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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ढोल-नगाड़ों की थाप से जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ किया

भारत की स्वाधीनता के पक्षधर थे भगवान बिरसा मुंडाः सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ढोल-नगाड़ों की थाप से जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ किया भगवान बिरसा मुंडा ने दिया नारा, देश हमारा है तो राज भी हमारा ही होना चाहिए, विदेशी हुकूमत भारत में राज न करेः मुख्यमंत्री उत्सव में उत्तर प्रदेश आकर 22 राज्यों के कलाकार बन रहे सहभागी बोले सीएम- जनजातियों को दिया जा रहा विकास की योजनाओं का लाभ सीएम योगी ने विकास कार्यों को भी गिनाया लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा भारत की स्वाधीनता के पक्षधर थे। इसके लिए उन्होंने अभियान चलाया, जिस पर तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार किया। मात्र 25 वर्ष की आयु में उन्होंने रांची की जेल में अंतिम सांस ली। उन्होंने जनजाति समुदाय को नारा दिया कि अपना देश-अपना राज। देश हमारा है तो राज भी हमारा ही होना चाहिए, विदेशी हुकूमत भारत में राज न करे। धरती आबा को श्रद्धांजलि देते हुए पीएम मोदी ने 15 नवंबर को जनजाति दिवस के रूप में आयोजित करने की प्रेरणा दी। सीएम योगी ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में गुरुवार को ढोल-नगाड़ों की थाप से जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ किया। सीएम ने यहां लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सीएम ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान मेजबान उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के जनजाति कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति भी दी। सीएम योगी ने इस वर्ष की विशेषता बताते हुए इसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पहली से 15 नवंबर तक देश में जनजाति गौरव पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। सरकार द्वारा जनजाति समुदाय को समाज व राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने व सम्मान के साथ आगे बढ़ने के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जा रहा है। 22 राज्यों के कलाकार उत्तर प्रदेश आकर बन रहे सहभागी सीएम योगी ने कहा कि सांस्कृतिक समागम में 22 राज्यों के कलाकारों को जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है। कलाकार सहभागिता की दृष्टि से अरुणाचल प्रदेश पार्टनर स्टेट है। गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, सिक्किम, उड़ीसा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मिजोरम, गोवा, केरल, पश्चिम बंगाल, असम, हिमाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा, झारखंड व पंजाब के कलाकार उत्तर प्रदेश में आकर जनजाति भागीदारी उत्सव में सहभागी बन रहे हैं। यहां हस्तशिल्प व कला प्रदर्शनी, व्यंजन मेला और जनजाति साहित्य को समर्पित साहित्यिक व विकास मंच भी है। जनजाति समुदाय की शिक्षा का बढ़ा स्तर, मिल रहा शासन की योजनाओं का लाभ सीएम योगी ने कहा कि जनजातीय समुदाय की आबादी यूपी में कम है। पहले सरकारी नौकरी के विज्ञापन निकालते थे तो अनुसूचित जाति की पूरी सीटें नहीं भरी पाती थीं। अभी हाल में 60,244 पुलिस की भर्ती की गई तो इसमें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें उसी समाज के युवाओं से भरी गईं। यह चीजें दिखाती हैं कि उनके शिक्षा का स्तर, भागीदारी बढ़ी है। शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। जनजातियों को दिया जा रहा विकास की योजनाओं का लाभ सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने तय किया कि उत्तर प्रदेश में जितनी भी जनजातियां हैं, उन्हें अधिकार प्राप्त हो और उन्हें सेचुरेशन के लक्ष्य तक पहुंचाने की दिशा में कार्य हो। थारू, मुसहर, चेरो, बुक्सा, सहरिया, कोल, गौड़ आदि जनजातियों को शासन की सभी योजनाओं से आच्छादित करने के लिए सरकार ने मिशन मोड पर अभियान चलाया। परिणामस्वरूप ज्यादातर जनजातियों को विकास की योजनाओं (कनेक्टिविटी, पेयजल, बिजली, पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत) का लाभ दिया जा रहा है। सीएम ने की प्रधानमंत्री आदिवासी न्याय महाभियान की चर्चा सीएम ने कहाकि जनजाति समुदाय के लिए पीएम जनमन योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान के माध्यम से अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। बिजनौर में बुक्सा जनजाति को सूची में श्रेणीबद्ध किया गया है। इसके तहत 815 परिवारों को, इसमें बुक्सा जनजाति के 145 पीएम आवास व समस्त घरों के विद्युतीकरण, पेयजल, मोबाइल मेडिकल यूनिट, आंगनबाड़ी सेंटर, पांच बसावटों में मोबाइल टावर, पांच मल्टीपर्पज सेंटर व पांच वनधन केंद्र स्वीकृत किए जा चुके हैं। जनजातीय बाहुल्य 517 गांवों को सभी योजनाओं से जोड़ने का किया गया कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जितनी भी अनुसूचित जनजाति की बस्तियां हैं, धरतीआबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत उन्हें सभी सुविधाओं से आच्छादित किया जा रहा है। इसके लिए 26 जनपदों के 47 ब्लॉक व 517 ग्रामों को चिह्नित किया है। इनमें सोनभद्र में सर्वाधिक 176 गांव, बलिया के 61, ललितपुर के 36, देवरिया, लखीमपुर खीरी व कुशीनगर के 34-34, गाजीपुर के 26, मीरजापुर के 20, गोरखपुर के 18, चंदौली के 17, बलरामपुर के 16, पीलीभीत, प्रयागराज व सिद्धार्थनगर के 7-7, बिजनौर के 5, बहराइच व बस्ती के तीन-तीन, बाराबंकी, भदोही, महराजगंज, श्रावस्ती के दो-दो, अंबडेकरनगर, महोबा, संतकबीरनगर, जौनपुर, सीतापुर के एक-एक गांव को आच्छादित करने का कार्य किया गया है। जनजातीय बाहुल्य 517 गांवों की कनेक्टिविटी से लेकर सभी योजनाओं से जोड़ने का कार्य किया गया है। इनका आधार, आयुष्मान कार्ड, पीएम उज्ज्वला योजना, जाति-निवास प्रमाण पत्र, मुद्रा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम जनधन योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम विश्वकर्मा योजना, राशन कार्ड आदि की व्यवस्था के साथ ही यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को डबल इंजन सरकार ने आच्छादित करने की स्वीकृति दी। जनजाति गौरव की पुनर्स्थापना के साथ ही समाज को बढ़ा रही डबल इंजन सरकार सीएम योगी ने अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति का जिक्र किया। कहा कि हम लोगों ने अब तक 1.50 लाख छात्रों को इन योजनाओं से लाभान्वित किया है। 9 आश्रम पद्धति विद्यालय लखीमपुर खीरी, बलरामपुर, बहराइच, महराजगंज, श्रावस्ती, बिजनौर में संचालित हैं। इनके माध्यम से 2026 जनजाति छात्र-छात्राओं को शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। जनजाति छात्रों के लिए दो निःशुल्क छात्रावास का संचालन किया जा रहा है। 8 छात्रावास (लखीमपुर खीरी, चंदौली में दो-दो, बलिया, गोरखपुर, मीरजापुर, सोनभद्र में एक-एक) निर्माणाधीन हैं। जनजाति छात्रों के लिए लखीमपुर खीरी, बहराइच व सोनभद्र में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित है और ललितपुर में निर्माणाधीन है। कक्षा छह, 9 व 11 की वे छात्राएं, जो आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत नहीं हैं, उन्हें यूनिफॉर्म, साइकिल योजना से लाभान्वित किया जा रहा है। सीएम ने वनाधिकार अधिनियम की … Read more

स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप के साथ साथ प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 10 जनपदों का पर्यवेक्षण भी करेंगे संयुक्त निदेशक

आपदा से सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठा रही योगी सरकार संयुक्त निदेशक अग्निशमन प्रक्षेत्र (वाराणसी जोन) की होगी नियुक्ति स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप के साथ साथ प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 10 जनपदों का पर्यवेक्षण भी करेंगे संयुक्त निदेशक  आपात स्थिति को तुरंत काबू करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित रेस्क्यू ग्रुप तैयार किया जाएगा, फर्स्ट रिस्पांडर के तौर पर करेगा रेस्क्यू कार्य  ग्रुप के जरिए दैवीय आपदाओं, अग्निकांड, रासायनिक, जैविक, आपात स्थितियों और अन्य खतरों से निपटने के लिए मिलेगी फौरी मदद  सरकार ने यूपी अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली 2024 के तहत इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति दे दी है  योगी सरकार के निर्णय से वाराणसी जोन के 10 जनपदों की सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम  अभी तक वाराणसी में चीफ फायर ऑफिसर की देखरेख में चल रही व्यवस्था  वाराणसी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी काशी को विकास का मॉडल बनाने वाली योगी आदित्यनाथ सरकार आपदाओं से जनमानस को सुरक्षित रखने के लिए और बड़ा कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में अग्निशमन विभाग को आधुनिक रूप देने के निर्देश दिए थे। दैवीय आपदाओं, अग्निकांड, रासायनिक, जैविक व ऊंची इमारतों की आपात स्थितियों और अन्य खतरों से निपटने के लिए विशेष इकाइयों का गठन होगा। इसके साथ ही संयुक्त निदेशक अग्निशमन प्रक्षेत्र (वाराणसी जोन) की नियुक्ति होगी।  संयुक्त निदेशक स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप के साथ साथ प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 10 जनपदों का पर्यवेक्षण भी करेंगे। वाराणसी जोन में किसी भी आपात स्थिति को तुरंत काबू करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित रेस्क्यू ग्रुप तैयार किया जाएगा, जो फर्स्ट रिस्पांडर के तौर पर रेस्क्यू कार्य करेगा। सरकार ने यूपी अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली 2024 के तहत इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति दे दी है, जिससे वाराणसी जोन की सुरक्षा में नया आयाम जुड़ेगा। विशेष रेस्क्यू ग्रुप: फर्स्ट रिस्पांडर की मजबूत टीम प्रदेश में विकास केवल अवसंरचना तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के आधुनिक दृष्टिकोण से भी जुड़ा हुआ है। काशी जैसी प्राचीन नगर में,  जहाँ धार्मिक आयोजन और पर्यटक गतिविधियाँ पूरे वर्ष चलती हैं, ऐसे में यह रेस्क्यू ग्रुप शहर को आपात स्थितियों में अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्य अग्निशमन  अधिकारी आनंद सिंह राजपूत ने बताया कि वाराणसी में आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए संयुक्त निदेशक के नियंत्रण में विशेष रेस्क्यू ग्रुप गठित किया जाएगा। रेस्क्यू ग्रुप के सभी सदस्यों को आधुनिक उपकरणों और नवीन तकनीकों के साथ प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे वाराणसी सहित पूर्वांचल में किसी भी संकट का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। यह ग्रुप फर्स्ट रिस्पांडर के तौर पर रेस्क्यू कार्य संभालेगा।  संयुक्त निदेशक अग्निशमन प्रक्षेत्र- वाराणसी, दस जनपदों की करेंगे निगरानी  संयुक्त निदेशक अग्निशमन प्रक्षेत्र- वाराणसी, दस जनपदों की निगरानी करेंगे। वे वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, आजमगढ़, मऊ, बलिया, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र का प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण भी करेंगे। आपदा या आकस्मिक स्थितियों में रेस्क्यू दल तुरंत मौके पर पहुँच कर राहत, बचाव और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।  संयुक्त निदेशक के अधीन होगा संचालन अग्निशमन प्रक्षेत्र (वाराणसी जोन) के प्रभारी अधिकारी के रूप में संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी कार्य करेंगे, जो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समकक्ष पद पर होंगे। उनके अधीन यह स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप कार्य करेगा। अभी तक यहां मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) के नेतृत्व में कार्य हो रहा है।  स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप के सदस्य का पदनाम और संख्या  अग्निशमन द्वितीय अधिकारी- 01 लीडिंग फायरमैन- 02  फायर सर्विस चालक- 02 फायरमैन- 16  कुक-01

अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र की अवधि 5 साल करने पर उद्यमियों को मिली बड़ी राहत

योगी सरकार का ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में बड़ा फैसला गैर-आवासीय भवनों की अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र (NOC) की वैधता को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष किया गया अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र की अवधि 5 साल करने पर उद्यमियों को मिली बड़ी राहत  संवेदनशील हॉस्पिटल एवं हाई हैजार्ड इण्डस्ट्रियल भवनों पर पहले वाले नियम लागू उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली को बनाया गया आसान नए प्रारूप में ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन और प्रारूप को किया गया छोटा अधिक तेजी और आसानी से ऑनलाइन आवेदन एवं फायर एन०ओ०सी० प्राप्त होगी निवेश को बढ़ावा मिलेगा,  रोजगार सृजन तथा नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा  लखनऊ योगी सरकार ने उद्यमियों को राहत देने के लिए उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली, 2024 को पहले से ज्यादा सरल बना दिया है। वर्तमान समय में अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र (NOC) विभिन्न प्रकार के भवनों के उपयोग के वर्गीकरण के आधार पर दिया जाता है। नेशनल बिल्डिंग कोड (एन०बी०सी०) के अनुसार भवनों को निम्न प्रकार में वर्गीकृत किया गया है- यह हैं रेजिडेंशियल टाइप ऑक्यूपेन्सी, एजुकेशनल टाइप ऑक्यूपेन्सी, इन्स्टीट्यूशनल टाइप ऑक्यूपेन्सी, असेम्बली टाइप ऑक्यूपेन्सी, बिजनेस टाइप ऑक्यूपेन्सी, मर्केन्टाइल टाइप ऑक्यूपेन्सी, इंस्ट्रियल टाइप ऑक्यूपेन्सी, स्टोरेज टाइप ऑक्यूपेन्सी और हैजार्डस टाइप ऑक्यूपेन्सी।  मौजूदा नियमों के अनुसार उपरोक्त भवनों के लिए वर्तमान समय में अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र की अवधि आवासीय भवनों (होटल से भिन्न) के लिये 5 वर्ष और गैर-आवासीय भवनों के लिये के लिये 3 वर्ष  है। वहीं होटलों, अस्पतालों और अत्यधिक संकट वाले औद्योगिक भवनों के लिये 1 वर्ष निर्धारित है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली, 2024 के प्रावधानों में बदलाव किया है। अत्यधिक संवेदनशील हॉस्पिटल (इन्स्टीट्यूशनल ऑक्यूपेन्सी) एवं हाई हैजार्ड इण्डस्ट्रियल भवनों को छोड़कर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए शेष समस्त भवनों भवनों/ऑक्यूपेंसी के अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्रों की वैधता 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष करने का फैसला किया गया है।  योगी सरकार के इन सुधारों से निवेशकों, उद्यमियों एवं आम नागरिकों को काफी लाभ मिलेगा। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस " की नीति के तहत किया गया है। इससे उत्तर प्रदेश में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा । नए फैसले से रोजगार सृजन तथा नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा।  इसी प्रकार बिजनेस को सुविधाजनक बनाने के लिए अग्निशमन तथा आपात सेवा विभाग की एन०ओ०सी० निर्गमन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। पहले ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदकों से अपेक्षित सूचनाओं प्राप्त करने के संबंध में प्रारूप में अपूर्णता थी। क्वालीफाइड एजेंसी, फायर लिफ्ट सुरक्षा प्रमाण पत्र, विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र, अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र आदि पूर्व में सम्मलित नहीं थे। नए प्रारूप में आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन एवं फायर एन०ओ०सी० प्राप्त करने में सुगमता, सरलता पारदर्शिता और समयबद्धता रहेगी।  योगी सरकार के नए फैसले से औद्योगिक विकास, नगरीकरण, आपदाओं तथा सम्भावित अग्नि दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी । इसके साथ ही अग्नि सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ करने और ईज आफ डूइंग बिजनेस के उद्देश्यों की पूर्ति आसान हो जाएगी। इन सुधारों से आम नागरिकों को त्वरित सेवा प्राप्त होगी तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी।

68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम’ श्रेणी के लिए मिला नामांकन

साउंड्स ऑफ कुंभ’ के माध्यम से  वैश्विक मंच पर प्रयागराज की दमदार दस्तक 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम’ श्रेणी के लिए मिला नामांकन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ न केवल एक आध्यात्मिक महोत्सव के रूप में प्रतिष्ठित हुआ, बल्कि यह एक वैश्विक सांस्कृतिक मील का पत्थर भी बन गया। इसी असाधारण आयोजन को समर्पित एल्बम “साउंड्स ऑफ कुंभ” को अब 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम’ श्रेणी के लिए नामांकित किया गया है। गायक-संगीतकार सिद्धांत भाटिया की परिकल्पना पर आधारित है एल्बम गायक-संगीतकार सिद्धांत भाटिया की परिकल्पना पर आधारित इस एल्बम में 12 ट्रैक सम्मिलित हैं, जिन्हें भारत और विदेशों के लगभग 50 कलाकारों ने मिलकर साकार किया है। यह एल्बम जनवरी–फरवरी में आयोजित 45 दिवसीय महाकुंभ के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भाव को संजोता है, जिसमें विश्व के कोने-कोने से करोड़ों श्रद्धालु आस्था के इस अद्वितीय संगम का हिस्सा बने। प्राचीन मंत्रोच्चारण और बाइनॉरल बीट्स का है समायोजन प्रयागराज के घाटों पर किए गए लाइव रिकॉर्डिंग्स को प्राचीन मंत्रोच्चारण और बाइनॉरल बीट्स के साथ संयोजित करते हुए, “साउंड्स ऑफ कुंभ” महाकुंभ के दृश्यों और ध्वनियों को एक अनूठे श्रवण अनुभव में परिवर्तित करता है। यह एल्बम भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है। ऐसे में, यह सम्मान न केवल महाकुंभ की भव्यता और सांस्कृतिक गरिमा का प्रतीक है, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में की गई सुसंगठित योजना, कुशल प्रबंधन और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रयासों का भी प्रमाण है। ‘साउंड्स ऑफ कुंभ’ के माध्यम से प्रयागराज आज श्रद्धा, संस्कृति और नवाचार का वैश्विक प्रतीक बनकर उभरा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गुजरात के एकता नगर में भारत पर्व समारोह को किया संबोधित

हमेशा से देश को राह दिखाने वाला राज्य रहा है गुजरातः योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गुजरात के एकता नगर में भारत पर्व समारोह को किया संबोधित सीएम योगी, अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल समेत अतिथियों ने विभिन्न राज्यो की संस्कृतियों को भी देखा भारत की एकता की प्रतिमूर्ति है स्टैच्यू ऑफ यूनिटीः सीएम योगी पीएम मोदी ने विरासत, विकास व गरीब कल्याण की परंपरा को बढ़ाकर वर्तमान पीढ़ी को दी नई प्रेरणाः सीएम योगी नया भारत सुरक्षा, संप्रभुता व अखंडता से समझौता नहीं करताः मुख्यमंत्री सीएम योगी ने विभिन्न पवेलियन व स्टॉल का किया अवलोकन सरदार पटेल ने भारत को एक भारत रखा तो पीएम मोदी के नेतृत्व में 11 वर्ष में देश बन रहा श्रेष्ठ भारतः सीएम योगी एकता नगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुजरात सदैव से देश को राह दिखाने वाला राज्य रहा है। भगवान श्रीकृष्ण उप्र से इस धरा पर आए और द्वारिकाधीश बनकर धर्म की स्थापना के कार्य को आगे बढ़ाया। स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी धरा से आर्यसमाज के बड़े आंदोलन को बढ़ाने का कार्य प्रारंभ किया था। इस धरा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को स्वाधीनता के अगुआ के रूप में देकर आजादी का मार्ग प्रशस्त किया था। यह भारत की अखंडता के शिल्पी लौहपुरुष सरदार पटेल की भी पावन धरा है। गुजरात भगवान सोमनाथ, नागेश्वर नाथ की पावन धरा है। यह भारत की आध्यात्मिक और विरासत की भूमि है। स्वाधीनता आंदोलन को स्वदेशी से स्वावलंबन की ओर अग्रसर करने वाली धरा है। इस पावन धरा को हर भारतीय नमन करता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रतिनिधिमंडल के साथ बुधवार को गुजरात के एकता नगर के दौरे पर रहे। वे यहाँ भारत रत्न, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित ‘भारत पर्व-2025’ में भी सम्मिलित हुए। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी देखा। सीएम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी पहुंचे और लौहपुरुष को नमन किया। भारत की एकता की प्रतिमूर्ति है स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सीएम योगी ने कहा कि 2018 में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के दर्शन का अवसर मिला था। उस समय कुछ दिन पूर्व ही प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया था। पिछले सात वर्ष में यहां परिवर्तन हुआ है। विरान जगह को विश्व पर्यटन के व्यस्त डेस्टिनेशन के रूप में कैसे स्थापित किया जा सकता है, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और सरदार सरोवर के तट पर हुआ विकास का यह कार्य दिखाता है। आज दूसरी बार इसके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत की एकता की प्रतिमूर्ति है। यह पीएम मोदी के विजन का परिणाम है। उनकी विजनरी लीडरशिप में भारत विरासत को सम्मान दे रहा है और विराट व्यक्तित्व के अनुरूप महापुरुषों के गौरवशाली कार्यों को भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्रबिंदु बना रहा है। पीएम मोदी ने देश को विकसित भारत के रूप में स्थापित करने का विजन दिया सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी ने देश में विरासत, विकास व गरीब कल्याण की परंपरा को बढ़ाकर वर्तमान पीढ़ी को न केवल नई प्रेरणा दी, बल्कि देश को विकसित भारत के रूप में स्थापित करने का विजन भी दिया है। पीएम मोदी काशी से संसद में प्रतिनिधित्व करते हैं। काशी में काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद वहां प्रतिवर्ष 11 से 12 करोड़ श्रद्धालु आ रहे हैं। अयोध्या में कई पीढ़ियां राम मंदिर बनने की आस लेकर चली गईं, लेकिन उसे मोदी जी ने संभव करके दिखाया और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो गया। आज अयोध्या सुंदरतम नगरियों में से एक हो गई। वहां प्रतिवर्ष छह से 8 करोड़ श्रद्धालु-पर्यटक आकर दर्शन कर रहे हैं। मथुरा-वृंदावन हो या उत्तराखंड में केदारनाथ पुरी व बद्रीनाथ का पुनरोद्धार, मध्य प्रदेश में महालोक हो या देश के अंदर अलग-अलग स्थानों पर भारत की विरासत को सम्मान, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्य भी तेजी से हो रहे हैं। किसानों, युवाओं, श्रमिकों, आधी आबादी की आकांक्षाओं के अनुरूप भारत का समग्र विकास हो रहा है। भारत आज तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी आस्था के साथ विरासत के सम्मान का महत्वपूर्ण उदाहरण है। हर भारतवासी इसके लिए पीएम मोदी का आभार प्रकट करता है। भारत की अखंडता के शिल्पी थे सरदार वल्लभ भाई पटेल सीएम योगी ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल भारत की अखंडता के शिल्पी थे। ब्रिटिशर नहीं चाहते थे कि भारत एक रहे। उन्होंने शरारतपूर्ण तरीके से केवल भारत और पाकिस्तान के नाम पर ही देश का विभाजन ही नहीं किया था, बल्कि उनकी शरारत थी कि देश को इतने टुकड़ों में बांट डालो कि भारत एक न रह सके, लेकिन लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जहां अपनी दूरदर्शिता के कारण 563 देसी रियासतों को भी भारत गणराज्य का हिस्सा बनाकर वर्तमान भारत को एक भारत के रूप में रखा, वहीं पीएम मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्ष से भारत को श्रेष्ठ भारत बनाने के कार्य हो रहे हैं। नया भारत सुरक्षा, संप्रभुता व अखंडता से समझौता नहीं करता सीएम योगी ने कहा कि जूनागढ़ का नवाब और हैदराबाद का निजाम भारत गणराज्य में आने में आनाकानी कर रहा था, लेकिन सरदार पटेल ने कहा कि प्यार से मानोगे तो ठीक, वरना और भी तरीके हैं। अंततः उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा। नया भारत देश की सुरक्षा, संप्रभुता व अखंडता से कोई समझौता नहीं करता है। भारत और उसके नागरिकों की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस करने वाले को कीमत चुकानी ही पड़ेगी। 11 वर्ष में सभी ने देखा कि नया भारत समय आने पर जवाब देता है। सीएम योगी ने गुजरात सरकार व आयोजन से जुड़े लोगों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल कैवल्य त्रिविक्रम परनायक, उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, जयवीर सिंह, गुजरात के मंत्री व पोरबंदर विधायक अर्जुन मोधवाडिया आदि मौजूद रहे। गुजरात में उतरा उत्तर प्रदेश, अतिथियों ने देखी सांस्कृतिक प्रस्तुति गुजरात में बुधवार को उत्तर प्रदेश उमड़ पड़ा। यहां के कलाकारों ने भारत पर्व में अपनी अद्भुत प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। उत्तर प्रदेश के साथ ही गुजरात का गरबा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि राज्यों के कलाकारों के लोकनृत्य समेत अनेक सांस्कृतिक … Read more

एआई बना कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन का माध्यम, छोटे किसानों की उन्नति को दे रहा गति

सीएम योगी की दूरदर्शिता व एआई की तकनीक से बदल रही यूपी के किसानों की तकदीर एआई बना कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन का माध्यम, छोटे किसानों की उन्नति को दे रहा गति -स्मार्ट गवर्नेंस की दिशा में आईसीसीसी और एआई बने नगरीय प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण  -भविष्य-उन्मुख शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में उन्नत तकनीक रख रहा सशक्त उत्तर प्रदेश की आधारशिला महाकुंभ 2025 में एआई ने साबित की उपयोगिता, सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ ही दक्षता व सांस्कृतिक संरक्षण का भी बना माध्यम  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भविष्य आधारित तकनीक को आत्मसात कर एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। यूपी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के माध्यम से शासन तंत्र के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की जा रही है। प्रदेश के छोटे किसानों के उन्नति का भी एआई के माध्यम से नया अध्याय लिखा जा रहा है। यह उपलब्धि योगी सरकार की उस दूरदर्शी नीति का परिणाम है जिसके अंतर्गत परंपरागत क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक को एकीकृत कर ग्रामीण समाज को सशक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।         नवाचार और सहयोग की भावना को प्रोत्साहन देते हुए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उत्तर प्रदेश भारत के पहले एआई आधारित शासन प्रणाली को आत्मसात करने का केंद्र बन रहा है, जिसे विश्व बैंक–गूगल साझेदारी के अंतर्गत आरंभ किया गया। इस ऐतिहासिक पहल ने यह सिद्ध कर दिया कि कैसे एआई अभूतपूर्व स्तर पर सार्वजनिक सेवा प्रदायगी में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। उत्तर प्रदेश बना डिजिटल परिवर्तन का जीवंत उदाहरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी दूरदर्शी नीतियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन व समावेशी विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को परिलक्षित करती हैं। इन प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को एक जीवंत उदाहरण बना दिया है। दृष्टि और नवाचार के सम्मिलन से शासन की परिभाषा कैसे वैश्विक स्तर पर पुनःनिर्धारित की जा सकती है इसका भी यह अनुपम उदाहरण है। एआई आज उत्तर प्रदेश में शासन और सेवा प्रदायगी के प्रत्येक क्षेत्र को नया स्वरूप प्रदान कर रहा है। चाहें वह नगरीय प्रबंधन हो, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि या सांस्कृतिक आयोजन, प्रदेश के प्रमुख नगरों में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्मार्ट गवर्नेंस की रीढ़ बन चुके हैं। ये केंद्र एआई-संचालित विश्लेषण के माध्यम से यातायात प्रबंधन, सुरक्षा निगरानी और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कर रहे हैं। इस तकनीकी एकीकरण से नगरीय जीवन अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और नागरिक-अनुकूल बन गया है। उन्नाव बनेगा अत्याधुनिक तकनीकों के प्रशिक्षण का केन्द्र उत्तर प्रदेश ही वह राज्य है जहाँ भारत का पहला एआई-अग्मेंटेड बहुविषयक विश्वविद्यालय उन्नाव में स्थापित किया जा रहा है। यह संस्थान विद्यार्थियों को एआई, रोबोटिक्स, डेटा साइंस तथा साइबर सुरक्षा जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देगा। साथ ही, यह प्रदेश में चिकित्सा, कृषि और प्रबंधन जैसे विविध विषयों से भी जोड़कर एक भविष्य-उन्मुख कार्यबल तैयार करने का माध्यम बनेगा। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भी एआई ने उपचार की दिशा ही बदल दी है। राज्य के प्रमुख अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से शल्य-चिकित्सा अब अधिक सटीक और सुरक्षित हो गई है। एआई-आधारित डायग्नोस्टिक उपकरणों से रोगों की प्रारंभिक पहचान संभव हो रही है, जिससे प्रदेश के शहरी व ग्रामीण अंचल में नागरिकों को समय पर और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त हो रही हैं। महाकुम्भ 2025 में एआई बना करोड़ों श्रद्धालुओं के कुशल प्रबंधन का माध्यम महाकुंभ 2025 में प्रयागराज ने दुनिया के समक्ष एआई के वास्तविक अनुप्रयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। इस ऐतिहासिक आयोजन में एआई-सक्षम रीयल-टाइम निगरानी, फेशियल रिकग्नीशन और पूर्वानुमान विश्लेषण का उपयोग कर करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को सहज बनाया गया। एआई-संचालित खोया-पाया केंद्र ने मात्र कुछ मिनटों में लापता बच्चों और वृद्धजनों को उनके परिजनों से मिलाया। साथ ही, स्मार्ट लाइटिंग, डिजिटल समन्वय और डेटा-संचालित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को आध्यात्मिक और तकनीकी दोनों दृष्टियों से अद्वितीय बना दिया। इस प्रकार, महाकुंभ 2025 ने यह सिद्ध किया कि परंपरा और प्रौद्योगिकी का संगम विश्व-स्तर पर भारत की नई पहचान बन सकता है। एआई साबित हो रहा किसानों का सच्चा सहायक  कृषि क्षेत्र में एआई आज किसानों का सच्चा सहायक सिद्ध हो रहा है। एआई-संचालित ड्रोन फसलों के स्वास्थ्य की निगरानी करते हैं, सिंचाई की आवश्यकता का आकलन करते हैं और कीटनाशकों के उपयोग को न्यूनतम रखते हैं। इन स्मार्ट कृषि तकनीकों से न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि कृषि को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप भी प्राप्त हुआ है। इससे छोटे किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने का नया आत्मविश्वास मिला है। नगरों से लेकर ग्रामों तक, कक्षाओं से लेकर अस्पतालों तक, उत्तर प्रदेश एआई-आधारित शासन की एक नई परिभाषा रच रहा है। शासन के प्रत्येक क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समाहित कर राज्य न केवल भविष्य का स्वागत कर रहा है, बल्कि नवाचार, दक्षता और नागरिक-केंद्रित शासन के वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप चल रहा विकसित यूपी @2047 महाभियान

विकसित उत्तर प्रदेश @2047 87.37 लाख से अधिक सुझाव रख रहे 'समर्थ यूपी' की नींव -मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप चल रहा विकसित यूपी @2047 महाभियान -छात्र, शिक्षक, उद्यमी, महिलाएं और किसानों समेत समाज के सभी तबकों से भारी मात्रा में आ रहे सुझाव -ग्रामीण क्षेत्रों से 67.80 लाख व नगरीय क्षेत्रों से 19.57 लाख से अधिक आए सुझाव -जौनपुर, संभल, गाजीपुर, गाजियाबाद व हरदोई से मिले सर्वाधिक फीडबैक -नगर निकायों से लेकर ग्राम पंचायत तक की जा रहीं बैठकें, सम्मेलन व गोष्ठी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप, उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित प्रदेश बनाने के लक्ष्य को लेकर चल रहा “समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: समृद्धि का शताब्दी पर्व महा अभियान” जनभागीदारी के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। प्रदेश के 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्ध जनों द्वारा भ्रमण कर विभिन्न लक्षित समूहों-छात्रों, शिक्षकों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संगठनों, मीडिया एवं आम नागरिकों से संवाद स्थापित किए गए। इस दौरान लोगों से प्रदेश की विकास यात्रा और भविष्य के रोडमैप पर सुझाव लिए गए। अब तक पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर 87.37 लाख से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से 67.80 लाख व नगरीय क्षेत्रों से 19.57 लाख से अधिक आए सुझाव samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक कुल 87,37,432 फीडबैक प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 67,80,358 सुझाव ग्रामीण क्षेत्रों से और 19,57,128 सुझाव नगरीय क्षेत्रों से आए हैं। इनमें 43,49,245 सुझाव आयु वर्ग 31 वर्ष से कम, 39,79,920 सुझाव 31-60 वर्ष के आयु वर्ग, तथा 4,08,276 सुझाव 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से प्राप्त हुए हैं। कृषि, पशुधन, डेयरी, इंडस्ट्री, पर्यटन आदि क्षेत्रों से मिले सर्वाधिक सुझाव इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से भी सुझाव मिले। कृषि क्षेत्र में 23,54,098, पशुधन एवं डेरी में 3,59,686, इंडस्ट्री में 3,46,555, आईटी एवं टेक में 2,59,822, पर्यटन में 2,10,143, ग्रामीण विकास में17,07,348, इन्फ्रा में 80,182, संतुलित विकास में 1,21,404, समाज कल्याण-6,60,665, नगरीय एवं स्वास्थ्य-5,89,658, शिक्षा क्षेत्र में18,82,676 तथा सुरक्षा सम्बंधित क्षे में कुल 1,65,206 सुझाव मिले हैं। जौनपुर, संभल, गाजीपुर, गाजियाबाद व हरदोई से मिले सर्वाधिक फीडबैक फीडबैक में टॉप पांच जनपदों में जौनपुर (818,599), संभल (751,586), गाजीपुर (351,198), गाजियाबाद (256,262) और हरदोई (221,520) शामिल हैं। आमजन ने भी दी अपनी राय – मथुरा से नीलम दुबे जी का सुझाव है कि "उत्तर प्रदेश सरकार औद्योगिक विकास और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। MSME क्षेत्र में खादी एवं ग्रामोद्योग, वस्न उद्योग और हस्तशिल्प क्षेत्र शामिल हैं, जो रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाते हैं। उद्योगों के विकास के लिए प्रमुख पहलेंः प्रधानमंत्री मुद्रा योजना गैर-कॉर्पनी, गैर-कृषि लघु सूक्ष्म उद्यमों को 10 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान करती है, जिससे उद्यमशीलता और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। उद्यम पंजीकरण: MSMES के लिए सरकारी लाभ और योजनाओं का लाभ उठाने के लिए एक सरल ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया है। चैंपियंस पोर्टल: MSMEs को उनकी समस्याओं का समाधान करने और मार्गदर्शन, समर्थन एवं सहायता प्रदान करने के लिए एक मंच है। "क्लस्टर विकास कार्यक्रम: पारंपरिक उद्योगों और हस्तशिल्प के जरिए उद्योगों और उद्यमों की क्षमता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।" – हापुड़ से विनय कुमार मिश्रा के अनुसार "तीर्थ नगरी बृजघाट पौराणिक स्थल है हरिद्वार उत्तराखंड में जाने के पश्चात उत्तर प्रदेश का एकमात्र स्थान बृजघाट है माननीय योगी जी से अनुरोध है गंगा जी का जलस्तर बढ़ता है घटना रहता है यात्री गंगा स्नान हेतु आते हैं अचानक से गहरे जल में जाने के कारण डूब जाते हैं कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है इसके अलावा आने वाले यात्रियों को काफी सारी एस सुविधाओं का सामना करना पड़ता है महीने में 2 मेले लगते हैं पूर्णिमा और एवं अमावस्या हाईवे पर जाम लग जाता है 8-8 घंटे तक जाम रहता है यात्रियों के लिए अच्छे पेयजल एवं शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है बृजघाट की नगर पालिका गढ़मुक्तेश्वर होने के कारण बृजघाट वासियों को भी बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है तीर्थ नगरी बृजघाट से गढ़मुक्तेश्वर 8 किलोमीटर की दूरी पर है ब्रजघाट वाशियो को टोल देकर गढ़मुक्तेश्वर जाना होता है कृपया ध्यान दें।" – बहराइच से भानु प्रताप के अनुसार 'बेसिक शिक्षा को पेपरलेस बनाने के लिए 14 सूत्रीय सुझाव साझा किया गया जो कि निम्नवत है: 1. सभी विद्यालयीय रजिस्टर (हाज़िरी, नामांकन, MDM, अवकाश आदि) गूगल एक्सेल शीट में ऑनलाइन रखें। 2. शिक्षकों को टैबलेट/लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएं। 3. छात्रों का सम्पूर्ण डेटा यूडीआईएसई पर समय से अपलोड किया जाए। 4. विद्यालय स्तर पर व्हाट्सऐप/टेलीग्राम ग्रुप से त्वरित सूचना प्रसारण हो। 5. ई-ऑफिस प्रणाली से आदेश व पत्राचार पेपरलेस हो। 6. परीक्षा परिणाम व प्रगति पत्रक ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएं। 7. QR कोड आधारित उपस्थिति प्रणाली अपनाई जाए। 8. शिक्षकों की डायरी व मासिक रिपोर्ट गूगल फॉर्म से भरी जाए। 9. एमडीएम की दैनिक रिपोर्टिंग मोबाइल ऐप से हो। 10. ई-लाइब्रेरी व ई-कंटेंट को बढ़ावा दिया जाए। 11. सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम व बैठकें ऑनलाइन प्लेटफार्म पर संचालित हो। 12. अभिभावकों को SMS/ एप के माध्यम से सूचना दी जाए। 13. डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणन हो। 14. क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षित डेटा बैकअप रखा जाए।" नगर निकायों से लेकर ग्राम पंचायत तक की जा रहीं बैठकें, सम्मेलन व गोष्ठी इस महाभियान के सम्बन्ध में जनसामान्य को जागरूक एवं सहभागी बनाने हेतु नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न विशेष बैठकें, सम्मेलन एवं गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश के समस्त नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर पंचायत में विशेष बैठकें एवं सम्मेलन/गोष्ठियाँ आयोजित किये जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त अभी तक 65 जिला पंचायतों में सम्मेलन/गोष्ठियों और 62 जिला पंचायतों में विशेष बैठकें एवं 817 क्षेत्र पंचायतों में सम्मेलन/गोष्ठियों और 824 क्षेत्र पंचायतों में विशेष बैठके सम्पन्न हुई हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश की 51,828 ग्राम पंचायतों के स्तर पर भी विशेष बैठकों का सफल आयोजन किया गया है। उल्लेखनीय है कि इन आयोजनों के माध्यम से स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित विभागों के बीच संवाद-सम्पर्क को और अधिक सशक्त किया गया है। मुख्यमंत्री योगी के विजन "समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: समृधि का शताब्दी पर्व महाभियान के अनुरूप प्राप्त सुझावों … Read more

41 हजार से अधिक किसानों से किया गया है धान क्रय

विपणन सत्र 2025-26: 3.58 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीकरण  2.43 लाख मीट्रिक टन से अधिक की हो चुकी धान खरीद   41 हजार से अधिक किसानों से किया गया है धान क्रय  प्रदेश में 4110 क्रय केंद्र किए जा चुके हैं स्थापित  धान (कॉमन)-2369 व (ग्रेड-ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हो रही खरीद  पहली अक्टूबर से पश्चिम उत्तर प्रदेश व पहली नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में शुरू हुई है धान खरीद  लखनऊ  योगी सरकार के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों को 'अन्नदाता किसान' का निरंतर साथ मिल रहा है। विपणन सत्र 2025-26 के अंतर्गत धान खरीद में हो रही वृद्धि इस बात को पुख्ता कर रही है। बुधवार अपराह्न साढ़े तीन बजे तक 41583 किसानों से 2.43 लाख मीट्रिक टन धान खरीद की जा चुकी है। इसके लिए प्रदेश में अब तक 4110 क्रय केंद्र भी स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं पहली सितंबर से अब तक 3,58,372 किसानों ने पंजीकरण करा लिया है।  41 हजार से अधिक किसानों से हुई 2.43 लाख मीट्रिक टन धान की हुई खरीद  खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक 2369 रुपये धान (कॉमन) तथा 2389 रुपये (ग्रेड-ए) प्रति कुंतल की दर से खऱीद हो रही है। बुधवार तक 41,583 किसानों से 2.43 लाख मीट्रिक टन धान खरीद की जा चुकी है। वहीं 3,58,372 किसानों ने अब तक धान बिक्री के लिए पंजीकरण भी करा लिया है। पश्चिम उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी व सीतापुर में पहली अक्टूबर तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के लखनऊ, उन्नाव व रायबरेली मं पहली नवंबर से धान खरीद शुरू हुई थी।  सीएम योगी के निर्देश पर 48 घंटे में किसानों को किया जा रहा भुगतान  सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान किया जा रहा है।  किसानों के आधार लिंक्ड बैंक खाते में सीधे भुगतान किया जाएगा। वहीं बिचौलियों को रोकने व पारदर्शिता बरतते हुए क्रय केंद्रों पर मोटे अनाज की खरीद ई-पॉप (इलेक्ट्रॉनिक प्वॉइंट ऑफ परचेज) डिवाइस के माध्यम से पहले की भांति किसानों का बायोमीट्रिक सत्यापन के जरिए ही होगी। किसान अपनी समस्याएं टोल फ्री नंबर 18001800150 पर जानकारी ले सकते हैं या अपनी समस्या भी बता सकते हैं।  एक नजर  41 हजार से अधिक किसानों से 2.43 लाख मीट्रिक टन धान की हुई खरीद  पहली सितंबर से प्रारंभ हुआ पंजीकरण, अब तक 3,58,372 किसानों ने करा लिया पंजीकरण 2369 रुपये कॉमन तथा 2389 रुपये (ग्रेड-ए) प्रति कुंतल की दर से हो रही खरीद fcs.up.gov.in या UP KISAN MITRA  पर पंजीकरण अनिवार्य, पंजीकृत किसानों से ही हो रही खरीद  टोल फ्री नंबर 18001800150 से सहायता या जानकारी ले सकते हैं किसान

योगी सरकार का लक्ष्य, हर पात्र परिवार तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

उत्तर प्रदेश में जीरो पॉवर्टी अभियान को मिशन मोड में किया जाए 15 नवंबर तक प्रथम चरण और द्वितीय चरण की योजनाओं के सत्यापन की प्रक्रिया 30 नवंबर तक हो पूरी योगी सरकार का लक्ष्य, हर पात्र परिवार तक पहुंचे योजनाओं का लाभ एक माह का विशेष अभियान चलाकर  सभी पात्र लाभार्थियों को किया जाएगा चिन्हित लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश को गरीबी-मुक्त बनाने के अपने संकल्प की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। यूपी में “जीरो पॉवर्टी अभियान” को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी पात्र परिवार को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।      मुख्यमंत्री का कहना है कि इस अभियान का प्रथम चरण सात प्राथमिकता वाली योजनाओं के पूर्ण आच्छादन पर केंद्रित होगा। इनमें राशन कार्ड, दिव्यांगजन पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, पीएम किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) शामिल हैं।      सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 15 नवंबर तक प्रथम चरण की सभी योजनाओं का आच्छादन पूरा कर लिया जाए, जबकि द्वितीय चरण के अंतर्गत आने वाली योजनाओं के सत्यापन की प्रक्रिया 30 नवंबर तक हर हाल में पूरी हो जानी चाहिए।       उन्होंने यह भी कहा कि एक माह का विशेष अभियान चलाकर उन सभी पात्र लाभार्थियों को चिन्हित किया जाए, जो किसी कारणवश अभी तक इन प्राथमिकता वाली योजनाओं से वंचित हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रत्येक पात्र परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना ही जीरो पॉवर्टी अभियान का मूल उद्देश्य है।       मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि चिन्हित परिवारों के प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवेदन सुनिश्चित किए जाएं और साथ ही यह भी देखा जाए कि सभी लाभार्थियों के पूरे परिवार का नाम राशन कार्ड में दर्ज हो।        यूपी सरकार की मंशा है कि इस विशेष अभियान के माध्यम से न केवल गरीब परिवारों को सामाजिक सुरक्षा मिले बल्कि उनकी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति भी सुनिश्चित हो। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और जिलों में अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग हो।

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला का भी हो रहा आधुनिकीकरण

गोरखपुर में विश्व स्तरीय विज्ञान पार्क बना रही योगी सरकार वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला का भी हो रहा आधुनिकीकरण नक्षत्रशाला परिसर में ही ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के नाम पर बन रहा प्रदेश का दूसरा विज्ञान पार्क 15.89 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा विज्ञान पार्क का निर्माण, 46.88 करोड़ रुपये से नक्षत्रशाला का कायाकल्प ऑडोटोरियम में होगा थ्री डी थिएटर, एक्टिविटी लैब और साइंस गैलरी भी होगी तारों की दुनिया की आभासी यात्रा करने के साथ खेल-खेल में विज्ञान सीखेंगे बच्चे गोरखपुर  योगी सरकार गोरखपुर में विश्व स्तरीय ज्ञान विज्ञान पार्क बनवा रही है। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला में ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के नाम पर बन रहे ज्ञान विज्ञान पार्क का निर्माण मार्च 2026 तक पूर्ण होना प्रस्तावित है। यह प्रदेश का दूसरा विज्ञान पार्क होगा। इसके निर्माण पर 15 करोड़ 89 लाख रुपये की लागत आएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशानिर्देश पर 46 करोड़ 88 लाख रुपये की लागत से वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला का आधुनिकीकरण भी कराया जा रहा है। नक्षत्रशाला के कायाकल्प और इसके कैम्पस में ज्ञान विज्ञान पार्क की स्थापना के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्टूबर 2022 में नक्षत्रशाला का दौरा करने के दौरान दिए थे। तब सीएम ने यहां आकर आंशिक सूर्य ग्रहण का नजारा देखा था और नक्षत्रशाला को विश्व स्तरीय स्तर पर अत्याधुनिक बनाने की मंशा जताई थी। उनके निर्देश के बाद डीपीआर बनाकर 5 जुलाई 2024 से नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण और 5 मई 2025 से ज्ञान विज्ञान पार्क के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ। विज्ञान पार्क का कार्य मार्च 2026 तथा नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण का कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना है।  नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण और इसके परिसर में ज्ञान विज्ञान पार्क की स्थापना से विद्यार्थी तारों की दुनिया की आभासी यात्रा कर सकेंगे। खेल-खेल में विज्ञान सीख सकेंगे, गूढ़ रहस्यों को समझ सकेंगे। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के प्रभारी डॉ. महादेव पांडेय के मुताबिक आधुनिकीकरण से नक्षत्रशाला को विश्व स्तरीय बनाया जा रहा है। विज्ञान से संबंधित कई विशिष्ट उपकरण मंगाए जा रहे हैं। थ्री डी प्रोजेक्टर लगाने के साथ ही एम्फी थिएटर बनाया जा रहा है। नक्षत्रशाला में स्पेशल साइंस गैलरी बनाई जा रही है। सबसे खास आकर्षण एक्टिविटी लैब होगी। इस लैब में विद्यार्थी कई प्रायोगिक गतिविधियों में शामिल होकर विज्ञान की बारीकियों को सीख सकेंगे।  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने लिया निर्माणाधीन विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला का जायजा प्रदेश के के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  मंत्री अनिल कुमार ने बुधवार को वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण कार्य एवं निर्माणाधीन विज्ञान पार्क का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नक्षत्रशाला को आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाए। ताकि विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं आम जनमानस को विज्ञान एवं खगोल संबंधी जानकारी सहज रूप से उपलब्ध हो सके। उन्होंने विज्ञान पार्क के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्माण एजेंसी को कार्य की गुणवत्ता एवं समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।  उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पार्क का निर्माण इस प्रकार किया जाए कि यह न केवल गोरखपुर, बल्कि पूरे पूर्वांचल क्षेत्र के लिए विज्ञान शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन सके। उन्होंने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। नक्षत्रशाला एवं विज्ञान पार्क इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।