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भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी से बचें: आरएसएसबी ने दिए अहम दिशा-निर्देश

जयपुर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर की ओर से पटवारी भर्ती परीक्षा 17 अगस्त, 2025 को दो पालियों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा से पहले भर्ती बोर्ड ने विज्ञापन संख्या 02/2025 के तहत अधिसूचित पटवारी भर्ती के संबंध में बेहद महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। नोटिस आधिकारिक वेबसाइट rssb.rajasthan.gov.in. पर उपलब्ध है। इस नोटिस में उम्मीदवारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनका उन्हें पालन करना होगा। हालांकि, बोर्ड ने दिशानिर्देशों के साथ-साथ एक चेतावनी भी जारी की है। पंजीकृत अभ्यर्थी आरएसएसबी द्वारा जारी दिशानिर्देश और चेतावनी के बारे में नीचे जान सकते हैं। आधिकारिक नोटिस नीचे उपलब्ध है। आरएसएसबी के दिशा-निर्देश भर्ती बोर्ड के नोटिस में लिखा है कि पटवारी भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों को निम्नानुसार सूचित किया जाता है किः-     आवेदक यह सुनिश्चित कर लें कि वे बोर्ड कार्यालय की उक्त विज्ञप्ति के अनुसार निर्धारित पात्रता एवं शैक्षणिक योग्यता रखते हैं।     अभ्यर्थी अपने पहचान पत्र में फोटो, यदि 03 वर्ष या उससे अधिक पुरानी है तो उसे अपडेट करा लिया जाना सुनिश्चित करें ताकि परीक्षा आयोजन के समय परीक्षा प्रवेश पत्र में प्रिंट फोटो का मिलान आपके मूल पहचान पत्र में फोटो से हो सके तथा आपको प्रवेश के समय कोई कठिनाई न हो। आपके मूल पहचान पत्र की फोटो का आपके चेहरे, प्रवेश पत्र की फोटो से मिलान होना आवश्यक है अन्यथा आपको परीक्षा केन्द्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जावेगी।     परीक्षा के अन्तर्गत प्रत्येक प्रश्न के आगे पांच विकल्प/गोले दिए जायेंगे। पहले चार विकल्प/गोला A,B,C और D उपयुक्त उत्तर से संबंधित तथा पांचवा विकल्प/गोला 'E' 'अनुत्तरित प्रश्न' से संबंधित होगा।     अभ्यर्थी को ओ.एम.आर. उत्तर-पत्रक पर, संबंधित प्रश्न क्रमांक के लिए सही उत्तर निर्दिष्ट करने हेतु A,B,C या D अर्थात पहले चार में से केवल एक विकल्प/गोला नीले बॉल पॉइन्ट पेन से गहरा कर भरना होगा। यदि अभ्यर्थी कोई प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहता है तो पांचवा विकल्प/गोला 'E' को गहरा करना होगा।     यदि पांचों विकल्पों में से कोई भी विकल्प/गोला गहरा नहीं किया गया तो उस प्रश्न के अंक का 1/3 भाग काट लिया जाएगा।     10 प्रतिशत से अधिक प्रश्नों में किसी भी विकल्प/गोले को अभ्यर्थी द्वारा गहरा नहीं किया गया तो उसे परीक्षा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।     प्रत्येक प्रश्न के लिए कोई एक विकल्प/गोला भरा है या नहीं, यह सुनिश्चित करने के लिए उम्मीदवार को 10 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जायेगा।     उक्त परीक्षाओं के लिए "प्रोविजनल ई- प्रवेश पत्र" बोर्ड की वेबसाइट से डाउनलोड करने की दिनांक यथासमय सूचित कर दी जाएगी। बोर्ड द्वारा परीक्षार्थियों को अलग से प्रवेश पत्र प्रेषित नहीं किये जायेंगे।     परीक्षाओं के सम्बन्ध में विभिन्न सोशल मीडिया पर किये जा रहे भ्रामक प्रचार पर विश्वास न करें। बोर्ड द्वारा राज्य स्तरीय प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में एवं बोर्ड की वेबसाइट rssb.rajasthan.gov.in पर प्रकाशित विज्ञप्ति द्वारा दी गई जानकारी को ही अधिकृत माना जाए।     ड्रेस कोड के बारे में समय-समय पर निर्देश अपडेट किए जाते हैं जो बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड़ किए जाते है। प्रवेश पत्र में भी इस विषय में उल्लेख किया जाता है। ड्रेस कोड की पालना आवश्यक रूप से की जाए ताकि परीक्षा केन्द्र पर प्रवेश हेतु कोई समस्या या कोई परेशानी ना हो। दिशानिर्देशों के साथ-साथ यह चेतावनी भी दी परीक्षा केन्द्रों पर नकल की रोकथाम के लिए बहुत ही प्रभावी उपाय किये गये हैं। भर्ती बोर्ड ने अभ्यर्थियों को परीक्षा में नकल कराने के नाम पर ठगी कराने वाले गिरोह के किसी झांसे/बहकावे में नहीं आने की सलाह दी है। बोर्ड ने कहा है कि परीक्षा के संबंध में विभिन्न Social Media पर किये जा रहे भ्रामक प्रचार पर विचार न करें। नकल करने वालों पर भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान परीक्षा संचालन में किसी प्रकार से अनुचित साधनों का उपयोग एवं अनियमित गतिविधियों में संलिप्तता पाए जाने पर 10 लाख से लेकर अधिकतम 10 करोड रूपये तक दंड तथा 10 वर्ष से लेकर अधिकतम आजीवन करावास तक की सजा के प्रावधान है। इसके साथ ही कठोर दंडात्मक कानूनी कार्यवाही की जा सकती है साथ ही ऐसे अभ्यर्थी को आगे परीक्षा देने से विवर्जित (Debar) भी किया जाएगा।

गणेश चतुर्थी 2025: जानें किस दिन विराजेंगे विघ्नहर्ता गणपति

ज्ञान, बुद्धि के देवता विघ्ननहर्ता भगवान श्री गणेश का जन्मोत्सव 10 दिनों तक चलता है जिसे गणेश उत्सव के नाम से जाना जाता है. भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला पर्व गणेश चतुर्थी हर साल मनाया जाता है. हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेश उत्सव शुरू होता है. गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है. भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिये ज्यादा उपयुक्त माना जाता है. इस दौरान भक्त-लोग पूरे विधि-विधान से गणेश पूजा करते हैं. कब हुआ था भगवान गणेश का जन्म? भगवान गणेश जी का जन्म भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान हुआ था.हर साल यह पर्व अगस्त या सितंबर के महीने में मनाया जाता है. गणेशोत्सव अनन्त चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है और इस दिन विर्सजन किया जाता है. अनन्त चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु बड़े ही धूम-धाम के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा का सरोवर, झील, नदी में विसर्जन करते हैं. गणेश चतुर्थी 2025 कब?     चतुर्थी तिथि की शुरूआत 26 अगस्त, 2025 को दोपहर 01:54 बजे होगी.     चतुर्थी तिथि समाप्त 27 अगस्त, 2025 को दोपहर 03:44 पर होगी.     गणेश विसर्जन 6 सितंबर, 2025 शनिवार के दिन किया जाएगा.     गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न पूजा मुहूर्त सुबह 11:05 से दोपहर 01:40 तक रहेगा. जिसकी कुल अवधि – 02.34 मिनट्स रहेगी. भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न के सम हुआ था.इस दिन को पांच हिस्सों में बांटा जाता है. इसमें मध्याह्न काल को गणेश पूजा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इसीलिए इस दिन मध्याह्न काल में पूजा जरूर करें. इस दौरान आप मूर्ति स्थापना कर सकते हैं.

सिर्फ जिंदा रहना ही चुनौती बन गया है: सूडान में इंसानों का दर्दनाक संघर्ष, यहां जिंदा रहना भर ही काफी

खारर्तूम  सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच लोग जिंदा रहने के लिए काफी जद्दोजहद कर रहे हैं. यहां सिर्फ सेना और विद्रोही अर्धसैनिक बलों की गोलियों से बचना भर ही जीवित रहने की शर्त नहीं है. भुखमरी और अकाल भी लोगों को धीरे-धीरे मार रही है. हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग अपनी भूख मिटाने के लिए घास और खरपतवार खाने को मजबूर हो रहे हैं.   एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूडान के कई इलाकों में भूखमरी का आलम ऐसा है कि लोग जंगली पौधों और खरपतवारों को नमक के साथ उबाल कर अपने बच्चों को पिला रहे हैं, ताकि उनकी भूख शांत हो सके. पूरा देश विनाशकारी युद्ध और व्यापक भूख से जूझ रहा है. जंगली घास बन रहा लोगों का सहारा भोजन के लिए संघर्ष कर रहे लोगों में 60 वर्षीय सेवानिवृत्त एक स्कूल शिक्षक ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर यहां के हालात की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सूडान में लोगों को खाना नहीं मिल रहा है. लोग अपनी भूख मिटाने के लिए अब घास और जंगली पौधों पर निर्भर हो गए हैं. खदीजा कोरो नामक एक पौधा इन दिनों भूखे लोगों के लिए बड़ा सहारा बन गया है.  इस शिक्षक ने इस पौधे के लिए एक  कविता भी लिखी है. अपनी कविता के जरिए इस जंगली घास के प्रति आभार व्यक्त किया है, जो यहां लोगों की लाइफलाइन बन चुकी है. उन्होंने कहा कि ये हमारे लिए एक मरहम है जो भय के बीच कई लोगों को भूख से मरने से बचाता है. दो करोड़ से ज्यादा लोग भुखमरी की चपेट में  ये रिटायर्ड शिक्षक सूडान में 24.6 मिलियन लोगों में से एक हैं, जो गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं. इतने सारे लोग इस देश की आबादी का आधा हिस्सा हैं. सूडान अप्रैल 2023 से संघर्ष में उलझा है. जब सूडानी सेना और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच तनाव पूर्ण पैमाने पर लड़ाई में बदल गया. एक करोड़ से ज्यादा लोग हुए हैं विस्थापित शुरुआत में ये संघर्ष राजधानी खार्तूम में शुरू हुआ और फिर पूरे देश में फैल गया. युद्ध में 20,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. युद्ध की वजह से लगभग 1 करोड़ 30 लाख  लोग विस्थापित हुए हैं. इसके साथ ही जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अकाल की चपेट में है. इन दिनों सूडान पर विश्व का सबसे बड़ा हंगर क्राइसिस मंडरा रहा है.  सहायता संगठनों की रिपोर्ट है कि संघर्ष के कारण बाजार में खाद्य सामग्री की कीमतें आसमान छू रही हैं. सहायता वितरण में भारी बाधा आ रही है तथा एक ऐसे देश में कृषि भूमि में भारी कमी आई है, जिसे कभी वैश्विक अन्न भंडार माना जाता था. कोर्डोफन, नुबा पर्वत और दारफुर जैसे क्षेत्रों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है. जहां एल फशेर और जमजम शिविर जैसे क्षेत्र नॉर्वेजियन शरणार्थी परिषद जैसे समूहों के लिए दुर्गम बने हुए हैं, जैसा कि पोर्ट सूडान में स्थित सहायता कार्यकर्ता मैथिल्डे वु ने पुष्टि की है. कोयला चूसकर भूख मिटा रहे लोग कुछ लोग दिन में केवल एक बार भोजन करके जीवित रह रहे हैं, जो प्रायः साधारण बाजरे का दलिया होता है. वहीं उत्तरी दारफुर में कुछ लोग अपनी भूख मिटाने के लिए कोयला चूसने पर भी निर्भर हैं.  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सूडानी सैन्य नेता जनरल अब्देल-फतह बुरहान को फ़ोन किया और उनसे एल फशर में एक हफ़्ते के लिए युद्धविराम की मांग की ताकि सहायता पहुंचाई जा सके. सेना के एक बयान के अनुसार, बुरहान इस अनुरोध पर सहमत हो गए, लेकिन यह अभी तय नहीं है कि आरएसएफ इस युद्धविराम पर सहमत होगा या नहीं. विद्रोही सेना के कब्जे वाले इलाके अकालग्रस्त सूडान के कृषि मंत्री अबू बक्र अल-बशारी ने अप्रैल में अल-हदाथ समाचार चैनल को बताया कि देश में अकाल के कोई संकेत नहीं हैं, लेकिन आरएसएफ के नाम से जाने जाने वाले अर्धसैनिक बलों द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों में खाद्य आपूर्ति की कमी है. विश्व खाद्य कार्यक्रम, सूडान की प्रवक्ता लेनी किन्जली ने बताया कि गेजेरा के 17 इलाके, दारफ़ूर क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा और खार्तूम, जिसमें जेबेल औलिया भी शामिल है, अकाल की चपेट में है. किन्जली ने बताया कि हर महीने 40 लाख से ज़्यादा लोग समूह से सहायता प्राप्त करते हैं, जिनमें से 17 लाख लोग अकालग्रस्त या जोखिम वाले इलाकों में रहते हैं. सूडान में दो मोर्चों पर हो रहा संघर्ष सूडान में दो-दो संगठनों से सेना का संघर्ष चल रहा है. एक रैपिड सपोर्ट फोर्सेस और सेना के बीच और दूसरा पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट-नॉर्थ के साथ, जो सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं. साथ ही इनका आरएसएफ के साथ संबंध है, जिसके कारण भोजन, स्वच्छ पानी या दवा तक पहुंच लगभग असंभव हो गई है. रैपिड सपोर्ट फोर्सेस द्वारा सड़कें अवरुद्ध किए जाने के कारण लोग अपने परिवार से मिलने के लिए उत्तरी कोर्डोफ़ान के ओबैद नहीं जा सकते. सहायताकर्मियों के अनुसार, हिंसा और लूटपाट ने यात्रा को असुरक्षित बना दिया है. जिससे निवासियों को अपने आस-पड़ोस में ही रहना पड़ रहा है और उनके लिए भोजन तक पहुंच सीमित हो गई है.

बिल बकाया तो कनेक्शन बंद! बिजली विभाग की सख्ती, तीन दिन में 8 हजार उपभोक्ताओं की बिजली गुल

जबलपुर जबलपुर में कोरोना काल के दौरान बिजली बिलों की वसूली पर मिली राहत का कई उपभोक्ताओं ने गलत फायदा उठाया और महामारी समाप्त होने के बाद भी बिलों का भुगतान नहीं किया। अब मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने ऐसे उपभोक्ताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए जबलपुर शहर में तीन दिनों के भीतर करीब आठ हजार विद्युत कनेक्शन काट दिए हैं। इनमें करीब 4,700 उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्होंने कोरोना काल समाप्त होने के बाद भी सितंबर 2023 से बिलों का भुगतान नहीं किया था।   कोरोना काल में मिली थी अस्थायी राहत मई 2020 से अगस्त 2023 तक राज्य सरकार ने बिजली बिलों को अस्थायी रूप से निलंबित कर रखा था। इस अवधि में जबलपुर शहर के 81,201 घरेलू उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया। उस समय की बकाया राशि करीब 24.94 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। लेकिन कोरोना काल समाप्त होने के बाद भी 7,151 उपभोक्ताओं ने अपने बिलों का भुगतान नहीं किया, जिससे बिजली कंपनी को सख्ती बरतनी पड़ी। 23 जुलाई से शुरू हुई थी विशेष मुहिम बिजली कंपनी ने 23 जुलाई से बिल वसूली के लिए विशेष अभियान शुरू किया। पहले दिन 474 कनेक्शन फिजिकल तौर पर काटे गए। दूसरे दिन 3,629 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के कनेक्शन रिमोट से काटे गए। तीसरे दिन कंपनी ने 3,800 से अधिक कनेक्शन काटे, जिनमें फिजिकल और रिमोट दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया गया। सैकड़ों उपभोक्ता अब भी लापरवाह बिजली कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, तीसरे दिन जिन उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे गए, उनमें से करीब 500 उपभोक्ता कोरोना काल के बाद भी लगातार लापरवाही बरतते रहे, जबकि शेष 3,300 से अधिक उपभोक्ता सामान्य घरेलू श्रेणी के थे, जिन्होंने बिजली बिल नहीं चुकाया।   कनेक्शन काटने के बाद उपभोक्ताओं में मचा हड़कंप तीन दिनों में की गई इस कार्रवाई से उपभोक्ताओं में हड़कंप मच गया है। जिन उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे गए हैं, अब वे जल्द से जल्द भुगतान कर कनेक्शन पुनः चालू कराने की कोशिश में जुटे हैं। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि भुगतान करने पर कनेक्शन बहाल कर दिए जाएंगे, लेकिन आगे से लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।   बकायेदारों के खिलाफ अभियान रहेगा जारी मध्य प्रदेश पूर्व विद्युत वितरण कंपनी के सिटी एसई संजय अरोरा ने बताया कि यह अभियान सिर्फ जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी क्षेत्रों में बड़े बकायादारों के खिलाफ इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जो उपभोक्ता बकाया बिल का भुगतान करने के लिए आगे आएंगे, उन्हें उचित प्रक्रिया के तहत राहत दी जा सकती है, लेकिन जानबूझकर बिल न चुकाने वालों को किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।   उपभोक्ताओं को चेतावनी बिजली कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अगर उपभोक्ता समय पर बिलों का भुगतान नहीं करते हैं, तो उनके कनेक्शन काटे जाएंगे और बाद में पुनः जोड़ने पर अतिरिक्त शुल्क भी वसूला जाएगा। कंपनी का लक्ष्य है कि इस अभियान से राजस्व की वसूली हो और भविष्य में उपभोक्ता समय पर भुगतान के लिए प्रेरित हों।  

रेलवे की विरासत: रानी कमलापति स्टेशन पर रखा गया 30 साल पुराना NG इंजन

भोपाल  1991 में चलने वाली ट्रेन का इंजन रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर विरासत के रूप में रखा जाएगा। रानी कमलापति स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक पुरानी NG LOCO No 514 (ZDM5) को रेलवे की धरोहर के रूप में सहेजा गया है। यह 22 टन का इंजन, जो कभी धौलपुर में चलता था, 3 जून 1991 को शुरू हुआ और 1 अप्रैल 2019 को बंद हो गया। लगभग 30 साल बाद ये इंजन रिटायर हुआ है। इसे 3 नवंबर 2023 को विरासत का दर्जा मिला। रेलवे का कहना है कि यह इंजन रेलवे के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2025 को धौलपुर से लाया गया था रेलवे अधिकारियों के अनुसार, NG LOCO No 514 को 23 जुलाई 2025 को धौलपुर से लाया गया था। यह इंजन छोटी लाइन (नैरो गेज) पर चलता था। छोटी लाइन में रेल की पटरियां सामान्य रेल की तुलना में कम दूरी पर होती हैं। इनकी दूरी 762MM होती है। 30 मार्च 2023 को की थी आखिरी यात्रा इस इंजन ने अपनी आखिरी यात्रा 1 अप्रैल 2019 को धौलपुर से तांतपुर-मथुरा के बीच की थी। हालांकि, यह कुछ समय बाद तक चालू रहा। इसने आखिरी बार 30 मार्च 2023 को काम किया और 1 अप्रैल 2023 को इसे आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया। वैक्यूम डीजल NCR LOCO शेड इस इंजन की देखभाल करता था। 3 नवंबर 2023 को इसे विरासत का दर्जा मिला। रेलवे अधिकारियों ने कहा, 'इसकी सुरक्षा से रेलवे के इतिहास को बचाए रखा जा सकेगा।' PRO नवल अग्रवाल ने कहा, 'यह रेलवे के तकनीकी इतिहास को दर्शाता है।'  

बेंगलुरु का चिन्नास्वामी स्टेडियम सेफ नहीं! क्या रद्द होंगे बड़े क्रिकेट मुकाबले?

बेंगलुरु इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की खिताबी जीत के बाद बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में विक्ट्री परेड हुई थी. विक्ट्री परेड के दौरान ही चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भगदड़ मच गई थी, जिसमें 11 लोग मारे गए थे. जबिक 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे. चिन्नास्वामी भगदड़ की जांच के लिए जस्टिस जॉन माइकल डी'कुन्हा की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया गया था. इस न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को कर्नाटक कैबिनेट ने हाल ही में मंजूरी दी थी. ईएसपीएन क्रिकइंफो के मुताबिक न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. रिपोर्ट में बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम को बुनियादी रूप से असुरक्षित करार दिया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चिन्नास्वामी स्टेडियम की मौजूदा संरचना बड़े आयोजनों के लिए अनुपयुक्त और खतरनाक है. स्टेडियम में ना तो पर्याप्त एंट्री/एग्जिट गेट्स हैं, ना ही इस स्टेडियम के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर का आपातकालीन निकासी प्लान है. स्टेडियम के आसपास की सड़कें काफी व्यस्त हैं. साथ ही पार्किंग के लिए भी सीमित जगह है. वर्ल्ड कप और IPL मैचों पर संशय! चिन्नास्वामी स्टेडियम में महिला वर्ल्ड कप 2025 के कम से कम 4 मुकाबले होने हैं. अगर पाकिस्तानी टीम इस टूर्नामेंट के फाइनल में नहीं पहुंचती है तो खिताबी मुकाबला भी यहीं खेला जाएगा. साथ ही चिन्नास्वामी स्टेडियम अगले साल IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) और WPL (वूमेन्स प्रीमियर लीग) मैचों की मेजबानी करने वाला है. हालांकि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब इस वेन्य पर इंटरनेशनल और अन्य मुकाबलों के आयोजन पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. कर्नाटक सरकार ने चूंकि न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है, जिसके चलते RCB, KSCA (कर्नाटक क्रिकेट संघ), DNA एंटरटेनमेंट और बेंगलुरु पुलिस के अधिकारियों पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक विक्ट्री परेड के दौरान सिर्फ 79 पुलिसकर्मी मैदान में तैनात थे, बाहरी हिस्से में कोई भी नहीं था. कोई एम्बुलेंस भी नहीं था और संयुक्त पुलिस आयुक्त घटना के 30 मिनट बाद पहुंचे. न्यायिक आयोग ने सिफारिश की है कि बड़े आयोजनों को सिर्फ उन्हीं स्टेडियमों में कराया जाए जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हों.

निगम-मंडलों में नियुक्तियों की तैयारी तेज, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण होंगे अहम

भोपाल   मध्यप्रदेश में ओबीसी आयोग के अध्यक्ष पद पर रामकृष्ण कुसमारिया की नियुक्ति के बाद अब निगम-मंडल, बोर्ड, आयोग और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच संभावित नामों को लेकर विस्तृत चर्चा हो चुकी है। इन नामों की सूची तैयार कर अनुमोदन के लिए केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी गई है। अनुमति मिलते ही नियुक्तियों के आदेश जारी किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नामों को अंतिम रूप दिया है। इसमें पूर्व मंत्री, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद तथा विभिन्न जातीय समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रभावशाली चेहरों को शामिल किया गया है। फिलहाल राज्य में निगम-मंडल, बोर्ड और आयोगों के लगभग तीन दर्जन से अधिक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने के लिए यह कवायद की जा रही है। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर फोकस  सरकार की मंशा है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से सभी वर्गों और क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिले, जिससे आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में पार्टी को राजनीतिक लाभ मिल सके। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकसभा चुनाव से पहले 45 निगम-मंडलों और बोर्डों में की गई पूर्ववर्ती नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। तब से अब तक इन संस्थाओं में कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है। 

इलाज और रिसर्च को मिलेगा नया आयाम: AIIMS भोपाल में शुरू हुई 3D गैलरी की तैयारी

 भोपाल  भारत के मेडिकल इनोवेशन में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए एम्स भोपाल देश की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बनाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम न केवल मरीजों के इलाज को बेहतर बनाएगा, बल्कि मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के लिए पढ़ाई और सर्जरी प्लानिंग को भी अत्याधुनिक बना देगा। एम्स भोपाल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। संस्थान ने साल 2024 में एक हाईटेक 'कम्प्यूटेशनल थ्रीडी मॉडलिंग एंड प्रिंटिंग लैब' की स्थापना की थी, जो अब देशभर में चर्चित हो चुकी है। इस लैब की सबसे बड़ी खासियत है – पालीजेट डिजिटल एनाटॉमी प्रिंटर, हाई-पावर कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेयर, जिनकी मदद से डॉक्टर मरीज के शरीर का हूबहू थ्रीडी मॉडल तैयार कर सकते हैं। इस थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल सर्जरी से पहले केस की गहराई से समझ, ऑपरेशन की प्लानिंग, मेडिकल स्टूडेंट्स को रियल-लाइफ प्रैक्टिस और मरीजों को उनकी बीमारी को विजुअली समझाने के लिए किया जा रहा है। अब एम्स भोपाल भारत की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बना रहा है, जिसमें विभिन्न जटिल बीमारियों के मॉडल रखे जाएंगे। यह गैलरी डॉक्टरों, छात्रों और आम नागरिकों को शरीर की संरचना और बीमारियों की समझ विकसित करने में मदद करेगी। लैब से अब तक देश-विदेश के विशेषज्ञों का एक अंतरराष्ट्रीय सिम्पोजियम भी हो चुका है, जिसमें मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझा काम करने पर सहमति बनी थी। अब एम्स इस लैब के जरिए दो नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कर रहा है, जिनमें से एक मैनिट भोपाल के साथ संयुक्त रूप से डिजाइन और मेडिकल मॉडलिंग पर आधारित होगा। भविष्य में पीएचडी की सुविधा भी मेडिकल और इंजीनियरिंग छात्रों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। लैब की प्रमुख खूबियां     डॉक्टर ऑपरेशन से पहले मरीज के अंगों का थ्रीडी मॉडल देखकर सर्जरी की योजना बना सकते हैं।     मेडिकल स्टूडेंट्स को रियलिस्टिक अनुभव के साथ पढ़ाई करने का मौका।     मरीजों को अपनी बीमारी विजुअल मॉडल की मदद से आसानी से समझाई जा सकती है।     डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच इंटरेक्टिव सहयोग की शुरुआत। भविष्य की योजनाएं     बायोमैकेनिक्स: शरीर की हलचलों का डिजिटल विश्लेषण।     वर्चुअल एनाटॉमी और सर्जरी सिमुलेशन को आसान बनाना।     फिनाइट एलिमेंट एनालिसिस जैसे रिसर्च टूल्स पर गहराई से काम। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. डॉ. अजय सिंह का कहना है कि यह लैब इलाज, शिक्षा और शोध तीनों में नई दिशा दे रही है। भारत की पहली थ्रीडी मॉडल गैलरी बनना एक ऐतिहासिक कदम है जो भविष्य की मेडिकल ट्रेनिंग को पूरी तरह बदल देगा।  

इलाज और रिसर्च को मिलेगा नया आयाम: AIIMS भोपाल में शुरू हुई 3D गैलरी की तैयारी

 भोपाल  भारत के मेडिकल इनोवेशन में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए एम्स भोपाल देश की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बनाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम न केवल मरीजों के इलाज को बेहतर बनाएगा, बल्कि मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के लिए पढ़ाई और सर्जरी प्लानिंग को भी अत्याधुनिक बना देगा। एम्स भोपाल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। संस्थान ने साल 2024 में एक हाईटेक 'कम्प्यूटेशनल थ्रीडी मॉडलिंग एंड प्रिंटिंग लैब' की स्थापना की थी, जो अब देशभर में चर्चित हो चुकी है। इस लैब की सबसे बड़ी खासियत है – पालीजेट डिजिटल एनाटॉमी प्रिंटर, हाई-पावर कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेयर, जिनकी मदद से डॉक्टर मरीज के शरीर का हूबहू थ्रीडी मॉडल तैयार कर सकते हैं। इस थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल सर्जरी से पहले केस की गहराई से समझ, ऑपरेशन की प्लानिंग, मेडिकल स्टूडेंट्स को रियल-लाइफ प्रैक्टिस और मरीजों को उनकी बीमारी को विजुअली समझाने के लिए किया जा रहा है। अब एम्स भोपाल भारत की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बना रहा है, जिसमें विभिन्न जटिल बीमारियों के मॉडल रखे जाएंगे। यह गैलरी डॉक्टरों, छात्रों और आम नागरिकों को शरीर की संरचना और बीमारियों की समझ विकसित करने में मदद करेगी। लैब से अब तक देश-विदेश के विशेषज्ञों का एक अंतरराष्ट्रीय सिम्पोजियम भी हो चुका है, जिसमें मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझा काम करने पर सहमति बनी थी। अब एम्स इस लैब के जरिए दो नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कर रहा है, जिनमें से एक मैनिट भोपाल के साथ संयुक्त रूप से डिजाइन और मेडिकल मॉडलिंग पर आधारित होगा। भविष्य में पीएचडी की सुविधा भी मेडिकल और इंजीनियरिंग छात्रों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। लैब की प्रमुख खूबियां     डॉक्टर ऑपरेशन से पहले मरीज के अंगों का थ्रीडी मॉडल देखकर सर्जरी की योजना बना सकते हैं।     मेडिकल स्टूडेंट्स को रियलिस्टिक अनुभव के साथ पढ़ाई करने का मौका।     मरीजों को अपनी बीमारी विजुअल मॉडल की मदद से आसानी से समझाई जा सकती है।     डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच इंटरेक्टिव सहयोग की शुरुआत। भविष्य की योजनाएं     बायोमैकेनिक्स: शरीर की हलचलों का डिजिटल विश्लेषण।     वर्चुअल एनाटॉमी और सर्जरी सिमुलेशन को आसान बनाना।     फिनाइट एलिमेंट एनालिसिस जैसे रिसर्च टूल्स पर गहराई से काम। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. डॉ. अजय सिंह का कहना है कि यह लैब इलाज, शिक्षा और शोध तीनों में नई दिशा दे रही है। भारत की पहली थ्रीडी मॉडल गैलरी बनना एक ऐतिहासिक कदम है जो भविष्य की मेडिकल ट्रेनिंग को पूरी तरह बदल देगा।  

इंदिरा सागर-ओंकारेश्वर डैम के गेट खुलने की तैयारी, निचले इलाकों के लोग रहें सतर्क

 खंडवा  नर्मदा घाटी के उपरी क्षेत्रों में हो रही वर्षा और बरगी तथा तवा बांध के गेट खुलने से जिले के इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के गेट रविवार सुबह खोले जाएगें। इस मानसून सीजन में बांधों के गेट पहली बार खुलेंगे। शनिवार को बांध के जलाशय का जलस्तर 258.41 मीटर और ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर 194.72 मीटर है। आगामी 12 से 24 घंटे में जलस्तर की स्थिति को देखते हुए बांधों के गेट खोले जाने की संभावना को देखते हुए एनएचडीसी बांध प्रबंधन के नर्मदा के किनारे और निचले क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया है। दोनों बांधों के पावर हाउस से सभी टरबाइन चलाकर बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इससे भी नर्मदा नदी में 1800 से 2000 क्यूमेक्स पानी का प्रवाह होने से जलस्तर बढ़ गया है। भारी बारिश से बढ़ रहा जल स्तर इंदिरा सागर बांध के ऊपरी नर्मदा कछार में भारी वर्षा के बाद नर्मदा नदी में जल का अत्याधिक प्रवाह हो रहा है। शनिवार को प्रातः 11 बजे की स्थिति में तवा बांध से 3173 क्यूमेक्स और बरगी बांध द्वारा 1338 क्यूमेक्स जल राशि छोड़ी जा रही है तथा दोपहर एक बजे बाद इसे 3177 क्यूमेक्स कर दिया गया है। इसके फलस्वरूप इंदिरा सागर जलाशय में कुल आंकलित जल आवक लगभग 7500 क्यूमेक्स संभावित है। इंदिरा सागर परियोजना प्रमुख अजीत कुमार ने बताया कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए और अपस्ट्रीम मे अतिवृष्टि की स्थिति में अगले 24 से 48 घंटे में इंदिरा सागर पावर स्टेशन के बांध के रेडियल गेटों का संचालन कर अतिरिक्त जल राशि को छोड़े जाने की संभावना है। बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ के प्रभारी ने बताया कि इंदिरा सागर बांध के गेट 27 जुलाई को सुबह चार बजे तथा ओंकारेश्वर सागर बांध के गेट सुबह छह बजे खोले जाने की संभावना है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सूचना जारी की गई है बांध के डाउनस्ट्रीम में जन सामान्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचना जारी की है। इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के गेटों की संख्या का निर्धारण कर पावर स्टेशन बांध के रेडियल गेटों से होने वाले जल प्रवाह की मात्रा के संबंध में सूचना जारी की जाएगी। ओंकारेश्वर बांध परियोजना प्रमुख धीरेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि इंदिरा सागर बांध से पानी की आवक को देखते हुए बांध के गेट कितने और किस ऊंचाई तक खोले जाएगी इसकी संख्या तय की जाएगी।