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एमपी के विधायकों की होगी बल्ले-बल्ले, तीन हजार वर्गफीट में तीन बेडरूम, हॉल, किचन समेत अन्य सुविधाएं सरकार बनाकर देगी

भोपाल  मध्यप्रदेश के विधायकों के लिए राज्य सरकार फ्लैट बनाएगी। विधायकों के लिए 102 फ्लैट बनाने के फैसले को कैबिनेट ने दस महीने पहले मंजूरी दी थी और अब 21 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इन फ्लैट्स के लिए भूमिपूजन करेंगे।  नए बनने वाले फ्लैट्स में एक विधायक को तीन हजार वर्गफीट एरिया में तीन बेडरूम, एक हॉल और किचन समेत ओपन एरिया भी मिलेगा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने कहा कि स्पेन से लौटने के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विधायक विश्राम गृह परिसर में बनने वाले विधायकों के फ्लैट्स के लिए भूमिपूजन करेंगे। इसके बाद इसका काम शुरू हो जाएगा। इसकी निर्माण एजेंसी लोक निर्माण विभाग ही है। सिंह ने कहा कि अभी विधायक विश्राम गृह में विधायकों को जो कक्ष आवंटित किए जा रहे हैं, वह पर्याप्त स्पेस वाले नहीं हैं। विधायकों से मिलने वालों के हिसाब से यह जगह कम पड़ती है। नए आवास बनाने में इसका विशेष तौर पर ध्यान रखा गया है कि विधायकों की निजता और उनके क्षेत्र के लोगों के साथ संवाद के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया जाए। 1958 में बने भवन को तोड़ा जाएगा विधायक के लिए फ्लैट बनाने जो एरिया चुना गया है वह विधायक विश्राम गृह के खंड एक और पुराने पारिवारिक खंड के साथ शॉपिंग काम्पलेक्स और दुकानों वाला एरिया है। इन्हें तोड़कर नए सिरे से काम किया जाएगा। प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने कहा कि 102 फ्लैट बनाने में 159.13 करोड़ रुपए की लागत आएगी और इसमें तीन बेडरूम होंगे जिसे विधायक अपने परिजनों और गेस्ट के लिए उपयोग में ला सकेंगे। यहां 80 से 100 लोगों के बैठने के हिसाब से एक हॉल भी रहेगा और सिक्योरिटी गार्ड के लिए भी अलग से कमरा होगा। गौरतलब है कि पूर्व में विधायकों के लिए आवास बनाने का फैसला विधानसभा कैम्पस के 22 एकड़ जमीन पर लिया गया था। यहां हरे भरे पेड़ काटे जाने थे और नगर निगम के कुछ पेड़ काटे भी थे। पेड़ों को काटने का भोपालवासियों ने विरोध किया जिसके बाद प्लान में बदलाव किया गया। यह भी रहेगा खास     इन फ्लैट्स के लिए 10 मंजिला पांच ब्लॉक्स बनेंगे।     बेसमेंट में पार्किंग, स्विमिंग पूल, जिम और कैंटीन की सुविधा रहेगी।     पूरा कैम्पस फायर अलार्म सिस्टम से लैस रहेगा।     हर फ्लैट में विधायकों के लिए ओपन एरिया भी मौजूद रहेगा।  

संघ भाजपा के लिए अगली नई पीढ़ी तैयार करना चाहता, रबर स्टांप अध्यक्ष की जगह एक मजबूत नेतृत्व की तलाश

नईदिल्ली   कौन बनेगा भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष? भगवा पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से लेकर सियासी पंडितों के मन में यह सवाल गूंज रहा है। अभी तक इस पद को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा नेतृत्व के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पा रही है। सूत्र यह भी बताते हैं कि हाल ही में दो-दो केंद्रीय मंत्रियों के नाम भाजपा अध्यक्ष के पद के लिए आरएसएस को भेजे गए थे, लेकिन उनमें से किसी के नाम पर भी सहमति नहीं बन सकी है। भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए भेजा गया था। दोनों ही नेताओं को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है। आरएसएस का मानना है कि भाजपा को 2029 के बाद के युग के लिए तैयार करना जरूरी है। संघ भाजपा के लिए अगली और एक नई पीढ़ी तैयार करना चाहता है। आरएसएस चाहता है कि भाजपा को एक रबर स्टांप अध्यक्ष की जगह एक मजबूत नेतृत्व मिले जिसे पार्टी के कार्यकर्ता भी पसंद करते हों। वह नरेंद्र मोदी के बाद भाजपा को संभालने में सक्षम हो। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “आरएसएस और भाजपा के वर्तमान नेतृत्व के बीच तीन दौर की बैठकों के बाद भी सहमति नहीं बनी है। आगे और चर्चा होनी है।” चर्चा में और भी कई नाम इससे पहले खबर आई थी कि भाजपा अपने इतिहास में पहली बार किसी महिला नेता के हाथों में पार्टी की कमान सौंप सकती है। उनमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का नाम प्रमुख था। इसके अलावा दो और केंद्रीय मंत्रियों के नाम इस रेस में थे, जनमें मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान शामिल हैं। कौन बनेगा यूपी का अध्यक्ष? राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम के चयन के साथ-साथ भाजपा के लिए देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के अगले प्रदेश अध्यक्ष के नाम की भी चुनौती बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि यूपी में भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बीच सहमति नहीं बन सकी है। कौन बनेगा भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष?  भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए तैयारी कर रही है। कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो चुकी है। उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में इसकी घोषणा बाकी है। इस सबके बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने स्पष्ट कर दिया है कि भगवा पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कैसा होगा। आपको बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत से चूकने के बाद BJP एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। सत्ता में तो है पर पहले जैसा अजेय दबदबा नहीं है। अब जब पार्टी गठबंधन सरकार चला रही है, तो RSS का हस्तक्षेप अधिक स्पष्ट और मुखर हो गया है।  अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि RSS प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणियों को भाजपा के लिए मैसेज के तौर पर देखा जा रहा है। संघ प्रमुख ने सत्ता में बढ़ती अहंकार की भावना और संवादहीनता की आलोचना की तो इसे सीधे तौर पर BJP नेतृत्व के व्यक्तित्व केंद्रित मॉडल पर कटाक्ष माना जाने लगा है। क्या चाहता है संघ? >> आरएसएस एक ऐसा अध्यक्ष चाहता है जो अपेक्षाकृत युवा हो। जो संगठन के साथ जुड़ा हो। वह केवल रणनीतिकार न हो, बल्कि वैचारिक मार्गदर्शक भी हो। >> आरएसएस व्यक्तिगत प्रभुत्व नहीं बल्कि संगठन आधारित नेतृत्व की चाह रखता है। भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कैडर से संवाद, फीडबैक को स्वीकार करने वाला और अंदरूनी लोकतंत्र को पुनर्स्थापित करने वाला नेता हो। >> पार्टी में बढ़ते टेक्नोक्रेट्स और राजनीतिक प्रवासियों की भूमिका पर आरएसएस ने चिंता जताई है। संघ का कहना है कि भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष तकनीक नहीं, तपष्या से बना नेता हो। >> भाजपा का नया अध्यक्ष उन लोगों से जुड़ा हो जो शाखा, प्रांत प्रचारक और बूथ स्तर पर काम कर रहे हैं। उसकी वैचारिक स्पष्टता को भी ध्यान में रखा जाए। समान नागरिक संहिता (UCC), जनसंख्या नीति, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर उसके विचार स्पष्ट हों। 28 प्रदेश अध्यक्ष बदले गए BJP ने अब तक 36 में से 28 राज्यों में नए या फिर से नियुक्त अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। बाकी महत्वपूर्ण राज्य जैसे कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और गुजरात की घोषणा बाकी है। इस जमीनी पुनर्गठन से पार्टी एक नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के लिए मंच तैयार कर रही है। BJP या RSS में 75 की उम्र से रिटायरमेंट की कोई औपचारिक नीति नहीं है, लेकिन मोहन भागवत का हालिया बयान जिसमें उन्होंने 75 पार कर चुके लोगों के उत्तराधिकार तय करने की आवश्यकता पर बल दिया, ने हलचल मचा दी है।

निमाड़ी में पूछो, निमाड़ी में पाओ जवाब — AI बना आपकी बोली का साथी, मिलेगा स्मार्ट जवाब

 धार अब अगर आप एआई से निमाड़ी में सवाल पूछेंगे, तो जवाब भी उसी बोली में मिलेगा। यह सपना अब साकार हो रहा है। केंद्र सरकार ने देश की भाषायी विविधता को तकनीक से जोड़ने के लिए एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल तैयार किया है, जिसका नाम है 'भारत जेन (Bharat Jain)'। हाल ही में इसे लॉन्च किया गया है और यह मॉडल खासतौर पर भारतीय भाषाओं और स्थानीय बोलियों को समझने और उनके अनुरूप जवाब देने में सक्षम है। भारत जेन को आईआईटी मुंबई ने विकसित किया है और इसमें देश के कई प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं, जिनमें आईआईएम इंदौर (IIM Indore) भी एक प्रमुख भागीदार है। अब इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश की निमाड़ी बोली को एआई में शामिल करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। यह कदम भाषायी समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। भारत जेन परियोजना के सहायक प्रबंधक प्रतीक जोशी ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि देश के दूरदराज और जनजातीय अंचलों में रहने वाले लोग भी तकनीक से जुड़ सकें, चाहे उन्हें अंग्रेज़ी या हिंदी न भी आती हो। इसके लिए भारत जेन को लोकभाषाओं और बोलियों को समझने योग्य बनाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण आबादी भी इसका लाभ उठा सके। परियोजना की शुरुआत धार जिले के खलघाट से की गई है, जहां निमाड़ी भाषा को आधार बनाकर AI मॉडल को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके लिए स्थानीय साहित्यकारों, शिक्षकों, और बोलियों के जानकारों से संवाद स्थापित किया गया है। बोलचाल की शैली, मुहावरे और सांस्कृतिक संदर्भों को एआई के डेटा में शामिल किया जा रहा है, ताकि जवाब न केवल सही बल्कि संदर्भपूर्ण भी हों।

विंटर सीजन में भोपाल से नोएडा-नवी मुंबई के लिए उड़ानें संभव, एयर कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट

भोपाल  देश में इस वर्ष नवीं मुंबई एवं नोएडा के जेवर एयरपोर्ट से हवाई यातायात शुरू हो जाएगा। इन शहरों के लिए पहले ही चरण में भोपाल जुड़ जाएगा। विंटर सीजन में इन शहरों तक सीधी उड़ान मिलने लगेगी। इंडिगो एवं एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इन शहरों के लिए स्लाट लेने में रुचि दिखाई है। अक्टूबर माह के अंत में नया विंटर शेड्यूल लागू होता है। इस शेड्यूल में कई उड़ानों की समय-सारिणी बदल जाती है। कुछ नए रूट जुड़ते हैं। इस बार इंडिगो ने नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए सीधी उड़ान शुरू करने की पेशकश की है। इंडिगो ने भोपाल से बंद हो चुकी कोलकाता, लखनऊ एवं गोवा उड़ान भी फिर से प्रारंभ करने पर चर्चा की है। एयरपोर्ट अथारिटी ने इन सभी शहरों तक स्लाट देने की सहमति दी है। नोएडा एयरपोर्ट जल्द ही एयर ट्रेफिक शुरू होने की संभावना है। विमान संचालन शुरू होते ही भोपाल इससे जुड़ जाएगा। एयर इंडिया एक्सप्रेस भी विंटर सीजन में भोपाल में दस्तक देगा। कंपनी ने बेंगलुरू तक दो उड़ानें शुरू करने की तैयारी की है। इसके अलावा कंपनी नवीं मुंबई तक सीधी उड़ान शुरू करेगा। नवीं मुंबई एयरपोर्ट से सिंतंबर के अंतिम सप्ताह से उड़ान संचालन शुरू होने की उम्मीद है। यहां से उड़ानें शुरू होने के बाद यात्रियों के पास मुंबई के मुख्य एयरपोर्ट के अलावा नवीं मुंबई तक जाने का भी विकल्प होगा। मुंबई में रोड ट्रैफिक को देखते माना जा रहा है नया एयरपोर्ट यात्रियों के लिए उपयोगी साबित होगा। गोवा और लखनऊ के लिए सीधी उड़ान इंडिगो एयरलाइन गोवा और लखनऊ के लिए सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने की योजना बना रही है। साथ ही, कोलकाता और जेवर (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) के लिए भी नई उड़ानें शुरू करने पर विचार कर रही है। ये उड़ानें दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, रायपुर, अहमदाबाद और बैंगलोर के लिए पहले से चल रही उड़ानों के साथ-साथ चलेंगी। जेवर के लिए सीधी उड़ानें शुरू होंगी एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए कोलकाता, नवी मुंबई और जेवर के लिए सीधी उड़ानें शुरू की जाएंगी। इससे भोपाल महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्रों और नए हवाई अड्डों से जुड़ जाएगा। एयर इंडिया एक्सप्रेस बेंगलुरु के लिए दो और नवी मुंबई के लिए एक उड़ान शुरू करेगी। एयर इंडिया की मेनलाइन सर्विस दिल्ली और मुंबई के लिए तीन डेली फ्लाइट्स जारी रखेगी। ऐसा यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। वहीं, फ्लाई बिग अपनी रीजनल उड़ानें रीवा और दतिया के लिए UDAN-RCS प्रोग्राम के तहत जारी रखेगी। इससे छोटे शहरों में भी हवाई सेवा मिलती रहेगी। गौरतलब है कि इन नई उड़ानों से भोपाल से यात्रा करना और भी आसान हो जाएगा। यात्रियों को अब ज्यादा शहरों के लिए सीधी उड़ानें मिलेंगी। इससे समय की बचत होगी और यात्रा आरामदायक होगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी का कहना है कि वे यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इंडिगो की सेवाओं का विस्तार एक अन्य लोकप्रिय एयरलाइन इंडिगो भी अपनी सेवाओं का विस्तार कर रही है। उनके पुणे और गोवा के लिए नई उड़ानें शुरू करने की भी संभावना है। ये नई फ्लाइट इन छुट्टियों के डेस्टिनेशन के लिए उड़ान भरने वाले लोगों के लिए अधिक यात्रा विकल्प प्रदान करेंगी। एयर इंडिया की तैयारी एयर इंडिया भी विंटर शेड्यूल के लिए तैयारी कर रही है। वे प्रति दिन तीन नई उड़ानें शुरू करेंगे। इससे यात्रियों के लिए सुविधाजनक समय पर उड़ान बुक करना आसान हो जाएगा। हवाई अड्डे के निदेशक रामजी अवस्थी ने कहा, 'उड़ानों में वृद्धि का उद्देश्य सर्दियों के मौसम के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को पूरा करना है। अधिक उड़ानों का मतलब बेहतर कनेक्टिविटी और यात्रियों के लिए अधिक विकल्प हैं। इस बदलाव से व्यवसाय और अवकाश यात्रियों दोनों को लाभ होगा।' छोटे शहर की कनेक्टिविटी बढ़ेगी भोपाल से विंटर सीजन में रीवा, सतना एवं दतिया जैसे शहरों तक भी कनेक्टिविटी बढ़ने की संभावना है। फ्लाय बिग ने उड़ान योजना के तहत रीवा एवं दतिया उड़ान के फेरे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। अलाइंस एयर भी रीवा एवं इंदौर के लिए उड़ान प्रारंभ कर सकता है। भोपाल सबसे पहले जुड़ेगा     देश के नए एयरपोर्ट्स से भोपाल से सबसे पहले जुड़े इसके प्रयास किए जा रहे हैं। नवीं मुंबई एवं जेवर एयरपोर्ट यात्रियों के लिए उपयोगी होगी। मुंबई एवं दिल्ली जाने वाले यात्रियों को एक उपयोगी विकल्प मिलेगा। बंद हो चुकी कुछ उड़ानें विंटर सीजन में पुन: प्रारंभ होंगी। – रामजी अवस्थी, एयरपोर्ट डायरेक्टर, भोपाल  

रूस से कच्चा तेल खरीदने से 3 साल में भारत को 25 अरब अमेरिकी डॉलर की बचत हुई

नई दिल्ली अमेरिका और NATO जो कुछ दिनों पहले तक भारत की ओर से रूस से कच्चे तल के आयात पर चिंता जता रहे थे अब सीधे धमकी भरी भाषा में बात कर रहे हैं. नाटो ने बुधवार को कहा कि अगर भारत, चीन और ब्राजील रूस से कच्चा तेल मंगाना जारी रखते हैं तो अमेरिका इन देशों पर 100 फीसदी का सेकेंडरी सैंक्शंस लगा सकता है.  अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी कि रूसी तेल आयात को लेकर पश्चिमी देशों की नीतियों का पालन करना होगा, वरना व्यापारिक और कूटनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. दरअसल रूस से कच्चे तेल के आयात को अमेरिका और नाटो यूक्रेन युद्ध से जोड़कर देखते हैं. अमेरिका का मानना है कि भारत और चीन द्वारा रूस से कच्चा तेल मंगाने की वजह से रूस के वॉर मशीन को फंडिंग होती है. अमेरिका को लगता है कि अगर भारत और चीन रूस से कच्चा तेल न मंगाए तो मॉस्को यूक्रेन से युद्ध का खर्चा न उठा पाएगा और उसे जंग बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. लेकिन अमेरिका की ये चाहत भारत और चीन के लिए अरबों डॉलर के नुकसान का सौदा है. तीन साल में भारत को 11 से 25 अरब डॉलर की बचत भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है. घरेलू उत्पादन बढ़ाने के बावजूद भारत को अपनी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए भारी मात्रा में तेल का विदेशों से आयात करना पड़ता है. भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 35% रूस से आयात करता है, जो सस्ता होने के कारण 2022-2025 के बीच भारत को 10.5 से 25 अरब डॉलर की बचत करा चुका है.  वर्ष 2025 की शुरुआत में भारत ने अपनी कुल आयातित कच्चे तेल का लगभग 40% हिस्सा रूस से मंगाया. मई-जून 2025 में यह मात्रा लगभग 38–44% के बीच रहा. बता दें कि 2022 से पहले भारत को तेल बेचने वाले बड़े देशों में ईराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल थे. लेकिन 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया तो वह अपने युद्ध के खर्चे को पूरा करने के लिए भारत, चीन और तुर्की जैसे देशों को सस्ता कच्चा तेल बेचने लगा. रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद से भारत को 2022-2024 की अवधि में करीब 11 से 25 अरब अमेरिकी डॉलर की अनुमानित बचत हुई है.  11 से 16% तक सस्ता पड़ा है कच्चा रूसी तेल  वित्त वर्ष 2023-24 में ही छूट पर रूसी तेल मंगाने से भारत को लगभग 7.9 अरब डॉलर (करीब 65,000 करोड़ रुपये) की बचत हुई. रूस से सस्ता कच्चा तेल मिलने की वजह से भारत का तेल बिल कम रहा और चालू खाते को नियंत्रित करने में सहायता मिली. बचा दें कि रूसी कच्चा तेल, पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं (जैसे मिडिल ईस्ट) की तुलना में औसतन 11 से 16% तक सस्ता मिलता है.  रूस भारत को डिस्काउंट पर कच्चा तेल बेचता है, जो वैश्विक बाजार मूल्य (ब्रेंट क्रूड) से प्रति बैरल 4-5 डॉलर कम होता है. 2022 से 2025 तक रूसी तेल की औसत कीमत 65-75 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत 80-85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी. सऊदी अरब और इराक जैसे देश ब्रेंट क्रूड के करीब या उससे थोड़ा कम कीमत पर तेल बेचते हैं, यानी 80-85 डॉलर प्रति बैरल. अमूमन सऊदी तेल रूसी तेल से 10-15% महंगा हो जाता है. अगर भारत मध्य पूर्व से समान मात्रा में तेल खरीदता है तो प्रति बैरल 4-5 डॉलर के अतिरिक्त खर्च के कारण सालाना अरबों डॉलर का अतिरिक्त बोझ  भारत पर पड़ेगा. उदाहरण के लिए 20 लाख बैरल प्रतिदिन के आयात पर 4 डॉलर प्रति बैरल का अंतर सालाना ~2.9 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च बनता है. मध्य पूर्व से सप्लाई पर लॉजिस्टिक समस्या मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति हमेशा से भारत के लिए रणनीतिक और लॉजिस्टिक समस्या लेकर आती है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि अन्य देशों से तेल की आपूर्ति संभव है, लेकिन यह महंगा होगा और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां बढ़ सकती हैं. पश्चिम एशिया में जंग की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति पहले से ही अस्थिर है. हाल ही में जब ईरान पर इजरायल ने हमला किया था तो ईरान ने होरमूज जलडमरूमध्य मार्ग को बंद करने की धमकी दी थी. ऐसी स्थिति में भारत के लिए समस्या पैदा हो सकती है.  रूसी तेल की डिलीवरी लागत भी अपेक्षाकृत कम है क्योंकि रूस भारत को समुद्री मार्गों (जैसे ब्लैक सी और बाल्टिक रूट्स) के जरिए तेजी से आपूर्ति करता है.