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प्रदेश में ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

वन विकास निगम ने वन सम्पदा को पुनर्स्थापित किया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों का पुर्नवास बड़ी उपलब्धि निगम ने जंगल के साथ लोगों की जिन्दगी भी संवारी प्रदेश में ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को किया सम्मानित वन‍विकास निगम के विजन डाक्यूमेंट-2047 का किया अनावरण जू (चिड़ियाघर) तथा वन्य जीवों के रेस्क्यू सेंटर स्थापित होंगे वन क्षेत्र की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए वन सेवा के अधिकारी-कर्मचारियों का योगदान सराहनीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में खनन गतिविधियों और बिजली उत्पादन की प्रक्रिया में बने राख के पहाड़ों पर वनों को विकसित करने की चुनौती स्वीकार कर मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम ने वन सम्पदा को पुनर्स्थापित किया है। प्रदेश के तीन लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों का पुनर्वास करना बड़ी उपलब्धि है। वन विकास निगम इस उपलब्धि के लिए बधाई का पात्र है। यह गर्व का विषय है कि अन्य राज्य भी निगम की इस विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए उत्सुक हैं। प्रदेश में अद्यतन तकनीक के माध्यम से वनों का उचित प्रबंधन किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश वन सम्पदा में देश में सर्वश्रेष्ठ है। राज्य सरकार वनों और वन उपज के साथ वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में भी हरसंभव प्रयास कर रही है। प्रदेश के सघन वन क्षेत्र की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए वन सेवा के अधिकारी-कर्मचारी प्रशंसा के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सभी दिशाओं में क्षमता विकास और प्रगति के अवसर उपलब्ध हैं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में विशेष पहल की जा रही है। राज्य सरकार जू (चिड़ियाघर) तथा वन्य जीवों का रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य वन विकास निगम द्वारा विकसित वनों के प्रबंधन और आगामी कार्ययोजना के बारे में विचार मंथन की आवश्यकता है। अब तक किए गए कार्यों का सिंहावलोकन करते हुए राज्य सरकार वन विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विशेष नवाचार और पहल करने के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विकास निगम के केन्द्रों में ईको टूरिज्म की गतिविधियां संचालित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान का जोधपुर आम और बबूल की लकड़ी के आधार पर फर्नीचर के बड़े केन्द्र के रूप में स्थापित हुआ है। प्रदेश में उपलब्ध सागौन और अन्य श्रेष्ठ काष्ठ के उपयोग से मध्यप्रदेश भी इस प्रकार की पहल कर सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। प्रदेश के वन, देश की कई प्रमुख नदियों को जलराशि से समृद्ध बनाते हैं। प्रदेश के विशाल भू-क्षेत्र में फैली वन आधारित जीवनशैली हमें प्रकृति के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है। देश में सर्वाधिक बाघ मध्यप्रदेश में हैं। चंबल क्षेत्र में घड़ियाल भी वन्यजीव पर्यटन की शोभा बढ़ा रहे हैं। वन विभाग ने विलुप्तप्राय गिद्धों का संरक्षण करते हुए प्रदेश में गिद्धों को नया जीवन प्रदान किया है। सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने के लिए राज्य सरकार योजनाओं पर कार्य कर रही है। प्रदेश में सर्प गणना की तैयारी हो रही है। मध्यप्रदेश ऐसा क्षेत्र हैं, जहां टाइगर और मनुष्य सहचर्य की भावना से साथ-साथ रहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने वन विकास निगम के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों का सम्मान किया। इनमें सर्वआर.के. नामदेव, आर.एस. नेगी, रतन पुरवार, पी.सी. ताम्रकार तथा भगवंतराव बोहरपी को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निगम के स्वर्ण जयंती वर्ष पर वन विकास की आगामी कार्ययोजना पर केन्द्रित विजन-2047 का अनावरण किया। इस अवसर पर वन विकास निगम द्वारा संचालित गतिविधियों और उसकी विकास यात्रा पर केन्द्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के संचालक के.रविचंद्रन ने अंगवस्त्रम और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा भेंटकर अभिवादन किया। वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि वन विकास निगम, स्थानीय लोगों को जोड़ते हुए वन संरक्षण की गतिविधियां संचालित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अनेक नवाचार क्रियान्वित हो रहे हैं। इसके अंतर्गत प्रदेश को वन संपदा से समृद्ध करने के लिए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान शुरू किया गया। प्रदेश में जल संरक्षण के लिए जल-गंगा संवर्धन अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश में अनेकों कुए, बावड़ी, तालाब और जलस्त्रोतों का जीर्णोद्धार किया गया। जल-गंगा संवर्धन अभियान भूजल स्तर सुधार के क्षेत्र में एक बड़ी पहल है। राज्य वन विकास निगम की भूमिका सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है। अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णबाल ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि आयोग की अनुशंसा पर 1975 में स्थापित राज्य वन विकास निगम अपनी स्थापना से लेकर अब तक निरंतर लाभ में ही रहा है। पर्यावरणीय आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध निगम की गतिविधियों से जंगल के साथ-साथ लोगों की जिन्दगी भी संवर रही है। निगम का 50वां स्थापना दिवस मनाना हम सभी के लिए गौरव का क्षण है। वन विकास निगम के सहयोग से 3 लाख 90 हजार हेक्टेयर जंगलों का विकास और ट्रीटमेंट किया गया। इस उपलब्धि में निगम के अधिकारी और कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन तथा वानिकी के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधि और भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।  

RBSE 2026: बोर्ड परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू, अंतिम तिथि और शुल्क की जानकारी यहां पढ़ें

अजमेर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी परीक्षा-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की तिथियां घोषित कर दी हैं। परीक्षा के लिए आज 24 जुलाई से आवेदन ऑनलाइन भरे जा सकते हैं। बोर्ड सचिव कैलाश चन्द्र शर्मा ने बताया कि सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी परीक्षा-2026 के लिए 24 जुलाई से आवेदन ऑनलाइन भरे जा सकते हैं। सामान्य परीक्षा शुल्क के साथ आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि 23 अगस्त है। बैंक में शुल्क जमा कराने एवं चालान मुद्रित करने की अंतिम तिथि 30 अगस्त है। आवेदन पत्र एवं चालान नोडल केन्द्र पर जमा कराने की अंतिम तिथि 6 सितम्बर है। उन्होंने बताया कि एक अतिरिक्त परीक्षा शुल्क सहित आवेदन पत्र 25 अगस्त से ऑनलाइन भरे जाएंगे। यह आवेदन पत्र 10 सितंबर तक भर सकते हैं। बैंक में शुल्क जमा कराने एवं चालान मुद्रित करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर है। आवेदन पत्र एवं चालान नोडल केन्द्र पर जमा कराने की अंतिम तिथि 18 सितम्बर है। उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालयों पर स्वयंपाठी परीक्षार्थियों के लिए 11 सितम्बर से असाधारण परीक्षा शुल्क के साथ आवेदन पत्र भरे जाएंगे। इसकी अंतिम तिथि 25 सितम्बर हैं। बैंक में शुल्क जमा कराने एवं चालान मुद्रित करने की अंतिम तिथि चार अक्तूबर है। इन आवेदन पत्रों एवं चालान को सीधे बोर्ड कार्यालय में जमा करवाना होगा। बोर्ड सचिव शर्मा ने बताया कि नियमित परीक्षार्थी के लिए परीक्षा शुल्क 600 रुपये, स्वयंपाठी परीक्षार्थियों के लिए 650 रुपये निर्धारित हैं। प्रायोगिक परीक्षा शुल्क प्रति विषय 100 रुपये देय होगा। विशेष आवश्यकता वाले छात्र, दृष्टबाधित एवं दिव्यांग परीक्षार्थी, युद्ध में वीरगति को प्राप्त अथवा अपाहिज सैनिकों के पुत्र और पुत्रियां, पुलवामा हमले में शहीद हुए सैनिकों के आश्रितों को परीक्षा शुल्क से मुक्त रखा गया है। इन्हें केवल टोकन शुल्क के 50 रुपये जमा कराने होंगे। उन्होंने बताया कि जिन विद्यालयों की उच्च माध्यमिक स्तर की सम्बद्धता संबंधी कार्रवाई अभी तक लंबित है। वह विद्यालय अविलम्ब कार्रवाई पूर्ण करे लें। कार्रवाई पूर्ण नहीं होने पर ऐसे विद्यालयों के परीक्षा आवेदन पत्र निरस्त कर दिए जाएंगे। ऑनलाइन परीक्षा आवेदन पत्र भरते से संबंधित आवश्यक निर्देश बोर्ड की वेबसाइट पर देख सकते हैं। अन्य जानकारी के लिए बोर्ड कंट्रोल रूम के दूरभाष नम्बर 0145-263866, 2632867, 2632868 पर अथवा एसीपी के दूरभाष नम्बर 0145-2627454 पर संपर्क कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने सराहा, बोले-हरेली प्रकृति के प्रति सम्मान का तिहार

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: दिखी परंपरा और प्रगति की अनूठी झलक पारंपरिक-आधुनिक कृषि यंत्रों, लोक वेशभूषाओं की आकर्षक प्रदर्शनी मुख्यमंत्री ने सराहा, बोले-हरेली प्रकृति के प्रति सम्मान का तिहार रायपुर  छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और कृषि परंपराओं का प्रतीक हरेली तिहार इस वर्ष मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निवास परिसर में अत्यंत हर्षाेल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राज्य की समृद्ध विरासत, पारंपरिक कृषि यंत्रों, लोक परिधानों, खानपान और आधुनिक कृषि तकनीकों का समन्वय एक अद्भुत नजारे के रूप में सामने आया। कार्यक्रम स्थल को पारंपरिक छत्तीसगढ़ी रंग-रूप में सजाया गया था, जहां ग्रामीण परिधान पहने अतिथि, कलाकार और आमजन लोक संस्कृति में रमे हुए नजर आए।  हरेली उत्सव के दौरान मुख्यमंत्री निवास में परम्परागत और आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री साय ने प्रदर्शनी स्थल का भ्रमण कर विभिन्न पारंपरिक यंत्रों और वस्तुओं का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में काठा, खुमरी, झांपी, कांसी की डोरी और तुतारी जैसे ऐतिहासिक कृषि उपकरणों को प्रदर्शित किया गया। कृषि विभाग द्वारा आयोजित आधुनिक कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी, जिसमें  नांगर, कुदाली, फावड़ा, रोटावेटर, बीज ड्रिल, पावर टिलर और स्प्रेयर जैसे यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। ‘काठा’ वह परंपरागत मापक है जिससे पुराने समय में धान तौला जाता था; ‘खुमरी’ बांस और कौड़ियों से बनी छांव प्रदान करने वाली टोपी है; ‘झांपी’ शादी-ब्याह में उपयोग होने वाली वस्तुएं रखने की बांस से बनी पेटी; ‘कांसी की डोरी’ खाट बुनने में काम आती है और ‘तुतारी’ पशुओं को संभालने में उपयोग होती है। मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि हरेली तिहार केवल पर्व नहीं, बल्कि यह हमारे कृषि जीवन, पशुधन और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी किसानों, युवाओं और आमजनों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रही। मुख्यमंत्री ने इन उपकरणों की जानकारी लेकर कृषि तकनीकी प्रगति की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ की खेती परंपरा और तकनीक के समन्वय से और भी अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनेगी। किसानों को नई तकनीकों की जानकारी देकर हम राज्य की कृषि उत्पादकता को ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आम नागरिक, किसान, छात्र और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और कृषि नवाचार के अद्वितीय संगम को सजीव रूप में प्रस्तुत किया, जो राज्य की समृद्ध परंपरा और विकासशील सोच का प्रतीक है।

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन: मोदी बोले– भारत में अब यूके प्रोडक्ट किफायती दामों पर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन के दो दिनों के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने ब्रिटिश पीएम किएर स्टार्मर से लंदन में मुलाकात की, जहां द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों ने फ्री ट्रेड डील (FTA) समझौते पर साइन किए. जिसका उद्देश्य भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना है. इस मौके पर प्रेस को संबोधित करते हुए पीएम ने स्टार्मर के जोरदार स्वागत के लिए आभार जताया और उन्होंने ऐतिहासिक द्विपक्षीय वार्ता के दौरान साइन किए गए फ्री ट्रेड डील की भी तारीफ की. ये हमारे उपभोक्ताओं के लिए अच्छा सौदा होगा, क्योंकि इससे कपड़ों और जूतों की कीमतें कम हो जाएंगी. साथ ही भारत के सी फूड को ब्रिटेन की मार्केट में नए अवसर मिलेंगे. भारत के हर वर्ग के लिए ये समझौता लाभकारी होगा. इस समझौते के यूके की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा और भारत का निवेश भी बढ़ेगा. ये समझौते वैश्विक स्थिरता को भी बल देंगे. अब यूके के प्रोडक्ट सस्ते मिलेंगे. दोस्तों शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर नया अध्याय लिख रहे हैं. यूके की छह यूनिवर्सिटी भारत में कैंपस खोल रही हैं, पिछले दिनों गुरुग्राम में कैंपस खोला है. दोस्तों पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा के लिए हम स्टार्मर का आभार जताते हैं.हम रूस और यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के साथ-साथ मिडिल ईस्ट की स्थिति पर भी विचार साझा करते रहे हैं. आज विस्तारवादी सोच नहीं विकासवादी सोच का दौर है.  भारत-ब्रिटेन मुफ्त व्यापार समझौते (FTA) के लिहाज से उनके इस दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पीएम मोदी ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात करेंगे. इस दौरान पीएम मोदी और स्टार्मर द्विपक्षीय संंबंधों पर चर्चा करेंगे.  भारत के साथ फ्री ट्रेड डील पर साइन करने के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने कहा कि भारत के साथ एक ऐतिहासिक समझौते का मतलब ब्रिटेन में रोजगार, निवेश और विकास है. इससे ब्रिटेन में हजारों नौकरियां पैदा होंगी. फ्री ट्रेड डील से कारोबार के नए अवसर पैदा होंगे और कामकाजी लोगों की जेब में पैसा आएगा. ये हमारी काम करने की नीति में बड़ा बदलाव है. इससे पहले उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वे जिस ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, नौकरियों और आर्थिक विकास के लिए वह एक बड़ी जीत है. इस समझौते के तहत टैरिफ में कटौती से कपड़े, जूते और खाद्य उत्पादों की कीमतें सस्ती होंगी.  भारत को क्या फायदा ब्रिटेन का कहना है कि एफटीए से भारत के लोगों को बहुत फायदा होगा। उन्हें ब्रिटेन के अच्छे प्रोडक्ट्स आसानी से मिल पाएंगे। जैसे कि सॉफ्ट ड्रिंक, कॉस्मेटिक्स, कारें और मेडिकल डिवाइस। FTA लागू होने के बाद, इन चीजों पर लगने वाला टैक्स 15% से घटकर 3% हो जाएगा। इससे ये चीजें सस्ती हो जाएंगी। अभी भी ब्रिटेन भारत से 11 अरब पाउंड का सामान खरीदता है। लेकिन टैक्स कम होने से ब्रिटेन के लोगों और कारोबारियों के लिए भारतीय सामान खरीदना और भी आसान हो जाएगा। इससे भारतीय कारोबारियों को भी फायदा होगा, क्योंकि वे ब्रिटेन को ज्यादा सामान बेच पाएंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा, "भारत के साथ हमारा यह बड़ा व्यापार समझौता ब्रिटेन के लिए बहुत बड़ी जीत है। इससे ब्रिटेन में हजारों नौकरियां पैदा होंगी, कारोबार के नए मौके मिलेंगे और देश के हर कोने में विकास होगा। यह हमारी बदलाव की योजना को पूरा करेगा।" ट्रेड के इतर यह समझौता सिर्फ व्यापार तक ही सीमित नहीं रहेगा। 2035 के लिए जो नई योजना बनाई जा रही है, उसमें दोनों देश मिलकर तरक्की करेंगे, नई चीजें खोजेंगे और अपनी सेना को भी मजबूत करेंगे। इसके लिए एक नया डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप बनाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि भारत और ब्रिटेन ने बातचीत के दौरान एक-दूसरे की राजनीतिक संवेदनशीलता का सम्मान किया है। ब्रिटिश सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर से पहले एक बयान में कहा, "हमने भ्रष्टाचार विरोधी, श्रम अधिकार, जेंडर और डेवलपमेंट पर मुक्त व्यापार समझौते में भारत के पहले अध्यायों को सुरक्षित करते हुए अपने मूल्यों का समर्थन किया है. यह अध्याय महिलाओं के लिए यूके-भारत FTA के पूर्ण लाभों तक पहुंचने के अवसरों को बढ़ाएगा. यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भी आगे बढ़ाएगा और व्यापार के माध्यम से लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा." समझौते में टैरिफ में कटौती शामिल है. भारत ब्रिटेन की तुलना में काफी अधिक संरक्षणवादी अर्थव्यवस्था है, और उसने अपने 90 प्रतिशत टैरिफ में कटौती की है. इससे यूके से भारत आने वाले उत्पादों पर औसत टैरिफ 15 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत हो जाएगा. बदले में, ब्रिटेन – जो पहले से ही भारत से सालाना 11 अरब यूरो मूल्य का सामान आयात करता है – भारतीय निर्माताओं को अधिक बाजार पहुंच प्रदान करेगा. अब कपड़े-जूते समेत ये चीजें हो जाएंगी सस्‍ती, देखें लिस्‍ट!  भारत-यूके बीच इस डील से दोनों देशों के आम लोगों के लिए भी बहुत फायदेमंद होगा. दवाई से लेकर इलेक्‍ट्रॉनिक और फैशन तक के सामान सस्‍ते हो जाएंगे. हालांकि कुछ चीजें महंगे भी होंगे, जो आम लोगों की जेब पर सीधा असर डालेगा.  इस डील को लेकर चर्चा की शुरुआत जनवरी 2022 में तत्कालीन ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन के कार्यकाल में हुई थी. इसे पहले 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य था. पीएम मोदी ने इस डील को लेकर कहा कि दोनों देशों की अर्थव्‍यवस्‍था में उछाल आएगी. साथ ही नौकरियों के अवसर खुलेंगे. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत-ब्रिटेन की कोशिश द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 120 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्‍य रखा गया है.  भारत-यूके FTA का मतलब क्‍या है?  भारत और यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-UK FTA) से भारत को अपनी 99 फीसदी एक्‍सपोर्ट उत्‍पाद  पर UK में टैक्‍स फ्री एक्‍सपोर्ट मिलेगा.  वहीं भारत ब्रिटेन से आने वाले 90 फीसदी उत्‍पादों पर टैरिफ कम या फिर हटा दिया जाएगा. इससे भारतीय कंपनियों से लेकर आम लोगों को भी बड़ा फायदा होगा.  क्‍या सस्‍ता और क्‍या महंगा  इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, कपड़े, मरीन प्रोडक्‍ट्स, स्‍टील और मेटल, और ज्‍वेलरी समेत कई चीजें सस्‍ती हो सकती हैं. वहीं महंगे की बात करें तो एग्रीकल्‍चर प्रोडक्‍ट्स, कार और बाइक जैसे ऑटो प्रोडक्‍ट्स और स्‍टील जैसे प्रोडक्‍ट्स महंगे हो सकते हैं.  यह डील भारत को वैश्विक मानचित्र पर कैसे स्थापित करेगी? इस … Read more

श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी, भजनलाल सरकार भेजेगी 800 लोगों को रामेश्वरम मुफ्त यात्रा पर

जयपुर  राजस्थान सरकार ने एक बार फिर 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए मुफ्त तीर्थ यात्रा योजना शुरू कर दी है। बुधवार को इस योजना के तहत करीब 800 श्रद्धालुओं का पहला जत्था विशेष एसी ट्रेन से रामेश्वरम के लिए रवाना किया गया। यह यात्रा एक सप्ताह तक चलेगी। सरकार ने न केवल यात्रा के लिए मुफ्त ट्रेन सुविधा दी है, बल्कि श्रद्धालुओं के भोजन और ठहरने की पूरी व्यवस्था भी की है। कैबिनेट मंत्री ने 56 हजार तीर्थ यात्रियों को मिलेगा लाभ दिखाई हरी झंडी इस खास मौके पर राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने जयपुर से रवाना होने वाली इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। स्टेशन पहुंचे तीर्थ यात्रियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया और फूल-मालाएं पहनाई गईं। यह विशेष ट्रेन 12 कोच की है, जिसमें एक पैंटी कार और कोचों में राम दरबार की स्थापना की गई है। 56 हजार तीर्थ यात्रियों को मिलेगा लाभ मंत्री जोराराम कुमावत ने जानकारी दी कि इस बार सरकार ने 30 हजार की बजाय 56 हजार श्रद्धालुओं को मुफ्त तीर्थ यात्रा पर भेजने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने बताया कि यह पहली बार होगा जब सभी यात्रियों को स्लीपर कोच के बजाय एसी ट्रेन में यात्रा का मौका मिलेगा। नेपाल में भी मुफ्त यात्रा का प्लान सरकार ने यह भी घोषणा की है कि करीब 6 हजार श्रद्धालुओं को हवाई जहाज के जरिए नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। इसके लिए अगले दो हफ्तों में ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। श्रद्धालुओं ने जताया आभार रामेश्वरम जाने वाली पहली ट्रेन के यात्रियों ने राजस्थान सरकार का धन्यवाद किया। उनका कहना है कि सावन के पवित्र महीने में मुफ्त तीर्थ यात्रा का आयोजन बेहद पुण्य का कार्य है। श्रद्धालुओं ने सीएम भजनलाल शर्मा को साधुवाद देते हुए कहा कि उनका यह एक सप्ताह भक्तिमय माहौल में बीतेगा।

राजस्थान में विधायकों को बड़ा फायदा, सैलरी-पेंशन दोनों में बढ़ोत्तरी

जयपुर  राजस्थान सरकार ने जुलाई से विधायकों को बड़ा तोहफा दिया है। जुलाई से सभी विधायकों की सैलरी में 10% की बढ़ोतरी होने जा रही है। अब विधायकों को हर महीने 40,000 रुपये की जगह 44,000 रुपये का मूल वेतन मिलेगा। यानी सालाना 48,000 रुपये ज्यादा पगार मिलेगी। कितनी है अब सैलरी और भत्ता? फिलहाल, विधायकों को मूल वेतन और भत्ता मिलाकर हर महीने करीब 1,47,000 रुपये मिलते हैं। अब भत्तों में भी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही पूर्व विधायकों की पेंशन में भी इजाफा करने की तैयारी है। पिछले सत्र में हुआ था प्रस्ताव पास राजस्थान की बीजेपी सरकार ने विधानसभा के पिछले सत्र में ही वेतन और पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव पास कर दिया था। राज्य का विधि विभाग जल्द ही इस पर आधिकारिक घोषणा कर सकता है। पूर्व विधायकों की पेंशन राजस्थान में एक बार के पूर्व विधायक को 35,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है। हर अतिरिक्त 5 साल की सेवा पर 8,000 रुपये जुड़ते हैं। उदाहरण के लिए, 2 बार विधायक रह चुके को 43,000 रुपये, 3 बार वाले को 51,000 रुपये और 6 बार विधायक रहे नेता को 75,000 रुपये पेंशन मिलती है। अब पेंशन में भी इजाफे की तैयारी है, हालांकि नई रकम अभी तय नहीं हुई है। जनता की नाराजगी भी विधायकों की सैलरी बढ़ने पर जनता का कहना है कि जब सरकारी नौकरियां कम हो रही हैं और महंगाई बढ़ रही है, तब नेताओं की सैलरी और पेंशन बढ़ाना सही नहीं है। कई लोगों का कहना है कि विधायकों की सैलरी उनके कामकाज और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर आधारित होनी चाहिए।  

CGPSC भर्ती घोटाला: कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका, कहा- युवाओं का भविष्य बर्बाद करना हत्या से बड़ा अपराध

बिलासपुर हाईकोर्ट ने CG-PSC भर्ती घोटाले में एग्जाम कंट्रोलर सहित तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है. मामले में जस्टिस बीडी गुरु ने कहा कि ‘जो प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक करता है, वह लाखों युवाओं के भविष्य से खेलता है, यह कृत्य हत्या से भी गंभीर अपराध है. प्रश्नपत्र लीक कर पीएससी जैसी प्रतिष्ठित संस्था को शर्मसार किया है. मामले के आरोपी बाड़ द्वारा फसल खाने जैसा उदाहरण हैं.’ बता दें, कि CG-PSC 2020 में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई. जिस पर पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर ने सवाल उठाते हुए मामले में जनहित याचिका लगाई. याचिका में बताया गया, कि कैसे अफसर और कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों को चयनित किया गया, और डिप्टी कलेक्टर जैसे पद दिए गए हैं. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भी टिप्पणी करते हुए कहा था कि एक साथ इस तरह से रिश्तेदारों का चयन इत्तेफाक नहीं हो सकता. हाईकोर्ट ने भर्ती की जांच के आदेश भी दिए. राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ तब इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा (ACB-EOW) ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की. फिर बाद में मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया. सीबीआई की जांच में पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह के इशारे पर बड़े पैमाने पर प्रश्न पत्र लीक किए जाने का खुलासा हुआ. आरोप है कि प्रश्न पत्र उनके दो भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी को दिए गए. इसके बाद परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने इन्हें बजरंग पावर एंड इस्पात के निदेशक श्रवण गोयल तक पहुंचाया, जिन्होंने यह पेपर अपने बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को दिलवाया. इसी आधार पर सभी ने डिप्टी कलेक्टर व डीएससी जैसे पद हासिल किए. इस मामले में अध्यक्ष रहे टामन सिंह के साथ ही उनके भतीजे नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के बाद टामन सिंह सोनवानी सहित उनके दोनों भतीजों ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी लगाई थी. सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने तर्क देते हुए झूठे केस में फंसाने के आरोप लगाए. बचाव पक्ष ने यह तर्क भी दिया कि पीएससी के नियमों के तहत भतीजा परिवार की परिभाषा में नहीं आता. लिहाजा, यह कहना कि अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने परिवार के सदस्यों का चयन कराया है, यह गलत है. ज्ञात हो, कि इस मामले में अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, भतीजा नितेश सोनवानी, साहिल सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर के साथ ही उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल उसके बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को गिरफ्तार किया गया है.

जयपुर से धरा गया फर्जी सिम गिरोह का सदस्य, साइबर ठगी में था बड़ा नेटवर्क

जयपुर साइबर ठगों को फर्जी मोबाइल सिम उपलब्ध कराने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। मालपुरा गेट थाना क्षेत्र में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल सिम सक्रिय करवाने की सूचना पर पुलिस थाना साइबर क्राइम राजस्थान की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 19 वर्षीय आरोपी घनश्याम मीणा को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी फर्जी आधार कार्ड तैयार कर उन पर अपनी तस्वीर लगाकर अवैध रूप से मोबाइल सिम प्राप्त करता था और फिर उन्हें अन्य साइबर अपराधियों को बेचता था। एसपी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार 22 जुलाई को साइबर थाना पुलिस को सूचना मिली कि मालपुरा गेट स्थित भारती हेक्साकॉम लिमिटेड (एयरटेल) के सांगानेर स्टोर पर एक संदिग्ध व्यक्ति ने डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया के तहत एक मोबाइल सिम एक्टिव कराने के लिए आधार कार्ड प्रस्तुत किया। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस को पता चला कि संदिग्ध ने स्टोर संचालक से कहा कि इस नंबर को कंपनी के पोस्टपेड फैमिली प्लान के तहत मोबाइल नंबर 7300043398 और 7300043318 के साथ जोड़ा जाए।

पर्यावरण के अनुकूल सफर की ओर कदम, DTC बोर्ड ने दी 100 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को मंजूरी

 नई दिल्ली डीटीसी ने अंतरराज्यीय बस सेवा की शुरुआत के लिए तैयारी शुरू कर दी है. इसके तहत बसों की खरीद प्रक्रिया जल्द ही आरंभ की जाएगी. दिल्ली के आस-पास के प्रमुख शहरों के लिए 200 बसों की खरीद की योजना है, लेकिन पहले चरण में 100 बसों की खरीद की जाएगी. 100 CNG बसें भी खरीदी जाएंगी DTC बोर्ड ने बसों की खरीद के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, और अब जल्द ही एक बैठक में बसों के मॉडल पर चर्चा कर उन्हें स्वीकृति दी जाएगी. हाल ही में आयोजित बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को पेश किया गया था. डीटीसी अंतरराज्यीय बस सेवा के तहत 100 सीएनजी और 100 इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करने की योजना बना रहा है. इसके अनुसार, लंबी दूरी के रूटों पर सीएनजी बसों और कम दूरी के रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा. डीटीसी बोर्ड की बैठक में बसों की खरीद प्रक्रिया आरंभ करने और पहले चरण में 100 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के प्रस्ताव पर सहमति दी गई है. पिछली बैठक में स्टैंडर्ड फ्लोर वाली एसी ई-बसों (टाइप-3) की खरीद का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था. इस दौरान चर्चा हुई कि बाजार में नए इलेक्ट्रिक बसों के मॉडल उपलब्ध हैं, इसलिए आगामी बोर्ड बैठक में बसों के मॉडल पर विचार किया जाएगा. आधुनिक मॉडल की बसों की खरीद के लिए बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी. रूट सर्वे अंतिम चरण में डीटीसी के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि अंतरराज्यीय बस सेवा के लिए रूटों का सर्वेक्षण अंतिम चरण में है. जल्द ही रूटों की एक सूची तैयार की जाएगी, जिसे आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा. बोर्ड की स्वीकृति मिलने के बाद ही यह सूची सार्वजनिक की जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि पड़ोसी राज्यों के शहरों तक डीटीसी बसों के संचालन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. फंड भी है उपलब्ध डीटीसी को बसों की खरीद के लिए फंड की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि उसके पास इस कार्य के लिए लगभग 320 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं. दिल्ली सरकार के वित्त विभाग ने परिवहन विभाग के माध्यम से 199.5 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी निधि के उपयोग के लिए पूर्व सहमति दी थी, जो अब ब्याज सहित बढ़कर 320.3 करोड़ रुपये हो गई है.

सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम

हरेली की सुग्घर परंपरा के रंग में रंगा मुख्यमंत्री निवास सरगुजिहा कला पर केंद्रित सजावट में बस्तर और मैदानी छत्तीसगढ़ की भी सुंदर झलक सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम रंग-बिरंगी छोटी गेड़ियों, नीम और आम पत्तियों की झालर से आकर्षक बना कार्यक्रम मंडप  रायपुर  छत्तीसगढ़ की परंपरा में “हरेली” मानव और प्रकृति के जुड़ाव को नमन करने का उत्सव है। हरेली आती है तो छत्तीसगढ़ के खेत-खलिहान, गाँव-शहर, हल और बैल, बच्चे-युवा-महिलाएँ सभी इस पर्व के हर्षोल्लास से भर जाते हैं। जिस हरेली पर्व से छत्तीसगढ़ में त्योहारों की शुरुआत होती है, उसके स्वागत में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास के द्वार भी सज गए हैं। पूरा मुख्यमंत्री निवास श्रावण अमावस्या को मनाये जाने वाले हरेली पर्व की सुग्घर परंपरा के रंग में रंग गया है।  हरेली पर मुख्यमंत्री निवास की सजावट के तीन प्रमुख हिस्से हैं। प्रवेश द्वार, मध्य तोरण द्वार और मुख्य मंडप। प्रवेश द्वार में बस्तर के मेटल आर्ट की झलक है। इस द्वार पर लोगों के स्वागत में छत्तीसगढ़ का पारम्परिक वाद्य तुरही के मध्य में भगवान गणेश की प्रतिकृति है और मेटल आर्ट का घोड़ा भी उकेरा गया है।  प्रवेश द्वार के बाद मध्य में तोरण द्वार है जिसे पारम्परिक टोकनी से सजाया गया है। साथ ही रंग-बिरंगी छोटी झंडियाँ तोरण के रूप में शोभा बढ़ा रही हैं। इस हिस्से में नीम और आम पत्तों की झालर को हरेली की परम्परा के प्रतीक के रूप में लगाया गया है। पूरी सजावट का मुख्य आकर्षण वे छोटी-छोटी रंग-बिरंगी गेड़ियां हैं, जिनका सुंदर स्वरूप यहां से मुख्य मंडप तक हर जगह दिखता है।  मुख्य मंडप द्वार को सरगुजा की कला के रंगों से आकर्षक बनाया गया है। इस द्वार की छत को पैरा से छाया गया है और सरगुजिहा भित्ति कला का के मनमोहक चित्र बनाये गए हैं। कई रंगों से सजा बैलगाड़ी का चक्का भी इस द्वार की रौनक बढ़ा रहा है।  मुख्य कार्यक्रम मंडप के बाएँ हिस्से में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश का पारम्परिक घर बना है। इस घर के आहते को मैदानी छत्तीसगढ़ की चित्रकला से सजाया गया है। घर के आँगन में तुलसी चौरा और गौशाला है, जहाँ हल, कुदाल, रापा, गैती, टंगिया, सब्बल जैसे पारम्परिक कृषि यंत्र के साथ ही गोबर के उपले रखे हैं। इस ग्रामीण घर की दीवारों को सरगुजा की रजवार पेंटिंग के सुंदर चित्रों से सजाया गया है।  कार्यक्रम मंडप में कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण है। खास बात यह है कि इस प्रदर्शनी में पारम्परिक और आधुनिक कृषि यंत्रों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। पैडी सीडर, जुड़ा, बियासी हल, तेंदुआ हल और ट्रैक्टर जैसे यंत्र प्रदर्शित हैं।  मंडप में एक ओर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के जलपान का हिस्सा है तो वहीं सावन का झूला भी सावन के फुहारों भरे मौसम के आंनद को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ का पारम्परिक रहचुली झूला भी आकर्षण का केंद्र है। संस्कृति की छटा बिखेरते पारम्परिक नृत्य :  हरेली के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में गेड़ी  नृत्य और राउत नाचा जैसे पारम्परिक लोक नृत्य की छटा भी मनमोहक धुनों के साथ बिखर रही है। गेड़ी नृत्य के लिए बिलासपुर से दल आमंत्रित किया गया है। गेड़ी नृत्य के दल ने वेशभूषा में परसन वस्त्र के साथ सिर पर सीकबंद मयूर पंख का मुकुट, कौड़ी व चिनीमिट्टी से बनी माला और कौड़ी जड़ित जैकेट पहन रखा है। यह दल माँदर, झाँझ, झुमका, खँजरी, हारमोनियम और बाँसुरी की मधुर धुन में अपनी प्रस्तुति दे रही है। ग़ौरतलब है कि गेड़ी नृत्य की शुरुआत हरेली के दिन से होती है।  हरेली के मौके पर मुख्यमंत्री निवास में गड़बेड़ा (पिथौरा) से राउत नाचा के लिए 50 लोगों का दल पहुँचा है। इस दल में पुरुषों ने जहाँ धोती-कुर्ता के साथ सिर पर कलगी लगी पगड़ी, कौड़ी जड़ित बाजूबंद और पेटी के साथ पैरों में घुँघरू पहना है तो महिलाएँ भी पारम्परिक श्रृंगारी करके पहुँची हैं। इन दोनों ही दलों के सदस्यों ने बताया कि उन्हें इस मौक़े पर मुख्यमंत्री निवास पहुँचने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है।