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यशराज ने पेश की ‘वॉर 2’ के सुपरहिट सॉन्ग ‘जनाब ए आली’ की पहली झलक

मुंबई,  यशराज फिल्म्स ने अपने स्पाई यूनिवर्स की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'वॉर 2' से बहुचर्चित गाने 'जनाब ए आली' की पहली झलक पेश कर दी है। इस दमदार डांस टीज़र में पहली बार एक साथ नजर आ रहे हैं, दो सबसे बेहतरीन परफॉर्मर्स ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर। दर्शकों के लिए यह एक डांस मुकाबला है जिसका लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा था। इस गाने को प्रीतम ने संगीतबद्ध किया है, सचेत टंडन और साज भट्ट ने अपनी आवाज दी है, इसके दमदार बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं। 'जनाब ए आली' एक हाई-ऑक्टेन डांस एंथम बनकर सामने आ रहा है, जो स्क्रीन पर दिलों की धड़कनें और सिनेमाघरों में उत्साह बढ़ाने का वादा करता है। आदित्य चोपड़ा ने यह तय किया है कि 'जनाबे आली' गाने को फिल्म की रिलीज़ से पहले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पूरा रिलीज़ नहीं किया जाएगा, ताकि दर्शकों को ऋतिक और एनटीआर के बीच के इस विस्फोटक डांस का अनुभव बड़े पर्दे पर ही पूरी भव्यता के साथ मिल सके। यशराज फिल्म्स की मंशा है कि यह गाना भी 'कजरा रे' और 'कमली' की तरह थिएटर में धमाल मचाए, और दर्शकों को सिनेमा हॉल तक खींच लाए। फिल्म का निर्देशन अयान मुखर्जी ने किया है और इसमें कियारा आडवाणी लीड रोल में नजर आएंगी। 'वॉर 2' 14 अगस्त, 2025 को हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में सिनेमाघरों में दस्तक देगी।  

तमिलनाडु में बिल पर फिर घमासान, मामला अब राष्ट्रपति की चौखट पर

नई दिल्ली तमिलनाडु के राज्यपाल की ओर से विधानसभा से पारित विधेयकों को लटकाने का मामला कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। इसी मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राज्यपालों और राष्ट्रपति को तीन महीने के अंदर निर्णय लेने को कहा था। इस पर राष्ट्रपति की ओर से सुप्रीम कोर्ट से राय भी मांगी गई है कि आप कैसे ऐसा आदेश प्रेसिडेंट या राज्यपाल को दे सकते हैं। लेकिन इस बीच तमिलनाडु में ही विधेयकों को लटकाने पर ही फिर से खींचतान शुरू हो गई है। ताजा मामला कलैग्नार शताब्दी विश्वविद्यालय विधेयक से जुड़ा है। इस विधेयक को आर. एन. रवि ने रिजर्व कर लिया है और राष्ट्रपति के समक्ष भेजा है। राजभवन के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। पूर्व मुख्यमंत्री और एमके स्टालिन के पिता करुणानिधि को कलैग्नार के नाम से भी जाना जाता है। इस विधेयक को तमिलनाडु विधानसभा से अप्रैल में मंजूरी मिल गई थी। इसके तहत यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव है और उसके चांसलर चीफ मिनिस्टर होंगे। मौजूदा नियम के अनुसार किसी भी राज्य यूनिवर्सिटी के चांसलर संबंधित सूबे के राज्यपाल ही होते हैं। अब इस नियम को तमिलनाडु की स्टालिन सरकार बदलना चाहती है। राज्यपाल की ओर से बिल अटकाने से डीएमके भड़क गई है। पार्टी का कहना है कि राज्यपाल ने तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खुली अवमानना की है। डीएमके ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल से एक महीने के अंदर निर्णय लेने को कहा था। इसके अलावा यह भी कहा था कि यदि राष्ट्रपति के पास राय लेने के लिए बिल भेजा जाए तो अधिकतम तीन महीने का ही वक्त लगना चाहिए। राज्यसभा सांसद और तमिलनाडु सरकार के वकील पी. विल्सन ने कहा, 'बिल को मंजूरी न देकर राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना की है। उनके पास कोई अधिकार नहीं है कि वे निर्णय न लें। उनकी यह ड्यूटी है कि वे मंत्री परिषद और विधानसभा से पारित विधेयक को मंजूरी प्रदान करें।' माना जा रहा है कि इस मामले में यदि अगले कुछ दिनों में राज्यपाल या राष्ट्रपति की ओर से निर्णय ना लिया गया तो फिर डीएमके सरकार अदालत का रुख कर सकती है। बता दें कि राष्ट्रपति की ओर से मांगी गई सलाह पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है।  

स्वीकृत कार्यों को गंभीरता से लेकर पूरी गुणवत्ता के साथ समय सीमा में पूर्ण कराएं कलेक्टर्स: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का बजट 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ किया गया अनुसूचित जाति वर्ग के पांच युवाओं को हर साल पायलट बनाने दी जाएगी आर्थिक सहायता गिरौधपुरी धाम के विकास के लिए 2 करोड़, अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के कोचिंग के लिए 50 लाख रुपए की दी गई स्वीकृति रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज जांजगीर-चांपा जिले के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक में प्राधिकरण के बजट को 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये करने की स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री श्री साय ने निर्देश दिए कि प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को सभी कलेक्टर्स गंभीरता से लें और उन्हें उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अब प्राधिकरण की बैठक हर वर्ष समय पर आयोजित होगी और कार्यों की गहन समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संविधान की मंशा के अनुरूप अनुसूचित जाति समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए हम बाबा गुरु घासीदास जी के ‘मनखे-मनखे एक समान’ के संदेश को आत्मसात कर समाज में सम्मान और समानता की भावना को सशक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचे, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जांजगीर-चांपा जिले को इस बैठक के लिए विशेष रूप से इसलिए चुना गया क्योंकि यह अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और अब समय आ गया है कि हम विकास की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित करें।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की संकल्पना के अनुरूप राज्य में विकास के कार्य हुए हैं। अनुसूचित जाति समाज के समुचित विकास के लिए प्राधिकरण एक सशक्त माध्यम है, जिसके माध्यम से सरकार ठोस प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने गिरौधपुरी धाम के विकास के लिए 2 करोड़ रुपये, अजा वर्ग के विद्यार्थियों हेतु कोचिंग व्यवस्था के लिए 50 लाख रुपये, प्रत्येक वर्ष अनुसूचित जाति वर्ग के 5 युवाओं को पायलट प्रशिक्षण हेतु सहायता, तथा जोड़ा जैतखंभ के निर्माण में सीमेंट के साथ-साथ लकड़ी के उपयोग हेतु राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। साथ ही, दिल्ली में संचालित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीट संख्या बढ़ाकर 200 करने की जानकारी दी और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु इसका लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने आगामी समय में सभी जिला मुख्यालयों में 'नालंदा परिसर' के निर्माण की भी बात कही। मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक के दौरान प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों के वर्षों से लंबित रहने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही प्राधिकरण के कार्यों की राशि कम हो, लेकिन उनका सामाजिक महत्व अत्यंत बड़ा है। इन कार्यों का समय पर पूर्ण न होना चिंता का विषय है। बैठक को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अनुसूचित जाति समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सोच समाज के वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में स्पष्ट है। उन्होंने सभी लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए और सभी समाज को साथ लेकर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास का संकल्प दोहराया। अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब ने मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में समाज के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों हेतु आभार प्रकट किया। उन्होंने गिरौधपुरी धाम में रोपवे निर्माण, मेला आयोजन के दौरान बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, जोक नदी के पास स्नान हेतु आवश्यक व्यवस्था, ठहरने की सुविधा, जोड़ा जैतखंभ में लकड़ी के उपयोग, बाराडेरा धाम में ऐतिहासिक तालाब का संरक्षण और सौंदर्यीकरण, विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट क्लास की व्यवस्था जैसी मांगें बैठक में रखीं। उन्होंने बजट वृद्धि और मांगों की स्वीकृति के लिए भी आभार व्यक्त किया। बैठक में प्राधिकरण के स्वरूप, कार्यक्षेत्र, अनुमोदित कार्यों की समीक्षा, बजट प्रावधानों की जानकारी, एवं वित्तीय वर्ष 2020 से 2025 तक स्वीकृत कार्यों की प्रगति सहित नागरिक सुविधाओं, सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों, और शैक्षणिक सुविधा विस्तार जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं प्राधिकरण सदस्यों के प्रस्तावों के आधार पर 49 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के विकास एवं हितग्राही मूलक कार्यों का अनुमोदन किया गया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री श्री दयाल दास बघेल, श्री लखन लाल देवांगन, श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, श्री टंकराम वर्मा, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, विधायक श्री पुन्नूलाल मोहले, श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, श्री दिलीप लहरिया, श्रीमती शेषराज हरवंश, श्रीमती उतरी गणपत जांगड़े, श्रीमती कविता प्राण लहरे, श्रीमती हर्षिता स्वामी बघेल सहित रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के आयुक्त, आईजी, एवं 17 जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे।  

बड़े काम के हैं शॉर्ट-टर्म कम्प्यूटर कोर्सेज

पिछले कुछ वर्षों में युवाओं का सबसे ज्यादा रुझान आईटी सेक्टर की ओर बढ़ा है। युवाओं के बढ़ते क्रेज का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इस बार भी देश में आईआईटी में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों ने कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग या आईटी कोर्स को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है। हालांकि बीटेक या एमटेक इन कम्प्यूटर साइंस हायर प्रोफेशनल डिग्री है लेकिन देश में ऐसे युवाओं की भी कमी नहीं, जो हाई स्कूल या इंटरमीडिएट के बाद कम्प्यूटर कोर्स करना चाहते हैं। ये शॉर्ट-टर्म कोर्स न सिर्फ कम्प्यूटर स्किल्स को बढ़ाते हैं, बल्कि नौकरी के रास्ते भी खोल देते हैं जिसकी वजह से आगे विद्यार्थियों को ये कोर्स काफी पसंद आ रहे हैं। कुछ विद्यार्थी किसी वजह से आगे पढ़ाई न करके कुछ काम करना चाहते हैं, तो उनके लिए कम्प्यूटर कोर्स काफी मददगार साबित हो रहे हैं। कैसे मिलेंगी नौकरियां? कम्प्यूटर का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है। निजी कंपनियों में कम्प्यूटर या फिर आईटी से जुड़ी नौकरियों में अपार संभावनाएं रहती ही हैं लेकिन डिजिटल इंडिया योजना शुरू होने के बाद सरकारी क्षेत्रों में भी टेक्नोलॉजी से संबंधित नौकरियों के खूब अवसर आने की संभावना है। सरकार इस योजना के लिए एक लाख करोड़ रुपए खर्च करने वाली है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट, टाटा, विप्रो, बिड़ला, एयरटेल, वेदांता आदि जैसी कंपनियां 4.5 लाख करोड़ रुपए निवेश करेंगी। गौर करने वाली बात यह है कि इस पूरे निवेश का जोर देश के डिजिटलाइजेशन पर है। ऐसे में जो जॉब्स सृजित होंगीं, वे किसी-न-किसी रूप में कम्प्यूटर से जुड़ी होंगी। शुरूआत में एडवांस अकाउंटिंग, डाटा एंट्री, कम्प्यूटर ऑपरेटर, सेल्स, सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर, वेब डिजाइनर, प्रोग्रामर, कस्टमर सर्विस, एप्लिकेशन एनालिस्ट आदि की जॉब के लिए खूब स्कोप है। कम्प्यूटर से जुड़े तीन-चार तरह के शॉर्ट-टर्म कोर्स लोकप्रिय हैं। इनमें बेसिक कम्प्यूटर कोर्स, हाडवेयर एंड नेटवर्किंग कोर्स, सॉफ्टवेयर एंड प्रोग्रामिंग कोर्स, एडवांस आकउंयिंग और डाटा एंट्री से संबंधित कोर्स शामिल हैं। इनकी अवधि 6 महीने से 2 साल की होती है। बेसिक कम्प्यूटर कोर्स एक लैपटॉप या डेस्कटॉप को किस तरह से ऑपरेट करना है, इसके लिए कई सारे शॉर्ट-टर्म कोर्स चलन में हैं। इन कोर्सों के दौरान आपको कम्प्यूटर की बेसिक नॉलेज, ऑपरेटिंग सिस्टम की जानकारी, वेब प्रोग्रामिंग, इंटरनेट ऑपरेशन जैसे सर्फिंग और ईमेल यूज करना, एप्लिकेशन डेवलपमेंट, विंडोज, एमएस ऑफिस, पावर पॉइंट, वायरस प्रोटेक्शन आदि से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी जाती है। थोड़े एडवांस कोर्स में वेब डिजाइनिंग भी शामिल है। प्रमुख कोर्स बेसिक कम्प्यूटर कोर्स, एडवांस एमएस ऑफिस, कम्प्यूटर ऑपरेटर्स एंड प्रोग्रामिंग, असिस्टेंट वेब एंड मल्टीमीडिया डिजाइन, सर्टिफिकेट इन वेब डिजाइनिंग। हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग कोर्स कम्प्यूटर एक मशीन है, जिसके पार्ट्स, जैसे कीबोर्ड, चिप, हार्ड डिस्क, मॉनिटर, सर्किट बोर्ड्स को हार्डवेयर कहा जाता है। इनका रख-रखाव और सुधार करने वाले एक्सपर्ट्स को हार्डवेयर इंजीनियर कहते हैं। इनका काम किसी खराबी को ठीक करना, पीसी और लैपटॉप असेंबल करना, नेटवर्क तैयार करना होता है। ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर इंस्टॉल, डिस्क मैनेजमेंट रिस्क, प्रिंटर असेंबल से लेकर हर वह काम जो कम्प्यूटर में कोई भी एप्लिकेशन या सॉफ्टवेयर चलाने के लिए जरूरी है, वह काम भी हार्डवेयर इंजीनियर करता है। प्रमुख कोर्स डिप्लोमा इन हार्डवेयर नेटवर्किंग, डिप्लोमा इन हार्डवेयर टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन कम्प्यूटर नेटवर्किंग, लैपटॉप रिपेयरिंग कोर्स। सर्टिफिकेट इन एडवांस अकाउंटिंग रिटेल मार्केट में बड़े स्तर पर कम्प्यूटराइजेशन हुआ है और स्टोर्स में अब सेल्स और बिलिंग कम्प्यूटर से ही होता है। ऐसे में कम्प्यूटर अकाउंटेंट्स की जरूरत काफी बढ़ गई है। प्रमुख कोर्स डिप्लोमा इन कम्प्यूटराइज्ड अकाउंटिंग, डिप्लोमा इन फाइनेंस एंड बैंकिंग, डाटा एंट्री एंड ऑफिस ऑटोमेशन। सॉफ्टवेयर एंड प्रोग्रामिंग कोर्स कम्प्यूटर से जुड़ा यह थोड़ा एडवांस कोर्स है, जिसमें लैंग्वेज कोर्स भी शामिल है। बेसिक कम्प्यूटर सीखने के बाद काम करने के लिए सॉफ्टवेयर, टेक्नोलॉजी और प्रोग्रामिंग की जरूरत होती है, जिसके लिए इन कोर्स को किया जा सकता है। इन कोर्स में सी, सी प्लस, सी प्लस प्लस, जावा स्क्रिप्ट, विजुअल बेसिक, डॉट नेट, एचटीएमएल, सीआईसी, ओरेकल, कोबोल, लिनक्स आदि के बारे में बताया जाता है। प्रमुख कोर्स डिप्लोमा इन नेट प्रोग्रामिंग, डिप्लोमा इन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज, एडवांस डिप्लोमा इन कम्प्यूटिंग, डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन, डिप्लोमा इन कम्प्यूटर इंजीनियरिंग, डिप्लोमा इन सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी। कहां से करें कोर्स? कम्प्यूटर के शॉर्ट-टर्म कोर्स के लिए लगभग सभी शहरों में निजी संस्थान और ट्रेनिंग सेंटर खुले हुए हैं। देश भर में आईटीआई और पॉलीटेक्निक कॉलेज भी हैं, जहां से अपनी पसंद का कोर्स किया जा सकता है। सैलरी कम्प्यूटर के शॉर्ट-टर्म कोर्स करने के बाद नौकरी मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। शुरूआत में 15 से 20 हजार रुपए प्रति माह तक सैलरी मिल जाती है। काम सीखने के बाद सैलरी में अच्छी वृद्धि होती है। आप खुद का पीसी रिपेयरिंग सेंटर या ट्रेनिंग सेंटर भी खोल सकते हैं। सॉफ्टवेयर एंड हार्डवेयर इंजीनियर, वेब डिजाइनर बनाकर भी अच्छे पैसे कमाए जा सकते हैं। प्रमुख संस्थान:- -नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली -मोतीलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अहमदाबाद -डायरेक्टोरेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, कानपुर -गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक कॉलेज, कोटा -ए-सेट रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली -एनआईआईटी, मुंबई  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 8 अगस्त को अतिवृष्टि और बाढ़ से हुई क्षति की राहत राशि करेंगे वितरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में प्राकृतिक आपदा, अतिवृष्टि और बाढ़ से हुई विभिन्न क्षतियों जैसे जनहानि, पशुहानि, मकान क्षति एवं अन्य क्षति के लिये प्रभावितों को 8 अगस्त को सिंगल क्लिक के माध्यम से राहत राशि वितरित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राहत राशि वितरित करेंगे और हितग्राहियों से चर्चा भी करेंगे। प्रमुख सचिव राजस्व श्री विवेक पौरवाल ने बताया कि प्रदेश के जिलों में मानसून काल वर्ष 2025 में प्राकृतिक आपदा एवं अतिवृष्टि, बाढ़ से हुई क्षति के प्रभावितों को राहत राशि वितरित की जा रही है।  

राहुल गांधी को चुनाव आयोग की चेतावनी– बिना साक्ष्य आरोप नहीं चलेगा

नई दिल्ली  राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग पर लगातार हमले जारी हैं। वह महाराष्ट्र, हरियाणा जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव और लोकसभा इलेक्शन में धांधली के आरोप लगा चुके हैं। ताजा मामला कर्नाटक का है। उन्होंने आरोप लगाया था कि कर्नाटक में एक लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए और इस तरह वोटों की चोरी हुई है। अब इस मामले में राहुल गांधी को कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी ने एफिडेविट भेजा है। उन्होंने राहुल गांधी से मांग की है कि इस हलफनामे पर साइन कर दें कि वह सही आरोप लगा रहे हैं। यदि उनके दावे गलत पाए गए तो फिर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राहुल गांधी के प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए गए दावों को लेकर एक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों का जिक्र करते हुए इस शपथ पत्र पर दस्तखत करने को कहा है। कर्नाटक के सीईओ के पत्र में लिखा है, "यह ज्ञात है कि आज आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आपने मतदाता सूची में अपात्र मतदाताओं को शामिल करने और पात्र मतदाताओं को बाहर करने का जिक्र किया था। आपसे अनुरोध है कि आप मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 20(3)(बी) के तहत शपथ पर हस्ताक्षर करके ऐसे मतदाताओं के नाम के साथ वापस भेजें ताकि आवश्यक कार्यवाही शुरू की जा सके।" आयोग ने आरोपों को बताया है निराधार इस शपथ पत्र में आयोग ने यह भी उल्लेख किया है कि राहुल गांधी अगर इन दावों को सही साबित नहीं कर पाए तो उन पर कानूनी कार्रवाई चलाई जा सकती है। इससे पहले आयोग ने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है। बीते सप्ताह राहुल गांधी के चुनाव आयोग के खिलाफ सबूत होने के दावों पर चुनाव आयोग ने कहा था कि राहुल गांधी ने कभी औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है और बार-बार बुलाए जाने पर भी वे आयोग के सामने पेश नहीं हुए हैं। राहुल गांधी का आया जवाब राहुल गांधी के प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही एक पत्रकार ने उन्हें चुनाव आयोग द्वारा भेजे गए शपथ पत्र की जानकारी दी। इसपर जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि वे सार्वजनिक रूप से यह बयान दे रहे हैं और आयोग इसे शपथ के रूप में ही देखे। राहुल गांधी ने कहा, “मैं एक राजनेता हूं। मैं जो कह रहा हूं वह सबके सामने कह रहा हूं। इसे शपथ के रूप में ही देखिए। यह हमारा डेटा नहीं है। चुनाव आयोग यह क्यों नहीं कह रही कि मैं गलत हूं। वे कह रहे हैं कि मै शपथ पत्र पर साइन करूं। इससे साफ झलकता है कि उन्हें पता है कि हमें सब पता है।” ‘सबूत’ पेश कर वोट चोरी के आरोप इससे पहले गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन का राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी में शामिल होने का आरोप लगाए हुए कई ‘सबूत’ दिखाए हैं। राहुल गांधी ने कहा है कि कांग्रेस को सारे सबूत इकट्ठा करने में 6 महीने से ज्यादा का समय लगा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि कर्नाटक की वोटर लिस्ट में कई नाम, एड्रेस फर्जी थे। उन्होंने कुछ दस्तावेजों में यह भी दिखाया कि एक ही पते पर कई लोगों का नाम दर्ज होने के साथ-साथ हजारों मतदाताओं का फर्जी पता दर्ज था।  

बाढ़ में बहा पुराना पुल, मलाणा के ग्रामीणों ने 7 दिन में रच दी नई उम्मीद की कहानी

हिमाचल  हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित, अपने प्राचीन नियमों और संस्कृति के लिए मशहूर मलाणा गांव ने हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा के बाद अपनी हिम्मत और आत्मनिर्भरता से पूरे प्रदेश को एक नई प्रेरणा दी है। 1 अगस्त की रात को भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ ने मलाणा नदी में भारी तबाही मचाई। इस बाढ़ में गांव को बाहरी दुनिया से जोड़ने वाला एकमात्र पैदल पुल बह गया, जिससे मलाणा का संपर्क पूरी तरह कट गया। इस आपदा से गांव में काफी नुकसान हुआ। नदी के तेज बहाव में एक महिला, 10-15 मवेशी, एक कार, जेसीबी और एक ट्रक भी बह गए। मुश्किल की इस घड़ी में भी गांव के लोग टूटे नहीं। सरकारी सहायता या किसी बचाव दल का इंतज़ार करने के बजाय, उन्होंने खुद ही बचाव कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से मिलकर लापता महिला का शव ढूंढ़ निकाला। यह उनकी बहादुरी और मुश्किल हालात में भी हार न मानने वाले जज्बे को दर्शाता है। आपदा की वजह और ग्रामीणों का आरोप स्थानीय लोगों का मानना है कि इस भयंकर बाढ़ का कारण नदी के ऊपरी हिस्से में चल रही जलविद्युत परियोजना का निर्माण कार्य है। उनका आरोप है कि निर्माण कंपनी ने पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की, जिससे मिट्टी कमजोर हो गई। पेड़ों की कमी से मिट्टी पानी को रोक नहीं पाई, और बारिश का पानी सीधे नदी में जाकर बाढ़ का कारण बना। मलाणा गांव के पास बन रही 109 मेगावाट की रन-ऑफ-द-रिवर मलाणा जलविद्युत परियोजना को भी इस बाढ़ से भारी नुकसान पहुंचा है, और उसकी मशीनरी भी नदी में बह गई है।   सरकारी मदद के बजाय खुद बनाया पुल आपदा के बाद, मलाणा के लोगों ने किसी सरकारी मदद का इंतज़ार नहीं किया। उन्होंने अपनी पारंपरिक सामूहिक श्रम व्यवस्था को फिर से जीवित किया। सभी गांववासियों ने मिलकर पारंपरिक तरीकों से लकड़ी और रस्सियों की मदद से एक अस्थाई पुल का निर्माण कर डाला। इस अद्भुत प्रयास से एक बार फिर से मलाणा का संपर्क बाहरी दुनिया से जुड़ गया। गांव के लोग अपने देवता जमलू ऋषि के सिद्धांतों पर चलते हैं, और उनकी यही एकता और आत्मनिर्भरता हर संकट में उन्हें ताकत देती है। यह पहली बार नहीं है जब मलाणा के लोगों ने ऐसा साहस दिखाया है। पिछले साल भी जब इसी पुल को नुकसान हुआ था, तब भी उन्होंने खुद ही मिलकर नया पुल बना लिया था। मलाणा की अनूठी संस्कृति और पहचान मलाणा गांव, जिसे दुनिया के सबसे पुराने लोकतांत्रिक गांवों में से एक माना जाता है, अपने अलग कानून और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां का शासन देवता जमलू ऋषि की आज्ञा से चलता है। गांव के लोगों का मानना है कि वे सिकंदर के सैनिकों के वंशज हैं जो भारत में बस गए थे। मलाणा की एक और खास बात यह है कि यहां बाहरी लोगों को किसी भी चीज़ को छूने की अनुमति नहीं है। इस आपदा में मलाणा के लोगों ने जिस तरह की एकजुटता, बहादुरी और आत्मनिर्भरता दिखाई है, उसकी सोशल मीडिया पर भी खूब प्रशंसा हो रही है। कई लोगों ने इसे सच्चे 'आत्मनिर्भर भारत' का उदाहरण बताया है। गांव के पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार से अपील की है कि जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण में पर्यावरणीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसे बड़े हादसे न हों।  

छत्तीसगढ़ की जनसंपर्क कार्यप्रणाली बनी मिसाल, महाराष्ट्र ने लिया प्रेरणा स्रोत

रायपुर, महाराष्ट्र सरकार के जनसंपर्क एवं सूचना विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक अध्ययन दल 5 से 7 अगस्त 2025 तक तीन दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ में प्रवास पर रहा। इस दौरे का उद्देश्य छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सूचना, जनसंपर्क और शासकीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में किए जा रहे नवीनतम नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणालियों का प्रत्यक्ष अवलोकन एवं अध्ययन करना था। अध्ययन दल में महाराष्ट्र शासन की उप सचिव श्रीमती समृद्धि अंगोलकर, निदेशक श्री किशोर गंगरडे सहित कुल छह वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। दल ने छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग एवं उसकी सहायक संस्था छत्तीसगढ़ संवाद की संपूर्ण कार्यप्रणाली का अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने ई-न्यूज़ क्लिपिंग, ई-आरओ सिस्टम, ई-पब्लिकेशन, पत्रकार अधिमान्यता प्रणाली, तथा पत्रकारों के कल्याण हेतु संचालित योजनाओं का गहन अध्ययन किया। इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ संवाद की संगठनात्मक संरचना, संचालन तंत्र तथा तकनीकी नवाचारों के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी भी प्राप्त की। इस अवसर पर अध्ययन दल ने जनसंपर्क विभाग के आयुक्त डॉ. रवि मित्तल से सौजन्य मुलाकात की। जनसंपर्क आयुक्त डॉ. मित्तल ने कहा कि छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग का यह सतत प्रयास रहा है कि शासकीय योजनाओं और जनहितकारी नीतियों की जानकारी आम जनता तक त्वरित, पारदर्शी और प्रभावशाली ढंग से पहुँचे। सूचना के क्षेत्र में तकनीक और मानवीय दृष्टिकोण के संतुलित समावेशन ने हमारी कार्यप्रणाली को विशिष्ट बनाया है। यह हमारे लिए प्रसन्नता की बात है कि अन्य राज्य भी हमारे नवाचारों में रुचि ले रहे हैं। यह अनुभव-साझाकरण एक सकारात्मक और रचनात्मक दिशा में उठाया गया कदम है। अध्ययन दल ने इंद्रावती भवन स्थित जनसंपर्क संचालनालय एवं छत्तीसगढ़ संवाद कार्यालय का भ्रमण कर विभिन्न शाखाओं के संचालन का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और विभाग की प्रमुख गतिविधियों को निकट से जाना। अपर संचालक श्री जे.एल. दरियो, श्री उमेश मिश्रा एवं श्री संजीव तिवारी ने अध्ययन दल को विभाग की प्रमुख गतिविधियों, कार्यप्रणाली और तकनीकी अनुप्रयोगों की जानकारी विस्तार से प्रदान की।महाराष्ट्र से आए अध्ययन दल के सदस्यों ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सूचना एवं जनसंपर्क के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए उन्हें अपने राज्य में भी लागू करने की संभावनाओं में गहरी रुचि जताई। इस अवसर पर जनसंपर्क विभाग   और छत्तीसगढ़ संवाद के विभिन्न अधिकारीगण उपस्थित थे।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य अलर्ट! योगी सरकार ने शुरू की विशेष निगरानी व्यवस्था

लखनऊ उत्तर प्रदेश के अधिसंख्य जिलों में बारिश का दौर थमने के साथ ही नदियों का जलस्तर में गिरावट से फौरी राहत मिली है हालांकि बाढ़ग्रस्त इलाकों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा गहराने लगा है। लखनऊ,कानपुर,उन्नाव,जालौन,बाराबंकी और प्रयागराज समेत कई जिलों में आज बादलों की आमद पिछले दिनो की अपेक्षा कम रही और धूप खिलने से लोगों को राहत मिली। प्रयागराज,कानपुर,वाराणसी और कन्नौज समेत कई जिलों में गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गयी हालांकि घाघरा और शारदा नदियों में कटान के चलते सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि पानी में समायी रही। प्रयागराज से प्राप्त रिपोटर् के अनुसार गंगा और यमुना नदिया अब खतरे के निशान के नीचे पहुंच गई है। बीते 24 घंटे में गंगा नदी का फाफामऊ में जलस्तर 155 सेंटीमीटर और छतनाग में 146 सेंटीमीटर कम हुआ है जबकि नैनी में यमुना नदी का जलस्तर बीते 24 घंटे में 123 सेंटीमीटर कम हुआ है। यमुना नदी का जलस्तर 5.12 सेंटीमीटर प्रति घंटा और गंगा नदी का जलस्तर 6.45 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कम हो रहा है हालांकि अभी भी दर्जनों मोहल्ले और गांव बाढ़ की चपेट में है। इन इलाकों में अभी भी नावें चल रही हैं अभी भी बड़ी संख्या में लोग बाढ़ राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं लेकिन जिस रफ्तार से जलस्तर कम हो रहा है। वाराणसी में केंद्रीय जल आयोग की रिपोटर् के अनुसार गंगा नदी का जलस्तर 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घटने लगा है। गंगा का जलस्तर आज 71.58 मीटर दर्ज किया गया। बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही अब संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। मेयर अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ कम होने पर संक्रामक रोगों को रोकने के उपायों पर चर्चा की है। जिन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी कम हो रहा है, वहां नगर निगम की टीमें सफाई, एंटी-लार्वा छिड़काव और फॉगिंग कर रही हैं। वरुणा नदी के किनारे नक्खी घाट, पुलकोहना, शक्कर तालाब और शहरी क्षेत्रों में सामने घाट, अस्सी, नगवा जैसे इलाके सबसे अधिक प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।   

सीएम का गर्व भरा बयान- भारतीय सेना आज विश्व की श्रेष्ठ सेनाओं में, हर घर तिरंगा से लहराया राष्ट्रप्रेम

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि 'हर घर तिरंगा अभियान' न केवल देशवासियों में देशभक्ति की भावना को प्रबल करता है, बल्कि यह अभियान देश के गौरव, पराक्रम और एकता का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने बीते 11 वर्षों में नए विकास आयाम स्थापित किए हैं और भारतीय सेना आज दुनिया की सबसे मजबूत सेनाओं में गिनी जाती है। मुख्यमंत्री बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित 'हर घर तिरंगा अभियान' एवं 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' पर आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद देशभर में जिस प्रकार विजयोत्सव मनाया गया और तिरंगा यात्राएं निकाली गईं, वह देश के प्रति समर्पण और सेना के शौर्य को सलाम करने का भाव दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उसी भावना को बनाए रखने और नई पीढ़ी को जोड़ने के लिए 'हर घर तिरंगा अभियान' को भाजपा ऐतिहासिक रूप देने जा रही है। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे बूथ से लेकर मंडल, जिला और संभाग स्तर तक इस अभियान को लेकर जनसंपर्क करें और अधिक से अधिक लोगों को जोड़ें। उन्होंने कहा कि संगठनात्मक कार्यक्रम कार्यकर्ताओं को जनता से सीधे जुड़ने का अवसर देते हैं, इसलिए हर कार्यकर्ता को सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। इस मौके पर भाजपा सांसद वीडी शर्मा ने कहा कि कार्यकर्ता इस बार 'हर घर तिरंगा' को एक जन आंदोलन बनाएं और अभियान को इतिहास में दर्ज कराने वाला बनाएं। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता अशोक परनामी ने जानकारी दी कि पार्टी 10 से 14 अगस्त तक तिरंगा यात्रा निकालेगी और इस बार हर घर में तिरंगा फहराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को तोड़ने का काम कांग्रेस ने किया और आज भी उनके नेता "पाकिस्तान की भाषा" बोल रहे हैं। उन्होंने कहा, जो लोग देश और संस्कृति के खिलाफ बोलते हैं, उनकी मानसिकता पर सवाल खड़े होते हैं। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि ऐसे लोगों को सद्बुद्धि मिले।