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योगी सरकार ने अक्षय ऊर्जा और वृक्षारोपण को बनाया जनआंदोलन

‘विकसित यूपी @2047’ सीएम योगी का संकल्प, 2047 तक यूपी के सभी बड़े नगर होंगे 'सोलर सिटी'   योगी सरकार ने अक्षय ऊर्जा और वृक्षारोपण को बनाया जनआंदोलन -2030 तक 15% वक्षाच्छादन और 50% नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य  ग्रीन हाइड्रोजन व अक्षय ऊर्जा में यूपी ने रखा वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य – 2047 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का सीएम योगी का संकल्प लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘विकसित यूपी@2047’ विजन के तहत उत्तर प्रदेश को ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में नई दिशा देने का खाका तैयार किया है। उनका सबसे बड़ा लक्ष्य आने वाले 22 वर्षों में प्रदेश के सभी प्रमुख नगरों को ‘सोलर सिटी’ के रूप में विकसित करना है। इसके साथ ही यूपी को जलवायु सहिष्णु और शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला राज्य बनाने का भी संकल्प लिया गया है। योगी सरकार ने अक्षय ऊर्जा को दिया है बढ़ावा  योगी सरकार ने 2017 के बाद इस स्थिति को बदलने की दिशा में बड़े कदम उठाए। अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने, हरित परिवहन को प्रोत्साहित करने और वृक्षारोपण को जनांदोलन का रूप देने में सफलता मिली। इसी दौरान ‘सोलर सिटी’ की अवधारणा को भी आगे बढ़ाया गया, जिसके तहत अयोध्या से शुरुआत कर सभी बड़े नगरों को सौर ऊर्जा पर आधारित शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। बता दें कि 2017 से पहले प्रदेश का ऊर्जा उत्पादन लगभग पूरी तरह थर्मल आधारित था। प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कोई ठोस कार्ययोजना नहीं थी। वृक्षारोपण अभियान सीमित था और अक्षय ऊर्जा का योगदान बेहद कम था।  लघु अवधि (2030) के लक्ष्य योगी सरकार ने लघु अवधि (2030) के लक्ष्य तय कर दिए हैं। इनमें अयोध्या सहित सभी प्रमुख नगरों को ‘सोलर सिटी’ में बदलना, वक्षाच्छादन को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करना, थर्मल ऊर्जा पर निर्भरता घटाकर 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा सुनिश्चित करना और सभी पर्यावरणीय एसडीजी लक्ष्यों को प्राप्त करना शामिल है। मध्यम और दीर्घ अवधि (2047) के लक्ष्य  मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप सरकार ने मध्यम और दीर्घ अवधि (2047) में सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश को जलवायु सहिष्णु राज्य के रूप में विकसित किया जाए। इस दौरान वक्षाच्छादन को 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा और वन क्षेत्र का राष्ट्रीय योगदान 3 प्रतिशत तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों को ‘सोलर सिटी’ में तब्दील करने, शून्य कार्बन उत्सर्जन सुनिश्चित करने और ग्रीन हाइड्रोजन व अक्षय ऊर्जा में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट मत है कि 'सोलर सिटी' की परिकल्पना न केवल ऊर्जा सुरक्षा का आधार बनेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि का भी मजबूत जरिया साबित होगी। ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और वृक्षारोपण जैसे अभियान प्रदेश को 2047 तक न सिर्फ ‘विकसित यूपी’ बल्कि ‘ग्रीन यूपी’ भी बनाएंगे।

IGRS रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के जिलों का जलवा, बलरामपुर और श्रावस्ती टॉप पर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की निगरानी के लिए एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS) की अगस्त की रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट में बलरामपुर और श्रावस्ती ने संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया, दोनों जिलों ने 140 में से 137 अंक प्राप्त किए। शाहजहांपुर 134 अंकों के साथ दूसरे और हमीरपुर 132 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह रैंकिंग प्रशासनिक दक्षता और शिकायत निवारण में इन जिलों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को दर्शाती है। बलरामपुर के जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुसार, जिले में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के लिए साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। जन शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाता है और संतुष्टिपूर्ण फीडबैक के बाद ही मामले को बंद माना जाता है। इस दृष्टिकोण ने बलरामपुर को IGRS रैंकिंग में शीर्ष स्थान दिलाया। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता रहेगी। टॉप-10 सूची में कौन-कौन जिला श्रावस्ती के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि IGRS रिपोर्ट प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन के आधार पर जिलों का मूल्यांकन करती है। श्रावस्ती ने मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्यों के दम पर यह स्थान हासिल किया। जिला पिछले कई महीनों से IGRS और सीएम डैशबोर्ड की टॉप-5 सूची में बना हुआ है। टॉप-10 में पीलीभीत (चौथा), सोनभद्र (पांचवां), बरेली, अमेठी, हाथरस, औरैया और चंदौली भी शामिल हैं। कैसे तय होती है जिलों की रैंकिंग IGRS प्रणाली के तहत हर महीने 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की समीक्षा विभिन्न मानकों पर की जाती है, जिसके आधार पर जिलों की रैंकिंग तय होती है। यह प्रक्रिया प्रशासनिक पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है। बलरामपुर और श्रावस्ती की इस उपलब्धि ने अन्य जिलों के लिए एक मिसाल कायम की है। योगी सरकार की यह पहल जन शिकायतों के त्वरित निस्तारण और विकास कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं

गोरखपुर  गोरखपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरे दिन गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन का आयोजन कर लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। शुक्रवार सुबह जनता दर्शन में उन्होंने समस्या लेकर आए लोगों से आत्मीयता से संवाद करते हुए कहा, ‘घबराइए मत, आपकी समस्या का प्रभावी समाधान सुनिश्चित कराएंगे। सरकार सबकी समस्या दूर करने को संकल्पित है।’ जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने पास में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और उसका समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण कराएं। शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने के निर्देश दिए। जनता दर्शन में महिलाओं की संख्या अधिक रही। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे। एक-एक कर और इत्मीनान से सबकी समस्याएं सुनीं। उन्हें आश्वस्त किया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना पत्रों को उन्होंने अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए। कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर उन्होंने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अफसरों को यह निर्देश भी दिए कि यदि किसी प्रकरण में पीड़ित को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ा है तो इसकी भी जांच कर जवाबदेही तय की जाए।  जनता दर्शन में हर बार की तरह इस बार भी कुछ लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी। इस दौरान उन्होंने अफसरों से कहा कि हर पात्र व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनवाया जाए जिससे उन्हें इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।

योगी सरकार का तोहफा: यूपी के शिक्षकों को मिली राहत और नए आदेश का ऐलान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालयों और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए बड़ा निर्णय लिया है। अब 30 जून या 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी की गणना में एक नोशनल वेतनवृद्धि (काल्पनिक वेतनवृद्धि) जोड़ी जाएगी। वेतनवृद्धि का लाभ पेंशन की गणना में मिलेगा वित्त विभाग द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार, जिन कर्मचारियों की वार्षिक वेतनवृद्धि 1 जुलाई या 1 जनवरी को तय होती थी, लेकिन वे उससे ठीक एक दिन पहले यानी 30 जून या 31 दिसंबर को रिटायर हो जाते थे, उन्हें भी इस वेतनवृद्धि का लाभ पेंशन की गणना में मिलेगा। यह प्रावधान 1 जनवरी 2006 से लागू वेतन समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया है। किन्हें तत्काल प्रभाव से लाभ मिलेगा? इसका मतलब यह हुआ कि 1 जनवरी 2006 के बाद से लेकर शासनादेश जारी होने तक 30 जून को रिटायर हुए कर्मचारी भी इस सुविधा के दायरे में आएंगे। हालांकि, उन्हें केवल तत्काल प्रभाव से लाभ मिलेगा, पिछली अवधि का एरियर नहीं दिया जाएगा। यही नियम 1 जनवरी 2016 के बाद रिटायर हुए उन कर्मचारियों पर भी लागू होगा जिनकी रिटायरमेंट तिथि 30 जून या 31 दिसंबर रही और जिनकी वेतनवृद्धि क्रमशः 1 जुलाई या 1 जनवरी को तय थी। कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना शासनादेश के प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। इस फैसले से उच्च शिक्षा में कार्यरत हजारों शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से जुड़े डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित ने इसे शिक्षकों के लिए बड़ी राहत बताया। उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को कई बार पत्र लिखकर यह मांग उठाई गई थी। उन्होंने कहा कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में यह सुविधा पहले से लागू थी, अब उच्च शिक्षा में लागू होने से लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो गई है।  

एकलव्य वन से प्रारंभ हुई थी विशिष्ट वन की श्रृंखला, ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ पर होगा विशेष कार्यक्रम

पौधरोपण महाभियान-2025: शिक्षकों के सम्मान में सभी वन प्रभाग लगाएंगे 'एक पेड़ गुरु के नाम' एकलव्य वन से प्रारंभ हुई थी विशिष्ट वन की श्रृंखला, 'एक पेड़ गुरु के नाम' पर होगा विशेष कार्यक्रम शिक्षक दिवस (5 सितंबर) पर गुरु के सम्मान में रोपे जाएंगे पौधे लखनऊ के कुकरैल, वाराणसी के आईआईटी (बीएचयू) में लगाए जाएंगे पौधे  योगी सरकार के प्रयास से निरंतर बढ़ रहा यूपी का फॉरेस्ट कवर लखनऊ  योगी सरकार ने एक तरफ पौधरोपण महाभियान-2025 के अंतर्गत एक दिन में 36.21 करोड़ से अधिक पौध रोप कर नया रिकॉर्ड बनाया तो दूसरी तरफ इस वर्ष भी विशिष्ट वनों की स्थापना की गई। विशिष्ट वनों का आगाज एकलव्य वन के साथ प्रारंभ हुआ तो 'एक पेड़ गुरु के नाम' के तहत विशिष्ट आयोजन भी होगा। गुरु के सम्मान में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर सभी वन प्रभागों में यह आयोजन किया जाएगा। राजधानी लखनऊ में कुकरैल में वन विभाग के सेवानिवृत्त व वर्तमान अधिकारी पौधरोपण करेंगे।  योगी सरकार ने रचा इतिहास, 2025 में बनाया सर्वाधिक पौधरोपण का कीर्तिमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने नया इतिहास रच दिया। 'एक पेड़ मां के नाम 2.0' थीम के अंतर्गत पौधरोपण महाभियान-2025 में पूरे प्रदेश में एक दिन (9 जुलाई, बुधवार) में 37,21,40,925 पौधरोपण हुए। यह सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्य 37 करोड़ से 21,40,925 अधिक रहा। सीएम योगी ने अयोध्या से अभियान का आगाज किया था। उन्होंने 9 जुलाई को ही आजमगढ़ और गोरखपुर में भी पौधरोपण किया था।  लखनऊ में कुकरैल, वाराणसी में बीएचयू में लगेगा 'एक पेड़ गुरु के नाम'  लखनऊ के प्रभागीय वनाधिकारी सितांशु पांडेय ने बताया कि विशिष्ट वनों की श्रृंखला में शिक्षक दिवस पर लखनऊ के कुकरैल में पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। यहां स्मृति वाटिका में भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त व वर्तमान अधिकारी पौधरोपण करेंगे। यहां अधिकारियों को स्मृति चिह्न के रूप में पौधे भी भेंट किए जाएंगे। वहीं वाराणसी की प्रभागीय वनाधिकारी स्वाति श्रीवास्तव ने बताया कि आईआईटी (बीएचयू) में 'एक पेड़ गुरु के नाम' के तहत पौधरोपण होगा।  पौधरोपण महाभियान-2025 में लगाए गए विशिष्ट वन  पौधरोपण महाभियान-2025 के मिशन निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि गुरु के सम्मान में 5 सितंबर को प्रदेश के सभी वन प्रभागों में 'एक पेड़ गुरु के नाम' लगाया जाएगा। इसे लेकर सभी वन प्रभागों में तैयारी पूरी हो गई है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी अनेक विशिष्ट वन स्थापित किए गए।  2025 में स्थापित किए गए विशिष्ट वन व अन्य कार्यक्रम 👉 एकलव्य वन                 👉 ऑक्सी वन                  👉 शक्ति वन                   👉 त्रिवेणी वन                   👉 अटल  वन                   👉 सहजन भंडारा              👉 गोपाल वन                 👉 एकता  वन                 👉 पवित्र धारा पौधरोपण      👉 औद्योगिक इकाइयों द्वारा पौधरोपण  (संकल्प गोष्ठी व पौधरोपण)   👉 भाई-बहन पौधरोपण       (रक्षाबंधन वाटिका) 👉 शौर्य/सिंदूर वन            👉 एक पेड़ गुरु के नाम       

योगी सरकार उत्तर प्रदेश को बना रही है विदेशी निवेश का हॉटस्पॉट

विदेश से बड़े निवेश के प्रयास में जुटी योगी सरकार चीन+1 स्ट्रैटेजी के तहत 200 से ज्यादा कंपनियों से की जा रही बातचीत योगी सरकार उत्तर प्रदेश को बना रही है विदेशी निवेश का हॉटस्पॉट भारतीय एंबेसीज और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर किया जा रहा प्रयास  निवेशक हितैशी नीतियों के चलते विदेशी निवेशकों का भी यूपी पर बढ़ रहा भरोसा  लखनऊ  उत्तर प्रदेश में निवेश को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक बड़े अभियान की शुरुआत की है। सरकार का फोकस विदेश से पूंजी लाना और राज्य को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए योगी सरकार चीन+1 स्ट्रैटेजी पर काम कर रही है और अब तक करीब 200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से बातचीत की जा चुकी है। चीन+1 लीड्स को वास्तविक निवेश में बदलने के लिए राज्य सरकार इन देशों में भारत की एंबेसीज और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर प्रयास कर रही है। इसका नतीजा यह है कि निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है और उत्तर प्रदेश तेजी से एक ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। यूपी को मिल रहा विदेशी निवेशकों का भरोसा चीन+1 लीड्स के तहत जिन देशों पर सबसे ज्यादा फोकस है, उनमें अमेरिका, जापान, चीन, फ्रांस, डेनमार्क की कंपनियां शामिल हैं।  इनमें अमेरिका से 30 से ज्यादा, जर्मनी से 30 के करीब, जापान से 20, चीन से 14, स्विट्जरलैंड और फ्रांस से 7-7, डेनमार्क से 6 और स्पेन से 5 कंपनियां शामिल हैं। इन देशों की कंपनियां भी उत्तर प्रदेश में निवेश की इच्छुक हैं। उनकी इच्छा को धरातल पर उतारने के लिए यूपी सरकार विशेष टीम और कंट्री-स्पेसिफिक डेस्क बनाने पर भी विचार कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार इन लीड्स को हर हाल में कम्फर्म निवेश में बदलने के लिए प्रयासरत है और इसके लिए इन देशों में इंडियन एंबेसी की भी मदद ली जा रही है।  पीएलआई स्कीम बनी निवेश की नई ताकत निवेश प्रोत्साहन की पहल के तहत उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कई और भी इनीशिएटिव्स लिए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत भारत सरकार द्वारा अब तक 574 प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से 70 कंपनियां पहले से ही उत्तर प्रदेश में कार्यरत हैं। इसके अलावा 11 कंपनियों के पास नए प्रोजेक्ट्स हैं। 20 कंपनियों ने सीधे यूपी सरकार के साथ एमओयू किया है। वहीं, 473 कंपनियों के साथ सरकार लगातार एक्टिव फॉलो-अप कर रही है। निवेशकों के लिए बनाई गई सुविधा प्रणाली विदेशी निवेशकों को बेहतर सुविधा देने के लिए यूपी सरकार ने एक अभिनव कदम उठाया है। 814 कंपनियों (फॉर्च्यून 500 और इंडिया नेक्स्ट 500 से जुड़ी) के लिए अकाउंट मैनेजर्स नियुक्त किए गए हैं। इन कंपनियों में शिपिंग, शिप बिल्डिंग, टेलीकॉम, रिटेल, पेट्रोकेमिकल्स, इंश्योरेंस और पब्लिक सेक्टर बैंक शामिल हैं। साथ ही गुजरात स्टेट पेट्रोनेट और टीएन न्यूजप्रिंट जैसी स्टेट पीएसयू कंपनियां भी इस मिशन में शामिल हैं। इस पहल के माध्यम से अब तक 50 नए एमओयू साइन किए जा चुके हैं, जबकि 16 नई लीड्स और 282 कंपनियों के साथ चर्चा अभी भी चल रही है। इसलिए विदेशी कंपनियों के लिए यूपी में फायदेमंद है निवेश   उत्तर प्रदेश में निवेश को लेकर विदेशी कंपनियों की रुचि कई वजहों से है। इसमें सबसे बड़ी वजह स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल लीडरशिप है, जिसके तहत सीएम योगी की स्थिर और निर्णायक नीतियां महत्वपूर्ण रही हैं। इसके अलावा, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर – एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट्स, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अलावा, सबसे बड़ा उपभोक्ता राज्य होने का लाभ भी मिलने की संभावना है। यही नहीं, सिंगल विंडो सिस्टम और निवेशक सुविधा केंद्र जैसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार भी अहम भूमिका निभा रहा है।  क्या है चीन+1 स्ट्रैटेजी? चीन+1 स्ट्रैटेजी एक ग्लोबल बिज़नेस स्ट्रैटेजी है, जिसे दुनिया भर की मल्टीनेशनल कंपनियां अपनाती हैं और अब प्रदेश सरकार भी इस पर आगे बढ़ रही है। इसका उद्देश्य यह है कि कंपनियां अपना मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन सिर्फ चीन पर निर्भर न रखकर, एक या अधिक अतिरिक्त देशों में भी सेटअप करती हैं। उत्तर प्रदेश को इससे सबसे बड़ा फायदा मिल सकता है, क्योंकि यहां बड़ी जनसंख्या और वर्कफोर्स उपलब्ध है। सस्ता और स्किल्ड लेबर है। विशाल घरेलू मार्केट है। इसी को देखते हुए सरकार पीएलआई स्कीम और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार के जरिए निवेशकों को आकर्षित कर रही है। स्ट्रैटेजी के तहत कंपनियों से बातचीत कर रही है, ताकि विदेशी निवेश सीधे प्रदेश में आकर लगे।

ऐसे थे योगी के गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ

ऐसे थे योगी के गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ लखनऊ। अस्पृश्यता के उस दौर में अगर किसी प्रमुख संप्रदाय का संत, अपने संप्रदाय का समाज का अगुआ और उत्तर भारत की प्रमुख पीठ का पीठाधीश्वर अपने ही समाज के तमाम लोगों के विरोध के बावजूद किसी चांडाल (डोम) के घर भोजन करता है तो उससे पवित्र कोई हो ही नहीं सकता। बात हो रही है गोरखपुर स्थित नाथपंथ का हेडक्वार्टर मानी जाने वाली गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की। फरवरी 1981 में तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम जिले के तिरुनेलवेली में सामूहिक धर्मांतरण की एक घटना हुई थी। अवेद्यनाथ इस घटना से बेहद आहत थे। दक्षिण भारत की तरह इसका विस्तार उत्तर भारत में न हो, इसके लिए उन्होंने काशी के डोमराजा के घर संत समाज के साथ भोजन किया था। मकसद था बहुसंख्यक समाज के दलित तबके को सामाजिक समरसता का संदेश देना। फिर तो यही उनके जीवन का मिशन बन गया। बिना किसी भेदभाव के सामूहिक भोज का जो सिलसिला उन्होंने शुरू किया वह अब भी उनके शिष्य योगी आदित्यनाथ की अगुआई में जारी है।  ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ मूलतः संत थे। वे सबके थे और सबको स्वीकार्य भी थे।  मीनाक्षीपुरम की घटना ही उनके सक्रिय राजनीति में आने की वजह बनी। सितंबर में उनकी पुण्यतिथि पड़ती है इसीलिए हर सितंबर गोरक्षपीठ के लिए खास होता है। सितंबर में ही ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के गुरु और योगी आदित्यनाथ के दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पड़ने वाली पुण्य तिथि इसे और खास बना देती है। इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में साप्ताहिक पुण्यतिथि समारोह का आयोजन होता है। इस साल ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 56वीं और राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ की 11वीं पुण्यतिथि है। इसके उपलक्ष्य में आयोजनों का सिलसिला 4 से 11 सितंबर तक चलेगा। श्रद्धांजलि समारोह के उद्घाटन और समापन के अवसर पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। यह आयोजन खुद में भारतीय परंपरा के गुरु और शिष्य के बेमिसाल रिश्ते की मिसाल भी है। उनका ब्रह्मलीन होना एक संत की इच्छा मृत्यु थी ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का ब्रह्मलीन होना एक सामान्य घटना नहीं थी। पूरे संदर्भ को देखें तो यह एक संत की इच्छा मृत्यु जैसी थी। अपने गुरुदेव के ब्रह्मलीन होने के बाद एक कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने इसकी चर्चा भी की थी। योगी के मुताबिक, मेरे गुरुदेव की इच्छा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर मंदिर में ही ब्रह्मलीन होने की थी। और हुआ भी यही। उल्लेखनीय है कि गोरखनाथ मंदिर में करीब छह दशक से हर साल सितंबर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि सप्ताह समारोह का आयोजन होता रहा है। 2014 में इसी कार्यक्रम के समापन समारोह के बाद उसी दिन फ्लाइट से योगी आदित्यनाथ शाम को दिल्ली और फिर गुड़गांव स्थित मेदांता में इलाज के लिए भर्ती अपने गुरुदेव अवेद्यनाथ का हाल चाल लेने गए। वहां उनके कान में पुण्यतिथि के कार्यक्रम के समापन के बाबत जानकारी दी। वह कुछ देर वहां रहे। चिकित्सकों से बात किए। सेहत रोज जैसी ही स्थिर थी। लिहाजा योगी अपने दिल्ली स्थित सांसद के रूप में मिले सरकारी आवास पर लौट आए। रात करीब 10 बजे उनके पास मेदांता से फोन आया कि उनके गुरुदेव की सेहत बिगड़ गई है। पहुंचे तो देखा, वेंटीलेटर में जीवन का कोई लक्षण नहीं हैं। चिकित्सकों के कहने के बावजूद वे मानने को तैयार नहीं थे। वहीं महामृत्युंजय का जाप शुरू किया। करीब आधे घंटे बाद वेंटीलेटर पर जीवन के लक्षण लौट आए। योगी को अहसास हो गया कि गुरुदेव की विदाई का समय आ गया है। उन्होंने धीरे से उनके कान में कहा, कल आपको गोरखपुर ले चलूंगा। यह सुनकर उनकी आंखों के कोर पर आंसू ढलक आए। योगीजी ने उसे साफ किया और लाने की तैयारी में लग गए। दूसरे दिन एयर एंबुलेंस से गोरखपुर लाने के बाद  उनके कान में कहा, आप मंदिर में आ चुके हैं। बड़े महाराज के चेहरे पर तसल्ली का भाव आया। इसके करीब घंटे भर के भीतर उनका शरीर शांत हो गया। बड़े महाराज का अंतिम 10 वर्ष का जीवन चमत्कार था  विज्ञान के इस युग में संभव है आप यकीन न करें। पर बात मुकम्मल सच है। 10 साल पहले (12 सितंबर 2014 ) गोरक्षपीठ के महंत अवेद्यनाथ का ब्रह्मलीन होना सामान्य नहीं, बल्कि इच्छा मृत्यु जैसी घटना थी। चिकित्सकों के मुताबिक उनकी मौत तो 2001 में तभी हो जानी चाहिए थी, जब वे पैंक्रियाज के कैंसर से पीड़ित थे। उम्र और ऑपरेशन के बाद ऐसे मामलों में लोगों के बचने की संभावना सिर्फ 5 फीसद होती है। इसी का हवाला देकर उस समय दिल्ली के एक नामी डाक्टर ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया था। बाद में ऑपरेशन के लिए तैयार हुए तो यह भी कहा कि ऑपरेशन सफल रहा तो भी बची जिंदगी मुश्किल से 3 वर्ष की होगी। पर बड़े महाराजजी उसके बाद 14 वर्ष तक जीवित रहे। ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर अक्सर पीठ के उत्तराधिकारी (अब पीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री) योगी आदित्यनाथ से फोन पर बड़े महाराज का हाल-चाल पूछते थे। यह बताने पर कि उनका स्वास्थ्य बेहतर है, हैरत भी जताते थे। बकौल योगी, यह गुरुदेव के योग का ही चमत्कार था। राम मंदिर आंदोलन के प्राण थे ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महंत अवेद्यनाथ सितंबर 12, 2014 में ब्रह्मलीन हुए। तब अपने शोक संदेश में राम मंदिर आंदोलन के शिखरतम लोगों में शुमार विश्व हिन्दू परिषद के संरक्षक स्वर्गीय अशोक सिंघल ने कहा था, "वह श्री रामजन्म भूमि के प्राण थे। सबको साथ लेकर चलने की उनमें विलक्षण प्रतिभा थी। उसीके परिणाम स्वरूप श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के साथ सभी संप्रदायों, दार्शनिक परम्पराओं के संत जुड़ते चले गए।" इससे साबित होता है कि उनका कद और संत समाज में उनकी स्वीकार्यता क्या थी। वाकई वह राम मंदिर आंदोलन के प्राण थे। राम मंदिर उनके प्राणों में बसता था। अयोध्या में रामलला की जन्म भूमि पर भव्य राम मंदिर बने यह उनका सपना था। ऐसा सपना जो उनके दिलो दिमाग पर ताउम्र अमिट रूप से चस्पा हो गया था। वह चाह रहे थे कि उनके जीते जी वहां भव्य राम मंदिर बन जाए। पर दैव की मर्जी के आगे किसकी चलती? गीता … Read more

468 अस्थायी शिक्षणेतर और 480 आउटसोर्सिंग पदों पर भर्ती करेगी योगी सरकार

योगी सरकार का उच्च शिक्षा में बड़ा कदम : तीन विश्वविद्यालयों में 948 नए पदों को मंजूरी 468 अस्थायी शिक्षणेतर और 480 आउटसोर्सिंग पदों पर भर्ती करेगी योगी सरकार  भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक और कार्यात्मक व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी  शैक्षिक गुणवत्ता में भी होगी वृद्धि और प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापरक शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकता  लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के तीन नवगठित विश्वविद्यालयों—गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (मुरादाबाद), मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय (मिर्जापुर) और मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय (बलरामपुर) में कुल 948 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इसमें 468 अस्थायी शिक्षणेतर पद और 480 आउटसोर्सिंग पद शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन पदों के सृजन से विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक और कार्यात्मक व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी। साथ ही शैक्षिक गुणवत्ता में वृद्धि होगी और प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यूपी बढ़ रहा आगे  उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। यह निर्णय विश्वविद्यालयों को मजबूत बनाने के साथ-साथ प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बार-बार स्पष्ट किया है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापरक शिक्षा और रोजगार दोनों उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। विश्वविद्यालयों में नए पदों का सृजन इसी दिशा में एक ठोस कदम है, जो उच्च शिक्षा को सशक्त और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा। 468 अस्थायी शिक्षणेतर पद प्रत्येक विश्वविद्यालय में 156 अस्थायी शिक्षणेतर पद सृजित किए गए हैं, जो 28 फरवरी 2026 तक प्रभावी रहेंगे और आवश्यकतानुसार समाप्त भी किए जा सकते हैं। इन पदों में फार्मासिस्ट, इलेक्ट्रिशियन, अवर अभियंता, आशुलिपिक, सहायक लेखाकार, कनिष्ठ सहायक, लैब टेक्नीशियन, लैब असिस्टेंट, उप कुलसचिव, सहायक कुलसचिव, वैयक्तिक सहायक, लेखाकार, प्रधान सहायक, चिकित्साधिकारी और स्टाफ नर्स जैसे पद शामिल हैं। इन पदों की भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, सीधी भर्ती, पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया से की जाएगी। 480 आउटसोर्सिंग पद इसके अलावा, प्रत्येक विश्वविद्यालय में 160 पद वाह्य सेवा प्रदाता (आउटसोर्सिंग) के माध्यम से पूरे किए जाएंगे, जिससे कुल 480 पद बनते हैं। इनमें कम्प्यूटर ऑपरेटर, स्वच्छकार, चौकीदार, माली, चपरासी, वाहन चालक और पुस्तकालय परिचर जैसे पद शामिल हैं। आउटसोर्सिंग की प्रक्रिया जेम पोर्टल के माध्यम से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। साथ ही, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, श्रम विभाग और कार्मिक विभाग द्वारा जारी शासनादेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। सभी नियुक्तियों में आरक्षण से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य होगा।

प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में बूस्टर डोज का काम करेगी यूपी की बौद्धिक सम्पदा

योगी सरकार यूपीआईटीएस-2025 के माध्यम से ने जा रही है यूपी की हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच भौगोलिक संकेत वाले प्रदेश के 60 जीआई उत्पाद होंगे यूपीआईटीएस में विशेष आकर्षण काशी व आसपास की समृद्ध हैंडीक्राफ्ट तथा हस्तशिल्पियों के हुनर वाले 32 जीआई टैग उत्पादों की चमक देखेगी दुनिया  यूपीआईटीएस से जीआई उत्पादों के कारोबार में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान- पद्मश्री रजनीकांत,जीआई मैन ऑफ इंडिया  वाराणसी उत्तर प्रदेश की कला और हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत को योगी सरकार अंतर्राष्ट्रीय मंच देने जा रही है। यूपी सरकार 25 से 29 सितम्बर तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का आयोजन करा रही है। इस ट्रेड शो में प्रदेश के भौगोलिक संकेत वाले जीआई उत्पाद विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। यह न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि के परिचायक होंगे, बल्कि इसे 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस ट्रेड शो में काशी व आसपास की समृद्ध हैंडीक्राफ्ट की विरासत और हस्तशिल्पियों का हुनर वाले 32 जीआई टैग वाले उत्पादों की चमक दुनिया देखेगी। जीआई उत्पादों की प्रदर्शनी के लिए इंटरनेशनल ट्रेड शो में अलग से पवेलियन  की व्यवस्था होगी। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में कुल 77 जीआई टैग वाले उत्पाद हैं,  इसमें से 57 हस्तशिल्प और 20 कृषि एवं खाद्य उत्पाद जीआई पंजीकृत उत्पाद हैं।  काशी व आसपास के जनपदों के उत्पादों को मिलेगा बड़ा मंच उत्तर प्रदेश की बौद्धिक सम्पदा प्रदेश की इकोनॉमी को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में बूस्टर डोज का काम करेगी। प्रदेश की जीआई उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार दिलाने के लिए योगी सरकार इंटरनेशनल ट्रेड शो का आयोजन कर रही है। सरकार देश की परंपरागत हुनर और जीई उत्पादों को पुनर्जीवित करके इंटरनेशनल प्लेटफार्म पर ला रही है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के जीआई उत्पादों और ओडीओपी के ब्रांड एम्बेसडर बनकर ब्रांडिंग और मार्केटिंग करते रहे हैं। इस विषय में अपर आयुक्त उद्योग उमेश कुमार सिंह ने बताया कि पांच दिवसीय यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश के 60 जीआई पंजीकृत उत्पाद शामिल हो रहे हैं। जीआई उत्पादों को ट्रेड शो में अलग से स्थान दिया जा रहा है। सबसे ज्यादा काशी व आसपास के जनपदों  के जीआई टैग वाले उत्पाद ट्रेड शो के मंच पर देखने को मिलेगा।  उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान जीआई मैन ऑफ इंडिया के नाम से  जाने वाले पद्मश्री डॉ रजनीकांत ने  बताया कि इंटरनेशनल ट्रेड शो से जीआई उत्पादों के कारोबार में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। उन्होंने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में जीआई पंजीकृत उत्पादों के कारोबार से करीब 60 लाख लोग जुड़े हैं। इसका सालाना अनुमानित कारोबार लगभग 1 लाख करोड़ का है। पद्मश्री रजनीकांत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ट्रेड शो में प्रदेश के जीआई उत्पादों के शो केस करने के लिए अलग से स्थान दिए जाने पर आभार व्यक्त किया है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश, देश का एकमात्र राज्य है, जहां सभी प्रमुख श्रेणी के जीआई उत्पाद हैं। हस्तशिल्प में सर्वाधिक जीआई प्राप्त उत्पाद भी उत्तर प्रदेश से ही हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कुल 77 जीआई पंजीकृत उत्पाद हैं। हैंडीक्राफ्ट ,हैंडलूम और खाद्य उत्पादों के 60 जीआई टैग वाले उत्पाद ट्रेड शो में उपस्थिति दर्ज करेंगे, जिसमें सबसे ज्यादा 32 जीआई टैग वाले उत्पाद अकेले काशी और आसपास के जनपदों के हैं। ऐसे में, अब ये उत्पाद इंटरनेशनल ट्रेड शो में अपनी चमक बिखेरकर अंतर्राष्ट्रीय उड़ान भरने को तैयार हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को किया ‘जनता दर्शन’

शिकायत लेकर पहुंचे, मुस्कान लेकर लौटे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को किया 'जनता दर्शन' प्रदेश भर से आए हर फरियादी के पास पहुंचे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने सभी की समस्याएं सुनीं, अफसरों को निराकरण का दिया निर्देश छोटे बच्चों से भी आत्मीयता से मिले मुख्यमंत्री लखनऊ  अपनी फरियाद लेकर सितंबर की पहली सुबह मुख्यमंत्री आवास पहुंचे फरियादी मुस्कान लेकर लौटे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को 'जनता दर्शन' किया। प्रदेश भर से 50 से अधिक फरियादी आए। मुख्यमंत्री सभी के पास पहुंचे, उनकी समस्या जानी और प्रार्थना पत्र लेकर अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी की समस्याओं का निराकरण हो और हर पीड़ित से फीडबैक भी लिया जाय। अभिभावकों के साथ आये छोटे बच्चों से भी मुख्यमंत्री आत्मीयता से मिले। हालचाल जाना और चॉकलेट भी दी।  निश्चिंत होकर घर जाइये, आपकी हर समस्या का होगा समाधान   मुख्यमंत्री हर पीड़ित के पास स्वयं पहुंचे, समस्याएं सुनीं, प्रार्थना पत्र लिया और आश्वस्त किया कि निश्चिंत होकर घर जाइये, आपकी समस्या का समाधान होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर नागरिक की समस्याओं का समाधान कर खुशहाल उत्तर प्रदेश बनाना ही सरकार की प्राथमिकता है।  अधिकारियों को निर्देश-निस्तारण करें और फीडबैक लें सीएम ने 'जनता दर्शन' में आए लोगों की बात सुनी। पुलिस, राजस्व, चिकित्सा सहायता, रोजगार, शिक्षा, आवास, कब्जा, परिवार आदि से जुड़े मामले आए, जिस पर प्रार्थना पत्र लेकर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को दिया। 15 मामले जमीन, छह पुलिस, 4 मामले नाली, सड़क, खड़ंजे तथा 4 मामले आर्थिक सहायता से जुड़े भी आये। वहीं बेटी की शिक्षा, स्थानांतरण, आवास आदि के लिए भी सीएम के समक्ष लोगों ने गुहार लगाई। मुख्यमंत्री ने सभी को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। बच्चों को कराया अपनत्व का अहसास  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'जनता दर्शन' में अभिभावकों के साथ आए बच्चों को दुलारा-पुचकारा। नन्हे-मुन्नों के सिर पर हाथ फेर अपनत्व का अहसास कराया। कुछ बच्चों की पढ़ाई के बारे में भी जानकारी ली। सीएम योगी ने चॉकलेट-टॉफी प्रदान किया और पढ़-लिखकर बच्चों को उज्ज्वल भविष्य बनाने का आशीर्वाद दिया।