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तहसील मझौली में पौधरोपण एवं पर्यावरण जागरूकता शिविर

सीधी   म.प्र.राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीधी के अध्यक्ष श्री प्रयाग लाल दिनकर के मार्गदर्शन में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीधी श्री मुकेश कुमार शिवहरे, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मझौली सुश्री शिवांगी सिंह परिहार, सुश्री रूचि परते द्वारा बुधवार दिनांक 23.07.2025 को तहसील मझौली में पर्यावरण जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न प्रकार के पौधे रोपित किए गए तथा पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला गया।   कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना एवं अधिकाधिक पौधरोपण को प्रोत्साहित करना था। सचिव श्री मुकेश कुमार शिवहरे ने अपने संबोधन में नागरिकों से अपील की है कि वे पर्यावरण की रक्षा हेतु सक्रिय भूमिका निभाएं। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मझौली सुश्री शिवांगी सिंह परिहार ने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पौधरोपण आवश्यक है। प्रत्येक नागरिक को कम से कम एक पौधा लगाना चाहिए एवं उनकी देखभाल करनी चाहिए।   यह कार्यक्रम जन-जागरूकता और सामाजिक सहभागिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ। इस अवसर पर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं अधिवक्तागण ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सभी ने मिलकर पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

मुंगेली बना डिजिटल इंडिया का भागीदार, अटल केन्द्रों से बदली तस्वीर

आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र सहित विभिन्न सुविधाओं का स्थानीय स्तर पर मिल रहा लाभ रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा की अनुरूप मुंगेली जिला डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुंगेली जिले के तीनों विकासखण्डों की 30 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र की स्थापना की गई है। अटल डिजिटल सुविधा केंद्र की स्थापना होने से ग्रामीणों को काफी सुविधा मिल रही हैं। पहले आय, जाति, निवास आदि कार्यों के लिए च्वाईस सेंटर, लोक सेवा केन्द्र के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब ग्रामीणों को उनके घर के पास ही सभी सुविधाएं मिलने लगी है। इससे समय और धन दोनों की बचत हुई है। भटगॉव के युवा लेखराम साहू ने बताया कि पहले पैसे जमा या निकासी के लिए 20 किलोमीटर दूर मुंगेली जाना पड़ता था, लेकिन अब ये सुविधा केन्द्र खुलने से यह प्रक्रिया बहुत आसान हो गई है। इससे ग्रामीणों को समय, मेहनत और यात्रा खर्च की बचत हो रही है। इसी तरह डिजिटल सेवा का लाभ लेने पहुंची गंगा साहू ने भी शासन की इस पहल की सराहना की। गंगा साहू ने कहा कि यह पहल ग्रामीण स्वावलंबन और पंचायत सशक्तिकरण की दिशा में मददगार कदम है। इस पहल ने न सिर्फ आर्थिक रूप से गाँवों को मज़बूत किया, बल्कि युवाओं को स्वरोज़गार के अवसर भी दिए। डिजिटल सेवाओं के जरिये शासन की मुख्यधारा अब अंतिम छोर तक पहुँच रही है, जिससे स्थानीय जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर शुरू हुए थे एडीएसके इस वर्ष 24 अपै्रल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर शासन द्वारा जिले के तीनों विकासखण्डों में पहले चरण मे 10-10 ग्राम पंचायतों में अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केन्द्र का शुभारंभ किया गया है। इन केन्द्रों में आमजनों को बैंकिंग, बीमा, पेंशन, बिजली बिल भुगतान, रेलवे टिकट, छात्रवृत्ति, और जन्म-मृत्यु सहित जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र आदि दस्तावेज़ों सहित खाता खोलने की सुविधा दी जा रही है। इससे गाँव के लोग पंचायत स्तर पर ही ज़रूरी सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

सीएम विष्णु देव साय ने हरेली पर दी प्रदेश को बधाई, कहा– प्रकृति से जुड़ने का पर्व है हरेली

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के परंपरागत लोकपर्व हरेली के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जो हमारी कृषि संस्कृति, लोक परंपरा और प्रकृति प्रेम का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेली पर्व खेती-किसानी से जुड़ा पहला त्योहार है, जिसमें किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा कर धरती माता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। यह पर्व न केवल अच्छी फसल की कामना का अवसर है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य की भावना को भी प्रकट करता है। साय ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि इस वर्ष हरेली पर्व को हम और भी सार्थक बनाएं — धरती माता की पूजा के साथ वृक्षारोपण करें, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा भविष्य सुनिश्चित हो सके। यह पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक बने। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि हरेली पर्व प्रदेशवासियों के जीवन में खुशियाँ, समृद्धि और हरियाली लेकर आए। उन्होंने सभी नागरिकों से इस लोकपर्व को आपसी सौहार्द, प्रकृति प्रेम और परंपरा के सम्मान के साथ मनाने का आह्वान किया।

छांगुर गैंग का मददगार निकला क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर, कमिश्नर ने अब्दुल रहमान को किया सस्पेंड

बलरामपुर यूपी के बलरामपुर में ईडी, एटीएस और अन्य एजेंसियों की जांच में वहां तैनात कई अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की जमालुद्दीन उर्फ छांगुर से सांठगांठ के सबूत मिले हैं. तत्कालीन डीएम ने 2 साल पहले ही पुलिस और अपराधियों के गठजोड़ की 150 पन्ने की रिपोर्ट शासन को भेज दी थी.  इस रिपोर्ट में पुलिस वालों को संगठित रूप से छांगुर के करीबी रहे गैंगस्टर हाशमी और अन्य अपराधियों की मदद करने की बातें लिखी गई थी. रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया कि किस तरीके से तीन बार मुकदमा दर्ज करने के बाद भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया.  नीतू की लाल डायरी में दर्ज कई राज पिछले दिनों ईडी की छापेमारी में छांगुर की करीबी नीतू उर्फ नसरीन के कमरे से एक लाल रंग की करीब 100 पन्नों की डायरी बरामद हुई. इस डायरी में कई अहम लोगों के साथ पैसों के लेनदेन का विवरण है. इसमें वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में छांगुर द्वारा उतरौला सीट से चुनाव लड़ने वाले एक प्रत्याशी को 90 लाख रुपये देने का पूरा ब्योरा दर्ज है. हालांकि, वह प्रत्याशी चुनाव हार गया और भाजपा के राम प्रताप वर्मा विजयी हुए. डायरी में उस मुस्लिम नेता का नाम भी दर्ज है, जिसने 2022 में उतरौला से चुनाव लड़ा था.  डीएम ने पहले ही दी थी चेतावनी तत्कालीन डीएम ने 2022 में इसी मुस्लिम प्रत्याशी पर गैंगस्टर की कार्रवाई करते हुए शासन को पत्र भेजा था. उन्होंने ईडी और आयकर जैसी एजेंसियों से जांच की सिफारिश की थी. साथ ही, पुलिस की अपराधियों के साथ मिलीभगत की भी शिकायत की थी. इसके बाद डीएम और एसपी के बीच विवाद होने पर दोनों अधिकारियों का तबादला कर दिया गया.  कार्रवाई होती तो पहले ही खुल जाता नेटवर्क गौर करने वाली बात यह है कि अगर पुलिस समय पर सिंडिकेट पर कार्रवाई करती तो बलरामपुर में चल रहा छांगुर का नेटवर्क शायद पहले ही उजागर हो जाता. बताया जा रहा है कि नीतू की डायरी में न केवल पूर्व विधायक को दिए गए पैसों का ज़िक्र है बल्कि कई पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं. जैसे-जैसे एजेंसियों की जांच आगे बढ़ेगी और भी महत्वपूर्ण नाम सामने आने की संभावना है.  छांगुर गैंग का मददगार निकला क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर, कमिश्नर ने अब्दुल रहमान को किया सस्पेंड गाजियाबाद में क्राइम ब्रांच के प्रभारी इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान सिद्दीकी को सस्पेंड कर दिया गया है. सिद्दीकी पर अवैध धर्मांतरण रैकेट चलाने वाले जमालुद्दीन उर्फ छांगुर के गैंग से मिलीभगत का आरोप है. साथ ही धर्मांतरण मामले की एक पीड़िता को धमकाने का भी गंभीर आरोप लगा है.  दरअसल, मेरठ में पीड़ित लड़की के परिवार ने 2019 में एक मामला दर्ज कराया था. आरोप है कि तत्कालीन इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान सिद्दीकी ने इस परिवार को चुप रहने की धमकी दी थी, साथ ही मुंह खोलने पर अंजाम भुगतने की बात कही थी.  मालूम हो कि मेरठ की इस पीड़िता को लव जिहाद के जाल में फंसाकर उसका जबरन धर्मांतरण करा दिया था. इसको लेकर उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के बाद इंस्पेक्टर सिद्दीकी की मामले में एंट्री हुई. सिद्दीकी पर जांच में लापरवाही और पीड़ित पक्ष को धमकाने का आरोप लगा.  आरोपों के मुताबिक, इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान सिद्दीकी ने पीड़िता को अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न सिर्फ धमकाया बल्कि चुप रहने की चेतावनी भी दी. फिलहाल, गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपी इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है. इस एक्शन से महकमे में हड़कंप मच गया. हालांकि, पहले भी ऐसे आरोप लगे हैं कि छांगुर को कई स्तर पर पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों से मदद मिलती रही है.  ये है मामला  जानकारी के मुताबिक, 2019 में मेरठ के सिविल लाइन थाना प्रभारी रहते हुए अब्दुल रहमान सिद्दीकी ने एक लड़की के अपहरण मामले में मुकदमा दर्ज नहीं किया. उल्टे पीड़ित पक्ष को ही धमका कर भगा दिया. लड़की के परिजनों ने छांगुर गैंग के सदस्य बदर अख्तर सिद्दीकी पर बेटी के अपहरण का आरोप लगाया था. वर्तमान में छांगुर एटीएस की गिरफ्त में है. छांगुर से पृछताछ के बाद हुई जांच में अब्दुल रहमान की 6 साल पहले की गई लापरवाही उजागर हई है.  

हरेली उत्सव में छत्तीसगढ़ी परंपराओं का रंग: मुख्यमंत्री निवास बना सांस्कृतिक केंद्र

रायपुर, छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की खुशबू लिए हरेली तिहार का पारंपरिक उत्सव आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निवास में विधिवत रूप से आरंभ हुआ। छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ प्रत्येक अवसर और कार्य के लिए विशेष प्रकार के पारंपरिक उपकरणों एवं वस्तुओं का उपयोग होता आया है। हरेली पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में ऐसे ही पारंपरिक कृषि यंत्रों एवं परिधानों की झलक देखने को मिली, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। काठा सबसे बाईं ओर दो गोलनुमा लकड़ी की संरचनाएँ रखी गई थीं, जिन्हें ‘काठा’ कहा जाता है। पुराने समय में जब गाँवों में धान तौलने के लिए काँटा-बाँट प्रचलन में नहीं था, तब काठा से ही धान मापा जाता था। सामान्यतः एक काठा में लगभग चार किलो धान आता है। काठा से ही धान नाप कर मजदूरी के रूप में भुगतान किया जाता था। खुमरी सिर को धूप और वर्षा से बचाने हेतु बांस की पतली खपच्चियों से बनी, गुलाबी रंग में रंगी और कौड़ियों से सजी एक घेरेदार संरचना ‘खुमरी’ कहलाती है। यह प्रायः गाय चराने वाले चरवाहों द्वारा सिर पर धारण की जाती है। पूर्वकाल में चरवाहे अपने साथ ‘कमरा’ (रेनकोट) और खुमरी लेकर पशु चराने निकलते थे। ‘कमरा’ जूट के रेशे से बना एक मोटा ब्लैंकेट जैसा वस्त्र होता था, जो वर्षा से बचाव के लिए प्रयुक्त होता था। कांसी की डोरी यह डोरी ‘कांसी’ नामक पौधे के तने से बनाई जाती है। पहले इसे चारपाई या खटिया बुनने के लिए ‘निवार’ के रूप में प्रयोग किया जाता था। डोरी बनाने की प्रक्रिया को ‘डोरी आंटना’ कहा जाता है। वर्षा ऋतु के प्रारंभ में खेतों की मेड़ों पर कांसी पौधे उग आते हैं, जिनके तनों को काटकर डोरी बनाई जाती है। यह डोरी वर्षों तक चलने वाली मजबूत बुनाई के लिए उपयोगी होती है। झांपी ढक्कन युक्त, लकड़ी की गोलनुमा बड़ी संरचना ‘झांपी’ कहलाती है। यह प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ में बैग या पेटी के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होती थी। विशेष रूप से विवाह समारोहों में बारात के दौरान दूल्हे के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, पकवान आदि रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। यह बांस की लकड़ी से निर्मित एक मजबूत संरचना होती है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित बनी रहती है। कलारी बांस के डंडे के छोर पर लोहे का नुकीला हुक लगाकर ‘कलारी’ तैयार की जाती है। इसका उपयोग धान मिंजाई के समय धान को उलटने-पलटने के लिए किया जाता है।

भारत के पड़ोस में भड़की जंग: थाइलैंड ने किया कंबोडिया पर हवाई हमला

बैंकॉक  थाईलैंड और कंबोडिया के बॉर्डर पर गुरुवार सुबह शुरू हुई झड़पों के बाद दोनों देशों में जंग जैसे हालात बनते जा रहे हैं। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर गोलीबारी का आरोप लगाया है। सीमा पर सैनिकों की गोलीबारी के बाद थाईलैंड ने फाइटर जेट F-16 की तैनाती कर दी है और हवाई हमले भी किए हैं। थाईलैंड की बमबारी से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इससे भारत के पड़ोस में एक भीषण जंग छिड़ने का अंदेशा पैदा हो गया है। दोनों देशों में इस लड़ाई की वजह दशकों पुराना सीमा विवाद है। कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि थाईलैंड ने उसके क्षेत्र में हवाई हमले किए हैं। कंबोडिया ने बताया है कि थाईलैंड की सेना ने F-16 लड़ाकू विमानों से वाट काऊ किरी स्वरक पैगोडा की ओर जाने वाली सड़क पर बम गिराए गए हैं। थाईलैंड ने छह F-16 विमान लड़ाई में उतारने और कंबोडिया के दो क्षेत्रीय सैन्य मुख्यालयों को नष्ट करने का दावा किया है। इससे भड़के कंबोडिया ने कहा है कि वह इन हमलों का जवाब देगा। दोनों देश कैसे बने दुश्मन कंबोडिया और थाईलैंड पड़ोसी हैं लेकिन आज ये दक्षिण-पूर्व एशियाई पड़ोसी देश जंग के मुहाने पर हैं। मौजूदा तनाव की शुरुआत 28 मई को हुई, जब झड़प में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई। यह घटना एमराल्ड ट्रायंगल नामक क्षेत्र में हुई, जो थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस की साझा सीमा है। यह क्षेत्र लगातार विवादित बना हुआ है क्योंकि थाईलैंड और कंबोडिया दोनों क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर अपना दावा करते हैं। 29 मई के बाद से दोनों देश एक दूसरे पर हमलावर हैं। कंबोडिया और थाईलैंड 817 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। फ्रांस का 1863 से 1953 तक कंबोडिया पर कब्जा रहा। ऐसे में फ्रांस ने ज्यादातर बॉर्डर तय किया। इसका आधार 1907 के थाईलैंड और कंबोडिया के प्राकृतिक जलविभाजक रेखा (वाटरशेड लाइन) के समझौते पर आधारित था। थाईलैंड ने बाद के वर्षों में इस नक्शे पर यह कहते हुए एतराज जताया कि डांगरेक पर्वत पर स्थित 11वीं शताब्दी के प्रीह विहियर मंदिर को कंबोडिया में रखा गया है। नक्शे पर मतभेदों के चलते सीमा के आसपास के क्षेत्र ऐसे बन गए, जिन पर दोनों देश अपना दावा करते हैं। थाई सेना ने बताया कि कंबोडिया ने भारी हथियारों से लैस सैनिकों को तैनात करने से पहले क्षेत्र में एक निगरानी ड्रोन भेजा था. उन्होंने बताया कि गोलीबारी में कम से कम दो थाई सैनिक घायल हो गए. कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता माली सोचेता ने कहा, 'हमारे सैनिकों ने थाई सैनिकों के आक्रमण के खिलाफ अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के अपने अधिकार का प्रयोग किया. थाईलैंड ने कंबोडिया की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन किया है.' कंबोडिया के नेताओं ने क्या कहा? कंबोडिया के पूर्व नेता हुन सेन ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि थाई सेना ने कंबोडिया के दो प्रांतों पर गोलाबारी की है. पोस्ट में उन्होंने लोगों से अपील की कि वो घबराए नहीं. वहीं, कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट ने फेसबुक पर कहा, 'कंबोडिया ने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दों को सुलझाने की इच्छा जताई है, लेकिन इस बार जब हम पर हथियारों से आक्रमण किया गया तो हमारे पास भी हथियारों से उसका जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.' थाईलैंड के प्रधानमंत्री क्या बोले? थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई ने कहा कि कंबोडिया के साथ उसका विवाद 'नाजुक स्थिति' में बना हुआ है और इसे सावधानीपूर्वक अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से सुलझाया जाना चाहिए. गुरुवार की दोनों देशों के बीच झड़प से एक दिन पहले थाईलैंड ने कंबोडिया से अपने राजदूत को वापस बुला लिया था. इससे पहले सीमा पर बारूदी सुरंग विस्फोट में एक थाई सैनिक घायल हो गया था जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा और थाईलैंड ने अपना राजदूत वापस बुला लिया था. बुधवार को थाईलैंड ने यह भी कहा कि वो कंबोडिया के राजदूत को देश से निष्कासित करेगा. मई में दोनों देशों के बीच हुए सशस्त्र संघर्ष में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई थी जिससे दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं. पिछले दो महीनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और सीमा पर सैनिकों की उपस्थिति बढ़ा दी है. इंटरनेशल कोर्ट में मुकदमा कंबोडिया ने 1959 में मंदिर विवाद को लेकर थाईलैंड को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में घसीटा और 1962 में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रीह विहियर कंबोडियाई क्षेत्र में आता है। थाईलैंड ने उस समय इसे स्वीकार किया लेकिन तर्क दिया कि आसपास की सीमाएं विवादित हैं। इससे सीमा रेखाएं और जटिल हो गईं। ये तनाव 2008 में बढ़ा, जब कंबोडिया ने प्रीह विहियर मंदिर के लिए यूनेस्को विश्व-धरोहर का दर्जा मांगा। जुलाई में मंदिर को मान्यता मिलने के बाद सीमा क्षेत्र के पास कंबोडियाई और थाई सैनिकों के बीच सैन्य झड़पें शुरू हो गईं। ये झड़पें लगातार चलती रहीं और 2011 में चरम पर पहुंच गईं। इस साल 36,000 लोग विस्थापित हुए। दोनों देशों में सैन्य संघर्ष रुका लेकिन अंदर-अंदर एक तनाव चलता रहा। थाईलैंड ने सीमा विवादों को सुलझाने में मदद के लिए एक संयुक्त सीमा आयोग (जेबीसी) की स्थापना भी की लेकिन इसकी बैठकों से कोई महत्वपूर्ण नतीजा नहीं निकला है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के मुकदमों और कई झड़पों के बाद भी चीजें जस की तस हैं। हालिया हफ्तों में इन्होंने काफी खराब रूप से लिया है।

गहलोत की टिप्पणी पर राठौड़ का तंज – “क्या आप धनखड़ के निजी चिकित्सक हैं?

जयपुर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान को लेकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने तीखा जवाब दिया है। राठौड़ ने कहा, “गहलोत साहब न तो डॉक्टर हैं और न ही धनखड़ जी के निजी डॉक्टर। जब कोई व्यक्ति स्वयं अपने स्वास्थ्य कारणों से पद से इस्तीफा देता है, तो उस पर अविश्वास जताना या राजनीति करना निंदनीय है। गहलोत जी को ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “पहला सुख निरोगी काया। जब व्यक्ति बीमार होता है तो राजनीति जरूरी नहीं होती। स्वस्थ होंगे तो फिर से राजनीति कर सकते हैं। खुद गहलोत कुछ समय पहले बीमार पड़े थे, अस्पताल में भर्ती रहे, भाषण के दौरान मंच पर बैठना पड़ा था। ऐसे में उन्हें दूसरों के स्वास्थ्य पर टिप्पणी से बचना चाहिए।” जातीय समीकरणों को लेकर पूछे गए सवाल पर राठौड़ ने दो टूक कहा, “हम भाजपा में जातिवादी राजनीति नहीं करते। हम सर्वसमाज का विकास चाहते हैं। जो भी मेहनती और सेवाभावी व्यक्ति हैं, उसे सेवा का अवसर दिया जाना चाहिए।” उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों को भी नसीहत दी और कहा कि, “कोई भील प्रदेश या मरू प्रदेश की बात करता है, कोई जातीय भेद की राजनीति करता है। यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं। भाजपा सभी जातियों, धर्मों और संप्रदायों का सम्मान करती है।”

गहलोत की टिप्पणी पर राठौड़ का तंज – “क्या आप धनखड़ के निजी चिकित्सक हैं?

जयपुर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान को लेकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने तीखा जवाब दिया है। राठौड़ ने कहा, “गहलोत साहब न तो डॉक्टर हैं और न ही धनखड़ जी के निजी डॉक्टर। जब कोई व्यक्ति स्वयं अपने स्वास्थ्य कारणों से पद से इस्तीफा देता है, तो उस पर अविश्वास जताना या राजनीति करना निंदनीय है। गहलोत जी को ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “पहला सुख निरोगी काया। जब व्यक्ति बीमार होता है तो राजनीति जरूरी नहीं होती। स्वस्थ होंगे तो फिर से राजनीति कर सकते हैं। खुद गहलोत कुछ समय पहले बीमार पड़े थे, अस्पताल में भर्ती रहे, भाषण के दौरान मंच पर बैठना पड़ा था। ऐसे में उन्हें दूसरों के स्वास्थ्य पर टिप्पणी से बचना चाहिए।” जातीय समीकरणों को लेकर पूछे गए सवाल पर राठौड़ ने दो टूक कहा, “हम भाजपा में जातिवादी राजनीति नहीं करते। हम सर्वसमाज का विकास चाहते हैं। जो भी मेहनती और सेवाभावी व्यक्ति हैं, उसे सेवा का अवसर दिया जाना चाहिए।” उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों को भी नसीहत दी और कहा कि, “कोई भील प्रदेश या मरू प्रदेश की बात करता है, कोई जातीय भेद की राजनीति करता है। यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं। भाजपा सभी जातियों, धर्मों और संप्रदायों का सम्मान करती है।”

BCCI का ACC बैठक में रहना तय, एशिया कप को लेकर असमंजस होगा खत्म?

मुंबई  एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के संबंध में गतिरोध टूटता हुआ लग रहा है। बीसीसीआई ढाका में होने वाली बैठक में वर्चुअल तौर पर भाग लेने के लिए तैयार है। हालांकि बीसीसीआई ने शुरू में पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक का बहिष्कार किया था लेकिन अब वर्चुअल रूप से बैठक में भाग लेगा। एशिया कप टी20 के आयोजन स्थल को लेकर गतिरोध निश्चित रूप से चर्चा में आएगा क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई, अबुधाबी और शारजाह में मैदान होने के कारण यह एक मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहा है। मेजबानी की दौड़ में दूसरा देश श्रीलंका है क्योंकि भारत बांग्लादेश की यात्रा नहीं करेगा। एसीसीसी सूत्र ने पीटीआई से कहा, ‘‘बीसीसीआई का प्रतिनिधित्व उसके उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला वर्चुअल रूप से करेंगे जो एसीसी बोर्ड के नामित सदस्य हैं। एशिया कप के आयोजन स्थल पर अंतिम निर्णय लिया जाना है इसलिए बीसीसीआई ने वर्चुअल रूप से बैठक में भाग लेने का फैसला किया है। ’’ बीसीसीआई ने अगस्त में अपने बांग्लादेश दौरे को पहले ही स्थगित कर दिया है। उसने पहले महाद्वीपीय संस्था से आयोजन स्थल बदलने का अनुरोध किया था। राजनीतिक अशांति और स्थिर सरकार के अभाव के कारण भारतीय बोर्ड पड़ोसी देश की यात्रा को लेकर संशय में है।

BCCI का ACC बैठक में रहना तय, एशिया कप को लेकर असमंजस होगा खत्म?

मुंबई  एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के संबंध में गतिरोध टूटता हुआ लग रहा है। बीसीसीआई ढाका में होने वाली बैठक में वर्चुअल तौर पर भाग लेने के लिए तैयार है। हालांकि बीसीसीआई ने शुरू में पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक का बहिष्कार किया था लेकिन अब वर्चुअल रूप से बैठक में भाग लेगा। एशिया कप टी20 के आयोजन स्थल को लेकर गतिरोध निश्चित रूप से चर्चा में आएगा क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई, अबुधाबी और शारजाह में मैदान होने के कारण यह एक मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहा है। मेजबानी की दौड़ में दूसरा देश श्रीलंका है क्योंकि भारत बांग्लादेश की यात्रा नहीं करेगा। एसीसीसी सूत्र ने पीटीआई से कहा, ‘‘बीसीसीआई का प्रतिनिधित्व उसके उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला वर्चुअल रूप से करेंगे जो एसीसी बोर्ड के नामित सदस्य हैं। एशिया कप के आयोजन स्थल पर अंतिम निर्णय लिया जाना है इसलिए बीसीसीआई ने वर्चुअल रूप से बैठक में भाग लेने का फैसला किया है। ’’ बीसीसीआई ने अगस्त में अपने बांग्लादेश दौरे को पहले ही स्थगित कर दिया है। उसने पहले महाद्वीपीय संस्था से आयोजन स्थल बदलने का अनुरोध किया था। राजनीतिक अशांति और स्थिर सरकार के अभाव के कारण भारतीय बोर्ड पड़ोसी देश की यात्रा को लेकर संशय में है।