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मणिपुर में शांति बहाली तक राष्ट्रपति शासन जारी रहेगा, अवधि छह महीने और बढ़ी

 नई दिल्ली मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को छह महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है. यह विस्तार 13 अगस्त 2025 से प्रभावी होगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस संबंध में राज्यसभा में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने स्वीकार कर लिया. सदन में पेश किए गए नोटिस में कहा गया, 'यह सदन, संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति की ओर से मणिपुर के संबंध में 13 फरवरी 2025 को जारी उद्घोषणा को 13 अगस्त 2025 से प्रभावी छह माह की और अवधि तक जारी रखने की स्वीकृति प्रदान करता है.' 2023 में हुई थी हिंसा की शुरुआत राज्य में हिंसा की शुरुआत 2023 में तब हुई जब हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक 'जनजातीय एकजुटता मार्च' आयोजित किया गया. मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था. यह फैसला राज्य में लंबे समय से जारी जातीय हिंसा और प्रशासनिक विफलता के चलते लिया गया था. कानून-व्यवस्था स्थिर करने की कोशिश में सरकार हालांकि शांति और सुलह की कोशिशें अभी भी जारी हैं, लेकिन मणिपुर के कई हिस्सों में सुरक्षा हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस अवधि में केंद्र सरकार कानून-व्यवस्था को स्थिर करने और भविष्य में विधानसभा चुनाव कराने की संभावनाओं का मूल्यांकन करने की योजना बना रही है. दरअसल, इस संबंध में सदन ने नोटिस स्वीकार किया और प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कहा गया, "यह सदन राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत मणिपुर के संबंध में 13 फ़रवरी 2025 को जारी की गई उद्घोषणा को 13 अगस्त 2025 से अगले छह महीनों के लिए लागू रखने का अनुमोदन करता है। फरवरी में मणिपुर में लगा था राष्ट्रपति शासन जानकारी दें कि मणिपुर में इसी साल 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। राज्य के तत्कालीन सीएम एन बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दिया, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा था। ध्यान देने वाली बात है कि राष्ट्रपति शासन राज्य में केवल छः महीने के लिए ही लगाया जा सकता है। मणिपुर में भी राष्ट्रपति शासन की अवधि 31 अगस्त को पूरी होने जा रही थी। इससे पहले ही राज्य में एक बार फिर राष्ट्रपति शासन छः महीने के लिए विस्तारित कर दिया गया है। मणिपुर में मैतई और कुकी संघर्ष में 260 से अधिक लोगों की मौत गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच जातीय हिंसा फैल गई। इस संघर्ष में अभी तक 260 लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा 1000 से अधिक लोगों को अपना घर छोड़कर दूसरी जगहों पर शिफ्ट होना पड़ा। इस जातीय हिंसा पर काबू पाने की कोशिशें की जा रही थीं। इसी बीच इसी साल फरवरी में मणिपुर के मुख्‍यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इसी साल फरवरी में इस्‍तीफा दे दिया था। इसके बाद 13 फरवरी 2025 को केंद्र सरकार ने राज्य में विधानसभा को भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। 

पीडीएस में चावल की जगह गेहूं की मात्रा बढ़ाई, अब 75 : 25 के अनुपात में होगा वितरण

भोपाल  प्रदेश के पात्र हितग्राहियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत अब अधिक मात्रा में गेहूं मिलेगा। वर्षों से लंबित इस मांग को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के आग्रह पर केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब पात्र परिवारों को मिलने वाले खाद्यान्न में 75 प्रतिशत गेहूं और 25 प्रतिशत चावल वितरित किया जाएगा। अभी तक चावल और गेहूं 60:40 के अनुपात में वितरित किया जाता था। विभिन्न जिलों के दौरे पर मंत्री राजपूत से कई बार नागरिकों ने अनुरोध किया कि वर्तमान वितरण व्यवस्था में बदलाव कर गेहूं की मात्रा बढ़ाकर 75 फीसदी और चावल की 25 फीसदी कर दी जाय। गौरतलब है कि खाद्य मंत्री राजपूत ने हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी से मुलाकात कर गेहूँ की मात्रा बढ़ाने का आग्रह किया था। केंद्र का फैसला नीतिगत बदलाव की दिशा में एक मिसाल खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा है कि राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय न केवल जनहितैषी है, बल्कि यह केंद्र–राज्य समन्वय का भी सशक्त उदाहरण है। यह दर्शाता है कि यदि मांग व्यवहारिक हो तो नीतिगत बदलाव संभव हैं। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुसार पीडीएस को अधिक पारदर्शी और हितग्राही केंद्रित बनाने के लिए आधार प्रमाणीकरण, डिजिटल वितरण ट्रैकिंग और ई-केवाईसी जैसी आधुनिक तकनीकों को तेजी से लागू किया जा रहा है। मंत्री राजपूत ने माना केंद्रीय मंत्री का आभार खाद्य मंत्री राजपूत ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण और सारगर्भित त्वरित निर्णय पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पीडीएस के माध्यम से खाद्यान्न में चावल की जगह गेहूं की मात्रा बढ़ाने के अनुरोध को महज एक हफ्ते के अंदर ही स्वीकार कर उसमें बदलाव के आदेश जारी करना यह बताता है कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार जनहित के लिए किसी भी निर्णय पर त्वरित अमल करती है। केंद्र से लेकर राज्य तक सरकार का लक्ष्य अंतिम छोर के व्यक्ति तक सुविधाओं का विस्तार है।  

खेती में तकनीक अपनाएं किसान, उपज बढ़ाएं और लाभ कमाएं : उद्यानिकी मंत्री

भोपाल उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि किसान परंपरागत खेती पर ही निर्भर न रहें बल्कि नवीन तकनीकी के साथ उद्यानिकी फसलों को लेने की ओर बढ़ें। उन्होंने यह बात उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजनांतर्गत ग्वालियर जिले में उद्यानिकी फसलों को बढावा देने के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ अवसर पर कही। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलपति अरविंद कुमार शुक्ला, कृषि वैज्ञानिक और जिले के प्रगतिशील किसान बडी संख्या में उपस्थित रहे। मंत्री कुशवाह ने कहा कि गांव में अधिक से अधिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट एवं छोटे छोटे उद्योग लगायें जिससे किसान खुद की फसल का अच्छा दाम प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए सरकार नई योजना ला रही है जिसमें जो भी किसान एक बगिया माँ के नाम लगाने पर सरकार 3 लाख रुपये तक अनुदान प्रदान करेगी। उन्होने कहा कि किसानों की मेहनत के कारण लगातार खादा्न उत्पादन में मध्यप्रदेश का देश में प्रथम स्थान है। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश के किसान फसलों की सिंचाई के लिए काफी परेशान रहते थे, जबसे नदी जोडो अभियान चला है और नये डेम बने है, तब से सिंचाई का रकवा काफी बडा है, जिस कारण फसल उत्पादन भी बडा है। उद्यानिकी मंत्री कुशवाह ने कहा कि हमें जैविक खेती को बढावा देना होगा, किसानों को अपनी फसलों में कम से कम कीटनाशक दवाओं का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसानों का अधिक से अधिक पंजीयन कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज उपलब्ध हो इसके लिए सरकार प्रयासरत है। किसानों को आईएसआई मार्क की ही मशीनरी एवं अन्य सामान उपलब्ध कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। कार्यशाला में कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलपति अरविंद कुमार शुक्ला ने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से किसान अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत कर सकते हैं। परंपरागत खेती के साथ-साथ उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अगर किसान कार्य करे तो उनकी आय दोगुना हो सकती है। कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे नए-नए अनुसंधानों के बारे में भी किसानों को जानकारी प्राप्त कर उसका सदुपयोग करना चाहिए। कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा भी किसानों को उद्यानिकी फसलों के संबंध में तकनीकी जानकारी दी गई।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से किया संवाद, युवा उद्योगपतियों को वितरित किए भूमि आवंटन आशय-पत्र

मध्यप्रदेश को औद्योगिक और रोजगार संपन्न राज्य बनाएंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने किया 6 औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में शीघ्र प्रारंभ होगी पुलिस चौकी, महिला अधिकारी भी होंगी पदस्थ 15 करोड़ 61 लाख लागत के विस्तारित अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र का हुआ भूमि-पूजन युवा उद्योगपतियों को वितरित किए भूमि आवंटन आशय-पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से किया संवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे उद्योग और कारखाने मंदिरों की तरह हैं, जो लोगों के कष्ट मिटाते हैं। मध्यप्रदेश में उद्योगों का निरंतर जाल फैलाया जा रहा है। प्रदेश के युवाओं को पलायन की आवश्यकता नहीं है, नए उद्योग शुरू होने से प्रदश में तेजी से समृद्धि आएगी। युवाओं को रोजगारपरक उद्योगों में प्रोत्साहन देते हुए 5 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी। मध्यप्रदेश को औद्योगिक और रोजगार संपन्न राज्य बनाएंगे और मध्यप्रदेश देश का नंबर एक राज्य होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को भोपाल के निकट अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में 416 करोड़ रूपये निवेश वाली 6 नवीन औद्योगिक इकाईयों के भूमि-पूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अचारपुरा विशेष औद्योगिक केन्द्र के रूप में उभरेगा। उन्होंने अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र एक्सटेंशन फेज-3 (ग्राम हज्जामपुर) का शिलान्यास भी किया, जो 31.21 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में दुनिया के बड़े-बड़े उद्योगपति उद्योग लगाने के लिए आ रहे हैं। अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में आज हर पीढ़ी के उद्यमी हैं। जहां गोकलदास एक्सपोर्टस प्रा.लि. के प्रभात सिंह उपस्थित हैं वहीं सिनाई हेल्थकेयर के युवा आदित्य शर्मा और एसेड्स प्राइवेट लिमिडेट के रौनक चौधरी की उपस्थिति प्रसन्नता प्रदान कर रही है। अचारपुरा की तस्वीर बदल गई है। सावन का समय है और यहां उद्योगों की वर्षा हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सहित देशभर में उद्योग-व्यापार का वातावरण बना है। मध्यप्रदेश में उद्योग प्रारंभ करने के लिए छोटे-बड़े उम्र की कोई सीमा नहीं है और सरकार के द्वार सभी के लिए खुले हैं। उन्होंने कहा कि खुशी का विषय है कि अचारपुरा की फैक्ट्रियों में ऐसी जैकेट बनाई जा रही हैं जो अमेरिका और अन्य देशों में निर्यात होती हैं। मध्यप्रदेश की प्रतिभाएं इन उत्पादों को तैयार कर विश्व में पहुंचा रही हैं। चीन जैसा देश हमारे कॉटन को बेच रहा है। मध्यप्रदेश की कपास की गुणवत्ता विश्व विख्यात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेहनत के मंदिर हमारे कारखाने इस बात के प्रतीक हैं कि वे सभी की तकलीफें दूर करते हैं। उद्योगपतियों की पूंजी और युवाओं का परिश्रम मिलकर अच्छा परिणाम देता है। राज्य सरकार ने देश के अलग-अलग शहरों में उद्योगों की स्थापना के लिए रोड शो आयोजित कर निवेशकों को आकर्षित किया है। राज्य सरकार भारत ही नहीं यूके, दुबई, स्पेन, जर्मनी, जापान सहित अनेक देशों से निवेश लेकर आई हैं।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अर्थव्यवस्था के मामले में भारत का नंबर दुनिया में वर्ष 2014 में 15वें स्थान पर था, अब भारत तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्र में संपन्नता लाने का कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में 20 वर्ष पूर्व प्रति व्यक्ति आय 11 हजार रुपए थी, जो अब 1 लाख 52 हजार रुपए हो गई है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 55 लाख हेक्टेयर है जिसे बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर करेंगे। प्रदेश की सभी पात्र लाड़ली बहनों को दीपावली के बाद 1500 रुपए की राशि हर माह दी जाएगी। सावन का महीना है, बहनों को शगुन की राशि भी देंगे। लाड़ली बहनों की राशि साल दर साल बढ़ाएंगे और इसे वर्ष 2028 तक बढ़ाकर 3000 रुपए तक ले जाएंगे। 6 नई औद्योगिक इकाईयों का किया भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा नए उद्योगों के भूमि-पूजन के साथ-साथ युवा उद्यमियों को भूमि-आवंटन के आशय पत्र भी बांटे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां 6 नई औद्योगिक इकाईयों ऐसेड्स प्राइवेट लिमिटेड, सिनाई हेल्थ केयर, गोकुलदास एक्सपोर्ट, इंडो एकॉर्ड अपरल्स, थिंक गैस एवं समर्थ अग्रीटेक का रिमोट दबाकर भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक सप्ताह के अंदर अचारपुरा में पुलिस चौकी काम करना शुरू कर देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित आईजी (पुलिस) को इस चौकी पर महिला पुलिसकर्मियों को तैनात करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अचारपुरा में गोकलदास गारमेंट इकाई का भ्रमण किया। उन्होंने यहां कार्य करने वाली बहनों से बातचीत की और उनका उत्साहवर्धन किया। एमएसएमई और भोपाल जिले के प्रभारी मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने कहा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कुशल नेतृत्व में यह परिवर्तन हुआ है।रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। गोकलदास एक्सपोर्टस प्रा.लि. में क्षेत्र की लगभग 2500 महिलाएँ दक्षता से कार्य कर रही हैं।मध्यप्रदेश के युवा उद्योगपति बनकर यहीं उद्योग स्थापित कर रहे हैं।मुख्यमंत्री डॉ. यादव हाल ही दुबई एवं स्पेन की यात्रा से आए हैं।वे निरंतर उद्योगपतियों से संवाद कर रहे हैं जिससे औद्योगिक परिदृश्य बदला है एवं मध्यप्रदेश का स्थान विश्व में ऊँचा उठ रहा है।प्रदेश में सम्पूर्ण विकास की अवधारणा बनी है। कृषि एवं औद्योगिक विकास के साथ रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।प्रदेश में उद्योगपतियों की आवश्यकताओं के आधार पर औद्योगिक नीतियां बनाई गई हैं एवं निरंतर उद्योगपतियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यही कारण है कि आज नवीन औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन हो रहा है और अनेक निवेशकों को उद्योग के लिए भूमि आवंटन के आशय-पत्र दिए गए हैं। बैरसिया विधायक विष्णु खत्री ने कहा कि अचारपुरा और आसपास का क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों का सक्रिय केंद्र बनना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सतत प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि MSME क्षेत्र के अंतर्गत 280 हेक्टेयर में औद्योगिक विकास की योजना से बैरसिया का हर घर किसी न किसी रूप में औद्योगिक विकास से जुड़ेगा। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र अब राज्य का एक सक्रिय और आदर्श औद्योगिक केंद्र बन चुका है। उन्होंने बताया कि 100 से अधिक औद्योगिक इकाइयों की … Read more

7 अभियंता दलों ने 35 निर्माण कार्यों का किया अचानक निरीक्षण,35 साइटों पर की जांच

भोपाल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के निर्देश पर प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधार के लिये लोक निर्माण विभाग ने माह दो बार विभाग के निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया जाता है। इसी क्रम में 23 जुलाई को नर्मदापुरम, सिवनी, ग्वालियर, खरगोन, सीधी, उज्जैन और सागर जिलों में मुख्य अभियंताओं के सात दलों द्वारा औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान कुल 35 कार्यों को रैंडम आधार पर चयनित कर निरीक्षण किया गया। इनमें 21 कार्य लोक निर्माण विभाग (सड़क/पुल), 6 कार्य प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (भवन), 7 कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम और 1 कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के सम्मिलित थे। निरीक्षण दलों से प्राप्त प्रतिवेदनों की समीक्षा प्रबंध संचालक म.प्र. सड़क विकास निगम भरत यादव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। इस बैठक में तकनीकी सलाहकार आर.के. मेहरा, प्रमुख अभियंता केपीएस राणा, पी.सी. वर्मा, आनंद प्रकाश राणे, बीपी बौरासी सहित समस्त संबंधित अधिकारी एवं निरीक्षणकर्ता उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान प्राप्त प्रतिवेदन में कई कार्यों में गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। सिवनी जिले में चिरचिरा से कोठीघाट तक 6.28 कि.मी. मार्ग निर्माण कार्य मापदण्डानुसार नहीं पाया गया, जिस पर ठेकेदार मेसर्स जैन इन्फ्रास्ट्रक्चर को ब्‍लेक ‍लिस्‍ट करने और उपयंत्री गौरव डेहरिया के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की गई। सीधी जिले में थोंगा-मैट टोला से जमुआ मार्ग निर्माण कार्य में भी गुणवत्ता दोष पाए गए, जिसके चलते ठेकेदार मेसर्स ओराट्रिक्स इंजीनियरिंग सॉल्यूशन प्रा.लि. को ब्‍लेक ‍लिस्‍ट करने एवं अनुविभागीय अधिकारी श्रीमती स्तुति गौतम, उपयंत्री प्रभात श्रीवास्तव तथा कंसल्टेंट के विरुद्ध कार्यवाही के निर्देश दिये गये। ग्वालियर जिले में मसूदपुर से एटमा वाया दौलतपुर मार्ग का निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर ठेकेदार मेसर्स पीताम्बरा आईडियल कंस्ट्रक्शन को ब्‍लेक ‍लिस्‍ट करने के निर्देश दिये गये। सीधी जिले में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम का बेहरी से हनुमना मार्ग असंतोषजनक स्थिति में पाया गया, जिस पर ठेकेदार मेसर्स जी.व्ही.आर. टोलवेज़ प्रा.लि. के विरुद्ध कार्यवाही करने और सुधार कार्य ठेकेदार की रिस्क एंड कॉस्ट पर कराने के निर्देश दिये गये। सागर जिले में पाली-पीरघाट-खिमलासा-कंजिया मार्ग की गुणवत्ता में भी कमी पाई गई, जिस पर ठेकेदार केसीसी बिल्डकोन प्रा.लि. को ब्‍लेक ‍लिस्‍ट करने तथा कंसल्टेंट के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए सुधार कार्य ठेकेदार की रिस्क एंड कॉस्ट पर कराने के निर्देश दिये गये। खरगोन जिले में एमएस बोरवाल नवीन हाईस्कूल शाला भवन के निर्माण कार्य की गुणवत्ता में दोष पाए जाने पर ठेकेदार मेसर्स स्नेहा कंस्ट्रक्शन को ब्‍लेक ‍लिस्‍ट करने एवं उपयंत्री विजेन्द्र भंवर और अनुविभागीय अधिकारी पवन डाबर को कारण बताओ नोटिस जारी करने की अनुशंसा की गई। इसके अलावा अन्य 20 कार्यों में आंशिक सुधार के निर्देश दिए गए। खरगोन जिले में लिक्खी-देहारी मार्ग का कार्य अच्छा पाए जाने पर कार्यपालन यंत्री विजय पवार, अनुविभागीय अधिकारी अभिषेक जमरा, उपयंत्री जितेन्द्र अरसे और ठेकेदार मेसर्स रामनारायण चौधरी की प्रशंसा की गई। बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुसार सभी अभियंताओं को वर्षा ऋतु में मार्गों पर जलभराव रोकने के लिये स्थानीय प्रशासन से समन्वय कर कार्रवाई सुनिश्चित करने एवं आवश्यकता पड़ने पर यातायात रोकने जैसे आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए गए।  

निगम ने जंगल के साथ लोगों की जिन्दगी भी संवारी, प्रदेश में ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा-CM

वन विकास निगम ने वन सम्पदा को पुनर्स्थापित किया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों का पुर्नवास बड़ी उपलब्धि निगम ने जंगल के साथ लोगों की जिन्दगी भी संवारी प्रदेश में ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को किया सम्मानित वन‍विकास निगम के विजन डाक्यूमेंट-2047 का किया अनावरण जू (चिड़ियाघर) तथा वन्य जीवों के रेस्क्यू सेंटर स्थापित होंगे वन क्षेत्र की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए वन सेवा के अधिकारी-कर्मचारियों का योगदान सराहनीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में खनन गतिविधियों और बिजली उत्पादन की प्रक्रिया में बने राख के पहाड़ों पर वनों को विकसित करने की चुनौती स्वीकार कर मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम ने वन सम्पदा को पुनर्स्थापित किया है। प्रदेश के तीन लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों का पुनर्वास करना बड़ी उपलब्धि है। वन विकास निगम इस उपलब्धि के लिए बधाई का पात्र है। यह गर्व का विषय है कि अन्य राज्य भी निगम की इस विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए उत्सुक हैं। प्रदेश में अद्यतन तकनीक के माध्यम से वनों का उचित प्रबंधन किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश वन सम्पदा में देश में सर्वश्रेष्ठ है। राज्य सरकार वनों और वन उपज के साथ वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में भी हरसंभव प्रयास कर रही है। प्रदेश के सघन वन क्षेत्र की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए वन सेवा के अधिकारी-कर्मचारी प्रशंसा के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सभी दिशाओं में क्षमता विकास और प्रगति के अवसर उपलब्ध हैं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में विशेष पहल की जा रही है। राज्य सरकार जू (चिड़ियाघर) तथा वन्य जीवों का रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य वन विकास निगम द्वारा विकसित वनों के प्रबंधन और आगामी कार्ययोजना के बारे में विचार मंथन की आवश्यकता है। अब तक किए गए कार्यों का सिंहावलोकन करते हुए राज्य सरकार वन विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विशेष नवाचार और पहल करने के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विकास निगम के केन्द्रों में ईको टूरिज्म की गतिविधियां संचालित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान का जोधपुर आम और बबूल की लकड़ी के आधार पर फर्नीचर के बड़े केन्द्र के रूप में स्थापित हुआ है। प्रदेश में उपलब्ध सागौन और अन्य श्रेष्ठ काष्ठ के उपयोग से मध्यप्रदेश भी इस प्रकार की पहल कर सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। प्रदेश के वन, देश की कई प्रमुख नदियों को जलराशि से समृद्ध बनाते हैं। प्रदेश के विशाल भू-क्षेत्र में फैली वन आधारित जीवनशैली हमें प्रकृति के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है। देश में सर्वाधिक बाघ मध्यप्रदेश में हैं। चंबल क्षेत्र में घड़ियाल भी वन्यजीव पर्यटन की शोभा बढ़ा रहे हैं। वन विभाग ने विलुप्तप्राय गिद्धों का संरक्षण करते हुए प्रदेश में गिद्धों को नया जीवन प्रदान किया है। सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने के लिए राज्य सरकार योजनाओं पर कार्य कर रही है। प्रदेश में सर्प गणना की तैयारी हो रही है। मध्यप्रदेश ऐसा क्षेत्र हैं, जहां टाइगर और मनुष्य सहचर्य की भावना से साथ-साथ रहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने वन विकास निगम के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों का सम्मान किया। इनमें सर्वआर.के. नामदेव, आर.एस. नेगी, रतन पुरवार, पी.सी. ताम्रकार तथा भगवंतराव बोहरपी को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निगम के स्वर्ण जयंती वर्ष पर वन विकास की आगामी कार्ययोजना पर केन्द्रित विजन-2047 का अनावरण किया। इस अवसर पर वन विकास निगम द्वारा संचालित गतिविधियों और उसकी विकास यात्रा पर केन्द्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के संचालक के.रविचंद्रन ने अंगवस्त्रम और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा भेंटकर अभिवादन किया। वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि वन विकास निगम, स्थानीय लोगों को जोड़ते हुए वन संरक्षण की गतिविधियां संचालित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अनेक नवाचार क्रियान्वित हो रहे हैं। इसके अंतर्गत प्रदेश को वन संपदा से समृद्ध करने के लिए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान शुरू किया गया। प्रदेश में जल संरक्षण के लिए जल-गंगा संवर्धन अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश में अनेकों कुए, बावड़ी, तालाब और जलस्त्रोतों का जीर्णोद्धार किया गया। जल-गंगा संवर्धन अभियान भूजल स्तर सुधार के क्षेत्र में एक बड़ी पहल है। राज्य वन विकास निगम की भूमिका सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है। अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णबाल ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि आयोग की अनुशंसा पर 1975 में स्थापित राज्य वन विकास निगम अपनी स्थापना से लेकर अब तक निरंतर लाभ में ही रहा है। पर्यावरणीय आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध निगम की गतिविधियों से जंगल के साथ-साथ लोगों की जिन्दगी भी संवर रही है। निगम का 50वां स्थापना दिवस मनाना हम सभी के लिए गौरव का क्षण है। वन विकास निगम के सहयोग से 3 लाख 90 हजार हेक्टेयर जंगलों का विकास और ट्रीटमेंट किया गया। इस उपलब्धि में निगम के अधिकारी और कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन तथा वानिकी के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधि और भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मैनचेस्टर टेस्ट में दूसरे दिन का खेल खत्म, इंग्लैंड का स्कोर 225/2, क्राउली-डकेट शतक से चूके

मैनचेस्टर भारत और इंग्लैंड के बीच एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी 2025 का चौथा मुकाबला मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जा रहा है. इस मुकाबले में दूसरा दिन (24 जुलाई) का खेल समाप्त हो चुका है. इंग्लैंड का स्कोर स्टम्प तक दो विकेट के नुकसान पर 225 रन है. ओली पोप 20 और जो रूट 11 रन पर नाबाद हैं. इंग्लैंड की टीम पहली पारी के आधार पर 133 रन पीछे है और उसके 8 विकेट शेष हैं. मुकाबले में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 358 रन बनाए. भारत के लिए पहली पारी में ऋषभ पंत अर्धशतक (54 रन) जड़ने में सफल रहे. इंग्लैंड के लिए कप्तान बेन स्टोक्स ने पांच विकेट झटके. 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में फिलहाल इंग्लिश टीम 2-1 से आगे है. ऐसे में शुभमन गिल की अगुवाई वाली टीम इंडिया के लिए यह मुकाबला 'करो या मरो' जैसा है. अगर भारतीय टीम यह टेस्ट हारती है तो इंग्लैंड सीरीज अपने नाम कर लेगा. भारत की तरह मेजबान इंग्लैंड की भी पहली पारी में शुरुआत शानदार रही. बेन डकेट और जैक क्राउली ने जबरदस्त बैटिंग करते हुए पहले विकेट के लिए 166 रनों की पार्टनरशिप की. डकेट ने इस दौरान 7 चौके की मदद से 46 गेंदों पर अपनी फिफ्टी पूरी कर ली. वहीं क्राउली ने 73 गेंदों पर अपनी फिफ्टी पूरी की, जिसमें 9 चौके शामिल रहे. इस शतकीय पार्टनरशिप को रवींद्र जडेजा ने तोड़ा. जडेजा ने जैक क्राउली को चलता किया, जिन्होंने 84 रन बनाए. फिर अंशुल कम्बोज ने डकेट को 94 रनों के निजी स्कोर पर आउट करके अपने टेस्ट करियर का पहला विकेट लिया. यहां से जो रूट और ओली पोप ने दूसरे दिन के खेल में भारत को कोई और नुकसान नहीं होने दिया. जख्मी ऋषभ पंत की एंट्री पर मैदान में जमकर बजीं तालियां भारत-इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का चौथा मुकाबला मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जा रहा है. इस मुकाबले के दूसरे दिन विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत चोट के बावजूद भारत की पहली पारी में दोबारा बैटिंग के लिए उतरे. ऋषभ को टेस्ट मैच के पहले दिन दाहिने पैर में चोट लग गई थी. तब उन्हें मैदान छोड़कर जाना पड़ा था. अब ऋषभ इंजरी के बावजूद जैसा हौसला दिखाया है, वो काबिले तारीफ है. ऋषभ पंत जब दोबारा बैटिंग करने उतरे तो उन्होंने मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान को चूमा. वो थोड़ा इमोशनल भी नजर आए. दूसरी ओर मैदान पर मौजूद दोनों टीमों के ही सपोर्ट्स ने तालियां बजाकर इस स्टार बल्लेबाज का स्वागत किया. ऋषभ पंत की ग्रैंड एंट्री से दर्शक खुशी से झूम उठे. ऋषभ पंत को लेकर भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने अपडेट दिया था कि वो अब इस मुकाबले में विकेटकीपिंग करते नजर नहीं आएंगे. वो जरूरत पड़ने पर ही बैटिंग करने उतरेंगे. अब पंत ने पहली पारी में शार्दुल ठाकुर का विकेट गिरने के बाद मैदान पर उतरने का फैसला किया. बीसीसीआई ने क्या कहा? बीसीसीआई की ओर से कहा गया, 'मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन दाहिने पैर में चोट लगने के बाद ऋषभ पंत इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. ध्रुव जुरेल विकेटकीपर की जिम्मेदारी निभाने जा रहे हैं. चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम से जुड़ गए हैं और टीम की जरूरतों के मुताबिक बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे.' ऋषभ पंत को मैनचेस्टर टेस्ट मैच के पहले दिन क्रिस वोक्स की गेंद पर चोट लग गई थी. तब पंत 37 रन पर बैटिंग कर रहे थे और वो गेंद पर रिवर्स स्वीप मारने की कोशिश कर रहे थे. चोट इतनी गंभीर थी कि पंत को मैदान छोड़कर बाहर जाना पड़ा. पंत अब 6 हफ्ते के लिए क्रिकेटिंग एक्शन से दूर रह सकते हैं.

मानिकपुरी पनिका समाज द्वारा बी डी महंत की स्मृति में समारोह

बिलासपुर  मानिकपुरी पनिका समाज द्वारा  हरेली के अवसर पर चैतुरगढ़ के महिषासुरमर्दिनी माता के परिसर में मध्य प्रदेश और भारत सरकार  की राजनीति में दखल देने वाले पनिका समाज के प्रेरणास्रोत बाबू बिसाहू दास महंत को उनकी 47वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि दी।साथ ही उनकी स्मृति में बेल,नीम,बड़गद,पीपल के पौधे लगाकर   समाज हित में उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।बहुप्रतीक्षित अनुसूचित जनजाति की मांग को   कोरबा जिला के पनिका समाज ने उठाते हुए  पुनः नया संगठन की अगुवानी में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।  भरतदास मानिकपुरी अध्यक्ष, नन्हीदास महंत  महासचिव, गोपालदास   पड़वार,कोषाध्यक्ष, गोरे   महंत सचिव, मनोज  मानिकपुरी,प्रदेश प्रवक्ता, निर्वाचन अधिकारी घनश्याम दास, पाली ब्लॉक के समाज अध्यक्ष कंवल दास रंगोले, लाफा सोसाइटी समाज प्रमुख  पीला दास महंत,बगदरा निवासी संतोष दास महंत, मानिकदास,सहित  भारतीय मानिकपुरी पनिका समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष,डॉक्टर देवधर महंत,साहित्यकार एवं अधिवक्ता उच्च न्यायालय बिलासपुर,डॉक्टर फूल दास महंत पनिका समाज महासमिति राष्ट्रीय संगठन नई दिल्ली अर्जुनदास , हरिहर दास, कोटा से भरतदास, शम्भुदास , पुरुषोत्तम दास, मयादास, मोहर दास ,  एवं महिला आमीन माता समिति, नवयुवकप्रदेश अध्यक्ष भावी रवि के साथ सैकड़ों लोग इस कार्यक्रम में स्वप्रेरित उपस्थित हुए।

रायसेन में रेल कोच निर्माण की नींव रखेंगे राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री से बीईएमएल के अधिकारियों ने की भेंट

रक्षा मंत्री सिंह रायसेन में करेंगे रेल कोच निर्माण इकाई का भूमिपूजन रायसेन को मिलेगी बड़ी सौगात: रक्षा मंत्री करेंगे रेल कोच फैक्ट्री का भूमिपूजन रायसेन में रेल कोच निर्माण की नींव रखेंगे राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री से बीईएमएल के अधिकारियों ने की भेंट भोपाल केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आगामी 10 अगस्त को रायसेन में 1800 करोड़ रूपए के निवेश से प्रारंभ होने वाली रेल कोच निर्माण इकाई का शिलान्यास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मेसर्स बीईएमएल लिमिटेड बैंगलुरु के चेयरमेन, मैनेजिंग डायरेक्टर शांतनु रॉय, निदेशक रेल एवं मेट्रो राजीव गुप्ता, महाप्रबंधक बीईएमएल चंद्रशेखर और ईडी ओ.पी. सिंह ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जानकारी दी गई कि बीईएमएल द्वारा औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, रायसेन जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ सम्पर्क कर रायसेन जिले की गौहरगंज तहसील के ग्राम उमरिया में अत्याधुनिक रेल कोच फैक्ट्री के शिलान्यास की आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। इस इकाई के फलस्वरूप 1575 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा। इकाई को आवंटित शासकीय भूमि को रेल लाइन से जोड़ने के लिए अधिग्रहण की कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बीईएमएल के पदाधिकारियों को मध्यप्रदेश में विभिन्न सेक्टर्स में आ रहे निवेश की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रायसेनजिले में रेल कोच निर्माण इकाई प्रारंभ होने से स्थानीय युवाओं को बड़ी संख्या में रोजगार मिलेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन आयेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के दौरान प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेन्द्र कुमार सिंह भी उपस्थित थे।  

हरियाली महोत्सव में एक पेड़ माँ के नाम अभियान में एमसीयू रीवा परिसर में किया पौधारोपण

वृक्षारोपण महाअभियान में सभी सहभागिता करें : उप मुख्यमंत्री  शुक्ल हर हाथ लगाए एक पौधा: उप मुख्यमंत्री शुक्ल की जनभागीदारी की अपील हरियाली महोत्सव में एक पेड़ माँ के नाम अभियान में एमसीयू रीवा परिसर में किया पौधारोपण रीवा  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि धरती का श्रृंगार वृक्ष हैं। वृक्षारोपण के महाअभियान में सभी अपनी सहभागिता निभायें तथा रीवा को हराभरा और सुंदर बनाने में योगदान दें। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने हरियाली महोत्सव में एक पेड़ माँ के नाम अभियान में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के रीवा परिसर में दुर्लभ तमाल का पौधा रोपा। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, अध्यक्ष नगर निगम श्री व्यंकटेश पाण्डेय, कमिश्नर रीवा संभाग श्री बीएस जामोद, संस्कृति कर्मी, साहित्यकार, पत्रकार, विद्वतजन एवं छात्र-छात्राओं सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों व प्रबुद्धजनों ने वृक्षारोपण किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि वृक्षारोपण महाअभियान में रीवा शहर के चयनित स्थलों व सड़क के किनारे डेढ़ लाख पौधे लगाये जायेंगे। पीटीएस, वेटनरी कालेज तथा इंजीनियरिंग कालेज की भूमि में वृहद वृक्षारोपण होगा। उन्होंने कहा कि सघन वृक्षारोपण से रीवा वृक्षों से अच्छादित हरीतिमा युक्त शहर होगा। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी का आहवान किया कि वृक्षारोपण में सहयोगी बनें। उप मुख्यमंत्री ने वृक्षारोपण कार्यक्रम के लिये आयोजक श्री जयराम शुक्ल को साधुवाद दिया। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने कहा कि 15 सितम्बर तक रीवा शहर में डेढ़ लाख पौधे लगाये जायेंगे। शहरी क्षेत्र में विभिन्न संगठनों व आमजनों ने पेड़ दान किये हैं जिन्हें चिन्हित स्थलों में रोपा जा रहा है। मुनगा के एक लाख पौधे लगाये जा रहे हैं। वन विभाग भी 3 लाख 50 हजार पौधे लगा रहा है।