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भारत का अपना हाई-परफॉर्मेंस सर्वर ‘Nathu La’ लॉन्च, Zoho की पहल की प्रधानमंत्री मोदी ने की तारीफ

नई दिल्ली मैसेजिंग ऐप Arattai बनाने वाली स्वदेशी कंपनी Zoho ने ‘Nathu La’ नाम का एक नया सर्वर पेश किया है, जिसे लेकर टेक और पॉलिसी दोनों सर्कल में हलचल है. यह लॉन्च ऐसे समय पर हुआ है जब दुनिया भर में AI को लेकर होड़ तेज है और हर देश अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने में लगा है।  भारत भी इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहता, लेकिन अब तक सबसे बड़ी कमजोरी यही रही है कि देश को अपने AI सिस्टम चलाने के लिए विदेशी सर्वर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर रहना पड़ता है।  Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु पिछले कुछ समय से AI पर ज्यादा निर्भर होने के खतरों को लेकर खुलकर बात कर रहे हैं. हाल ही में UC Berkeley जैसे संस्थानों में कंप्यूटर साइंस के छात्रों के रिजल्ट और सीखने की क्षमता को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने प्रतिक्रिया दी थी. वेम्बु का कहना है कि छात्रों को AI पर ज्यादा भरोसा करने से पहले अपनी बेसिक समझ मजबूत करनी चाहिए।  उन्होंने कहा कि AI आपको तेजी से स्मार्ट बना सकता है, लेकिन उतनी ही तेजी से आपको कमजोर भी बना सकता है. उनका मानना है कि अगर छात्र हर चीज के लिए AI पर निर्भर हो जाएंगे, तो उनकी सोचने और खुद समस्या सुलझाने की क्षमता कमजोर हो सकती है।  पीएम मोदी ने पीएमओ ऑफिशियल अकाउंट से इसे शेयर भी किया है. वेम्बु ने यह भी कहा कि कई मामलों में छात्र AI से बेहतर सीख नहीं रहे, बल्कि उस पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो रहे हैं. उनके मुताबिक AI एक सहारा बन सकता है, लेकिन अगर उसी पर पूरी तरह टिक गए तो यह आदत बन जाती है।  पहला इन हाउस सर्वर Nathu La Zoho ने टेक्नोलॉजी के हार्डवेयर क्षेत्र में कदम रखते हुए अपना पहला इन-हाउस सर्वर प्लेटफॉर्म ‘Nathu La’ लॉन्च किया है. कंपनी का कहना है कि यह सर्वर खास तौर पर AI और क्लाउड से जुड़े काम के लिए बनाया गया है. चेन्नई स्थित कंपनी के मुताबिक इससे इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च कम होगा, बिजली की खपत घटेगी और टेक्नोलॉजी पर कंपनी का कंट्रोल भी बढ़ेगा।  इस सर्वर को नागपुर में Zoho की इंजीनियरिंग टीम ने Intel के साथ मिलकर तैयार किया है. इसमें Intel Xeon 6 प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है और इसे कंपनी अपने डेटा सेंटर में इस्तेमाल करेगी।  कम बिजली की खपत Zoho का दावा है कि यह सिस्टम लगभग वही परफॉर्मेंस देता है, लेकिन बिजली की खपत 12 से 18 प्रतिशत तक कम कर देता है और कुल खर्च में 20 से 30 प्रतिशत तक की बचत कर सकता है।  कंपनी के मुताबिक AI से जुड़े बढ़ते खर्च ही इस फैसले की बड़ी वजह हैं. Zoho पहले से दुनिया भर में 150 मिलियन से ज्यादा यूजर्स को सेवा दे रहा है और उसके 16 से ज्यादा डेटा सेंटर हैं. ऐसे में AI इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च तेजी से बढ़ रहा है. कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में वही सर्वर सेटअप अब 3 से 4 गुना महंगा हो चुका है।  Zoho फिलहाल इस सर्वर को बाजार में बेचने की योजना नहीं बना रहा है. कंपनी इसे अपने ही काम के लिए इस्तेमाल कर रही है और धीरे-धीरे अपने सिस्टम में लागू कर रही है. अभी कुछ सौ Nathu La सर्वर इस्तेमाल में हैं और उम्मीद है कि साल के अंत तक इनकी संख्या करीब 2000 तक पहुंच सकती है।  श्रीधर वेम्बु ने सोशल मीडिया पर भी बताया कि इस सर्वर को बनाने में कई साल की मेहनत लगी है. नागपुर की R&D टीम ने इस पर काम किया और अब इसे दुनिया भर के Zoho डेटा सेंटर में इस्तेमाल किया जाएगा. उनका कहना है कि इससे कंपनी को बिजली और पैसे दोनों की बचत होगी, और आगे पूरा सॉफ्टवेयर सिस्टम और ज्यादा कुशल बनाया जाएगा। 

डिजिटल पेमेंट में नया खिलाड़ी: Zoho ने लॉन्च की अपनी पेमेंट सर्विस

 नई दिल्ली     स्वदेशी कंपनी Zoho इन दिनों सुर्खियों में है. हाल ही में कंपनी का इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप Arattai काफी पॉपुलर हुआ है और सरकार भी इसे प्रोमोट कर रही है. अब कंपनी हार्डवेयर स्पेस के लिए बड़ी तैयारी में दिख रही है.  Zoho ने अब पॉइंट ऑफ सेल डिवाइसेज यानी POS मशीन बेचना शुरू कर दिया है. इसमें इंटीग्रेटेड QR डिवाइसेज और साउंड बॉक्स शामिल हैं. भारत में फिलहाल Paytm और PhonePay के POS डिवाइसेज पॉपुलर हैं और ज्यादर रिटेल स्टोर्स पर यही पेमेंट ऑप्शन देखने को मिलता है. Zoho Payments के तहत लॉन्च किया गया ये POD डिवाइस पेटीएम और फोनपे सहित गूगल पे को कड़ी टक्कर दे सकता है. कंपनी के स्मार्ट POS डिवाइस में टच स्क्रीन इंटरफेस के साथ इनबिल्ट प्रिंटर भी है जो तुरंत रीसीट को प्रिंट कर देता है. Zoho का पेमेंट टर्मिनल 4G, WiFi और ब्लूटूथ सपोर्ट करता है. इस मशीन के जरिए मर्चेंट्स चिप कार्ड्स, UPI और QR कोड से पेमेंट ले सकते हैं. Zoho Payment के सीईओ ने कहा है कि ये कंपनी का नेचुरल एक्सपैंशन है जो 2024 में शुरू किया गया था. हालांकि तब सॉफ्टवेयर बेस्ड पेमेंट सल्यूशन था. कंपनी तब से किसी भी डिवाइसेज में ऑनलाइन पेमेंट सपोर्ट देती थी. अब कंपनी ने हार्डवेयर भी पेश कर दिया है. चूंकि Zoho के पास छोटे बिजनेस मैनेज करने के सभी टूल्स हैं, इसलिए पेमेंट टर्मिनल में भी उनका सपोर्ट देखने को मिलेगा. यानी मर्चेंट्स रियल टाइम पेमेंट ट्रैकिंग से लेकर पूरा लेखा जोखा एक जगह पर पा सकेंगे. बिजनेसेज के लिए युनिफाइड डैशबोर्ड भी है जहां से पेमेंट्स और बिलिंग की तमाम जानकारी रिटेलर्स और मर्चेंट्स को आसानी से मिल सकेगी. एडवांस्ड सिक्योरिटी के लिए Zoho ने PCI DSS सर्टिफाइड रखा है. अरट्टई हो रहा है पॉपुलर WhatsApp भारत में सबसे ज्यादा यूज किया जाने वाला इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप है. लेकिन अब Zoho का Arattai ऐप आ चुका है जो स्वदेशी है. इस ऐप पर चैटिंग के अलावा कॉलिंग और मीटिंग जैसे फीचर्स दिए गए हैं. अब तक चैटिंग में Arattai ने एंड टू एंड एन्क्रिप्शन नहीं दिया है, लेकिन कंपनी ने कहा है कि जल्द ही Arattai के चैट्स में एंड टू एंड एन्क्रिप्शन दिया जाएगा. गौरतलब है कि एंड टू एंड एन्क्रिप्शन को चैटिंग प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है. इस एन्क्रिप्शन के आ जाने के बाद Arattai पर की गई चैटिंग का डेटा कोई भी ऐक्सेस नहीं कर पाएगा. बिना एन्क्रिप्शन चैटिंग के साथ मुश्किल ये है कि पर्सनल डेटा हैकर्स या खुद कंपनी ऐक्सेस कर सकती है. WhatsApp में काफी पहले से एंड टू एंड एन्क्रिप्शन है जिसे इंडिपेंडेट सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने कई बार ऑडिट भी किया है. देखना दिलचस्प होगा कि स्वदेशी Arattai कैसे WhatsApp को टक्कर देता है.

Zoho Vani: अरट्टई के बाद Zoho का धमाकेदार टूल, जिसे आप फ्री में इस्तेमाल कर सकते हैं

नई दिल्ली प्लेटफॉर्म Vani लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म की मदद से छोटे व्यवसायों (SMBs) को अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद मिलेगी। Vani में व्हाइटबोर्ड, फ्लोचार्ट, माइंड मैप और वीडियो कॉल जैसे कई टूल मिलते हैं। टीम इसके जरिए अलग-अलग सोर्स से डेटा लेकर आसानी से काम कर सकती हैं। इतना ही नहीं, इस प्लेटफॉर्म के जरिए AI की मदद से कंटेंट भी बनाया जा सकता है। साथ ही, इनसाइट्स भी देखे जा सकते हैं। हालांकि इसका इस्तेमाल करने के लिए लोगों को पैसे देने होंगे। फ्री में यूज करने वालों को प्लेटफॉर्म के बेसिक फीचर्स मिलेंगे। Vani का प्रत‍िमाह शुल्‍क ग्लोबली Zoho के Vani प्लेटफॉर्म का यूज करने के लिए 5 डॉलर प्रति महीने देने होंगे। भारत में 240 रुपये प्रति महीने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। प्लेटफॉर्म को फ्री में भी यूज किया जा सकता है। इसमें बेसिक फीचर्स के साथ 25 MB तक मीडिया अपलोड की सुविधा मिलती है। अगर आपको अपने डेटा और प्राइवेसी को लेकर चिंता है तो बता दें कि कंपनी ने साफ कर दिया है कि वह यूजर्स का डेटा सेव नहीं करेगा। उनकी सारी डिटेल सुरक्षित रहेंगी। वानी जैसे एआई पावर्ड टूल क्‍या आपके करियर की दिशा बदल सकते हैं? समझने के लिए NBT Upskill AI से करियर ग्रोथ वर्कशॉप में रजिस्टर करें। मिलते हैं कई टूल Zoho ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि Vani में व्हाइटबोर्ड, फ्लोचार्ट, डायग्राम, माइंड-मैपिंग और वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग जैसे कई टूल मिलेंगे। यह प्लेटफॉर्म टीमों को डेस्कटॉप, क्लाउड ड्राइव और एक्सेल शीट जैसे अलग-अलग सोर्स से डेटा लेकर एक साथ काम करने में मदद करेगा। इससे टीमों के लिए जानकारी शेयर करना और उस पर काम करना बहुत आसान हो जाएगा। Vani के प्रोडक्ट हेड कार्तिकयन जंबुलिंगम ने कहा है Vani पर सभी विभागों के लिए एक ही कैनवास में कई टूल का एक सेट मिलता है। इससे ऐप-स्विचिंग, प्रोसेस या ऑनबोर्डिंग की दिक्कत खत्म हो जाएगी। बता दें कि इसमें "Space and Zone" फ्रेमवर्क भी मिलता है। यह फ्रेमवर्क टीमों को स्वतंत्र रूप से काम करने की सुविधा देता है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर वे आसानी से एक-दूसरे के साथ कोलेब भी कर सकते हैं। प्लेटफॉर्म में AI भी मिलता है। यह AI यूजर्स को कंटेंट बनाने में मदद करता है। Vani में प्लानिंग, ब्रेनस्टॉर्मिंग, डिजाइन डायग्राम और सोशल मीडिया क्रिएटिव के लिए रेडी-टू-यूज टेम्पलेट्स और टूलकिट की एक लाइब्रेरी भी है। यह सब प्रोजेक्ट वर्कफ्लो को बहुत आसान बनाता है। हाल ही में, Zoho का मैसेजिंग ऐप Arattai भी काफी चर्चा में आया। इसके बाद इसका वेब ब्राउजर Ulaa भी लोगों की नजरों में आया है। अब देखना है कि वानी को लोगों से कैसी प्रतिक्रिया मिलती है।