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नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन से मार लो बाजी

  जब हम इंटरव्यू के लिए जाते हैं, तो जितना हमारा वर्बल कम्युनिकेशन मायने रखता है, उतना ही नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन भी महत्वपूर्ण होता है। आइए जानते हैं, इंटरव्यू पैनल के सामने हमारा नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन कैसा हो…। बॉडी लैंग्वेज नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन हमारे एक्सप्रेशंस के माध्यम से होता है। हमारी बॉडी लैंग्वेज, ड्रेस, बैग आदि हमारे और हमारी सोच के बारे में बहुत कुछ कह देते हैं। इंटरव्यू में सफलता के लिए इस तरह के कम्युनिकेशन की एबीसीडी को समझना बेहद जरूरी है। आई कॉन्टैक्ट इंटरव्यूअर्स से आई कॉन्टैक्ट टूटा नहीं कि इसे कॉन्फिडेंस में कमी मान लिया जाएगा। बेस्ट परफॉर्मेंस के लिए जो भी इंटरव्यूअर सवाल करे, उसकी ओर हल्की-सी गर्दन घुमाएं और जवाब दें। इस तरह आई कॉन्टैक्ट सभी से बना रहेगा। यदि कोई मेंबर सवाल करने के साथ आंखों पर जोर देते हुए तिरछी निगाह से आपको और अपने साथियों को देखे, तो समझें कि उसके इसी सवाल पर अधिकतर मार्क्स डिपेंड करते हैं। किसी जवाब पर इंटरव्यूअर्स एक-दूसरे को देखें, उनके फेस रिलैक्स हों और वे उसी से जुड़ा दूसरा सवाल कर दें, तो जान लें कि आपका जवाब सही था। फेशियल एक्सप्रेशंस इंटरव्यूअर हमारी फेस रीडिंग करते हैं। हमसे कोई सवाल पूछा जाए और उसका जवाब हमें नहीं मालूम हो, लेकिन हम इधर-उधर की बातें करके पैनल मेंबर्स को कन्फ्यूज करने की कोशिश करते हैं, तो हमारा चेहरा हमारे वर्बल कम्युनिकेशन का साथ छोड़ देता है। हमारी आंखें इधर-उधर होने लगती हैं। माथे पर बल पड़ जाते हैं और होंठ सूखने लगते हैं। न कहते हुए भी सब कुछ कम्युनिकेट हो जाता है कि हम उलझा रहे हैं। इंटरव्यू में पैनल को उलझाने से बेहतर है कि सॉरी कहकर अगले सवाल का सामना करने के लिए तैयार हो जाएं। सिटिंग पोजीशन इंटरव्यू में कैंडिडेट की सिटिंग पोजीशन भी उसके बारे में कम्युनिकेट करती है। पैनल के सामने चेयर पर बहुत आगे की ओर झुककर न बैठें। यह कम्युनिकेट करता है कि आप पूरी उम्मीद से कुछ मांगने आए हैं। बहुत-से एक्सपर्ट आराम से टेक लगाकर बैठने का मतलब फुल ऑफ कॉन्फिडेंस बट नॉट सिंसियर के तौर पर लेते हैं। उनके मन में कैंडिडेट की ऐसी इमेज बन जाती है कि शायद वह ओवर कॉन्फिडेंस में चीजों को गंभीरता से नहीं लेता। अतः चेयर पर सीधे बैठें, बस हल्का-सा बैक-सपोर्ट लें। इससे यह संदेश जाएगा कि आपमें सिंसियरिटी और कॉन्फिडेंस दोनों ही मौजूद हैं।  

मध्यप्रदेश में हिन्दी फीचर फिल्म तन्वी द ग्रेट कर मुक्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फीचर फिल्म "तन्वी द ग्रेट" को कर मुक्त करने की घोषणा की थी। इसी क्रम में राज्य शासन ने फिल्म को मध्यप्रदेश में कर मुक्त करने के आदेश जारी किए है। फीचर फिल्म के मध्यप्रदेश में प्रदर्शन की अवधि 25 जुलाई से 23 अगस्त, 2025 तक के लिए मध्यप्रदेश मॉल एवं सेवा कर अधिनियम 2017 के अधीन स्टेट जीएसटी की संपूर्ण राशि की प्रतिपूर्ति करते हुए दर्शकों को छूट मिलेगी। फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने किया है। संबंधित सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स द्वारा स्टेट जीएसटी की राशि को घटाकर दर्शकों को इस फिल्म के टिकट का विक्रय किया जाएगा। इस सेवा प्रदाय पर देय एवं भुगतान किये गये राज्य जीएसटी के अंश के बराबर की राशि की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा सेवा प्रदाता को की जायेगी। फिल्म के प्रदर्शन के लिए संबंधित सिनेमाघरों मल्टीप्लेक्स के प्रचलित सामान्य प्रवेश शुल्क में वृद्धि नहीं की जाएगी। उल्लेखनीय है कि "तन्वी द ग्रेट" 21 वर्षीय तन्वी रैना की कहानी है, जो ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से जूझते हुए अपने शहीद पिता के सपने को पूरा करने के लिए भारतीय सेना में शामिल होने का प्रयास करती है। इसकी संवेदनशील कहानी और सामाजिक संदेश को दर्शकों और समीक्षकों से व्यापक सराहना मिली है।  

सिंगरौली के गंभीर रोगी को एम्स भोपाल लाकर की गई जीवन रक्षा पीएमएयर एम्बुलेंस सेवा हुई लाभकारी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने गरीब और जरूरतमंदों को कष्ट के समय में सहायता के लिए एयर एम्बुलेंस की सौगात दी है। यह सुविधा एक बार फिर लाभकारी सिद्ध हुई है। राज्य सरकार ने सेवा की अपनी प्रतिबद्धता को सिद्ध करते हुए प्रदेश के दूरस्थ और उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे सिंगरौली जिले के निवासी संदीप सिंह को किडनी संबंधी गंभीर बीमारी के उपचार के लिए उन्हें पीएम एम्बुलेंस के माध्यम से एयरलिफ्ट करके भोपाल लाया गया और उन्हें बेहतर उपचार के लिए भोपाल एम्स में भर्ती करवाकर जीवन रक्षा की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी और चिकित्सक इस सेवा का लाभ गंभीर रोगियों और दुर्घटनाग्रसत नागरिकों को दिलवाने के प्रति सजग रहें। जिन व्यक्तियों को इस सेवा की जरूरत है, उनके परिजन भी इसका लाभ लेने के लिए आगे आएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार गरीबों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के सभी पात्र हितग्राहियों को आयुष्मान योजना का लाभ भी दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश पहला प्रदेश है जहां जरूरतमंद मरीजों को एयर एम्बुलेंस की सुविधा मिलती है। अब तक 17 जिलों के रोगियों को कठिन समय में एयर एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। मुश्किल वक्त में यह सुविधा काफी महंगी होती है और गरीबों को संबल स्वरूप राज्य सरकार ने एयर एम्बुलेंस की सेवा शुरू की है, जिसके अंतर्गत हवाई पट्टी वाले क्षेत्रों में एयर एम्बुलेंस का उपयोग हो रहा है। मरीजों को हेलीकॉप्टर द्वारा एयर लिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगरौली जिले के मरीज संदीप सिंह की समय पर मदद करने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बधाई दी है। एयर एम्बुलेंस सेवा: पात्रता एवं स्वीकृति प्रक्रिया पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं, औद्योगिक हादसों एवं प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित मरीजों को त्वरित एवं सुरक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। यह सेवा राज्य के नागरिकों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और जीवन रक्षक सुविधा बन चुकी है। सेवा के अंतर्गत आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए राज्य के भीतर एवं बाहर के सरकारी व आयुष्मान सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज के लिए निःशुल्क वायु परिवहन की सुविधा दी जाती है और जिनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है उनको राज्य के भीतर सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए निशुल्क हवाई परिवहन सेवा, और राज्य के बाहर किसी भी अस्पताल में अनुमोदित दरों पर सशुल्क सेवा उपलब्ध कराई जा सकती है। यह सेवा राज्य के सभी जिलों से जिला अस्पतालों के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। नागरिकों को उनके जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी या मेडिकल कॉलेज अधिष्ठाता की अनुशंसा पर जिला कलेक्टर द्वारा राज्य के भीतर निःशुल्क परिवहन की अनुमति दी जाती है। राज्य के बाहर के लिए संचालक चिकित्सा शिक्षा भोपाल तथा सशुल्क मामलों में संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल स्वीकृति प्रदान करते हैं।  

लोकसभा-राज्यसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की गूंज, पीएम मोदी की भागीदारी संभव

नई दिल्ली संसद के दोनों सदनों में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा में होगी। जानकारी के मुताबिक, सोमवार यानी 28 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लोकसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा की शुरुआत करेंगे। चर्चा में भाग लेने वाले अन्य मंत्रियों में गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल हैं। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर और निशिकांत दुबे भी इसमें भाग लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं। ऐसे ही राज्यसभा में 29 जुलाई को 'ऑपरेशन सिंधु पर चर्चा  शुरू होगी। इसमें राजनाथ सिंह, जयशंकर और अन्य मंत्री भाग लेंगे। उच्च सदन में भी प्रधानमंत्री मोदी के चर्चा में हिस्सा लेने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों सदनों में इस विषय पर 16 घंटे की चर्चा होगी। विपक्षी दलों से संसद की कार्यवाही बाधित न करने का आग्रह केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'मानसून सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मांग की थी कि 'ऑपरेशन सिंदूर' और पहलगाम आतंकी हमले पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। सरकार ने कहा कि हम इस पर चर्चा के लिए तैयार हैं। विपक्ष पहले दिन से ही संसद में हंगामा कर रहा है। संसद के अंदर और बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। सदन को चलने नहीं दे रहा है। संसद के मानसून सत्र के पहले हफ्ते में हम केवल एक विधेयक पारित कर पाए हैं। मैं सभी विपक्षी दलों से संसद की कार्यवाही बाधित न करने का आग्रह करता हूं।' 'सभी मुद्दों पर एक साथ चर्चा नहीं हो सकती' रिजिजू ने कहा, 'आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक बुलाई और यह दोहराया गया कि हम ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए तैयार हैं। आज यह निर्णय लिया गया है कि सोमवार (28 जुलाई) को पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा होगी।' उन्होंने यह भी कहा कि सभी मुद्दों पर एक साथ चर्चा नहीं हो सकती। विपक्ष ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया समेत कई मुद्दे उठाए हैं। हमने उन्हें बताया है कि पहले ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा होगी। उसके बाद हम तय करेंगे कि किन मुद्दों पर चर्चा होगी। 'न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में लाया जाएगा' उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार के मामले में फंसे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में लाया जाएगा। हमें किसी भी संदेह में नहीं रहना चाहिए। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने की कार्यवाही लोकसभा में शुरू होगी। नोटिस को उच्च सदन में स्वीकार नहीं किया गया सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा में इसी तरह के प्रस्ताव के लिए विपक्ष की ओर से प्रायोजित नोटिस को उच्च सदन में स्वीकार नहीं किया गया है, जिससे निचले सदन में इस प्रक्रिया को शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति की घोषणा करने की उम्मीद है। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम क्या कहता है? न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के अनुसार, लोकसभा में कार्यवाही समाप्त होने के बाद कार्यवाही राज्यसभा में स्थानांतरित की जाएगी। सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के 150 से अधिक सांसदों ने लोकसभा में नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे।

एलन मस्क की Vine वापसी: अब वीडियो में दिखेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कमाल

वॉशिंगटन Elon Musk ने Vine को वापस लाने का ऐलान कर दिया है। अगर आप सोच रहे हैं कि Vine क्या है तो बता दें यह कुछ समय पहले लोगों के बीच लोकप्रिय रह चुका वीडियो शेयरिंग ऐप है। मस्क ने अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट से ट्वीट करके Vine को रीलॉन्च करने की घोषणा की है। हालांकि, अब इसे कुछ बदलाव के साथ लाया जाएगा। Vine ऐप,AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) फीचर के साथ फिर से लॉन्च होगा। एलन मस्क ने एक्स पर किए अपने ट्वीट में कहा है किया है कि वे Vine ऐप को वापस ला रहे हैं, लेकिन AI फॉर्म में। आइये, पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे पढ़ें। सालों बाद Vine की होगी वापसी आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Vine को जनवरी, 2013 में लॉन्च किया गया था। लॉन्च के कुछ समय बाद ही यह काफी लोकप्रिय हो गया था। लोगों के बीच इसे काफी पसंद किया जा रहा था। इसमें यूजर्स छोटे-छोटे वीडियो शेयर कर सकते थे। यह वीडियो ब्लॉगर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ। हालांकि, Twitter (जो अब एक्स के नाम से जाना जाता है।) ने इस ऐप को 2016 में बंद कर दिया। इस कारण इस तरह के दूसरे ऐप्स से इसे कड़ी टक्कर मिलना बताया जा रहा था। ऐप को पैसे कमाने में भी दिक्कत हो रही थी। इस बार होगा यह बड़ा बदलाव अब मस्क ने Vine को एआई के साथ फिर से लॉन्च करने की घोषणा कर दी है। सोशल मीडिया पर छोटे वीडियो का चलन बदल सकता है। आजकल कई AI टूल्स हैं, जिनसे छोटे वीडियो बनाए जा सकते हैं। इसमें समय और लागत दोनों ही कम लगती है। Vine के छह सेकंड के वीडियो AI से चलने वाली क्रिएटिविटी और एंगेजमेंट के लिए सही साबित हो सकते हैं। एलन मस्क का यह ऐलान X में नई टेक्नोलॉजी को शामिल करने और AI के दौर के लिए डिजिटल कंटेंट को फिर से बनाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा हो सकता है। मस्क ने पहले कहा था कि वे Vine को पसंद करते थे। यह बहुत अच्छा था। उन्होंने यह भी कहा कि वे इसे पहले से बेहतर बनाना चाहते हैं। Vine की वापसी से सोशल मीडिया की दुनिया में एक नया बदलाव आ सकता है। AI की मदद से छोटे और मजेदार वीडियो बनाना आसान हो जाएगा। खुल गया मस्क का Tesla Diner and Drive-In बता दें कि पिछले कई सालों से हो रहा इंतजार भी खत्म हो गया है। बीते सोमवार को एलन मस्क का Tesla Diner and Drive-In खुल गया। लोग इसके लिए सुबह से ही लाइन में लगने लगे थे। यह एक रेस्टोरेंट है, जो सांता मोनिका बुलेवार्ड पर एक पुरानी Shakey’s Pizza की जगह पर बना है। यह फ्यूचर जैसा दिखने वाला रेस्टोरेंट है। लॉस एंजिल्स के शेफ एरिक ग्रीनस्पैन ने इसका मेनू बनाया है। इसमें ग्रिल्ड चीज, फ्राइड चिकन और वफल के साथ-साथ टूना मेल्ट जैसी चीजें मिलती हैं। साथ ही, Tesla थीम वाले आइटम भी हैं, जिसमें 'Tesla Burger' जिसमें 'Electric Sauce' शामिल हैं। खाने की चीजों की कीमत 4 डॉलर से लेकर 15 डॉलर तक है।

बारिश से फिर बढ़ेगी मुश्किलें: राजस्थान के 11 जिलों में अलर्ट घोषित

जयपुर राजस्थान में एक बार फिर से मानसून की भारी बारिश का अलर्ट जारी हुआ है। मौसम विभाग ने आज प्रदेश के 11 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। पूर्वानुमान जताया गया है कि भारी बारिश का यह दौर 30 जुलाई तक जारी रहेगा। इसके बाद एक अगस्त से फिर से यह चक्र धीमा पड़ सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र ,जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में शुक्रवार को एक कम दबाव का क्षेत्र (लो-प्रेशर एरिया) बना है। इसके और ज्यादा स्ट्रॉन्ग होकर वेलमार्क लो-प्रेशर सिस्टम बनने की संभावना है। यह सिस्टम अब तेजी से पश्चिमी दिशा की तरफ आगे बढ़ेगा। इसके असर से पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में 26 जुलाई से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी। 26 से 30 जुलाई के दौरान भारी बारिश का दौर चलेगा। वहीं 27-28 जुलाई के दौरान दक्षिण-पूर्वी जिलों में कहीं-कहीं भारी से अतिभारी बारिश होने की संभावना है। प्रदेश में  27 और 28 जुलाई को अति भारी वर्षा की चेतावनी वाला ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि अगस्त के पहले सप्ताह मानसून सुस्त रह सकता है। बीते 24 घंटों में मौसम का हाल जोधपुर सहित 7 जिलों में 2 इंच तक बारिश हुई। बीसलपुर और नवनेरा डैम के गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। वहीं, बाढ़मेर के बालोतरा में श्मशान में पानी भरने से एक नाबालिग का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। स्थानीय लोगों ने शव को सड़क पर रख कर विरोध प्रदर्शन किया। बालोतरा के डोली गांव के श्मशान में पानी भरा होने पर अंतिम संस्कार के लिए भी जगह नहीं बची। करौली के हिंडौन में पिता-पुत्र बाइक सहित नदी में बह गए। इनमें बेटे की मौत हो गई। जुलाई में पहली बार खुले बीसलपुर के गेट बीसलपुर बांध का गुरुवार शाम 4:55 बजे गेट नंबर 10 खोला गया। बीसलपुर बांध का गुरुवार शाम 4:55 बजे गेट नंबर 10 खोला गया। यह पहली बार है कि जब बीसलपुर के गेट जुलाई में ही खोलने पड़ गए हैं। प्रदेश में मानसून के पहले पखवाड़े में औसत से करीब 100 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। बीसलपुर बांध का गेट 8वीं बार गुरुवार शाम को खोला गया। गेट खोलने से करीब एक घंटे पहले बांध के डाउनस्ट्रीम में युवक डूब गया। उधर, ERCP योजना में बने कोटा के नवनेरा बांध के भी शाम को तीन गेट खोले गए। 

सावन में रुद्राक्ष धारण: कब, कैसे और क्यों? जानें सभी जरूरी नियम

रुद्राक्ष को भगवान शिव का आर्शीवाद माना जाता है. रुद्राक्ष केवल एक आभूषण नहीं है, बल्कि इसे शिव कृपा और आध्यात्मिक यात्रा का पवित्र उपकरण कहा जाता है. इसे पहनने के लिए इन दिशानिर्देशों का पालन करके, आप रुद्राक्ष की आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ा सकते हैं, अपने जीवन में संतुलन, शांति और दिव्य ऊर्जा ला सकते हैं. रुद्राक्ष की प्रकृति को गर्म माना जाता है. यही कारण है कि कुछ लोग इसे धारण नहीं कर पाते. ऐसी स्तिथि में इसे आप अपने पूजा कक्ष में रख सकते हैं और इसकी माला से जाप भी कर सकते हैं. अगर आप इसे पहली बार धारण करने जा रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरुर रखिए. रुद्राक्ष पहनने से पहले की तैयारी रुद्राक्ष पहनने से पहले उसे 24 घंटे के लिए घी में भिगोकर रखें. घी के बाद रुद्राक्ष को गाय के दूध में भिगोकर रखें. रुद्राक्ष को गंगाजल से धोकर उन्हें बाद में एक साफ कपड़े से पोंछें. इसे पिरोने के लिए कपास या रेशम के धागे का उपयोग करें. आप सोने, चांदी के तारों का भी उपयोग कर सकते हैं. अब रुद्राक्ष को हाथ में लेकर शिव मंत्रों के 108 बार जाप से इसे चार्ज करें. रुद्राक्ष की संख्या आप रुद्राक्ष की 108 बीड्स और एक गुरु मनके की माला पहन सकते हैं. या आप इसे 27 या 54 की संख्या में पहन सकते हैं. रुद्राक्ष को पहनने का समय रुद्राक्ष पहनने का सबसे अच्छा समय सुबह ब्रह्म मुहूर्त में होता है. इसे किसी शुभ दिन, सोमवार या गुरुवार को पहनें. रुद्राक्ष पहनने के लिए नियम रुद्राक्ष का सम्मान करें. इसे टॉयलेट जाने से पहले उतारकर जाएं. इसे सोने से पहले निकालें सकते हैं. रुद्राक्ष मंत्र और रुद्राक्ष मूल मंत्र को हर सुबह नौ बार पहने हुए और रात में हटाने से पहले जप करें. इसे पहनने के बाद गैर-शाकाहारी भोजन खाने और शराब का सेवन करने से बचें. रुद्राक्ष को दाह अंतिम संस्कार, या सूतक-पातक में नहीं पहना जाता.

भोपाल की नई उड़ान: केबल ब्रिज को मिली मंजूरी, गडकरी ने दी हरी झंडी

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जल्द ही देश का दूसरा सबसे लंबा केबल ब्रिज बनने जा रहा है। यह 17 किलोमीटर लंबा ब्रिज रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से राजा भोज एयरपोर्ट तक बनाया जाएगा, जिससे शहरवासियों और यात्रियों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंजूरी दे दी है। 17 किलोमीटर लंबा ब्रिज, बिना जाम के सफर सांसद आलोक शर्मा ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर इस प्रोजेक्ट (Bhopal Cable Bridge) की जरूरत को रखा था। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट तक पहुंचने में ट्रैफिक के कारण काफी समय बर्बाद होता है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह ब्रिज शहर की एक बड़ी ज़रूरत बन चुका है। नितिन गडकरी ने इस 17 किमी लंबे केबल ब्रिज को ‘अत्यंत आवश्यक’ मानते हुए इस पर सहमति दे दी है। पहला प्रोजेक्ट: रानी कमलापति स्टेशन से एयरपोर्ट तक 17 किमी केबल ब्रिज: इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत राजधानी को एयरपोर्ट से जोडऩे के लिए 17 किलोमीटर लंबा केबल ब्रिज बनाया जाएगा, जिसमें 2 किलोमीटर का हिस्सा बड़े तालाब क्षेत्र से होकर एलीवेटेड ब्रिज के रूप में गुजरेगा। मौजूदा समय में एयरपोर्ट तक पहुंचने में लगने वाली देरी और ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए यह ब्रिज शहर की जरूरत बन गया है। नितिन गडकरी ने इस प्रस्ताव को ‘भोपाल के लिए व्यावहारिक और समय की मांग’ बताते हुए स्वीकृति दी। दूसरा प्रस्ताव करोंद से बैरसिया के बीच 35 किलोमीटर सड़क को फोरलेन में तब्दील करना: इस प्रस्ताव में पीएम गति शक्ति योजना के तहत स्वीकृति दी गई है। यह सड़क एनएच-146 को एनएच-346 से जोड़ेगी, जिससे राजधानी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच सुगम यातायात सुनिश्चित होगा। भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि ‘यह दोनों प्रोजेक्ट सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड नहीं हैं, बल्कि राजधानी की भावी संरचना का आधार तैयार करेंगे।’ अब निगाहें इन प्रस्तावों की डीपीआर और निर्माण प्रक्रिया की ओर हैं, जिनकी औपचारिक शुरुआत जल्द होने की संभावना है।  बड़ा तालाब पर भी बनेगा 2 किमी एलीवेटेड ब्रिज केबल ब्रिज (Bhopal Cable Bridge) के अलावा भोपाल के बड़ा तालाब क्षेत्र में 2 किलोमीटर लंबा एलीवेटेड ब्रिज बनाने का प्रस्ताव भी सांसद ने रखा, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए मंजूरी दे दी है। यह ब्रिज न केवल ट्रैफिक का दबाव कम करेगा, बल्कि पर्यटन और परिवहन को भी बढ़ावा देगा। फोरलेन रोड से राजधानी को नई रफ्तार सांसद आलोक शर्मा ने एक और बड़ी मांग के तहत भोपाल (Bhopal Cable Bridge) के करोंद से बैरसिया तक सड़क को फोरलेन करने का प्रस्ताव रखा। यह 35 किलोमीटर लंबी सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग 146 को NH-346 से जोड़ेगी और इसे प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत स्वीकृति मिल गई है। यातायात से राहत, सफर में सुविधा इन सभी परियोजनाओं (Bhopal Cable Bridge) के पूरा होने के बाद भोपालवासियों को ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही, रेलवे स्टेशन से एयरपोर्ट पहुंचने में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा। यह ब्रिज राजधानी के इन्फ्रास्ट्रक्चर को नया आयाम देगा और शहर की स्मार्ट सिटी योजनाओं में गति लाएगा।  

SC में केंद्र का हलफनामा: नाबालिग की सहमति भी अवैध यौन संबंध में शामिल

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि यौन संबंधों के लिए सहमति की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष से कम नहीं हो सकती। यह बयान एक याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें यौन सहमति की उम्र को कम करने की मांग की गई थी। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि मौजूदा कानून, विशेष रूप से यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) और भारतीय न्याय संहिता, नाबालिगों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं। सरकार का तर्क है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण और दुरुपयोग से बचाने के लिए यह उम्र सीमा आवश्यक है। सरकार ने कहा कि मौजूदा उम्र संबंधि प्रावधान नाबालिगों को यौन शोषण से विशेष रूप से उनके परिचितों द्वारा होने वाले अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। हालांकि, सरकार ने यह स्वीकार किया कि किशोरावस्था में प्रेम संबंधों और आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों के मामलों में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किया जा सकता है। 18 साल उम्र- एक सोच-समझकर लिया गया फैसला है अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी द्वारा प्रस्तुत विस्तृत लिखित जवाब में केंद्र ने कहा, "भारतीय कानून के तहत 18 वर्ष की सहमति की उम्र एक सोच-समझकर लिया गया विधायी निर्णय है, जो बच्चों के लिए एक गैर-परक्राम्य सुरक्षा ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से किया गया है।" सरकार ने कहा कि भारत के संविधान के तहत बच्चों को प्रदत्त संरक्षण के मद्देनजर यह आयु सीमा तय की गई है और इसे कमजोर करना दशकों से चली आ रही बाल सुरक्षा कानूनों की प्रगति को पीछे धकेलने जैसा होगा। केंद्र ने यह भी कहा कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 और हाल ही में लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) जैसे कानून इस सिद्धांत पर आधारित हैं कि 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति यौन गतिविधि के लिए वैध और सूचित सहमति देने में सक्षम नहीं होते। सरकार ने यह भी चेताया कि यदि इस आयु सीमा में कोई छूट दी जाती है, तो यह कानून का दुरुपयोग करने वालों को बचाव का रास्ता देगा, जो पीड़ित की भावनात्मक निर्भरता या चुप्पी का फायदा उठाते हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी बताई सरकार ने सहमति की उम्र में हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता, 1860 में यह उम्र 10 साल थी। इसके बाद 1891 के ऐज ऑफ कंसेंट एक्ट में इसे 12 साल किया गया। 1925 और 1929 में इसे बढ़ाकर 14 साल किया गया। 1940 में यह 16 वर्ष और अंततः 1978 में इसे 18 वर्ष किया गया, जो अब तक लागू है। कोर्ट में न्यायिक विवेक की गुंजाइश हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि न्यायपालिका विशिष्ट मामलों में विवेक का प्रयोग कर सकती है, खासकर तब जब मामला दो किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने प्रेम संबंध का हो और दोनों की उम्र 18 वर्ष के आसपास हो। ऐसे मामलों में "close-in-age" छूट पर विचार किया जा सकता है। अपराधियों को संरक्षण न मिले केंद्र ने कहा कि NCRB और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों जैसे सेव द चिल्ड्रन और हक सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि 50% से अधिक बाल यौन अपराध ऐसे लोगों द्वारा किए जाते हैं जो पीड़ित को जानते हैं या जिन पर बच्चे भरोसा करते हैं, जैसे परिजन, शिक्षक, पड़ोसी आदि। सरकार ने चेताया कि यदि सहमति की उम्र घटाई गई, तो ऐसे ही अपराधियों को यह कहकर राहत मिल सकती है कि यौन संबंध सहमति से हुए थे, जिससे POCSO कानून की मंशा पर कुठाराघात होगा। बच्चों को दोषी ठहराने का खतरा सरकार ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि यौन शोषण करने वाला व्यक्ति माता-पिता या कोई नजदीकी रिश्तेदार हो, तो बच्चा विरोध करने या शिकायत करने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे मामलों में 'सहमति' की दलील देना बच्चे को ही दोषी ठहराने जैसा है, और इससे बच्चे के शरीर और गरिमा की सुरक्षा कमजोर होती है।

खेल प्रतिभाओं की पहचान अब आसान:खेलों को बढ़ावा देने के लिये 180 नोडल खेल केन्द्र

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग ने एजुकेशन पोर्टल की तर्ज पर स्पोर्टस् मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया है। डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से विभाग की खेलकूद शाखा की गतिविधियों, प्रतियोगिता के आयोजन और उससे संबंधित पत्राचार को पेपरलेस कर दिया गया है। इस प्रकिया के चलते खेलों से जुड़ी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। शिक्षा विभाग के अंतर्गत मान्यता प्राप्त एमपी बोर्ड के विद्यालय, सीबीएसई के ऐसे स्कूल जो स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के और स्कूल शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित विभिन्न खेलों की प्रतियोगिता में शामिल होना चाहते हैं वे इस पोर्टल पर निश्चित पंजीयन शुल्क के साथ आवश्यक अभिलेख अपलोड करते हुए पंजीयन करा सकते हैं। पंजीयन 14 से 19 वर्ष से कम आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं के लिये एक ही बार कराना होगा। स्पोर्टस् मैनेजमेंट सिस्टम में प्रति वर्ष आवश्यकतानुसार अपग्रेड किये जाने की सुविधा प्रदाय की गई है। विद्यालय में अध्ययनरत नियमित खिलाड़ियों की दर्ज संख्या के मान से क्रीड़ा शुल्क का संकलन इसी पोर्टल के माध्यम से किये जाने की सुविधा दी गई है जो स्वत: ही संचालनालय, संयुक्त संचालक, संभाग एवं जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में शासन द्वारा निर्धारित प्रतिशत के अनुसार अंतरित हो जाता है। यह व्यवस्था खेलों में निष्पक्षता, पारदर्शिता और खिलाड़ियों की आयु के बारे में प्रमाणीकरण के साथ अपात्र खिलाड़ी को किसी भी स्तर पर प्रतियोगिता में शामिल होने से रोकता है। 180 नोडल खेल विद्यालय प्रशिक्षण केन्द्र सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को उच्च स्तर की खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये प्रदेश में स्थित शासकीय विद्यालयों में 180 नोडल खेल केन्द्रों की स्थापना की गई है। इन केन्द्रों के माध्यम से खेल अधोसंरचना के साथ उत्कृष्ट स्तर की खेल सामग्री खेल प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। पिछले वर्ष 500 खिलाड़ियों ने राज्य और संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में सहभगिता की और इसमें 600 पदक प्राप्त किये। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी प्रदेश के खिलाड़ियों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है।