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मध्‍यम और बड़े कृषकों के लिए गेहूं विक्रय की सुविधा: स्‍लॉट बुकिंग प्रणाली की शुरुआत

मध्‍यम एवं बड़े कृषकों को गेहूं विक्रय करने के लिये स्‍लॉट बुकिंग की सुविधा प्रारंभ स्‍लॉट बुकिंग की सुविधा 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई 2026 तक भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि विगत वर्ष समर्थन मूल्‍य पर लगभग 77 लाख मे.टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थिति के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 100 लाख मे.टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्‍य रखा गया है। इन्‍दौर, उज्‍जैन, भोपाल, नर्मदापुरम् संभागों के जिलों में 24 अप्रैल से शाम 6 बजे से मध्‍यम श्रेणी एवं बड़े किसानों के लिए स्‍लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्‍ध कराई गई है। यह सुविधा पूर्व वर्ष अनुसार ही की गई है। जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर, ग्‍वालियर एवं चम्‍बल संभागों के जिलों में 25 अप्रैल (दोपहर 12 बजे) से मध्‍यम श्रेणी एवं बड़े किसानों से गेहूं उपार्जन के लिये स्‍लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्‍ध कराई जा रही है। पूरे प्रदेश में स्‍लॉट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 9 मई 2026 तक की गई है। किसानों की सुविधा के लिए खरीदी के लिये प्रत्‍येक शनिवार को भी स्‍लॉट बुकिंग एवं उपार्जन का कार्य जारी रहेगा। अभी तक प्रदेश मे समर्थन मूल्‍य पर गेहूं उपार्जन के लिये 7.76 लाख किसानों द्वारा 32.16 लाख मे. टन गेहूं के विक्रय के लिये स्‍लॉट बुक किए जा चुके है। प्रदेश में 3 लाख 96 हजार 97 किसानों से 16 लाख 57 हजार 526 मे. टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। समर्थन मूल्‍य पर गेहूं विक्रय करने वाले 2,01,254 किसानों को 2166.29 करोड़ रुपये के भुगतान के लिये ईपीओ जनरेट किए गए। उपार्जन केन्‍द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके इसके लिये उपार्जन केन्‍द्र पर प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्‍द्र पर गेहूं विक्रय के लिये स्‍लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्‍द्र किया गया। कृषक द्वारा उपार्जन केन्‍द्र की प्रतिदिन तौल क्षमता 2250 क्विंटल के मान से स्‍लॉट बुकिंग की जा सकेगी। प्रत्‍येक उपार्जन केन्‍द्र पर तौल कांटों की संख्‍या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है, जिससे अधिक संख्‍या में किसान तथा मात्रा के स्‍लॉट बुकिंग कराकर गेहूं का उपार्जन किया जा सकेगा। किसानों को समर्थन मूल्‍य पर गेहूं विक्रय में किसी प्रकार की परेशानी न हो एवं उपज विक्रय के लिए इंतजार न करना पड़े इसके लिये किसानों को जिले के किसी भी उपार्जन केन्‍द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा उपलब्‍ध कराई गई है। उपार्जन केन्‍द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्‍थान, जन सुविधाएं आदि की व्‍यवस्‍थाएं की गई हैं। किसानों को उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिये समस्‍त आवश्‍यक व्‍यवस्‍थाएं की गई हैं, जिसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्‍माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्‍प्‍यूटर, नेट कनेक्‍शन, गुणवत्‍ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्‍ना आदि की व्‍यवस्‍था की गई है। उपार्जन केन्‍द्र पर उपलब्‍ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के पीसी सेप पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्‍य एवं राज्‍य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्‍य पर गेहूं उपार्जन के लिये आवश्‍यक बारदानों की व्‍यवस्‍था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूं की भर्ती जूट बारदाने के साथ-साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्‍य पर गेहूं उपार्जन के लिये भण्‍डारण की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था की गई है, जिससे उपार्जित गेहूं का सुरक्षित भण्‍डारण किया जा सके।  

मंत्री राजपूत ने बताया, एक लाख 45 हजार 71 किसानों से 63 लाख 27 हजार 410 क्विंटल गेहूँ की खरीदी

एमएसपी पर गेहूँ की खरीदी जारी एक लाख 45 हज़ार 71 किसानों से की जा चुकी है 63 लाख 27 हजार 410 क्विंटल गेहूँ की खरीदी : मंत्री राजपूत भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक एक लाख 45 हज़ार 71 किसानों से 63 लाख 27 हजार 410 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 920 करोड़ 7 लाख रुपए का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। अभी तक 5 लाख 36 हजार 367 किसानों द्वारा 2 करोड़ 25 लाख 96 हजार 450 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। किसानों की सुविधा के लिए उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़कर 6 कर दी गई है। इससे समय पर किसानों द्वारा लाये गए गेहूं की तुलाई हो सकेगी। खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूँ की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। सेटेलाइट ई-मेल में मिलान नहीं पाए गए खसरों को छोड़कर उसी किसान के शेष खसरों पर गेहूँ की फसल विक्रय हेतु स्लॉट बुकिंग की सुविधा दी गई है। स्लॉट बुकिंग की क्षमता बढ़ाई उपार्जन केन्द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके, इसके लिये प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूँ विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 1500 क्विंटल की गई है। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिये गेहूँ बिक्री की सभी सुविधाएं मंत्री राजपूत ने बताया है कि उपार्जन केंद्रों में गेहूँ विक्रय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन केन्द्रों में छायादार स्थान में बैठने और पेय जल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र में बारदाने, तौल कांटे सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छनना आदि की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। समर्थन मूल्य के साथ बोनस भी मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूँ में से 51 लाख 75 हजार 370 क्विंटल गेहूँ का परिवहन किया जा चुका है। उपार्जन के लिए रिकार्ड पंजीयन प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।  

पंजाब मंडियों में 28 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक, 24 लाख से ज्यादा की हुई खरीदारी: लाल चंद कटारूचक्क

चंडीगढ़/ टांडा  पंजाब के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने आज यहां दाना मंडी में गेहूं की खरीद प्रबंधों का जायजा लेते हुए कहा कि राज्य की मंडियों में गेहूं की खरीद निर्विघ्न जारी है और अब तक हुई 28 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की आमद में से 24 लाख मीट्रिक टन से अधिक फसल खरीदी जा चुकी है। दाना मंडी में विधायक जसवीर सिंह राजा गिल और संबंधित अधिकारियों के साथ पहुंचे कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने निकटवर्ती गांव बस्ती के किसान जैला की ढेरी की खरीद करवाते हुए बताया कि पंजाब सरकार द्वारा मंडियों में खरीद के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिसके कारण किसानों को फसल बेचने में कोई परेशानी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि गेहूं की खरीद के बदले न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए के हिसाब से अब तक किसानों के खातों में 647 करोड़ रूपए की अदायगी की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार किसानों की फसल का एक-एक दाना उठाने के लिए वचनबद्ध है, जिसके नतीजे के रूप में मंडियों में निर्विघ्न खरीद जारी है। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार खरीद के 48 घंटों के अंदर किसानों को बनती अदायगियां की जा रही हैं और इसके साथ ही लिफ्टिंग भी तेज हो रही है। कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने खरीद एजेंसियों के प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से कहा कि किसानों को मंडियों में किसी प्रकार की दिक्कत पेश न आए। मंडियों में बोरे, मंडी मजदूर और ढुलाई के प्रबंधों की बात करते हुए लाल चंद कटारूचक्क ने बताया कि पूरे राज्य की मंडियों में सभी जरूरी प्रबंध अमल में हैं और गेहूं की खरीद सुचारू ढंग से जारी है। उन्होंने किसानों द्वारा अपने खून-पसीने और मेहनत से पैदा किए गए एक-एक दाने को खरीदने की राज्य सरकार की वचनबद्धता को दोहराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में किसानों की फसल न्यूनतम समय में खरीदकर निर्धारित समय में उनके खातों में अदायगियां की जा रही हैं। कैबिनेट मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे गेहूं के अवशेष को आग न लगाएं, बल्कि कृषि विभाग की टीमों के माध्यम से उपलब्ध मशीनरी से इसका खेतों में ही प्रबंधन करें। पिछले दिनों बेमौसमी बारिश के कारण फसल को हुए नुकसान के बारे में कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पहले ही विशेष गिरदावरी के निर्देश दे दिए थे और किसानों के नुकसान की भरपाई पंजाब सरकार द्वारा की जाएगी। विधायक जसवीर सिंह राजा गिल ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों की फसल को पिछले सालों की तरह सुचारू ढंग से साथ-साथ खरीदकर लिफ्ट करवाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने लगातार किसानों का साथ दिया है और कई बड़े किसान हितैषी फैसले लिए हैं, जिससे राज्य भर में किसानों को बेहद लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार किसानों की फसल की खरीद के बदले निर्धारित समय के अंदर-अंदर अदायगियां सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी ताकीद की गई है कि मंडियों में किसानों की फसल की समय पर खरीद की जाए। वर्णनीय है कि जिला होशियारपुर में कुल 78 मंडियां स्थापित की गई हैं, जिनमें से 65 मंडियां पक्की और 13 स्थानों पर खरीद के अस्थायी प्रबंध किए गए हैं, जबकि जिले में कुल 3,16,000 मीट्रिक टन गेहूं की आमद की संभावना है। इस मौके पर एस.डी.एम. लवप्रीत सिंह, मार्केट कमेटी के चेयरमैन राजविंदर सिंह, मार्केट कमेटी सचिव हरप्रीत सिंह, डिप्टी डायरेक्टर खाद्य एवं आपूर्ति रजनीश कुमारी, डी.एफ.एस.सी. प्रीतकमल सूद आदि भी मौजूद थे।

खेतों में आग से तबाही: पंजाब के चार गांवों में 400 एकड़ फसल जलकर खाक

अबोहर. मलोट के गांव कबरवाला में शुक्रवार सुबह खेतों में लगी आग इतनी तेजी से फैली कि अबोहर के गांव जोधपुर तक चार गांवों में करीब 400 एकड़ फसल जलकर राख हो गई। इस दौरान मलोट व अबोहर से पहुंची फायर ब्रिगेड के अलावा किसानों की ओर से कड़ी मशक्कत से आग पर काबू पाया गया। जानकारी के अनुसार आग मलोट के गांव कबरवाला में सुबह 11 खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को आग लग गई, जोकि तेज हवा के कारण पक्की टिब्बी और गुरपुसर से फैलते हुए बललूआना क्षेत्र के गांव जोधपुर तक पहुंच गई। देखते ही देखते आग ने खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को अपनी चपेट में ले लिया और किसानों की साल भर की मेहनत मिनटों में राख हो गई। सूचना मिलने पर मलोट और अबोहर से फायर ब्रिगेड की लगभग 4 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए अभियान शुरू किया। इसके साथ ही किसानों ने भी हिम्मत दिखाते हुए ट्रैक्टरों से मिट्टी डालकर और खेत जोतकर आग के फैलाव को रोकने की कोशिश की। फायर ब्रिगेड के कर्मचारी राजकुमार व किसानों ने बताया कि आग लगने के कारणों का तो पता नहीं चला है, लेकिन अनुमान है कि इस आग से करीब 400 एकड़ के करीब गेहूं की फसल राख हो गई है। उन्होंने बताया कि इनमें कई छोटे किसान भी शामिल है जिनकी पांच से 10 एकड़ तक फसल राख हो गई, व जबकि कई लोगों ने ठेके पर जमीन लेकर भी बिजाई कर रखी थी। इस दौरान सरपंच सतनाम सिंह जोधपुर, साहिब सिंह नंबरदार, सुरजीत सिंह, हरि कृष्ण सिंह, प्रीतम सिंह, दर्शन सिंह और बूटा सिंह ने कहा कि आग के कारण उनकी साल भर की मेहनत बर्बाद हो गई है। इसलिए सरकार और प्रशासन से मांग की गई है कि हुए नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों ने कहा कि अगर समय रहते आग पर काबू न पाया जाता तो आग गांव मलूकपुरा में फैल सकती थी। इसके अलावा गांव राजपुरा में सरकंडी को आग लगने से आग घरों तक फैलने का खतरा पैदा हो गया, जिस पर समय रहते काबू पा लिया गया।

केंद्र ने पंजाब-चंडीगढ़ के किसानों को गेहूं खरीद के लिए दी विशेष छूट, राहत की खबर

चंडीगढ़  बेमौसम बारिश से जूझ रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने हालात को देखते हुए बड़ा फैसला लेते हुए पंजाब और चंडीगढ़ में गेहूं की खरीद के लिए विशेष छूट को मंजूरी दे दी है, जिससे किसानों को बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी दी है। उन्होंने लिखा," अनियमित वर्षा के चलते गेहूं खरीद में छूट देने का अनुरोध 9 अप्रैल 2026 को प्राप्त हुआ था। इसके तुरंत बाद 10 अप्रैल को सभी जिलों में हालात का जायजा लेने के लिए टीमों को तैनात किया गया। प्रभावित किसानों को मिलेगी तुरंत राहत मैदानी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र (RMS) 2026–27 के तहत यह अहम फैसला लिया है। मंत्री ने बताया कि इस कदम से किसानों को मजबूरी में फसल बेचने (डिस्ट्रेस सेल) से बचाया जा सकेगा और उन्हें उचित मूल्य मिल सकेगा। सरकार का कहना है कि ये छूटें RMS 2026–27 की शुरुआत से ही लागू होंगी, जिससे प्रभावित किसानों को तुरंत राहत मिलेगी। किसानों ने चक्का जाम का फैसला टाला केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में पत्र राज्य सरकार को भेज दिया है। उन्होंने कहा कि यह आदेश आज से ही लागू हो जाएंगे। किसानों ने रेल का चक्का जाम करने की घोषणा की थी हालांकि बाद में उसे टाल दिया था। केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्‌टू ने भी सुबह ही इस संबंध में जानकारी दे दी थी। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने एफसीआई के जरिए राज्य सरकार को गेहूं खरीद के मानकों में बदलाव की जानकारी दे दी थी। केंद्र सरकार के पत्र के अनुसार गेहूं खरीद के मानकों में दी गई छूट 1. कलर लॉस (चमक में कमी) वाले गेहूं की सीमा पूरे पंजाब और चंडीगढ़ (यू.टी.) में 70% तक बढ़ा दी गई है। 2. सिकुड़े हुए एवं टूटे हुए दानों की सीमा, जो पहले 6% थी, उसे बढ़ाकर 15% तक कर दिया गया है। 3. क्षतिग्रस्त एवं आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त दानों का कुल प्रतिशत 6% से अधिक नहीं होगा। 4. नए मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं को अलग से रखा जाएगा और उसका अलग हिसाब रखा जाएगा। 5. नए मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं के भंडारण के दौरान गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की गिरावट के लिए पंजाब सरकार और चंडीगढ़ (यू.टी.) स्वयं जिम्मेदार होंगे। 6. नए मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं के स्टॉक का निपटान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। 7. इस छूट के कारण उत्पन्न किसी भी वित्तीय या परिचालन संबंधी प्रभाव की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

मध्यप्रदेश में गेहूं की MSP और बोनस पर खरीद की शुरुआत, रजिस्ट्रेशन वाले किसानों को मिलेगा फायदा

शहडोल : MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी का इंतजार कर रहे किसानों को बड़ी राहत मिलने वाली है. गेहूं की कटाई, गहाई के बाद अब शासन किसानों का गेहूं खरीदने की तैयारी में है. जिला आपूर्ति नियंत्रक विपिन पटेल के मुताबिक, '' रबी सीजन में MSP पर गेहूं खरीदी का काम 2026-27 के तहत 15 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 12 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा।  मध्य प्रदेश में गेहूं पर इतना MSP और बोनस जिला आपूर्ति नियंत्रक ने कहा, '' इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रु प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जिस पर मध्यप्रदेश शासन 40 रु प्रति क्विंटल बोनस भी दे रहा है. इस तरह से किसानों को कुल 2625 रु प्रति क्विंटल की दर से एमएसपी का भुगतान किया जाएगा और उनकी फसल इस नई दर पर खरीदी जाएगी।  शहडोल में इतने किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन जिला आपूर्ति नियंत्रक विपिन पटेल ने जानकारी दी है कि MSP पर गेहूं की खरीदी सिर्फ पंजीकृत किसानों से ही की जाएगा, जिले में कुल 9,526 किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया है, जिनमें से 13 अप्रैल 2026 तक 418 किसानों की स्लॉट बुकिंग की जा चुकी है. यानी साफ है कि जिन किसानों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, शासन उनसे एमएसपी पर गेहूं की खरीद नहीं करेगा. यानी बिना पंजीकरण वाले किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ लेने से वंचित रह जाएंगे।  स्लॉट बुकिंग का ध्यान रखें किसान जिला आपूर्ति नियंत्रक विपिन पटेल ने अपील करते हुए कहा है कि जिन किसानों का गेहूं एमएसपी पर बेचने के लिए तैयार हो चुका है, वे शीघ्र अतिशीघ्र स्लॉट बुक कर निर्धारित तिथि पर अपने नजदीकी उपार्जन केंद्र पहुंच जाएं. स्लॉट के हिसाब से किसान पहुंचकर अपना गेहूं बेच सकते हैं. किसानों की सुविधा के लिए शनिवार एवं रविवार को भी पूरे दिन स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी।  पूरा फायदा लेने के लिए इस बात का रखें ध्यान साथ ही जिला आपूर्ति नियंत्रक ने कहा है कि किसान अगर एमएसपी का पूरा लाभ लेना चाहते हैं, तो वे अपने साथ साफ-सुथरा, सूखा व अच्छी गुणवत्ता का गेहूं ही उपार्जन केंद्रों पर लाएं. इससे उनका अनाज अमानक या लो क्वालिटी का घोषित नहीं होगा और बिना किसी परेशानी के खरीदी प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। 

ग्वालियर में 14 हजार से ज्यादा किसान बेचेंगे गेहूं, मिलेगा सरकारी समर्थन मूल्य

ग्वालियर  जिले में गेहूं की सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदी 15 अप्रैल से शुरू होगी। हालांकि प्रदेश के अन्य हिस्सों मसलन नर्मदापुरम, उज्जैन आदि में खरीद शुरू हो चुकी है। लेकिन अंचल में गेहूं की फसल इन क्षेत्रों की तुलना में देरी से कटती है। इसलिए 15 अप्रैल या इसके बाद ही खरीद केंद्रों पर पहुंचती है। इसलिए ग्वालियर चंबल में गेहूं की खरीद मध्य अप्रैल से शुरू होती है। यहां बता दें कि इस बार अंचल में सरकारी समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए 14 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। गेहूं खरीद को लेकर प्रशासन ने भी खरीद केंद्रों पर व्यवस्थाएं करने के निर्देश संबंधित अफसरों को दिए हैं। इसके अलावा किसानों के लिए छाया, पानी आदि के इंतजाम करने के लिए कहा है। जिससे उन्हें परेशानी न हो। 41 केंद्रों पर होगी खरीदी गेहूं को सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए व्यवस्थाएं खाद्य आपूर्ति विभाग कर रहा है। विभाग ने जिले भर के विभिन्न क्षेत्रों में 41 केंद्र बनाए हैं। जहां पर किसान मैसेज मिलने के बाद अपनी फसल को बेचने के लिए पहुंचेंगे। यहां पर फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी एफसीआइ के लोग गेहूं की गुणवत्ता की जांच करेंगे। जांच में गुणवत्ता युक्त गेहूं को खरीदेंगे। इस मई के अंतिम दिनों तक चल सकती है गेहूं की खरीद इस बार मौसम की वजह से गेहूं की बुवाई में देरी हुई और अब कटाई में भी देरी हो रही है। ऐसे में किसानों के गेहूं की खरीद मई के अंतिम दिनों तक जा सकती है। क्योंकि इस बार वर्षा की वजह से गेहूं की चमक व क्वालिटी बिगड़ी है। इसलिए किसान परेशानी में हैं। हालांकि प्रशासन ने कृषि महाविद्यालय के छात्रों को क्वालिटी चेक करने के लिए हर केंद्र पर तैनात करने के लिए भी कहा है, जिससे किसानों के साथ गड़बड़ी न हो। वारदाने की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता ईरान-अमेरिका के युद्ध की वजह से अभी खरीद केंद्र पर पर्याप्त बारदाना उपलब्ध होने को लेकर अनिश्चितता है। क्योंकि बारदाना प्लास्टिक से बनता है। इसलिए वारदाने की पर्याप्त उपलब्धता को लेकर आशंका है। हालांकि विभाग के अफसरों का कहना है कि खरीद के लिए पर्याप्त बारदाना उपलब्ध है।

एमपी में किसानों के लिए बड़ी राहत: चार संभागों में शुरू हुई गेहूं खरीदी, सरकार देगी बोनस

भोपाल   न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीदी आज से भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम और उज्जैन संभाग के जिलों में हुई शुरू । इसके लिए तीन दिन पहले से स्लॉट बुकिंग शुरू हो गई थी, जिन किसानों ने गेहूं तुलाई की तारीख 9 अप्रेल चुनी होगी, उनका ही गेहूं खरीदा जाएगा। शेष संभागों में खरीदी 15 अप्रेल से होगी। सीएम डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को किसानों व जनप्रतिनिधियों से वर्चुअल चर्चा की। बारिश-धूप से बचाव के इंतजाम किए जाएं सीएम ने कहा कि मप्र किसान जब उपज लेकर केंद्रों तक आएं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्रों की होगी। बेमौसम बारिश में किसानों की उपज न भीगे। गर्मी में उन्हें परेशान न होना पड़े, इसका ध्यान रखा जाए। अगले वर्षों में 2700 रुपए देंगे सीएम ने किसानों से कहा कि सरकार हर किसान का गेहूं खरीदेगी। भुगतान समय पर करेंगे। इस साल बोनस मिलाकर 2625 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान होगा। आगामी वर्षों में राशि 2700 प्रति क्विंटल तक लेकर जाएंगे।  बता दें कि राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त बोनस के रूप में 40 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ भी इस वर्ष देने जा रही है। इसके लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं। 19 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया पंजीयन उपार्जन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3 हजार 627 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए अपना पंजीयन कराया था। हेल्प डेस्क बनाए, सीएम ने किसानों को भी दिए निर्देश सीएम मोहन यादव ने बताया कि उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क स्थापित किए जा रहे हैं, जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से खरीदी की संपूर्ण व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी। उपार्जन केंद्रों पर पंप्लेट और होर्डिंग के जरिए भी किसानों को व्यवस्था के संबंध में जानकारियां देने के निर्देश दिए गए हैं। बताते चलें कि वर्ष 2026 से किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उपार्जन केन्द्रों पर आने वाले किसानों को उनके कल्याण तथा हितों से जुड़ी शासन की योजनाओं से भी अवगत कराए जाने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर कार्यालयों को घेरने की तैयारी में कांग्रेस मध्य प्रदेश में देरी से गेहूं की खरीद शुरू होने के मामले में एमपी कांग्रेस, किसान कांग्रेस के पदाधिकारी और सभी जिलों के अध्यक्ष कलेक्टर कार्यालयों का घेराव करने की तैयारी कर चुके हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी छतरपुर जिले में प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। आज से इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में गेहूं की खरीद शुरू हो रही है। 15 अप्रैल से प्रदेश के दूसरे संभागों में गेहूं खरीद शुरू हो जाएगी।

अनूपपुर जिले में गेहूँ उपार्जन 15 अप्रैल से प्रारंभ, 6 केंद्र निर्धारित

अनूपपुर  रबी विपणन वर्ष 2026–27 के अंतर्गत जिले में गेहूँ उपार्जन का कार्य 15 अप्रैल 2026 से प्रारंभ किया जाएगा। जिला आपूर्ति अधिकारी श्रीमती अनीता सोरते से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासन के निर्देशानुसार किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूँ क्रय की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। किसानों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए जिले में 6 उपार्जन केंद्र निर्धारित किए गए हैं। दुलहरा समिति के लिए मां शारदा वेयरहाउस BOT 2 बरबसपुर, पटनाकला समिति के लिए कृषि उपज मंडी अनूपपुर, मझगवां (फुनगा) समिति के लिए शारदा फूड प्रोसेसिंग BOT B गोदाम पयारी, धनगवां समिति के लिए सिंह वेयरहाउस छातापटपर, बिजुरी समिति के लिए बतूल वेयरहाउस कोतमा तथा राजेंद्रग्राम समिति के लिए MPWLC गोदाम राजेंद्रग्राम को उपार्जन केंद्र के रूप में निर्धारित किया गया है। जिला आपूर्ति अधिकारी ने संबंधित केंद्र प्रबंधकों को किसानों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। किसानों से आग्रह किया गया है कि वे अपनी उपज निर्धारित मापदंडों के अनुसार साफ-सुथरी एवं अच्छी तरह सुखाकर उपार्जन केंद्रों पर लाएं, ताकि उपार्जन प्रक्रिया सुचारु रूप से संचालित हो सके।

केंद्र का गेहूं अवशेष जलाने वालों पर कड़ा रुख, 10,500 अधिकारी और सैटेलाइट निगरानी के तहत होगा नियंत्रण

चंडीगढ़  पंजाब में गेहूं की कटाई के साथ अवशेष जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए इस बार केंद्र सरकार सख्त रुख में है। केंद्र खुद इन मामलों की निगरानी करेगा। राज्य सरकार ने इसके लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान लागू किया है। आज से कटाई शुरू होने के साथ ही 10,500 अधिकारियों को तैनात किया गया है जो खेतों में नजर रखेंगे। साथ ही एक कंट्रोल रूम बनाया गया है जिससे सैटेलाइट के जरिए घटनाओं की निगरानी की जाएगी। 100 किसानों पर तैनात होगा एक नोडल अधिकारी  वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पहले ही दिशा-निर्देश जारी करते हुए 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी तैनात करने को कहा है। पंजाब में हर साल 1 अप्रैल से 31 मई तक गेहूं की कटाई होती है। राज्य में करीब 34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है जिससे लगभग 205 लाख टन भूसा निकलता है। कम समय में धान की रोपाई के दबाव के कारण किसान अवशेषों को आग लगा देते हैं जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है और दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण बढ़ता है। सरकार की तैयारी अवशेष जलाने पर रोक के लिए सरकार ने कस्टम हायरिंग सेंटरों पर 31 हजार स्ट्रॉ रीपर उपलब्ध कराए हैं जो अवशेषों को काटकर चारे में बदलते हैं। इसके अलावा पेलेट निर्माण, इंडस्ट्रियल बॉयलर और सीबीजी प्लांट में भी अवशेषों के उपयोग की योजना बनाई गई है। हर ब्लॉक स्तर पर जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि किसानों को वैकल्पिक उपायों के बारे में जानकारी दी जा सके। विभागों की जिम्मेदारी तय सरकार ने विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी तय की है। खेत में अवशेष प्रबंधन का काम कृषि और सहकारिता विभाग को दिया गया है जबकि बाहरी निपटान का जिम्मा नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, उद्योग विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपा गया है। अवशेष जलाने पर प्रतिबंध लागू कराने की जिम्मेदारी विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग और जिला उपायुक्तों की होगी।