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मुख्यमंत्री का जिलाधिकारियों को निर्देश, घुसपैठियों को चिन्हित करें, बनाए जाएं अस्थायी डिटेंशन सेंटर

मुख्यमंत्री का निर्देश, अवैध घुसपैठ पर होगी सख्त कार्रवाई   मुख्यमंत्री का जिलाधिकारियों को निर्देश, घुसपैठियों को चिन्हित करें, बनाए जाएं अस्थायी डिटेंशन सेंटर   डिटेंशन सेंटर में रखे घुसपैठियों को भेजा जाएगा वापस- मुख्यमंत्री योगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को अवैध घुसपैठ पर त्वरित और सख्त कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समरसता सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिला प्रशासन अपने क्षेत्र में रहने वाले अवैध घुसपैठियों की पहचान सुनिश्चित करे और नियमानुसार कार्रवाई शुरू करे।   मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि घुसपैठियों को रखने के लिए प्रत्येक जनपद में अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाए जाएं। इन केंद्रों में विदेशी नागरिकता के अवैध व्यक्तियों को रखा जाएगा और आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक वहीं आवास सुनिश्चित किया जाएगा।   मुख्यमंत्री ने कहा कि डिटेंशन सेंटर में रखे गए अवैध घुसपैठियों को तय प्रक्रिया के तहत उनके मूल देश भेजा जाएगा।

CM योगी का संदेश: न्याय प्रत्येक नागरिक के लिए सुरक्षा और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करे

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज लखनऊ में आयोजित विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 26वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुए, उन्होंने कहा वसुधैव कुटुम्बकम् यानी ‘पूरा विश्व एक परिवार है’ ( ‘The whole world is one family’ has been a basic philosophy of India for thousands of years.) यह हजारों वर्षों से भारत का मूल दर्शन रहा है। उन्होंने विश्व भर से आये मुख्य न्यायाधीशों का स्वागत करते हुए कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि यह सम्मेलन भारतीय संस्कृति के अनुरूप ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के भाव को फिर से पूरी दुनिया में मूर्त रूप से प्रस्तुत करने में सफल होगा। योगी आदित्यनाथ ने कहा ये सम्मेलन दुनिया के न्यायविदों के बीच दुनिया की मानवता के लिए संवाद का एक माध्यम है, जिन लोगों ने अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए और दुनिया में अशांति और अराजकता का वातावरण पैदा करना का सहस किया है उनके लिए भी एक माध्यम है। विश्व के न्यायाधीशों के सम्मेलन में बोले सीएम योगी, न्याय प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, स्वावलंबन और उनके उन्नत भविष्य का आधार बनना चाहिए योगी ने कहा हमें हमें UN की उस घोषणा को कभी भूलना नहीं चाहिए की दुनिया की वास्तव में समस्या क्या है? और जब हम इसकी गहराई में जाते हैं तो हमें लगता है कि संवाद एक दूसरे के बीच में नहीं है, किन्हीं कारणों से स्वयं के वर्चस्व को स्थापित करने के लिए उस संवाद को बाधित किया गया। दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही है, समाधान संवाद से संभव  सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा हमने इस युग की सबसे बड़ी महामारी कोविड को झेला है , एक पुरानी कहावत है कि कहीं आग लगी हो और व्यक्ति उससे अपने आप को निश्चिन्त पाता है तो याद रखना वो आग एक दिन आपको भी नुकसान पहुंचा सकती है दुनिया आज जिस चुनौती से जूझ रही है चाहे जलवायु परिवर्तन हो , साइबर सुरक्षा हो या फिर आतंकवाद हो  यदि कोई भी देश कोई भी समाज इन मुद्दों से आँखें बंद कर दुनिया की मानवता के सामने संकट खड़ा करता है तो यह मानकर चलें कि ये संकट उसको भी एक दिन अवश्य निगल सकता है। मानवता की समस्या के समाधान का सन्देश यहां से देन संभव है   कोविड ने बता दिया कि आज की कोई भी समस्या एक देश की समस्या  ये दुनिया की समस्या होती है इसलिए दुनिया को मिलकर ही इसके समाधान का रास्ता निकालना पड़ेगा। दुनियाभर के न्यायविद जब यहाँ एकत्रित हुए हैं तो मानवता की समस्या के समाधान का रास्ता कैसे निकले इसका वे सन्देश इस सम्मेलन से दे सकते हैं  न्याय न केवल समता का, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा का उनके स्वावलंबन का और उनके उन्नत भविष्य का आधार बनना चाहिए।

सरकार पर निर्भरता कम करें, परियोजना निर्धारित करते समय आय सृजन की संभावनाओं का भी रखें ध्यान: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन की विकास कार्ययोजना की समीक्षा की परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए रेवेन्यू शेयरिंग और पीपीपी मॉडल अपनाने पर जोर सरकार पर निर्भरता कम करें, परियोजना निर्धारित करते समय आय सृजन की संभावनाओं का भी रखें ध्यान: मुख्यमंत्री तीनों शहरों में 478 विकास परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार मेरठ में बिजली बम्बा बाईपास को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की संभावना तलाशने के निर्देश यातायात सुधार, मल्टीलेवल पार्किंग, स्मार्ट रोड और शहरी सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता कानपुर और मथुरा वृंदावन में विरासत, संस्कृति और पर्यटन आधारित विकास मॉडल लागू होगा जनहित से जुड़े कार्यों के लिए धनराशि की कमी नहीं होगी, जरूरत पड़ेगी तो अतिरिक्त बजट भी मिलेगा: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन के समग्र नगरीय विकास की कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इन नगरों का विकास केवल सड़कों और इमारतों के निर्माण तक सीमित न हो, बल्कि उनका स्वरूप ऐसा बने जिसमें स्थानीय पहचान, इतिहास, संस्कृति और आधुनिक सुविधाओं का संतुलन दिखे। उन्होंने निर्देश दिया कि योजनाएं चरणबद्ध ढंग से लागू हों, कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरे किए जाएं और नागरिकों को इसका प्रत्यक्ष लाभ दिखे। मुख्यमंत्री ने मेरठ में प्रस्तावित बिजली बम्बा बाईपास को लखनऊ ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर पीपीपी मोड में विकसित करने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तीनों मंडलों के मंडलायुक्तों ने बारी-बारी से अपनी कार्ययोजना से अवगत कराया। बताया गया कि अयोध्या, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज की तर्ज पर अब मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन के लिए भी समेकित विकास मॉडल अपनाया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों से विमर्श और विभागों के बीच समन्वय के आधार पर इन शहरों में कुल 478 परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार की गई है। इनमें मेरठ में 111, कानपुर में 109 और मथुरा-वृंदावन में 258 परियोजनाओं का विकास प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं को अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक श्रेणी में विभाजित कर स्पष्ट समयसीमा तय की गई है। बैठक में बताया गया कि पहले चरण की कार्ययोजना के रूप में वर्ष 2025-26 में मेरठ में 11, कानपुर में 13 और मथुरा-वृंदावन में 14 प्राथमिक परियोजनाओं पर कार्य किया जाए। इन परियोजनाओं में यातायात सुधार, चौराहों का पुनर्विकास, मल्टीलेवल पार्किंग, हरित क्षेत्र, सड़क और पेवमेंट सुधार, बिजली लाइनों का भूमिगतकरण, जल प्रबंधन, पर्यटन सुविधाओं का उन्नयन और शहरी सौंदर्यीकरण जैसी जरूरतों को प्राथमिकता दी गई है। बैठक में बताया गया कि मेरठ में यातायात सुगमता के लिए बिजली बम्बा बाईपास, लिंक रोड, हापुड़ अड्डा से गांधी आश्रम तक चौड़ीकरण, ईस्टर्न कचहरी रोड, सूरजकुंड चौराहा, क़य्यम नगर पार्क, 19 प्रमुख चौराहों पर जंक्शन इम्प्रूवमेंट, संजय वन, शताब्दी नगर एसटीपी से मोहकमपुर औद्योगिक क्षेत्र तक जल पुनर्चक्रण व्यवस्था, स्मार्ट रोड और यूनिवर्सिटी रोड क्षेत्रीय पुनर्विकास जैसी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। कानपुर के संबंध में बताया गया कि विकास का आधार “रूटेड इन लेगेसी, राइजिंग टू टुमॉरो” की अवधारणा होगी। मैनावती मार्ग चौड़ीकरण, मल्टीलेवल पार्किंग, मास्टर प्लान सड़कों का निर्माण, ग्रीन पार्क के आसपास शहरी डिजाइन सुधार, मकसूदाबाद सिटी फॉरेस्ट, बोटैनिकल गार्डन, वीआईपी रोड, रिवरफ्रंट लिंक, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, मेट्रो विस्तार और ग्रेटर कानपुर के रूप में नए विस्तार क्षेत्र की दृष्टि इस योजना में शामिल है। मथुरा-वृंदावन के लिए प्रस्तुत मास्टर प्लान के तहत शहर को 'विजन-2030' के रूप में विकसित करने की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए स्ट्रीट फसाड डेवलपमेंट, मल्टीलेवल पार्किंग, बस पार्किंग, प्रवेश द्वारों का सौंदर्यीकरण, नए मार्गों का निर्माण, बरसाना-गोवर्धन-राधाकुंड कॉरिडोर सुधार, परिक्रमा मार्ग पर सुविधाएं और नगर प्रवेश से धार्मिक स्थलों तक संकेतक एवं प्रकाश व्यवस्था की योजना शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के लिए नवाचार, बेहतर प्रबंधन और वित्तीय संयोजन पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर निजी क्षेत्र का सहयोग लेने और जहां संभव हो वहां पीपीपी मोड अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास का उद्देश्य ऐसा शहरी ढांचा तैयार करना है जो यातायात को सुगम बनाए, पैदल यात्रियों और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दे, हरे-भरे शहरों की दिशा में आगे बढ़े और स्थानीय पहचान को मजबूत करे। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के लिए यदि अतिरिक बजट की आवश्यकता होगी तो उसे उपलब्ध कराया जाएगा।

₹39453 लाख की परियोजनाओं से 36 हजार हेक्टेयर में पुनर्स्थापित होगी सिंचाई क्षमता

नहर व्यवस्था सुधार के लिए 95 नई परियोजनाओं को मुख्यमंत्री ने दी मंजूरी ₹39453 लाख की परियोजनाओं से 36 हजार हेक्टेयर में पुनर्स्थापित होगी सिंचाई क्षमता मुख्यमंत्री का निर्देश सभी परियोजनाएं तय समय सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूरी हों अनुपयोगी भूमि के उपयोग के लिए विभाग को कार्ययोजना बनाने के निर्देश सिंचाई सुधार कार्यक्रम से करीब 9 लाख किसानों को होगा सीधा लाभ सिंचाई एवं जल प्रबंधन और अन्नदाता किसान हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक में नहर व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से 95 नई परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं प्रदेश के कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने और किसानों को समयबद्ध सिंचाई उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। कुल ₹39453.39 लाख की लागत वाली इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर 36 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई क्षमता पुनर्स्थापित होगी, जिससे लगभग 9 लाख किसान और ग्रामीण आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। साथ ही 273 हेक्टेयर विभागीय राजकीय भूमि को संरक्षित किया जा सकेगा। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी स्वीकृत कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण हों और गुणवत्ता पर किसी भी स्थिति में समझौता न किया जाए। बैठक में बताया गया कि नहर पुनर्स्थापना से जुड़ी इन 95 परियोजनाओं में नहर प्रणाली के गैप्स में नहर निर्माण, हेड रेगुलेटर, क्रॉस रेगुलेटर, साइफन, फॉल तथा अन्य पक्की संरचनाओं का निर्माण शामिल है। नहरों के आंतरिक एवं बाह्य सेक्शन के सुधार, फिलिंग रीच में लाइनिंग के कार्य, क्षतिग्रस्त कुलाबों के पुनर्निर्माण, नहरों पर पुल-पुलियों के निर्माण एवं मरम्मत तथा नहर पटरियों पर खड़ंजा निर्माण को भी परियोजनाओं में शामिल किया गया है। निरीक्षण भवनों, कार्यालय भवनों तथा नहरों पर निर्मित पनचक्कियों के जीर्णोद्धार के साथ ही विभागीय भूमि की सुरक्षा हेतु बाउंड्रीवाल निर्माण भी प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से सिंचाई नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और विभिन्न क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुचारू होगी, विशेष रूप से पूर्वांचल, तराई, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को इनसे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल निर्माण नहीं बल्कि जल प्रबंधन की दक्षता, किसान हित, कृषि उत्पादन वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी किसान सिंचाई के अभाव में अपनी फसल प्रभावित न होने पाए।  मुख्यमंत्री ने बैठक में विभाग को अनुपयोगी पड़ी भूमि के सर्वेक्षण और उसके सदुपयोग हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय भूमि का सुविचारित उपयोग विभाग की आय संवर्द्धन में सहायक होगा।  बैठक में मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रबंधन से जुड़े कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि आगामी वर्ष की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सभी तैयारियां जनवरी माह से प्रारंभ कर दी जाएं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जनप्रतिनिधियों के मार्गदर्शन से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि समय रहते आगे की कार्यवाही सुनिश्चित हो सके।

उत्तर प्रदेश 2047 के विकास हेतु ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्रों में रणनीतिक हस्तक्षेप

इन्फ्रास्ट्रक्चरः "विकसित उत्तर प्रदेश @2047 के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप" ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्र विकसित भारत संकल्प @2047 के अनुरूप लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में "इन्फ्रास्ट्रक्चरः विकसित उत्तर प्रदेश @2047 के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप" विषय पर उच्च-स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, उ‌द्योग समूहों, नीति अनुसंधान संस्थानों, ऊर्जा विशेषज्ञों तथा वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का उ‌द्देश्य वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को स्वच्छ, विश्वसनीय, किफायती एवं टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराने हेतु दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना था, जो विकसित भारत संकल्प @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है। नीतिगत नेतृत्व द्वारा दिशा-निर्देश कार्यक्रम के प्रथम सत्र में श्री नरेन्द्र भूषण, अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) उत्तर प्रदेश ने अपने संबोधन के माध्यम से प्रदेश में ऊर्जा खपत, 24×7 निर्बाध बिजली उपलब्धता, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, विकेन्द्रीकृत ऊर्जा, ग्रिड स्थिरता, माइक्रो-ग्रिड, परमाणु, फ्लोटिंग सोलर, ग्रीन हाईड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, सर्फेस काईनेटिक्स, सस्टेनेबल ऐविएशन फ्यूल तथा भविष्य की तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों के सुझाव सुनकर उन्हें विभाग को लिखित रूप से उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया, ताकि हरित ऊर्जा के लक्ष्यों की प्राप्ति में उन्हें सम्मिलित किया जा सके। श्री आशीष गोयल, चेयरमैन, उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने अपने संबोधन में कहा कि 2047 के लिए ऊर्जा क्षेत्र के लक्ष्यों का अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि प्रौ‌द्योगिकी अत्यंत तीव्र गति से बदल रही है। इसलिए नीतियों को लचीला रखते हुए वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप क्रियान्वित करना आवश्यक है, ताकि उत्तर प्रदेश को विकसित एवं समृद्ध राज्य बनाने का संकल्प साकार किया जा सके। श्री आलोक कुमार, प्रमुख सचिव (योजना) द्वारा विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के विज़न पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि स्मार्ट पोर्टल के माध्यम से विभिन्न वर्गों-युवा, महिलाएँ, उ‌द्योग, संस्था, स्टार्टअप, एसोसिएशन, अकादमिक जगत, सरकारी/गैर-सरकारी संगठनों तथा स्वयं सहायता समूहों से प्राप्त 1 करोड़ से अधिक सुझावों का AI आधारित विश्लेषण किया जा रहा है, जिनके आधार पर क्षेत्रवार प्राथमिकताएँ निर्धारित की जा रही हैं। श्री मनोज उपाध्याय, सलाहकार (ऊर्जा), नीति आयोग ने अपने वक्तव्य मे बताया कि नीति आयोग के मार्गदर्शन के अनुरूप उत्तर प्रदेश की दीर्घकालिक ऊर्जा योजनाओं को क्रियान्वयन योग्य बनाने पर बल दिया। सभी वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश देश की ऊर्जा संक्रमण यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। राज्य ने वर्ष 2047 तक अपनी 40-50% ऊर्जा आवश्यकता नवीकरणीय स्रोतों से पूरी करने की प्रतिबद्धता दोहराई। ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा विज़न 2047 के क्रम में ऊर्जा विभाग के अन्तर्गत डिलाओएट के सहयोग से तैयार "Energy & Renewable Vision 2047" में निम्न प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए- * बड़े सौर पार्क * फ्लोटिंग सोलर * कैनाल-टॉप परियोजनाएँ * हाइब्रिड (विंड-सोलर) मॉडल * छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट * बायोमास एवं CBG आधारित बिजली उत्पादन * ऊर्जा भंडारण (Storage) प्रणालियाँ CEEW ने माँग पूर्वानुमान, स्मार्ट मीटरिंग और डिजिटल ग्रिड प्लानिंग पर सुझाव दिए। Vasudha Foundation ने जलवायु-अनुकूल राज्य-स्तरीय ऊर्जा योजनाएँ, राज्य रैंकिंग और सामुदायिक ऊर्जा शासन मॉडल पर प्रस्तुतिकरण दिया। उ‌द्योग संगठनों एवं बिज़नेस समूहों के सुझाव के क्रम मे CII, PHDCCI, IIA, SEVA सहित प्रमुख उ‌द्योग निकायों ने निम्न सुझाव प्रस्तुत किए- * बुंदेलखंड एवं पश्चिमी यूपी में सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर स्थापित किए जाएँ। * CBG एवं बायो-एनर्जी पार्क विकसित किए जाएँ। * MSMES हेतु रूफटॉप सोलर और कम-ब्याज वाले ग्रीन लोन उपलब्ध हों। * ओपन एक्सेस सुधार, सिंगल विंडो क्लियरेंस प्रणाली एवं RE पारिस्थितिकी तंत्र को गति मिले। * EV चार्जिंग, बैटरी स्टोरेज और ऊर्जा दक्षता योजनाओं को बढ़ावा दिया जाए। ऊर्जा डेवलपर्स एवं तकनीकी विशेषज्ञों का दृष्टिकोण प्रमुख RE कंपनियाँ – Avada, JSW, Adani Green * हाइब्रिड (सोलर-विंड) पार्क * मिनी-हाइड्रो क्लस्टर्स * ग्रीन बैंकिंग/रन-ऑफ-द-रिवर नीतियाँ IIT कानपुर * "State Centre for Advanced Green Hydrogen Research" की स्थापना का प्रस्ताव Intellismart, PowerXchange, Tata Power * 100% स्मार्ट मीटरिंग * डिजिटल सबस्टेशन * AI आधारित मांग पूर्वानुमान * डिजिटल ट्विन मॉडल हरित वित्तपोषण एवं निवेश रणनीतियाँ शीर्षक के अन्तर्गत PFC एवं वित्त विशेषज्ञों ने- * ग्रीन बॉन्ड * ESG-लिंक्ड लोन * ब्लेंडेड फाइनेंस * VGF मॉडल अपनाने का सुझाव दिया, जिससे सौर पार्क, स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन एवं माइक्रो-ग्रिड परियोजनाओं को गति मिल सके। * UP Renewable Marketplace Portal बनाने का विचार भी रखा गया। विकेन्द्रीकृत ऊर्जा एवं ग्रामीण सशक्तिकरण के अन्तर्गत Tata Power Renewable Microgrid विषयक ग्रामीण क्षेत्रों में सौर-आधारित माइक्रो-ग्रिड द्वारा निम्न मॉडल प्रस्तुत किए- * कोल्ड स्टोरेज * फूड प्रोसेसिंग * ई-रिक्शा चार्जिंग * डिजिटल शिक्षा केंद्र Shakti Foundation ने कृषि, ग्रामीण उ‌द्योगों और स्वच्छ रसोई तकनीकों को ऊर्जा-कुशल बनाने पर बल दिया। उ‌द्योग समूहों ने "Urja Surakshit Gram" अभियान को राज्यव्यापी रूप से लागू करने का प्रस्ताव रखा। कार्यशाला का समापन इस दृढ़ संकल्प के साथ हुआ कि वर्ष 2030-2040-2047 के ऊर्जा रोडमैप को उ‌द्योग, शोध संस्थानों और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से लागू किया जाएगा। उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2047 तक भारत का अग्रणी हरित ऊर्जा राज्य बनने की प्रतिबद्धता दोहराई, जो विकसित भारत संकल्प @2047 के अनुरूप है।

अपराध करने वालों को चुकानी ही होगी कीमत : सीएम योगी

अपराध कतई स्वीकार नहीं करता नया यूपी : मुख्यमंत्री अपराध करने वालों को चुकानी ही होगी कीमत : सीएम योगी बी से ए क्लास में उच्चीकृत हुई गोरखपुर स्थित क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला 72.78 करोड़ रुपये की परियोजना का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण मॉडर्न पुलिस के लिए गेम चेंजर बनेगी फॉरेंसिक साइंस लैब – मुख्यमंत्री आठ वर्षों में की 2.19 लाख पुलिस कार्मिकों की भर्ती- मुख्यमंत्री 2017 से पहले महज 4 फॉरेंसिक लैब थे अब 12 हैं और 6 छह लैब निर्माणाधीन – सीएम गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के बाद का नया उत्तर प्रदेश अपराध को कतई स्वीकार नहीं करता है। यदि किसी ने यहां अपराध करने की जुर्रत की तो उसे हर हाल में उसकी कीमत भी चुकानी होगी। वह दौर खत्म हो गया जब पीड़ित तड़पता, भटकता था और अपराधी मौज-मस्ती करते थे। अब प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत साक्ष्य संकलन और फॉरेंसिक साइंस लैब्स (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) के जरिए इसके प्रमाणन की ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित कर दी है कि कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति, वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच और आधुनिक फॉरेंसिक साइंस लैब्स के जरिए ऐसी व्यवस्था विकसित हुई है कि अपराधी अब बच नहीं सकते। सटीक, त्वरित और पारदर्शी जांच के कारण पीड़ित को सहज, सुगम और समयबद्ध न्याय उपलब्ध हो रहा है। सीएम योगी मंगलवार को बी से ए क्लास में उच्चीकृत क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (आरएफएसएल) गोरखपुर के नवीन उच्चीकृत भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। छह मंजिला हाईटेक नवीन भवन के निर्माण पर 72.78 करोड़ रुपये की लागत आई है। उच्चीकृत आरएफएसएल का फीता काटकर उद्घाटन करने और यहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने फॉरेंसिक जांच की अत्याधुनिक सौगात के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश की जनता को बधाई देते हुए कहा कि आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सिर्फ चार फॉरेंसिक साइंस लैब थे। सरकार बनने के बाद यह तय किया गया कि कम से कम हर कमिश्नरी में एक फॉरेंसिक साइंस लैब होनी चाहिए। इससे आठ वर्षों में इनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है। छह लैब निर्माणाधीन हैं। जल्द ही सभी कमिश्नरी में फॉरेंसिक साइंस लैब होंगे। इन लैब्स में हर प्रकार की फॉरेंसिक जांच होगी जो साक्ष्य को प्रमाणित कर अपराधियों को कठोर दंड दिलाने का आधार बनेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि कमिश्नरी स्तर पर फॉरेंसिक साइंस लैब स्थापित करने के साथ सरकार ने हर जिले में फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन के लिए दो-दो मोबाइल वैन उपलब्ध कराए हैं। इससे कुछ ही घंटों में पुख्ता साक्ष्य संकलन हो जा रहा है और लैब में उसकी जांच के बाद पीड़ित को सहज और सुगम न्याय मिल जाएगी। अब कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले साक्ष्य इकट्ठे होने पर भी अच्छी फॉरेंसिक साइंस लैब के अभाव में अपराधी बच जाते थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गत वर्ष जुलाई से तीन नए कानून (भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य संहिता 2023) लागू होने के बाद फॉरेंसिक साइंस लैब्स की उपयोगिता और बढ़ गई है। नए कानून में सात वर्ष से अधिक कारावास वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य कर दिया है। इन कानूनों के लागू होने से काफी पहले ही यूपी सरकार ने लैब्स स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी थी। फॉरेंसिक साइंस लैब्स से रोजगार का सृजन भी होगा सीएम योगी ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लैब्स से युवाओं के लिए नए रोजगार का सृजन भी होगा। इसके लिए सरकार ने लखनऊ में यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की स्थापना की है। यहां लैब टेक्नीशियन के लिए सर्टिफिकेट, लैब में साक्ष्य मिलान करने वालों के लिए डिप्लोमा और विशेषज्ञ के लिए डिग्री कोर्स शुरू किए गए हैं। फॉरेंसिक साइंस लैब्स नए समय में नए अपराधों को रोकने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराने के प्रयासों का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में एडवांस डीएनए डायग्नोस्टिक, एआई, ड्रोन, रोबोटिक लैब उपलब्ध है। यहां नैनो से लेकर 40 किलो वजनी ड्रोन संचालित किए जा सकते हैं। मॉडर्न पुलिस के लिए गेम चेंजर बनेगी फॉरेंसिक साइंस लैब सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर में अपग्रेडेड फॉरेंसिक साइंस लैब में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी जो सटीक जांच करेंगी। यह लैब मॉडर्न पुलिस के लिए गेम चेंजर साबित होगी। त्वरित और पुख्ता जांच होने से लोगों को समय से सुसंगत न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लैब अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का ही हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर की यह उच्चीकृत लैब उन चुनिंदा संस्थानों में शामिल होगी जहां बैलेस्टिक, नार्कोटिक्स, सेरोलॉजी, साइबर फॉरेंसिक, डीएनए प्रोफाइलिंग, डाक्यूमेंट विश्लेषण से लेकर सभी उन्नत फॉरेंसिक परीक्षण संभव होंगे। ऐसी क्षमता से पुलिस के कार्य में गति, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य साइबर फॉरेंसिक को वैश्विक मानक तक पहुंचाना है ताकि भविष्य में होने वाले हाईटेक अपराधों पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। आठ वर्षों में की 2.19 लाख पुलिस कार्मिकों की भर्ती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रूल ऑफ लॉ को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इसे लागू करने प्रयासों के तहत आठ सालों में प्रदेश में 2 लाख 19 हजार पुलिस कार्मिकों की भर्ती की गई है। इसमें 60244 कार्मिकों की भर्ती हाल ही में संपन्न हुई है। उन्होंने कहा कि आठ वर्षों में यूपी में जितनी पुलिस भर्ती हुई है, उतनी कई राज्यों की कुल पुलिस फोर्स नहीं है। सीएम ने भर्ती के साथ ट्रेनिंग क्षमता विस्तार का भी उल्लेख किया। कहा कि 2017 में पुलिस ट्रेनिंग की कुल क्षमता 6000 की थी। तब 30000 भर्ती होने पर किराए पर ट्रेनिंग सेंटर लेने पड़े थे। आज प्रदेश में पुलिस ट्रेनिंग की क्षमता दस गुने से अधिक बढ़ चुकी है। अभी जितनी भर्ती हुई, सबको ट्रेनिंग राज्य के ही सेंटर्स से मिल रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस महकमे में सरकार कार्य के अनुरूप सुविधाओं का विस्तार कर रही … Read more

मुख्यमंत्री योगी ने भरा एसआईआर फॉर्म, नागरिकों को जागरूक रहने की दी प्रेरणा

मुख्यमंत्री योगी ने भरा एसआईआर प्रक्रिया का फॉर्म, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक होने की दी प्रेरणा मतदाता सूची अद्यतन अभियान बना जागरूकता और सहभागिता का माध्यम  SIR 28 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 7 फरवरी 2026 तक गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिक जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक चेतना का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर के बैठक कक्ष में मतदाता सूची के एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का फॉर्म भरकर इसे पूर्ण किया। मुख्यमंत्री गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र के झूलेलाल मंदिर के पास स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय मतदान केंद्र के बूथ संख्या 223 में पंजीकृत मतदाता हैं। बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से, SIR 28 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 7 फरवरी 2026 तक चलाया जाएगा। उत्तर प्रदेश सहित देश के 12 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस प्रक्रिया में शामिल हैं। इसी क्रम में मंगलवार को गोरखपुर में बीएलओ गोरखनाथ मंदिर पहुंचे और मुख्यमंत्री को एसआईआर फॉर्म उपलब्ध कराया, जिसे मुख्यमंत्री ने भरकर उन्हें सौंप दिया।  SIR मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने और साथ ही संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मतदाता अधिकारों के सही से इस्तेमाल के लिए कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं इस प्रक्रिया में शामिल होना यह संदेश देता है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है। ऐसी पहल मतदाता जागरूकता को मजबूती देती है और लोकतंत्र को और अधिक सहभागी बनाती है। इस अवसर पर जिलाधिकारी दीपक मीणा, तहसीलदार सदर ज्ञान प्रताप सिंह, भाजपा महानगर संयोजक राजेश गुप्ता, नगर निगम बोर्ड के उपसभापति एवं पार्षद पवन त्रिपाठी तथा जीडीए बोर्ड सदस्य दुर्गेश बजाज उपस्थित रहे।

पीड़ितों की सहायता में लापरवाही पर होगी कार्रवाई : मुख्यमंत्री

पुलिस से जुड़े मामलों में करें सख्त कार्रवाई : मुख्यमंत्री पीड़ितों की सहायता में लापरवाही पर होगी कार्रवाई : मुख्यमंत्री जनता दर्शन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 300 लोगों की समस्याएं गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दो टूक हिदायत दी है कि पुलिस से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। पीड़ितों की मदद में विलंब और लापरवाही कतई नहीं होनी चाहिए। जनता की समस्याओं के समाधान में  किसी तरह की लापरवाही हुई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी तय है। किसी पीड़ित की समस्या के समाधान में अगर कहीं भी कोई दिक्कत आ रही है तो उसका पता लगाकर निराकरण कराया जाए और किसी स्तर पर जानबूझकर कर प्रकरण को लंबित रखा गया है तो संबंधित की जवाबदेही तय की जाए।  मुख्यमंत्री ने यह निर्देश मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनता जनता दर्शन के दौरान लोगों की समस्याएं सुनने के दौरान दिए। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 300 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सीएम योगी ने सभी को आश्वस्त किया कि किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। हर समस्या का वह प्रभावी निस्तारण कराएंगे। इसे लेकर उन्होंने प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों को मौके पर ही दो टूक समझाया कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करें। कुछ प्रकरणों पर उन्होंने अफसरों को निर्देशित किया कि यह भी पता लगाएं कि यदि किसी को प्रशासन का सहयोग नहीं मिला है तो ऐसा क्यों और किन कारणों से हुआ। हर पीड़ित की त्वरित मदद की जाए। उन्होंने जमीन कब्जाने की शिकायतों पर विधि सम्मत कठोर कदम उठाने का निर्देश दिया।  हर बार की तरह इस बार भी जनता दर्शन में कुछ लोग इलाज में आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। इस पर सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि जल्द से जल्द अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया पूर्ण कराकर शासन को उपलब्ध करा दें। इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त मदद की जाएगी। जनता दर्शन में परिजनों के साथ आए बच्चों को प्यार-दुलारकर सीएम योगी ने उन्हें चॉकलेट दिया।  सीएम ने की गोसेवा, मोर को भी दुलारा गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से गुड़-रोटी खिलाया। गोशाला में सीएम योगी के पहुंचने पर प्रायः एक मोर भी उनके पास आ जाता है। मुख्यमंत्री ने उसे भी दुलारा और अपने हाथों से रोटी खिलाया।

मुख्यमंत्री योगी देंगे आधुनिक क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला की सौगात

सीएम योगी देंगे उच्चीकृत क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला की सौगात 72.78 करोड़ रुपये की परियोजना का मंगलवार को लोकार्पण करेंगे मुख्यमंत्री गोरखपुर  पुलिसिंग को अत्याधुनिक बनाने में जुटे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर को उच्चीकृत क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला की सौगात देंगे। वह मंगलवार (18 नवंबर) को गोरखपुर में शास्त्री चौक के समीप, जिला अस्पताल रोड पर 72.78 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला के नवीन उच्चीकृत भवन का लोकार्पण करेंगे। अब यह प्रयोगशाला बी श्रेणी से अपग्रेड होकर ए श्रेणी की हो गई है। लोकार्पण का समारोह पूर्वाह्न 11 बजे से होगा।  गोरखपुर में स्थापित क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला के भवन को उच्चीकृत कर छह मंजिला बनाया गया है। इसके साथ ही अब यहां फोरेंसिक जांच सुविधाओं का विस्तार हो जाएगा। उच्चीकृत लैब की बिल्डिंग में लैपटॉप, मोबाइल, सीसीटीवी के डाटा स्टोरेज की रिकवरी के साथ आवाज संबंधी फोरेंसिक जांच भी होगी। आग्नेय अस्त्र और विस्फोटक पदार्थों की जांच की भी मॉडर्न सुविधा उपलब्ध होगी। गृह विभाग के इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम ने कराया है।

पर्यटक आकाशवाणी के जरिए धर्म, आध्यात्म और संस्कृति से होगें अवगत

योगी सरकार की पहल से काशी में मंदिर मार्ग पर गुंजेगी ऊं नम: शिवाय की ध्वनियां पर्यटक आकाशवाणी के जरिए धर्म, आध्यात्म और संस्कृति से होगें अवगत आकाशवाणी के जरिये वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान होगी मंदिर की गलियां कालभैरव मंदिर के मार्ग पर ॐ तथा ॐ नमः शिवाय की ध्वनि पहले से गूंज रही है  वाराणसी    काशी में आने वाले पर्यटक आकाशवाणी के माध्यम से यहाँ के धर्म, अध्यात्म, संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व की जानकारियां सुन सकेंगे। योगी सरकार द्वारा इस योजना के तहत, काल भैरव मंदिर चौराहा से मैदागिन चौराहा और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से होते हुए गोदौलिया चौराहा से दशाश्वमेध घाट तक एक विशेष ऑडियो सिस्टम स्थापित किए जाने की योजना है।  मंदिर मार्ग पर गुंजेगी ऊं नम: शिवाय की ध्वनियां इस प्रणाली के माध्यम से अनवरत मंत्रोच्चारण, धार्मिक ध्वनियाँ एवं काशी से सम्बन्धित जानकारियाँ प्रसारित की जाएंगी। जबकि काल भैरव मंदिर के मार्ग पर ॐ तथा ॐ नमः शिवाय की ध्वनि गूंज रही है। यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं को एक आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कराएगी बल्कि काशी की प्राचीन परंपराओं को भी आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत बनाए रखने का कार्य करेगी। वाराणसी शहर के 18 चिन्हित स्थानों के सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव काशी में उत्तरवाहिनी गंगा के किनारे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रधान ज्योतिर्लिंग श्री काशी विश्वनाथ विराजमान है। शिव की त्रिशूल पर बसी काशी का कण-कण पौराणिक कथा से जुड़ा हैं, अब काशी की प्रमुख कथा व जानकारियां ऑडियो सिस्टम से प्रसारित की जाएगी। वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित एक्शन प्लान फॉर काशी एण्ड सारनाथ के अंतर्गत वाराणसी शहर के 18 चिन्हित स्थानों के सौंदर्यीकरण एवं सार्वजनिक अनुभव को बेहतर करने के लिए कई कार्य प्रस्तावित हैं। इसमें से एक काल भैरव मंदिर चौराहा से मैदागिन चौराहा, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर गेट सं-4 वाया गोदौलिया चौराहा, दशाश्वमेध घाट तक स्थापित होना है। सुबह 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक होगा मंत्रोच्चार सुबह 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक ॐ एवं  नमः शिवाय ध्वनि, मंत्रोच्चारण, धार्मिक ध्वनियां एवं काशी से सम्बन्धित जानकारियाँ प्रसारित की जाएँगी। वीडीए के अपर सचिव डॉ गुडाकेश शर्मा ने बताया कि काल भैरव चौराहे से मंदिर जाने के मार्ग तक ऑडियो सिस्टम लग चुका है, इसमें 3 बार ॐ की ध्वनि और 1 बार ॐ नमः शिवाय बजता है। इस योजना का उद्देश्य पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को काशी के प्रमुख मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों की जानकारी देना जिससे उन्हें शहर की धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व को समझने में सहायता मिले सके। स्थानीय नागरिकों एवं आगंतुकों को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कराना है। मंत्रोच्चारण एवं धार्मिक ध्वनियों के माध्यम से क्षेत्रीय वातावरण को विशिष्ट धार्मिक स्वरूप देना, जो काशी की प्राचीन परम्पराओं एवं मान्यताओं को संजोए रखे।