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करोड़पति बनने का वास्तु राज़: एक सही दिशा और बदल सकती है आपकी किस्मत

वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह हमारे आसपास की ऊर्जा को संतुलित करने का एक प्राचीन विज्ञान है। कई बार हम कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन सफलता और पैसा हमारे हाथ नहीं लगता। वास्तु के अनुसार, इसका कारण घर में मौजूद ऊर्जा का अवरोध हो सकता है। आज हम बात करेंगे वास्तु के उस सबसे बड़े सीक्रेट की, जिसे अपनाकर आप अपने जीवन में धन के प्रवाह को बढ़ा सकते हैं। वास्तु का सबसे बड़ा सीक्रेट वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना गया है। इस दिशा का सीधा संबंध आपके करियर, नए अवसरों और पैसे की आवक से होता है। यदि आपके घर की उत्तर दिशा दोषपूर्ण है, तो पैसा आएगा तो सही लेकिन टिकेगा नहीं। वह एक बदलाव जो बदल सकता है आपकी किस्मत अगर आप करोड़पति बनने का सपना देखते हैं, तो अपने घर की उत्तर दिशा में नीले रंग के पानी का फव्वारा या बहते हुए पानी की तस्वीर लगाएं। यह एक छोटा सा बदलाव धन की ऊर्जा को चुंबक की तरह खींचता है। धन वृद्धि के लिए 5 अचूक वास्तु नियम मुख्य द्वार घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से लक्ष्मी का आगमन होता है। मुख्य द्वार हमेशा साफ-सुथरा और चमकदार होना चाहिए। द्वार पर चांदी का स्वास्तिक लगाएं या दहलीज पर तांबे के सिक्के दबाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती। तिजोरी की सही दिशा आप अपना पैसा और गहने जहां रखते हैं, वह स्थान आपकी आर्थिक स्थिति तय करता है। अपनी तिजोरी या अलमारी को हमेशा घर के दक्षिण-पश्चिम  कोने में रखें लेकिन इसका मुंह उत्तर की ओर खुलना चाहिए। उत्तर की ओर खुलती हुई तिजोरी कुबेर के खजाने का स्वागत करती है। रसोई घर और अग्नि का संतुलन रसोई घर में अग्नि का वास होता है, जो समृद्धि का प्रतीक है। यदि आपकी रसोई दक्षिण-पूर्व में नहीं है, तो वहां एक लाल रंग का बल्ब जलाएं। कभी भी रसोई में जूठे बर्तन रात भर न छोड़ें क्योंकि यह लक्ष्मी को रुष्ट करता है। कबाड़ और मकड़ी के जाले वास्तु में राहु का वास गंदगी और कबाड़ में माना गया है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहते हैं, उसे हमेशा खाली और साफ रखें। यहाँ भारी सामान या कूड़ा रखने से बुद्धि भ्रष्ट होती है और धन का नुकसान होता है। मनी प्लांट और धातु का कछुआ  इसे हमेशा घर के अंदर दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाएं। ध्यान रहे कि इसकी बेलें जमीन को न छुएं, उन्हें ऊपर की ओर सहारा दें। उत्तर दिशा में एक पीतल के बर्तन में पानी भरकर उसमें पीतल का कछुआ रखें। यह स्थिरता और निरंतर धन लाभ का प्रतीक है।

क्या आपके घर में है वास्तु दोष? इन सरल उपायों से तुरंत पाएं राहत

वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे घर की ऊर्जा का हमारे जीवन, स्वास्थ्य और धन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। साथ ही वास्तु शास्त्र में यह भी बताया गया है कि घर में वास्तु दोष होने पर आपको कुछ संकेत मिल सकते हैं, जिन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि घर में वास्तु दोष होने पर आप किन उपायों से इससे मुक्ति पा सकत हैं। मिलता है ये संकेत     घर में बिना वजह घर में क्लेश की स्थिति बने रहना भी वास्तु दोष का ही एक लक्षण है।     कड़ी मेहनत के बाद भी तरक्की नहीं मिलती।     घर में तनाव की स्थिति बनी रहती है। जिसका कारण वास्तु दोष हो सकता है।     वास्तु दोष के कारण घर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं।     धन संबंधित समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। हो सकते हैं ये कारण वास्तु शास्त्र में टपकता हुआ नल आर्थिक नुकसान और वास्तु दोष (Vastu Dosh) की ओर इशारा करता है। घर के जिन कोनों में प्राकृतिक रोशनी नहीं पहुंचती, वहां अक्सर नकारात्मक ऊर्जा का बसेरा हो जाता है, जो वास्तु दोष का कारण बनता है। घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में टॉयलेट होने पर भी आपको वास्तु दोष का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही घर और मुख्य द्वार को गंदा रखने पर भी व्यक्ति को वास्तु दोष झेलना पड़ सकता है। कर सकते हैं ये उपाय वास्तु दोष से मुक्ति पाने के लिए आपको वास्तु शांति का पाठ करवाना चाहिए। शाम के समय घर में कपूर जलाकर घुमाएं, जो वास्तु दोष दूर करने का एक कारगर उपाय माना जाता है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार व तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं। इन कार्यों को करने से आपको वास्तु दोष से राहत मिल सकती है। अगर घर में यदि नेगेटिविटी बढ़ गई है, तो इसके लिए घर में नमक का पोछा लगाएं। साथ ही खिड़कियां और दरवाजे खोलकर रखें, वहीं शौचालय के दरवाजे को हमेशा बंद रखें।  

क्या रात में कपड़े धोने से आती है नकारात्मक ऊर्जा? वास्तु शास्त्र की चेतावनी

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष विज्ञान में दिनचर्या से जुड़े हर कार्य के लिए एक निश्चित समय और नियम बताया गया है। अक्सर आधुनिक जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी सुविधा के अनुसार काम करते हैं। इन्हीं में से एक है रात के समय कपड़े धोना। आजकल वर्किंग कपल्स या व्यस्त दिनचर्या वाले लोग समय बचाने के लिए रात में वॉशिंग मशीन चला देते हैं और कपड़े धोकर रात भर के लिए बाहर सुखा देते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, रात में कपड़े धोना और उन्हें खुले आसमान के नीचे सुखाना आपके जीवन में गंभीर आर्थिक और मानसिक परेशानियां ला सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि वास्तु के अनुसार रात में कपड़े धोना क्यों वर्जित है और इसका आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। वास्तु शास्त्र और नकारात्मक ऊर्जा का संबंध वास्तु शास्त्र के अनुसार, सूर्यास्त के बाद वातावरण में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है। दिन के समय सूर्य की पराबैंगनी किरणें वातावरण को शुद्ध करती हैं और कीटाणुओं के साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा का भी नाश करती हैं। इसके विपरीत, रात के समय चंद्रमा की शीतलता होती है, लेकिन बाहरी वातावरण में तामसिक ऊर्जा का वास होता है। आर्थिक तंगी और दरिद्रता का वास धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद लक्ष्मी जी के आगमन का समय होता है। इस समय घर में साफ-सफाई, शांति और भक्ति का माहौल होना चाहिए। रात में कपड़े धोने से घर में 'कलह' और 'अशांति' का वातावरण बनता है, जिससे माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। इससे घर की बरकत रुक जाती है और बेवजह के खर्चे बढ़ने लगते हैं। स्वास्थ्य पर बुरा असर वैज्ञानिक और वास्तु दोनों ही दृष्टिकोणों से रात में कपड़े सुखाना सेहत के लिए हानिकारक है। रात के समय ओस गिरती है और धूप न होने के कारण कपड़ों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणु मर नहीं पाते। जब हम इन कपड़ों को पहनते हैं, तो त्वचा संबंधी रोग और सांस की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। वास्तु के अनुसार, ऐसे कपड़ों को पहनने से व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा कमजोर होती है। नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि खुले आसमान के नीचे रात भर सूखे कपड़े नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेते हैं। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार रात में अदृश्य नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं। गीले कपड़ों में उनकी ऊर्जा जल्दी समाहित हो जाती है, जिससे व्यक्ति के स्वभाव में चिड़चिड़ापन, तनाव और डरावने सपने जैसी समस्याएं आ सकती हैं। कपड़ों की चमक और आयु कम होना प्राकृतिक रूप से देखा जाए तो सूर्य की रोशनी कपड़ों के लिए प्राकृतिक कीटाणुनाशक का काम करती है। रात में कपड़े धोने से वे पूरी तरह नहीं सूख पाते और उनमें एक अजीब सी गंध रह जाती है। यह गंध और नमी आपके व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

कहीं आपकी किचन का डस्टबिन तो नहीं बुला रहा नकारात्मक ऊर्जा? जरूर पढ़ें

सहूलियत के लिए कुछ लोग किचन में कूड़ेदान रखते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र में इसके लिए कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है। वरना किचन और घर में नेगेटिव एनर्जी बढ़ने लगती है, जो आपके लिए कई तरह की तरह की समस्याएं खड़ी कर सकती है। चलिए जानते हैं इस बारे में। किचन में डस्टबिन रखें या नहीं वास्तु की दृष्टि से घर की रसोई में कूड़ेदान रखना बिल्कुल भी सही नहीं माना जाता। ऐसा करने से घर में नेगेटिव एनर्जी को बढ़ावा मिलता है और जीवन में कई तरह की समस्याएं बढ़ सकती हैं। साथ ही यह भी मान्यता है कि इससे आपको मां अन्नपूर्णा की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। कहां रखें कूड़ेदान डस्टबिन को रखने के लिए वास्तु शास्त्र में घर की दक्षिण या फिर दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) के बीच के कोने या स्थान को उचित माना गया है। दक्षिण सबसे उत्तम दिशा है. क्योंकि इस दिशा से नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर निकलती है, इसलिए इस दिशा में डस्टबिन रखना सही होगा। ये गलती पड़ सकती है भारी भूल से भी कभी घर की उत्तर दिशा में डस्टबिन नहीं रखना चाहिए। वास्तु में माना गया है कि अगर आप इस दिशा में कूड़ेदान को रखते हैं, तो इससे आपको दरिद्रता, लड़ाई-झगड़े और नकारात्मक ऊर्जा आदि का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही कभी भी मंदिर के नीचे डस्टबिन नहीं रखना चाहिए, वरना इससे मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। जरूर रखें इन बातों का ध्यान घर में रखने के लिए ऐसे डस्टबिन का चुनाव करें, जो ढका हुआ हो। इसे नियमित रूप से खाली करें और साफ रखें, ताकि नकारात्मक ऊर्जा न बढ़े। इन सभी बातों का ध्यान रखने पर आप नेगेटिविटी से बचे रहते हैं।  

नकारात्मकता दूर कर घर को महकाएंगे ये इत्र, आएगी सुख-शांति

वास्तु शास्त्र में, आपके घर का माहौल और ऊर्जा केवल वस्तुओं की स्थिति पर ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद सुगंध पर भी निर्भर करती है। सुगंध में इतनी शक्ति होती है कि यह तुरंत घर की नकारात्मकता को दूर करके एक शांत और सकारात्मक वातावरण बना सकती है। यदि आप अपने घर में खुशहाली, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाना चाहते हैं, तो वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार, कुछ विशेष प्रकार के इत्र या सुगंधित तेलों का उपयोग करना बहुत ही प्रभावी माना जाता है। तो आइए जानते हैं कि घर में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा बनाएं रखने के लिए कौन से इत्र का इस्तेमाल करना चाहिए। चंदन का इत्र चंदन का इत्र  शुद्धता, शांति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। चंदन की भीनी खुशबू घर में सात्विक ऊर्जा लाती है और मानसिक शांति बढ़ाती है। इसे पूजा घर या ध्यान वाले स्थान पर इस्तेमाल करने से एकाग्रता बढ़ती है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। यह तनाव को कम करने में भी सहायक है। गुलाब का इत्र गुलाब का इत्र प्रेम, मधुरता और कोमलता का प्रतीक है। गुलाब की सुगंध घर के भावनात्मक वातावरण को शुद्ध करती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बढ़ाती है। इसे लिविंग रूम और बेडरूम में उपयोग करने से रिश्ते मजबूत होते हैं और मन प्रसन्न रहता है। लैवेंडर का इत्र लैवेंडर का इत्र शांति, विश्राम और आराम का प्रतीक है। लैवेंडर की खुशबू विशेष रूप से अनिद्रा और मानसिक बेचैनी को दूर करने में सहायक है। यह घर में शांतिपूर्ण ऊर्जा का संचार करता है। इसे बेडरूम में छिड़कने या डिफ्यूज़र में इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता सुधरती है और दिनभर का तनाव कम होता है। मोगरा या चमेली का इत्र मोगरा या चमेली का इत्र समृद्धि, आकर्षण और उत्साह का प्रतीक है। मोगरा या चमेली की सुगंध धन और सौभाग्य को आकर्षित करने वाली मानी जाती है, जिससे घर में समृद्धि का प्रवाह बढ़ता है। इसे घर के मुख्य द्वार के आस-पास या उस क्षेत्र में इस्तेमाल करें जहाँ से ऊर्जा का प्रवेश होता है।

नेगेटिविटी दूर, पॉजिटिविटी भरपूर: घर को महकाएँ इन सुगंधित इत्रों से

वास्तु शास्त्र में, आपके घर का माहौल और ऊर्जा केवल वस्तुओं की स्थिति पर ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद सुगंध पर भी निर्भर करती है। सुगंध में इतनी शक्ति होती है कि यह तुरंत घर की नकारात्मकता को दूर करके एक शांत और सकारात्मक वातावरण बना सकती है। यदि आप अपने घर में खुशहाली, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाना चाहते हैं, तो वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार, कुछ विशेष प्रकार के इत्र या सुगंधित तेलों का उपयोग करना बहुत ही प्रभावी माना जाता है। तो आइए जानते हैं कि घर में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा बनाएं रखने के लिए कौन से इत्र का इस्तेमाल करना चाहिए। चंदन का इत्र चंदन का इत्र  शुद्धता, शांति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। चंदन की भीनी खुशबू घर में सात्विक ऊर्जा लाती है और मानसिक शांति बढ़ाती है। इसे पूजा घर या ध्यान वाले स्थान पर इस्तेमाल करने से एकाग्रता बढ़ती है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। यह तनाव को कम करने में भी सहायक है। गुलाब का इत्र गुलाब का इत्र प्रेम, मधुरता और कोमलता का प्रतीक है। गुलाब की सुगंध घर के भावनात्मक वातावरण को शुद्ध करती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बढ़ाती है। इसे लिविंग रूम और बेडरूम में उपयोग करने से रिश्ते मजबूत होते हैं और मन प्रसन्न रहता है। लैवेंडर का इत्र लैवेंडर का इत्र शांति, विश्राम और आराम का प्रतीक है। लैवेंडर की खुशबू विशेष रूप से अनिद्रा और मानसिक बेचैनी को दूर करने में सहायक है। यह घर में शांतिपूर्ण ऊर्जा का संचार करता है। इसे बेडरूम में छिड़कने या डिफ्यूज़र में इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता सुधरती है और दिनभर का तनाव कम होता है। मोगरा या चमेली का इत्र मोगरा या चमेली का इत्र समृद्धि, आकर्षण और उत्साह का प्रतीक है। मोगरा या चमेली की सुगंध धन और सौभाग्य को आकर्षित करने वाली मानी जाती है, जिससे घर में समृद्धि का प्रवाह बढ़ता है। इसे घर के मुख्य द्वार के आस-पास या उस क्षेत्र में इस्तेमाल करें जहाँ से ऊर्जा का प्रवेश होता है।

पूजा में बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा: जानें मंदिर की सही दिशा और वास्तु नियम

वास्तु शास्त्र में दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि सही दिशा का पालन करने से घर में सुख-शांति का वास होता है और जीवन में कोई संकट नहीं आता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की शुभ दिशा में मंदिर होने से परिवार के सदस्यों को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इसलिए वास्तु शास्त्र में मंदिर के लिए शुभ दिशा का वर्णन किया गया है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं कि मंदिर से जुड़े नियम के बारे में। किस दिशा में होना चाहिए मंदिर वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर के लिए पूर्व दिशा को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिशा में मंदिर होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसके अलावा पूर्व-उत्तर दिशा को भी मंदिर के लिए उत्तम माना जाता है। इससे पूजा सफल होती है। कैसा होना चाहिए मंदिर घर में मंदिर बनवाने के लिए ऐसी जगह का चयन करें, जहां बाथरूम पास न हो और स्वच्छता के नियम का पालन जरूर करना चाहिए। मंदिर लकड़ी या पत्थर का बनवा सकते हैं। कहां नहीं होना चाहिए मंदिर वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार, मंदिर को भूलकर भी सीढ़ियों के नीचे नहीं बनवाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सीढ़ियों के नीचे मंदिर होने से जातक को जीवन में परेशनियों का सामना करना पड़ सकता है और घर में क्‍लेश की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा मंदिर को बेडरूम में भी नहीं बनवाना चाहिए। किस रंग का बनवाएं मंदिर मंदिर के रंग का विशेष ध्यान रखें। मंदिर सफेद, पीला या लाल रंग का होना चाहिए। इन रंग को शुभता का प्रतीक माना जाता है। इन बातों का रखें विशेष ध्यान पूजा के दौरान भगवान को फूल अर्पित किए जाते हैं। कुछ समय के बाद फूल सुख जाते हैं। सूखे हुए फूलों को मंदिर में नहीं रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में सूखे फूल रखने से जातक को वास्तु दोष की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए फूल सुख जाने पर किसी बहते हुए पवित्र नदी में बहा दें या फर किसी पौधे में ड़ाल दें। मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिमा को विराजमान करने से पहले उनके नीचे लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके ऊपर प्रतिमा को स्थापित करें।  

सही दिशा में तस्वीर लगाने से चमकेगी किस्मत, जानें शुभ दिशा

वास्तु शास्त्र में हमारे जीवन से जुड़ी कई परेशानियों का हल आसानी से मिल जाता है। बहुत से लोग अपने घरों में वास्तु के अनुकूल चीज़ों को रखते हैं। इसी में से एक है सात घोड़ों की तस्वीर। आपने भी कही न कही इन 7 सफेद घोड़ो की तस्वीर को अपने या किसी न किसी के घर में दीवार पर टंगा हुआ जरुर देखा होगा। वास्तु शास्त्र की मानें तो घर में घोड़ों की पेंटिंग लगाना बेहद ही शुभ माना जाता है। कहते हैं ये पेंटिंग वृद्धि और सौभाग्य के लिए बहुत ही शुभ मानी जाती है। ऐसे में यदि आपके घर पर भी इन सात घोड़ों की तस्वीर है या आप भी इसे लगाने का सोच रहे हैं तो बता दें कि इस तस्वीर को लगाने की सही दिशा को चूनना और इसके विशेष नियमों को जानना बेहद ज़रुरी हो जाता है ताकि आपको इसका पूरा फल मिल सकें। चलिए जानते हैं कि इस तस्वीर को लगाने की सही दिशा और इसके नियम तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं। कहते हैं कि अगर दौड़ते हुए सात घोड़ों की तस्वीर घर में सही दिशा में लगा दी जाए तो इसे जातक के जीवन में चल रहा बुरा वक्त दूर हो जाता है, रुके हुए काम तेजी से पूरे होने लगते हैं, धन का प्रवाह बढ़ाता है और किस्मत मानो अपने आप चमक उठती है। ऐसे में वास्तु शास्त्र की माने तो लिविंग रूम में सात घोड़ों की तस्वीर लगाना अच्छा होता है। माना जाता है कि लिविंग रूम में सात घोड़ों की तस्वीर लगाने से आर्थिक समस्याएं कम होने लगती हैं और धन प्राप्ति के नए अवसर खुलते हैं। इसके अलावा दौड़ते हुए सात घोड़ों की तस्वीर लगाते समय केवल स्थान ही नहीं, बल्कि उसकी दिशा भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।  वास्तु शास्त्र के अनुसार, सात घोड़ों की तस्वीर को घर की उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना गया है। इससे आर्थिक तंगी कम होती है और जीवन की कई परेशानियां धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं। सात घोड़ों की तस्वीर के महत्व का तो वास्तु शास्त्र के अनुसार घोड़े को शक्ति, गति और सफलता का प्रतीक माना जाता है। यहां तक की सात की संख्या को अंक ज्योतिष में भी बेहद शुभ माना जाता है। जैसे की सप्ताह में सात दिन, संगीत के सात सुर, इन्द्रधनुष के सात रंग  क्योंकि ये सात अंक को भाग्यशाली अंक माना गया है। सात घोड़ों की तस्वीर को लगाने के नियम- सात घोड़ों की पेंटिंग लेते समय कोशिश करें कि उसकी पृष्ठभूमि में उगते सूर्य का दृश्य हो। ऐसी तस्वीर घर में लगाना शुभता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। दौड़ते हुए घोड़ों की पेंटिंग चुनते समय यह सुनिश्चित करें कि घोड़ों का भाव शांत और संतुलित हो। क्रोधित या आक्रामक दिखने वाले घोड़ों की तस्वीर घर में लगाने से बचना चाहिए। सात घोड़ों की पेंटिंग चुनते समय ध्यान रखें कि घोड़ों की संख्या विषम हो, और तस्वीर में घोड़ों के पूरे शरीर स्पष्ट रूप से दिखाई दें। अकेले दौड़ते घोड़े की तस्वीर लगाने की सलाह नहीं दी जाती। घर में वही सात घोड़ों की तस्वीर लगाएं जिसे देखकर मन प्रसन्न हो और जिसे देखकर आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले। तस्वीर में सभी घोड़े बिना रुकावट के एक समान दिशा में आगे बढ़ते हुए दिखाई दें। ये निरंतर प्रगति और सफलता का संकेत माना जाता है।

वास्तु चेतावनी! दूसरों को चीजें शेयर करना पड़ सकता है भारी

वास्तु शास्त्र के अनुसार हर वस्तु में एक विशिष्ट ऊर्जा होती है। कुछ चीजें भाग्य और समृद्धि आकर्षित करती हैं, जबकि कुछ चीजों का गलत लेन-देन जीवन में बाधाएं, तनाव और आर्थिक संकट बढ़ा देता है। हिंदू शास्त्रों में कई ऐसी वस्तुओं का उल्लेख है जिन्हें कभी उधार नहीं देना चाहिए और न ही किसी से उधार लेना चाहिए। ऐसा करने से घर की सकारात्मकता घटती है और परिवार पर अशुभ प्रभाव पड़ता है। नीचे कुछ वस्तुएं बताई जा रही हैं, जिनका लेन-देन बिल्कुल अशुभ माना गया है। सफेद खाने-पीने की चीजें – घर की बरकत कम कर देती हैं दूध, दही, चावल, चीनी, नमक जैसी सफेद वस्तुएं चंद्रमा और शांति की ऊर्जा से जुड़ी होती है। वास्तु नियम: शाम या रात को इन चीजों को घर से बाहर न तो किसी को दें और न ही खुद लेकर जाएं। यह समय ऊर्जा परिवर्तन का माना जाता है और सफेद वस्तुओं का इस समय लेन-देन घर की बरकत और धन प्राप्ति को कमजोर करता है। इन वस्तुओं को सुबह या दिन के समय देना शुभ रहता है। झाड़ू – मां लक्ष्मी का प्रतीक, कभी उधार न दें झाड़ू को घर की समृद्धि और लक्ष्मी का रूप माना गया है। उधार देने से: धन कम होता है। बरकत घटती है। नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश कर सकती हैय, यदि किसी को जरूरत हो, तो नई झाड़ू दें पर अपनी झाड़ू कभी न दें। किसी दूसरे की झाड़ू इस्तेमाल करने से उनके घर की ऊर्जा भी आपके जीवन को प्रभावित कर सकती है। कलाई घड़ी – समय और भाग्य का प्रतीक घड़ी सिर्फ समय बताने वाली वस्तु नहीं, बल्कि भाग्य और जीवन की गति का प्रतीक है। वास्तु चेतावनी: अपनी घड़ी किसी को देने पर आप अपनी अच्छी ऊर्जा, समय और भाग्य भी दे देते हैं। किसी और की घड़ी पहनने से उसकी अच्छी-बुरी ऊर्जा सीधे आपके जीवन में प्रवेश करती है इसलिए घड़ी का लेन-देन पूरी तरह निषिद्ध माना गया है। रुमाल – भावनात्मक ऊर्जा को सोखने वाला रुमाल व्यक्ति की भावनाओं, तनाव और मानसिक ऊर्जा को आकर्षित करता है। वास्तु के अनुसार: रुमाल किसी को देना अशुभ होता है। किसी का रुमाल इस्तेमाल करना और भी हानिकारक माना जाता है। उपहार में रुमाल देने से रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है। रुमाल का आदान-प्रदान रिश्तों और मानसिक शांति दोनों को प्रभावित करता है।

किचन सिंक एरिया में ये गलतियाँ न करें, वरना बढ़ सकता है नकारात्मक प्रभाव

वास्तु शास्त्र में घर के हर कोने, विशेषकर रसोई को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह स्थान अग्नि और जल के तत्वों का संगम होता है। किचन में सिंक के नीचे की जगह अक्सर नज़रअंदाज़ कर दी जाती है, लेकिन वास्तु के अनुसार, यहां कुछ चीज़ें रखना नकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है, जिसे वास्तु दोष कहते हैं। तो आइए जानते हैं कि वे मुख्य चीज़ें जिन्हें आपको किचन सिंक के नीचे रखने से बचना चाहिए। कूड़ेदान या डस्टबिन सिंक के नीचे कूड़ेदान रखना सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है। सिंक पानी का प्रतिनिधित्व करता है, जो स्वच्छ और बहता हुआ होना चाहिए, जबकि कूड़ेदान गंदगी और स्थिर नकारात्मकता का प्रतिनिधित्व करता है। जल के साथ गंदगी का संयोजन आर्थिक हानि और धन के रुकने का कारण बनता है। यह घर की सकारात्मक ऊर्जा को भी कम कर देता है। कूड़ेदान को सिंक के नीचे से हटाकर किचन के किसी ऐसे कोने में रखें जहां वह कम दिखाई दे और जल तत्व से दूर रहे। बिजली के उपकरण किचन सिंक जल तत्व का क्षेत्र है, जबकि बिजली के उपकरण अग्नि तत्व या ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। वास्तु के अनुसार, जल और अग्नि तत्वों का एक साथ आना संघर्ष और असंतुलन पैदा करता है। यह घर के सदस्यों के बीच तनाव बढ़ा सकता है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ दे सकता है। मिक्सर, टोस्टर या अन्य छोटे उपकरणों को सिंक के नीचे की बजाय कैबिनेट या काउंटर पर रखें। सफाई से जुड़े केमिकल फिनाइल, डिटर्जेंट, एसिड जैसे कठोर केमिकल या सफाई उत्पादों को भी सिंक के नीचे नहीं रखना चाहिए। हालांकि ये सफाई के लिए ज़रूरी हैं, लेकिन इनकी तीव्र रासायनिक प्रकृति सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बाधित कर सकती है। इसके अलावा, वास्तु के अनुसार, जल तत्व के पास कठोर वस्तुओं को जमा करने से आर्थिक अस्थिरता आ सकती है। इन चीज़ों को सिंक के नीचे रखने के बजाय, किसी बंद अलमारी या बाथरूम/यूटिलिटी एरिया में रखें।