदान रखते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र में इसके लिए कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है। वरना किचन और घर में नेगेटिव एनर्जी बढ़ने लगती है, जो आपके लिए कई तरह की तरह की समस्याएं खड़ी कर सकती है। चलिए जानते हैं इस बारे में। किचन में डस्टबिन रखें या नहीं वास्तु की दृष्टि से घर की रसोई में कूड़ेदान रखना बिल्कुल भी सही नहीं माना जाता। ऐसा करने से घर में नेगेटिव एनर्जी को बढ़ावा मिलता है और जीवन में कई तरह की समस्याएं बढ़ सकती हैं। साथ ही यह भी मान्यता है कि इससे आपको मां अन्नपूर्णा की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। कहां रखें कूड़ेदान डस्टबिन को रखने के लिए वास्तु शास्त्र में घर की दक्षिण या फिर दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) के बीच के कोने या स्थान को उचित माना गया है। दक्षिण सबसे उत्तम दिशा है. क्योंकि इस दिशा से नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर निकलती है, इसलिए इस दिशा में डस्टबिन रखना सही होगा। ये गलती पड़ सकती है भारी भूल से भी कभी घर की उत्तर दिशा में डस्टबिन नहीं रखना चाहिए। वास्तु में माना गया है कि अगर आप इस दिशा में कूड़ेदान को रखते हैं, तो इससे आपको दरिद्रता, लड़ाई-झगड़े और नकारात्मक ऊर्जा आदि का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही कभी भी मंदिर के नीचे डस्टबिन नहीं रखना चाहिए, वरना इससे मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। जरूर रखें इन बातों का ध्यान घर में रखने के लिए ऐसे डस्टबिन का चुनाव करें, जो ढका हुआ हो। इसे नियमित रूप से खाली करें और साफ रखें, ताकि नकारात्मक ऊर्जा न बढ़े। इन सभी बातों का ध्यान रखने पर आप नेगेटिविटी से बचे रहते हैं।