samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री साय का बड़ा कदम: जशपुर के पीएम स्कूल में शुरू होगी एनसीसी एयर स्क्वाड्रन

रायपुर : जशपुर के पीएमविद्यालय में अब एनसीसी एयर स्क्वाड्रन शुरू होगी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री साय के प्रयासों से मिली स्वीकृति स्थानीय युवाओं को कैरियर बनाने में मिलेगी मदद मुख्यमंत्री से एयर एनसीसी के छात्रों ने की मुलाकात  रायपुर छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के युुवाओं को अब एनसीसी में एयर स्क्वाड्रन के जरिए अपना कैरियर बनाने के लिए मदद मिल पाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से जिले के पीएमजवाहर नवोदय विद्यालय में एनसीसी की एयर स्क्वाड्रन शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। यह छत्तीसगढ़ की 3 सीजी एनसीसी एयर स्क्वाड्रन होगी।  साय के प्रयासों से यह  जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो स्थानीय युवाओं के भविष्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करेगी।       मुख्यमंत्री ने विद्यालय में एयर एनसीसी के लिए चयनित 25 मेधावी विद्यार्थियों को एनसीसी कैडेट्स का बैच लगाकर पंजीयन की शुरुआत की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इनमें 13 बालिकाएं और 12 बालक शामिल हैं।  इस अवसर पर विंग कमांडर विवेक कुमार साहू ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान विधायक श्रीमती गोमती साय और श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप  सिंह जूदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।    रंग लाई मुख्यमंत्री की पहल, जशपुर मेेें शुरू हुई एयर स्कवाड्रन       उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री साय ने पिछले एनसीसी दिवस समारोह के दौरान रायपुर के समान राज्य के अन्य हवाई पट्टी वाले शहरों में भी एनसीसी की एयर स्कवाड्रन शुरू करने की इच्छा व्यक्त की थी। अभी तक छत्तीसगढ़ में केवल रायपुर में ही एयर एनसीसी और उड़ान का प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि जगदलपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और जशपुर जैसे स्थानों पर भी हवाई पट्टियों की सुविधा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री की इस पहल पर मार्च माह में जशपुर की आगडीह हवाई पट्टी को 3 सीजी एयर एनसीसी स्क्वाड्रन के लिए स्वीकृति प्रदान की गई और एक माइक्रोलाइट विमान को प्रशिक्षण हेतु जशपुर भेजा गया। इस दौरान लगभग 100 कैडेट्स को उड़ान का वास्तविक अनुभव प्रदान किया। मुख्यमंत्री साय ने स्वयं हवाई पट्टी पहुंचकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण किया और कैडेट्स से संवाद किया। कैडेट्स ने उन्हें विमान से संबंधित तकनीकी जानकारियाँ भी साझा कीं।  प्रशिक्षण प्राप्त कैडेट को रोजगार के बेहतर अवसर      वर्तमान में 3 सीजी एयर एनसीसी एयर स्क्वाड्रन, पूरे देश में एकमात्र एयर स्क्वाड्रन है जिसमें एम्स, एमबीबीएस और नर्सिंग के छात्र कैडेट के रूप में जुड़े हुए हैं। कैडेटों को  यूपीएससी और एसएसबी साक्षात्कार के माध्यम से सेना में 25 वैकेन्सी /पाठ्यक्रम के अवसर मिलते हैं, एसएससी के माध्यम से ऑफिसर्स ट्रेनिग अकादमी के लिए 50 वैकेंसी/पाठ्यक्रम के अवसर मिलते हैं जिसमें यूपीएससी परीक्षा की आवश्यकता नहीं होती है और केवल एसएसबी साक्षात्कार के माध्यम से चयन के अवसर मिलते है। 20 सीटें लडकियों के लिए आरक्षित होती हैं। वायु सेना के उड़ान प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों सहित सभी पाठ्यक्रमों में 10 प्रतिशत वेकेंसी होती है। जिसके लिए एएफसीएटी, यूपीएससी परीक्षा की आवश्यकता नहीं होती है। इसी तरह से पैरामिलिट्री फोर्स भर्ती में 2 से 10 बोनस अंक दिया जाता है।कई उद्योगों में भी एनसीसी सी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरियों में प्राथमिकता दी जाती है।

मुख्यमंत्री साय ने किया रक्त-मित्र पुस्तिका का विमोचन, रेडक्रॉस के आजीवन सदस्यों को किया सम्मानित

रायपुर : हमारी सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए संकल्पित है – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना हमारी प्राथमिकता: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री साय ने किया रक्त-मित्र पुस्तिका का विमोचन, रेडक्रॉस के आजीवन सदस्यों को किया सम्मानित रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि रक्तदान एक पुनीत कार्य है, जो न केवल किसी जरूरतमंद को जीवनदान देता है, बल्कि मानवता के प्रति हमारी सेवा भावना का श्रेष्ठतम उदाहरण भी है। मुख्यमंत्री साय आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति समय पर रक्तदाताओं से सीधा संपर्क स्थापित कर सकता है। यह पहल जीवनरक्षक सहायता को सहज, सुलभ और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि जशपुर जिले में हर वर्ग के नागरिक स्वैच्छिक रक्तदान और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं और समाज सेवा में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। आज रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ, क्योंकि जीवनदान देने वाला व्यक्ति वास्तव में ईश्वर के समकक्ष होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि रक्त का हमारे जीवन में क्या महत्व है। सही समय पर उपयुक्त रक्त समूह का रक्त मिलने से किसी के प्राणों की रक्षा की जा सकती है, इसलिए रक्तदान को ‘महादान’ कहा गया है। राज्य में रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से सर्वाधिक रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाता है, जो जनसेवा की उत्कृष्ट मिसाल है। मैं इस मंच से प्रदेशवासियों से आह्वान करता हूँ कि वे यथासंभव रक्तदान कर इस जीवनरक्षक कार्य में सहभागी बनें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है। हाल ही में हमने एम्बुलेंस सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस पहल की है। उन्होंने कहा कि मैं सभी नागरिकों को यह आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हमारी सरकार प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए संकल्पित है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जशपुर के आजीवन सदस्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए और “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने नीरज शर्मा, अजय कुमार कुशवाहा और शिव नारायण सोनी को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की। उल्लेखनीय है कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री, जिला प्रशासन एवं भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, जिला जशपुर की एक अभिनव पहल है, जिसके अंतर्गत 480 स्वैच्छिक रक्तदाताओं के नाम एवं मोबाइल नंबर सूचीबद्ध किए गए हैं। इस डायरेक्ट्री के माध्यम से जब भी किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होगी, वह सीधे सूची में दिए गए नंबरों पर संपर्क कर रक्त प्राप्त कर सकता है। इस प्रयास से रोगियों को इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें समय पर रक्त मिल सकेगा। यदि कोई व्यक्ति या समाजसेवी “रक्त-मित्र” बनना चाहता है, तो वह डायरेक्ट्री में दिए गए QR कोड को स्कैन कर गूगल फॉर्म भर सकता है। साथ ही, कलेक्टर एवं अध्यक्ष, भारतीय रेडक्रॉस जिला मुख्यालय, जशपुर (कलेक्ट्रेट परिसर, कक्ष क्रमांक 122) में संपर्क कर भी “रक्त-मित्र” के रूप में पंजीयन कर सकता है। इस गरिमामय कार्यक्रम में सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगाँव विधायक श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, डिप्टी कलेक्टर हरिओम द्विवेदी, डिप्टी कलेक्टर प्रशांत कुशवाहा, रेडक्रॉस सोसायटी के रूपेश प्राणी ग्राही, अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

सीएसआर निधि से प्रदत्त एम्बुलेंस में उपलब्ध है बेसिक लाइफ सपोर्ट समेत आधुनिक सुविधाएँ

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया स्थित कैम्प कार्यालय परिसर से अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह एम्बुलेंस बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) निधि से प्रदत्त है, जिसमें बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम सहित अन्य उन्नत सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। यह एम्बुलेंस मुख्य रूप से मनोरा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु रखी जाएगी, जिसकी सेवाएँ आवश्यकता अनुसार पूरे जिले में ली जा सकेंगी। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा परिवहन सेवा सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में गंभीर रूप से बीमार एवं दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सहायता मिल सकेगी। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार हर व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण और त्वरित स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने के लिए कृतसंकल्पित है। उनकी पहल पर विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरवर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए अनेक योजनाएँ प्रारंभ की गई हैं। उन्होंने बताया कि कुनकुरी में मेडिकल कॉलेज और 50 बिस्तर वाला मातृ एवं शिशु अस्पताल, जशपुर में प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज तथा शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना का कार्य प्रगति में है।  इस अवसर पर सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारी, और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

रीवा में ‘रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव’ का आगाज़ 26 जुलाई से, सीएम डॉ. यादव करेंगे उद्घाटन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रीवा में 26 जुलाई को करेंगे दो दिवसीय ‘रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव’ का शुभारंभ निवेश, डिजिटल बुकिंग, ग्राम पर्यटन और सांस्कृतिक साझेदारियों की होंगी ऐतिहासिक घोषणाएं उपमुख्यमंत्री शुक्ल और पर्यटन व संस्कृति मंत्री लोधी भी रहेंगे मौजूद रीवा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 26 जुलाई शनिवार को दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का शुभारंभ करेंगे। इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य मध्यप्रदेश में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के साथ–साथ पर्यटन व्यवसायियों, टूर ऑपरेटर्स और होटल इंडस्ट्री के बीच सहयोग और साझेदारी को बढ़ाने तथा मध्यप्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि तथा विंध्य क्षेत्र की पर्यटन क्षमताओं को पहचानते हुए राज्य में पर्यटन निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। रीवा के कृष्ण राज कपूर ऑडिटोरियम में होने वाले इस रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी भी मौजूद रहेंगे। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति तथा प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ल ने बताया कि कॉन्क्लेव में प्रसिद्ध अभिनेता मुकेश तिवारी और पंचायत वेबसीरीज की अभिनेत्री सान्विका सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। इस दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को सशक्त करने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णय, निवेश प्रस्ताव, डिजिटल नवाचार और सांस्कृतिक साझेदारियां सार्वजनिक की जाएंगी। ‘वाइल्डलाइफ और ऑफबीट डेस्टिनेशनों’ पर केंद्रित इस आयोजन में राज्य को पर्यटन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय समुदाय को पर्यटन की मुख्यधारा से जोड़ने प्रभावशाली पहल होगी निवेश प्रस्ताव: प्रदेश में पर्यटन अधोसंरचना को नई गति कॉन्क्लेव के पहले सत्र में होटल, रिसोर्ट, वेलनेस और ईको-टूरिज्म क्षेत्रों में निवेश करने वाले छह प्रमुख निवेशकों को लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) प्रदान किए जाएंगे। इन प्रस्तावों के अंतर्गत धार, मंदसौर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर और अलीराजपुर में निवेश प्रस्तावित है। प्रखर पाव द्वारा मंदसौर में ईको-टूरिज्म गतिविधियों और धार में मिनी रिसोर्ट की स्थापना की योजना है। गांधी सागर क्षेत्र में ईको टूरिज्म गतिविधि संचालित करने के लिए 1 करोड़ रुपये की राशि का निवेश किया जाएगा। धार जिले के हेमाबर्डी क्षेत्र में फिक्सड टेंटिंग यूनिट/मिनी रिसोर्ट के लिए भी 1 करोड़ रुपये का निवेश का प्रस्ताव है। सिद्धार्थ सिंह तोमर रायसेन जिले के ढकना चपना में होटल/रिसोर्ट के माध्यम से आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को आवश्यक सुविधायें प्रदान करने के लिए 5 करोड़ का निवेश करेंगे। कैलाश फुलवानी द्वारा विदिशा जिले के नेहरयाई क्षेत्र में होटल/रिसोर्ट के सुविधायें के लिए 3 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसी तरह रितु यादव, अफोर्ड मोटर्स जबलपुर द्वारा जबलपुर जिले में भेड़ाघाट के समीप नन्हाखेड़ा क्षेत्र में होटल/रिसोर्ट पर 1 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। आनंद ताम्रकार, पुष्पा इंटरप्राइजेस अलीराजपुर द्वारा अलीराजपुर जिले के जूनाकट्ठीवाड़ा क्षेत्र में रिसोर्ट एवं वेलनेस सेंटर के लिए 1 रुपये करोड़ का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। इन परियोजनाओं से स्थानीय समुदाय को पर्यटन आधारित रोजगार प्राप्त होगा और क्षेत्रीय पर्यटन को स्थायित्व के साथ बल मिलेगा। डिजिटल बुकिंग के नए युग की शुरुआत पर्यटन विभाग द्वारा राज्य में संचालित पीएम पर्यटन वायु सेवा की बुकिंग अब IRCTC पोर्टल पर भी संभव होगी। अब तक www.flyola.in के माध्यम से बुकिंग की जा रही थी, लेकिन अब IRCTC जैसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से जुड़ने से सेवाएं और अधिक सहज और सुगम हो सकेंगी। इस वायु सेवा के माध्यम से भोपाल, इंदौर, रीवा, सतना और सिंगरौली जैसे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़कर पर्यटन की पहुंच को विस्तार दिया जा रहा है। ग्राम होमस्टे बुकिंग प्लेटफॉर्म का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में गत माह 18 जून को "ग्रामीण रंग, पर्यटन संग" कार्यक्रम के दौरान एमपी पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) एवं पर्यटन बोर्ड (MPTB) के बीच MoU साइन हुआ था। प्रदेश के 61 चयनित पर्यटन ग्रामों के ग्राम होमस्टे अब डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। इस प्लेटफॉर्म की विशेषता है कि यह DJUBO जैसे आधुनिक प्रॉपर्टी मैनेजमेंट इंफर्मेशन सिस्टम से संचालित होता है, जो सेंट्रल रिजर्वेशन सिस्टम से युक्त है। इससे ग्रामीण होमस्टे अब MakeMyTrip, Yatra, EaseMyTrip जैसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों (OTA) से भी जुड़ पाएंगे। यह पहल स्थानीय उद्यमियों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाकर वैश्विक पर्यटक बाजार से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। डिजिटल प्रचार-प्रसार के लिए होगा एमओयू कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा दो प्रमुख डिजिटल मार्केटिंग कंपनियों, Barcode Experiential और Qyuki Digital के साथ रणनीतिक साझेदारी के लिए एमओयू किया जाएगा। इन कंपनियों की विशेषज्ञता डिजिटल ब्रांडिंग, इन्फ्लुएंसर कैंपेन और रचनात्मक सोशल मीडिया मार्केटिंग में है। यह सहयोग पर्यटन स्थलों की आधुनिक ब्रांडिंग को बल देगा और युवाओं के बीच मध्यप्रदेश को "अतुल्य भारत का दिल" के रूप में और मजबूती से स्थापित करेगा। अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा चित्रकूट घाट में "Spiritual Experience" परियोजना का स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत वर्चुअल शिलान्यास किया जाएगा और शहडोल में फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट (FCI) का उद्घाटन भी होगा। यह संस्था 15.62 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित हुआ है और युवाओं को आतिथ्य सत्कार से जुड़ी ट्रेनिंग एवं रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम उपलब्ध कराएगा। मंडला, डिंडोरी, सिंगरौली, सीधी और सिवनी जिलों में स्थानीय कला और हस्तशिल्प केंद्र स्थापित करने के लिए ग्राम सुधार समिति, एमएम फाउंडेशन और समर्थ संस्था के साथ अनुबंध किया जाएगा। यह पहल महिलाओं और कारीगरों को प्रशिक्षण, उत्पादन और विपणन से जोड़ते हुए आजीविका के अवसर उपलब्ध कराएगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में उद्योग, निर्यात और निवेश के क्षेत्र में बड़ा विश्वास

सतत प्रयासों से डिस्ट्रिक्ट टू ग्लोबल की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश बना संवाद, सुविधा और सफलता का केंद्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में उद्योग, निर्यात और निवेश के क्षेत्र में बड़ा विश्वास भोपाल  मध्यप्रदेश अब केवल निवेश प्रस्तावों का स्वागत करने वाला राज्य नहीं, बल्कि उद्योगों और उद्यमियों का भागीदार बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने एक नई कार्यसंस्कृति विकसित की है जहां नीतियों की घोषणा कागज़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ज़मीन पर उनके क्रियान्वयन का वास्तविक प्रभाव दिखता है। यही कारण है कि हाल के दिनों में उज्जैन, शाजापुर और इंदौर में आयोजित तीन विशिष्ट कार्यशालाएं इस प्रयास का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई हैं। कारोबार शुरू करने की राह हुई सरल और पारदर्शी उज्जैन में आयोजित 'स्टार्ट योर बिजनेस इन 30 डेज' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर केंद्रित कार्यशाला में बड़ी संख्या में नए उद्यमियों, निवेशकों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सिंगल विंडो सिस्टम, ऑटोमैटिक अनुमतियाँ, ऑनलाइन एप्लिकेशन ट्रैकिंग और जन विश्वास अधिनियम जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस वर्कशॉप का मूल उद्देश्य यह संदेश देना था कि ‘अब मध्यप्रदेश में उद्योग लगाना सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि एक सहज प्रक्रिया है।’ मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा आरंभ किए गए “स्टार्ट योर बिजनेस इन 30 डेज” अभियान की चर्चा विशेष रूप से हुई, जिसमें 30 दिन के भीतर सभी औपचारिकताओं के साथ व्यवसाय शुरू करने की सुविधा प्रदान की जा रही है। यह पहल देशभर में सराहना प्राप्त कर चुकी है और निवेशकों के बीच मध्यप्रदेश को एक भरोसेमंद गंतव्य के रूप में स्थापित कर रही है। जिला स्तर पर निर्यात क्षमता की पहचान शाजापुर में ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में यह स्पष्ट हुआ कि अब राज्य सरकार निर्यात को केवल महानगरों तक सीमित न रखकर, जिला और ग्रामीण स्तर तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। DGFT, ECGC, FIEO और MSME विभाग के विशेषज्ञों ने उपस्थित 100 से अधिक उद्यमियों को निर्यात के विभिन्न चरणों—पंजीयन, प्रमाणीकरण, ब्रांडिंग, जोखिम प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की पहुँच—पर मार्गदर्शन दिया। 13 नए निर्यातकों ने कार्यशाला के दौरान ही IEC (Import Export Code) के लिए पंजीयन कराकर इस प्रयास को और अधिक व्यावहारिक बना दिया। संवाद के नए आयाम—कॉफी विद एक्सपोर्टर्स इंदौर में ‘कॉफी विद एक्सपोर्टर्स’ कार्यक्रम ने राज्य सरकार और निर्यातकों के बीच एक नए तरह का विश्वास स्थापित किया। अनौपचारिक माहौल में हुए इस संवाद में ECGC, FIEO, MPIDC, MSME DFO और डाक विभाग सहित कई तकनीकी संस्थानों ने हिस्सा लिया और निर्यातकों को व्यावहारिक जानकारी से अवगत कराया। 15 नए IEC पंजीयन के साथ, यह कार्यक्रम न केवल जानकारियों के आदान-प्रदान का मंच बना। सतत प्रयासों से दिखने लगा है ठोस परिणाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में ‘रीजनल इन्वेस्टर्स कॉन्क्लेव’, देश-विदेश में आयोजित रोड शो, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) और जिला स्तर पर आयोजित कार्यशालाएं एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य सिर्फ निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि निवेशकों की यात्रा को सरल, पारदर्शी और लाभकारी बनाना है। उद्योग एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग की ओर से अब तक प्रदेश में 18 नवीन औद्योगिक नीतियां लागू की जा चुकी हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों—टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, एग्रो, आईटी, ईवी, ईएसडीएम, बायो एनर्जी आदि को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। इसी के साथ जन विश्वास अधिनियम और सिंगल विंडो सिस्टम ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को इतना सरल बना दिया है कि निवेशक अब मध्यप्रदेश को 'प्रक्रियाओं के जाल' में नहीं, 'समाधानों के स्थल' के रूप में देखने लगे हैं। एमएसएमई और नवाचार: आत्मनिर्भर एमपी की रीढ़ प्रदेश में संचालित लगभग 12 लाख एमएसएमई इकाइयां अब केवल लघु उद्योग नहीं, बल्कि निर्यात और नवाचार की धुरी बन रही हैं। वर्कशॉप्स में इस क्षेत्र पर विशेष बल दिया गया, और बताया गया कि किस तरह मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्राथमिकता पर एमएसएमई को नई योजनाओं और प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में उद्योग, निर्यात और निवेश के क्षेत्र में बड़ा विश्वास

सतत प्रयासों से डिस्ट्रिक्ट टू ग्लोबल की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश बना संवाद, सुविधा और सफलता का केंद्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में उद्योग, निर्यात और निवेश के क्षेत्र में बड़ा विश्वास भोपाल  मध्यप्रदेश अब केवल निवेश प्रस्तावों का स्वागत करने वाला राज्य नहीं, बल्कि उद्योगों और उद्यमियों का भागीदार बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने एक नई कार्यसंस्कृति विकसित की है जहां नीतियों की घोषणा कागज़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ज़मीन पर उनके क्रियान्वयन का वास्तविक प्रभाव दिखता है। यही कारण है कि हाल के दिनों में उज्जैन, शाजापुर और इंदौर में आयोजित तीन विशिष्ट कार्यशालाएं इस प्रयास का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई हैं। कारोबार शुरू करने की राह हुई सरल और पारदर्शी उज्जैन में आयोजित 'स्टार्ट योर बिजनेस इन 30 डेज' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर केंद्रित कार्यशाला में बड़ी संख्या में नए उद्यमियों, निवेशकों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सिंगल विंडो सिस्टम, ऑटोमैटिक अनुमतियाँ, ऑनलाइन एप्लिकेशन ट्रैकिंग और जन विश्वास अधिनियम जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस वर्कशॉप का मूल उद्देश्य यह संदेश देना था कि ‘अब मध्यप्रदेश में उद्योग लगाना सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि एक सहज प्रक्रिया है।’ मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा आरंभ किए गए “स्टार्ट योर बिजनेस इन 30 डेज” अभियान की चर्चा विशेष रूप से हुई, जिसमें 30 दिन के भीतर सभी औपचारिकताओं के साथ व्यवसाय शुरू करने की सुविधा प्रदान की जा रही है। यह पहल देशभर में सराहना प्राप्त कर चुकी है और निवेशकों के बीच मध्यप्रदेश को एक भरोसेमंद गंतव्य के रूप में स्थापित कर रही है। जिला स्तर पर निर्यात क्षमता की पहचान शाजापुर में ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में यह स्पष्ट हुआ कि अब राज्य सरकार निर्यात को केवल महानगरों तक सीमित न रखकर, जिला और ग्रामीण स्तर तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। DGFT, ECGC, FIEO और MSME विभाग के विशेषज्ञों ने उपस्थित 100 से अधिक उद्यमियों को निर्यात के विभिन्न चरणों—पंजीयन, प्रमाणीकरण, ब्रांडिंग, जोखिम प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की पहुँच—पर मार्गदर्शन दिया। 13 नए निर्यातकों ने कार्यशाला के दौरान ही IEC (Import Export Code) के लिए पंजीयन कराकर इस प्रयास को और अधिक व्यावहारिक बना दिया। संवाद के नए आयाम—कॉफी विद एक्सपोर्टर्स इंदौर में ‘कॉफी विद एक्सपोर्टर्स’ कार्यक्रम ने राज्य सरकार और निर्यातकों के बीच एक नए तरह का विश्वास स्थापित किया। अनौपचारिक माहौल में हुए इस संवाद में ECGC, FIEO, MPIDC, MSME DFO और डाक विभाग सहित कई तकनीकी संस्थानों ने हिस्सा लिया और निर्यातकों को व्यावहारिक जानकारी से अवगत कराया। 15 नए IEC पंजीयन के साथ, यह कार्यक्रम न केवल जानकारियों के आदान-प्रदान का मंच बना। सतत प्रयासों से दिखने लगा है ठोस परिणाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में ‘रीजनल इन्वेस्टर्स कॉन्क्लेव’, देश-विदेश में आयोजित रोड शो, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) और जिला स्तर पर आयोजित कार्यशालाएं एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य सिर्फ निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि निवेशकों की यात्रा को सरल, पारदर्शी और लाभकारी बनाना है। उद्योग एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग की ओर से अब तक प्रदेश में 18 नवीन औद्योगिक नीतियां लागू की जा चुकी हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों—टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, एग्रो, आईटी, ईवी, ईएसडीएम, बायो एनर्जी आदि को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। इसी के साथ जन विश्वास अधिनियम और सिंगल विंडो सिस्टम ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को इतना सरल बना दिया है कि निवेशक अब मध्यप्रदेश को 'प्रक्रियाओं के जाल' में नहीं, 'समाधानों के स्थल' के रूप में देखने लगे हैं। एमएसएमई और नवाचार: आत्मनिर्भर एमपी की रीढ़ प्रदेश में संचालित लगभग 12 लाख एमएसएमई इकाइयां अब केवल लघु उद्योग नहीं, बल्कि निर्यात और नवाचार की धुरी बन रही हैं। वर्कशॉप्स में इस क्षेत्र पर विशेष बल दिया गया, और बताया गया कि किस तरह मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्राथमिकता पर एमएसएमई को नई योजनाओं और प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल बोले– हिंदी माध्यम से चिकित्सा शिक्षा से डॉक्टर-रोगी संवाद होगा आसान

हिन्दी माध्यम से एम.बी.बी.एस. की पढ़ाई से मरीजों के इलाज में सुगमता होगी : उप मुख्यमंत्री शुक्ल हिंदी में एमबीबीएस पढ़ाई से इलाज में आएगी सरलता: उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल बोले– हिंदी माध्यम से चिकित्सा शिक्षा से डॉक्टर-रोगी संवाद होगा आसान मिशन मातृ भाषा, प्रोत्साहन एवं जागरूकता कार्यक्रम में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि हिन्दी माध्यम से एम.बी.बी.एस. की पढ़ाई से मरीजों के इलाज में सुगमता होगी। मध्यप्रदेश हिन्दी माध्यम से चिकित्सा शिक्षा देने वाला राज्य है जहाँ इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा में मिशन मातृभाषा प्रोत्साहन एवं जागरूकता कार्यक्रम में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हिन्दी भाषा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कार्यक्रम का आयोजन प्रशंसनीय है। हिन्दी माध्यम से दी जाने वाली शिक्षा से ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिलेगा साथ ही उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री श्री अमित शाह ने प्रदेश में हिन्दी के माध्यम से चिकित्सा की शिक्षा देने का शुभारंभ किया था जो अब मूर्तरूप ले रहा है और हिन्दी माध्यम से पुस्तकों से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। श्री शुक्ल ने शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वह एम.बी.बी.एस. की पढ़ाई के उपरांत गांव में अपनी सेवा देकर पीड़ित मानवता का पुण्य लें क्योंकि भारत को समझना है तो गांव को समझना होगा। ग्रामीण स्वास्थ्य केन्द्रों को सुविधा संपन्न बनाया जा रहा है तथा चिकित्सकों व स्टाफ के लिये आवास सहित अन्य व्यवस्थायें भी सुनिश्चित कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि रीवा में चिकित्सा सुविधाओं के लिये अतिरिक्त भवन, मशीनें तथा चिकित्सकों व चिकित्सकीय स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है ताकि मरीजों को बेहतर से बेहतर इलाज मिल सके। इस अवसर पर डीन मेडिकल कालेज डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि हिन्दी माध्यम से की गई पढ़ाई से मातृभाषा को लोग बेहतर ढ़ंग से समझ सकेंगे व मरीजों को समझा भी सकेंगे। उन्होंने बताया कि हिन्दी माध्यम से शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया जायेगा। कार्यक्रम में अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा, चिकित्सक, विधायक प्रतिनिधि विवेक दुबे, के.के. गर्ग तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। छात्र दिव्यांश व छात्रा कुमकुम मण्डलोई ने हिन्दी माध्यम से की जाने वाली पढ़ाई की विशेषताओं को बताया।  

राजेन्द्र शुक्ल ने किया अत्याधुनिक एमआरआई मशीन का लोकार्पण, स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती

 रीवा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 13 करोड़ रूपये की लागत की नवीन एमआरआई मशीन का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि इस अत्याधुनिक मशीन से मरीजों का एमआरआई का परीक्षण बेहतर ढ़ंग से होगा। शुक्ल ने कहा कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल इस क्षेत्र के मरीजों के लिए बड़ी सौगात है। यहां अत्याधुनिक मशीनों से जांच एवं कुशल चिकित्सकों द्वारा गंभीर रोगों का इलाज किया जा रहा है। ल्लेखनीय है कि अस्पताल में आयुष्मान धारक भर्ती मरीजों का नि:शुल्क एमआरआई होगा तथा अन्य मरीजों का परीक्षण शासन द्वारा निर्धारित दर के अनुसार किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री ने सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के विस्तार भवन एवं निर्माणाधीन नवीन कैथ लैब का निरीक्षण किया। विदित हो कि नवीन कैथ लैब शीघ्र ही प्रारंभ हो जायेगी। शुक्ल ने कैंसर यूनिट निर्माण कार्य का निरीक्षण किया तथा कार्य को गति देने के निर्देश दिये। इस दौरान डीन मेडिकल कालेज डॉ. सुनील अग्रवाल, अधीक्षक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल डॉ. अक्षय श्रीवास्तव सहित चिकित्सक उपस्थित रहे।  

गुना जिले में 175.76 करोड़ लागत से 604 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमि-पूजन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पीकेसी के साथ कुंभराज वृहद सिंचाई परियोजना से गुना जिले के खेत होंगे सिंचित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 5138 करोड़ लागत वाली कुंभराज परियोजना से 97500 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित गुना जिले में 175.76 करोड़ लागत से 604 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमि-पूजन खंडेलवाल की बेटी के लीवर ट्रांसप्लांट के लिए 4 लाख और ममता विश्वकर्मा को 1 लाख रुपए सहायता राशि देने की घोषणा बीनागंज में गौशाला विकास के लिए 12 लाख रुपए देने की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया पीकेसी नदी लिंक परियोजना आभार सभा को किया संबोधित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुंभराज वृहद सिंचाई परियोजना के लिए प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार गुना  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। हमारे यहां कोई ग्लेशियर नहीं हैं, लेकिन सघन वन और जलराशि उपलब्ध है। प्रदेश का कोई भी गांव, कोई भी खेत पानी से वंचित न रहे इसके लिए हमारी सरकार ने प्रदेश में तीन बड़ी नदी जोड़ो परियोजनाओं पर काम शुरू किया है। पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना इन्हीं में से एक है। गुना जिले को पीकेसी के साथ-साथ कुंभराज वृहद सिंचाई परियोजना का भी बड़ा लाभ मिलेगा इससे यहां के गांव-गांव और खेत-खेत तक पानी पहुंचेगा। यह परियोजना गुना जिले की तस्वीर बदल देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को गुना जिले की चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र के बीनागंज में पीकेसी नदी लिंक परियोजना के लिए जिलेवासियों द्वारा आयोजित आभार सभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने करीब 5138 करोड़ रूपए की लागत वाली कुंभराज वृहद सिंचाई परियोजना की स्वीकृति पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। इस परियोजना से गुना जिले की 97500 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को बारहमासी सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो गई है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुना जिले के समग्र विकास के लिए कुल 175.76 करोड़ रूपए की लागत से विभिन्न श्रेणी के 604 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच से ग्राम बीनागंज के राजेश खंडेलवाल की बेटी के लीवर ट्रांसप्लांट के लिए 4 लाख रुपए देने की घोषणा की। बेटी के इलाज के लिए सरकार द्वारा एक लाख रूपए पहले ही दिए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीमती ममता विश्वकर्मा को 1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने बीनागंज में गौशाला के संपूर्ण विकास के लिए 12 लाख रुपए देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्या पूजन एवं दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का विधिवत् शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भगवान गणेश की गोबर से निर्मित प्रतिमा भेंटकर स्वागत किया गया। क्षेत्रीय बहनों ने श्रावण मास पर मुख्यमंत्री को दो बड़ी राखियां भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच से लाड़ली लक्ष्मी योजना, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सहित अन्य शासकीय योजनाओं के चिन्हित हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चाचौड़ा के दर्शनीय स्थलों पर केंद्रित एक मार्गदर्शिका का भी विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 2003 तक विपक्षी दल की सरकार थी और उस दौर में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिला। तब की सरकार ने किसानों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा 55 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। गुना के गुलाब और धनिया में यहां के किसानों की कड़ी मेहनत की खुशबू आती है। गुना जिला मालवा और चंबल का दरवाजा है। उन्होंने कहा कि किसी जमाने में चंबल में दस्यु संकट चरम पर था। हमारी सरकार बनने पर डाकुओं का सफाया कर दिया गया। अगर 50 साल पहले दस्यु समस्या का हल निकल जाता, तो इस अंचल का अत्यधिक विकास होता। पार्वती, कालीसिंध और चंबल नदी योजना बाबा महाकाल का आशीर्वाद हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में नदी जोड़ो परियोजना का कार्य जारी है। पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना से चंबल और मालवा के 13 जिलों को लाभ मिलेगा इससे राजस्थान के भी 13 जिले लाभान्वित होंगे। विपक्षी दल की सरकारों ने पीकेसी परियोजना का विरोध किया और कई सालों तक अटकाए रखा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में समस्या का हल निकाला गया। पीकेसी की सहायक कुंभराज वृहद सिंचाई परियोजना से अब गुना जिले की हर तहसील, हर गांव और खेत में सिंचाई जल और पेयजल का लाभ भी मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में 4 करोड़ गरीबों को पक्का मकान मिल चुका है। प्रधानमंत्री मोदी के पास अपना कोई मकान नहीं, लेकिन वे करोड़ों लोगों के मकान बनवा रहे हैं। गरीब-जरूरतमंदों को आयुष्मान भारत के अलावा नि:शुल्क राशन योजना का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सावन का महीना चल रहा है, बहनों को 250 रुपए का शगुन मिलेगा। प्रदेश की लाड़ली बहनों को इसी साल दीपावली से 1500 रुपए हर माह भेजे जाएंगे। लाड़ली बहनें अगर फैक्ट्री में काम करेंगी, तो उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप 14 हजार रुपए मेहनताना दिलवाएंगे। युवाओं को भी रोजगार के लिए फैक्ट्री में काम करने पर सरकार 5000 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत हम केन्द्र सरकार के साथ मिलकर पात्र किसानों को कुल 12 हजार रुपए दे रहे हैं, जिसमें 6 हजार रूपये केन्द्र से एवं 6 हजार राज्य सरकार की ओर से दिए जा रहे हैं। किसानों को बिजली बिल से मुक्ति दिलाने के लिए प्रदेश में सोलर पॉवर से चलित सिंचाई पंप बांटे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार विरासतों का हरसंभव तरीके से संरक्षण करते हुए प्रदेश को विकास की धारा से जोड़ रही है। प्रदेश में विकास का क्रम लगातार जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में गंभीर घायलों और गरीब जरूरतमंदों को एयर एम्बुलेंस का लाभ मिल रहा है। राहवीर योजना के माध्यम से सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की सहायता करने और अस्पताल पहुंचाने पर मदद करने वाले राहवीर को 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गौपालकों को अनुदान देने की शुरुआत की है। गौशालाओं … Read more

नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन से मार लो बाजी

  जब हम इंटरव्यू के लिए जाते हैं, तो जितना हमारा वर्बल कम्युनिकेशन मायने रखता है, उतना ही नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन भी महत्वपूर्ण होता है। आइए जानते हैं, इंटरव्यू पैनल के सामने हमारा नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन कैसा हो…। बॉडी लैंग्वेज नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन हमारे एक्सप्रेशंस के माध्यम से होता है। हमारी बॉडी लैंग्वेज, ड्रेस, बैग आदि हमारे और हमारी सोच के बारे में बहुत कुछ कह देते हैं। इंटरव्यू में सफलता के लिए इस तरह के कम्युनिकेशन की एबीसीडी को समझना बेहद जरूरी है। आई कॉन्टैक्ट इंटरव्यूअर्स से आई कॉन्टैक्ट टूटा नहीं कि इसे कॉन्फिडेंस में कमी मान लिया जाएगा। बेस्ट परफॉर्मेंस के लिए जो भी इंटरव्यूअर सवाल करे, उसकी ओर हल्की-सी गर्दन घुमाएं और जवाब दें। इस तरह आई कॉन्टैक्ट सभी से बना रहेगा। यदि कोई मेंबर सवाल करने के साथ आंखों पर जोर देते हुए तिरछी निगाह से आपको और अपने साथियों को देखे, तो समझें कि उसके इसी सवाल पर अधिकतर मार्क्स डिपेंड करते हैं। किसी जवाब पर इंटरव्यूअर्स एक-दूसरे को देखें, उनके फेस रिलैक्स हों और वे उसी से जुड़ा दूसरा सवाल कर दें, तो जान लें कि आपका जवाब सही था। फेशियल एक्सप्रेशंस इंटरव्यूअर हमारी फेस रीडिंग करते हैं। हमसे कोई सवाल पूछा जाए और उसका जवाब हमें नहीं मालूम हो, लेकिन हम इधर-उधर की बातें करके पैनल मेंबर्स को कन्फ्यूज करने की कोशिश करते हैं, तो हमारा चेहरा हमारे वर्बल कम्युनिकेशन का साथ छोड़ देता है। हमारी आंखें इधर-उधर होने लगती हैं। माथे पर बल पड़ जाते हैं और होंठ सूखने लगते हैं। न कहते हुए भी सब कुछ कम्युनिकेट हो जाता है कि हम उलझा रहे हैं। इंटरव्यू में पैनल को उलझाने से बेहतर है कि सॉरी कहकर अगले सवाल का सामना करने के लिए तैयार हो जाएं। सिटिंग पोजीशन इंटरव्यू में कैंडिडेट की सिटिंग पोजीशन भी उसके बारे में कम्युनिकेट करती है। पैनल के सामने चेयर पर बहुत आगे की ओर झुककर न बैठें। यह कम्युनिकेट करता है कि आप पूरी उम्मीद से कुछ मांगने आए हैं। बहुत-से एक्सपर्ट आराम से टेक लगाकर बैठने का मतलब फुल ऑफ कॉन्फिडेंस बट नॉट सिंसियर के तौर पर लेते हैं। उनके मन में कैंडिडेट की ऐसी इमेज बन जाती है कि शायद वह ओवर कॉन्फिडेंस में चीजों को गंभीरता से नहीं लेता। अतः चेयर पर सीधे बैठें, बस हल्का-सा बैक-सपोर्ट लें। इससे यह संदेश जाएगा कि आपमें सिंसियरिटी और कॉन्फिडेंस दोनों ही मौजूद हैं।