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यूपी क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम को लगभग 300 मिलियन डॉलर की मदद प्रदान करेगा विश्व बैंक

वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से विश्व बैंक और यूपी सरकार के बीच समझौते पर हस्ताक्षर यूपी क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम को लगभग 300 मिलियन डॉलर की मदद प्रदान करेगा विश्व बैंक विश्व बैंक की यह पहल उत्तर प्रदेश को पर्यावरण-अनुकूल सतत विकास प्राप्त करने में मजबूती प्रदान करेगी लखनऊ उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से विश्व बैंक, भारत सरकार और प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन कार्यक्रम (यूपी क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम) को 299.66  मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान करेगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य परिवहन, कृषि और उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता और स्वच्छता के लिए एकीकृत समाधानों को बढ़ावा देना है, जिसका लाभ यूपी के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को ध्यान में रखते हुए विश्व बैंक के साथ इस एमओयू को साइन किया गया। एमओयू पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से स्वच्छ वायु प्रबंधन प्राधिकरण की सीईओ एवं वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव बी. चंद्रकला,  भारत सरकार की ओर से आर्थिक मामलों के विभाग की संयुक्त सचिव जूही मुखर्जी और विश्व बैंक की ओर से भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि उत्तर प्रदेश 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। आर्थिक विकास, उत्पादकता और पर्यावरणीय संतुलन एक-दूसरे के पूरक हैं। इस कार्यक्रम से समृद्धि केवल जीडीपी से नहीं, बल्कि स्वच्छ आकाश, स्वस्थ नागरिकों और सतत एवं स्थायी पर्यावरण से मापी जाएगी। विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी का कहना है कि यह कार्यक्रम प्रदेश में परिवहन और एमएसएमई क्षेत्रों में लगभग 150 मिलियन डॉलर की निजी पूंजी का लाभ प्रदान करेगा। साथ ही इलेक्ट्रिक बसों और तीन-पहिया वाहनों में निवेश, उद्योगों में उत्सर्जन निगरानी प्रणालियों और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के प्रयोग से फर्मों की उत्पादकता में सुधार करने में मदद करेगा।  यह कार्यक्रम प्रदेश के 3.9 मिलियन घरों को स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा, 700 से अधिक ईंट भट्ठों को संसाधन-कुशल प्रौद्योगिकी को अपनाने में सहायता प्रदान करेगा। साथ ही किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कुशल उर्वरक के प्रयोग को प्रेरित करेगा। यह कार्यक्रम विश्व बैंक के इंडो-गंगा मैदान और हिमालयी तलहटी क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसकी परिपक्वता अवधि 10 वर्ष है। विश्व बैंक और उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल न केवल प्रदेश को वायु प्रदूषण से निपटने में मदद करेगी, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल सतत विकास की दिशा में भी मजबूती प्रदान करेगी।

विश्व बैंक की रिपोर्ट: भारत की अर्थव्यवस्था महायुद्ध में ‘ग्लोबल स्टार’, पाकिस्तान है कंगाल

नई दिल्ली एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड महामारी के बाद भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं ने बिल्कुल अलग दिशा पकड़ी है। जहां पाकिस्तान कई वर्षों से आर्थिक संकट में फंसा हुआ है, वहीं भारत तेजी से बढ़ते हुए विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2022 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में 6% की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन यह वृद्धि लंबे समय तक टिक नहीं पाई। 2023 में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगभग ठहर सी गई और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने केवल 0.5% विकास का अनुमान लगाया। इसके विपरीत भारत की अर्थव्यवस्था 2023 में 6% से अधिक बढ़ी और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की “उजली किरण” माना गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान की समस्याओं को उसके ही देश के अंदरूनी स्तर पर भी स्वीकार किया जा रहा है। इस्लामाबाद में हुए एक बिजनेस कार्यक्रम में विशेष निवेश सुविधा परिषद (SIFC) के राष्ट्रीय समन्वयक लेफ्टिनेंट-जनरल सरफराज अहमद ने कहा था कि पाकिस्तान के पास “कोई विकास योजना नहीं है” और देश की वित्तीय स्थिति बुरी तरह बिगड़ी हुई है। पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या महंगाई रही है। 2022 से 2023 के बीच महंगाई दर 37.97% तक पहुंच गई, जो पिछले 30 वर्षों में सबसे ज्यादा मानी जा रही है। इससे आम लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें बढ़ गईं। विश्व बैंक के अनुसार महंगाई के कारण लगभग 13 मिलियन पाकिस्तानियों को गरीबी में गिरना पड़ा।  2023-24 तक गरीबी दर बढ़कर 25.3% हो गई, यानी लगभग हर चार में से एक व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय गरीबी मानक (दैनिक 4 डॉलर से कम) लागू किया जाए तो पाकिस्तान की लगभग 45% आबादी गरीब मानी जा सकती है।भारत में भी इस अवधि में महंगाई रही, लेकिन यह पाकिस्तान की तुलना में काफी कम थी। भारत में 2023 में मुद्रास्फीति 5-6% के आसपास थी और 2024 में यह और कम हुई। 2023 के अंत में भारत में खुदरा महंगाई 5% से नीचे आ गई, खासकर खाद्य कीमतों के नियंत्रण के कारण। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक औसत पाकिस्तानी उपभोक्ता को भारत के मुकाबले लगभग पांच गुना अधिक महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। गरीबी के मामले में भी भारत ने बड़ी प्रगति की है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत में दैनिक 4 डॉलर से कम पर जीने वाले लोगों की संख्या 2023 तक 16% से घटकर 2.3% रह गई है।

चुनौतियाँ तो बहुत, लेकिन भारत में है ताकत: वर्ल्ड बैंक और अब इस एजेंसी की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली इंडियन इकोनॉमी लगातार दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं (India Fastest Growing Economy) में बना हुआ है. देश की ही नहीं, बल्कि तमाम ग्लोबल एजेंसियों ने भारत की तेज रफ्तार का लोहा माना है. एक ही दिन में मोदी सरकार के लिए विदेश से दो गुड न्यूज आईं. पहले वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने भारत की जीडीपी ग्रोथ (India GDP Growth) के अनुमान में तगड़ा इजाफा किया, तो उसे तुरंत बाद विदेश से एक और खुश करने वाली खबर डेलॉयट ने दी और कहा कि Indian Economy रुकने वाली नहीं है, तमाम चुनौतियों के बाद भी इसकी रफ्तार तेज रहेगी.  इस रफ्तार से दौड़ेगी भारत की इकोनॉमी Deloitte ने वित्त वर्ष 2026 में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ रेट 7.5% से 7.8% रहने का अनुमान जताया है. एजेंसी ने कहा है कि मजबूत घरेलू डिमांज और सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में मजबूती के चलते देश की रफ्तार तेज रहेगी.  डेलॉयट इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल ट्रेड टेंशन और ट्रंप टैरिफ की वजह से व्यापार में व्यवधान, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में नीतिगत बदलाव और अस्थिर कैश फ्लो समेत कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद FY26 की पहली छमाही में भारत नॉमिलन जीडीपी में 8% की ग्रोथ के साथ आर्थिक प्रदर्शन की दृष्टि से बेहतर बना हुआ है.  भारत पर भरोसा जताते हुए एजेंसी ने आगे कहा कि यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब भारत को रिकॉर्ड विदेशी निवेशकों की बिकवाली और करेंसी में गिरावट समेत तमाम महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन घरेलू सुधारों और त्योहारी डिमांड ने पॉजिटिव आउटलुक को बल दिया है.  भारत की दनादन डील से राहत रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने नई फ्री ट्रेड डील्स (Free Trade Deals) के जरिए अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाई है. देश ने ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ समझौते किए हैं, जबकि इजराइल संग बातचीत शुरू ट्रेड और इन्वेस्टमेंट संबंधों का विस्तार किया है. डेलॉयट ने कहा कि बाहरी जोखिम अभी भी हाई हैं, लेकिन 2025-26 में इनका पूरा प्रभाव नहीं दिखेगा, हालांकि FY2026-27 में वैश्विक अनिश्चितताओं से ग्रोथ रेट में थोड़ी कमी आ सकती है और ये 6.6-6.9% रह सकती है.  World Bank ने भी दी खुशखबरी  डेलॉयट से पहले वर्ल्ड बैंक ने भी भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाते हुए (World Bank Rise India's GDP Growth Forecast) 7.2% कर दिया, इससे पहले जून 2025 में जताया गया अनुमान 6.3% था, जिससे ये 0.9 फीसदी ज्यादा है. विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इंडियन इकोनॉमी की रफ्तार पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव बेहद सीमित रहेगा.  विश्व बैंक ने अमेरिकी टैरिफ में वृद्धि (US Tariff Hike) के बावजूद मजबूत घरेलू डिमांड का हवाला देते हुए FY2026 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाया है. रिपोर्ट में कहा गया कि घरेलू मांग में उम्मीद से अधिक मजबूती और उपभोग के बेहतर रुझानों के चलते भारत पर अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी का असर कम रहेगा. सरकार द्वारा की गई टैक्स कटौती (Govt Tax Cut) और ग्रामीण आय में वृद्धि से घरेलू खपत में मजबूती आई है, जिसके चलते भारत का आउटलुक बेहतर नजर आ रहा है.