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उत्तरकाशी आपदा से घायल हर्षिल घाटी की गंगा, फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ का प्रसिद्ध स्थल हुआ शांत

उत्तरकाशी ऐसे कई स्थान हैं, जो किसी फिल्म से जुड़कर देश-दुनिया में चर्चित हो गए। बालीवुड के अमर शिल्पी और जानेमाने फिल्मकार राज कपूर की फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' (1985) ने एक समय उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल हर्षिल को भी जबरदस्त सुर्खियों में ला दिया था। बर्फ से ढकी चोटियां, भागीरथी नदी के किनारे फिल्म की नायिका मंदाकिनी की निर्दोष मुस्कान, सेब के बागानों की छांव में राज कपूर का कैमरा, चिट्ठियों के इंतजार में डाकघर पर टिकीं नायिका की निगाहें…, फिल्म के इन तमाम दृश्यों ने पूरे देश में हर्षिल को तब चर्चा में ला दिया था। फिल्म में अभिनेत्री मंदाकिनी ने गंगा का किरदार और अभिनेता राजीव कपूर ने नरेन की भूमिका निभाई है। इस फिल्म ने गढ़वाल की जीवन शैली, पारंपरिक पोशाक, आभूषण आदि को भी जीवंत कर दिया था। उस दौर में हर्षिल घाटी प्रेम, पवित्रता, सादगी और सिनेमाई सौंदर्य का प्रतीक बन गई थी। धराली की आपदा ने हर्षिल की इन्हीं खूबसूरत वादियों में वीरानगी फैला दी है। आज हर्षिल में राहत दलों की आवाजाही और हेलिकाप्टरों की गड़गड़ाहट गूंज रही है। सेब की बगीचों की रंगत मलबे के नीचे दब चुकी है। धराली में खीरगंगा और हर्षिल में तेलगंगा के तांडव ने यहां की सुंदर और शांत वादियों को झकझोर दिया है। फिल्म राम तेरी गंगा मैली का सुपरहिट गाना 'हुस्न पहाड़ों का…' तब खूब चर्चित हुआ था। कभी यह गीत यहां शादी-ब्याह और अन्य समारोहों में खूब गूंजता था। इसी गीत के माध्यम से देश भर के दर्शकों ने हर्षिल की सुरम्य वादियों को पहली बार परदे पर देखा था। धराली से एक किलोमीटर आगे गंगोत्री की ओर प्रसिद्ध मंदाकिनी झरने के नीचे नायिका पर सफेद साड़ी में यह गीत फिल्माया गया था। इस झरने में ऐसे तो कोई उफान नहीं आया है, लेकिन आज वहां आसपास सैलाब की सिसकियां सुनाई देती हैं। हर तरफ मलबे में दबी खामोशी है। चार दिन पहले धराली में खीरगंगा और हर्षिल में तेलगंगा के उफान ने जो तबाही मचाई, उसने हर्षिल में बहुत कुछ बदल डाला है। सेब के बगीचों के बीच बसा धराली कस्बा तो नक्शे से लगभग गायब हो गया। सुरक्षित है हर्षिल गांव और बाजार पिछले दिनों की आपदा ने ऐसे तो हर्षिल को बुरी तरह झकझोर दिया है, लेकिन राम तेरी गंगा मैली में फिल्माए गए यहां के स्थल अब भी सुरक्षित हैं। प्रसिद्ध डाकघर, जहां फिल्म की नायिका गंगा (मंदाकिनी) नरेन के लिए चिट्ठी भेजती है और उसकी चिट्ठी का इंतजार करती थी, आपदा में सुरक्षित है। हर्षिल गांव और उसका मुख्य बाजार भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। आपदा के दिन हर्षिल हेलीपैड के पास झील बनने के कारण उत्पन्न खतरे पर अब एक हद तक नियंत्रण पाया जा चुका है। झील का जलस्तर घट रहा है और इस स्थान पर भागीरथी नदी का प्रवाह सामान्य होने की दिशा में है।

सलमान खान और सूरज बडजात्या की जोड़ी लौट रही है, नवंबर में फिल्म का बड़ा ऐलान होगा

मुंबई  बॉलीवुड के दबंग सलमान खान और सूरज बडजात्या की जोड़ी ने कई शानदार फिल्में दी हैं। इनकी ब्लॉकबस्टर फिल्मों की लिस्ट में ‘मैंने प्यार किया’, ‘हम आपके हैं कौन’ जैसी फिल्में शामिल हैं। अब खबर सामने आ रही है कि ये जोड़ी एक बार फिर से साथ काम करने वाले हैं। फिल्म का आधिकारिक एलान इस साल नवंबर में किए जाने की खबर है। दोनों की जोड़ी को आखिरी बार साल 2015 में आई फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ में देखा गया था। अब इस जोड़ी को फिर से साथ काम करते देखने का इंतजार हो रहा है। सलमान बनेंगे प्रेम हाल में इंडिया टुडे के साथ बातचीत में सूरज बडजात्या ने कहा, “हम सलमान भाई के साथ कहानी पर काम कर रहे हैं, लेकिन हमें उनकी उम्र के हिसाब से स्क्रिप्ट तैयार करनी होगी। यह एक जिम्मेदारी है कि हम ऑडियंस को वही कहानियां दें, जिन्हें हम मानते और सेलिब्रेट करते हैं।” कहानी के बारे में बात सूरज ने खुलासा किया कि फिल्म की कहानी एक छोटे कस्बे के लड़के और लड़की के इर्द-गिर्द घूमेगी, जो अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह एक प्योर लव स्टोरी होगी। टाइम्स नाउ से बातचीत में उन्होंने माना कि सलमान की उम्र और उनके स्टाइल को ध्यान में रखकर स्क्रिप्ट लिखना चुनौती है। “हम चाहते हैं वही मस्ती, वही मज़ा, लेकिन उम्र के हिसाब से। इसमें थोड़ा वक्त लगेगा।” उन्होंने कहा। सूरज बडजात्या का मानना है कि सलमान के साथ उनका प्लान हमेशा सादगी, बड़ी फैमिली और छोटी-छोटी खुशियों पर आधारित रहा है, और यह फिल्म भी उसी दुनिया में ले जाएगी। साथ काम सलमान और सूरज की जोड़ी ने ‘मैंने प्यार किया’, ‘हम आपके हैं कौन’ और ‘हम साथ-साथ हैं’ जैसी सुपरहिट फिल्में दी हैं। ‘मैंने प्यार किया’ सलमान की पहली फिल्म थी बतौर हीरो और सूरज की बतौर डायरेक्टर। सूरज ने बताया कि पहली मुलाकात में सलमान उन्हें हीरो जैसे नहीं लगे थे, लेकिन कैमरे पर उनकी मौजूदगी ने सब बदल दिया। शूट से पहले सलमान को डांस और वॉयस मॉड्यूलेशन में दिक्कत आ रही थी, लेकिन एक सीन में जब उन्होंने गिटार पकड़ा और कैमरे की ओर देखा, तो सूरज को पता चल गया कि वही उनके ‘प्रेम’ हैं। दिलचस्प बात यह है कि सलमान खुद इस फिल्म को करने के मूड में नहीं थे और कई महीनों तक दूसरे एक्टर्स को लॉन्च करने की सलाह देते रहे। लेकिन अंत में यह जोड़ी बनी और बॉलीवुड को एक सुपरहिट दे गई।  

राजधानी के निकट रेल कोच इकाई से बढ़ेगा अधोसंरचना का विकास: CM यादव

रेल कोच इकाई से राजधानी के निकट होगी अधोसंरचना सशक्त : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दावा: रेल कोच इकाई से राजधानी के आसपास होगी अधोसंरचना मजबूत राजधानी के निकट रेल कोच इकाई से बढ़ेगा अधोसंरचना का विकास: CM यादव केन्दीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे भूमिपूजन भोपाल मेट्रोपोलिटन सिटी के विकास को भी मिलेगी गति स्वदेशी के मंच पर हो रहा अमल 1800 करोड़ रूपए की लागत से बनेगी रेल हब फॉर मैन्युफैक्चरिंग इकाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रदेश को रेल कोच इकाई की बड़ी सौगात प्राप्त हो रही है। परियोजना का भूमि-पूजन केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 10 अगस्त को औबेदुल्लागंज के दशहरा मैदान में करेंगे। कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, रक्षा उत्पाद सचिव संजीव कुमार, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार, भारत अर्थ मूवर्स परियोजना के अध्यक्ष शांतनु राय शामिल हो रहे हैं। इस अवसर पर बीईएलएल (भारत अर्थ मूवर्स लि) परियोजना पर केन्द्रित लघु फिल्म, प्रस्तावित प्लांट का 3डी वॉक थ्रू और नए संयंत्रों के मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया है कि भारत अर्थ मूवर्स परियोजना द्वारा भोपाल जिले की सीमा के पास रायसेन के ग्राम उमरिया में 60 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर 1800 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाली ब्रह्मा परियोजना (बीईएमएल रेल हब फॉर मैन्युफैक्चरिंग) से राजधानी भोपाल सहित रायसेन, सीहोर और विदिशा आदि जिलों को लाभ होगा। इन जिलों के तकनीकी संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। परियोजना में 5 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलना प्राप्त होगा। मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित हो रहे भोपाल क्षेत्र को इस परियोजना से बहुत लाभ होगा। यह परियोजना प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चल रहे मेक इन इंडिया मिशन के भाव का प्रकटीकरण है। यहां बनने वाले वंदे भारत-अमृत भारत और मेट्रो ट्रेनों के कोच से सम्पूर्ण भारतीय रेल व्यवस्था के नए युग का सूत्रपात होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कहा कि न सिर्फ राजधानी क्षेत्र बल्कि प्रदेश के विकास को गति देने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना से निकट स्थित औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप भी लाभान्वित होगा। विकास की नई इबारत लिखेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेल कोच फैक्ट्री को प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सशक्त नेतृत्व में मध्यप्रदेश सहित भारत के अन्य राज्यों के निवदेशकों को आमंत्रित किया जा रहा है। इस क्रम में कुछ माह पूर्व बैंगलोर में बीईएमएल संस्थान के भ्रमण के दौरान रायसेन जिले में रेल कोच फैक्ट्री की स्थापना के संबंध में निर्णय लिया गया। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य के अनुरूप कार्य करेगा संयंत्र ‘ब्राह्मा’ संयंत्र पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करेगा। संयंत्र में उपयोग होने वाली अधिकांश तकनीक और सामग्री देश में विकसित व निर्मित की जाएगी, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी। यह परियोजना प्रदेश को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इस संयंत्र के निर्माण में पर्यावरणीय मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यहां शून्य तरल अपशिष्ट प्रणाली, सौर एवं नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, वर्षा जल संचयन और हरित लैंडस्केपिंग को अपनाया जाएगा। निर्माण में पुनर्नवीनीकृत और टिकाऊ सामग्री का प्रयोग करते हुए इसे हरित फैक्ट्री मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। परियोजना का प्रारंभिक उत्पादन क्षमता 125 से 200 कोच प्रतिवर्ष होगी, जिसे पांच वर्षों में बढ़ाकर 1,100 कोच प्रतिवर्ष किया जाएगा। इस इकाई के संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में उच्च स्तरीय औद्योगिक रोजगार उपलब्ध होंगे। साथ ही, यहां विकसित होने वाली तकनीकी क्षमताएं प्रदेश को हाई-स्पीड रेल और मेट्रो निर्माण के वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाएंगी।  

हाईवे के अवैध कटों पर होगी सख्त कार्रवाई, रोड एक्सीडेंट की घटनाएं घटेंगी

जबलपुर हाइवे पर ढाबा, होटल, पेट्रोल पंप के आसपास डिवाइडरों के अवैध कट में कहीं से भी बाइक, कार, ई रिक्शा, ऑटो दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित रोड सेफ्टी कमेटी इन अवैध कट की हकीकत देख चुकी है। कमेटी के निर्देश पर अब एनएचएआई हाईवे पर डिवाईडर के सभी अवैध कट बंद करेगी। दो दिन में लखनादौन से धूमा मार्ग पर 6 अवैध कट बंद किए गए हैं। इस सम्बंध में सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी, नगर निगम व अन्य निर्माण एजेंसी के अधिकारियों, तकनीकी टीम, जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक करेगी। कुम्भ के दौरान हुए थे सर्वाधिक एक्सीडेंट प्रयागराज में कुंभ के दौरान जबलपुर-नागपुर हाईवे, जबलपुर-कटनी हाईवे पर बड़ी संख्या में सडक़ दुर्घटनाएं हुई थीं। सिहोरा में हुई तीन बड़ी दुर्घटनाओं में 15 के लगभग लोगों को मौत हो गई थी। जिले में उस दौरान एक महीने के अंदर 20 के लगभग बड़ी सडक़ दुर्घटना हुई थीं। जिनमें 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इन सडक़ दुर्घटनाओं में ज्यादातर का कारण हाईवे के डिवाइडर में ढाबा, होटल व अन्य प्रतिष्ठानों की ओर से लगा दिए गए कट थे। एनएचएआई की टीम ने हाईवे पर डिवाइडर के 50 के लगभग कट बंद कर दिए थे, जो कट छूट गए थे उन्हें अब बंद किया जा रहा है। हाईवे पर डिवाइडर में जो कट बचे हुए हैं उन्हें बंद किया जा रहा है। तैयारी इस तरह की है कि एक सप्ताह में सभी बचे हुए कट बंद कर लिए जाएंगे।- अमृतलाल साहू, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई गोसलपुर, गांधी ग्राम की ओर भी हाईवे पर डिवाइडर में कई अवैध कट हैं, ये ही हाल पनागर छोर पर भी है। एनएचएआई ने हाईवे पर डिवाइडर के कई अवैध कट हैं। एनएचएआई ने एक सप्ताह में 15 अगस्त तक इन अवैध कट को बंद करने का निर्णय लिया है।

इंदौर के लिए 737 करोड़ का केबल कार प्रोजेक्ट मंजूर, दिल्ली को प्रस्ताव सौंपा गया

इंदौर इंदौर में केबल कार से सफर करने का सपना जल्द हकीकत बन सकता है। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) द्वारा कराए गए फिजिबिलिटी सर्वे की रिपोर्ट नेशनल हाइवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) को सौंप दी गई है। NHLML ने इस प्रस्ताव को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, दिल्ली को अनुमोदन और बजट आवंटन के लिए भेज दिया है। परियोजना की मुख्य बातें कुल लागत: करीब 737 करोड़ रुपये कुल लंबाई: 11 किमी (दो रूट) शुरुआत: 2028 से अनुमानित यात्री: 2028 में प्रतिदिन 29,900, 2068 तक 1.95 लाख पहला रूट: चंदन नगर से शिवाजी वाटिका (6.24 किमी) लागत: 369.32 करोड़ रुपये स्टेशन: चंदन नगर, लाबरिया भेरू, यशवंत निवास रोड गुरुद्वारा, सरवटे, शिवाजी वाटिका यात्री अनुमान (2028): 11,700 प्रतिदिन दूसरा रूट: रेलवे स्टेशन से विजय नगर (4.7 किमी) लागत: 367.68 करोड़ रुपये स्टेशन: रेलवे स्टेशन, मालवा मिल, पाटनीपुरा, विजय नगर यात्री अनुमान (2028): 18,200 प्रतिदिन भविष्य का यात्री अनुमान     2038: 47,400 प्रतिदिन     2048: 78,200 प्रतिदिन     2068: 1.95 लाख प्रतिदिन सेक्शन विवरण     चंदन नगर – शिवाजी वाटिका: 3 सेक्शन (1.74 किमी, 1.93 किमी, 2.59 किमी)     रेलवे स्टेशन – विजय नगर: 2 सेक्शन (2.08 किमी, 2.62 किमी)

भोपाल की यूनिवर्सिटी में तैनात होगी पासपोर्ट वैन, घर के पास ही बनेगा पासपोर्ट

भोपाल मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT), भोपाल के छात्रों, स्टाफ और आम नागरिकों के लिए पासपोर्ट बनवाना अब और आसान हो गया है। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, भोपाल की ओर से पासपोर्ट सेवा प्रोजेक्ट (पीएसपी) वैन को मैनिट कैंपस में तैनात किया जा रहा है। यह वैन मैनिट के फैकल्टी गेस्ट हाउस परिसर में एक महीने के लिए अपनी सेवाएं देगी। समय और यात्रा खर्च की होगी बचत जरूरत और जन सहभागिता के आधार पर इसकी अवधि आगे बढ़ाई जा सकती है। इस सेवा का लाभ छात्रों, संस्थान के कर्मचारियों के साथ आम जनता भी ले सकेगी। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को इंटर्नशिप, उच्च शिक्षा या विदेश में रोजगार जैसे भविष्य के अवसरों के लिए पासपोर्ट संबंधी औपचारिकताएं आसानी से पूरी करने में मदद करना है। साथ ही, इससे समय और यात्रा खर्च की भी बचत होगी।    मैनिट प्रशासन ने की अपील मैनिट प्रशासन ने सभी छात्रों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों से इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। अधिक जानकारी के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, भोपाल द्वारा जारी पत्र को देखा जा सकता है। यह सुविधा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन संचालित राष्ट्रीय महत्व के संस्थान मैनिट में दी जा रही है।

बीपीएससी की भर्ती: असिस्टेंट प्रोफेसर के 539 पदों पर आवेदन प्रक्रिया 18 अगस्त से शुरू

पटना बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत सह-प्राध्यापक के 539 पदों पर बहाली करेगा। ये रिक्तियां राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय में विभिन्न विषयों में को भरने के लिए निकाली गई हैं। ऑनलाइन आवेदन की तिथि 18 अगस्त से शुरू होगी। अभ्यर्थी 12 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं। बहाली असैनिक अभियंत्रण, यांत्रिक अभियंत्रण, विद्युत अभियंत्रण, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग की जाएंगी। इसी तरह कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग की रिक्तियों को भरा जाएगा। बीपीएससी करेगा प्राचार्य के 26 पदों पर बहाली इसके अलावा, बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC Jobs 2025) ने विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में प्राचार्य के 26 पदों के लिए आवेदन मांगे हैं। राजकीय पॉलिटेक्निक व राजकीय महिला पॉलिटेक्निक संस्थानों में यह बहाली की जाएगी। 12 अगस्त से ऑनलाइन आवेदन शुरू हो जाएंगे। नौ सितंबर तक आवेदन किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए आयोग की वेबसाइट पर संपर्क किया जा सकता है।  

2019 में देश में मधुमेह की बढ़ती संख्या, 45+ आयु वर्ग में हर पांचवां प्रभावित

नई दिल्ली भारत में 2019 में 45 वर्ष और उससे अधिक आयु का लगभग हर पांचवां व्यक्ति मधुमेह से पीड़ित था और हर पांच में से दो व्यक्तियों को अपने स्वास्थ्य संबंधी इस स्थिति के बारे में संभवतः पता ही नहीं था। भारत के वयस्कों पर किए गए एक अध्ययन के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। 'द लांसेट ग्लोबल हेल्थ' में प्रकाशित निष्कर्षों से यह भी पता चलता है कि जैसे-जैसे देश की आबादी तेजी से वृद्ध होती जाएगी, मध्यम आयु वर्ग और वृद्धों में मधुमेह के मामले बढ़ेंगे। यह शोध करने वालों में मुंबई और अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान के शोधकर्ता भी शामिल थे। उन्होंने पाया कि मधुमेह को लेकर जागरुक 46 प्रतिशत लोगों ने रक्त शर्करा के स्तर पर नियंत्रण पा लिया और लगभग 60 प्रतिशत लोग उसी वर्ष अपने रक्तचाप को नियंत्रित करने में सक्षम रहे। शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि छह प्रतिशत लोगों ने हृदय संबंधी रोग के जोखिम को कम करने के लिए 'लिपिड' नियंत्रित करने वाली दवा ली। 'लान्गिटूडनल एजिंग स्टडी इन इंडिया' शीर्षक वाले इस अध्ययन के तहत 2017 से 2019 के दौरान 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 60,000 वयस्कों का सर्वेक्षण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि चयापचय संबंधी समस्या (लगभग 20 प्रतिशत) पुरुषों और महिलाओं में समान थी और शहरी क्षेत्रों में यह ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में दोगुनी थी। शोधकर्ताओं ने कहा कि इसके अलावा, जो राज्य आर्थिक रूप से अधिक विकसित थे, उनमें मधुमेह के मामले अधिक रहे। उन्होंने कहा, ''हमारा अध्ययन भारत में मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध वयस्कों में 'ग्लाइकेटिड हीमोग्लोबिन' सांद्रता का उपयोग करके मधुमेह को नियंत्रित करने, इसका उपचार करने, इसकी व्यापकता का पता लगाने, इसे लेकर जागरूकता फैलाने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर अद्यतन आंकड़े मुहैया कराता है।'' टीम ने पाया, ''45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग हर पांच में से एक व्यक्ति को मधुमेह था।' परिणाम बताते हैं कि ''आने वाले वर्षों में मधुमेह से पीड़ित मध्य आयु वर्ग और वृद्ध वयस्कों की कुल संख्या बढ़ेगी, भले ही आयु-विशिष्ट मधुमेह के प्रसार में वृद्धि को रोका जा सके।''  

विदेशी कृषि आयात और भारतीय किसान: खतरे और समाधान के आंकड़े

नई दिल्ली  भारत एक ऐसा देश है जहां खेती-बाड़ी हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है. करीब 44 प्रतिशत लोग खेती से अपनी जीविका चलाते हैं. हमारे किसान दिन-रात मेहनत करके देश का पेट भरते हैं, लेकिन उनकी जिंदगी आसान नहीं है. एक बड़ी समस्या है विदेशी कृषि और डेयरी उत्पादों का आयात, खासकर अमेरिका जैसे देशों से. वहां की सरकार अपने किसानों को इतनी बड़ी सब्सिडी देती है कि उनके उत्पाद बहुत सस्ते हो जाते हैं. अगर ये सस्ते उत्पाद हमारे बाजार में बिना किसी रोक-टोक के आ गए, तो हमारे किसानों का बहुत नुकसान होगा. अमेरिका में एक किसान को सब्सिडी अतुल ठाकुर के अनुसार, 2022 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अमेरिका से आने वाले खाद्य उत्पादों पर 40.2 प्रतिशत और पूरी दुनिया से आयात होने वाले खाद्य उत्पादों पर औसतन 49 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया था. यह शुल्क इसलिए जरूरी है ताकि विदेशी उत्पादों की कीमतें हमारे बाजार में ज्यादा रहें और हमारे किसानों के उत्पादों को बिकने का मौका मिले. अमेरिका में एक किसान को औसतन 61,000 डॉलर की सब्सिडी मिलती है, जबकि हमारे किसान को सिर्फ 282 डॉलर. इस वजह से अमेरिका के मक्का, सोयाबीन, गेहूं और डेयरी उत्पाद बहुत सस्ते दामों पर बिकते हैं. हमारे किसानों के लिए इनसे मुकाबला करना मुश्किल है, क्योंकि उनकी लागत ज्यादा आती है. फसलों की पैदावार कम भारत में ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास औसतन सिर्फ 1.08 हेक्टेयर जमीन होती है. दूसरी तरफ, अमेरिका में एक किसान के पास औसतन 187 हेक्टेयर जमीन होती है. हमारे यहां खेती में मेहनत ज्यादा लगती है, क्योंकि ज्यादातर काम हाथ से या छोटी मशीनों से होता है. साथ ही, हमारी फसलों की पैदावार भी कम होती है, जिससे उत्पादन की लागत बढ़ जाती है. किसानों की कमाई कम होने का खतरा  अगर सस्ते विदेशी उत्पाद बाजार में आ गए, तो स्थानीय उत्पादों की कीमतें गिरेंगी. इससे किसानों की कमाई कम होगी और उनकी जिंदगी और मुश्किल हो जाएगी. इतना ही नहीं, इससे देश की खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है, क्योंकि हमारा देश अपनी जरूरतों के लिए खुद की फसलों पर निर्भर है. एक और बड़ी बात है हमारी संस्कृति और धर्म से भी जुड़ी हुई है. अमेरिका में कुछ उत्पादों में अक्सर मांस के मसाले का इस्तेमाल होता है, जो भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं को आहत कर सकता है. कई भारतीय लोग इस बात को लेकर बहुत सजग हैं कि उनके खाने में ऐसी चीजें न हों. अगर अमेरिकी डेयरी उत्पाद बिना सख्त नियमों के यहां आए, तो लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं. इसके अलावा, अमेरिका से आने वाले मक्का और सोयाबीन ज्यादातर जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) होते हैं. भारत में जीएम फसलों की खेती की इजाजत नहीं है, क्योंकि इन्हें इंसान के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरनाक माना जाता है. अगर ये आयातित फसलें हमारी फसलों के साथ मिल गईं, तो हमारी जैव विविधता को नुकसान हो सकता है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर कई बार बात हुई, लेकिन यह कृषि और डेयरी उत्पादों पर आकर अटक जाती है. अमेरिका चाहता है कि भारत अपने बाजार को उसके दूध पाउडर, चीज़, सेब, अखरोट, मक्का और सोयाबीन जैसे उत्पादों के लिए खोले. वह आयात शुल्क कम करने और जीएम फसलों पर नियम ढीले करने की मांग करता है. लेकिन भारत इसके लिए तैयार नहीं है, क्योंकि इससे करोड़ों छोटे किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी. भारत का डेयरी उद्योग ज्यादातर असंगठित है, और अमूल जैसी सहकारी संस्थाएं करोड़ों किसानों की कमाई का सहारा हैं. अमेरिकी डेयरी उत्पादों के सामने ये टिक नहीं पाएंगे. अन्य देशों का अनुभव दूसरे देशों के अनुभव भी यही बताते हैं. मैक्सिको ने 1994 में अमेरिका के साथ नाफ्टा समझौता किया, जिससे सस्ते अमेरिकी मक्का और सोयाबीन वहां आए. लाखों मैक्सिकन किसानों को खेती छोड़नी पड़ी और बेरोजगारी बढ़ी. चिली और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी यही हुआ. वहां अमेरिकी उत्पादों की बाढ़ से स्थानीय किसान कमजोर पड़ गए. भारत नहीं चाहता कि ऐसा यहाँ भी हो. भारत का रुख साफ है कि वह अपने किसानों और डेयरी उद्योग को बचाना चाहता है. अमूल और स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन विदेशी डेयरी उत्पादों के लिए बाजार खोलने का विरोध करते हैं. विशेषज्ञ कहते हैं कि कुछ अमेरिकी उत्पादों को सीमित मात्रा में अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते उनकी साफ लेबलिंग हो कि वे किस चारे से बने हैं. भारत भी अपने जैविक खाद्य और मसालों को अमेरिका में निर्यात करने की छूट चाहता है. लेकिन डेयरी और जीएम उत्पादों पर भारत का रुख सख्त है. कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. सस्ते आयात से किसानों की आय घटने का खतरा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकता है. 2020-21 के किसान आंदोलन ने दिखाया कि किसानों के हितों को नजरअंदाज करना सरकार के लिए जोखिम भरा हो सकता है. इसलिए, सरकार अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में अपने किसानों को प्राथमिकता दे रही है. आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के तहत स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना जरूरी है. इससे न सिर्फ किसानों की जिंदगी बेहतर होगी, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान भी बनी रहेगी.  

भोपाल में हमीदिया अस्पताल, स्कूल और कॉलेज के नाम बदलने की तैयारी तेज

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अलग-अलग स्थानों के नाम को बदलने की प्रक्रिया तेज हो गई है। निगम की बैठक में नाम को बदलने की प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब इस सरकार को भेजा जा रहा है। निगम के प्रस्ताव के बाद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने प्रस्ताव कमिश्नर हरेंद्र नारायण को भेज दिया है। अब वह इस प्रस्ताव को शासन को भेजने की तैयारी कर रहे हैं। आपको बता दें कि भोपाल में कुछ स्थानों के नाम बदलने की प्रक्रिया चल रही है इनमें हमीदिया अस्पताल , कॉलेज और स्कूल के नाम को बदल जाना है। दरअसल, शहर में नाम को बदलने के लिए पहला प्रयास नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने किया था। उन्होंने जून महीने में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था और भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह के नाम से संचालित हमीदिया अस्पताल, स्कूल और कॉलेज का नाम बदलकर राष्ट्र भक्तों के नाम पर किए जाने की अपील की थी। स्कूल, अस्पताल के नाम बदलने का प्रस्ताव इससे पहले भोपाल में कुछ स्थानों के नाम बदले गए हैं। सितंबर 2023 में हमीदिया रोड का नाम बदलकर गुरु नानक मार्ग किया गया था। यह कार्य नगर निगम द्वारा कर दिया गया था। लेकिन स्कूल, कॉलेज और अन्य स्थानों के नाम बदलने का अधिकार नगर निगम को नहीं है। इसीलिए नगर निगम ने प्रस्ताव पास करवाया है और इसे नगर निगम कमिश्नर को भेज दिया है। नगर निगम की बैठक में मिली मंजूरी 24 जुलाई को नगर निगम परिषद की बैठक हुई थी। इसमें भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था। तब इसके बाद जमकर हंगामा हुआ था। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा था कि नवाब हमीदुल्लाह गद्दार थे, उनका आरोप था कि नवाब ने भारत के आजाद होने के बाद भी 2 साल तक भोपाल रियासत का विलय नहीं होने दिया। वे इसे पाकिस्तान में शामिल कराना चाहते थे। वहीं, कांग्रेस ने आरोप पर पलटवार करते हुए कहा था कि यह निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। इतिहास गवाह है कि नवाब हमीदुल्लाह ने इन संस्थान की स्थापना के लिए अपने निजी संपत्ति दान में दी थी।