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एमपी में पानी की स्थिति में 128 प्रतिशत की वृद्धि, देश में पहले स्थान पर, अमृत सरोवरों के मामले में भी नेतृत्व

भोपाल   मध्यप्रदेश में जल संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। विगत वर्षों में अभियान के दो चरणों में प्रदेश में 6 हजार 393 अमृत सरोवरों में पहले चरण में 5 हजार 839 अमृत सरोवर बनाए गए हैं। वहीं दूसरे चरण में 554 अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। इस प्रकार अभियान के क्र‍ियान्‍वयन में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हैं। मध्यप्रदेश मिशन अमृत सरोवर के तहत देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पहले स्‍थान पर है। इसकी जानकारी आईआईटी दिल्ली और ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से संचालित भू प्रहरी परियोजना की रिपोर्ट से आई है। अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में 128 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मध्‍यप्रदेश देश में प्रथम स्‍थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य तालाबों के औसत सतह क्षेत्र में वृद्धि के मामले में देश में प्रथम स्थान पर है। पिछले दो वर्षों में प्रदेश में अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में 128.714 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत 11.27 प्रतिशत से कहीं अधिक है। AI, सैटेलाइट और LiDAR तकनीक से किया आकलन भारत सरकार ने मध्यप्रदेश में बने अमृत सरोवरों की आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट, SONAR और LiDAR के माध्यम से न केवल तालाबों के औसतन सतह क्षेत्र बल्कि जल की कुल मात्रा (वॉल्यूम) का भी आकलन किया गया। इसमें सामने आया कि मानसून के दौरान जल संचयन क्षमता में सुधार हुआ है और सूखा-प्रवण एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में भी गर्मियों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। सतह क्षेत्र में वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव भूजल पुनर्भरण पर भी पड़ा है, जिससे आसपास के कुओं और ट्यूबवेल का जल स्तर बढ़ा है। साथ ही, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों की आजीविका में सुधार हो रहा है। सिपरी सॉफ्टवेयर से किया चयन मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्‍त अवि प्रसाद ने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत प्रदेश में अमृत सरोवरों के निर्माण के लिए स्थानों का चयन वैज्ञानिक पद्धति से किया गया है। इसके लिए सिपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया। इसके माध्यम से भूविज्ञान, कंटूर, जल निकासी नेटवर्क, मिट्टी के प्रकार और भूमि का उपयोग जैसे विभिन्न डेटा लेयर्स का एकीकृत विश्लेषण किया गया। इस प्रक्रिया के जरिए ऐसे उपयुक्त स्थानों का चयन किया गया, जहां जल संरक्षण और संचयन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। यह पहल प्रदेश में जल प्रबंधन को वैज्ञानिक और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अप्रैल से चंडीगढ़ में बढ़ेगी पानी की कीमत, गारबेज कलेक्शन चार्ज और कम्युनिटी सेंटर की बुकिंग भी महंगी होगी

चंडीगढ़  चंडीगढ़ के लोगों की जेब पर एक अप्रैल से अधिक बोझ पड़ने वाला है। पानी से लेकर डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन के चार्ज बढ़ने वाले हैं। वाटर टैरिफ में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। इसके अलावा सीवरेज सेस भी बढ़ेगा। साथ ही डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन चार्ज में होगी बढ़ोतरी। अभी 0-15 किलोलीटर (एक किलोलीटर में एक हजार लीटर) पानी पर प्रति केएल 3.47 रुपये खर्च आता है जो बढ़कर 3.64 रुपये प्रति किलोलीटर हो जाएगा। 60 केएल से अधिक पर 24.31 रुपये प्रति केएल खर्च बिल में जुड़कर आने लगेगा। हालांकि पांच प्रतिशत की वृद्धि बहुत बड़ी नहीं है। कम पानी खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को मामूली अतिरिक्त खर्च वहन करना होगा। जैसे पहली 0-15 किलोलीटर की स्लैब में 15 पैसे की बढ़ोतरी से तीन से पांच रुपये ही अधिक चुकाने होंगे। घरों की एरिया के अनुसार चार्ज वार्षिक बढ़ोतरी नियम के कारण पहली अप्रैल से गारबेज कलेक्शन चार्ज भी सभी केटेगरी में पांच प्रतिशत तक बढ़ गया है। दो मरला तक के घरों का गारबेज कलेक्शन चार्ज 57.88 रुपये से बढ़कर 60.77 रुपये हो जाएगा। दो मरला से 10 मरला तक के घरों का चार्ज 115.76 रुपये से बढ़कर 121.55 रुपये होना है। 10 मरला से एक कनाल तक के घरों को पहली अप्रैल से 231.53 रुपये की जगह 243.11 रुपये अदा करने होंगे। इसी तरह एक कनाल से दो कनाल तक के घरों का शुल्क 289.38 रुपये से बढ़कर 303.85 रुपये हो जाएगा। वहीं दो कनाल से अधिक एरिया के घरों के लिए गारबेज कलेक्शन चार्ज 405.09 रुपये से बढ़कर 425.34 रुपये होना है। कम्युनिटी सेंटर की बुकिंग महंगी होगी पहली अप्रैल से कम्युनिटी सेंटर की बुकिंग भी महंगी होगी। इसमें कैटेगरी के हिसाब से कम्युनिटी सेंटर की बुकिंग रेट बढ़ने हैं। पांच से दस प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि बुकिंग में हो जाएगी। शराब होगी महंगी, ठेके बदलेंगे पहली अप्रैल से नई आबकारी नीति भी लागू हो जाएगी। इसके बाद शराब के रेट भी नई आबकारी नीति के हिसाब से ही लागू होने हैं। हालांकि शराब के रेट में ज्यादा बदलाव नहीं होगा। केवल दो प्रतिशत रेट ही बढ़ाने प्रस्तावित किए गए हैं। शराब के नए ठेकों का आवंटन होने के बाद पहली अप्रैल से यह शुरू हो जाएंगे। पहली अप्रैल से बूथ, शाप और नगर निगम की दूसरी संपत्ति के किराये में भी पांच से दस प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी।  

उत्तर बस्तर कांकेर में जल संरक्षण और आजीविका पर कार्य करने वाली महिलाओं ने साझा किया अपना अनुभव

उत्तर बस्तर कांकेर : आजीविका और जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समूह की महिलाओं ने साझा किए अनुभव संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले हुए सम्मानित उत्तर बस्तर कांकेर ग्रामों में जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं, सामुदायिक सदस्यों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं अन्य हितधारकों के अनुभवों को साझा करने शुक्रवार 20 मार्च को जिला पंचायत एवं गैर शासकीय संगठन प्रदान के संयुक्त तत्वावधान में जिला पंचायत के सभाकक्ष में "प्रेरणा से प्रगति" नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और पंचायत स्तर पर जल संरक्षण और संवर्धन पर चर्चा की गई, साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री हरेश मंडावी ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समुदाय एवं ग्राम पंचायतों को प्रेरित करने के साथ-साथ उनके कार्यों को नई दिशा मिलती है। उन्होंने पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) के महत्व, ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) की प्रभावशीलता तथा महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही यह भी बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में एक डिजिटल टूल विकसित कर ग्राम पंचायत विकास योजना की प्रक्रिया को डिजिटाइज किया गया है, जिसके माध्यम से जिले की प्रगति अब ऑनलाइन रूप से देखी जा सकती है। इस डिजिटल व्यवस्था से योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता एवं समयवद्ध क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों, स्व सहायता समूह की महिलाओं एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के कैडरों ने अपने अनुभव साझा किए। कई प्रतिभागियों ने बताया कि किस प्रकार जल संसाधन आधारित आजीविका गतिविधियों जैसे मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन एवं अन्य कृषि आधारित कार्यों के माध्यम से उनकी आय में वृद्धि हुई है तथा जीवन स्तर में सुधार आया है। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संकुल स्तरीय संघ, उच्च पंचायत उन्नति सूचकांक प्राप्त करने वाली तथा बेहतर ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने वाली ग्राम पंचायतों एवं सक्रिय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कैडरों का सम्मान किया गया। विशेष रूप से आजीविका संवर्धन हेतु जल क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली दीदियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग से न केवल अपनी आय में वृद्धि की है, बल्कि अन्य समुदाय सदस्यों के लिए भी प्रेरणा का कार्य किया है। इस अवसर पर जिला एवं जनपद पंचायतों के अधिकारी कर्मचारी और समूह की महिलाएं उपस्थित थीं।

84 दिन का ही बचा पानी, नर्मदा लाइन का टी-कनेक्शन पूरा हो तो रोज हो सकेगा जलप्रदाय

उज्जैन  गर्मी की शुरुआत के साथ जलप्रदाय को लेकर शहरवासियों को हमेशा की तरह चिंता सताने लगी है। इसे दूर करने के लिए नगर निगम ने नर्मदा से पानी लेकर सप्लाय की योजना 2023 में बनाई। दो साल में लाइन तो लगभग पूरी डाल दी पर इसे जोड़ने के लिए टी कनेक्शन बाकी रह गया। यह अब तक पूरा नहीं हुआ है। अफसरों का कहना है हरिफाटक से चिंतामण ब्रिज तक फोरलेन निर्माण के चलते पीएचई का फिल्टर प्लांट का हिस्सा भी हटाया जाना था। पर पूरे शहर पर असर होने के चलते बचा लिया गया। इन सबके चलते ही केवल टी कनेक्शन इतने समय तक अटका रहा। अब कनेक्शन हो जाएगा तो शहरवासियों को रोज ही जलप्रदाय किया जा सकेगा। पिछले साल 15 अप्रैल से निगम के पीएचई विभाग ने एक दिन छोड़कर जलप्रदाय शुरू कर दिया था। इससे जून तक बारिश नहीं होने तक लोग रोज ही पानी के लिए जूझते रहे। इस बार क्या होगा… भास्कर टीम ने जनता की समस्या को देखते हुए पड़ताल की। इस बार 10 दिन का पानी ज्यादा : शहर के प्रमुख जलस्रोत गंभीर डेम में पिछले साल 12 मार्च को 70 दिन का पानी शेष था। इस बार 12 मार्च को गंभीर डेम में 84 दिन का पानी है। यानी पिछले साल की तुलना में 10 दिन का पानी ज्यादा है। हालांकि निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस बार नर्मदा का पानी उपलब्ध हो जाएगा। इसलिए फिलहाल एक दिन छोड़कर जलप्रदाय लागू करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। हरिफाटक से चिंतामण ब्रिज तक फोरलेन निर्माण के चलते नहीं हो रहा था काम फिलहाल 931 एमसीएफटी पानी पर गर्मी में वाष्पीकरण और पानी चोरी से होती है दिक्कत वर्तमान में गंभीर में 1031 एमसीएफटी पानी है। इसमें से लगभग 100 एमसीएफटी डेड स्टोरेज को हटा दिया जाए तो जलप्रदाय के लिए करीब 931 एमसीएफटी पानी उपलब्ध रहेगा। शहर में प्रतिदिन करीब 11 एमसीएफटी पानी की जरूरत होती है, इस हिसाब से लगभग 84 दिन का पानी बचा है। हालांकि गर्मी में वाष्पीकरण और पानी की चोरी के कारण जल प्रदाय में दिक्कत होती है। प्रशासन द्वारा जल अधिनियम 1986 लागू करने की तैयारी भी की जा रही है, जिससे पानी की चोरी पर नियंत्रण किया जा सके। गऊघाट प्लांट से फिल्टर होकर पानी सीधे घरों तक पहुंच सकेगा, लोगों को मिलेगी राहत पाइपलाइन जुड़ने के बाद गऊघाट स्थित फिल्टर प्लांट में नर्मदा का पानी सीधे पहुंचेगा। करीब 100 से 150 मीटर लंबी 1000 एमएम नर्मदा पाइपलाइन को 800 एमएम गंभीर पाइपलाइन से जोड़ा जा रहा है। यहां से पानी आने के बाद गऊघाट प्लांट से फिल्टर होने के बाद पानी सीधा पाइपलाइन द्वारा रहवासियों के घर में आ सकेगा। अगर गंभीर का पानी में कमी आती है, तो जलप्रदाय के लिए नर्मदा का पानी उपलब्ध हो सकेगा। शहरवासियों को पेयजल को लेकर राहत मिल सकेगी। लोगों को गर्मी में परेशान नहीं होना पड़ेगा। 3 साल से अधूरा प्रोजेक्ट अब जाकर पूरा कर रहे- शहर के लिए राहत की बात यह है कि नर्मदा पाइपलाइन को गंभीर की मुख्य लाइन से जोड़ने का काम लगभग पूरा हो चुका है। केवल टी कनेक्शन बाकी है, जिसे जोड़ने के लिए एक दिन जलप्रदाय बंद करना पड़ेगा। इसी कारण फिलहाल इसे मेंटेनेंस कार्य के साथ जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। वर्ष 2023 में शुरू हुए 1.88 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट को दो माह में पूरा होना था। अब जल्द पूरा करने का अफसरों का दावा है।

भोपाल जल संकट: भू-जल घटने के कारण निजी नलकूपों पर रोक, जिला घोषित जल अभावग्रस्त

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत आदेश जारी करते हुए पूरे भोपाल जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। इसके साथ ही जिले में नए निजी और अशासकीय नलकूपों के खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। भू-जल के अत्यधिक दोहन से संकट गहराया लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री ने प्रशासन को जानकारी दी कि जिले में कृषि और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भू-जल स्रोतों का अत्यधिक उपयोग हो रहा है। इसके कारण नलकूपों और पेयजल स्रोतों का जल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। यदि यह स्थिति जारी रही तो आगामी गर्मियों में भोपाल जिले में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है। बिना अनुमति नहीं हो सकेगा बोरिंग मशीन का प्रवेश जारी आदेश के अनुसार जिले की राजस्व सीमाओं में बिना अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति के कोई भी बोरिंग मशीन प्रवेश नहीं कर सकेगी और नए निजी नलकूपों का खनन नहीं किया जा सकेगा। हालांकि सार्वजनिक सड़कों से गुजरने वाली मशीनों को इस प्रावधान से छूट दी गई है। अवैध बोरिंग पर जब्ती और एफआईआर प्रशासन ने राजस्व और पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि कोई बोरिंग मशीन अवैध रूप से जिले में प्रवेश करती है या प्रतिबंधित स्थानों पर नलकूप खनन का प्रयास करती है तो उसे तुरंत जप्त किया जाए और संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज की जाए। विशेष परिस्थितियों में मिल सकेगी अनुमति कलेक्टर ने सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को निर्देश दिया है कि यदि किसी क्षेत्र में अपरिहार्य परिस्थिति हो तो उचित जांच के बाद नलकूप खनन की अनुमति दी जा सकती है। आदेश उल्लंघन पर सख्त सजा आदेश का उल्लंघन करने पर मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत दो हजार रुपये तक का जुर्माना, दो वर्ष तक का कारावास या दोनों का प्रावधान है। सरकारी योजनाओं पर नहीं लागू होगा प्रतिबंध यह आदेश सरकारी योजनाओं के तहत किए जाने वाले नलकूप खनन पर लागू नहीं होगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग आवश्यकतानुसार योजनाओं के अंतर्गत नलकूप खनन का कार्य जारी रख सकेगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर निजी जल स्रोतों को सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के लिए अधिग्रहित किया जा सकता है।

जल संचय जन भागीदारी अभियान की समीक्षा बैठक 07 मार्च को

शहडोल  जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जल संचय जन भागीदारी अभियान के संबंध में चर्चा एवं समीक्षा बैठक कलेक्टर डॉ केदार सिंह की अध्यक्षता में 7 मार्च 2026 को प्रातः 11 बजे कलेक्टर कार्यालय के विराट सभागार में आयोजित की जाएगी।  बैठक में जिले में चल रहे जल संरक्षण कार्यों, जल संचय के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा जन भागीदारी से अभियान को प्रभावी बनाने के संबंध में विस्तृत चर्चा की जाएगी।   बैठक में वन विभाग के समस्त एसडीओ, सभी जनपद पंचायतों के सीईओ, जनपदों के सहायक यंत्रियों एवं उपयंत्रियों, नगर निकायों के सीएमओ, जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, डीपीसी, महिला एवं बाल विकास विभाग, पीएचई, स्वास्थ्य विभाग तथा जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को उपस्थित रहने के लिए कहा गया है।

हिसार में दूषित पानी पीने के कारण 90 बीमार

हिसार. पड़ाव चौक, प्रताप नगर व यादव मुहल्ला में बीते 6 माह से लगातार एक हजार घरों में दूषित पानी सप्लाई आने से क्षेत्रवासी परेशान है। जिससे उपरोक्त तीनों क्षेत्रों के 90 लोग उल्टी, दस्त, टाइफाइड व वायरल से ग्रस्त हो चुके हैं, जिनमें 20 बच्चे भी शामिल है। समस्या को लेकर पब्लिक हेल्थ के दफ्तरों के चक्कर काटने से परेशान क्षेत्रवासियों का सब्र का बांध टूट गया और दोपहर 1 बजे पड़ाव चौक पर जाम लगा दिया। करीब डेढ़ घंटे तक जाम लगने से राहगीरों सहित लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना की जानकारी पुलिस व पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों को लगी तो वे जाम खुलवाने के लिए घटनास्थल की तरफ दौड़े। जहां आक्रोशित क्षेत्रवासियों ने दूषित पानी सप्लाई होने की पीड़ा बताई और दैनिक दिनचर्या से लेकर बच्चे सहित लोगों को बीमारी से ग्रस्त होने का दर्द भी बताया। दूसरी तरफ पुलिस व पब्लिक हेल्थ के अधिकारी समझाने में लगे रहे। करीब डेढ़ घंटे बाद शुक्रवार शाम तक घरों में स्वच्छ पानी सप्लाई देने के आश्वासन पर जाम खोल दिया गया। क्षेत्र विवाद पर दो पार्षदों में भी हुई खींचतान पड़ाव चौक निवासी मनोज ने बताया कि जाम के दौरान घटनास्थल पर दो पार्षद भी पहुंचे, जिनमें वार्ड नंबर-2 के मोहित सिंगला व वार्ड नंबर-6 के कुलदीप शामिल रहे। क्षेत्रवासी ने बताया कि उपरोक्त दोनों पार्षदों में क्षेत्र को लेकर खींचतान हो गई। दोनों पार्षदों का कहना था कि पड़ाव चौक, प्रताप नगर व यादव मुहल्ला उनके अधीनस्थ क्षेत्र में नहीं है। इसलिए वे कुछ नहीं कर सकते। लेकिन पेयजल को लेकर किसी भी पार्षद ने सुध नहीं ली और खींचतान जारी रखी। क्षेत्रवासी बोले: पुलिस ने मामला दर्ज करने का डर दिखाया पड़ाव चौक निवासी मनोज, कपिल, कमला, विमला, राजबाला ने बताया कि जाम खुलवाने के लिए पुलिस ने उन पर मामला दर्ज करने का डर दिखाया। जबकि पेयजल को लेकर पुलिस ने किसी तरह की जानकारी नहीं जुटाई। उपरोक्त क्षेत्रवासियों का आरोप है कि जाम लगाने पर पुलिस ने उन पर मामला दर्ज का डर दिखाया। जबकि मूलभूत सुविधा जिसमें पेयजल खराब हालत को लेकर पब्लिक हेल्थ पर किसी तरह की कोई कार्रवाई करने तक की बात नहीं की। लोग बोले- 24 घंटे में पानी साफ नहीं आया तो जाम लगाएंगे क्षेत्रवासी कविता, सजना, मुन्नी, विमला, फूली ने बताया कि अगर 24 घंटे तक पानी की समस्या का निदान नहीं हुआ तो वे फिर से जाम लगाएंगे। हालांकि दूषित पानी को लेकर पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दे दी गई है।

झज्जर की 32 कॉलोनियों और 11 गांवों को मिलेगा स्वच्छ पानी

झज्जर. हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में झज्जर क्षेत्र में पेयजल की किल्लत और पानी की गुणवत्ता का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक गीता भुक्कल ने क्षेत्र के गांवों में गंदे पानी की आपूर्ति और बढ़ते टीडीएस स्तर को लेकर सरकार को घेरते हुए चिंता भी जताईं। गौरतलब है कि इन समस्याओं को लेकर दैनिक जागरण ने हाल ही में एक विस्तृत अभियान चलाकर टीडीएस के खतरनाक स्तर और बदहाल जलघरों की स्थिति को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसका असर भी सदन की कार्यवाही में भी देखने को मिला। चर्चा के दौरान बोतलबंद पानी से होने वाले नुकसान पर भी बात की गईं। जिस पर सीएम नायब सिंह सैनी ने सदन के माध्यम से आमजन से अपील की कि बीमारियों से बचने के लिए प्लास्टिक का उपयोग बंद करें और जल संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ें। इसी कड़ी में कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने विश्वास दिलाया कि अगस्त 2026 तक साल्हावास और आसपास के क्षेत्रों में मरम्मत और शुद्धिकरण का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। इन गांवों में पेयजल संकट का मुद्दा उठा विधायक गीता भुक्कल ने कालियावास, खानपुर कलां, मुंदसा, खोरड़ा, बहु, नौगांव, साल्हावास, मातनहेल, ढाणा, धनीरवास और झज्जर शहर के वाटर वर्क्स की बदहाली का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कई जलघरों की चारदीवारी टूटी हुई है और नहरों से आने वाला पानी बिना उचित शुद्धिकरण के सप्लाई किया जा रहा है। विशेष रूप से नौगांव में वर्षों पुरानी पाइपलाइनों के कारण लीकेज और गंदे पानी के मिक्स होने की शिकायत दर्ज कराई गई। टीडीएस और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं विधायक ने टीडीएस स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के विपरीत कई क्षेत्रों में खारा पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे कैंसर, हड्डियों की बीमारी और किडनी से संबंधित समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि जल भंडारण टैंकों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। पेयजल पाइपलाइनों में रिसाव को तुरंत रोका जाए। इसके अलावा पैक्ड वॉटर और प्लास्टिक बोतलों की गुणवत्ता की भी जांच की जाए। करोड़ों रुपये के बजट और नई योजनाओं का एलान कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने विधायक के सवालों का विस्तार से जवाब देते हुए बताया कि सरकार हर घर स्वच्छ जल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री ने सदन को निम्नलिखित आश्वासन दिए- नौगांव के लिए नई योजना: नौगांव में नहर आधारित पानी की आपूर्ति के लिए विस्तार से एस्टीमेट तैयार किया गया है, जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति जल्द मिल जाएगी। मरम्मत कार्य: खानपुर कलां के लिए 233 लाख, बहु के लिए 402 लाख, मुंदसा के लिए 178 लाख और साल्हावास के लिए 282 लाख रुपये की राशि टैंकों की मरम्मत और पाइपलाइनों के लिए स्वीकृत की गई है। टीडीएस निगरानी: मंत्री ने बताया कि विभाग की लैब नियमित रूप से टीडीएस चेक करती है और जहां स्तर 500 से अधिक होता है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है। झज्जर शहर: शहर की 32 नई स्वीकृत कालोनियों में पाइपलाइन बिछाने का काम जल्द शुरू किया जाएगा। 32 कालोनियों को मिलेगा स्वच्छ पेयजल पेयजल समस्याओं की चर्चाओं के बीच शहर के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। विधायक गीता भुक्कल द्वारा विधानसभा में उठाए गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने स्पष्ट किया है कि झज्जर शहर की 32 नव-स्वीकृत कॉलोनियों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजना तैयार की गई है। इन कॉलोनियों में बुनियादी ढांचे और जल आपूर्ति के लिए आवश्यक बजट आवंटित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। आश्वस्त किया कि विभाग पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने के लिए तकनीकी सर्वेक्षण पूरा कर चुका है और निविदा प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

घर-घर पहुँच रहा पानी, बदली ठरकपुर की कहानी

घर-घर पहुँच रहा पानी, बदली ठरकपुर की कहानी हर घर नल, हर घर जल का साकार हुआ सपना बिलासपुर जल जीवन मिशन से मुंगेली जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर ग्राम ठरकपुर में हर घर नल, हर घर जल का सपना साकार हुआ है। मिशन के अंतर्गत ठरकपुर में पाइपलाइन बिछाकर प्रत्येक घर को नल कनेक्शन प्रदान किया गया है। इसके बाद से गांव में न केवल पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, बल्कि पानी की गुणवत्ता और नियमितता भी बेहतर हुई है। अब गांव के हर घर में स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। इसने ठरकपुर की कहानी बदल गई है। कभी पेयजल संकट से जूझने वाले ठरकपुर की तस्वीर आज पूरी तरह बदल चुकी है। एक समय था जब पानी के लिए हैंडपंपों पर लंबी कतारें, मटकों और बाल्टियों के साथ ग्रामीणों की भीड़ तथा गर्मी के दिनों में गांव में जल संकट होता था। पहले पूरा गांव पेयजल के लिए 8 हैंडपंपों के भरोसे था। गर्मियों में जलस्तर गिरने से ये हैंडपंप अक्सर जवाब दे जाते थे, जिससे ग्रामीणों विशेषकर महिलाओं को दूर-दराज के जल स्रोतों से पानी लाने मजबूर होना पड़ता था। ठरकपुर की श्रीमती गंगा यादव बताती हैं कि पहले छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर दूर हैंडपंप से पानी लाना पड़ता था। गर्मी में बहुत परेशानी होती थी। अब घर में नल लग गया है, भरपूर पानी मिल रहा है और जीवन आसान हो गया है। नल जल योजना से महिलाओं की मेहनत और समय की बचत हो रही है, जिसे अब वे परिवार, बच्चों की देखभाल और अन्य रचनात्मक कार्यों में लगा पा रही हैं, इससे वहां की महिलाओं के चेहरे में मुस्कान आई है। ठरकपुर में जल जीवन मिशन केवल पानी की व्यवस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सुविधा और सम्मान का माध्यम बनकर आया है। स्वच्छ जल से बीमारियों में कमी आई है और ग्रामीणों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है।

पानी की किल्लत से जूझ रहे नगर वासी

पानी की किल्लत से जूझ रहे नगर वासी   मंडला  जनपद पंचायत घुघरी के ग्राम पंचायत नैझर मैं लोग पानी के लिए बहुत ही समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है गर्मी के दिनों में हैंड पंप  में पानी निकलना बंद हो जाता है और लोग कुआं बावली से पानी पीते हैं उसके लिए दो से तीन किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है और पानी लाना पड़ता है गर्मी की चल चलती धूप और ऊपर से दो गुंडी पानी सिर पर रखा जाता हैं कई लोगों को तो चक्कर आ जाते हैं गिर जाते हैं जबकि शासन प्रशासन मैं हमारे प्रिय यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेझर ग्राम पंचायत को डेढ़ से 2 करोड़ की योजना ग्राम वासियों के लिए पी एच ई द्वारा दी गई हैं इस योजना का क्रियान्वयन हुआ पानी टंकी तो बनाई गई गांव में पाइप लाइन भी बिछा दी गई पाइपलाइन कहीं बिछी कहीं नहीं बिछी सीमेंट का नल घर के सामने खड़ा कर दिया गया है लेकिन 3 वर्षों में किसी के घर पर दो बूंद पानी नहीं आया यह कैसी शासन प्रशासन की योजना है ठेकेदार एवं पी एच ई के अधिकारी मनोज भास्कर के द्वारा इन लोगों का सारा पैसा निकाल दिया गया है ना ही इनके एसडीओ और इंजीनियर कभी देखने नहीं आए ठेकेदार जो कह दिया वह मान लिया गया और पूरा पैसा निकाल दिया गया इसमें अधिकारी कर्मचारी  की लूट है गांव के लोगों का कहना था की हम लोग जनसुनवाई में आवेदन देकर आए हैं  कहीं भी हमारी कोई नहीं सुन रहा है लगता है कि शासन प्रशासन पर बैठे लोग पी एच ई द्वारा किसी ने घूस दी हो है इसलिए कुछ नहीं बोलते चाहे वह पीएचई मंत्री संपत्तिया उइके जी या फिर सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते जी सभी को हमने आवेदन निवेदन सब किया है सब शांत रह जाते हैं इन इनकी शांती की खामोशी कुछ बयान करती है यह कहीं ना कहीं पी एच ई अधिकारी के दबाव में जरूर है गांव के लोगों की समस्या को सुनकर हमारे  आंसू निकल आते हैं जब हम उनकी समस्या को देखते हैं यही डेढ़ दो लाख की यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की योजना का नहीं हो रहा है क्रियान्वयन मंडला से प्रीतम कुमार बर्मन की रिपोर्ट