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नव निर्माण के 9 वर्ष: यूपी बनेगा हरित प्रदेश, 277 करोड़ से ज्यादा पौधरोपण

नव निर्माण के 9 वर्ष: 277 करोड़ से अधिक पौधरोपण वाला ‘हरित प्रदेश’ बनेगा यूपी  2026 के वर्षाकाल में फिर नया इतिहास रचेगा उत्तर प्रदेश इस वर्ष भी लक्ष्य (35 करोड़) से ज्यादा पौधरोपण की संभावना, पिछले वर्ष हुआ था 37.21 करोड़ पौधरोपण अभी से तैयारी में जुटी योगी सरकार, गांवों में लग रहीं ग्रीन चौपाल, सीएम योगी के नेतृत्व में 9 वर्ष में 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण अपने जन्मदिन (5 जून, पर्यावरण दिवस) पर प्रदेशवासियों को पौधरोपण का बड़ा तोहफा देते हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   लखनऊ  उत्तर प्रदेश 2026 में फिर नया इतिहास रचेगा। राज्य को ‘हरित प्रदेश’ बनाने वाले योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 9 वर्ष में 242.13 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए, जबकि इसके पहले 2008 से 2016 तक (9 वर्ष में) महज 65.27 करोड़ पौधरोपण ही किया जा सका। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वन विभाग इस वर्षाकाल (2026) में भी 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाएगा। इस तरह उत्तर प्रदेश 2026 तक 277 करोड़ से अधिक पौधरोपण करने वाला प्रदेश बन जाएगा। हरीतिमा वृद्धि के प्रयासों से उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन भी 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा है। 2025 में एक दिन (9 जुलाई) में 37.21 करोड़ पौधे लगाने वाले उत्तर प्रदेश ने 2026 पौधरोपण महाभियान को लेकर तैयारी शुरू कर दी है।  हाल में वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित 'वृहद पौधरोपण कार्यक्रम' में मात्र एक घंटे में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधे रोपे थे। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के जज ऋषिनाथ ने इसका प्रमाणपत्र भी सौंपा था।  जन्मदिन पर प्रदेशवासियों को पौधरोपण का तोहफा देते हैं सीएम योगी   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन 5 जून को है। इसी दिन पर्यावरण दिवस भी मनाया जाता है। मुख्यमंत्री अपने जन्मदिन की शुरुआत पौधरोपण से करते हैं। इसके बाद वर्षाकाल में करोड़ों पौधरोपण करने के साथ ही योगी आदित्यनाथ इसे जनांदोलन बनाते हैं। 2017 में सत्ता संभालने के बाद से 5 जून को पर्यावरण दिवस हो या वर्षाकाल में पौधरोपण महाभियान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इसकी कमान संभाली। पौधरोपण महाभियान के पहले वह खुद सफल आयोजन के लिए मीटिंग और मॉनीटरिंग करते हैं। इसके बाद प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पहुंचकर पौधे भी लगाते हैं। स्कूली बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों, कर्मचारियों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों समेत समाज के हर तबके को इस महाभियान से जोड़ने का बीड़ा उठाते हैं। योगी सरकार के प्रयास से 9 वर्ष में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। इससे यूपी के वनाच्छादन में भी वृद्धि हुई। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट-2023 के मुताबिक उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन भी 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा है। योगी सरकार ने 1 से 7 जुलाई 2025 के बीच जन्मे 18,348 बच्चों को ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट दिया है। बच्चों के अभिभावकों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे प्रदान कर यह संकल्प दिलाया गया कि जैसे बच्चे का पालन करें, वैसे ही पौधे का भी संरक्षण कर उसे पेड़ बनने में योगदान दें। पीएम मोदी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में सराहनीय कार्य के लिए उत्तर प्रदेश की पीठ भी थपथपाई है।  चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को किया ध्वस्त  यूपी ने विश्व के पर्यावरण मानचित्र पर 01 मार्च को नया इतिहास दर्ज किया। वाराणसी के सुजाबाद डोमरी में आयोजित 'वृहद पौधरोपण कार्यक्रम' में मात्र एक घंटे में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधों का रोपण कर चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में विकसित किए गए इस आधुनिक ‘शहरी वन’ ने आज विश्व पटल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। इसके पहले 10 मार्च 2018 को 1,53,981 पौधों का रोपण कर चीन की हेनान प्रांतीय समिति और हेनान शिफांगे ग्रीनिंग इंजीनियरिंग कंपनी ने विश्व रिकॉर्ड बनाया था।  योगी सरकार-2026 में भी लगाएगी 35 करोड़ से ज्यादा पौधे  योगी सरकार वर्षाकाल-2026 में भी पौधरोपण की तैयारी में जुट गई है। वन व पर्यावरण विभाग की ओर से 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य प्रस्तावित है। सरकार की ठोस तैयारी व जन-सहभागिता से यह लक्ष्य से अधिक होने की पूरी संभावना है। पौधशालाओं, विभागों, जनपदों को आगामी दिनों में तैयारी को लेकर निर्देश दिए गए हैं। 52 करोड़ से अधिक पौधे विभिन्न पौधशालाओं में रोपण के लिए तैयार स्थिति में होंगे। हाल में प्रस्तुत बजट में सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। पौधशाला प्रबंधन योजना के लिए 220 करोड़ रुपये तथा राज्य प्रतिकारात्मक वन रोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में प्रस्तावित है।  गांवों में पर्यावरण संरक्षण जागरूकता के लिए ‘ग्रीन चौपाल’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2030 तक प्रदेश के हरित आवरण को 15 प्रतिशत तक लाने का निर्देश दिया है। यह लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब पौधरोपण को जनांदोलन का स्वरूप दिया जा सके। सीएम के विजन को केंद्र में रखते हुए वन विभाग ने गांवों में ग्रीन चौपालों का गठन करने का निर्णय किया और इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण में आमजन की भागीदारी भी सुनिश्चित की। विभिन्न विभागों के सहयोग से प्रत्येक ग्रामसभा स्तर पर अब तक 18000 से अधिक गांवों में चौपालों का गठन/आयोजन किया जा चुका है। ग्रीन चौपालें ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में हो रही हैं। इसमें सरकार के सभी वर्गों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से इसकी बैठक की जा रही है।

योगी सरकार के वन स्टॉप सेंटर से महिलाओं को मिल रहा बड़ा सहारा, 2025-26 में 55,134 मामलों में सहायता

योगी सरकार में वन स्टॉप सेंटर बने महिलाओं के लिए सबसे बड़ा सहारा, वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 55,134 प्रकरणों में मदद पुलिस से लेकर खुद पीड़िता तक पहुंच, हर स्तर पर सक्रिय दिखा सिस्टम लखनऊ  उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर योगी सरकार का वन स्टॉप सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 55,134 प्रकरणों में महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है, जो इस व्यवस्था की व्यापक पहुंच और प्रभाव को दिखाता है। यह उन हजारों महिलाओं की कहानी है जिन्हें संकट की घड़ी में तुरंत सहारा मिला है। इसके अंतर्गत 26,450 मामले पुलिस के माध्यम से आए, जबकि 7,551 महिलाएं खुद सहायता के लिए आगे आईं यानी सिस्टम तक पहुंच और उस पर भरोसा दोनों तेजी से बढ़ा है। हर चैनल से जुड़ा सिस्टम, हर पीड़िता तक पहुंच वन स्टॉप सेंटर अब एकीकृत व्यवस्था के रूप में काम कर रहे हैं। महिला हेल्पलाइन से 8,506, बाल कल्याण समिति से 6,433 और अन्य माध्यमों से 5,560 मामले सामने आए। इसके अलावा विभिन्न विभागों के जरिए भी महिलाओं को सहायता मिली। यह दिखाता है कि अब व्यवस्था अलग-अलग हिस्सों में बंटी नहीं है, बल्कि एक प्लेटफॉर्म पर आकर पीड़ित महिला को हर जरूरी मदद उपलब्ध करा रही है। हर तरह की समस्या का एक ही समाधान केंद्र इन प्रकरणों में सबसे अधिक 34,565 मामले सिविल विवादों से जुड़े हैं, जबकि 14,268 मामले घरेलू हिंसा के हैं। इसके अलावा यौन हिंसा, जेंडर आधारित हिंसा और साइबर अपराध से जुड़े मामले भी हैं। साफ है कि वन स्टॉप सेंटर अब केवल एक सेवा नहीं, बल्कि महिलाओं से जुड़ी हर समस्या के समाधान का केंद्र बन चुके हैं। हर उम्र की महिलाओं तक पहुंचता सुरक्षा तंत्र इन केंद्रों की पहुंच हर आयु वर्ग तक है। 18 से 30 वर्ष की 26,565 महिलाएं, 31 से 45 वर्ष की 7,888 महिलाएं इन सेवाओं से लाभान्वित हुई हैं। इसके अलावा आयु वर्ग की महिलाओं को भी सहायता पहुंचाई गई है। यह बताता है कि यह व्यवस्था समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच बना रही है और जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिल रही है। जमीनी स्तर पर सक्रिय, भरोसे का मजबूत आधार प्रदेश में इस समय 96 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं और अगले महीने अप्रैल में 25 और नए वन स्टॉप सेंटक संचालित हो जाएंगे। इनके माध्यम से लगातार सेवाएं दी जा रही हैं। सीमित स्टाफ के बावजूद बड़ी संख्या में मामलों में सहायता यह दर्शाती है कि सिस्टम जमीन पर काम कर रहा है। कुल मिलाकर, वन स्टॉप सेंटर अब महिला सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन चुके हैं। योगी सरकार ने यह साबित किया है कि सुरक्षा का मतलब सिर्फ नीतियां बनाना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है और यही इस मॉडल की असली ताकत है।

शोर कम, काम ज्यादा: योगी सरकार की योजना से कनेक्टिविटी का नया मॉडल

हर गांव तक बस, हर गांव तक सुविधा: 12 हजार से ज्यादा गांवों की बदलेगी तस्वीर शोर कम, काम ज्यादा: योगी सरकार की योजना से कनेक्टिविटी का नया मॉडल सिर्फ सड़क नहीं, सेवाओं की भी पहुंच : ग्रामीण परिवहन से खुलेगा अवसरों का रास्ता लखनऊ उत्तर प्रदेश में ग्रामीण परिवहन विकास को नई दिशा देने के लिए योगी सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना, 2026 के तहत लगभग 12,200 ऐसे गांवों में बस सेवा शुरू की जाएगी, जहां अब तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं थी। यह पहल सिर्फ बस चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर गांव तक वास्तविक संपर्क सुनिश्चित करने की है। साफ संदेश है, जहां बस जाएगी, वहां संपर्क मार्ग भी होगा और वहीं से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंच का रास्ता खुलेगा। ग्रामीण परिवहन पर खर्च 2011-12 में घरेलू बजट के 4.2% से बढ़कर 2022-23 में लगभग 7.5% हो गया है। यही वह अंतर है जो योगी सरकार को अन्य सरकारों से अलग करता है। शोर कम, काम ज्यादा और अंतिम व्यक्ति तक सुविधा पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रतिबद्ध हैं।  अंतिम छोर तक बस सेवा पहुंचाने की ठोस रणनीति प्रदेश में बीते वर्षों में सड़कों का व्यापक जाल बिछा, लेकिन 12 हजार से ज्यादा गांव अब भी सुविधाओं से कटे हुए थे। योगी सरकार ने इस अंतर को पहचानते हुए कनेक्टिविटी की परिभाषा को बदला है। अब केवल सड़क बनाना लक्ष्य नहीं, बल्कि उस सड़क पर नियमित परिवहन सुनिश्चित करना है। यह योजना 59,163 ग्राम सभाओं को जोड़ने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। खास बात यह है कि करीब 5,000 ऐसे गांव, जहां बड़ी बसें नहीं पहुंच सकतीं, वहां 28 सीटों तक की छोटी बसें चलाई जाएंगी। यानी दुर्गम इलाकों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का स्पष्ट रोडमैप तैयार है। बसों की सेवा प्रत्येक ग्राम पंचायत में दिन में कम से कम दो बार सुनिश्चित की जाएगी, जिससे लोगों को नियमित और भरोसेमंद परिवहन सुविधा मिल सके। यह सेवा सुबह 10 बजे से शुरू होगी और बस को रात में 8 बजे तक गांव लौटाना होगा। बसों को परमिट प्रारंभिक रूप से 10 वर्षों के लिए प्रदान किए जाएंगे, आगे इसे बढ़ाया भी जा सकता है।  रोजगार और भागीदारी का नया मॉडल इस योजना में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन पर भी विशेष जोर है। बसों के चालक और सहायक स्टाफ की भर्ती आसपास के गांवों से की जाएगी, जिससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा। साथ ही निजी ऑपरेटरों को भी जोड़ा गया है, जिन्हें परमिट और करों में छूट देकर भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह मॉडल न केवल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति देगा। निगरानी, विश्वसनीयता और रोजमर्रा की राहत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में समितियां बनाई जाएंगी, जो संचालन, किराया निर्धारण और निगरानी का काम देखेंगी। बसों को रात तक गांवों में लौटना अनिवार्य होगा, जिससे सेवा की निरंतरता बनी रहे। यह पहल उन लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए राहत लेकर आएगी, जो अब तक महंगे और अनियमित साधनों पर निर्भर थे। परिवहन खर्च में कमी आएगी और लगभग 1.5 करोड़ छात्रों को विद्यालयों तक पहुंचने में आसानी होगी, जिससे ड्रॉपआउट दर पर भी असर पड़ेगा। कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना यह स्पष्ट करती है कि विकास का असली पैमाना वही है, जो अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। योगी सरकार कनेक्टिविटी को सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि सुविधा, अवसर और सम्मानजनक जीवन से जोड़ते हुए एक नया मानक स्थापित कर रही है।

योगी सरकार की सख्त मॉनिटरिंग से क्रियान्वयन में आई तेजी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा नया बल

स्वदेशी गो-संवर्धन योजना में तेज प्रगति पर फोकस, सभी जिलों में बढ़ी रफ्तार योगी सरकार की सख्त मॉनिटरिंग से क्रियान्वयन में आई तेजी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा नया बल गो-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत कर किसानों-पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल लखनऊ  योगी सरकार की मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना अब प्रदेश में तेज प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रही है, जहां इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। सरकार द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिक से अधिक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे जिलों में कार्य की रफ्तार बढ़ी है और योजनाएं तेजी से धरातल पर उतर रही हैं।    प्रदेश के विभिन्न जनपदों में योजना के तहत लाभार्थियों को जोड़ने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। इसके चलते पशुपालकों और किसानों की भागीदारी में वृद्धि हुई है और गो-आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। योजना का उद्देश्य केवल पशुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना भी है।    योगी सरकार द्वारा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि योजना के प्रत्येक चरण (चयन, स्वीकृति, अनुदान और क्रियान्वयन) को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पूरा किया जाए। इसी क्रम में जिलों की नियमित समीक्षा की जा रही है और जमीनी स्तर पर आ रही चुनौतियों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर समन्वय को मजबूत करते हुए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजना का लाभ किसी भी पात्र लाभार्थी से वंचित न रह जाए।     पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि  इस योजना के माध्यम से गो-आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है, जिससे दुग्ध उत्पादन, जैविक खेती और संबंधित गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है। इससे न केवल किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार भी हो रहा है। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की योजनाएं प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।    योगी सरकार लगातार इस दिशा में प्रयासरत है कि योजनाओं का लाभ सीधे आमजन तक पहुंचे और उनका जीवन स्तर बेहतर हो। तेज प्रगति, प्रभावी क्रियान्वयन और सुदृढ़ मॉनिटरिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना को प्रदेश के ग्रामीण विकास और आर्थिक सशक्तीकरण का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। यह पहल न केवल पशुपालन क्षेत्र को नई गति दे रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश को समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

चैत्र नवरात्रि में गोरक्षपीठाधीश्वर ने मां के चरणों में लगाई हाजिरी, स्वस्थ-समृद्ध उत्तर प्रदेश की कामना की

मुख्यमंत्री ने किए मां पाटेश्वरी के दर्शन चैत्र नवरात्रि में गोरक्षपीठाधीश्वर ने मां के चरणों में लगाई हाजिरी, स्वस्थ-समृद्ध उत्तर प्रदेश की कामना की मंदिर की व्यवस्थाओं का लिया जायजा, श्रद्धालुओं का किया अभिवादन गोरक्षपीठाधीश्वर मार्च में दूसरी बार पहुंचे मां पाटेश्वरी मंदिर   लखनऊ/बलरामपुर गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चैत्र नवरात्रि में बुधवार को तुलसीपुर में देवी शक्तिपीठ मां पाटेश्वरी मंदिर में दर्शन, पूजन-अर्चन किया। मां की आरती उतारी और सुखी, स्वस्थ व समृद्ध उत्तर प्रदेश की कामना की। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया और श्रद्धालुओं का अभिवादन भी किया।  सीएम योगी बुधवार को बहराइच में आयोजित कार्यक्रम के उपरांत बलरामपुर पहुंचे। यहां दर्शन-पूजन के बाद उन्होंने गोरखपुर के लिए प्रस्थान किया। सीएम ने मंदिर में आये श्रद्धालुओं का अभिवादन भी किया। सीएम ने रामनवमी के अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा व स्वच्छता की समुचित व्यवस्था का भी निर्देश दिया।   गौरतलब है कि इसके पूर्व मुख्यमंत्री 11 मार्च को दो दिवसीय दौरे पर बलरामपुर पहुंचे थे। उन्होंने 12 मार्च की सुबह मां पाटेश्वरी मंदिर में दर्शन-पूजन किया था। बुधवार को दर्शन-पूजन के दौरान महंत मिथिलेश नाथ योगी, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही भी मौजूद रहे।

चैत्र नवरात्रि में मन की मुराद पूरी, मुख्यमंत्री के हाथों मिला सुविधाओं का लाभ

चैत्र नवरात्रि में पूरी हुई मन की मुराद, मुख्यमंत्री के हाथों मिला सुविधाओं का लाभ  भरथापुर के ग्रामीण ने मंच पर अपने बदले हालात से कराया अवगत  बहराइच/लखनऊ भरथापुर में विकट परिस्थितियों में रह रहे 136 परिवारों को 1.20 लाख रुपये प्रति परिवार की दर से मुख्यमंत्री आवास की धनराशि अंतरित की गई। चैत्र नवरात्रि में मुख्यमंत्री ने 1.63 करोड़ से अधिक की धनराशि लाभार्थियों के खाते में सीधे अंतरित की।  मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर लाभार्थियों को विभिन्न सुविधाओं से युक्त स्वीकृति पत्र प्रदान किए। इसके अलावा सीएम ने लाभार्थियों को हितग्राही धनराशि, परिसंपत्तियों, मुआवजा, शौचालय, मुख्यमंत्री आवास राशि समेत अनेक सुविधाओं का लाभ और उपहार भी प्रदान किए। इसके तहत संगीता को 16.98 लाख, आरती को 19.60 लाख, निर्मला देवी को 30.99 लाख, रानी देवी को 18.91 लाख, रेखा देवी को 21.73 लाख, किशोरी देवी को 37.44 लाख, अन्ना देवी को 26.49 लाख, सुनीता देवी को 18.53 लाख, प्रेमा देवी को 30.56 लाख, मंजू देवी को 26.84 लाख से अधिक की राशि का संस्तुति पत्र समेत अनेक सुविधाओं का लाभ प्रदान किया गया।  "मुख्यमंत्री जी करा रहे समस्या का समाधान" कार्यक्रम स्थल पर मौजूद भरथापुर निवासी मुन्ना लाल मौर्य ने सीएम योगी का ह्रदय से आभार प्रकट करते हुए कहा कि हमारा गांव तीन तरफ से नदियों व एक तरफ जंगल से घिरा हुआ है। वहां कोई सुविधा नहीं है। तहसील जाने के लिए नाव से नदी पारकर जाते हैं और इसके लिए कुल 60 किमी. की दूरी तय करनी होती है। हमारे गांव में शौचालय, विद्यालय, शिक्षा-स्वास्थ्य आदि की सुविधाएं नहीं थीं। मुख्यमंत्री जी आज हमारी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं, इसके लिए उनका हृदय से आभार। गांव में जो जमीन थी, वह नदी के कटान से चली गई। हम भूमि विहीन हैं। रोजगार भी नहीं है। 29 अक्टूबर को नाव हादसे में हमारे गांव के 9 लोगों की मृत्यु हो गई थी। मुख्यमंत्री जी ने इसका तुरंत संज्ञान लिया। गांव का भ्रमण कर पीड़ित परिवारों से मिले और ढांढस बंधाया। उन्होंने जिलाधिकारी से सेमरहना में जगह निश्चित करने और हम लोगों को बसाने, शिक्षा, रोजगार के लिए कहा। यह भी निर्देश दिया कि सभी आराम से रहें और बच्चे पढ़ें।

पंचगव्य से यूपी में खड़ा होगा विशाल ऑर्गेनिक बाजार

गोशालाएं बनेंगी अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन पंचगव्य से यूपी में खड़ा होगा विशाल ऑर्गेनिक बाजार बायोगैस प्लांट स्थापित कर तैयार की जाएगी बायो सीएनजी आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर और आईआईटी खड़गपुर पासआउट छात्र की हाईटेक टेक्नोलॉजी का होगा गोशालाओं में इस्तेमाल 100 से ज्यादा गो उत्पादों के जरिए तैयार की जाएगी मार्केट, बड़े पैमाने पर मिलेगा रोजगार योगी सरकार का बड़ा कदम : प्रदेश के छोटे पशुपालकों को भी होगी बड़ी कमाई लखनऊ  उत्तर प्रदेश जल्द ही देश का बड़ा आधुनिक 'टेक्नोलॉजी बेस्ड गोसंरक्षण मॉडल स्टेट'  बनकर उभरने वाला है। प्रदेश की गोशालाओं को अब सिर्फ पशुओं के आश्रय तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार का बड़ा केंद्र बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गो सेवा आयोग ने 'पंचगव्य वैल्यू चेन' (गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी) पर काम करते हुए 100 से ज्यादा उत्पाद तैयार कर एक विशाल ऑर्गेनिक मार्केट तैयार करने का खाका खींच लिया है। इसमें आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर और आईआईटी खड़गपुर पासआउट छात्र की हाईटेक टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसी से बायोगैस प्लांट स्थापित कर बायो-सीएनजी तैयार की जाएगी। योगी सरकार के इस बड़े कदम का लाभ प्रदेश के छोटे पशुपालकों को भी होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोसंरक्षण के विजन को जमीन पर उतारने के लिए देश के शीर्ष आईआईटी संस्थानों के विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना का पहला प्रयोग जालौन जिले की गोशालाओं से शुरू किया जा रहा है। यहां बायोगैस प्लांट स्थापित कर जैविक खाद, बायो-सीएनजी और अन्य पंचगव्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। जालौन का यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर इस हाईटेक मॉडल को पूरे प्रदेश की गोशालाओं में लागू किया जाएगा। गोशालाओं को पूरी तरह स्वावलंबी और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने के लिए आईआईटी दिल्ली के प्रो. वीके विजय विशेष सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि टेक्निकल टीम गांवों में जाकर स्किल ट्रेनिंग देगी। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस प्लांट के सुचारू संचालन के लिए स्थानीय लोगों को विशेष रूप से तैयार किया जाएगा।  उत्पादों को तैयार करने से लेकर उसकी ब्रांडिंग और बिक्री तक मदद करेगी टीम वहीं, सॉफ्टवेयर कंपनी से करोड़ों का पैकेज छोड़कर आए आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र यशराज और उनकी टीम इन उत्पादों को तैयार करने से लेकर उसकी ब्रांडिंग और बिक्री तक मदद करेगी। योगी सरकार के इस बड़े कदम का लाभ प्रदेश के छोटे पशुपालकों को भी होगा। पंचगव्य के जरिए बनाए गए उनके उत्पादों का बाजार में बेहतर मूल्य मिलेगा। इसके साथ ही गांव-गांव स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिलेगा। आधुनिक मॉडल के दोहरे फायदे गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार इस आधुनिक मॉडल के दोहरे फायदे होंगे। एक ओर जहां गोवंश का सुरक्षित संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं और छोटे किसानों के लिए रोजगार व अतिरिक्त आय के नए द्वार खुलेंगे। तकनीक और परंपरा का यह संगम गांवों में आजीविका का एक बिल्कुल नया और स्थायी मॉडल पेश करने जा रहा है। योजना की महत्वपूर्ण बातें गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी से तैयार होंगे 100 से अधिक ऑर्गेनिक उत्पाद। पहले चरण में जालौन की गोशालाओं को बनाया जा रहा है हाईटेक और स्वावलंबी। बायोगैस प्लांट चलाने और उत्पाद बनाने के लिए आईआईटी विशेषज्ञ दे रहे ट्रेनिंग। गोसंरक्षण के साथ-साथ छोटे पशुपालकों और स्थानीय युवाओं की आय बढ़ाने का सीधा जरिया।

कौशल विकास से बढ़ेगी आर्थिक रफ्तार, ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य पर योगी सरकार का जोर

कौशल विकास से तेज होगी आर्थिक रफ्तार, ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य पर योगी सरकार का फोकस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उद्योग आधारित प्रशिक्षण और आईटीआई सशक्तीकरण पर जोर युवाओं को रोजगारोन्मुख कौशल योगी सरकार की प्राथमिकता लखनऊ  उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए योगी सरकार कौशल विकास को केंद्र में रखकर तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश सचिवालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभागीय योजनाओं की प्रगति और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि योगी सरकार का फोकस युवाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित करना है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के सशक्तीकरण को लेकर बैठक में विशेष जोर दिया गया। टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से आधुनिक प्रशिक्षण मॉडल विकसित करने और उद्योग आधारित स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता को उद्योगों की मांग के अनुरूप बनाना समय की जरूरत है, जिससे युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके। इसके साथ ही डेलॉइट के प्रतिनिधियों ने बदलते औद्योगिक परिदृश्य, नई तकनीकों और भविष्य उन्मुख कौशल पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि आने वाले समय में टेक्नोलॉजी आधारित स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ेगी, जिसके लिए प्रशिक्षण प्रणाली को अपडेट करना जरूरी है। मंत्री ने कहा कि कौशल विकास को नई दिशा देकर प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना ही प्रदेश की आर्थिक प्रगति की कुंजी है। उन्होंने अधिकारियों को नवाचार, तकनीकी उन्नयन और उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने दोहराया कि योगी सरकार युवाओं को सशक्त बनाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

योगी सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं में अभूतपूर्व प्रगति

नव निर्माण के 9 वर्ष: गुड गवर्नेंस से बदली यूपी की तस्वीर, ‘ईज ऑफ लिविंग’ में हुआ बड़ा सुधार योगी सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं में अभूतपूर्व प्रगति पेंशन, आवास, मुफ्त राशन, मेडिकल कॉलेज, स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल सुविधाओं के आंकड़े बता रहे बदलाव की पूरी कहानी हर व्यक्ति तक पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं, डिजिटल सेवाओं से समय व श्रम में हुई भारी कमी शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए अब नहीं रही प्रदेशवासियों को यूपी से बाहर जाने की जरूरत लखनऊ उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सुशासन (गुड गवर्नेंस) को केंद्र में रखकर ‘ईज ऑफ लिविंग’ को मजबूत करने की दिशा में व्यापक काम हुआ है। योजनाओं की प्रगति और उपलब्ध आंकड़े इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। सरकार के द्वारा किए गए इन सभी प्रयासों का समेकित प्रभाव यह है कि उत्तर प्रदेश में अब स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के लिए लोगों को बाहर जाने की आवश्यकता कम हुई है। योजनाओं की ठोस प्रगति और पारदर्शी क्रियान्वयन ने प्रदेश को ‘ईज ऑफ लिविंग’ के मामले में एक नए स्तर पर पहुंचाया है, जिससे उत्तर प्रदेश एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राज्य के रूप में तेजी से उभर रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में वर्ष 2017 के बाद बड़ा विस्तार देखने को मिला है। जहां पहले सीमित संसाधन और अव्यवस्थित ढांचा था, वहीं अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ के तहत हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का कार्य तेजी से चल रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 13,600 एमबीबीएस और 6,866 पीजी सीटों पर प्रवेश हो रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 5.64 करोड़ लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड प्रदान किए गए हैं, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के अंतर्गत 1.32 लाख से अधिक विद्यालयों में 19 बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। डीबीटी के माध्यम से 1.30 करोड़ से अधिक छात्रों को यूनिफॉर्म, जूते, बैग आदि के लिए धनराशि सीधे खातों में भेजी गई है। साथ ही डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देते हुए हजारों स्कूलों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब स्थापित की गई हैं। कौशल विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) के तहत करीब 26 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना से कारीगरों और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन को स्थिरता दी है। वर्तमान में 67.50 लाख वृद्धजन, 26.81 लाख निराश्रित महिलाएं और 11.57 लाख दिव्यांगजन पेंशन का लाभ ले रहे हैं। पेंशन राशि को 300 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमाह किया गया है और अप्रैल 2026 से इसे 1500 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। पिछले नौ वर्षों में 62 लाख से अधिक आवास गरीबों को उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं 15 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न वितरण से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 1.86 करोड़ परिवारों को निशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए हैं। डीबीटी के माध्यम से 31 विभागों की 191 योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है।  महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी ठोस परिणाम सामने आए हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 26.81 लाख बेटियां, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख माताएं लाभान्वित हुई हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5.20 लाख से अधिक बेटियों के विवाह संपन्न कराए गए हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन से 1.06 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं, जबकि 18.55 लाख महिलाएं ‘लखपति’ श्रेणी में पहुंच चुकीं हैं। डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव हुआ है। ई-साथी ऐप पर 24 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। 2066 ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी दी गई है, जबकि प्रोजेक्ट गंगा के तहत 20 लाख घरों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने का कार्य जारी है। इससे करीब 10 हजार रोजगार अवसर भी सृजित हुए हैं।

योगी सरकार का बड़ा निर्णय: रामनवमी पर दो दिन का अवकाश

योगी सरकार का बड़ा फैसला, रामनवमी पर दो दिन का अवकाश 26 के साथ अब 27 मार्च को भी रहेगी छुट्टी प्रदेशभर के मंदिरों में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया फैसला लखनऊ रामनवमी के अवसर पर प्रदेश सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए अवकाश को एक दिन और बढ़ा दिया है। अब 26 मार्च के साथ-साथ 27 मार्च को भी सार्वजनिक अवकाश रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह फैसला प्रदेशभर के मंदिरों में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया है। लगातार दो दिन की छुट्टी से श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और दर्शन में सुविधा मिलेगी। साथ ही व्यवस्थाओं को भी बेहतर ढंग से संभाला जा सकेगा। प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर रामनवमी के दौरान हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी अयोध्या समेत प्रदेशभर में मंदिरों में भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए अवकाश बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। अतिरिक्त अवकाश से यातायात को सुव्यवस्थित करने में मिलेगी मदद प्रदेश सरकार के इस कदम को आस्था के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। अतिरिक्त अवकाश से यातायात, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने में भी मदद मिलेगी। प्रदेश सरकार पहले ही 26 मार्च को अवकाश घोषित कर चुकी थी, जिसे अब बढ़ाकर 27 मार्च तक कर दिया गया है।