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रेत ढोने पर कार्रवाई: 18 ट्रैक्टर जब्त, पीएम आवास योजना की छूट का हवाला देकर एसडीएम दफ्तर पहुंचे वाहन मालिक

गरियाबंद देवभोग तहसील में बहने वाले तेल नदी से अवैध रेत परिवहन में लगे 18 ट्रैक्टरों को आज माइनिंग विभाग की टीम ने जब्त किया. जिला खनिज अधिकारी रोहित साहू के नेतृत्व में यह कार्रवाई हुई. सभी जब्त वाहनों को देवभोग थाना के सुपुर्द किया गया है. इस कार्रवाई के बाद ट्रैक्टर वाहन मालिकों ने कार्रवाई का विरोध भी किया है. समाधान के लिए एसडीएम दफ्तर भी पहुंचे पर नियम का हवाला देकर अफसरों ने कार्रवाई को जायज ठहराया. पीएम आवास के लिए मिली थी छूट कार्रवाई रुकवाने एसडीएम दफ्तर पहुंचे ट्रैक्टर मालिक प्रह्लाद बीसी, सुशील पांडे ने कहा कि ट्रैक्टर मालिकों की दलील है कि सरकार ने खुद विधानसभा से पीएम आवास के लिए रेत परिवहन को छूट देने का ऐलान किया था, लेकिन कार्रवाई क्यों की जा रही है. सिनापली के विद्याधर ध्रुव समेत कुछ चालकों ने पंचायत का वह प्रमाण पत्र भी दिखाया, जिसमें आवास हितग्राहियों के लिए परिवहन का जिक्र किया गया था, लेकिन इनकी सुनवाई नहीं हुई. एकतरफा कार्रवाई का आरोप, भंडारण पर उठा सवाल 10 जून को रेत परिवहन बंद होने के बावजूद यहां कुछ रेत गिरोह द्वारा प्रति ट्रैक्टर 300 रुपए की अवैध उगाही की जा रही थी. कुछ को 600 रुपए की भंडारण रॉयल्टी पर्ची दी गई, लेकिन परिवहन भंडारण स्थल के बजाए रेत घाट से हो रही थी. यहां तक कि पुरना पानी घाट में रात के अंधेरे में फोकलेन लगाकर हाइवा से बेधड़क सप्लाई हो रही थी. इसकी शिकायत ऊपर तक हुई. इस शिकायत के बाद एक गुट ने ट्रैक्टर में हो रहे परिवहन की शिकायत कर दी. आज माइनिंग की टीम दो शिकायतों के आधार पर कार्यवाही करने पहुंची पर भंडारण और अवैध उगाही की शिकायत पर कार्रवाई नहीं की. जिला खनिज अधिकारी बोले – अवैध उगाही पर भी कार्रवाई करेंगे मामले में जिला खनिज अधिकारी रोहित साहू ने दो प्रकार से हुई शिकायत की पुष्टि की है. रोहित साहू ने कहा कि फिलहाल कुम्हड़ाई घाट पर अवैध परिवहन करने वाले ट्रैक्टरों पर कार्रवाई की गई है. आगे पुरना पानी घाट में होने वाले अवैध उगाही की भी जांच कर उचित कार्रवाई करेंगे. ट्रैक्टर के चलते बंद हो गया था हाईवा कारोबार ट्रैक्टरों के दौड़ने से हाईवा वाले बड़े रसूखदारों का कारोबार पूरी तरह से बंद हो गया था. इन दिनों ज्यादातर निर्माण पीएम आवास का चल रहा है. ऐसे में गांव गांव में छोटे हितग्राही कम कीमतों पर आसानी से रेत हासिल कर रहे थे. अब ट्रैक्टरों पर लगी रोक के बाद रात के अंधेरे का बड़ा अवैध कारोबार फिर से शुरू हो जाएगा. प्रति हाईवा 10 से 15 हजार के बीच सप्लाई की जाएगी. देवभोग में जिस समय भंडारण की अनुमति दी गई उस समय तक वैध खदान शुरू नहीं हो सका था, लेकिन बंद होने से पहले महज 10 दिनों तक वैध खदान जारी रहा. नियम अनुसार विभाग ने भंडारण स्थल का पूर्व और खदान बंद होने के बाद का सत्यापन कैसे किया है. इस पर भी ट्रैक्टर मालिकों ने सवाल खड़ा कर दिया है.

बारिश और बाढ़ बनी आफत: पाकिस्तान में 116 की दर्दनाक मौत

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने बताया कि देश में मानसून की भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ ने 26 जून से अब तक 116 लोगों की जान ले ली है। इसके अलावा, 253 लोग घायल हुए हैं। एनडीएमए की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में बारिश से संबंधित घटनाओं में 5 और लोगों की मौतें हुई हैं, जबकि 41 लोग घायल हुए हैं। समाचार के अनुसार, सबसे ज्यादा 44 मौतें पूर्वी पंजाब प्रांत में हुई हैं। इसके बाद उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा में 37, दक्षिणी सिंध में 18 और दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान में 16 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में 1 मौत हुई और 5 लोग घायल हुए, जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान और इस्लामाबाद में कोई हताहत नहीं हुआ है। एजेंसी ने पाकिस्तान के कई राज्यों के लिए मौसम संबंधी चेतावनी जारी की है। एनडीएमए के मुताबिक, पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों में गुरुवार तक भारी बारिश और बाढ़ की आशंका जताई गई है। पिछले सप्ताह प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) ने खैबर पख्तूनख्वा में 11 से 17 जुलाई तक भारी बारिश का अनुमान जताया था, जिससे बाढ़ का खतरा और भी बढ़ सकता है। पाकिस्तान में मानसून जून से सितंबर तक रहता है और हर साल भारी बारिश से बाढ़, भूस्खलन और विस्थापन होता है। खासकर घनी आबादी और खराब जल निकासी वाले क्षेत्रों में ये समस्याएं बढ़ जाती हैं। सिंध के थारपारकर, मीरपुर खास, सांघर, सक्खर, लरकाना, दादू, जैकोबाबाद, खैरपुर और शहीद बेनजीराबाद में 14 से 16 जुलाई तक बारिश और तूफान के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान है। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'डॉन' के अनुसार, मौसम विभाग ने इस्लामाबाद, रावलपिंडी, गुजरांवाला, लाहौर, सियालकोट, सरगोधा, फैसलाबाद, खानेवाल, मुल्तान, साहिवाल, ओकारा, बहावलपुर, बहावलनगर, वेहारी, नौशेरा और पेशावर के लिए बाढ़ की चेतावनी जारी की है। 26 जून से 14 जुलाई के बीच बिजली का करंट लगना बारिश से जुड़ी मौतों का प्रमुख कारण रहा है। इसके बाद अचानक आई बाढ़ ने तबाही मचाई है। जून के अंत में एक दुखद घटना में 13 पर्यटकों की नदी में बहने से मौत हो गई थी। अधिकारियों ने निचले और जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। साथ ही बचाव और राहत कार्य प्रभावित क्षेत्रों में जारी हैं। हालांकि, सिंध सरकार ने नालों और सीवर लाइनों की सफाई के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, जिससे कई इलाके जलमग्न हैं, जबकि 15 जुलाई से फिर से बारिश होने की संभावना है। पाकिस्तानी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सिंध के हैदराबाद में घनी आबादी वाले इलाकों में मुख्य नालियां कचरे से भरी हैं और नालियों के किनारे की टूटी या गायब दीवारें ठीक नहीं की गई हैं। इस वजह से स्थानीय जनता काफी चिंतित है। मौसम विभाग ने सिंध सरकार को बारिश की चेतावनी दी थी, जिसके बाद उच्च-स्तरीय बैठकों में आयुक्तों, उपायुक्तों और स्थानीय नगर निकायों को शहरी बाढ़ की संभावना के लिए व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। इससे पहले, सिंध स्थानीय निकाय विभाग ने 10 जुलाई को हैदराबाद नगर निगम सहित विभिन्न नगर निगमों को जरूरी उपाय करने का निर्देश दिया था, लेकिन 48 घंटे बीतने के बाद भी कोई जमीन पर तैयारी शुरू नहीं हुई। सरकार से हर महीने 12 लाख रुपए अनुदान मिलने के बावजूद संबंधित यूनियन समितियों ने इस स्थिति पर ध्यान नहीं दिया। वेतन और बिजली बिलों के भुगतान के बाद भी नाली रखरखाव जैसे जरूरी सामुदायिक कार्यों के लिए यह राशि उपयोग नहीं की गई। विडंबना यह है कि हर साल सिंध सरकार और स्थानीय निकाय आपातकालीन बैठकें करते हैं और बारिश की तैयारी योजनाएं बनाते हैं, जिसके लिए बजट में लाखों रुपए आवंटित किए जाते हैं। हालांकि, वास्तव में एक भी नाले की पूरी तरह से सफाई नहीं की गई और हर साल नालों की सफाई के नाम पर फर्जी बिल भी बनाए जाते हैं।

शिवसेना महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष समेत पूरी टीम कांग्रेस में हुई शामिल, दीपक बैज ने किया स्वागत

 रायपुर छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत शिवसेना महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष और उनकी पूरी टीम ने आज कांग्रेस पार्टी में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। यह शामिल कार्यक्रम राजधानी रायपुर स्थित कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में हुआ, जहां सभी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज से मुलाकात की। दीपक बैज ने इस अवसर पर सभी नवप्रवेशी सदस्यों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “शिवसेना महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष और उनकी पूरी टीम का कांग्रेस में शामिल होना हमारे लिए गर्व का विषय है। निश्चित रूप से इससे कांग्रेस पार्टी की ताकत और व्यापकता में वृद्धि होगी।” उन्होंने आगे कहा कि यह निर्णय कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी की रीति-नीति व विचारधारा से प्रभावित होकर लिया गया है। दीपक बैज ने विश्वास जताया कि महिला विंग की भागीदारी से कांग्रेस की जमीनी पकड़ और संगठनात्मक शक्ति को मजबूती मिलेगी, जिससे आगामी समय में पार्टी और अधिक सशक्त रूप से उभरेगी।

छत्तीसगढ़ में मलेरिया के खिलाफ निर्णायक बढ़त — 61.8% बिना लक्षण वाले मरीज समय पर पहचाने गए

  बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा-सुकमा में शासन की रणनीति सफल — दूरस्थ अंचलों में भी पहुँच रही स्वास्थ्य सेवा सक्रिय निगरानी, घर-घर स्क्रीनिंग और सामुदायिक भागीदारी से गढ़ा नया स्वास्थ्य मॉडल रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान (12वां चरण) की अब तक की प्रगति से स्पष्ट है कि राज्य शासन की घर-घर स्क्रीनिंग रणनीति और सक्रिय जनसंपर्क के माध्यम से मलेरिया की जड़ पर प्रहार किया जा रहा है। 25 जून से 14 जुलाई 2025 तक हुए सर्वेक्षण में 1884 मलेरिया पॉजिटिव मरीजों की पहचान की गई, जिनमें से 1165 मरीज (61.8%) बिना लक्षण (Asymptomatic) वाले थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार की नीति स्पष्ट है—बीमारी की प्रतीक्षा मत करो, बीमारी से पहले पहुँचो। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि यह अभियान राज्य को मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा। कुल 1,39,638 लोगों की मलेरिया जांच की गई। 1884 लोग पॉजिटिव पाए गए, जिनमें से 1165 (61.8%) बिना किसी लक्षण के थे — यानी यदि ये स्क्रीनिंग नहीं होती, तो संक्रमण आगे बढ़ता। कुल मामलों में से 75% से अधिक बच्चे हैं, जो विशेष रूप से संवेदनशील वर्ग हैं। 92% से अधिक मलेरिया केस Plasmodium falciparum (Pf) प्रकार के हैं — जिसकी त्वरित पहचान से गंभीर जटिलताओं को टाला गया। दंतेवाड़ा जैसे दूरस्थ और भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण जिले में 12.06% लक्ष्य प्राप्ति दर और 706 मलेरिया पॉजिटिव मामलों की पहचान एक बड़ी सफलता है। खास बात यह है कि इनमें से 574 मरीज बिना लक्षण वाले (Asymptomatic) थे, जिन्हें शासन की सक्रिय रणनीति के कारण समय रहते उपचार उपलब्ध कराया गया। यह दिखाता है कि जंगल क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य तंत्र की पहुँच, निगरानी, और सेवा वितरण प्रभावशाली तरीके से हो रहा है। सुकमा में 15,249 व्यक्तियों की जांच के दौरान 372 मलेरिया पॉजिटिव केस मिले, जिनमें से 276 मरीज बिना लक्षण वाले थे। यह आँकड़ा स्पष्ट रूप से बताता है कि शासन की प्रो-एक्टिव स्क्रीनिंग के चलते साइलेंट संक्रमण के चक्र को तोड़ा जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में भी मेडिकल एक्सेस और सामुदायिक भागीदारी के चलते संक्रमण पर नियंत्रण पाया जा रहा है — यह प्रशासन की रणनीतिक सफलता है। मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 12वें चरण अंतर्गत 27266 घरों में स्क्रीनिंग टीमों की पहुँच हुई। 1247 गर्भवती महिलाओं की जाँच की गई, जिनमें से मात्र 10 पॉजिटिव पाई गईं – यानी केवल 0.08%। LLIN (लार्ज लास्टिंग मच्छरदानी) का उपयोग 92% घरों में सुनिश्चित हुआ। Indoor Residual Spray कवरेज 68.73% तक पहुँचा। 614 घरों में मच्छर लार्वा मिलने पर त्वरित कार्रवाई की गई। यह अभियान दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि जागरूकता, समयबद्धता और पहुँच का नाम है। शासन द्वारा वैज्ञानिक पद्धति से स्क्रीनिंग, मच्छर नियंत्रण, जागरूकता और फॉलोअप व्यवस्था के संयुक्त प्रयास से ही संभव हो सका है कि 61.8% बिना लक्षण वाले मरीजों को इलाज मिला और संक्रमण की कड़ी टूट सकी। छत्तीसगढ़ सरकार आने वाले समय में इस मॉडल को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि राज्य को मलेरिया मुक्त बनाना सिर्फ लक्ष्य नहीं, बल्कि वास्तविकता बने।

मंत्री पटेल ने कहा- मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन जल संकट की आहट को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि ग्रामीण विकास एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे पंचायत प्रतिनिधियों को नियत और न्याय की भावना से स्वीकार करना होगा। मंत्री श्री पटेल धार में आयोजित पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मंत्री श्री पटेल ने बताया कि सांसद रहते हुए उन्होंने सदैव कृषि और ग्रामीण विकास विषयक संसदीय समितियों में रहकर देश भर में इन विषयों को गहराई से समझने का प्रयास किया। प्रदेश में मंत्री के रूप में उन्हें इन नीतियों को लागू करने का अवसर मिला है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि अपने क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों, वृक्षारोपण और योजनाओं का रिकॉर्ड पारदर्शिता से रखें। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का आहवान मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन जल संकट की आहट को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। जल संरक्षण के लिये वृक्षारोपण ही सबसे स्थायी उपाय है। उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत व्यापक पौधारोपण का आहवान किया और कहा कि “जो पौधा आप लगाते हैं, उसकी देखभाल भी आपकी व्यक्तिगत जवाबदेही है।” उन्होंने कहा कि “वृक्षारोपण अभियान 2025” में महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन को भी बल मिलेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री पटेल ने कहा कि पुराने, जीर्ण-शीर्ण पंचायत भवनों को तोड़कर 48 लाख और 37 लाख रुपये की लागत से नए भवनों की मंजूरी दी गई है। कोई भी पंचायत अब भवन विहीन नहीं रहेगी। धार जिले में इस वर्ष 81 पंचायत भवन और 85 पुलियों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। चौथे चरण की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत अब मजरे-टोले को भी जोड़ा जा सकेगा, जिसके लिए राजस्व ग्राम की शर्त हटा दी गई है। केन्द्रीय राज्यमंत्री श्रीमती सवित्री ठाकुर ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सरकार की योजनाओं को गाँव-गाँव तक पहुँचाने का कार्य करें और प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में जुट जाएँ। सम्मेलन में अतिथियों द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया। सम्मेलन में जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेढ़ा, विधायक नीना वर्मा और कालूसिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव,नीलेश भारती एवं चंचल पाटीदार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में अधिकारी सहित बड़ी संख्या में सरपंच व पंच उपस्थित रहे। 

पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर रोक, MP हाईकोर्ट करेगा व्यापक जांच और जवाबदेही तय

भोपाल /जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान एक अहम् फैसला सुनाते हुए पैरामेडिकल कॉलेजों को दी जा रही मान्यता प्रक्रिया पर रोक लगा दी है , इस आदेश के बाद कॉलेज संचालकों में हड़कंप मच गया है, बता दें मध्य प्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों को लंबे इन्तजार के बाद मान्यता मिलने जा रही थी जिसे हाई कोर्ट ने रोक दिया है। नर्सिंग घोटाले के बाद अब पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता और एडमिशन में गड़बड़ियों को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर की डिवीज़नल बेंच ने एक महत्वपूर्ण स्थगन आदेश पारित किया है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा दाखिल की गई नर्सिंग मामले की जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पिछले दिनों एक आवेदन पेश कर कोर्ट को बताया गया था कि नर्सिंग की तरह पैरामेडिकल कॉलेजों के मान्यताओं में भी अनियमितताएँ की जा रही है। 2023-24 एवं 2024-25 सत्र के लिए मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल दे रहा मान्यता  याचिका में कहा गया कि एमपी पैरामेडिकल काउंसिल द्वारा निकल चुके एकेडमिक सत्रों (2023-24 एवं 2024-25) की मान्यता भूतलक्षी प्रभाव से दी जा रही है और बगैर मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से सम्बद्धता प्राप्त किए सरकारी तथा निजी पैरामेडिकल कॉलेजों के द्वारा अवैध रूप से छात्रों के प्रवेश दिए जा रहे हैं, नर्सिंग घोटाले की जांच में जिन कॉलेजों को सीबीआई ने अनसूटेबल बताया है उन्हीं बिल्डिंग में पैरामेडिकल काउंसिल अब पैरा मेडिकल कॉलेजों की मान्यता दे रही है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूरी मान्यता प्रक्रिया पर रोक लगाई   पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता के आवेदन पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने इसे अलग जनहित याचिका (PIL) के रूप में पंजीबद्ध करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने इस गंभीर विषय पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल के चेयरमैन व रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए थे, आज की सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य शासन के उस आदेश पर रोक लगा दी है जो पैरामेडिकल काउंसिल को एकेडमिक सत्रों (2023-24 एवं 2024-25) की मान्यता भूतलक्षी प्रभाव से देने की अनुमति देता था। 24 जुलाई को होगी अगली सुनवाई  मामले में पैरामेडिकल काउंसिल के चेयरमैन और रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाया गया है बताते चलें कि मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ राजेंद्र शुक्ला, पैरामेडिकल काउंसिल के पदेन चेयरमैन हैं । इस मामले की अगली सुनवाई सभी नर्सिंग मामलों के साथ 24 जुलाई को होगी ।

अयातुल्ला अली खामेनेई ने इजरायल पर तीखा हमला बोला- कैंसर जैसा ट्यूमर है इजरायल

तेहरान ईरान और इजरायल के बीच कई दिनों तक चली जंग में फिलहाल सीजफायर लागू है, लेकिन जुबानी हमले जारी हैं। ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने बुधवार को इजरायल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इजरायल तो कैंसर जैसे ट्यूमर की तरह है, जिसे जड़ से खत्म करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इजरायल एक कुत्ते की तरह है, जो अमेरिका के पट्टे से बंधा है और उसके कहने पर ही सब कुछ करता है। इस तरह खामेनेई ने इजरायल के बहाने अमेरिका को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके पालतू इजरायल से लड़ने में कोई बुराई नहीं है और उससे पीछे नहीं हटना चाहिए। यही नहीं खामेनेई का कहना है कि भले ही सीजफायर है, लेकिन इजरायल पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कभी भी इजरायल हम पर हमला कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान पर कोई हमला हुआ तो हम सख्ती के साथ जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पिछले महीने हुई 12 दिनों की जंग में ईरान ने इजरायल को जमकर जवाब दिया था और अब यदि फिर से अटैक हुआ तो हम पीछे नहीं हटेंगे। बता दें कि 12 दिनों की जंग के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान किया था और लंबी जद्दोजहद के बाद ईरान ने इसे स्वीकार कर लिया था। इस सीजफायर से पहले अमेरिका ने उसके परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। अमेरिका का कहना है कि इस हमले में ईरान का यूरेनियम भंडार कम हुआ और उसे नुकसान पहुंचा है। वहीं इजरायली एजेंसियों का कहना है कि अब भी ईरान के पास इतना भंडार मौजूद है कि कुछ महीनों के अभियान में ही वह पहले जैसी ताकत हासिल कर सकता है। बता दें कि इजरायल ने अब सीरिया पर हमला किया है। इसके अलावा लेबनान पर भी अटैक किए हैं और गाजा में भी सीजफायर की स्थिति नहीं बन पा रही है। उसने एक खतरनाक प्रस्ताव रखते हुए यह भी कहा है कि यदि गाजा में बसे लोग दक्षिण के एक इलाके में ही सीमित हो जाएं तो जंग थम सकती है।  

राखी सिर्फ भाई के लिए नहीं! जानिए शास्त्रों में किन-किन को बांधी जा सकती है राखी

रक्षाबंधन, भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक, भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण त्योहार है. सदियों से यह परंपरा चली आ रही है कि बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं, और भाई अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं. शास्त्रों में रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर क्या कहा गया है? आइए जानते हैं कि बहन, भाई के अलावा और किस-किस को राखी बांध सकती है. भगवान को राखी बांधने की परंपरा राखी बांधने का सबसे पहला अधिकार ईश्वर को माना गया है. कई बहनें सबसे पहले भगवान कृष्ण, शिव या गणेश को राखी बांधती हैं और फिर अपने भाई को. यह आस्था की अभिव्यक्ति है कि भगवान पहले रक्षक हैं. बहनें बहनों को भी बांधती हैं राखी यदि किसी स्त्री का भाई न हो या वह बहनों के साथ ही पली-बढ़ी हो, तो वह अपनी बड़ी बहन को राखी बांध सकती है. यह बहनत्व, प्रेम और साथ निभाने का प्रतीक होता है. गुरु या शिक्षक को राखी भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान के समान माना गया है. शिष्य यदि अपने गुरु को राखी बांधता है तो वह यह संकेत देता है कि वह गुरु की रक्षा, सेवा और सम्मान का वचन देता है. पुजारी, साधु-संतों को राखी कई स्थानों पर महिलाएं साधु-संतों या मंदिर के पुजारियों को राखी बांधती हैं. यह धार्मिक विश्वास और आध्यात्मिक संबंध को दर्शाता है. यह परंपरा विशेषकर वृंदावन, मथुरा और हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थलों में देखने को मिलती है. रक्षासूत्र के रूप में सैनिकों को राखी रक्षाबंधन के अवसर पर बहनें भारतीय सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को राखी भेजती हैं या स्वयं जाकर बांधती हैं. यह समाज की रक्षा करने वाले रक्षक के प्रति श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है. पेड़ों को राखी बांधना पर्यावरण संरक्षण की भावना को बढ़ावा देने के लिए कई लोग वृक्षों को राखी बांधते हैं. यह संकल्प होता है कि हम पेड़ों की रक्षा करेंगे और पर्यावरण को सुरक्षित रखेंगे. रक्षाबंधन 2025 कब है? पंचांग के अनुसार, सावन माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 8 अगस्त को देर रात 2 बजकर 12 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन अगले दिन 9 अगस्त को रात 1 बजकर 24 मिनट होगी. उदया तिथि के अनुसार, रक्षाबंधन का त्योहार इस बार 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा.

एकनाथ शिंदे की नई रणनीति: भीमराव आंबेडकर के पोते के सहारे दलित वोट बैंक पर नजर

मुंबई मराठी बनाम हिंदी के विवाद के बीच उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे दो दशक से ज्यादा की दूरी के बाद साथ आए हैं। बीते सप्ताह दोनों ने एक रैली की थी और मंच पर हाथ उठाकर संदेश दिया कि हम साथ-साथ हैं। इस एकता से एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना को लेकर सवाल खड़े हुए कि आखिर अब उनका क्या होगा। वजह यह है कि शिंदे सेना भी मराठी कार्ड की राजनीति कर रही है और अब इसी मुद्दे पर ठाकरे बंधु साथ हैं। ऐसे में एकनाथ शिंदे ने भी अब बड़ा दांव चल दिया है। मराठी एकता के बरक्स उन्होंने दलित दांव चल दिया है। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के पोते आनंदराज आंबेडकर की पार्टी रिपब्लिकन सेना से हाथ मिला लिया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने आनंदराज अंबेडकर की रिपब्लिकन सेना के साथ गठबंधन किया है। शिंदे और अंबेडकर ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन की घोषणा की। एकनाथ शिंदे ने कहा कि दोनों ताकतें एक साथ आ रही हैं। इसीलिए आज बहुत खुशी का दिन है। उन्होंने कहा, 'सड़कों पर अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले दो संगठन आज एक साथ आ रहे हैं। एक है बालासाहेब की शिवसेना और दूसरी है भारत रत्न बाबासाहेब अंबेडकर की रिपब्लिकन सेना। उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे ने विश्वास जताया कि हम साथ मिलकर काम करेंगे। उनके बगल में बैठे आनंदराज अंबेडकर ने कहा कि हमारी एकता का निश्चित तौर पर असर दिखेगा। शिंदे ने कहा कि आनंदराज आंबेडकर और मैंने हमेशा कार्यकर्ता के रूप में काम किया है। जब मैं ढाई साल तक मुख्यमंत्री था, तब भी मैं एक आम आदमी था। अब डिप्टी सीएम के रूप में फिर से आम आदमी के लिए समर्पित हो गया हू। उन्होंने कहा कि एक आम आदमी और एक आम कार्यकर्ता होना ही हमारी पहचान है। हमारी प्रतिबद्धता आम आदमी के प्रति है। हमारा रिश्ता आम आदमी से जुड़ा है। आंबेडकर की वजह से ही मैं बन पाया था सीएम: शिंदे उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान ने आम आदमी, वंचितों, शोषितों की प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया है। मेरे जैसा एक आम आदमी मुख्यमंत्री बन सका। यह बाबासाहेब द्वारा लिखे गए संविधान की वजह से ही संभव हुआ। नरेंद्र मोदी जैसा व्यक्ति प्रधानमंत्री बना। यह शक्ति संविधान की है। बाबासाहेब ने दुनिया के कई संविधानों का अध्ययन करने के बाद अपना संविधान लिखा था। दोनों नेताओं ने ऐलान किया कि शिवसेना और रिपब्लिकन सेना आगामी नगर निगम और जिला परिषद चुनाव मिलकर लड़ेंगे। शिवशक्ति और भीमशक्ति की एकता का दिया नारा शिंदे ने शिवशक्ति-भीमशक्ति गठबंधन बनाने की बात की। उनकी कोशिश है कि मराठी वोटों के साथ ही दलित वोटरों को भी साध लिया जाए। बता दें कि भीमराव आंबेडकर के एक और पोते प्रकाश आंबेडकर भी राजनीति में हैं, लेकिन उनका दल अलग है, जिसका नाम है- बहुजन वंचित अघाड़ी।  

2026 से बंद होंगे नए फीचर्स: Microsoft ने इन यूजर्स को दी चेतावनी

नई दिल्ली Microsoft ने घोषणा की है कि वह अगस्त 2026 से Windows 10 यूजर्स के लिए Office ऐप्स में नए फीचर्स देना बंद कर देगा। यह कंपनी का एक और बड़ा कदम है जिसका मकसद यूजर्स को Windows 11 पर ले जाना है। कंपनी चाहती है कि यूजर्स विंडोज 10 के बजाए विंडोज 11 इस्तेमाल करें। हालांकि, सिक्योरिटी अपडेट अक्टूबर 2028 तक मिलते रहेंगे, लेकिन नए फीचर्स का मिलना बंद होने का मतलब है कि लेटेस्ट Office के लिए यूजर्स को अपना ऑपरेटिंग सिस्टम अपग्रेड करना ही होगा। कब बंद होंगे फीचर्स? फीचर्स कब बंद होंगे, यह समय-सीमा यूजर्स के सब्सक्रिप्शनके हिसाब से अलग-अलग है। माइक्रोसॉफ्ट365 पर्सनल और फैमिली यूजर्स को अगस्त 2026 में वर्जन 2608 के साथ नए फीचर्स मिलने बंद हो जाएंगे। वहीं, एंटरप्राइज कस्टमर्स को अक्टूबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच उनके अपडेट चैनल के आधार पर फीचर्स मिलने बंद हो जाएंगे। सभी वर्जन 2608 फीचर सेट पर ही फ्रीज हो जाएंगे, चाहे आपका सब्सक्रिप्शन कोई भी हो। सिक्योरिटी अपडेट जारी, पर नए फीचर मिलना बंद Microsoft का यह फैसला उनकी पिछली घोषणाओं से काफी अलग है। कंपनी ने पहले Office सपोर्ट को Windows 10 की अक्टूबर 2025 की एंड-ऑफ-लाइफ तारीख के साथ ही खत्म करने की योजना बनाई थी, लेकिन यूजर्स के विरोध के बाद इस साल की शुरुआत में उन्होंने यह फैसला बदल दिया था। हालांकि, द वर्ज ने सबसे पहले बताया था कि कंपनी ने शुरुआत में यह नहीं बताया था कि नए फीचर्स 2026 से बंद हो जाएंगे। करना होगा ये काम इस बदलाव का मतलब है कि Windows 10 यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर Office से जुड़ी समस्याओं के लिए सीमित सपोर्ट मिलेगा। माइक्रोसॉफ्ट का आधिकारिक निर्देश है कि ऐसे यूजर्स Windows 11 में अपग्रेड करें। सपोर्ट स्टाफ केवल ट्रबलशूटिंग असिस्टेंस देगा और चेतावनी देगा कि "तकनीकी समाधान सीमित या अनुपलब्ध हो सकते हैं।" नए फीचर्स एक्सेस करने के लिए यूजर्स को विंडोज 11 में अपग्रेड करना होगा। लेटेस्ट Office टूल्स के लिए Windows 11 जरूरी इस कदम से कंपनी चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा यूजर्स Windows 11 का इस्तेमाल करें। भले ही Windows 11 हाल ही में Windows 10 को सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले डेस्कटॉप OS के तौर पर पीछे छोड़ चुका है, फिर भी लाखों डिवाइस अभी भी पुराने सिस्टम पर चल रहे हैं। कंपनी ने अपग्रेड करने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन दिए हैं, जैसे विंडोज बैकअप को इनेबल करने वाले या प्रति डिवाइस $30 का पेमेंट करने वाले Windows 10 यूजर्स के लिए फ्री एक्सटेंडेड सिक्योरिटी अपडेट। जो यूजर्स अपग्रेड नहीं करना चाहते या नहीं कर सकते, उनके लिए Office वेब ऐप्स नए फीचर्स एक्सेस करने का एक ऑप्शन बने रहेंगे। हालांकि, डेस्कटॉप एक्सपीरियंस अगस्त 2026 के बाद स्थिर रहेगा, जिससे एक ऐसा सिस्टम बनेगा जहां आधुनिक Office क्षमताओं के लिए Windows 11 की जरूरत होगी।