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सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा: छत गिरने से 4 बच्चों की मौत, प्रशासन पर सवाल

 झालावाड़  राजस्थान के झालावाड़ में स्कूली बच्चों के साथ बड़ा हादसा हुआ है. इलाके में एक स्कूल की छत गिरने की खबर हैं, जिसमें 4 छात्रों की मौत हो गई और कई बच्चों के दबे होने की आशंका है. हादसे के बाद 17 बच्चों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. कई बच्चे गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र के पीपलोदी में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत अचानक गिर गई. क्लास में मौजूद छात्र इसके नीचे दब गए. जानकारी के मुताबिक, क्लास के अंदर करीब 60 बच्चे मौजूद थे, जिसमें से पच्चीस के दबे होने की आशंका है. स्कूल की छत गिरने से हुए हादसे के बाद इलाके के लोग मदद के लिए पहुंचे. मौके पर लोगों का मजमा इकट्ठा हो गया. मलबे में दबे बच्चों को लोग निकालने की कोशिश करने लगे. छत गिरने के बाद मलबे को देखकर ऐसा लग रहा है, जैसे स्कूल खंडहर में तब्दील हो गया हो. एजेंसी के मुताबिक, झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि चार बच्चों की मौत हो गई और 17 अन्य घायल हो गए. दस बच्चों को झालावाड़ रेफर किया गया है, जिनमें से तीन से चार की हालत गंभीर है. पुलिस ने बताया कि शिक्षकों और ग्रामीणों की मदद से बच्चों को मलबे से बाहर निकाला गया. राजस्थान सरकार में शिक्षा मंत्री मदन दिवालर ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "झालावाड़ में स्कूल में दुखद घटना की सूचना मिली है. दुख है, बच्चों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. बच्चों का इलाज सरकारी खर्चे पर होगा. उच्च स्तरीय जांच होगी कि आखिर कैसे छत गिरी. शिक्षा मंत्री ने कहा, "कांग्रेस सरकार का किया हुआ पाप है. पिछले 5 सालों में कांग्रेस सरकार ने स्कूलों की देख-भाल नहीं की. कांग्रेस सरकार के दौरान स्कूल जर्जर हो गए थे, इनकी मरम्मत नहीं की. हम स्कूलों की चरणबद्ध तरीके से मरम्मत करवा रहे हैं और स्कूलों को पूरी तरह ठीक करेंगे." उन्होंने आगे कहा कि कोटा में भी कई स्कूल ऐसे हैं, जिनकी हालत पूरी तरह जर्जर है. हालत इतनी बुरी है कि छत का प्लास्टर टूट-टूट कर गिर रहा है और नीचे बच्चे पढ़ रहे हैं.  शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अब अस्वस्थ किया है कि राजस्थान के सभी स्कूलों का निर्माण करवाया जाएगा और पूरी तरह से ठीक करवाए जाएंगे. सीएम ने जताया दुख… राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "झालावाड़ के पीपलोदी में विद्यालय की छत गिरने से हुआ दर्दनाक हादसा अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है. घायल बच्चों के समुचित उपचार सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है. ईश्वर दिवंगत दिव्य आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति दें."

श्रीमती मौसम बिसेन सदस्य नियुक्त, आयोग में पहले से कार्यरत हैं दो सदस्य

भोपाल मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने श्यामला हिल्स स्थित आयोग कार्यालय में औपचारिक रूप से कार्य भार ग्रहण किया। डॉ. कुसमरिया ने कहा कि आयोग प्रदेश में भ्रमण कर पिछड़े वर्ग की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक स्थिति तथा समस्याओं का अध्ययन करेगा और उनके समाधान के लिये सुझाव प्रस्तुत करेगा। साथ ही पिछड़े वर्ग को उनके आरक्षण संबंधी अधिकार दिलाने के लिये भी कार्य किया जाएगा। डॉ. कुसमरिया ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर से कृषि में एम.एससी. एवं कृषि अर्थशास्त्र में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। वे पूर्व में दमोह एवं खजुराहो संसदीय क्षेत्रों से सांसद और विधायक रह चुके हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश शासन में कृषि मंत्री के रूप में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भी हैं। पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का अध्यक्ष पद संभालने के उपरांत दोनों आयोगों के मध्य बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जा सकेगा। आयोग में श्रीमती मौसम बिसेन को सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। आयोग में पूर्व से दो सदस्य कार्यरत हैं। इस अवसर पर पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन, पूर्व विधायक रमेश भटेरे, नगर पालिका अध्यक्ष बालाघाट श्रीमती भारती ठाकुर, सत्यनारायण अग्रवाल, कन्हैया चौहान, संजय मिश्रा, गोलू ठाकुर, सागर बिसेन सहित प्रदेश भर के कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

जितेन्द्र चौरसिया : राजधानी भोपाल का ऐसा पत्रकार जिसकी मुहिम ने सरकारी बसें शुरू कराने कराया निर्णय, तो बंद कराया खनन माफिया का खेल

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र चौरसिया हैं। जितेंद्र चौरसिया ने इंदौर से भोपाल आकर पत्रकारिता में पहचान बनाई है। जितेंद्र चौरसिया ने इंदौर, भोपाल और दिल्ली में पत्रकारिता की है। इन्होंने मुख्य रूप से दैनिक भास्कर और पत्रिका सहित कई बड़े अखबारों में काम किया। जितेंद्र चौरसिया करीब 23 साल से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। इंदौर से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में काम शुरू किया। फिर नवभारत, राज एक्सप्रेस, नवदुनिया, दैनिक भास्कर और पत्रिका (राजस्थान पत्रिका ग्रुप) में विभिन्न पदों पर काम किया। वर्तमान में पत्रिका भोपाल में कार्यरत हैं। इंदौर और भोपाल में कार्य के दौरान कई पुरस्कार प्राप्त किये। साथ ही मध्य प्रदेश के 2008,  2013, 2018 और 2023 के विधानसभा और 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव का राज्य स्तरीय कवरेज किया है। मुख्य रूप से जितेंद्र चौरसिया राजनीति और प्रशासन के क्षेत्र में गहरी पकड़ रखते हैं। उनकी अनेक खबरों पर सरकार को तुरंत एक्शन लेना पड़ा है, जिसके चलते ये धारदार पत्रकारिता में पहचान रखने वाले पत्रकार हैं। प्रमुख उपलब्धि :   जितेंद्र चौरसिया को पत्रकारिता के करियर में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां मिली। इसमें विश्वविद्यालय के कुलपतियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरणों के खुलासे से लेकर रेत माफिया, शराब माफिया और जमीन का दर्द मुहिम में भू-माफिया के खिलाफ अनेक खबरें की गई।  – मप्र में खनन माफिया के खिलाफ महिम चलाना विशेष उल्लेखनीय है। पत्रिका में 2013 से 2016 के बीच खनन माफिया पर कई बड़ी खबरें सिलसिलेवार की, जिसके बाद कई खदानों पर जांच बैठी। इसमें प्रदेश के नेताओं और उनके रिश्तेदारों की खदानों पर सिलसिलेवार स्टोरी की गई। इसमें बाद में राज्य सरकार को नियम बदलना पड़ा। इसीलिये अब डायरेक्ट नेता अपने नाम खदान नहीं रखते।  – हाल ही 2024 और 2025 में मध्य प्रदेश में राज्य सड़क परिवहन निगम (सपनि) की बसों को वापस शुरू करने के लिए जितेन्द्र चौरसिया ने अभियान चलाया, जिसे सफलता मिली। सपनि की मुहिम में राज्य सरकार को सड़क परिवहन निगम फिर शुरू करने का ऐलान करना पड़ा। अब सड़क परिवहन निगम शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। इस पर पत्रिका संस्थान ने भी वेतनवृद्धि और पुरस्कार दिया। मध्य प्रदेश राज्य में सड़क परिवहन निगम को वापस शुरू करने में जितेंद्र चौरसिया की खबरों की अहम भूमिका रही है। जितेन्द्र चौरसिया के सोशल मीडिया अकाउंट लिंक्स- ट्विटर – https://x.com/Jitendra27ji?t=R4fxsyZSPRQgLuLjOjSSvA&s=35 इंस्टाग्राम- https://www.instagram.com/jitendra27ji?igsh=YWFiczF1cXB3YTNj फेसबुक- https://www.facebook.com/jitendra.chourasiya.007

गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री

भारतीय नायकों के गौरवशाली इतिहास से युवाओं को परिचित कराने का नाटक सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं को इतिहास से जोड़ेगा नाटक: डॉ. यादव ने बताया सांस्कृतिक माध्यम का महत्व गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री नाटक बनेगा प्रेरणा का मंच, युवाओं में भरेगा राष्ट्रभक्ति : डॉ. यादव का संदेश 6 दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वास्तव में नाटक कला अनूठी है। नाटकों के माध्यम से भारतीय इतिहास के गौरवशाली व्यक्तित्वों की जानकारी वर्तमान पीढ़ी को प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग की संस्था मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के सहयोग से रवीन्द्र भवन में आयोजित छह दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया, पूर्व राज्यसभा सदस्य रघुनंदन शर्मा, प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी, फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य सुवाणी त्रिपाठी और अन्य अतिथि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह संयोग है कि वे हरिहर की नगरी से आते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की चौदह विद्याओं और चौसठ कलाओं में नाट्य शास्त्र के सभी आयाम शामिल हैं। उज्जैन ऐसी नगरी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा हुई साथ ही महाकाल की नगरी होने का आशीर्वाद भी इसे मिला है। उज्जैन में श्रावण माह, कार्तिक माह और अन्य अवसरों पर होने वाले आयोजन अनूठे होते हैं। हमारे इतिहास में जहां राष्ट्र के दुर्बल होने के निराशाजनक उदाहरण देखने को मिलते हैं, वहीं हमारे समर्थ होने के भी प्रमाण मिलते हैं। विदेशी आक्रांताओं ने आराध्य स्थलों को नष्ट करने और प्रतिमाएं अन्य देशों में ले जाने का कृत्य किया, लेकिन यह भी सत्य है कि हमारे पराक्रमी और राष्ट्रप्रेमी शासकों ने उन प्रतीकों को पुन: स्वदेश लाने का कार्य भी किया। नाटक कला अनूठी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं विद्यालयीन और महाविद्यालयीन स्तर से नाटकों के मंचन से जुड़े रहे हैं। उन्हें अनेक वर्ष पूर्व महानाट्य जाणताराजा देखने का सौभाग्य मिला, जो शिवाजी महाराज के साहसिक जीवन पर केन्द्रित था। बाद में इस तर्ज पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन को मंच पर लाने में सफलता मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विविध  पक्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि शिवाजी महाराज की तरह सम्राट विक्रमादित्य सुशासन और शौर्य के प्रतीक थे। उनके राज्य का काफी विस्तार हुआ। उन्होंने अपने भूभाग के समस्त नागरिकों का ऋण समाप्त करने का ऐतिहासिक कार्य किया और विक्रम संवत् के प्रर्वतन की दिशा में आगे बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग को छह दिवसीय नाट्य समारोह के आयोजन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'लोक में मणिधर-बघेश्वर' और नाट्य समारोह की स्मारिका का विमोचन किया। प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह में प्रस्तुत होने वाले नाटकों और भरतमुनि राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत होने वाले शोध पत्रों की जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव ने किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित थे।  

गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री

भारतीय नायकों के गौरवशाली इतिहास से युवाओं को परिचित कराने का नाटक सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं को इतिहास से जोड़ेगा नाटक: डॉ. यादव ने बताया सांस्कृतिक माध्यम का महत्व गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री नाटक बनेगा प्रेरणा का मंच, युवाओं में भरेगा राष्ट्रभक्ति : डॉ. यादव का संदेश 6 दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वास्तव में नाटक कला अनूठी है। नाटकों के माध्यम से भारतीय इतिहास के गौरवशाली व्यक्तित्वों की जानकारी वर्तमान पीढ़ी को प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग की संस्था मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के सहयोग से रवीन्द्र भवन में आयोजित छह दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया, पूर्व राज्यसभा सदस्य रघुनंदन शर्मा, प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी, फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य सुवाणी त्रिपाठी और अन्य अतिथि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह संयोग है कि वे हरिहर की नगरी से आते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की चौदह विद्याओं और चौसठ कलाओं में नाट्य शास्त्र के सभी आयाम शामिल हैं। उज्जैन ऐसी नगरी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा हुई साथ ही महाकाल की नगरी होने का आशीर्वाद भी इसे मिला है। उज्जैन में श्रावण माह, कार्तिक माह और अन्य अवसरों पर होने वाले आयोजन अनूठे होते हैं। हमारे इतिहास में जहां राष्ट्र के दुर्बल होने के निराशाजनक उदाहरण देखने को मिलते हैं, वहीं हमारे समर्थ होने के भी प्रमाण मिलते हैं। विदेशी आक्रांताओं ने आराध्य स्थलों को नष्ट करने और प्रतिमाएं अन्य देशों में ले जाने का कृत्य किया, लेकिन यह भी सत्य है कि हमारे पराक्रमी और राष्ट्रप्रेमी शासकों ने उन प्रतीकों को पुन: स्वदेश लाने का कार्य भी किया। नाटक कला अनूठी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं विद्यालयीन और महाविद्यालयीन स्तर से नाटकों के मंचन से जुड़े रहे हैं। उन्हें अनेक वर्ष पूर्व महानाट्य जाणताराजा देखने का सौभाग्य मिला, जो शिवाजी महाराज के साहसिक जीवन पर केन्द्रित था। बाद में इस तर्ज पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन को मंच पर लाने में सफलता मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विविध  पक्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि शिवाजी महाराज की तरह सम्राट विक्रमादित्य सुशासन और शौर्य के प्रतीक थे। उनके राज्य का काफी विस्तार हुआ। उन्होंने अपने भूभाग के समस्त नागरिकों का ऋण समाप्त करने का ऐतिहासिक कार्य किया और विक्रम संवत् के प्रर्वतन की दिशा में आगे बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग को छह दिवसीय नाट्य समारोह के आयोजन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'लोक में मणिधर-बघेश्वर' और नाट्य समारोह की स्मारिका का विमोचन किया। प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह में प्रस्तुत होने वाले नाटकों और भरतमुनि राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत होने वाले शोध पत्रों की जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव ने किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित थे।  

पेसा कानून के बेहतर क्रियान्वयन के लिये अमरकंटक में स्थापित होगा उत्कृष्टता केन्द्र

भोपाल  भोपाल स्थित वाल्मी परिसर में गुरूवार को पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार, मध्यप्रदेश शासन तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू), अमरकंटक के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यम्रम में पेसा कंपेडियम का विमोचन तथा एमओयू समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम में भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज, मध्यप्रदेश शासन की प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ब्योमकेश त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पेसा पर आधारित एक संक्षिप्त वीडियो फिल्म प्रदर्शित की गई। “पेसा के अंतर्गत बेहतरीन कार्यों की कंपेडियम” का विमोचन किया गया। इस अवसर पर “पेसा को सशक्त बनाने के लिए क्षमता निर्माण, अनुसंधान एवं संस्थागत सहयोग” विषय पर एक विशेषज्ञ पैनल चर्चा भी हुई।  

BS-6 वाहन भी हो सकते हैं बैन? सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को तय होगा भविष्य

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि BS-VI (बीएस-6) मानकों वाली गाड़ियों पर भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पेट्रोल गाड़ियों के लिए 15 साल और डीजल गाड़ियों के लिए 10 साल की तय उम्र सीमा लागू होनी चाहिए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने दी जल्दी सुनवाई की मंजूरी मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने गुरुवार को इस याचिका को जल्दी सुनवाई के लिए मंजूरी दी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह मामला बेहद जरूरी है, क्योंकि सरकार कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों को नजरअंदाज करके अपने नियम लागू नहीं कर सकती। कोर्ट के पुराने आदेशों से नहीं हट सकती सरकार वकील ने दलील दी कि दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही गाड़ियों की उम्र को लेकर जो सीमाएं तय की थीं, सरकार को उन्हें बिना कोर्ट की मंजूरी के बदलने का अधिकार नहीं है। ऐसे में यह साफ किया जाना जरूरी है कि बीएस-6 मानकों को पूरा करने वाली नई तकनीक की गाड़ियों पर भी पुराने नियम लागू होंगे या नहीं। अब सबकी नजर 28 जुलाई की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय हो सकता है कि एनसीआर में चल रही नई BS-VI गाड़ियों को भी तय वर्षों के बाद बंद करना पड़ेगा या उन्हें राहत मिलेगी। क्या है मौजूदा नियम कानून के अनुसार, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में डीजल वाहनों के लिए वर्तमान एंड ऑफ लाइफ (जीवन अवधि) 10 वर्ष और सभी पेट्रोल वाहनों के लिए 15 वर्ष है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2015 में, भारत के राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने निर्देश दिया था कि शहर में बढ़ते प्रदूषण स्तर को कम करने के प्रयास में 10 वर्ष से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को दिल्ली-एनसीआर में चलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। 

BS-6 वाहन भी हो सकते हैं बैन? सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को तय होगा भविष्य

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि BS-VI (बीएस-6) मानकों वाली गाड़ियों पर भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पेट्रोल गाड़ियों के लिए 15 साल और डीजल गाड़ियों के लिए 10 साल की तय उम्र सीमा लागू होनी चाहिए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने दी जल्दी सुनवाई की मंजूरी मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने गुरुवार को इस याचिका को जल्दी सुनवाई के लिए मंजूरी दी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह मामला बेहद जरूरी है, क्योंकि सरकार कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों को नजरअंदाज करके अपने नियम लागू नहीं कर सकती। कोर्ट के पुराने आदेशों से नहीं हट सकती सरकार वकील ने दलील दी कि दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही गाड़ियों की उम्र को लेकर जो सीमाएं तय की थीं, सरकार को उन्हें बिना कोर्ट की मंजूरी के बदलने का अधिकार नहीं है। ऐसे में यह साफ किया जाना जरूरी है कि बीएस-6 मानकों को पूरा करने वाली नई तकनीक की गाड़ियों पर भी पुराने नियम लागू होंगे या नहीं। अब सबकी नजर 28 जुलाई की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय हो सकता है कि एनसीआर में चल रही नई BS-VI गाड़ियों को भी तय वर्षों के बाद बंद करना पड़ेगा या उन्हें राहत मिलेगी। क्या है मौजूदा नियम कानून के अनुसार, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में डीजल वाहनों के लिए वर्तमान एंड ऑफ लाइफ (जीवन अवधि) 10 वर्ष और सभी पेट्रोल वाहनों के लिए 15 वर्ष है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2015 में, भारत के राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने निर्देश दिया था कि शहर में बढ़ते प्रदूषण स्तर को कम करने के प्रयास में 10 वर्ष से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को दिल्ली-एनसीआर में चलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। 

प्लाटून कमांडर बनने का सपना होगा पूरा! राजस्थान में 84 पदों पर भर्ती शुरू

जयपुर राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) ने प्लाटून कमांडर के पदों पर 84 रिक्तियों की घोषणा की है। भर्ती की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 21 अगस्त 2025 तक आधिकारिक वेबसाइट rssb.rajasthan.gov.in के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। कुल पदों का विवरण इस भर्ती प्रक्रिया के तहत राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) द्वारा कुल 84 प्लाटून कमांडर पदों पर नियुक्ति की जाएगी। इनमें से 82 पद गैर-अनुसूचित क्षेत्र के लिए आरक्षित हैं, जबकि 2 पद अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Area) के लिए निर्धारित किए गए हैं। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति क्षेत्रवार रिक्तियों के अनुसार की जाएगी। बोर्ड द्वारा 22 नवंबर 2025 को ऑफलाइन (OMR आधारित) परीक्षा आयोजित की जाएगी। शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके अलावा, ऐसे भूतपूर्व सैनिक भी पात्र हैं जो नायब सूबेदार या उससे उच्च रैंक पर कार्यरत रहे हों और विधिवत रूप से सेवानिवृत्त हो चुके हों। साथ ही, उम्मीदवार को देवनागरी लिपि में हिंदी भाषा का ज्ञान होना चाहिए तथा राजस्थान की संस्कृति से परिचित होना अनिवार्य है। आयु सीमा की बात करें तो, 1 जनवरी 2026 को आधार मानते हुए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए। हालांकि, आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकार द्वारा नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। वेतनमान प्लाटून कमांडर पद के लिए राजस्थान राज्य सरकार द्वारा सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतनमान निर्धारित किया गया है। चयनित उम्मीदवारों को पे-बैंड 9300-34800 रुपए, ग्रेड पे 11, तथा पे मैट्रिक्स लेवल L-10 के तहत वेतन दिया जाएगा। आवेदन शुल्क सामान्य वर्ग और क्रीमीलेयर OBC/MBC वर्ग के उम्मीदवारों को ₹600, जबकि नॉन-क्रीमीलेयर OBC, EWS, SC, ST, एवं दिव्यांगजन श्रेणी के उम्मीदवारों को 400 रुपए शुल्क देना होगा। शुल्क का भुगतान उम्मीदवार ई-मित्र कियोस्क, नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, अथवा क्रेडिट कार्ड जैसे ऑनलाइन माध्यमों से 21 अगस्त 2025 तक कर सकते हैं।

अग्निवीर परीक्षा रिजल्ट कब आएगा? स्टेप-बाय-स्टेप चेक गाइड

इंडियन आर्मी अग्निवीर भर्ती परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है. अग्निवीर कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE) 30 जून से 10 जुलाई 2025 के बीच आयोजित किया गया था और अब परीक्षार्थी इसके रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो Indian Army Agniveer Result 2025 इसी महीने के आखिरी सप्ताह तक जारी किया जा सकता है. रिजल्ट कब आएगा, कहां मिलेगा और कैसे चेक करें — यहां जानिए पूरी डिटेल. कब आ सकता है रिजल्ट? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अग्निवीर परीक्षा का परिणाम जुलाई महीने के आखिरी सप्ताह में जारी किया जा सकता है. हालांकि, फिलहाल इंडियन आर्मी की ओर से रिजल्ट की कोई तय तारीख घोषित नहीं की गई है. ऐसे में अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे ऑफिशियल वेबसाइट पर नज़र बनाए रखें. रिजल्ट कहां और कैसे देखें? परीक्षा में शामिल सभी उम्मीदवार अपना परिणाम केवल ऑनलाइन माध्यम से ही देख पाएंगे. इंडियन आर्मी किसी को भी व्यक्तिगत तौर पर रिजल्ट नहीं भेजेगी. रिजल्ट चेक करने के लिए आपको नीचे बताए गए स्टेप्स फॉलो करने होंगे:     सबसे पहले joinindianarmy.nic.in वेबसाइट पर जाएं.     होमपेज पर ‘Agniveer CEE Result 2025’ लिंक को ढूंढें और उस पर क्लिक करें.     अब अपने रीजन के अनुसार संबंधित मेरिट लिस्ट के PDF लिंक पर क्लिक करें.     लिस्ट डाउनलोड होते ही आप उसमें अपना रोल नंबर सर्च कर सकते हैं. क्या होगा रिजल्ट के बाद? जिन उम्मीदवारों ने लिखित परीक्षा पास कर ली है, उन्हें अब फिजिकल टेस्ट (PET/ PST) के लिए बुलाया जाएगा. इंडियन आर्मी की ओर से शारीरिक दक्षता परीक्षा की संभावित तारीखें 8 और 9 नवंबर 2025 रखी गई हैं. किन पदों के लिए हो रही है भर्ती? इस बार अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना में कई पदों पर भर्तियां की जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं:     अग्निवीर (जनरल ड्यूटी)     अग्निवीर टेक्नीशियन     अग्निवीर ट्रेड्समैन (10वीं व 8वीं पास)     अग्निवीर क्लर्क/ स्टोर कीपर टेक्निकल     महिला मिलिट्री पुलिस (अग्निवीर जीडी)     हवलदार एजुकेशन (आईटी, साइबर, भाषा विशेषज्ञ आदि)     सिपाही फार्मा     जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) धार्मिक शिक्षक (पंडित, मौलवी, ग्रंथी आदि)     JCO केटरिंग, हवलदार ऑटो कार्टो आदि जो भी उम्मीदवार इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल हैं, वे समय-समय पर आर्मी की वेबसाइट चेक करते रहें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें. आधिकारिक जानकारी सिर्फ joinindianarmy.nic.in से ही लें.