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जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को मिशन मोड में करें पूरा – मुख्यमंत्री साय

रायपुर  जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। प्रदेश में जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हो और प्रत्येक परिवार को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिले, इस लक्ष्य के साथ राज्य सरकार जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री  साय ने जल संचय जन भागीदारी अभियान की जिलेवार प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग हो और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में काम किया जाए। जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण अभियान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जल संरक्षण को केवल शासकीय कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया जाना चाहिए। वर्ष 2025-26 में प्रदेश के अनेक जिलों ने जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अब सभी जिलों को अपने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर बेहतर परिणाम के लिए प्रयास करना होगा। मुख्यमंत्री ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से अभियान की जिलेवार प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कोरिया, धमतरी राजनांदगांव सहित अन्य जिलों में जल संरक्षण की दिशा में किए गए कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों के अनुभव और कार्यप्रणाली का लाभ अन्य जिलों को भी मिलना चाहिए, ताकि पूरे प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों को समान गति मिल सके। जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश कुमार टोप्पो ने बैठक में बताया कि जल संचय जन भागीदारी अभियान में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों को इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के साथ उससे बेहतर प्रदर्शन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के प्रयास तभी दीर्घकालिक परिणाम देंगे, जब शासन के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। जनभागीदारी की इसी शक्ति के माध्यम से छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थायी रूप से स्थापित करना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत सभी जिलों के नोटिफाइड नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। अभियान की मुख्य सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की सतत मॉनिटरिंग की जाए तथा जहां भी कमियां सामने आएं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे हों। हर घर तक नल से स्वच्छ जल पहुंचाना हमारा लक्ष्य मुख्यमंत्री  साय ने बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। प्रदेश के प्रत्येक घर तक पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए। सभी कलेक्टर अपने-अपने जिलों में इसकी नियमित समीक्षा करें और जहां भी प्रशासनिक, तकनीकी अथवा क्रियान्वयन संबंधी बाधाएं आ रही हैं, उनका तत्काल समाधान करते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराएं। उन्होंने कहा कि केवल अधोसंरचना निर्माण ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ परिवारों तक पहुंचे और लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो। इसके लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जाए। पूर्ण कार्यों के भुगतान में न हो अनावश्यक विलंब मुख्यमंत्री  साय ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण हो चुके कार्यों के भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन कार्यों को निर्धारित मापदंड और गुणवत्ता के अनुरूप पूर्ण किया जा चुका है, उनका भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर मिशन की नियमित समीक्षा करते हुए प्रेजेंटेशन में सामने आई कमियों और समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए। योजना से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय से शेष कार्यों को गति दी जाए। हर जिले की प्राथमिकता बने जल सुरक्षा मुख्यमंत्री  साय ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे अपने जिलों में जल संरक्षण और हर घर तक नल से पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। स्थानीय परिस्थितियों और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए तथा जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संचय जन भागीदारी अभियान और जल जीवन मिशन सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े हैं। इन प्रयासों के प्रभावी क्रियान्वयन से जहां वर्तमान में लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा मिलेगी, वहीं भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव भी तैयार होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करने का अवसर है। इसके लिए शासन-प्रशासन के साथ जनभागीदारी को और मजबूत करते हुए प्रत्येक जिले को अपनी पूरी क्षमता से कार्य करना होगा। हमारा लक्ष्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जहां जल का बेहतर संरक्षण हो, जल स्रोत सुरक्षित और समृद्ध हों तथा प्रत्येक परिवार को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल सहज रूप से उपलब्ध हो। बैठक में मुख्य सचिव  विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, जल संसाधन विभाग के सचिव  आर. एस. टोप्पो, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  अब्दुल कैसर हक, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल, संयुक्त सचिव  प्रभात मलिक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मानसून से पहले पूरे हों एनीकट और बांध निर्माण कार्य, अधिकारियों को निर्देश

अलवर वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संजय शर्मा ने गुरूवार को अलवर में वन विभाग के अधिकारियों की टीम के साथ  भाखेडा, भूरासिद्ध व जरखवाला एनीकट एवं निदानी बांध का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री शर्मा ने जल संरक्षण से संबंधित कार्यों का बारीकी से अवलोकन कर निर्देश दिये कि एनिकट व बांध निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखते हुए सभी कार्य मानसून से पूर्व ही पूर्ण होना सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिये कि एनिकट व बांध में वर्षा जल आने में कोई अवरोध न रहे, इसके लिए आसपास के केचमेंट एरिया की साफ-सफाई करायें। डिसिल्टिंग आदि कार्य को भी समयबद्ध रूप में पूर्ण करायें। उन्होंने निर्देश दिये कि एनिकट के किनारे भ्रमण हेतु सुन्दर पाथवे, ग्रीनरी एवं सौन्दर्यकरण के कार्य शुरू करें। ये एनिकट बनने से पर्यावरण संरक्षण के साथ वन्यजीवों व पेड-पौधों को जल की उपलब्धता होगी,  वर्षा जल संरक्षण से शहर के भूमिगत जल स्तर में वृद्धि होगी। इन एनिकटों के सौन्दर्यकरण से पर्यटन में भी वृद्धि होगी। उन्होंने चोर डूंगरी पहाडी पर श्रीराम वाटिका हेतु चिन्हित किए गए स्थान का अवलोकन कर वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वाटिका के निर्माण हेतु कार्य योजना तैयार कर इसका निर्माण प्राकृतिक एवं पर्यावरण संरक्षण को दृष्टिगत रखते हुए कराया जाए जिससे यहां आने वाले लोगों को प्राकृतिक परिवेश का अनुभव हो सके। उन्होंने निर्देश दिया कि वाटिका में वृहद स्तर पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाएं,  सौन्दर्यकरण व हरियाली पर विशेष फोकस करें। इसके उपरान्त उन्होंने अपने प्रतिदिन के पौधारोपण के संकल्प के तहत मातृवन में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक श्री अरूण प्रसाद, डीएफओ अलवर श्री राजेन्द्र हुड्डा, डीएफओ सरिस्का श्री अभिमन्यु सहारण, श्री घनश्याम गुर्जर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

रांची में भूजल स्तर बढ़ाने की बड़ी योजना, 3 लाख मिलियन लीटर जल रिचार्ज का लक्ष्य

रांची  राज्य में भूगर्भ जल स्तर को बढ़ाने और वर्षा का जल संरक्षित करने के लिए पेयजल स्वच्छता विभाग और नगर निकायों की तरफ से अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए करीब 2500 ऐसे जलस्रोतों की पहचान की गई है जिनमें कम जल रहता है या सूखे पड़े हैं। इनकी जलभंडारण क्षमता को बढ़ाकर वर्षा का जल इनमें जमा किया जाएगा। इसके अलावा खराब पड़े हैंडपंप, डीप बोरिंग और खदानों के जरिए भी जल संग्रहण किया जाएगा। केंद्रीय भूजल परियोजना के विज्ञानी सलाहकार परमिंदर सिंह ने बताया कि इस तरह के उपायों से करीब तीन लाख मिलियन लीटर जल जमीन के नीचे भेजा जाएगा। यह जल पहले से बने वाटर रिचार्ज सिस्टम के अतिरिक्त होगा। भूजल की स्थिति को इससे नया रिचार्ज सिस्टम मिलेगा और यह लंबे समय तक प्रभावी रहेगा। परमिंदर सिंह ने बताया कि नदियों और तालाबों का पानी एक दूसरे को रिचार्ज करेगा तो सतह पर मौजूद जलस्रोतों में सालों भर जल की उपलब्धता रहेगी। बड़े बांध की जगह नए कच्चे निर्माण से रोकेंगे जल राज्य में 28 के करीब बड़े बांध हैं जिनमें साल भर जल रहता है। पिछले तीस सालों में किसी बड़े बांध का निर्माण नहीं हुआ है। लेकिन दस हजार के करीब कच्ची संरचना बनी है। पिछले साल हुई भारी बारिश ने ग्रामीण और वन क्षेत्र में सतह के उपर और नीचे मौजूद जल को स्थिर किया है। लेकिन शहरी क्षेत्र में जल की समस्या गर्मी के साथ ही चरम पर है। इसे रोकने के लिए शहरों के आसपास भी कच्चे निर्माण कर उनमें जल संरक्षण किया जाएगा। बढ़ा है राज्य का जलभंडार राज्य में इस वर्ष भी बारिश समय से पहले हुई है। पिछले साल वर्षा जल रिचार्ज और जल दोहन का अनुपात सही रहा था। नई वर्षा ने जल भंडारण को बढ़ाया है जबकि अभी मानसून आने ही वाला है। इससे राज्य को सुरक्षित जल भंडारण में मदद मिलेगी।  

सचिवों की समिति की बैठक में बड़ा निर्देश: ई-फाइल प्रक्रिया होगी सरल, शिकायतों का होगा त्वरित निस्तारण

जयपुर मुख्य सचिव श्री वी.श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में सचिवों की समिति (Committee of Secretaries) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव एवं शासन सचिव उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति, बजटीय प्रावधानों के विरुद्ध निधियों के उपयोग तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने योजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचे। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक विलंब समाप्त करने के लिए ई-फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-फाइल को जिन विभिन्न स्तरों से होकर गुजरना पड़ता है, उनकी संख्या यथासंभव कम की जाए ताकि निर्णय प्रक्रिया में तेजी आए तथा प्रशासन अधिक दक्ष एवं उत्तरदायी बन सके। उन्होंने विभागों को लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष ध्यान देने के लिए भी कहा। बैठक में मुख्य सचिव ने वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान जैसे जनभागीदारी आधारित अभियानों में व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी जनजागरूकता एवं आउटरीच कार्यक्रम आयोजिंत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर समाज की सक्रिय भागीदारी अभियान की सफलता की कुंजी है तथा विभागों को स्थानीय स्तर पर व्यापक संवाद एवं सहभागिता को बढ़ावा देना चाहिए। मुख्य सचिव ने राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त होने वाली शिकायतों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायतों का निपटारा निर्धारित समय सीमा में उचित माध्यम से किया जाए। साथ ही, पोर्टल एवं हेल्पलाइन पर कार्यरत शिकायत निवारण अधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए ताकि शिकायतों के प्रभावी एवं त्वरित समाधान की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके। उन्होंने विधानसभा सदस्यों द्वारा पूछे गए लंबित प्रश्नों के उत्तर भी शीघ्र एवं तथ्यपरक रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों की कार्य रिपोर्टों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अंतर्विभागीय विषयों पर प्रभावी सहयोग एवं संवाद से योजनाओं के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने इज़ ऑफ डूइंग बिज़नस के संबंध में प्रदेश की डी-रेगुलेशन सेल एवं राजनिवेश पोर्टल के उत्कृष्ट प्रदर्शन सहित विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की।

सोक पिट, वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, कंटूर ट्रेंच, आजीविका डबरी और नवा तरिया जैसी संरचनाएं बढ़ा रही जल संचयन क्षमता

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में जशपुर जिला एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है। जिले में मनरेगा तथा जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के लिए विभिन्न नवाचार आधारित संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिससे वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण आजीविका को भी नई मजबूती मिल रही है। जशपुर जिले में वर्षा जल के अधिकतम संचयन और भू-जल पुनर्भरण के उद्देश्य से घरों, शासकीय संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी संख्या में सोक पिट बनाए जा रहे हैं। इन संरचनाओं से उपयोग किए गए जल का पुनर्भरण संभव हो रहा है तथा जलभराव की समस्या में भी कमी आ रही है। पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच और कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं वर्षा जल के तीव्र बहाव को नियंत्रित कर मिट्टी के कटाव को रोकने के साथ जल को भूमि में समाहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे भू-जल स्तर में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए जिले में आजीविका डबरी निर्माण कार्य तेजी से संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 495 आजीविका डबरियां निर्माणाधीन हैं। इन डबरियों में वर्षा जल संग्रहित होने से किसानों को रबी एवं ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई सुविधा मिलेगी, वहीं सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। जल संरक्षण के क्षेत्र में ‘नवा तरिया’ अभियान भी उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है। नए तालाबों के निर्माण और पुराने जलाशयों के जीर्णाेद्धार से जल भंडारण क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके सकारात्मक प्रभाव कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन गतिविधियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। जशपुर जिले में 5 प्रतिशत मॉडल को भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के कम से कम 5 प्रतिशत हिस्से को जल संरक्षण संरचनाओं से आच्छादित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल से वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और जल उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। कलेक्टर  रोहित व्यास ने जल संरक्षण कार्यों में सभी विभागों और ग्रामीण समुदायों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए कहा है कि जल संरक्षण केवल एक शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संचालित जन आंदोलन है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। जशपुर जिले में संचालित ये नवाचार आधारित जल संरक्षण प्रयास जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। साथ ही ये पहल कृषि उत्पादन बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

वन भूमि पर जल संरक्षण का बड़ा कदम, भूजल रिचार्ज के लिए बनाए जाएंगे चेकडैम

 रांची  वन भूमि पर जल स्तर बरकरार रखने के लिए करीब छह हजार कच्चे चेकडैम बनाए जाएंगे। पहाड़ियों से उतरने वाली नलिकाओं को जगह-जगह बांधकर ये चेकडैम तैयार किए जाएंगे। इससे भूमि के ऊपर तो जल मौजूद रहेगा ही, भूगर्भ जल भी रिचार्ज होगा। बांधवगढ़ वन क्षेत्र में यह प्रयोग करने वाले केंद्रीय पर्यावरण विशेषज्ञ दिनेश त्रिवेदी ने बताया कि गर्मी में वन्यजीवों के लिए यह आसानी से उपलब्ध होने वाला जलस्रोत होगा। मिट्टी में नमी रहने से हरियाली बढ़ेगी और राज्य के जंगलों में बायोमास की वृद्धि दर्ज की जाएगी। बरसात से पहले ये चेकडैम तैयार कर लिए जाएंगे। त्रिवेदी ने बताया कि राज्य के वन क्षेत्र में पहले से हजारों की संख्या में ऐसे चेकडैम बने हुए हैं। इनकी पहचान कर मरम्मत भी कराई जाएगी। एक लाख मिलियन जल भंडार बढ़ेगा पर्यावरणविद और रांची विश्वविद्यालय में भूगर्भ शास्त्र के अध्यापक नीतिश प्रियदर्शी ने बताया कि राज्य में इस तरह के प्रयोग से एक लाख मिलियन लीटर जल की उपलब्धता बढ़ेगी। वाटर रिचार्ज की वजह से यह जल स्थायी तौर पर जमीन के ऊपर मौजूद रहेगा। नीतिश प्रियदर्शी ने कहा कि जंगलों की प्राकृतिक वाटर रिचार्ज संरचना अतिक्रमण या वृक्ष कटाई की वजह से नष्ट हो गई है। नए तरीके से कच्चे चेकडैम बनाकर इस कमी को पूरा किया जा सकता है। आजीविका का भी बनेगा साधन जंगलों में बने ये वाटर रिचार्ज पिट मछली पालन के लिए भी उपयोगी होंगे। इससे ग्राम समितियों को जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। वन क्षेत्र में पहले से बड़े बांध बने हुए हैं और वहां मछली पालन हो रहा है। अब कच्चे चेकडैम में भी जल्द विकसित होने वाली मछली की प्रजाति डाली जाएगी।  

दीवाल लेखन कर MSW छात्रा द्वारा जल संरक्षण के लिए किया जा रहा जागरूक- जन अभियान परिषद

उमरिया  मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार जल गंगा संवर्धन अभियान पुरे मध्यप्रदेश मे चालया जा रहा है  अभियान अंतर्गत जिला समन्वयक  रविन्द्र शुक्ला के निर्देश पर विकासखंड करकेली के सेक्टर 2 निगहरी के परामर्शदाता संतोष त्रिपाठी के मार्गदर्शन मे MSW छात्रा साक्षी जैन    द्वारा दीवार लेखन कर जल स्त्रोतो व जल संरक्षण के प्रति  समाज को जागरूक किया जा रहा है । साक्षी जैन द्वारा समस्त समाज से आग्रह किया गया कि आप सभी भी इस अभियान का हिस्सा बनें और जल संरक्षण हेतु प्रेरित करें , जब सर्व समाज एक जुट होकर आगे बढ़ेगा तो हम सभी के प्रयास से यह अभियान सफलतम रास्ते पर अग्रसर रहेगा ।

वर्षा जल की एक-एक बूंद का हो संरक्षण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'जल गंगा संवर्धन अभियान-2026' के माध्यम से प्रदेश की जल-संस्कृति को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की वह महती आवश्यकता है जिसे हमें भावी पीढ़ियों को उपलब्ध कराने के लिये सहेजकर रखना है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियों के साथ नवीन तकनीकी नवाचारों को अपनाया जाए और प्रदेश के प्रत्येक जल स्रोत की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि इस वर्ष "वर्षा जल की एक-एक बूंद का संचयन और संरक्षण" ही हमारा परम ध्येय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 19 मार्च से पूरे प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत होगी। भविष्य की चुनौतियों का समाधान: जल-समृद्ध मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों के बीच जल-सुरक्षा ही विकास का मूल मंत्र है। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' में प्रदेश जल संरचनाओं की नदियों, तालाबों, बावड़ियों और कुओं का पुनरुद्धार एक मिशन मोड में किया जायेगा। जन-भागीदारी से बनेगा जन आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपील की है कि जल गंगा संवर्धन अभियान से जन-जन को जोड़कर एक 'जन-आंदोलन' का रूप दिया जाए। उन्होंने समाज के हर वर्ग, स्वयंसेवी संस्थाओं और युवाओं से इस पुनीत कार्य में आगे बढ़कर श्रमदान करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब समाज का हर व्यक्ति जल संरचनाओं की सुरक्षा का प्रहरी बनेगा, तभी हम "परम वैभवशाली और जल-समृद्ध मध्यप्रदेश" के स्वप्न को साकार कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि अभियान में प्रत्येक जिले में जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता सुनिश्चित की जाए और जल गुणवत्ता परीक्षण के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अभियान की प्रमुख गतिविधियां              जल संरचनाओं का कायाकल्प।              नवीन जल स्त्रोतों का निर्माण।              भू-जल स्तर बढ़ाने भवनों पर रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग।              पुराने जल स्त्रोतों का संधारण।              जल स्त्रोतों के पास साफ-सफाई।              सोक पिट का निर्माण।              पेयजल की टेस्टिंग और टंकियों की सफाई।              पुराने तालाबों का गहरीकरण।              स्टॉप डेम का संधारण एवं नवीन निर्माण।              पेयजल पाइप लाइनों का संधारण।              जल स्त्रोतों के पास वृहद पौध-रोपण।              जल संरक्षण के लिए जन-भागीदारी बढ़ाना।  

जल संरक्षण से आत्मनिर्भर किसान, चिड़ौला में शक्तिगत कूप बना ग्रामीण समृद्धि की मिसाल

गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने की ग्रामीण ने पहल सफलता की कहानी रायपुर, ग्रामीण विकास और जल संरक्षण एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं, जो सतत आजीविका, बेहतर स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता के लिए अनिवार्य हैं। वर्षा जल संचयन, तालाब गहरीकरण, और जल शक्ति अभियान जैसी पहल भू-जल स्तर में सुधार और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक हैं।  शक्तिगत कूप के निर्माण ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्रामीण विकास और जल संरक्षण की दिशा में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत चिड़ौला से एक सशक्त और प्रेरणादायी सफलता की कहानी सामने आई है। यहां शक्तिगत कूप निर्माण कार्य जयबहादुर सिंह के लिए स्वीकृत किया गया, जिसके लिए शासन द्वारा 1.80 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराकर खेती-किसानी को सुदृढ़ बनाना तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देना रहा। कूप निर्माण से पूर्व संबंधित हितग्राही सहित आसपास के किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थे, जिससे खेती करना अनिश्चित बना रहता था और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। लेकिन शक्तिगत कूप के निर्माण के बाद खेतों तक नियमित रूप से पानी पहुंचने लगा है, जिससे फसलों की समय पर सिंचाई संभव हुई। इसका सीधा लाभ कृषि उत्पादन में वृद्धि के रूप में सामने आया है, वहीं किसानों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। अब किसान समय पर बुवाई कर पा रहे हैं और खेती अधिक लाभकारी एवं सुरक्षित बन गई है। यह कूप केवल एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गया है। जल उपलब्धता सुनिश्चित होने से क्षेत्र में दोहरी फसल लेने की संभावनाएं बढ़ी हैं, खेती की लागत में कमी आई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। साथ ही भूजल स्तर के संरक्षण और जल के समुचित उपयोग को भी बढ़ावा मिला है, जो दीर्घकालीन विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों ने शासन की इस जनहितकारी पहल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएं गांवों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखती हैं। 1.80 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुआ। यह शक्तिगत कूप निर्माण कार्य ग्राम पंचायत चिड़ौला में जल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम होने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सफल, प्रेरक और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।