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मुख्यमंत्री योगी बोले—हर प्रोजेक्ट के लिए नियुक्त हों नोडल अधिकारी

हर प्रोजेक्ट के लिए तय हों नोडल अधिकारी : मुख्यमंत्री योगी अधिकारियों के साथ बैठक में सीएम योगी ने दिए निर्देश एक निश्चित अवधि पर प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग की रिपोर्ट ली जाए – योगी आदित्यनाथ  गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि हर प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल अधिकारी तय करते हुए उनसे मॉनिटरिंग की साप्ताहिक या पाक्षिक रिपोर्ट ली जाए। हर परियोजना की एक समय सीमा तय होती है और कार्य में तेजी लाते हुए उसे उसी अवधि में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की जो परियोजनाएं अगले साल मानसून के बाद पूरी होनी हैं, उनके कार्यों में और तेजी लाकर मानसून से पहले ही पूरा करने के विशेष प्रयास किए जाएं। गोरखपुर दौरे पर आए सीएम योगी गोरखनाथ मंदिर के बैठक कक्ष में अधिकारियों के साथ गोरखपुर में गतिमान परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके और गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए एक नोडल अधिकारी को पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी जाए। नोडल अधिकारी एक निश्चित अवधि पर प्रगति की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को उपलब्ध कराए। वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस पर पूरा ध्यान देना होगा। उन्होंने नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की हिदायत भी अफसरों को दी।   कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति बरकरार रहनी चाहिए। उन्होंने ठंड की दस्तक होने के साथ ही पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए। ट्रैफिक प्रबंधन को और सुदृढ़ करने पर जोर देते हुए सीएम योगी ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सड़कों पर जाम न लगने पाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की संभल जनपद के विकास कार्यों की समीक्षा

चरणबद्ध तरीके से करें संभल का विकासः मुख्यमंत्री   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की संभल जनपद के विकास कार्यों की समीक्षा  पहले चरण में प्राचीन तीर्थों व कूपों का करें पुनरुद्धारः मुख्यमंत्री  दूसरे चरण में म्यूजियम, लाइट एंड साउंड आदि कार्यों पर रखें फोकस मुख्यमंत्री जी का महिष्मती नदी के पुनरुद्धार पर रहा जोर  संभल का विकास सरकार की प्राथमिकताः मुख्यमंत्री  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को जनपद संभल की समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने यहां चल रहे विकास कार्यों के बारे में जाना। मुख्यमंत्री जी ने कानून व्यवस्था की भी समीक्षा की। फिर शासन व जनपद के अधिकारियों को निर्देशित किया कि चरणबद्ध तरीके से संभल का विकास करें। संभल का विकास सरकार की प्राथमिकता है।  पहले चरण में प्राचीन तीर्थों व कूपों का पुनरुद्धार कराएं। दूसरे चरण में म्यूजियम व लाइट एंड साउंड आदि विकास कार्यों पर फोकस रखें। मुख्यमंत्री जी ने संभल में जनपद न्यायालय, कारागार व पीएसी के निर्माण की प्रक्रिया पर जल्द कार्रवाई के लिए भी कहा। मुख्यमंत्री जी ने राजस्व, गृह, न्याय, धर्मार्थ कार्य, लोक निर्माण, पर्यटन-संस्कृति, नगर विकास समेत कई विभागों के कार्यों की समीक्षा की।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि संभल में 68 तीर्थ व 19 कूप हैं। प्रदेश सरकार इन तीर्थों के जीर्णोद्धार व पहचान के लिए कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री जी ने स्थानीय प्रशासन को इन कार्यों को तेज गति से कराने का निर्देश दिया।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इंटीग्रेटेड कॉम्पलेक्स भवन में सभी विभागों का कार्यालय हो। मुख्यमंत्री जी को बताया गया कि आवासीय व अनावासीय भवन के लिए 93 फीसदी भूमि क्रय कर ली गई है। मुख्यमंत्री जी ने डीपीआर बनाने के साथ कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री जी ने जनपद न्यायालय, कारागार व पीएसी की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई में भी तेजी लाने के निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिया कि 24 कोसीय परिक्रमा के साथ ही महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों के समीप भूमि अधिग्रहण, सड़क निर्माण व सार्वजनिक सुविधाएं बढ़ाई जाएं।  मुख्यमंत्री जी ने महिष्मती नदी के पुनरुद्धार कार्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नदियां जीवनदायिनी है। सरकार नदियों के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। नमामि गंगे के अंतर्गत प्रोजेक्ट तैयार कराकर पुनरुद्धार कार्य में तेजी लाई जाए।  मुख्यमंत्री ने जी नगर विकास विभाग की वंदन योजना, मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना, अंत्येष्टि स्थल विकास योजना, नगरीय जल विकास योजना, झील/पोखर/तालाब योजना व पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर विकास योजना के तहत होने वाले कार्यों की प्रगति के बारे में जाना और निर्देश दिया कि इन कार्यों को शीघ्रता से पूरा करें।  मुख्यमंत्री जी ने सीबीजी प्लांट के निर्माण की कार्रवाई में भी तेजी लाने के निर्देश दिए।

प्रदेश स्तर पर 37 इंडिकेटर पर आधारित रैंकिंग रिपोर्ट का होता है निर्माण 

आजीविका मिशन में वाराणसी फिर प्रदेश में अव्वल, 6 माह में 4 बार प्रथम और दो बार टॉप-10 में रही काशी  प्रदेश स्तर पर 37 इंडिकेटर पर आधारित रैंकिंग रिपोर्ट का होता है निर्माण  घरों की दहलीज से निकल कर काशी की महिलाएं परिवार की आय बढ़ाने के साथ ही ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को दे रहीं रफ्तार एनआरएलएम से 11879 समूहों की एक लाख अड़तीस हजार से अधिक महिलाएं है जुड़ीं  महिलाओं को समूह से जोड़ने, रिवाल्विंग फण्ड देने,आजीविका से जोड़ने का डबल इंजन सरकार ने किया मार्ग प्रशस्त बैंक सखी व उद्यम सखी के चयन, बैंक से ऋण दिलाने व व्यक्तिगत, आंतरिक ऋण दिलाने की दिशा में भी किया जा रहा उत्कृष्ट कार्य  वाराणसी  काशी की महिलाएं घरों की दहलीज से निकल कर अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ ही ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को रफ्तार देते हुए उत्तर प्रदेश में अव्व्वल हो गई हैं। दीनदयाल अन्त्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत वाराणसी एक बार फिर से प्रदेश में योजनाओं  को लागू करने एवं महिलाओं को आगे बढ़ाने में अव्वल है। प्रदेश की अक्टूबर 2025 की रैंकिंग में वाराणसी शीर्ष पर है, जबकि पिछले 6 महीनों में वाराणसी 4 बार शीर्ष पर रहा और दो बार टॉप टेन में स्थान बना चुका है।  37 इंडीकेटर्स के आधार रिपोर्ट होती है तैयार मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह ने बताया कि दीनदयाल अन्त्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत वाराणसी एक बार फिर से प्रदेश में योजना को लागू करने में प्रदेश में अक्टूबर-2025 के रैंकिंग में प्रथम स्थान पर है। रैंकिंग के लिए प्रदेश स्तर पर 37 इंडिकेटर पर रिपोर्ट तैयार की जाती है। पिछले 6 महीने से वाराणसी शीर्ष-4 बार प्रथम रहा है। वाराणसी  में वार्षिक कार्ययोजना के सापेक्ष महिलाओं को समूह से जोड़ने, रिवाल्विंग फण्ड देने, आजीविका से जोड़ने, उत्पादक समूह गठन करने, बैंक सखी व उद्यम सखी के चयन, समूहों को बैंक से ऋण उपलब्ध कराने, ग्राम संगठन की प्रोफाइल व व्यक्तिगत आंतरिक ऋण दिलाने में उत्कृष्ट कार्य किया गया है।    आजीविकापरक गतिविधियों से जुड़कर आय बढ़ाने में मिली मदद  उपायुक्त (स्वत: रोजगार) वाराणसी पवन कुमार सिंह ने बताया कि वाराणसी में 11879 समूहों में एक लाख अड़तीस हजार से अधिक महिलाएं जुड़ीं हैं, जो विभिन्न प्रकार आजीविका परक गतिविधियों जैसे  कृषि, पशुपालन, सब्जी की खेती, फूलों की खेती, ग्रोसरी, बीसी सखी, विद्युत् सखी, टेक होम राशन प्लांट, दोना पत्तल, ब्यूटी पार्लर, सिलाई कढ़ाई, सिल्क साड़ी, चार मुरब्बा, काशी प्रेरणा कैफे, जूट बैग, ड्रोन सखी आदि से जुड़कर अपनी व अपने परिवार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।  रोजगार से जोड़ने के हो रहे हैं नवीन प्रयास योगी सरकार द्वारा लगातार  महिलाओं द्वारा उत्पादित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने हेतु सरस मेला और अन्य विभागीय मेलों में प्रतिभाग करना ,आन लाइन बाजार से जोड़ना, काशी प्रेरणा मार्ट खोला जा रहा है। जनपद में आजीविका मिशन, जिला प्रसाशन के सहयोग से महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के नवीन प्रयास हो रहे हैं। जनपद में महिलाओं को बीमा सखी बनाने, सीएसआर फण्ड से महिलाओं को आजीविका से जोड़ने, मधु मक्खी पालन, मखाना की खेती, बकरी पालन आदि से जोड़ने के लिए मुहिम चलायी जा रही है।  एकता संकुल समिति विकासखण्ड आराजीलाइन की वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षक अंजू देवी बताती हैं कि योगी सरकार ने आय और सम्मान दोनों दिलाया है। समूह से जुड़ कर महिलाएं दो से तीन रोजगार कर रही हैं तथा महिलाएं अपनी पहचान बना रही हैं। जो महिलाएं बैंक जाने से घबराती थीं, अब वे सुगमता से बैंकिंग सेवाओं का लाभ ले रही हैं।  विकासखण्ड चिरईगांव की अचार और मुरब्बा बनाने वाली महिला शक्ति स्वयं सहायता समूह की अमृता देवी बताती हैं ,डबल इंजन सरकार और सीएम योगी ने महिलाओं का जीवन बदल दिया है। महिलाओं में हुनर था लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से काम नहीं कर पाती थी। सरकार की योजना ने महिलाओं की प्रतिभा को निखारा दिया है।

घर का चूल्हा-चौका कर जिंदगी काटने वाली प्रयागराज की मनीषा ने बदल दी दर्जनों ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी

ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को सशक्त और आत्म निर्भर बना रही योगी सरकार, जिले में 324 बिजली सखियों की बदल गई जिंदगी घर का चूल्हा-चौका कर जिंदगी काटने वाली प्रयागराज की मनीषा ने बदल दी दर्जनों ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मदद से बिजली सखी बन मनीषा बनी लखपति प्रयागराज में बिजली सखियों ने इस साल अक्टूबर तक बिजली विभाग को दिलाया 12 करोड़ का राजस्व प्रयागराज उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बना रही है । राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित किए गए स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बना रहे हैं । प्रयागराज में घरेलू काम काज देखने वाली सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी इस मिशन ने बदल दी है। मनीषा साहू बन गई ग्रामीण महिलाओं की आइकन कभी घर का चूल्हा कर अपना परिवार चलाने वाली मनीषा साहू आज गांव में आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। प्रयागराज के इस्माइलपुर में रहने वाली मनीषा साहू के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह अपने बच्चों को स्कूल में दाखिला करा पाती। पति असाध्य रोग से पीड़ित थे ऐसे में तीन बच्चों को पढ़ाने के लिए उसने उन्हें अपने मायके भेज दिया जहां उनके पिता ने उन्हें स्कूल में दाखिला दिलाया। मनीषा ने 2020 में मां गंगा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी नई राह बनाई। मनीषा ने बिजली सखी के रूप में कार्य करना शुरू किया । मनीषा बताती है कि सुबह सुबह एक टूटी फूटी साइकिल से गांव गांव लोगों के बिजली के बिल जमा करने और उनका बिल लेने निकल जाती । शुरुआती दिनों में इस कार्य की कमीशन से उसे जो आमदनी होती थी उससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था। लेकिन अब वह बिजली सखी के रूप में हर महीने 20 हजार से अधिक कमा लेती । मनीषा ने इसी पैसे से एक स्कूटी खरीद ली है। गांव की दो दर्जन से अधिक महिलाओं को भी मनीषा ने इससे जोड़ लिया है और उन महिलाओं की जिंदगी भी अब बदल गई है।  आत्म निर्भरता की मिसाल बनी जिले की 234 बिजली सखी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की प्राथमिकता महिलाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने की रही है। सरकार ने इसके लिए महिला स्वयं सहायता समूह गठित किए जिसके माध्यम से महिलाओं को स्वयं सक्षम बनने में मदद मिल रही है। प्रयागराज के उपायुक्त एनएलआरएम अशोक कुमार गुप्ता बताते हैं कि ग्रामीण महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के अभियान में इन्हें नई जिम्मेदारी दी जा रही है। जनपद में महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 820 महिलाओं को विद्युत सखी के रूप में गांव में बिजली के बिल जमा करने और उपभोक्ताओं को बिजली विभाग की तरफ से चलाई गई योजनाओं की जानकारी देने  जिम्मेदारी दी गई है । इसमें 324 बिजली सखी इस समय सक्रिय हैं। इसमें भी मां गंगा महिला स्वयं सहायता समूह अग्रणी है। समूह की अध्यक्ष मनीषा साहू ने इस साल नवंबर के पहले हफ्ते तक इससे बिजली विभाग को 12 करोड़ से अधिक के बिजली बिल जमा कराए हैं। अनुमान है कि इस वित्तीय वर्ष उनका राजस्व 22 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगा।

वृद्धावस्था पेंशन के लिए वृद्ध जनों को योगी सरकार ने दी सहूलियत, पेंशन के लिए अलग से नहीं करना होगा आवेदन

वृद्धजनों का संबल और  बुढ़ापे की लाठी बन रही है योगी सरकार वृद्धावस्था पेंशन के लिए वृद्ध जनों को योगी सरकार ने दी सहूलियत, पेंशन के लिए अलग से नहीं करना होगा आवेदन इंद्राणी और लाल मणि के चेहरों पर आई मुस्कान, पेंशन के लिए नहीं लगाने होंगे दफ्तर के चक्कर प्रयागराज जिले में 1.63 लाख से अधिक बुजुर्गों को जारी हुई पेंशन, मंडल में 5 लाख से अधिक बुजुर्गों को मिलेगी राहत प्रयागराज उत्तर प्रदेश के बेसहारा, बुजुर्गों और दिव्यांगों के कल्याण के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ वक्त पर उन तक  पहुंचाना योगी सरकार की प्राथमिकता है । बुजुर्गों के लिए चलाई जा रही वृद्धावस्था पेंशन योजना के आवेदन से जुड़ी प्रक्रिया के सरलीकरण के लिए सरकार ने एक और कदम उठाया है । अब पात्र लाभार्थी को बिना आवेदन किए पेंशन मिलेगी।  इंद्राणी और लाल मणि के चेहरे पर आई मुस्कान, पेंशन के लिए दफ्तर के नहीं काटने होंगे चक्कर योगी सरकार की कैबिनेट के एक फैसले से वृद्धावस्था पेंशन पा रहे बुजुर्गों के चेहरे खिल गए हैं। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने राज्य में वृद्धावस्था पेंशन को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है। अब पात्र वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। फतेहपुर के खानपुर में रहने वाली 71 साल की इंद्राणी को हर महीने पेंशन की औचारिकताएं पूरी करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। गठिया की बीमारी से पीड़ित इंद्राणी को इसके लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लेकिन सरकार के एक फैसले ने उनकी यह झंझट दूर कर दी है। इंद्राणी की तरह ही प्रयागराज के कोरांव की रहने वाले 76 साल के लाल मणि नि:संतान होने की वजह से अपनी वृद्धावस्था पेंशन लेने के लिए सरकारी दफ्तरों में नहीं पहुंच पाते थे। लाल मणि को योगी सरकार के इस नए आदेश ने बड़ी राहत दी है।   प्रयागराज में 1.63 लाख से अधिक बुजुर्गों तक पहुंचा योजना का लाभ  बेसहारा बुजुर्गों के लिए सरकार की वृद्घावस्था पेंशन योजना बुढ़ापे की लाठी साबित हो रही है। प्रयागराज में इसका सतत विस्तार हो रहा है। जिला समाज कल्याण अधिकारी राम शंकर पटेल बताते हैं कि सरकार की मंशा के अनुरूप जिले में मौजूदा वित्तीय वर्ष की दूसरी किश्त में 1,63,968 बुजुर्गों को इसका लाभ मिला है। उनका कहना है कि पिछली वित्तीय वर्ष के बाद नए लाभार्थियों को शामिल करने और मृतक लाभार्थियों की स्क्रीनिंग के बाद 4100 लाभार्थियों को सूची से हटाया गया है। योजना का दायरा बढ़ता जा रहा है और हर साल इसका लाभ पाने वाले पात्र सीनियर सिटीजन की संख्या भी बढ़ती जा रही है।  अप्रैल , मई और जून महीने की किश्त एक साथ बुजुर्गों को दी गई थी जिसमें लाभार्थियों की संख्या 1.63 लाख आई थी।  प्रयागराज मंडल में भी इस योजना का तेजी से विस्तार हुआ है । उत्तर प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष के प्रथम क्वार्टर में 67,50,000 लोगों को यह पेंशन जारी की गई । इधर प्रयागराज मंडल में इस वित्तीय वर्ष के प्रथम क्वार्टर में वृद्धावस्था पेंशन पाने वाले बुजुर्गों की संख्या 5,06,375 पहुंच चुकी हैं।

प्रदेश में अब चैनमैन भी बन सकेंगे लेखपाल, नई नियमावली को मंजूरी

वृद्धावस्था पेंशन के लिए लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं, विभाग खुद करेगा सम्पर्क फैमिली आईडी ‘एक परिवार-एक पहचान’ प्रणाली से पात्र लाभार्थियों का होगा स्वतः चिन्हीकरण 10 वर्ष तक के किरायेदारी पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में बड़ी राहत बागपत में पीपीपी मोड पर बनेगा मेडिकल कॉलेज, निःशुल्क मिलेगी 5.07 हेक्टेयर भूमि अब चैनमैन भी बन सकेंगे लेखपाल, नई नियमावली को मंजूरी  प्रदेश दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान कानून में बड़ा संशोधन, अब पूरे प्रदेश में लागू होगा अधिनियम लखनऊ उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने राज्य में वृद्धावस्था पेंशन को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है। अब पात्र वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि फैमिली आईडी ‘एक परिवार-एक पहचान’ प्रणाली से पात्र लाभार्थियों का स्वतः चिन्हीकरण होगा और उनकी सहमति मिलने पर पेंशन सीधे स्वीकृत की जाएगी। वर्तमान में 67.50 लाख वरिष्ठ नागरिक इस योजना का लाभ ले रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो प्रक्रिया पूरी न कर पाने के कारण पेंशन से बाहर रह जाते हैं। नया फैसला इसी समस्या को हल करने पर केंद्रित है। नई व्यवस्था में फैमिली आईडी के आधार पर उन नागरिकों की सूची स्वतः तैयार होगी, जिनकी आयु अगले 90 दिनों में 60 वर्ष होने जा रही है। यह सूची एपीआई के माध्यम से समाज कल्याण विभाग के पेंशन पोर्टल पर भेजी जाएगी। विभाग सबसे पहले एसएमएस, व्हाट्सऐप और फोन कॉल जैसे डिजिटल माध्यमों से पात्र नागरिकों से सहमति लेगा। जिनकी सहमति डिजिटल रूप से नहीं मिलेगी, उनसे ग्राम पंचायत सहायक, कॉमन सर्विस सेंटर या विभागीय कर्मचारी भौतिक रूप से संपर्क करेंगे। दोनों स्तरों पर सहमति न मिलने पर ऐसे नाम प्रक्रिया से हटा दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सहमति मिलने के बाद योजना अधिकारी 15 दिनों के भीतर डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से पेंशन स्वीकृत करेंगे और स्वीकृति पत्र लाभार्थी को डाक से भेजा जाएगा। भुगतान सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खाते में किया जाएगा और हर किस्त की जानकारी एसएमएस द्वारा उपलब्ध होगी। सरकार एक मोबाइल ऐप भी उपलब्ध कराएगी, जिसमें लाभार्थी पासबुक की तरह अपने सभी भुगतान देख सकेंगे। 10 वर्ष तक के किरायेदारी पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में बड़ी राहत  प्रदेश सरकार ने राज्य में किरायेदारी को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने 10 वर्ष तक की अवधि के किरायानामा विलेखों पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट मंजूर कर दी है। इसका उद्देश्य यह है कि भवन स्वामी और किरायेदार दोनों किरायानामा लिखित रूप में तैयार करें और रजिस्ट्री कराएं, जिससे विवाद कम हों और किरायेदारी विनियमन अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि वर्तमान नियमों के अनुसार एक वर्ष से अधिक अवधि की किरायेदारी विलेख की रजिस्ट्री अनिवार्य है, लेकिन आमतौर पर अधिकांश किरायानामे मौखिक होते हैं या यदि लिखित होते भी हैं तो उनकी रजिस्ट्री नहीं कराई जाती। ऐसे मामलों का पता आमतौर पर जीएसटी विभाग और बिजली विभाग जैसी एजेंसियों की पत्रावलियों की जांच में चलता है और बाद में कमी स्टाम्प शुल्क की वसूली की कार्रवाई करनी पड़ती है। यह भी अनिवार्य है कि किरायेदारी विलेख की रजिस्ट्री हो या न हो, उस पर सही स्टाम्प शुल्क हर हाल में जमा होना चाहिए। सरकार का मानना है कि यदि शुल्क अधिक होता है तो लोग विलेख लिखने और रजिस्ट्री कराने से बचते हैं। इसी वजह से मानक किरायेदारी विलेख को बढ़ावा देने और 10 वर्ष तक की अवधि के रेंट एग्रीमेंट को औपचारिक बनाने के लिए शुल्क में व्यापक छूट देने की जरूरत महसूस की गई। इस छूट प्रणाली के तहत किरायेदारी विलेख पर अधिकतम स्टाम्प शुल्क और अधिकतम रजिस्ट्रेशन फीस अब निश्चित राशि से अधिक नहीं ली जाएगी। साथ ही औसत वार्षिक किराया तय करते समय अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये रखी गई है। टोल संबंधी पट्टे और खनन पट्टों को छूट से बाहर रखा गया है ताकि राजस्व हानि न हो। स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि  नई व्यवस्था के अनुसार अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क की सीमा तय कर दी गई है। यह सीमा किरायेदारी की अवधि और औसत वार्षिक किराए के आधार पर लागू होगी। इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा क्योंकि अब किरायेदारी विलेख पर भारी स्टाम्प शुल्क भरने की बाध्यता नहीं रहेगी और लोग अधिक सहजता से रजिस्ट्री करा सकेंगे। 10 वर्ष तक के किरायेदारी पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में बड़ी राहत •    औसत वार्षिक किराया ₹ 2,00,000 रुपये तक:- 01 वर्ष तक 500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 1500 रुपये, 5 से 10 वर्ष 2000 रुपये •    औसत वार्षिक किराया ₹ 2,00,001 से ₹ 6,00,000 रुपये 01 वर्ष तक 1500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 4500 रुपये, 5 से 10 वर्ष 7500 रुपये •    औसत वार्षिक किराया ₹ 6,00,001 से 10,00,000 रुपये 01 वर्ष तक 2500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 6000 रुपये, 5 से 10 वर्ष 10000 रुपये   अब चैनमैन भी बन सकेंगे लेखपाल, नई नियमावली को मंजूरी   प्रदेश कैबिनेट ने लेखपाल सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए चैनमैन के लिए लेखपाल पद पर पदोन्नति का मार्ग खोल दिया है। वित्त मंत्री सुरेशा खन्ना ने बताया कि पंचम संशोधन नियमावली 2025 के तहत अब लेखपाल के कुल पदों में से दो प्रतिशत पद योग्य चैनमैन को पदोन्नति के आधार पर दिए जा सकेंगे। यह पहली बार है जब चैनमैन को सीधी भर्ती व्यवस्था से बाहर निकलकर लेखपाल पद तक प्रमोशन का अवसर मिलेगा। वर्तमान में लेखपाल के सभी पदों पर भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से की जाती है। प्रदेश में कुल 30837 स्वीकृत पदों में से 21897 पर तैनाती है, जबकि 8940 पद रिक्त हैं। नई व्यवस्था के तहत वे चैनमैन पदोन्नति के लिए पात्र होंगे जो मौलिक रूप से इसी पद पर नियुक्त हों, भर्ती वर्ष के पहले दिन तक छह वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हों और इंटरमीडिएट या समकक्ष परीक्षा पास कर चुके हों। इन पात्र चैनमैन का चयन चयन समिति की सिफारिश पर किया जाएगा। सरकार का कहना है कि अनुभवी चैनमैन को … Read more

योगी आदित्यनाथ ने महिला क्रिकेट टीम को विश्वकप विजय पर सराहा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वनडे विश्वकप जीत पर बधाई लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में भारतीय महिला क्रिकेट टीम को वनडे विश्वकप में मिली ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी गई। बैठक में टीम के जज़्बे, अनुशासन और शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा गया कि खिलाड़ियों ने देश का गौरव बढ़ाया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि यह जीत न केवल भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण है बल्कि देश की युवा बेटियों के लिए प्रेरणा का भी स्रोत है। दिल्ली में हाल की आतंकी घटना की निंदा और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रदेश कैबिनेट ने दिल्ली में हाल ही में हुई आतंकी घटना की कड़ी निंदा की है। बैठक में कहा गया कि यह घटना देश की शांति और सुरक्षा पर हमला है। मुख्यमंत्री और कैबिनेट ने हमले में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन संबंधी जानकारी अब व्हाट्सएप पर

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की पहल – व्हाट्सएप चैटबॉट सेवा से अब परिवहन सेवाएं होंगी और आसान उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन संबंधी जानकारी अब व्हाट्सएप पर उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग की डिजिटल पहल: घर बैठे पाएँ सभी जरूरी सेवाएँ जनसुविधा के लिए तकनीक का नया उपयोग – परिवहन विभाग की स्मार्ट सेवा लखनऊ   मुख्यमंत्री के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश के आम नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, परिवहन विभाग ने एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल की है। विभाग ने व्हाट्सएप आधारित चैटबॉट सेवा (मोबाइल नंबर: 8005441222) के माध्यम से अब लोग घर बैठे ही परिवहन संबंधी अनेक सेवाओं एवं सूचनाओं का लाभ सहजता और पारदर्शिता के साथ प्राप्त कर सकते हैं। इसका उद्देश्य नागरिकों को सरल, सुलभ एवं पारदर्शी सेवाएं प्रदान करना है। इस चैटबॉट के माध्यम से उपयोगकर्ता अपने मोबाइल पर ही ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, कर भुगतान, फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट, और अन्य सेवाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अब नागरिकों को किसी भी परिवहन कार्यालय में अनावश्यक रूप से जाने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल मोबाइल नंबर 8005441222 को अपने व्हाट्सएप में सेव करें और “Hi” या “नमस्ते” लिखकर संदेश भेजें। चैटबॉट स्वतः ही आगे की प्रक्रिया में सहायता करेगा और संबंधित जानकारी कुछ ही क्षणों में उपलब्ध करा देगा। परिवहन विभाग ने बताया कि यह सेवा 24×7 उपलब्ध रहेगी और उपयोगकर्ताओं को डिजिटल माध्यम से तेज, सुरक्षित एवं विश्वसनीय जानकारी प्रदान करेगी। यह कदम ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के अनुरूप नागरिक सेवाओं को तकनीक के माध्यम से अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे इस नई व्हाट्सएप चैटबॉट सेवा का अधिक से अधिक उपयोग करें और अपने अनुभवों से विभाग को अवगत कराएं ताकि इस सेवा को और बेहतर बनाया जा सके।

स्मार्ट गवर्नेंस और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के माध्यम से आम जनता को लाभान्वित करने वाले राज्यों में अग्रणी है उत्तर प्रदेश

विकसित उत्तर प्रदेश, समर्थ उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश में डाटा आधारित गवर्नेंस व डिजिटल इनोवेशन रख रहे प्रशासनिक पारदर्शिता की नींव स्मार्ट गवर्नेंस और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के माध्यम से आम जनता को लाभान्वित करने वाले राज्यों में अग्रणी है उत्तर प्रदेश  प्रदेश में एसएमएस, व्हाट्सऐस व लाइव डैशबोर्ड जैसी पहले के माध्यम से शिकायतों का किया जा रहा है त्वरित निस्तारण योगी सरकार में सरकारी योजनाओं को लागू करने में भविष्य आधारित तकनीकों का प्रयोग कर पारदर्शिता के साथ प्रभावी निगरानी को किया जा रहा सुनिश्चित  लखनऊ  उत्तर प्रदेश को विकसित, समर्थ और सक्षम उत्तर प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार ने डाटा आधारित गवर्नेंस व डिजिटल इनोवेशन के माध्यम से प्रशासनिक पारदर्शिता की नींव रखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश स्मार्ट गवर्नेंस और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहां समावेशी विकास को भविष्य आधारित तकनीकों के इस्तेमाल से धरातल पर उतारा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि चाहें बात स्मार्ट पुलिसिंग की हो, मेडिकल इनोवेशन की हो या फिर एग्रिकल्चरल व एजुकेशनल रिफॉर्म्स की, उत्तर प्रदेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के साथ ही आधुनिक तकनीक के समावेश से समाज के अंतिम पायदान पर स्थित लोगों तक सरकार की लाभदायक योजनाओं के प्रसार को सुनिश्चित कर रहा है।   प्रदेश में डाटा-आधारित प्रशासन ने सरकारी कामकाज को अधिक पारदर्शी, त्वरित और जवाबदेह बनाया है। वहीं, तकनीक के व्यापक उपयोग से सेवाओं की वास्तविक समय में निगरानी संभव हुई है, जिससे आम नागरिकों को योजनाओं का लाभ सीधे और बिना देरी मिल रहा है। स्मार्ट गवर्नेंस ने यूपी को अनुकरणीय मॉडल के रूप में किया स्थापित राज्य में स्मार्ट गवर्नेंस के तहत डिजिटल प्रक्रियाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। विभिन्न सरकारी विभागों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग, डिजिटल फाइल ट्रैकिंग और डाटा-आधारित फैसलों ने प्रशासनिक दक्षता को नई ऊँचाई दी है। इन पहलों ने ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाओं की सुगमता सुनिश्चित की है, जिससे यूपी देशभर में डिजिटल गवर्नेंस का एक उल्लेखनीय मॉडल बनकर उभरा है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और लाइव डैशबोर्ड से त्वरित समाधान सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, स्कूलों के प्रदर्शन, शिकायत निस्तारण और सेवा उपलब्धता की निगरानी में एसएमएस, व्हाट्सऐप और लाइव डैशबोर्ड का उपयोग निर्णायक साबित हुआ है। इन माध्यमों के जरिए स्कूलों में शैक्षिक गैप की पहचान, योजनाओं की डिलीवरी की पुष्टि और शिकायतों का तत्काल समाधान संभव हुआ है। त्वरित संचार और रियल-टाइम डाटा ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के साथ ही निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के लिए जवाबदेह भी बनाया है। क्यूआर कोड व डिजिटल टूल्स से बढ़ी पारदर्शिता मिड-डे मील कार्यक्रम में क्यूआर कोड, गूगल शीट्स, एक्सेल, यूडीआईएससी, टेलीग्राफ तथा गूगल फॉर्म जैसे डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल से व्यवस्था अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद हुई है। इन साधनों से भोजन वितरण की निगरानी, उपस्थिति सत्यापन और गुणवत्ता नियंत्रण का डाटा तुरंत उपलब्ध हो जाता है, जिससे अनियमितताओं पर अंकुश लगा है। तकनीकी नवाचारों ने यह सुनिश्चित किया है कि बच्चों को लाभ समय पर और सही रूप में मिल रहा है।

यमुना के तट पर नया पब्लिक प्लाजा पार्क: भारतीय और जापानी संस्कृति का बेजोड़ नमूना

प्रयागराज   संगम नगरी प्रयागराज की पहचान धार्मिक ,साहित्यिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में जानी जीती है। योगी सरकार द्वारा महाकुंभ 2025 के भव्य और दिव्य आयोजन ने इसकी समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को दुनिया भर में पहुंचाया। इस भव्य आयोजन के बाद अब कुंभ नगरी में जापानी और सनातन संस्कृति का मेल भी होगा।  हजारों किलोमीटर की दूरी और भाषा का अंतर होने के बावजूद भारत की सनातन संस्कृति और जापान की पारंपरिक शिन्तो संस्कृति में अद्भुत समानताएँ दिखाई देती हैं। दोनों ही सभ्यताएं प्रकृति को देवतुल्य मानती हैं, आत्मसंयम को सर्वोच्च मूल्य और शांति को जीवन का आधार मानती हैं। इन दोनों संस्कृतियों के मेल की झलक की साक्षी बनने जा रही है कुंभ नगरी प्रयागराज। यहां जापानी स्थापत्य और सांस्कृतिक प्रतीकों से प्रेरित पब्लिक प्लाजा पार्क का निर्माण किया जा रहा है। नगर विकास की तरफ से इसका निर्माण किया जा रहा है, जिसकी कार्यदायी संस्था सीएनडीएस है। सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर रोहित कुमार राणा बताते हैं कि प्रयागराज में यमुना किनारे अरैल क्षेत्र में शिवालय पार्क के नजदीक 3 हेक्टेयर में इसका निर्माण किया जाएगा। नगर निगम प्रयागराज को इसका आकलन भेजा गया है। इसमें भारतीय और जापानी संस्कृति के साझा स्थापत्य के प्रतीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रयागराज महाकुंभ के समय धार्मिक और आध्यात्मिक पार्कों का हब बनकर सामने आया। अरैल क्षेत्र में पहले शिवालय पार्क और अब साहित्य पार्क के निर्माण के क्रम में एक नई उपलब्धि जुड़ने जा रही है। यमुना नदी के किनारे पब्लिक प्लाजा पार्क का निर्माण हो रहा है। कार्यदायी संस्था सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर रोहित कुमार राणा का कहना है कि पार्क में 5 जोन बनाए जाएंगे। पार्क के चप्पे-चप्पे में जापान की शिंटो संस्कृति और भारतीय सनातन संस्कृति के साझा मूल्यों की झलक मिलेगी। पार्क में प्रवेश द्वार के स्थान पर टोरी गेट का निर्माण किया जाएगा जो शिंटो संस्कृति का प्रतीक है। पार्क में जापानी गार्डन बनेगा जिसमें मियावाकी वन भी विकसित किया जाएगा। पार्क में योग और भारतीय मंदिर वास्तुकला, नृत्य और संगीत की तरह जापान की टी सेरेमनी, इकेबाना और ज़ेन गार्डन में भी आध्यात्मिक भाव झलकता है। इस पार्क के अंदर भी जेन पार्क का निर्माण किया जायेगा। दोनों देशों की कला केवल सजावट नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन और साधना का माध्यम है। समरसता, शांति और विश्व बंधुत्व भारत के “वसुधैव कुटुम्बकम्” और जापान के “वा” दर्शन में एक ही संदेश निहित है जिसकी झलक भी यहां स्थापित होने वाले प्रतीकों में दिखेगी।