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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में 15 विषयों के 7466 पदों के लिए होगी भर्ती परीक्षा

मिशन रोजगार :  उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापक (प्रशिक्षित स्नातक) की परीक्षा दिसंबर और जनवरी माह में होगी आयोजित   पारदर्शी व्यवस्था से युवाओं के सपनों को मिल रही नई ऊंचाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में 15 विषयों के 7466 पदों के लिए होगी भर्ती परीक्षा परीक्षा को पारदर्शी और नकलविहीन बनाने के लिए की जा रहीं व्यापक तैयारियां विगत 8.5 वर्षों में 8.5 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार प्रदान करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता लगातार साकार हो रही है। इसी कड़ी में लोक सेवा आयोग द्वारा दिसंबर और जनवरी माह में सहायक अध्यापक (प्रशिक्षित स्नातक) भर्ती परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा के माध्यम से 15 विषयों में कुल 7466 पदों पर योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। यह परीक्षा, योगी सरकार के मिशन रोजगार के माध्यम से युवाओं के सपनों को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के तहत परीक्षा को पूरी तरह नकलविहीन, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सम्पन्न कराने की व्यापक तैयारी की गई है। परीक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन जनपदों में परीक्षा केंद्र हैं, वहां के जिलाधिकारी स्वयं व्यक्तिगत रूप से व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम परीक्षा के सफल आयोजन के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रवेश के समय बायोमेट्रिक सत्यापन, फ्रिस्किंग की कड़ाई, पूर्णतः क्रियाशील सीसीटीवी कैमरे, एलआईयू और एसटीएफ की निगरानी टीमों की सक्रिय उपस्थिति के साथ ही संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता सुनिश्चित की जाएगी।प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने हेतु कलर एवं कोड आधारित एसएमएस प्रणाली लागू होगी। ट्रेजरी से गोपनीय सामग्री की निकासी और परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंच सेक्टर मजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित समय पर की जाएगी। अभ्यर्थियों की सुविधा का पूरा ध्यान सभी परीक्षा केन्द्रों पर स्वच्छ पेयजल, शौचालय, पर्याप्त प्रकाश, बैठने की समुचित व्यवस्था सहित अन्य सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी समय से पूर्ण कर लिया गया है। विगत 8.5 वर्षों में 8.5 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले साढ़े आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश में सरकारी सेवाओं में 8.5 लाख से अधिक नियुक्तियां प्रदान कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पारदर्शी, त्वरित और तकनीक-आधारित भर्ती व्यवस्था से युवाओं को व्यापक अवसर मिल रहे हैं। साथ ही, राज्य में बढ़ते निवेश के परिणामस्वरूप निजी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में रोजगार सृजित हुए हैं।

एआई संचालित सुशासन का नया मॉडल पेश कर रहा उत्तर प्रदेश

अत्याधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल कर सुदृढ़ सुशासन दे रही योगी आदित्यनाथ सरकार   एआई संचालित सुशासन का नया मॉडल पेश कर रहा उत्तर प्रदेश त्रिनेत्र 2.0 और स्मार्ट मॉनिटरिंग से कानून व्यवस्था हुई मजबूत एआई आधारित फोरेंसिक और जेल सुरक्षा प्रणाली ने बढ़ाई जांच और निगरानी की सटीकता   लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सुशासन के अपने मॉडल को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तेजी से उन्नत तकनीकों को माध्यम बना रही है। कानून व्यवस्था को मजबूत करने और न्याय प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए सरकारी तंत्र में डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित समाधानों का दायरा लगातार विस्तृत और समृद्ध हो रहा है। इसका उद्देश्य अपराध नियंत्रण से लेकर न्याय की प्रक्रिया तक की दक्षता में वृद्धि करना है। गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चीकृत क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला के उद्घाटन के दौरान कहा भी था कि “अब प्रदेश में अपराधी के बचने का कोई रास्ता नहीं बचेगा। फोरेंसिक जांच अपराध की कड़ी को मिनटों में उजागर कर देगी और हर गंभीर मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य निर्णायक भूमिका निभाएंगे”। राज्य पुलिस प्रणाली को स्मार्ट तथा अधिक सक्षम बनाने के लिए सरकार ने त्रिनेत्र 2.0 के रूप में एक नया उन्नत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया है। यह एक एआई एन्हांस्ड प्लेटफॉर्म है,  जिसमें पुलिस रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित और व्यवस्थित किया जाता है। यह सिस्टम अपराधियों की पहचान और उनके इतिहास को समझने के काम को त्वरित और सटीक बनाता है। त्रिनेत्र फेशियल रिकग्निशन वॉइस आइडेंटिफिकेशन और टेक्स्ट बेस्ड क्वेरी जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए पुलिस को संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने में मदद मिलती है। इससे क्राइम के जांच की गति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।  जुलाई 2023 से प्रदेश के समस्त जनपदों में ऑपरेशन त्रिनेत्र प्रारम्भ किया गया, जिसके अन्तर्गत महत्वपूर्ण चौराहों, संवेदनशील स्थानों, हॉटस्पॉट, बैंक, स्कूल, कॉलेज, व्यवसायिक प्रतिष्ठान, धार्मिक स्थल, मोबाइल टॉवर, पेट्रोल पम्प, ढाबा आदि स्थानों पर नागरिक स्वयंसेवी सस्थाओं के माध्यम से सीसीटीवी कैमरे लगाने की कार्यवाही प्रारम्भ की गयी थी और 2025 की शुरुआत तक ही तक प्रदेश के समस्त थानों में चिन्हित स्थलों पर 11,07,782 सीसीटीवी कैमरों का अधिष्ठापन कर दिया गया है। और इसी का परिणाम है कि 2025 की शुरुआत तक ही त्रिनेत्र के माध्यम से डकैती, लूट सहित अन्य गम्भीर कुल 5,718 घटनाओं का सफल अनावरण किया गया। जेल प्रशासन को स्मार्ट बनाने की दिशा में भी योगी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य की जेलों में एआई पावर्ड वीडियो एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म लागू किया गया है जो बंदियों की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखने में सक्षम है। इसके माध्यम से किसी भी संदिग्ध हरकत या संभावित जोखिम की पहचान तुरंत हो जाती है जिससे जेल सुरक्षा में प्रभावी सुधार आया है। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न जेलों की स्थिति को रियल टाइम में मॉनिटर कर सकते हैं और आवश्यक निर्देश तत्काल जारी कर सकते हैं। गोरखपुर में फोरेंसिक साइंस लैब के उन्नयन के बाद जांच एजेंसियों की वैज्ञानिक जांच क्षमता में भी उल्लेखनीय विकास हुआ है। अत्याधुनिक मशीनों और प्रशिक्षित विशेषज्ञों से लैस इस लैब ने अपराध जांच की गुणवत्ता को नई ऊंचाई दी है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि आधुनिक फोरेंसिक तकनीकें अपराधों की सटीक और वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित करती हैं और यही कारण है कि प्रदेश भर में फोरेंसिक और इन्वेस्टिगेटिव क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन सभी पहल का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में सुशासन की ऐसी प्रणाली विकसित करना है, जिसमें पारदर्शिता दक्षता और तकनीकी सशक्तिकरण केंद्र बिंदु में हो। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की यह रणनीति प्रदेश को एक सुरक्षित कानून आधारित और तकनीक संचालित राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

ओडीओपी योजना को और विस्तार देना समय की मांग, बेहतर प्रशिक्षण, ऋण सुविधा का विस्तार किया जाना आवश्यक: मुख्यमंत्री

ब्रांड यूपी की पहचान बनने के बाद अब लॉंच होगा ओडीओपी 2.0 ओडीओपी योजना को और विस्तार देना समय की मांग, बेहतर प्रशिक्षण, ऋण सुविधा का विस्तार किया जाना आवश्यक: मुख्यमंत्री अब खान-पान की परंपरा भी बनेगी ब्रांड, उत्तर प्रदेश में शुरू होगी एक जनपद-एक व्यंजन की नई पहल सभी यूनिटी मॉल और बड़े रीटेल नेटवर्क में प्रमुखता से प्रदर्शित होंगे उत्तर प्रदेश के उत्पाद डिजिटल रणनीति से बढ़ेगा निर्यात, बनेगा ओडीओपी निर्यात सहायता केंद्र स्थानीय उद्योग, निर्यात और रोज़गार को नई ऊँचाई देगा ओडीओपी 2.0: मुख्यमंत्री ओडीओपी और ओडीओसी मिलकर बनाएंगे उत्तर प्रदेश को लोकल से ग्लोबल की नई ताकत: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ब्रांड उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुकी 'एक जनपद- एक उत्पाद योजना' अब अपने अगले चरण ओडीओपी 2.0 टू के माध्यम से स्थानीय उद्योग, स्वरोज़गार और निर्यात को नई ऊंचाई देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक बाजार, आधुनिक मांग, तकनीकी उन्नयन, गुणवत्ता और पैकेजिंग की नई आवश्यकताओं को देखते हुए ओडीओपी को अब और अधिक व्यापक, व्यावसायिक और परिणामोन्मुखी स्वरूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है। ओडीओपी 2.0 के माध्यम से सरकार का लक्ष्य होगा कि प्रदेश के पारंपरिक उत्पाद बड़े बाज़ार, निर्यात और स्थायी रोजगार का मजबूत आधार बनें।  शुक्रवार को इस संबंध में हुई महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद की विशिष्ट खाद्य परंपरा को भी एक संगठित पहचान देने की दिशा में 'एक जनपद-एक व्यंजन' (ओडीओसी) की अवधारणा को साकार करने की भी जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि 'एक जनपद-एक व्यंजन' योजना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा से जुड़ी हुई है। प्रदेश के हर क्षेत्र में खान-पान की कुछ न कुछ विशिष्ट परंपरा है। कहीं हलवा अच्छा है तो कहीं दालमोठ। उन्होंने कहा कि हर जिले के विशेष व्यंजनों की मैपिंग कर उनकी गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन को सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'ओडीओपी' और 'ओडीओसी' मिलकर उत्तर प्रदेश को 'लोकल से ग्लोबल' की दिशा में नई गति देंगे। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2018 में प्रारंभ ओडीओपी योजना आज उत्तर प्रदेश के निर्यात और स्थानीय उद्योगों की रीढ़ बन चुकी है। अब तक 1.25 लाख से अधिक टूलकिट वितरित किए जा चुके हैं, 06 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरण हो चुका है और 08 हजार से अधिक उद्यमियों को प्रत्यक्ष विपणन सहायता दी गई है। प्रदेश में तीस साझा सुविधा केंद्र स्वीकृत किए गए हैं और 44 ओडीओपी उत्पादों को अब तक जियो टैग प्राप्त हो चुके हैं। ओडीओपी उत्पाद आज प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स  प्लेटफार्म पर उपलब्ध हैं और राज्य के कुल निर्यात में इनका योगदान पचास प्रतिशत से अधिक है। ओडीओपी को लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है। मुख्यमंत्री ने ओडीओपी 2.0 को लेकर कहा कि यह अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि स्थायी रोजगार, स्थानीय उद्यम और निर्यात को नई ऊँचाई देने का सशक्त माध्यम बने। उन्होंने कहा कि अब उन इकाइयों और उद्यमियों को आगे बढ़ाने पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है, जिन्होंने पहले चरण में उत्कृष्ट कार्य किया है, ताकि वे अपने व्यवसाय का और विस्तार कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं को इस तरह आगे बढ़ाया जाए कि तकनीक, पैकेजिंग, गुणवत्ता और बाजार सहित चारों मोर्चों पर उत्तर प्रदेश के उत्पाद सशक्त रूप में स्थापित हों। बैठक में यह भी बताया गया कि ओडीओपी से जुड़े कॉमन फैसिलिटी सेंटरों को अब और अधिक उपयोगी बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कॉमन फैसिलिटी सेंटरों के साथ विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि छोटे उद्यमियों को तकनीकी परामर्श, डिज़ाइन, पैकेजिंग और उत्पादन से जुड़ा पूरा सहयोग एक ही स्थान पर सुलभ हो सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि ओडीओपी उत्पादों को केवल पारंपरिक बाजारों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें बड़े रीटेल नेटवर्क और आधुनिक बाजारों से जोड़ा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित हो रहे यूनिटी मॉल में ओडीओपी के समर्पित केंद्र बनाए जाएं। साथ ही सभी प्रतिष्ठित रीटेल नेटवर्क के साथ संवाद कर यह सुनिश्चित किया जाए कि वहां उत्तर प्रदेश के उत्पाद प्रमुख रूप से प्रदर्शित हों। बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि ओडीओपी उत्पादों की गुणवत्ता और पहचान को और सुदृढ़ करने के लिए उन्हें प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से प्रमाणन और ब्रांड मूल्य प्रदान किया जाएगा, जिससे वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश के उत्पाद विशिष्ट पहचान बना सकें।

खेल समय बर्बाद करने का नहीं, हमारे जीवन के सर्वांगीण विकास का माध्यम हैं : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत का संकल्प पूरा करने में खेलों की अहम भूमिका है : सीएम योगी आदित्यनाथ   मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयीय खेल प्रतियोगिता- 2025 के (ग्रीको रोमन) कुश्ती के विजेताओं को पुरस्कृत किया  गोरखपुर   वीर बहादुर सिंह स्पोर्टस कालेज, गोरखपुर में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयीय खेल प्रतियोगिता- 2025 के (ग्रीको रोमन) कुश्ती के विजेताओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुरस्कृत किया। इस अवसर पर उन्होंने 17 एवं 19 आयु वर्ग के विजेताओं को पदक व पुरस्कार देकर सम्मानित किया और प्रतियोगियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल-कूद, हमारे जीवन के सर्वांगीण विकास का माध्यम है और जिस तरह से विश्व खेल मानचित्र पर हमारे खिलाड़ी देश का मान बढ़ा रहे हैं ये हम सभी के लिए गौरव का विषय है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने प्रदेश में खेल सुविधाओं को कमिश्नरी से जनपद और जनपद से ब्लाक स्तर व प्रत्येक स्कूल-कॉलेजों में विकसित करने के जरूरी कदम उठाये हैं। साथ ही उन्होंने वर्ष 2030 में देश में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में अपना नाम दर्ज करने के लिए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया।     स्कूलों में शिक्षा के साथ खेलों को भी महत्व देना जरूरी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयीय खेल प्रतियोगिता- 2025 के अवसर पर विजेताओं को शुभकामानएं दी और कहा कि खेल कूद वर्तमान में समय बर्बाद करने का नहीं बल्कि जीवन का सर्वांगीण विकास करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारतीय मनीषा हमेशा से मानती रही है कि शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् …अर्थात स्वस्थ्य शरीर से ही सभी धर्म पूरे किये जा सकते हैं। यही नहीं खेल कूद अपने अपने आप में विकास की एक नई धारा को प्रसारित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत का जो संकल्प हम सबके सामने प्रस्तुत किया है, उसके लिए भारतवासियों, देश के नौजवानों का स्वस्थ्य होना बहुत जरूरी है। यह संभव होगा जब हम स्कूल-कॉलेजों में शिक्षा के साथ खेलों को भी समान रूप से महत्व देंगे। हमारी सरकार ने इस दिशा में कई जरूरी कदम उठाए हैं।      हर जनपद में एक स्टेडियम और हर ब्लॉक पर एक मिनी स्टेडियम का हो रहा है निर्माण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश में खेलों के विकास के लिए हर जनपद में एक स्टेडियम और हर ब्लॉक पर एक मिनी स्टेडियम का निर्माण करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में 18 जनपदों के राजकीय कॉलेजों में मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है, जिसके लिए प्रत्येक कॉलेज को लगभग 5 करोड़ रुपए उपलब्ध कराया जा रहा हैं। इसी क्रम में गोरखपुर मंडल में गोरखपुर और महाराजगंज के राजकीय कॉलेजो में भी मिनी स्टेडियम का निर्माण हो रहा है। साथ ही स्कूल कॉलेज में खेलों को प्रोत्साहित करने के उद्देंश्य प्रत्येक कॉलेज को 25000 रुपए, बेसिक शिक्षा और माध्यमिक विद्यालयों को ₹5000 और जूनियर हाई स्कूल को 10000 रुपये प्रदान किया जा रहा है। हमारा बच्चा खेलेगा तभी तो खिलेगा और अपनी प्रतिभा का लाभ देश को दे पाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयास से हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी के नाम से मेरठ में स्पोर्टस् युनिवर्सिटी का निर्माण भी किया जा रहा है।  आत्मबल और आत्मविश्वास हमें किसी भी प्रतियोगिता में दिलाते हैं विजय- सीएम योगी आदित्यनाथ सीएम योगी आदित्यनाथ ने खेल प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वर्ष 2030 में अहमदाबाद में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन किया जा रहा है, जो खिलाड़ी आज अंडर 17 और 19 आयु वर्ग में खेल रहे हैं, उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में अपना नाम दर्ज करना है। उन्होंने प्रतियोगिता के उपविजेताओं और हार गये प्रतिभागियों को निराश हुए बिना अपनी कमियों पर परिश्रम कर, दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि हमारी सबसे पहली प्रतियोगिता स्वंय से होती है, जब हम आत्मबल और आत्मविश्वास के साथ किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेते हैं तो विजय मिलना जरूरी है। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता के 17 व 19 आयुवर्ग की कुश्ती का फाइनल मैच भी देखा और विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किये।

जालौन में जल क्रांति : योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों से सुधरा भूजल और किसानों का भविष्य

जिले में दो मीटर तक बढ़ा भूजल स्तर, बदली खेतों की तस्वीर पानी की उपलब्धता से कृषि चक्र हुआ स्थिर, पलायन में आई भारी कमी लखनऊ  कभी सूखे खेतों और गहराते जल संकट के लिए पहचाने जाने वाला जालौन आज उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण की एक मजबूत मिसाल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों और निरंतर प्रयासों ने इस जिले की भाग्य रेखा को बदलने का काम किया है। जो जालौन कभी एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करता था आज वहीं कई ब्लॉकों में भूजल स्तर 2 मीटर बढ़ा है और कहीं- कहीं तो अधिक सुधर चुका है। यह परिवर्तन एक दिन में नहीं आया। पिछले कुछ वर्षों में जिले में हजारों जल संरक्षण संरचनाएं बनी हैं। चेक डैमों से लेकर पुनर्जीवित तालाबों तक खेतों में बनाए गए फार्म पॉन्ड्स तक इन सबने जालौन में जल पुनर्भरण के मजबूत ढांचे का निर्माण किया है। बारिश का पानी अब इकट्ठा होकर जमीन में जाने लगा है, इससे भूजल वाटर लगातार रिचार्ज हो रहा है। जालौन के कई हिस्सों में किसान आवश्यकता के समय सिंचाई के लिए भूजल नहीं प्राप्त कर पाते थे। लेकिन आज बेहतर वाटर टेबल की वजह से कई ब्लॉकों में ट्यूबवेल पंपिंग के घंटे 1 से 5 गुना तक बढ़ गए हैं। बिजली आपूर्ति में सुधार और भूजल स्तर बढ़ने से किसान अब 2 से 3 अतिरिक्त घंटे पानी निकाल पा रहे हैं। इससे सिंचाई लागत कम हुई है और कृषि चक्र स्थिर हुए हैं। जालौन जिले के अंतर्गत गांव सैद नगर की निवासी महिला विद्या का कहना है कि योगी जी की सरकार ने पानी के मामले में अत्यंत सराहनीय काम किया है। खेती किसानी के लिए जहां सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त हुई है वही हम महिलाओं को अब दूर से पानी लेने नहीं जाना पड़ता है। सरकार ने बहुत बड़ा काम किया है इसके लिए हम सभी सरकार के अत्यंत आभारी हैं। पानी की उपलब्धता ने कृषि को नई दिशा दी है। खरीफ में धान और बाजरा जैसे फसलों के क्षेत्रफल और पैदावार में तेज वृद्धि दर्ज की गई है जबकि रबी उत्पादन भी बेहतर हुआ है। बुंदेलखंड पैकेज के तहत दालों और तिलहनी फसलों के उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है जिससे किसानों को स्थिर और भरोसेमंद आय का स्रोत मिला है। कृषि से आगे बढ़कर सामाजिक स्तर पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। कभी बुंदेलखंड के अन्य इलाकों की तरह जालौन भी मौसमी पलायन की समस्या से जूझता था। पानी की उपलब्धता बढ़ने फसल स्थिर होने और अनिश्चितता घटने से अब पलायन में भारी कमी आई है। किसानों में यह विश्वास लौट आया है कि उनकी जमीन खरीफ और रबी दोनों मौसमों में उन्हें संभालेगी। इस सफलता में आम जनता की भागीदारी ने भी अहम भूमिका निभाई है। जल पंचायतों और पानी पाठशालाओं जैसे कार्यक्रमों ने स्थानीय स्वामित्व की भावना बढ़ाई है और जल संरक्षण को सरकारी योजना के बजाय सामुदायिक आंदोलन का रूप दिया है। यह सामूहिक उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर तब सम्मानित हुई जब जालौन को राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 में उत्तर क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ जिला चुना गया। कमी से समृद्धि की यात्रा में यह एक गौरवशाली उपलब्धि है। जालौन की यह कहानी बताती है कि लगातार नीति समुदाय की साझेदारी और दृढ़ संकल्पित शासन क्या बदलाव ला सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों के प्रति उनकी संवेदना ने जल क्रांति के मामले में ऐतिहासिक मिसाल कायम की है।

गोरखपुर की सड़कों पर दिखा अनुशासन, संस्कृति व विरासत के सम्मान का अद्भुत समन्वय

संस्थापक सप्ताह समारोह 'गोरक्षनगरी' में उतरा 'हिंदुस्तान' महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने निकाली शोभायात्रा   गोरखपुर की सड़कों पर दिखा अनुशासन, संस्कृति व विरासत के सम्मान का अद्भुत समन्वय  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के छात्रों की शोभायात्रा, संस्कृति और जोश का अद्भुत संगम गोरखपुर  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 में गुरुवार को गोरक्षनगरी में ‘समूचा हिंदुस्तान’ उमड़ पड़ा। एक तरफ उत्साह, उमंग से लबरेज युवाओं ने भारतीय संस्कृति, अनुशासन व विरासत के सम्मान का संदेश दिया तो दूसरी तरफ भारत के शौर्य, पराक्रम के साथ ही सम्मान के प्रतीक महापुरुषों के प्रति श्रद्धा निवेदित की। गोरखपुर की सड़कों पर युवाओं ने अनुशासन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। भारत की सांस्कृतिक धरोहरों, तकनीकी विकास, सुरक्षा व महापुरुषों की विचारधारा संग भारतीय वेशभूषा संग निकली शोभायात्रा ने सभी को अपनी ओर आकर्षित किया।  अतिथियों ने किया पुस्तक का विमोचन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय की शोध पत्रिका ‘दिग्विजयम्’ और महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज, जंगल धूषड़ द्वारा ‘मिशन मंझरिया’ की संक्षिप्त रिपोर्ट का विमोचन किया। समारोह स्थल पर पहुंचने के उपरांत एनसीसी के कैडेट्स ने मुख्य अतिथि को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मुख्य अतिथि ने पुस्तिका पर अपने विचार भी लिखे। मुख्यमंत्री व मुख्य अतिथि ने ‘विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समारोह स्थल पर 9000 से अधिक विद्यार्थी मौजूद रहे। समारोह के शुभारंभ समारोह में महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज की छात्राओं ने सरस्वती वंदना व कुलगीत प्रस्तुत किया। युवाओं के अनुशासन की भूरि-भूरि प्रशंसा मुख्य अतिथि ने शोभायात्रा के शुभारंभ की घोषणा की। मुख्य अतिथि ने शोभायात्रा में शामिल युवाओं से मार्च पास्ट की सलामी ली। शोभायात्रा में सबसे आगे महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज की एनसीसी कैडेट्स रहीं। उनके पीछे महाराणा प्रताप महिला पीजी कॉलेज रामदत्तपुर की एनसीसी कैडेट्स, दिग्विजयनाथ इंटर कॉलेज चौक बाजार के एनसीसी कैडेट्स, महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज एनसीसी सीनियर डिवीजन, महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज एनसीसी जूनियर डिवीजन, एनसीसी दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज व ताइक्वांडो टीम शामिल रही। ज्ञान ज्योति, सच्चिदानंद बैंड, हंस वाहिनी भी आकर्षण का केंद्र रही। शोभायात्रा में शिक्षा परिषद के संस्थाओं के विद्यार्थी शामिल रहे।  महापुरुषों के प्रति सम्मान का भाव  शोभायात्रा में मां सरस्वती, भारत माता, महायोगी गुरु गोरखनाथ, महाराणा प्रताप, महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के चित्र भी रहे। शोत्रायात्रा में एक तरफ 'ऑपरेशन सिंदूर' के माध्यम से भारत के शौर्य की कहानी प्रस्तुत की जा रही थी तो वहीं राम मंदिर के जरिए विरासत का सम्मान भी युवाओं ने प्रस्तुत किया। युवाओं ने शोभायात्रा के माध्यम से विरासत, संस्कृति के प्रति सम्मान के भाव को प्रदर्शित किया। शोभायात्रा कॉलेज परिसर से निकलकर इंदिरा बाल बिहार से सीधे पोस्ट ऑफिस तिराहे से गणेश चौराहा से गोलघर होते हुए कचहरी चौराहा, फिर महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के स्वर्ण जयंती द्वार से शोभायात्रा स्थल पर पहुंची। भारतीय परिधान व विद्यालय के गणवेश में युवा सभी के आकर्षक का केंद्र बने रहे। संस्थापक-सप्ताह समारोह में शुक्रवार को होने वाली प्रतियोगिताएं महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संस्थापक सप्ताह समारोह में शुक्रवार को गोरखवाणी प्रतियोगिता-कनिष्ठ वर्ग दिग्विजयनाथ एल.टी. प्रशिक्षण महाविद्यालय, वरिष्ठ वर्ग महाराणा प्रताप इण्टर कॉलेज (सभागार), योगासन प्रतियोगिता-प्रताप आश्रम गोलघर, चित्रकला प्रतियोगिता-दिग्विजयनाथ पी.जी.कॉलेज (कला संकाय), कबड्डी प्रतियोगिता बालक वर्ग (कनिष्ठ एवं वरिष्ठ) महाराणा प्रताप पालिटेक्निक गोरखनाथ एवं बालिका वर्ग (कनिष्ठ एवं वरिष्ठ) महाराणा प्रताप बालिका इण्टर कॉलेज सिविल लाइन्स में सम्पन्न होगी। यह जानकारी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संचालन समिति के सदस्य डॉ. नितीश शुक्ला ने दी।

जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

राष्ट्र की संस्कृति समाप्त हो जाए तो वह अपनी एकात्मता व पहचान को खो देता हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  एसडीआरएफ के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने किया महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ  महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने 1932 में गोरखपुर में की थी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापनाः गोरक्षपीठाधीश्वर  गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 के शुभारंभ अवसर पर स्वदेश, स्वधर्म व राष्ट्रीय स्वाभिमान का जिक्र किया और कहा कि जब भी हम संकट में होते हैं या कोई राष्ट्रीय चुनौती होती है तो महापुरुषों के चित्र, उनके शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैं। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई समेत सीमाओं की रक्षा करते हुए बलिदान देने वाले भारत मां के बहादुर जवान देश के लिए प्रेरणा हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्र की पहचान वहां की संस्कृति, परंपराएं और महापुरुष होते हैं, यह एक-दूसरे से जुड़े हैं। राष्ट्र की संस्कृति समाप्त हो जाए तो राष्ट्र अपनी एकात्मता व पहचान को खो देता है। संस्कृति उन राष्ट्रीय मूल्यों से बनती है, जिन्हें समय-समय पर अलग-अलग युगांतकारी घटनाओं ने संबल और शक्ति दी। जिन्हें विभिन्न पर्वों के माध्यम से पूरा भारत बिना भेदभाव के आत्मसात करता है। पर्व में मतभेदों को समाप्त करके हम ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते है।  महंत दिग्विजयनाथ महाराज द्वारा 1932 में गोरखपुर में स्थपित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने वाले स्मृतिशेष प्रो. यूपी सिंह व अन्य दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि दी।   यह आत्ममंथन का अवसर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद अगले छह वर्ष के अंदर होने वाले शताब्दी महोत्सव के कार्यक्रम के साथ बढ़ रहा है। ऐसे में शिक्षा परिषद व संस्थाओं के सामने 100 वर्षों की इस यात्रा के आत्ममंथन का अवसर है। यह समारोह इस पर आत्मावलोकन का अवसर प्रस्तुत कर रहा है कि छात्र के सर्वांगीण विकास, समाज व राष्ट्र के प्रति हमने अपनी भूमिका का निर्वहन किस रूप में किया है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापकों ने जो विराट लक्ष्य रखा है, वह समाज व राष्ट्र के प्रति हमारी सेवाएं-कर्तव्य के समय-समय पर मूल्यांकन का भी है। हमारे संस्थापकों ने छात्र-छात्राओं के सामने महाराणा प्रताप के रूप में आदर्श रखा।  शिक्षा के विजन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि आदि पर जोर दे रहा परिषद  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण, अपनी संकल्पना और भावना को बढ़ाने के लिए संस्थापकों ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। परिषद शिक्षा के विजन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, महाराणा प्रताप पॉलीटेक्निक आदि के जरिए तकनीक पर जोर दे रहा है तो वहीं महिलाओं की शिक्षा, अन्नदाता किसानों के प्रशिक्षण के लिए महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र या अन्न संस्थाएं दूरदराज के क्षेत्रों में नए प्रयास को बढ़ाने के साथ ही कार्य कर रही हैं।  संस्थापक समारोह का उद्देश्य- हम कर्तव्य व तैयारियों का कर सकें आत्मावलोकन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संस्थापक समारोह का उद्देश्य है कि हम संस्थापकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कर्तव्यों व तैयारियों का आत्मावलोकन कर सकें कि आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें खुद को कैसे तैयार करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भावी भारत के निर्माण में अपने उत्तरदायित्वों को भी बखूबी समझना होगा। संस्थाएं जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए प्रतिवर्ष नयापन करने का प्रयास कर रही हैं।  शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं को बनना ही होगा मॉडल स्टडी का माध्यम  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज द्वारा शोध पत्रिका ‘दिग्विजयम्’ और महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज द्वारा ‘मिशन मंझरिया’ के विमोचन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक ओर शिक्षित बेरोजगारों की फौज खड़ी होती है तो दूसरी तरफ निरक्षरता की लंबी खाई दिखाई पड़ती है। महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज को इसमें योजक की भूमिका में दिखाई दिया है। यहां के शिक्षा संकाय के छात्रों द्वारा गांव को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने के लक्ष्य को बढ़ाने की दिशा में गोद लिया गया, उन्होंने इसे मॉडल स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया। सीएम योगी ने कहा कि शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं को मॉडल स्टडी का माध्यम बनना ही होगा।  समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं संस्थान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में किसी भी मनुष्य के लिए अयोग्य शब्द नहीं कहा गया है। अयोग्य मतलब उसकी मनुष्यता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति अयोग्य है तो इसका मतलब कोई योजक नहीं है। उन्होंने कहा कि अयोग्यता-निरक्षरता शैक्षिक समाज पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सीएम योगी ने परिषद के सभी शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं द्वारा सेवा भाव के कार्यों का जिक्र किया। बताया कि कोई कुष्ठ सेवाश्रम तो कोई संस्थान थारू, वनटांगिया के छात्रों को गोद लेकर पढ़ा रहा है तो कोई संस्थान अन्य जिम्मेदारियों के साथ समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है और यही राष्ट्र के प्रति हमारी सेवा भी है।  समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश वास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. जेपी सैनी, प्रो. रविशंकर सिंह, डॉ. सुरेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, इंजी. सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ला, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, रतनपाल सिंह, पूर्व महापौर अंजू चौधरी आदि मौजूद रहे।

सौर ऊर्जा क्रांति के दौर से गुजर रहा है उत्तर प्रदेश

रोशन हुआ उत्तर प्रदेश : सौर ऊर्जा में योगी सरकार की ऐतिहासिक छलांग सौर ऊर्जा क्रांति के दौर से गुजर रहा है उत्तर प्रदेश  ऊर्जा बचत और आर्थिक लाभ का नया अध्याय, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत… लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की सौर ऊर्जा नीति से उत्तर प्रदेश आज ऊर्जा क्रांति के दौर से गुजर रहा है। प्रदेश की कुल सौर ऊर्जा क्षमता अब 1003.64 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जिससे वार्षिक बिजली बिल में औसतन 40 से 60 प्रतिशत तक की बचत होने का अनुमान है। यह बचत बड़े उद्योगों से लेकर ग्रामीण उपभोक्ता तक पहुंच रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट सन्देश है कि विकसित यूपी 2047 विजन के अंतर्गत आने वाले 22 वर्षों में प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जाये। सौर ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी बचत लंबी अवधि में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी। वहीं इससे बिजली खपत का भार भी काफी हद तक कम हो जाएगा। रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत… प्रदेश में सौर ऊर्जा के बढ़ते दायरे के साथ लगभग 50 हजार युवाओं को तकनीशियन, इंस्टॉलर और सर्विस स्टाफ के तौर पर प्रत्यक्ष रूप से रोजगार हासिल हुआ। रोजगार के अवसर गांव और कस्बों तक पहुंचे हैं। इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ है कि पलायन में कमी आई है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। इसी के साथ, ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में लोड शेडिंग में कमी दर्ज की जा रही है। पहले जहां बिजली कटौती के कारण छोटे व्यवसायों जैसे मिल, वेल्डिंग और प्रोसेसिंग यूनिट प्रभावित होते थे, वहीं अब इनकी आय में 10 से 15 प्रतिशत तक का सुधार हुआ है। सौर ऊर्जा गांव के प्रगति की एक प्रमुख धुरी बनती दिख रही है।  ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर प्रदेश उत्तर प्रदेश अब ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसमें सौर ऊर्जा की भूमिका को और सशक्त करने के प्रयास जारी हैं। जैसे-जैसे सौर ऊर्जा का दायरा बढ़ेगा वैसे-वैसे परंपरागत बिजली आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी और इसका लाभ उद्योग और छोटे व्यवसायों को मिलेगा। योगी आदित्यनाथ सरकार का विश्वास है कि आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा प्रदेश की आर्थिक रीढ़ साबित होगी और उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी। सूर्य की रोशनी पर आधारित यह परिवर्तन अब कल्पना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई देने वाली वास्तविकता है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऊर्जा नीति को लोककल्याण और आर्थिक उन्नति के साथ जोड़ा है।  सौर ऊर्जा से संबंधित आंकड़े… – प्रदेश के 2.90 लाख घरों में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित – कुल 2,600 करोड़ रुपये का अनुदान – सोलर सेक्टर में अब तक 50,000 नए रोजगार सृजित

मंत्रिपरिषद बैठक: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लिए गए प्रमुख निर्णय

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :- जनपद अयोध्या में विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय का  निर्माण एवं संचालन कराये जाने के सम्बन्ध में     मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदत्त अनुमोदन के अनुपालन में जनपद अयोध्या स्थित तहसील सदर के ग्राम मांझा जमथरा की नजूल भूमि गाटा-57 मि0 क्षेत्रफल 25 एकड़ में टाटा ग्रुप के सहयोग से सी0एस0आर0 फण्ड के माध्यम से विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय के निर्माण एवं संचालन हेतु 01 रुपये वार्षिक धनराशि की दर पर भूमि 90 वर्ष के लिये दिये जाने हेतु संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, पर्यटन विभाग उत्तर प्रदेश शासन एवं टाटा संस प्रा0लि0 के मध्य त्रिपक्षीय एम0ओ0यू0 दिनांक 03 सितम्बर, 2024 को हस्ताक्षरित किया गया है। तदनुक्रम में ग्राम मांझा जमथरा, परगना हवेली अवध, तहसील सदर, जनपद अयोध्या की राजकीय नजूल भूमि गाटा संख्या गाटा-57 मि0 व 1 मि0 क्षेत्रफल 25 एकड़ के अतिरिक्त 27.102 एकड़, कुल 52.102 एकड़ भूमि का निःशुल्क हस्तांतरण आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, उ0प्र0 से पर्यटन विभाग के पक्ष में किये जाने के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी है। साथ ही, प्रकरण में आवश्यकतानुसार अग्रेतर निर्णय लिये जाने हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किये जाने का भी निर्णय मंत्रिपरिषद द्वारा लिया गया है।       उल्लेखनीय है कि भारत में घरेलू पर्यटकों एवं विदेशी पर्यटकों के आगमन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय स्थान है। अपनी गौरवशाली ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासतों तथा समृद्ध प्राकृतिक वनसम्पदा की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में पर्यटन की असीम सम्भावनाएं विद्यमान हैं।     भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या वर्तमान में एक विश्वस्तरीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन गन्तव्य के रूप में विकसित हो रही है। दिनांक 22 जनवरी 2024 को श्रीराम जन्मभूमि प्रांगण में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के उपरान्त अयोध्या आने वाले पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व गुणात्मक वृद्धि हुई है, अब प्रतिदिन लगभग 2 से 4 लाख पर्यटक अयोध्या धाम आ रहे हैं। नई पीढ़ी के युवाओं, विदेशी पर्यटकों, भारतीय सभ्यता और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों को अयोध्या के प्रति आकर्षित करने हेतु आवश्यक पर्यटक उपादानों का अभी अभाव है।     टाटा सन्स प्रा0लि0 द्वारा भारतीय मंदिर स्थापत्य कला तथा भारतीय मंदिरों से सम्बन्धित सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत से लोगों को परिचित कराने एवं प्राचीन काल से चली आ रही मंदिरों की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परम्परा व दर्शन के संरक्षण हेतु अपने सी0एस0आर0 फण्ड से एक विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय का निर्माण एवं इसका सुचारु रूप से प्रबन्धन/संचालन करने हेतु इच्छा व्यक्त की गयी है। जिसमें यह प्रस्तावित किया गया कि इस कार्य हेतु एक गैर लाभकारी एस0पी0वी0 का गठन कम्पनी एक्ट 2013 की धारा 08 के अधीन किया जायेगा। इस संस्था में भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि भी सम्मिलित होंगे।     इस संग्रहालय की स्थापना से प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार का सृजन होगा व सरकार को राजस्व में प्राप्ति होगी।   सेवायोजित अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों द्वारा  राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण शिविर आदि में प्रतिभाग करने  की अवधि एवं आवागमन में लगने वाले समय को ड्यूटी मानने का प्रस्ताव स्वीकृत मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली-2022 के अन्तर्गत सेवायोजित खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण शिविर आदि में प्रतिभाग किये जाने की अवधि एवं आवागमन में लगने वाला समय कर्तव्यार्थ व्यतीत अवधि (ड्यूटी) माने जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।  ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली-2022 के अन्तर्गत सेवायोजित खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण या खेल शिविरों में प्रतिभाग किये जाने को स्वीकृति देने तथा संगत अवधि को सेवाकाल माने जाने के सम्बन्ध में कोई व्यवस्था नहीं है, क्योंकि भर्ती/सेवा नियमावली में अवकाश सम्बन्धी व्यवस्था नहीं रखी जाती है। इससे सम्बन्धित खिलाड़ियों को अनुमति प्राप्त करने में समस्या होती है।  ऐसे खिलाड़ियों के नियोक्ता/प्रशासकीय विभागों को स्वीकृति प्रदान करने में कोई दुविधा न रहे, इसके दृष्टिगत सेवायोजित अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को केन्द्र सरकार की भांति समुचित व्यवस्था कार्यालय ज्ञाप के माध्यम से किया जाना अत्यन्त आवश्यक है। उपरोक्त स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए नियमावली-2022 के अन्तर्गत सेवायोजित खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण, शिविर आदि में प्रतिभाग किये जाने की अवधि एवं आवागमन में लगने वाले समय सहित कर्तव्यार्थ व्यतीत अवधि (ड्यूटी) माने जाने के सम्बन्ध में कार्यालय ज्ञाप के माध्यम से व्यवस्था प्रस्तावित है। इस व्यवस्था के लागू हो जाने पर नियमावली-2022 के अन्तर्गत सेवायोजित खिलाड़ियों को राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण, खेल शिविरों में प्रतिभाग किये जाने की अनुमति प्राप्त करने में सुगमता होगी।   डॉ0 सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स स्टेडियम, सिगरा, वाराणसी के संचालन,  प्रबन्धन तथा रख-रखाव एवं तत्सम्बन्धी राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र हेतु भारतीय  खेल प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराये गये एम0ओ0यू0 का आलेख्य स्वीकृत मंत्रिपरिषद ने डॉ0 सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स स्टेडियम, सिगरा, वाराणसी के संचालन, प्रबन्धन तथा रख-रखाव एवं तत्सम्बन्धी राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र हेतु भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराये गये एम0ओ0यू0 के आलेख्य सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।  ज्ञातव्य है कि प्रदेश के खेल विभाग के स्वामित्व में स्थित डॉ0 सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स स्टेडियम, सिगरा, वाराणसी में खेल अवसंरचनाओं (भवन, ढ़ांचा, खेल मैदान और अन्य सुविधाएं) का निर्माण खेलो इण्डिया योजना के अन्तर्गत किया गया है। वहां पर राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना एवं संचालन का कार्य भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा कराये जाने हेतु एम0ओ0यू0 का आलेख्य शासन के स्वीकृतार्थ उपलब्ध कराया गया है। डॉ0 सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स स्टेडियम में राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना के उद्देश्य से स्टेडियम की कतिपय खेल अवस्थापनाओं को, एम0ओ0यू0 में निहित शर्तां एवं प्रतिबन्धों के आधार पर, भारतीय खेल प्राधिकरण को दिये जाने का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित किया गया है। राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र के माध्यम से विभिन्न आयु वर्गों और खेल विधाओं में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान होगी और उन्हें राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु तैयार किया जा सकेगा। राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना होने से राष्ट्र के उभरते हुए खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। जनपद बागपत में पी0पी0पी0 मोड पर अन्तरराष्ट्रीय योग एवं आरोग्य  केन्द्र विकसित, संचालित तथा अनुरक्षित करने का प्रस्ताव अनुमोदित मंत्रिपरिषद ने जनपद बागपत की तहसील व परगना बागपत के ग्राम हरिया खेड़ा में पर्यटन विभाग द्वारा उपलब्ध करायी जा रही कुल 70.885 हेक्टेयर भूमि पर गैर लाभकारी संगठन … Read more

आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही यूपी की महिलाएं

योगी सरकार का ‘लखपति दीदी’ मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दे रहा नई मजबूती आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही यूपी की महिलाएं नवंबर तक उत्तर प्रदेश की 18.56 लाख महिलाएं बन चुकी हैं लखपति लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की कहानी नए मुकाम छू रही है। लखपति दीदी कार्यक्रम ने गांव गांव में महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास व नेतृत्व क्षमता को भी नई पहचान दी है। नवंबर तक प्रदेश की 18.56 लाख महिलाएं लखपति बन चुकी हैं। यानी वे निरंतर एक लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। 2027 तक 28.92 लाख महिलाएं बनेंगी लखपति उत्तर प्रदेश में 35.94 लाख महिलाओं का चिन्हांकन किया गया है, जिनमें से 29.68 लाख महिलाओं का आय विवरण डिजिटल आजीविका रजिस्टर में दर्ज है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 तक पूरे देश में 2 करोड़ स्वयं सहायता समूह सदस्यों की आमदनी को एक लाख से ऊपर करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें उत्तर प्रदेश का लक्ष्य 28.92 लाख निर्धारित है। राज्य सरकार के मुताबिक, नवंबर 2025 तक 18.56 लाख का लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है और बाकी 10.36 लाख भी निर्धारित समय सीमा में पूरा कर लिया जाएगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया बदलाव प्रदेश में 98.49 लाख ग्रामीण परिवारों की महिलाएं कुल 8,96,618 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। ये समूह 62,958 ग्राम संगठनों के माध्यम से एक-दूसरे को सहयोग और बाज़ार से जोड़ने का काम कर रहे हैं। महिलाएं कृषि आधारित गतिविधियां, पशुपालन, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, सेवा आधारित छोटे उद्यम के माध्यम से स्थायी आजीविका अर्जित कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक सदस्य की आय चार त्रैमासिक और फसल चक्र के दौरान लगातार तीन वर्ष तक एक लाख रुपये से कम न हो। यही सच्चा आर्थिक सशक्तिकरण है। नेतृत्व में महिलाएं सबसे आगे यह कार्यक्रम सिर्फ आय बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक भी बन रहा है। लखपति दीदियां अब वित्तीय रूप से सक्षम, परिवार की निर्णयकर्ता, गांव की परिवर्तन कारी शक्ति के रूप में उभर रही हैं।