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NDA का पलड़ा भारी! 427 से ज्यादा सांसदों का समर्थन, उपराष्ट्रपति चुनाव में PM मोदी ने किया मतदान की शुरुआत

नई दिल्ली देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद के लिए वैचारिक बनाम संख्यात्मक मुकाबले का मंच तैयार है. मंगलवार को कुल 782 सांसद (लोकसभा और राज्यसभा दोनों से) उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान करने जा रहे हैं. जीत सुनिश्चित करने के लिए, किसी भी उम्मीदवार को 391 वोटों के साधारण बहुमत की जरूरत होती है. वर्तमान राजनीतिक अंकगणित के मुताबिक, सत्तारूढ़ एनडीए को पहले से ही करीब 427 सांसदों का समर्थन हासिल है, जो स्पष्ट रूप से बहुमत के आंकड़े से ज्यादा है. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग शुरू, पीएम मोदी ने डाला पहला वोट . कुछ दलों ने मतदान से बनाई दूरी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन की संभावनाएं और मज़बूत हो गई हैं. इस बीच, सात सांसदों वाले बीजू जनता दल (बीजेडी) और चार सांसदों वाली भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और अकाली दल ने मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है. विपक्षी गठबंधन, INDIA ब्लॉक के पास करीब 324 सांसदों का समर्थन है. ऐसे में संख्याबल के आधार पर एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का अगला उपराष्ट्रपति बनना तय माना जा रहा है. उनके खिलाफ विपक्षी उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी वैचारिक लड़ाई लड़ने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. दोनों पक्षों की तरफ से किस उम्मीदवार को कितना समर्थन हासिल है, आइए जानते हैं. एनडीए को 427 सांसदों का समर्थन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): लोकसभा – 240 सांसद राज्यसभा – करीब 100 सांसद तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) लोकसभा – 16 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद जनता दल (यूनाइटेड) जेडीयू लोकसभा – 12 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास): लोकसभा – 5 सांसद शिवसेना (शिंदे गुट) लोकसभा – 7 सांसद राज्यसभा – करीब 3 सांसद जन सेना पार्टी (जेएसपी) लोकसभा – 2 सांसद जनता दल (सेक्युलर) लोकसभा – 2 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) लोकसभा – 2 सांसद अपना दल, एजीपी, एजेएसयू, एचएएम (एस), अजीत पवार का एनसीपी गुट, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम), यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी (यूपीपी) और चुनिंदा निर्दलीय जैसे अन्य छोटे सहयोगी दल भी एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने वाले हैं.  INDIA ब्लॉक के साथ 324 सांसद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) लोकसभा – 99 सांसद राज्यसभा – 27 सांसद समाजवादी पार्टी (सपा) लोकसभा – 37 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लोकसभा – 29 सांसद राज्यसभा – 13 सांसद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) लोकसभा – 22 सांसद राज्यसभा – 10 सांसद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) लोकसभा – 9 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद एनसीपी (शरद पवार गुट) लोकसभा – 8 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) लोकसभा – 4 सांसद राज्यसभा – 5 सांसद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सीपीएम लोकसभा – 4 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) लोकसभा – 2 सांसद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) लोकसभा – 2 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद अन्य छोटे सहयोगी, जैसे वीसीके (2 सांसद), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल – 3 सांसद), आरएसपी (1), और अन्य भी INDIA ब्लॉक के उम्मीदवार के पक्ष में वोट करेंगे. संभावित नतीजा एनडीए के पास पहले से ही बहुमत से कहीं ज़्यादा संख्याबल है और वाईएसआर कांग्रेस का भी समर्थन मिल रहा है, इसलिए सत्तारूढ़ गठबंधन अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहा है. दूसरी ओर, 300 से ज़्यादा सांसदों की मज़बूत संख्या के बावजूद, INDIA ब्लॉक चुनौती से काफ़ी पीछे है.

आज उपराष्ट्रपति चुनाव का परिणाम, सांसदों की कल हुई मतदान ट्रेनिंग के बाद हुआ रोमांचक मुकाबला

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति के लिए आज मंगलवार को मतदान होगा। उसी दिन शाम तक नतीजे घोषित होंगे। इसके साथ ही देश को 50 दिन बाद जगदीप धनखड़ की जगह नया उपराष्ट्रपति मिलेगा। 21 जुलाई को धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने के चलते चुनाव हो रहा है। पिछले दो दशकों में उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत का मार्जिन लगातार बढ़ा है। 2002 में भैरों सिंह शेखावत ने 149 वोट से जीत दर्ज की थी। वहीं, 2022 में धनखड़ ने विपक्ष की मार्गरेट अल्वा को 346 वोट से हराया था। NDA ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन और विपक्षी गठबंधन इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुदर्शन रेड्‌डी को उम्मीदवार बनाया है। आंकड़ों में NDA को स्पष्ट बढ़त है। हालांकि संसद में विपक्ष की मजबूती से पिछले दो दशक में पहली बार मुकाबला करीबी हो सकता है।  भाजपा सांसदों को उपराष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग की जानकारी दी गई । वहीं, इंडिया गठबंधन भी अपने सांसदों को मतदान प्रक्रिया समझाने के लिए मॉक पोल हुआ । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहयोगी दलों को डिनर भी दिया । चुनाव का शेड्यूल: सुबह 10 बजे वोटिंग, 6 बजे नतीजे मतदान 9 सितंबर, सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संसद भवन में होगा। वोटों की गिनती शाम 6 बजे से और तुरंत परिणाम घोषित होंगे। हर सांसद को विशेष पेन से बैलेट पर पहली वरीयता दर्ज करनी होगी। ऐसा न करने पर वोट अमान्य होगा। हर वोट का मूल्य एक समान होगा। 2017 में 11 और 2022 में 15 वोट अमान्य हुए थे। नियम: लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य देते हैं वोट उपराष्ट्रपति पद के लिए लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य वोट देते हैं। हालांकि इसके लिए व्हिप नहीं जारी हो सकती। सभी सांसद पार्टी लाइन पर वोट करें तो एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन के 439 और विपक्ष के रेड्डी के 324 वोट माने जा रहे हैं। हालांकि गुप्त मतदान में क्रॉस वोटिंग दोनों तरफ से समीकरण बिगाड़ सकती है। इसलिए दोनों ओर से पूरी तैयारी की जा रही है। लोकसभा में कुल सांसदों की संख्या 542 है। एक सीट खाली है। एनडीए के 293 सांसद हैं। वहीं, राज्यसभा में 245 सांसद हैं। 5 सीट खाली हैं। एनडीए के पास 129 सांसद हैं। यह मानते हुए कि उपराष्ट्रपति के लिए नामांकित सदस्य भी एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे। इस तरह, सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। बहुमत के लिए 391 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। अगस्त 2022 में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे। वहीं विपक्षी उम्मीदवार मार्गेट अल्वा को सिर्फ 182 वोट मिले थे। तब 56 सांसदों ने वोट नहीं डाला था। 2000 से लगातार बढ़ा जीत का अंतर 2002: भैरों सिंह शेखावत (एनडीए) ने सुशील शिंदे (कांग्रेस) को 149 वोट से हराया। 2007: हामिद अंसारी (यूपीए) ने नजमा हेपतुल्ला (एनडीए) को 233 वोट से हराया। 2012: अंसारी दोबारा निर्वाचित हुए। एनडीए के जसवंत सिंह को 252 वोट से हराया। 2017: एनडीए के वेंकैया नायडू ने विपक्ष के गोपालकृष्ण गांधी को 272 वोट से मात दी। 2022: धनखड़ ने एनडीए प्रत्याशी के तौर पर मार्गरेट अल्वा को 346 वोट से हराया। उपराष्ट्रपति चुनाव का 'नंबर गेम' समझें उपराष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मतदान करते हैं. इस लिहाज से दोनों सदनों के कुल सांसदों की संख्या 781 है. इस लिहाज से जीत के लिए 392 सांसदों का समर्थन चाहिए. लोकसभा – 542 (अध्यक्ष को छोड़कर) एनडीए: 293 विपक्ष: 234 अन्य: 15 राज्यसभा – कुल संख्या 245-6 = 239 एनडीए: 132 विपक्ष: 77 अन्य: 30 'संख्यात्मक' लड़ाई बनाम 'नैतिक' लड़ाई! एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु से आने वाले सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है. ऐसे में शुरू से ही यह बात स्पष्ट थी कि विपक्ष दक्षिण से एक उम्मीदवार उतारेगा. विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ब्लॉक ने तेलंगाना से आने वाले बी. सुदर्शन रेड्डी को उतारकर चुनावी लड़ाई को संख्यात्मक से ज़्यादा प्रतीकात्मक बना दिया है. 'इंडिया' ब्लॉक अपने घटक दलों को एकजुट रखने के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त संख्या जुटाने की उम्मीद लगाए है, क्योंकि तेलुगु अस्मिता के ज़रिए वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों को लुभाने की कवायद है. सुदर्शन रेड्डी ने जगन मोहन रेड्डी से मुलाकात की, लेकिन जगन ने उनका समर्थन करने में असमर्थता जताई, क्योंकि जगन पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एनडीए उम्मीदवार का समर्थन देने का वादा कर चुके थे. हालांकि, विपक्ष इस बात को समझने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि उन्होंने संविधान की रक्षा और लोकतंत्र की भावना की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी की प्रशंसा की. साथ ही जगन ने अनुरोध किया कि सुदर्शन की उम्मीदवारी का समर्थन करने में उनकी असमर्थता को गलत न समझा जाए. विपक्ष को 'अंतरात्मा की आवाज़' का सहारा विपक्ष उम्मीद कर रहा है कि उपराष्ट्रपति का चुनाव जितना साफ दिख रहा है, उतना है नहीं. कई सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर वोटिंग कर सकते हैं. बी. सुदर्शन रेड्डी कह भी चुके हैं कि उपराष्ट्रपति चुनाव में व्हिप नहीं होता है. ऐसे में कई विपक्षी सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर वोटिंग करेंगे. कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने शराब घोटाले मामले के आरोपी सांसद मिथुन रेड्डी की रिहाई पर टीडीपी और वाईएसआरसी के बीच प्रतिद्वंद्विता का हवाला देते हुए कहा, 'अब अंतरिम ज़मानत पर वह कुछ समय के लिए आज़ाद हैं. इसलिए नहीं कि न्याय हुआ, बल्कि इसलिए कि उन्हें उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना वोट देना है. असली सस्पेंस यह है कि क्या टीडीपी के लोग बीजेपी के उस उम्मीदवार को वोट देंगे जिसने उन्हें जेल भेजा? या न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी को वोट देंगे जो संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं?' सत्ता पक्ष को 'नंबर गेम' से दिख रही उम्मीद सीपी राधाकृष्णन को एनडीए के 'नंबर गेम' पर अपनी जीत साफ दिख रही है. एनडीए के पास लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 132 का समर्थन है. इस तरह 425 सांसदों का समर्थन साफ दिख रहा है. इससे एनडीए की जीत तय मानी जा रही है, लेकिन 2022 में एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को मिले 528 वोटों की तुलना में यह कम है. हालांकि, बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व सीपी राधाकृष्णन की जीत के मार्जिन को बढ़ाने के लिए … Read more

9 सितंबर को मतदान, उपराष्ट्रपति पद के चुनाव का पूरा शेड्यूल EC ने जारी किया

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति के उप चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. 9 सिंतबर को उपचुनाव होंगे. इसी दिन वोटिंग की जाएगी. वहीं, नामांकन की आखिरी तारीख 21 अगस्त है. साथ ही 9 सितंबर को ही वोटों की गिनती भी की जाएगी. पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को पद से इस्तीफा दे दिया था. धनखड़ ने इस्तीफा देने की वजह स्वास्थ्य कारण बताए थे. स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंप दिया था. अब उनके इस्तीफे के बाद ही उप चुनाव कराए जा रहे हैं. उपराष्ट्रपति चुनाव की अहम तारीखें:     चुनाव आयोग की अधिसूचना – 7 अगस्त, 2025 को जारी होगी.     नामांकन की अंतिम ताीरख- 21 अगस्त, 2025 (गुरुवार)     नामांकन की जांच – 22 अगस्त, 2025 (शुक्रवार)     नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख- 25 अगस्त, 2025 (सोमवार)     वोटिंग – 9 सितंबर, 2025 (मंगलवार)     वोटों की गिनती- 9 सितंबर, 2025 (मंगलवार)     मतदान 9 अगस्त को होगा और वोटों की गिनती भी उसी दिन की जाएगी. बता दें कि 21 जुलाई को जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 को समाप्त होने वाला था। लेकिन धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफे की घोषणा की थी। यदि एक से ज्यादा उम्मीदवारों का नामांकन हुआ तो फिर चुनाव कराना पड़ेगा और ऐसी स्थिति में 9 सितंबर को मतदान कराया जाएगा। 9 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक वोटिंग होगी। उसी दिन काउंटिंग होगी और शाम तक रिजल्ट आ जाएगा। जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई की शाम को अचानक ही पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इसकी जानकारी भी खुद ही एक्स अकाउंट पर लेटर शेयर करके दी थी। इससे पहले वह राष्ट्रपति भवन गए और प्रेसिडेंट द्रौपदी मुर्मू को इस्तीफा सौंप आए थे। बता दें कि जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर अब तक कयासों का दौर जारी है। भले ही उन्होंने अपने इस्तीफे में बिगड़ते स्वास्थ्य का हवाला दिया था, लेकिन विपक्ष की ओर से लगातार कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर उन्होंने अचानक पद क्यों छोड़ा है। सरकार के साथ उनके रिश्ते बिगड़ने को लेकर भी तमाम अपुष्ट दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन सरकार या फिर जगदीप धनखड़ की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ कहा नहीं गया है। गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ ने किसानों के मुद्दे पर तीखी राय जाहिर की थी। इसके अलावा बीते कुछ महीनों में विपक्ष के साथ उनके रिश्ते ज्यादा गहराने की भी चर्चाएं चलती रही हैं। कैसे होते हैं उपराष्ट्रपति पद के चुनाव उपराष्ट्रपति कार्यालय की वेबसाइट के अनुसार, उपराष्ट्रपति को चुनने के लिए एक निर्वाचक मंडल (Electoral College ) होता है. यह ही लोग वोट करते हैं. चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation System) के तहत होता है. उपराष्ट्रपति के पद के लिए किसी व्यक्ति का चुनाव करने वाले निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य शामिल होते हैं. कोई व्यक्ति उपराष्ट्रपति तब तक नहीं चुना जा सकता जब तक कि वह:     भारत का नागरिक हो     35 साल या उससे ज्यादा उसकी उम्र हो     राज्यसभा सांसद के रूप में चुनाव के लिए योग्य है. जगदीप धनखड़ ने दिया था इस्तीफा जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 21 जुलाई को भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था. धनखड़ के इस्तीफे से राजनीतिक हलचल मच गई थी. विपक्षी नेताओं ने उनके अचानक इस्तीफे को लेकर अटकलों को हवा दी थी. कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने उपाध्यक्ष जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद बीजेपी की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी का “संवैधानिक पदों और प्रक्रियाओं, दोनों को कमजोर करने” का रिकॉर्ड रहा है. सुरजेवाला ने कहा था कि धनखड़ के “अचानक और रहस्यमय” इस्तीफे ने कई सवालों के जवाब नहीं दिए हैं. शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी धनखड़ के इस्तीफे पर संदेह जताया और “पर्दे के पीछे” राजनीति का आरोप लगाया था.