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शरबती गेहूं के दाम में ऐतिहासिक उछाल, 7 साल का रिकॉर्ड टूटा; आटे की कीमत बढ़ने के संकेत

भोपाल  इस साल थाली की रोटी न सिर्फ स्वाद में 'शाही' होगी, बल्कि जेब पर भी भारी पड़ने वाली है। अपनी मिठास और चमक के लिए मशहूर 'शरबती' गेहूं ने इस बार बाजार में ऐसा जलवा बिखेरा है कि दाम पिछले 7 साल के उच्चतम स्तर पर जा पहुंचे हैं। बारिश व ओलावृष्टि के कारण फसल क्या बिगड़ी, शरबती के तेवर (MP Sharbati Wheat Price) ही बदल गए। शहर में प्रीमियम 5500 से लेकर 6200 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक चुका। कारोबारियों की मानें तो दीपावली का त्योहार आते-आते यह आंकड़ा 6500 रुपए के पार निकल जाएगा। आवक की चमक और मौसम की मार वर्तमान में मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर की मंडियां सीहोर, आष्टा, गंजबासौदा और अशोकनगर के शरबती गेहूं से गुलजार तो हैं, लेकिन इस बार आवक में वो दम नहीं है। अप्रेल-जून के सीजन में अमूमन होने वाली 1.50 लाख क्विंटल की आवक इस बार सिमटती दिख रही है। वजह साफ है-बेमौसम बारिश से गेहूं दागी हो गया, जिससे बढिय़ा क्वालिटी के गेहूं की किल्लत हो गई है। शरबती के शौकीनों पर पड़ेगा सीधा असर विशेष स्वाद और मुलायम रोटियों के लिए पसंद किए जाने वाले शरबती गेहूं के उपभोक्ताओं को इस बार अतिरिक्त खर्च के लिए तैयार रहना होगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित आपूर्ति, बेहतर गुणवत्ता (MP Sharbati Wheat Quality) की कमी और त्योहारी मांग बढऩे से आने वाले महीनों में कीमतों में और तेजी आ सकती है। ब्रांडेड आटा भी हुआ 'लाल' थोक बाजार में शरबती गेहूं की बढ़ती कीमतों का असर अब खुदरा बाजार तक पहुंच गया है। ब्रांडेड कंपनियों के पांच किलो आटे के पैकेट 210 से 240 रुपए तक बिक रहे हैं। इससे घरेलू रसोई का मासिक बजट (MP Sharbati Wheat price impact on kitchen budget) और अधिक प्रभावित हो रहा है। हालांकि, सामान्य मिल क्वालिटी के लोकमन गेहूं के दाम अपेक्षाकृत स्थिर बने हुए हैं। दीनारपुर अनाज मंडी में लोकमन का भाव 2,450 से 2,550 रुपए प्रति क्विंटल के बीच है और प्रतिदिन लगभग 500 क्विंटल की आवक दर्ज की जा रही है। सात वर्षों में ऐसे बढ़ा शरबती का रुतबा  वर्ष – दाम 2020 – 3,500- 3,800 2021 – 3,600-4,000 2022 – 4,200-4,600 2023 – 4,400-4,800 2024 – 4,800-5,200 2025 – 5,400-5,800 2026 – 5,500-6,200 नोट : दाम प्रति क्विंटल में

बढ़ते तापमान ने बढ़ाई किसानों की चिंता, गेहूं की फसल पर मंडरा रहा संकट

नई दिल्ली जलवायु परिवर्तन का असर अब भारत की खाद्य सुरक्षा पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है. एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ता तापमान, विशेष रूप से सर्दियों में गर्मी और रात के समय तापमान में बढ़ोतरी देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर रही है।  क्लाइमेट ट्रेंड्स (Climate Trends) की रिपोर्ट, 'व्हीट अंडर स्ट्रेस: क्लाइमेट चेंज, राइजिंग हीट एंड अडैप्टेशन पाथवेज इन इंडिया’स मेजर व्हीट-ग्रोइंग स्टेट्स' में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दशकों में पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में गेहूं की वृद्धि दर में गिरावट दर्ज की गई है।  रिपोर्ट बनाने वाली प्रमुख लेखिका और क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिसर्च लीड डॉ. पलक बल्यान कहती हैं कि, भारत के गेहूं उत्पादन के सामने सबसे गंभीर लेकिन कम पहचाने गए खतरे में से एक रात के तापमान में लगातार वृद्धि है. गर्म रातें पौधों में श्वसन प्रक्रिया बढ़ा देती हैं, जिससे अनाज बनने के लिए आवश्यक कार्बोहाइड्रेट भंडार कम हो जाते हैं।   उन्होंने बताया कि फरवरी और मार्च में अचानक बढ़ने वाली गर्मी गेहूं के दाने भरने की अवधि को छोटा कर रही है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ रहा है. गेहूं के दाने छोटे और सिकुड़े हुए रह जाते हैं, जिससे कुल उत्पादन घटता है और गेहूं की क्वालिटी भी खराब हो जाती है।  रिपोर्ट के अनुसार, सभी प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में रात का तापमान दिन के तापमान की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है. गुजरात में यह वृद्धि दिन के तापमान की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक दर्ज की गई है. वहीं, फरवरी का महीना सबसे तेजी से गर्म हो रहा है, जिसमें प्रति दशक 0.69 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि देखी गई है।  क्लाइमेट ट्रेंड्स की संस्थापक और निदेशक आरती खोसला का कहना है कि, जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का जोखिम नहीं रह गया है. यह पहले से ही हमारे खाद्य तंत्र और ग्रामीण आजीविका को प्रभावित कर रहा है. किसानों को लगातार फसल नुकसान, घटती गुणवत्ता और बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु-स्मार्ट कृषि, बेहतर चेतावनी प्रणाली, टिकाऊ खेती और किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने वाले उपायों को प्राथमिकता दिए बिना देश की खाद्य सुरक्षा को लंबे समय तक सुरक्षित रखना कठिन होगा।  रिपोर्ट के अनुसार, गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जिससे रात के समय गर्मी का प्रभाव बढ़ रहा है. यह स्थिति विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में चिंताजनक है, जो भारत के गेहूं उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं।  अध्ययन में पाया गया कि फूल आने, दाना भरने और पकने जैसे महत्वपूर्ण चरण बढ़ते तापमान से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. फरवरी और मार्च में बढ़ती गर्मी फसल की वृद्धि अवधि को कम कर रही है, जिससे दाने छोटे और सिकुड़े हुए रह जाते हैं तथा उत्पादन में गिरावट आती है. इसके अलावा, कटाई के दौरान होने वाली बेमौसम बारिश फसल को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ भंडारण हानि भी बढ़ा रही है।  रिपोर्ट में गुजरात और पंजाब के किसानों के अनुभवों का भी जिक्र किया गया है. किसानों ने खराब अंकुरण, कम टिलरिंग, बढ़ते कीट प्रकोप और घटती गुणवत्ता जैसी समस्याओं की जानकारी दी है. छोटे और सीमांत किसान इन चुनौतियों से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।  विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर बुवाई, गर्मी-सहनशील किस्मों का उपयोग, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और मौसम आधारित सलाह सेवाओं को मजबूत करना जरूरी है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जलवायु-अनुकूल कृषि रणनीतियों को तेजी से लागू करना होगा। 

गेहूं खरीदी में MP नंबर-1, देशभर में किसानों से रिकॉर्ड खरीद का बनाया नया कीर्तिमान

भोपाल  किसानों से गेहूं खरीदी में मध्य प्रदेश ने नया रिकॉर्ड बनाया है। इसके लिए सीएम मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के किसानों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार लगातार किसानों के लिए काम करती रहेगी। मोहन यादव ने कहा है कि किसी राज्य ने अगर पूरे देश में सर्वाधिक किसानों से गेहूं खरीदा है, तो वो मध्यप्रदेश है। मध्यप्रदेश ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 1 करोड़ 4 लाख 31 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि गेहूं खरीदी के दौरान किसानों की संख्या सबसे ज्यादा होने में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है। और, सर्वाधिक लंबे समय तक किसी राज्य ने गेहूं खरीदी की व्यवस्था जारी रखी, तो वो भी मध्यप्रदेश है।  लक्ष्य से अधिक उपार्जन, 104 लाख मीट्रिक टन पार मध्यप्रदेश ने गेहूं खरीदी में एक बार फिर अपना वर्चस्व साबित किया है. इस वर्ष राज्य ने निर्धारित लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया. प्रारंभिक लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था, जिसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया. बेहतर रणनीति, समयबद्ध खरीदी और व्यवस्थागत सुधारों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया. किसानों की भागीदारी से बना रिकॉर्ड खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार प्रदेश में 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया. यह संख्या देश में सर्वाधिक है. हालांकि कुल उपार्जन के मामले में मध्यप्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है, लेकिन किसानों की व्यापक भागीदारी ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है।  लघु किसानों से खरीदी पहले सीएम डॉ. यादव ने कहा कि जब मैं अपने सर्वाधिक गेहूं उपार्जन वाले राज्य की तरफ देखता हूं तो गेहूं की मात्रा में भी पंजाब के बाद मध्यप्रदेश का दूसरा स्थान है, जिसके पास गेहूं का इतना विपुल उत्पादन होने के बाद उसने खरीदी की है। मध्यप्रदेश में पहली बार हमने लघु किसान, मध्यम श्रेणी के किसान का गेहूं खरीदने का निर्णय किया। हमने छोटे किसानों से लगभग 32. 72 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की। मुझे बताया गया है कि लगभग पौने चौदह लाख किसानों का समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया है। जिन किसानों ने पंजीयन कराया था, उनका गेहूं गोडाउन तक पहुंच चुका है।  किसान कल्याण वर्ष में यह परिणाम खास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य एशिया और पश्चिम एशिया में उत्पन्न विषम परिस्थितियों के बावजूद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए हमने यह गेहूं खरीदी की है। किसान कल्याण वर्ष में यह परिणाम खास है। हमने 24 हजार करोड़ से ज्यादा की धनराशि प्रेषित की है। हमने किसानों से समर्थन मूल्य 2585 रुपये और 40 रुपये बोनस अर्थात 2625 रुपये क्विंटल गेहूं खरीदा है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। आने वाले समय में एमएसपी बढ़ती जाएगी और किसान कल्याण के काम तेज होंगे। गेहूं का इतना उत्पादन होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। हमारी सरकार किसान कल्याण के काम लगातार करती रहेगी। 10 वर्षों में सर्वाधिक खरीदी प्रदेश में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का आंकड़ा पिछले 10 वर्षों में सर्वाधिक रहा है, यदि कोविड-19 अवधि को अपवाद मानें. इससे साफ है कि राज्य सरकार की नीतियां और खरीदी व्यवस्था लगातार बेहतर हो रही है।  राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. गेहूं उपार्जन में मिली यह सफलता सरकार की नीतियों, प्रशासनिक दक्षता और किसानों के सहयोग का परिणाम है. आने वाले समय में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। 

गेहूं खरीदी में बड़ा आंकड़ा पार, लघु और सीमांत किसानों से भी लाखों मीट्रिक टन खरीद जारी

अब तक कुल 13.36 लाख किसानों से 103 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जित सीमांत एवं लघु कृषकों से हुआ 32.14 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी भोपाल मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 13 लाख 36 हजार किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में अव्वल है। अब तक 103 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। इसमें से 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन गेहूँ खरीदी की गई है। गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। मुख्यमंत्री कर रहे सतत मॉनिटरिंग मंत्री राजपूत ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन लक्ष्य को केन्द्र सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित लक्ष्य से अधिक गेहूँ का उपार्जन हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये हैं, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी है। किसानों को 22,842.9 करोड़ से अधिक का भुगतान किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 22,842.9 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया है। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया जा रहा है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों की उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल काटें, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई।  

MSP पर रिकॉर्ड गेहूं खरीदी, 13.27 लाख किसानों से 102 लाख मीट्रिक टन उपार्जन

समर्थन मूल्य पर 13.27 लाख किसानों से हुआ 102 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी भोपाल  मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 13 लाख 27 हजार किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में नंबर-1 स्थान पर है। अब तक लगभग 102 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। मुख्यमंत्री कर रहे सतत मॉनिटरिंग मंत्री राजपूत ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन लक्ष्य को केन्द्र सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये हैं, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी है। किसानों को 22,165.21 करोड़ से अधिक का भुगतान किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 22,165.21 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया है। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया जा रहा है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों को उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल काटें, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई।  

मध्यप्रदेश में गेहूं खरीद ने तोड़ा रिकॉर्ड, 90 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंचा उपार्जन

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 12 लाख 30 हजार 426 किसानों से 90 लाख 8 हजार 469 मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है। मंत्री राजपूत ने बताया कि किसानों को 18 हजार 707 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जित गेहूँ में से 78 लाख 52 हजार 546 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। मंत्री राजपूत ने बताया है कि गेहूँ उपार्जन 23 मई 2026 तक किया जायेगा। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है।  

केंद्र का जवाब: पंजाब में गेहूं लिफ्टिंग नहीं रुक रही, 234 ट्रेनें चलाई गईं; उत्पादन घटा

चंडीगढ़  केंद्र सरकार ने पंजाब की मंडियों में भारी भीड़ और गेहूं की लिफ्टिंग न होने को झूठा करार दिया है। अब गेहूं लिफ्टिंग को लेकर केंद्र और सूबे की आप सरकार में तनातनी का माहौल हो गया है।  इसके बावजूद मंडियों से गेहूं का उठाव पिछले साल से बेहतर है। इस साल अब तक 78.96 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उठान किया जा चुका है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 75.63 लाख मीट्रिक टन था। सरकार का कहना है कि आवक कम होने और उठान अधिक होने से यह स्पष्ट है कि इस बार मंडियों में पिछले साल की तुलना में भीड़ कम है और लिफ्टिंग की व्यवस्था ठीक है। डायरेक्ट डिलवरी योजना से लिफ्टिंग तेज हुई मंडियों में भीड़ कम करने के लिए इस बार सीधी डिलीवरी योजना चलाई गई। अप्रैल में सीधी डिलीवरी के जरिए 3.5 लाख मीट्रिक टन गेहूं निकाला गया। मई के लिए 6.6 लाख मीट्रिक टन और जून के लिए 8 लाख मीट्रिक टन की योजना बनाई गई है। केंद्र ने बताया कि आप सरकार के अनुरोध पर गेहूं सीजन में कुल 18 लाख मीट्रिक टन गेहूं की सीधी डिलीवरी का लक्ष्य रखा गया है, जिससे मंडियों में गेहूं रखने की जगह कम न पड़े। 413 गेहूं स्पेशल ट्रेनों में से 234 अकेले पंजाब को दी केंद्र सरकार ने बताया कि रेल मंत्रालय और एफसीआई पंजाब से गेहूं की निकासी के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन कर रहे हैं। अप्रैल में देशभर में चलीं 413 गेहूं स्पेशल ट्रेनों में से 234 अकेले पंजाब को दी गईं। इसी तरह मई में भी उपलब्ध 354 ट्रेनों में से 201 ट्रेनें पंजाब के हिस्से में आई हैं, जो कुल राष्ट्रीय आवागमन का लगभग 60 प्रतिशत है। 100 अतिरिक्त ट्रेनें पंजाब को आवंटित स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश व दक्षिण के राज्यों के लिए मई में 100 अतिरिक्त ट्रेनें पंजाब को आवंटित की गई हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह जमीनी हालात पर नजर रखे हुए हैं और गेहूं की निर्बाध निकासी सुनिश्चित की जा रही है।  

किसानों को मिली बड़ी राहत, गेहूं उपार्जन की तारीख बढ़ाई गई, नया अपडेट जानें

भोपाल  मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गेहूं उपार्जन की तारीखों को आगे बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री के इस फैसले से अबतक अपनी फसलें सरकार को न बेच पाने वाले किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। गेहूं उपार्जन व्यवस्था में आ रही दिक्कतों के बीच राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए अहम निर्णय लिए हैं। सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्जाट करते हुए कहा कि, जिन किसानों का अब तक स्लॉट नहीं मिल पाया है, उन्हें अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, ताकि वो अपनी फसल आसानी से बेच सकें। आपको बता दें कि, अबतक समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन खरीदी की तारीख 9 मई 2026 निर्धारित थी, जिसे मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने बढ़ाकर 23 मई तक कर दिया है। यानी किसान सरकार को अपनी फसल समर्थन मूल्य पर नई निर्धारित तारीख तक बेच सकते हैं। इसी के साथ, मुख्यमंत्री डॉ यादव ने प्रदेश में गेहूं उपार्जन केंद्रों पर सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के भी निर्देश दिए हैं। लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा- सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि, गेहूं उपार्जन केंद्रों पर किसानों को निर्देशानुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध करने की व्यवस्था कर स्थितियां सुनिश्चित करें। उपार्जन केंद्र पर चल रही गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। गेहूं के लिए FAQ क्राइटेरिया में रिलेक्सेशन सीएम के निर्देश पर उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाएं आदि की व्यवस्था कर ली गई है। किसान जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज का विक्रय आसानी से कर सकेगा। गेहूं के लिए एफएक्यू मापदंड में शिथिलता प्रदान की गई है। किसानों की उपज की तौल समय पर करने के लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, कूपन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। खरगोन में सीएम का औचक निरीक्षण इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को खरगोन जिले की मंडलेश्वर तहसील के कतरगांव स्थित उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण करने पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद किसानों से बातचीत की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। बताया गया कि, महेश्वर प्रवास के दौरान वो अचानक केंद्र पहुंचे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण भी कर सकते हैं। केंद्रों पर की गई ये व्यवस्थाएं उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों से 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और राज्य सरकार द्वारा 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि समेत 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के लिए गेहूं उपार्जन एवं स्लॉट बुकिंग की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई कर दी है। अब तक कितनी गेहूं खरीदी? बता दें कि अबतक प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए 9.83 लाख किसानों द्वारा 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। प्रदेश में अभी तक 5 लाख 8 हजार 657 किसानों से 22 लाख 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस साल युद्ध के विपरीत हालातों के बावजूद किसानों के हित में सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य तय किया है।

4 लाख 88 हजार किसानों से 19 लाख 90 हजार मीट्रिक टन गेहूं का हुआ उपार्जन

4 लाख 88 हजार किसानों से 19 लाख 90 हजार मीट्रिक टन गेहूं का हुआ उपार्जन बड़े एवं मध्यम श्रेणी के 1.60 लाख किसानों ने स्लॉट कराये बुक भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि प्रदेश में 4 लाख 88 हजार 270 किसानों से 19 लाख 90 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय करने वाले किसानों को 2548 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान किए गए हैं। उपार्जन केन्द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रो पर प्रतिदिन, प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूं विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन, प्रति उपार्जन केन्द्र किया गया। तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। सभी जिलों में लघु सीमांत के साथ ही मध्यम एवं बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बड़े एवं मध्यम वर्ग के एक लाख 60 हजार किसानों ने स्लॉट बुक कराया है। पूरे प्रदेश में स्लॉ्ट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 9 मई तक की गई है। किसानों की सुविधा के लिए खरीदी के लिये प्रत्येक शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन का कार्य जारी रहेगा। अभी तक प्रदेश मे समर्थन मूल्य् पर गेहूं उपार्जन के लिये 9.60 लाख किसानों द्वारा 57.75 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय में किसी प्रकार की परेशानी न हो एवं उपज विक्रय के लिए इंतजार न करना पड़े इसके लिये किसानों को जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाएं आदि की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिये बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है।  

जालंधर में गेहूं की 3.31 लाख मीट्रिक टन खरीद, 882 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ

जालंधर जिले की मंडियों में गेहूं की आवक ने अब रफ्तार पकड़ ली है। पंजाब सरकार के एक-एक दाना खरीदने के वादे के बीच जिला प्रशासन ने दावा किया है कि अब तक 3,31,419 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया ने शुक्रवार को खरीद प्रक्रिया का जायजा लेते हुए बताया कि किसानों को फसल के बदले 882 करोड़ रुपए की अदायगी भी कर दी गई है। हालांकि, कागजों में खरीद की रफ्तार जितनी तेज है, मंडियों में लिफ्टिंग की सुस्त चाल ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि इस सीजन में जिले में कुल 5 लाख 27 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा गया है। अब तक करीब 60 फीसदी से ज्यादा आवक हो चुकी है। डीसी ने खरीद एजेंसियों को सख्त लहजे में हिदायत दी है कि खरीदी गई फसल का स्टॉक मंडियों से तुरंत उठाया जाए। असल में, अगर समय पर लिफ्टिंग नहीं हुई तो आने वाले दिनों में फसल रखने के लिए जगह कम पड़ जाएगी, जिससे जाम जैसी स्थिति बन सकती है। डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि लिफ्टिंग में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का सबसे बड़ा दावा किसानों को समय पर पेमेंट देने का है। डीसी वालिया के अनुसार, अब तक खरीदी गई फसल के बदले 882 करोड़ रुपए की अदायगी सुनिश्चित की गई है।