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अनुभवी बल्लेबाज केएल राहुल ने लॉर्ड्स टेस्ट में लगाई स्पेशल सेंचुरी, गांगुली और द्रविड़ भी नहीं कर पाए ऐसा

लॉर्ड्स  अनुभवी बल्लेबाज केएल राहुल ने शनिवार को इंडिया वर्सेस इंग्लैंड लॉर्ड्स टेस्ट में स्पेशल सेंचुरी लगाई। उन्होंने बतौर ओपनर उतरने के बाद पहली पारी में 177 गेंदों में 100 रन बनाए। उन्होंने 13 चौके जड़े। उन्होंने जारी सीरीज में दूसरा शतक ठोका। वहीं, राहुल ने टेस्ट करियर का 10वां शतक जमाया है। उन्होंने एक जबर्दस्त कारनामा अंजाम दिया है, जो सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ समेत कई दिग्गज अपने करियर में नहीं कर पाए।   दरअसल, 33 वर्षीय राहुल ने लॉड्स में दूसरा टेस्ट शतक मारा है। उन्होंने 2021 में इंग्लैंड दौरे पर लॉर्ड्स में 250 गेंदों में 129 रनों की पारी खेली थी। राहुल एक से अधिक सेंचुरी लगाने वाले सिर्फ दूसरे भारतीय हैं। लॉर्ड्स में कुल 10 भारतीयों ने टेस्ट शतक ठोका है, जिसमें से आठ ने केवल एक बार शतक लगाया। ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर सर्वाधिक सेंचुरी का भारतीय रिकॉर्ड दिलीप वेंगसकर के नाम है। उन्होंने यहां तीन शतक जड़े। लॉर्ड्स में टेस्ट सेंचुरी जड़ने वाले भारतीय क्रिकेटर दिलीप वेंगसरकर- 3 केएल राहुल- 2 वीनू मांकड़- 1 गुंडप्पा विश्वनाथ- 1 रवि शास्त्री- 1 मोहम्मद अजहरुद्दीन- 1 सौरव गांगुली- 1 राहुल द्रविड़- 1 अजीत अगरकर- 1 अजिंक्य रहाणे- 1 राहुल एक धाकड़ क्लब में शामिल हो गए हैं। वह लॉर्ड्स में दो शतक लगाने वाले चौथे मेहमान सलामी बल्लेबाज बन गए। उनके अलावा यहां बिल ब्राउन, गॉर्डन ग्रीनिज और ग्रीम स्मिथ ने दो सेंचुरी ठोकीं। राहुल का इंग्लैंड में यह चौथा टेस्ट शतक है। यह साल 2000 के बाद से इंग्लैंड में किसी मेहमान सलामी बल्लेबाज द्वारा लगाए गए दूसरा सबसे अधिक शतक हैं। उनसे आगे साउथ अफ्रीका के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज ग्रीम स्मिथ (5) हैं। मैच की बात करें तो राहुल ने जोफ्रा आर्चर द्वारा डाले गए 67वें ओवर की चौथी गेंद पर सिंगल लेकर शतक कंप्लीट किया। हालांकि, वह उसके बाद जब स्ट्राइक पर आए तो विकेट गंवा बैठे। उन्हें स्पिनर शोएब बशीर ने 68वें ओवर की पहली गेंद पर हैरी ब्रूक के हाथों कैच कराया। राहुल ने करुण नायर (40) के साथ 61, कप्तान शुभमन गिल (16) के संग 33 और विकेटकीपर ऋषभ पंत (74) के साथ 141 रनों की साझेदारी की।  

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव ने राजनीति से संन्यास लेने का किया ऐलान

संबलपुर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री और ओडिशा के वरिष्ठ भाजपा नेता जुएल उरांव ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम में जुएल उरांव ने घोषणा की कि वो अब भविष्य में कोई प्रत्यक्ष चुनाव नहीं लड़ेंगे। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव ओडिशा के संबलपुर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने ऐलान करते हुए कहा, “मैंने तय किया है कि अब कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा। अब मैं पार्टी के लिए काम करूंगा और युवाओं को आगे लाने में मदद करूंगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वो पार्टी के निर्देशों के अनुसार ही आगे कोई भी भूमिका निभाएंगे। जिम्मेदारी जो पार्टी उन्हें सौंपेगी, वो उसे स्वीकार करेंगे। मीडिया से बातचीत में जुएल उरांव ने अपनी घोषणा को दोहराया। उन्होंने कहा, “मैं 8 बार लोकसभा और दो बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुका हूं। इसलिए चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं है। ये मेरा फैसला है, लेकिन अगर पार्टी कोई निर्णय करती है तो ये अलग बात होगी।” उन्होंने कहा, “अब वक्त आ गया है कि युवाओं को नेतृत्व संभालने का अवसर मिले और वो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए जनता का प्रतिनिधित्व करें।” हालांकि, जुएल उरांव ने राज्यसभा सदस्य या राज्यपाल बनने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैं राज्यपाल या राज्यसभा का सदस्य बन सकता हूं। अगर नहीं भी बनता हूं तो पार्टी के लिए काम करता रहूंगा।” केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव का लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। जुएल उरांव ओडिशा में भाजपा के एक प्रमुख आदिवासी चेहरा हैं। राज्य में पार्टी की जड़ें मजबूत करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। वो सुंदरगढ़ निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए 1998 से 12वीं, 13वीं, 14वीं, 16वीं और 17वीं लोकसभा के सदस्य रहे। जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मंत्रालय का गठन किया तब ओराम ने 13 अक्टूबर 1999 को जनजातीय मामलों के पहले केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली थी। साल 2024 में केंद्र में एनडीए की तीसरी बार सरकार बनने पर जुएल उरांव को मंत्री बनाया गया।  

अमरनाथ यात्रा जारी, अब तक 1.63 लाख श्रद्धालु हुए दर्शन लाभ के पात्र

श्रीनगर अमरनाथ यात्रा ने आस्था और भक्ति का एक नया इतिहास रच दिया है। 3 जुलाई से शुरू हुई इस पवित्र यात्रा में अब तक 1.63 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए हैं। इसके साथ ही शनिवार को जम्मू से 6,639 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था कश्मीर के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने बताया कि 3 जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा में अब तक 1.63 लाख लोग बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। आज 6,639 तीर्थयात्रियों का एक और समूह जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से दो सुरक्षा काफिलों के साथ कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने कहा कि 2,337 यात्रियों को लेकर 116 वाहनों का पहला सुरक्षा काफिला तड़के 2.50 बजे बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ, जबकि 4,302 यात्रियों को लेकर 161 वाहनों का दूसरा सुरक्षा काफिला तड़के 3.55 बजे नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। पहलगाम में गुरुवार को ‘छड़ी मुबारक’ (भगवान शिव की पवित्र गदा) का भूमि पूजन किया गया। इस साल की अमरनाथ यात्रा के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। यह यात्रा पहलगाम हमले के बाद हो रही है, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 नागरिकों की हत्या कर दी थी। 180 अतिरिक्त सीएपीएफ कंपनियों को सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और स्थानीय पुलिस की मौजूदा ताकत बढ़ाने के लिए लाया गया है। जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से गुफा मंदिर तक के पूरे रास्ते और दोनों आधार शिविरों के रास्ते में सभी पारगमन शिविरों को सुरक्षा बलों ने सुरक्षित कर लिया है। सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और स्थानीय पुलिस की मौजूदा ताकत को बढ़ाने के लिए सीएपीएफ की 180 अतिरिक्त कंपनियां लाई गई हैं। पूरे मार्ग को सुरक्षा बलों द्वारा सुरक्षित कर लिया गया है। पहलगाम मार्ग का उपयोग करने वाले लोग चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी से होकर गुफा मंदिर तक पहुंचते हैं और 46 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करते हैं। तीर्थयात्रियों को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं। वहीं, छोटे बालटाल मार्ग का उपयोग करने वालों को गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है और यात्रा पूरी करने के बाद उसी दिन आधार शिविर लौटना पड़ता है। सुरक्षा कारणों से इस वर्ष यात्रियों के लिए कोई हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है। अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई और 38 दिनों के बाद 9 अगस्त को समाप्त होगी, जो श्रावण पूर्णिमा और रक्षा बंधन का दिन है। श्री अमरनाथ जी यात्रा भक्तों के लिए सबसे पवित्र धार्मिक तीर्थयात्राओं में से एक है, क्योंकि किंवदंती है कि भगवान शिव ने इस गुफा के अंदर माता पार्वती को शाश्वत जीवन और अमरता के रहस्य बताए थे।  

उच्च शिक्षा मंत्री परमार की अध्यक्षता में भारतीय ज्ञान परंपरा शीर्ष समिति की बैठक हुई

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में शनिवार को, सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय भोपाल के सभाकक्ष में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत "भारतीय ज्ञान परंपरा शीर्ष समिति" की बैठक हुई। उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर, अध्यादेश 14(1) एवं अध्यादेश 14(2) के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के 10 संभागों में समयपूर्वक कार्यशालाओं के आयोजन कर व्यापक रूप से विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों तक लागू अध्यादेशों से अवगत कराने के निर्देश दिए। श्री परमार ने विश्वविद्यालय स्तर पर पाठ्यक्रमों के लिए कार्यशालाओं के आयोजन भी समयपूर्वक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। श्री परमार ने प्रदेश के समस्त भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ प्रभारियों को लेकर भी कार्यशाला आयोजित करने को कहा। श्री परमार ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों में भारतीय भाषाओं में अध्यापन के लिए कार्ययोजना बनाई जाए और इसे विद्यार्थियों के मूल्यांकन क्रेडिट से भी जोड़ा जाए। श्री परमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों को भारतीय भाषा में अध्यापन का केंद्र बनाने के लिए कार्य करें। मंत्री श्री परमार ने कहा कि "ज्ञान बोध प्रतियोगिता" में पाठ्यक्रम के अतिरिक्त पारंपरिक विषयों में भारतीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण आधारित प्रश्नावली का समावेश करें ताकि विद्यार्थियों को भारतीय दृष्टि के साथ समाज में विद्यमान परंपरागत ज्ञान के अध्ययन एवं शोध का अवसर मिले। श्री परमार ने कहा कि विश्व शांति दिवस पर भारतीय दृष्टिकोण वसुधैव कुटुंबकम् – विश्व एक परिवार का भाव, को मूल में रखकर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। हिंदी पखवाड़े के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों में विशुद्ध हिंदी भाषा के उपयोग के साथ पूर्णता प्रदान की जाए। श्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में, मप्र हिंदी ग्रन्थ अकादमी द्वारा प्रकाशित कला, वाणिज्य एवं विज्ञान विषयों में उत्कृष्ट पुस्तक लेखन के लिए, "श्रेष्ठ लेखक पुरस्कार" प्रदान किया जाए। बैठक के आरंभ में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा डॉ धीरेंद्र शुक्ल ने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में स्नातक प्रथम वर्ष के लिए चिन्हित विषयों की पांडुलिपियों में अकादमिक गुणवत्ता परीक्षण के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला से प्राप्त निष्कर्ष पर प्रकाश डाला। उक्त कार्यशाला में प्रदेश एवं देश भर के 200 से अधिक शिक्षाविदों ने सहभागिता की। बैठक में स्नातक द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परम्परा को समाहित करने के लिए, प्रदेश के 27 विश्वविद्यालयों में कार्यशालाओं के आयोजन करने को लेकर चर्चा हुई। अध्यादेश 14(1) एवं अध्यादेश 14(2) के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के 10 संभागों में कार्यशालाओं के आयोजन करने को लेकर भी विमर्श हुआ। भारतीय ज्ञान परम्परा के परिप्रेक्ष्य में महाविद्यालयों में किए जाने वाले आयोजन संबंधी त्रैमासिक कैलेंडर को लेकर व्यापक विचार मंथन हुआ। साथ ही भारतीय ज्ञान परम्परा आधारित पाठ्यक्रम निर्माण, पुस्तक लेखन, पांडुलिपि परीक्षण, दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला, अकादमिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। उच्च शिक्षा विभाग एवं मप्र हिंदी ग्रन्थ अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में सामान्य ज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित "ज्ञान बोध प्रतियोगिता" के आयोजन, भारतीय ज्ञान परम्परा के जानकार शिक्षकों की बैठक का आयोजन एवं प्रतिवर्ष प्रत्येक वर्ष की समाप्ति के पश्चात् वृहद संगोष्ठी के आयोजन को लेकर भी व्यापक विमर्श हुआ। समस्त सम्बंधित विषयों में संदर्भ पुस्तकों के लेखन को लेकर भी चर्चा हुई, जिसमें भारतीय ज्ञान परम्परा पर शोध की दृष्टि से कार्य किया गया है। राज्यस्तरीय भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ स्थापित करने को लेकर भी चर्चा हुई। बैठक में शीर्ष समिति के उपाध्यक्ष एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के सचिव डॉ अतुल कोठारी, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के निदेशक श्री अशोक कड़ेल और प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति के अध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र कान्हेरे सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरुगण, शीर्ष समिति के सदस्यगण, शिक्षाविद् तथा उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।  

राहुल पर बरसे धर्मेंद्र प्रधान: बोले– लिखी हुई बातें दोहराते हैं, खुद का विचार नहीं

भुवनेश्वर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर ओडिशा की संस्कृति का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी को कोई ज्ञान नहीं है। वह आमतौर पर जनसभा में वही बोलते हैं, जो उन्हें लिखकर दिया जाता है। उन्हें उस विषय वस्तु के बारे में तनिक भी जानकारी नहीं होती है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राहुल गांधी ने ओडिशा की जनता और उनकी पार्टी द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अपमान के लिए माफी मांगने की बजाय अहंकार दिखाया। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं का कोई ज्ञान नहीं है। ओडिशा में जब कोई बड़ा नेता या राष्ट्रपति जैसे सम्मानित व्यक्ति आते हैं, तो उन्हें भगवान जगन्नाथ का पवित्र वस्त्र भेंट किया जाता है। यह हमारी परंपरा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, रामनाथ कोविंद और गृहमंत्री अमित शाह ने सम्मान दिया। लेकिन, राहुल गांधी ने इस परंपरा का अपमान किया।” उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को ओडिशा की भाषा, साहित्य और सभ्यता की कोई समझ नहीं है। वे सिर्फ नाटक करते हैं। उनकी बातों में कोई दम नहीं है।” उन्होंने राहुल गांधी की तुलना एक ऐसे व्यक्ति से की, जिसकी “पढ़ाई कम, लेकिन स्कूल बैग बड़ा” है, और कहा कि उनकी पार्टी और बयानबाजी पूरी तरह से दिवालिया हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणियां ओडिशा के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली हैं। उन्होंने मांग की कि राहुल गांधी ओडिशा के लोगों और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से माफी मांगें, जिन्हें उनकी पार्टी ने बार-बार अपमानित किया है। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को ओडिशा आकर अपनी गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। यह उनके अहंकार को दिखाता है।” इसके अलावा, धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी के उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है। प्रधान ने इसे बेबुनियाद बताया और कहा कि राहुल गांधी के पास कोई ठोस तथ्य नहीं है। उन्होंने ओडिशा की जनता से अपील की कि वे ऐसे बयानों पर ध्यान न दें और अपनी संस्कृति पर गर्व करें। बता दें कि राहुल गांधी ने 11 जुलाई को ओडिशा के भुवनेश्वर में “संविधान बचाओ समावेश” रैली को संबोधित किया था। उन्होंने भाजपा और पूर्व बीजद सरकार पर ओडिशा के संसाधनों की लूट और आदिवासियों के अधिकारों के हनन का आरोप लगाया था।  

रानी अबंती बाई सागर जल विद्युत गृह बरगी की दोनों यूनिट से उत्पादन शुरु : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्‍यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की रानी अबंती बाई सागर जल विद्युत गृह बरगी की 45-45 मेगावाट दोनों यूनिट से विद्युत उत्पादन पूर्ण क्षमता के साथ शुरु हो गया। दोनों यूनिट 9 जुलाई की शाम को क्रि‍याशील हो गईं। दोनों यूनिट को वार्ष‍िक रखरखाव (ओवरहॉलिंग) के लिए क्रमशः 20 जून एवं 1 जुलाई को विद्युत उत्पादन से पृथक कर दिया गया था। सामान्यतः एक यूनिट की ओवरहॉलिंग में 30 दिन का समय लगता है लेकिन बरगी की यूनिट नंबर 1 को 20 दिन और यूनिट नंबर 2 को सिर्फ 8 दिन में ओवरहॉलिंग करके विद्युत उत्पादन के लिए तैयार कर दिया गया। बरगी में किसी बाहरी एजेंसी की सहायता के बिना ओवरहॉलिंग का कार्य विद्युत गृह के अभियंताओं व तकनीकी कार्मिकों द्वारा करके दोनों यूनिट को निर्धारित समय से पूर्व क्रियाशील कर दिया गया। इस कार्य को करने के लिए अंडर वाटर में जाकर उपकरण जांचे गए और दोनों यूनिट के पेनल बदले गए। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी की जल विद्युत गृहों का जून व जुलाई माह में वार्षिक रखरखाव (ओवरऑलिंग) होता है। उसी प्रकार रानी अबंती बाई सागर जल विद्युत गृह बरगी की दोनों यूनिट को बारी-बारी से ओवरहॉलिंग के लिए योजनानुसार बंद किया गया। जल विद्युत गृह की दोनों यूनिट से उत्पादन प्रभावित न हो इसके लिए जल संसाधन विभाग से बातचीत कर समन्वय किया गया। जल संसाधन विभाग ने जानकारी दी कि मानसून आने के बाद सामान्य तौर पर बरगी बांध के गेट 15 से 31 जुलाई तक खोले जाते हैं। मध्‍यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने इस जानकारी के आधार पर बरगी का वार्षिक रखरखाव कार्यक्रम तैयार किया। इस वर्ष मानसून के जल्द आने और लगातार बरसात होने पर बरगी जल विद्युत गृह में निर्धारि‍त समय से पूर्व ओवरहॉलिंग कार्य पूर्ण कर जल विद्युत का समुचित उपयोग करने की दृष्टि से दोनों यूनिट से विद्युत उत्पादन शुरु कर दिया गया। वर्तमान में दोनों यूनिट से 41-41 मेगावाट उत्पादन हो रहा है।  

एयरक्राफ्ट मेन्टेनेन्स इंजीनियरिंग बन भरें तकनीक की ऊंची उड़ान

एयरक्राफ्ट मेन्टेनेन्स इंजीनियरिंग एविएशन सेक्टर से संबंधित एक प्रमुख क्षेत्र है, जिसे मेन्टेनेन्स ब्रांच में शामिल किया गया है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें प्रोफेशनल्स को पद व पैसा दोनों मिल रहा है। इसमें कमर्शियल एवं मिलिट्री एयरक्राफ्ट, स्पेस क्राफ्ट, सेटेलाइट एवं मिसाइल आदि की डिजाइनिंग, कंस्ट्रक्शन, डेवलपमेंट, टेस्टिंग, ऑपरेशन एवं मेन्टेनेन्स आदि के बारे में विशेषज्ञता हासिल की जाती है। एयरक्राफ्ट मेन्टेनेन्स इंजीनियर का सीधा संबंध एविएशन डिवीजन से होता है। एयरक्राफ्ट के सफलतापूर्वक टेक ऑफ की जिम्मेदारी भी इन्हीं के जिम्मे होती है। ये इंजीनियर पूरी तरह से सुरक्षा पर फोकस करते हैं, ताकि एयरक्राफ्ट को बिना किसी अवरोध के उड़ाया जा सके। क्या कहती है इंडस्ट्री रिपोर्ट नागरिक उड्डयन मंत्रालय की एक घोषणा के अनुसार इस समय भारतीय एविएशन इंडस्ट्री विश्व की नौवीं सबसे बड़ी एविएशन इंडस्ट्री है तथा 2020 तक इसके तीसरे सबसे बड़े एविएशन मार्केट के रूप में बनने की उम्मीद है। इसी तरह से 2030 तक पहुंचते-पहुंचते इसके पहले स्थान पर काबिज होने का अनुमान है। फिक्की-केपीएमजी रिपोर्ट के अनुसार एविएशन इंडस्ट्री में वर्ष 2017 तक देश में रोजगार में दोगुनी वृद्धि होगी और यह बढ़ कर 1.17 लाख के करीब पहुंच जाएगा। आने वाले समय में इसमें एयरक्राफ्ट मेन्टेनेन्स इंजीनियर पदों के लिए भारी संख्या में प्रोफेशनल्स की आवश्यकता पड़ेगी। बारहवीं के बाद रखें कदम एयरक्राफ्ट मेन्टेनेन्स इंजीनियरिंग तीन वर्षीय ट्रेनिंग कोर्स है। इसमें प्रवेश के लिए छात्रों को 10़2 की परीक्षा फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथ्स के साथ उत्तीर्ण होना आवश्यक है। छात्र की आयु 23 वर्ष से अधिक न हो। सैलरी इसमें ज्यादातर सैलरी पैकेज एकेडमी करियर एवं काम के बारे में जानकारी पर निर्भर करता है। शुरू शुरू में इसमें प्रोफेशनल्स को करीब तीन से चार लाख रुपए सालाना का पैकेज मिलता है। अनुभव बढ़ने के साथ सैलरी भी बढ़ती जाती है। प्राइवेट सेक्टर में सैलरी अधिक मिलती है। सुविधाओं के मामले में सरकारी क्षेत्र आगे है। फीस इसमें फीस की राशि संस्थान पर निर्भर करती है। अमूमन तीन साल के कोर्स में कुल छह सेमेस्टर होते हैं। इनकी फीस करीब दो से ढाई लाख रुपए होती है। इसके अलावा हॉस्टल, यूनिफार्म, खाने, टूल-किट व अन्य खर्चे भी शामिल हैं। छात्र किस्तों में भी फीस दे सकते हैं। एजुकेशन लोन छात्रों को देश-विदेश में अध्ययन के लिए प्रमुख राष्ट्रीयकृत, प्राइवेट अथवा विदेशी बैंकों द्वारा एजुकेशन लोन प्रदान किया जाता है। यह राशि पांच लाख से लेकर अधिकतम 20 लाख रुपए तक हो सकती है। छात्र को जिस संस्थान में एडमिशन लेना है, वहां से जारी एडमिशन लेटर, हॉस्टल खर्च, ट्यूशन फीस एवं अन्य खर्चों का ब्योरा बैंक को देना होता है। अंतिम निर्णय बैंक को करना होता है। बैंक सभी कागजात जांचता है।  

एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत मनरेगा का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण

परियोजना अधिकारी, ब्लॉक के एपीओ, एसआरएलएम के डीपीएम का हुआ प्रशिक्षण भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा “एक बगिया मां के नाम’’ परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर शनिवार को भोपाल में राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश के सभी 313 जनपद पंचायत के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, 52 जिलों परियोजना अधिकारी मनरेगा एवं ग्रामीण आजीविका के डीपीएम शामिल हुए। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी सभागार, विकास भवन अरेरा हिल्स, भोपाल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को आयुक्त मनरेगा-संचालक वाटर शेड मिशन श्री अवि प्रसाद एवं आयुक्त एसआरएलएम श्रीमती हर्षिका सिंह ने अधिकारियों को “एक बगिया मां के नाम’’ परियोजना के बारे में जानकारी दी और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। प्रशिक्षण के दौरान अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, परियोजना अधिकारी एवं डीपीएम एसआरएलएम को संयुक्त रूप से पारदर्शिता के साथ एक बगिया मां के नाम परियोजना के लिए हितग्राहियों का चयन, परियोजना के उद्देश्य और लाभ के बारे में जानकारी दी। साथ ही अधिकारियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया और उनके सुझाव भी प्राप्त किए गए। बैनर का किया विमोचन राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मनरेगा परिषद द्वारा तैयार कराए गए “एक बगिया मां के नाम’’ प्रोग्राम बैनर का मनरेगा आयुक्त श्री अवि प्रसाद एवं आयुक्त श्रीमती हर्षिका सिंह ने विमोचन किया। एक बगिया मां के नाम परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर अब तक 2100 से अधिक इंजीनियर एवं 600 से अधिक कृषि सखी को तकनीकी रूप से प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री और उपयंत्री (आरईएस एवं मनरेगा), डीपीएम एसआरएलएम शामिल है। तकनीकी रूप से किया गया दक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञों द्वारा परियोजना अधिकारी, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा) एवं डीपीएम एसआरएल को व्यक्तिगत / फलोद्यान के लिये तैयारी, भूमि चयन, पौधों की प्रजाति चयन, देखभाल, सुरक्षा एवं शतप्रतिशत उत्तरजीविता सुनिश्चित करते हुए वैज्ञानिक तकनीकियों का उपयोग पर पौधरोपण की बारीकियों पर प्रशिक्षण दिया गया। पौधरोपण के कार्य में अत्याधुनिक तकनीक (सिपरी सॉफ्टवेयर) का उपयोग किया जाएगा। पौधे लगाने से पहले जिले की जलवायु, मिट्टी का परीक्षण, एग्रो क्लाइमेट जोन के आधार पर पौधों की प्रजातियों का चयन, स्थल चयन, पानी की उपलब्धता सहित अन्य जरूरी गतिविधियों का पता लगाया जाएगा। साथ ही, अगर सॉफ्टवेयर यह बताता है कि संबंधित जगह पर पौधे नहीं लगाए जा सकते, वहां पौधरोपण नहीं होगा।  

निपाह वायरस पर सख्त कदम: केरल सरकार की तैयारियों पर बोले राजन खोबरागड़े

तिरुवनंतपुरम केरल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजन खोबरागड़े ने कहा कि निपाह के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने रोकथाम के लिए कई रणनीतियां तैयार की हैं और उन्हें लागू किया है। डॉ. खोबरागड़े ने कल यहां आयोजित 'निपाह और अन्य जूनोटिक स्पिलओवर-रोकथाम के लिए स्वास्थ्य रणनीतियों का एकीकरण' विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ये टिप्पणियां कीं और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। जंगली जानवरों से मनुष्यों में रोगजनकों के संचरण को ‘जूनोटिक स्पिलओवर’ कहा जाता है। उन्होंने 2019 से राज्य को प्रभावित करने वाली महामारियों का पता लगाने एवं उनकी रोकथाम करने के राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए वर्तमान परिदृश्य में ‘वन हेल्थ’ अवधारणा के महत्व पर प्रकाश डाला और राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए उन्नत वायरोलॉजी संस्थान जैसे संस्थानों से सहयोग मांगा। यह सम्मेलन संक्रामक रोग विभाग, सरकारी मेडिकल कॉलेज, तिरुवनंतपुरम और केरल वन हेल्थ सेंटर फॉर निपाह रिसर्च एंड रेजिलिएंस के सहयोग से आयोजित किया गया था। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की संयुक्त निदेशक डॉ. सिम्मी तिवारी ने उन्नत विषाणु विज्ञान संस्थान (आईएवी) की स्थापना के लिए केरल सरकार को बधाई दी और कहा कि संस्थान ने पहले ही विषाणु विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पहचान बना ली है और संस्थान राज्य तथा देश दोनों में सार्वजनिक स्वास्थ्य और महामारी की तैयारी में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने राज्य को अक्सर प्रभावित करने वाले जूनोटिक स्पिलओवर संक्रमणों का समय पर पता लगाने के लिए नैदानिक सुविधाओं का विस्तार करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसमें विभिन्न विषयों पर सत्र प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा दिए गए।  

दिल्ली में चार मंजिला इमारत गिरने से दर्दनाक हादसा, छह लोगों की मौत

नई दिल्ली  दिल्ली के सीलमपुर इलाके में एक चार मंजिला इमारत जमींदोज हो गई। मलबे में दबने से छह लोगों की मौत हो गई। वहीं, अब किसी और के मलबे में दबे होने की आशंका न के बराबर है। दिल्ली के सीलमपुर इलाके में दिल दहला देने वाला हादसा हुआ है। यहां अचानक चार मंजिला इमारत भरभराकर ढह गई। मलबे में आठ लोगों को बाहर निकाल लिया गया है। मलबे में दबने से छह लोगों की मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। फिलहाल पुलिस, दमकल और एनडीआरएफ की टीमें राहत व बचाव कार्य में जुटी हैं। स्थानीय लोग मलबा हटाने में मदद कर रहे हैं। छह लोगों की मौत की बात सामने आई है, पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, एक महिला और एक पुरुष का शव थोड़ी देर पहले मलबे से निकली गई है।पुलिस की ओर से अभी दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग एनडीआरएफ, नगर निगम समेत तमाम बचाव दल मौके पर मौजूद है, स्थानीय लोगों की भारी भीड़ मौके पर जुटी हुई है। इलाका बेहद घनी आबादी और संकरी गलियों वाला होने के कारण रेस्क्यू में कठिनाई हो रही है। पुलिस के मुताबिक, आज सुबह करीब 7.04 मिनट पर वेलकम के पास एक चार मंजिला इमारत के ढहने की सूचना प्राप्त हुई। ए-ब्लॉक, गली नंबर 5, जनता कॉलोनी में घटनास्थल पर पहुंचने पर पुलिस टीम ने पाया कि इमारत की तीन मंजिलें ढह गई थीं। अग्निशमन विभाग और अन्य एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और बचाव अभियान जारी है। अब तक आठ लोगों को निकाला जा चुका है। सात को जेपीसी अस्पताल और एक को जीटीबी अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया। उत्तर-पूर्वी जिले के एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा ने बताया, "हमें सुबह सूचना मिली कि वेलकम इलाके की जनता कॉलोनी की गली नंबर 5 में एक तीन मंजिला इमारत गिर गई है। यह इमारत मतलूफ नाम के व्यक्ति की थी। इसके सामने वाली इमारत को भी नुकसान पहुंचा है। पुलिस, एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस और स्थानीय लोग मौके पर काम कर रहे हैं।" अनीस अहमद अंसारी, जिनका घर इमारत गिरने से क्षतिग्रस्त हुआ, ने बताया, "सब लोग सो रहे थे, तभी सुबह करीब 7 बजे मेरे घर के एक तरफ की इमारत गिर गई और उसका मलबा मेरे घर पर आ गिरा। अचानक बिजली गुल हो गई। सभी लोग बचाव कार्य में लगे हुए हैं।" बिल्डिंग के मलबे से निकाले गए लोग 1. परवेज (32) पुत्र अब्दुल 2. नावेद, (19) पुत्र अब्दुल 3. सिजा (21) पत्नी परवेज़ 4. दीपा (56) पत्नी गोविंद 5. गोविंद (60) पुत्र राम चरण 6. रवि कश्यप (27) पुत्र राम चरण 7. ज्योति (27) पत्नी रवि कश्यप 8. अहमद (14 महीने) पुत्र परवेज घटनास्थल पर पहुंचे मंत्री कपिल मिश्रा दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, "यहां एनडीआरएफ की टीम भी मौजूद है लेकिन यह इतनी पतली गली है कि यहां हाथों से मलबा निकालने के अलावा कोई और दूसरा उपाय नहीं है। यहां राहत कार्य करना बहुत मुश्किल है लेकिन हम सभी चाहते हैं कि यहां से जल्द से जल्द मलबा निकल जाए। आशंका है कि मलबे में कुछ लोग फंसे हुए हैं तो हम प्रयास कर रहे हैं कि उन्हें सकुशल निकाला जा सके। यह बहुत दुखद घटना है और यहां अभी तक 2 लोगों की मौत की सूचना है।" कल आजाद मार्केट इलाके में गिरी थी बिल्डिंग, एक की मौत आजाद मार्केट इलाके में मेट्रो के जनकपुरी पश्चिम-आरके आश्रम मार्ग कॉरिडोर के लिए टनल निर्माण क्षेत्र में जर्जर इमारत ढह गई। हादसे में मनोज शर्मा (45) की मौत हो गई। इस मामले में बाड़ा हिंदूराव थाना पुलिस ने लापरवाही से मौत की धारा में प्राथमिकी दर्ज की है। वहीं दिल्ली मेट्रो की ओर से मनोज के परिजनों को पांच लाख की आर्थिक सहायता की बात कही गई है। मेट्रो प्रबंधन ने भी मामले में जांच शुरू कर दी है।