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तालिबान-पाकिस्तान मुलाकात पर अमेरिकी ब्रेक, विदेश मंत्री को सीमा पर रोका

वाशिंगटन  अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक हलचल बढ़ गई है। अमेरिका ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी  को पाकिस्तान जाने की अनुमति नहीं दी। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब तालिबान सरकार, पाकिस्तान और चीन के बीच संभावित गठबंधन की चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि वाशिंगटन का यह रुख इसी रणनीतिक चिंता का नतीजा है। पाकिस्तान ने दावा किया है कि मुत्ताकी का 4 अगस्त को इस्लामाबाद दौरा तय  था, ताकि काबुल और इस्लामाबाद के रिश्तों में सुधार लाने पर चर्चा हो सके। इससे पहले, चीन की मध्यस्थता से पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार  काबुल गए थे। उसी क्रम में मुत्ताकी को अगली बैठक के लिए पाकिस्तान आना था। डॉन अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, मुत्ताकी पर अब भी  अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध  लागू हैं और उन्हें विदेश यात्रा के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति से विशेष छूट लेनी होती है। इस बार अमेरिका ने कथित तौर पर इस छूट को मंजूरी देने से इनकार कर दिया और अंतिम समय तक फैसला टालते रहे। हाल के महीनों में पाकिस्तान और तालिबान सरकार के बीच कई बार सीमा पर गोलीबारी हुई है। पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान,  तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पनाह देता है, जो खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी हमले करता है और फिर अफगानिस्तान भाग जाता है। तालिबान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता  शफकत अली खान ने अमेरिका की भूमिका की सीधी पुष्टि नहीं की, बल्कि कहा कि "कुछ प्रक्रियात्मक मुद्दों" पर काम चल रहा है और यात्रा की तारीख तय नहीं हुई है।वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा-"हम अफवाहों पर टिप्पणी नहीं करते।"   

कश्मीर घाटी में पहली बार गूंजी मालगाड़ी की सीटी, रसद और विकास को मिले पंख

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर के परिवहन नेटवर्क को एक और बढ़ावा देते हुए, भारतीय रेलवे ने शनिवार को पंजाब के रूपनगर से कश्मीर के अनंतनाग तक पहली बार एक मालगाड़ी चलाई। सीमेंट से लदी यह मालगाड़ी शनिवार दोपहर करीब 12 बजे कश्मीर घाटी के अनंतनाग गुड्स शेड पहुँची, जो कश्मीर क्षेत्र को राष्ट्रीय मालगाड़ी नेटवर्क से जोड़ने में एक बड़ी उपलब्धि है। यह मालगाड़ी इस साल जून में 272 किलोमीटर लंबे उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL), या कश्मीर लाइन के पूरे हिस्से पर यात्री परिचालन के सफल शुभारंभ के दो महीने बाद आई है। इस मालगाड़ी संपर्क से देश भर के बाजारों तक पहुँच आसान होने से कश्मीरी फल और हस्तशिल्प उद्योग को नई जान मिलने की उम्मीद है। रेल मंत्रालय ने एक बयान में इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा, "कश्मीर घाटी में मालगाड़ी का आगमन रसद और आर्थिक विकास के एक नए युग की शुरुआत करता है।" मंत्रालय ने कहा, "(यह) केवल एक रसद उपलब्धि नहीं है, बल्कि प्रगति और एकीकरण का एक सशक्त प्रतीक है, जो एक अधिक संबद्ध और समृद्ध कश्मीर घाटी का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।" अधिकारियों ने बताया कि मालगाड़ी में बोगी से ढके वैगनों में 1,380 मीट्रिक टन सीमेंट भरा गया था, जिनका उपयोग बैग में बंद सामान ढोने के लिए किया जाता है। सीमेंट का ऑर्डर कश्मीर घाटी में सड़कों, पुलों, सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे और आवासीय भवनों सहित विभिन्न निर्माण परियोजनाओं में शामिल निजी संस्थाओं द्वारा दिया गया था। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा, "उद्घाटन मालगाड़ी में 21 बीसीएन वैगन सीमेंट भरा गया था। लगभग 600 किलोमीटर की यह यात्रा आज 18 घंटे से भी कम समय में नवनिर्मित अनंतनाग गुड्स शेड पर समाप्त हुई। यह आयोजन विशेष रूप से इस सुविधा के लिए पहली बार सीमेंट लदान का प्रतीक है, जो कश्मीर क्षेत्र में रसद और आर्थिक विकास के एक नए युग का समर्थन करने के लिए इसकी तत्परता को दर्शाता है।" हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया, "इस सीमेंट परिवहन के लिए गुरुवार रात करीब 11 बजे उत्तर रेलवे से अनुरोध किया गया था। इसके बाद रेक की व्यवस्था की गई और शुक्रवार शाम 6 बजे तक लोडिंग पूरी हो गई। ट्रेन शाम करीब 7 बजे पंजाब के रूपनगर स्थित जीएसीएल सुविधा केंद्र से रवाना हुई। मालगाड़ी को इलेक्ट्रिक WAG-9 इंजन से ढोया गया और शनिवार दोपहर करीब 12 बजे कश्मीर पहुँच गई।" अनंतनाग में मालगाड़ी का आना जम्मू-कश्मीर के व्यापारियों के लिए अच्छी खबर है। इससे घाटी में आने वाले माल की परिवहन लागत कम होगी, साथ ही यह कश्मीर के फल उद्योग, खासकर चेरी, स्ट्रॉबेरी और सेब की कुछ किस्मों जैसे कम समय तक खराब होने वाले फलों के लिए, एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।   देश की दूसरी सबसे बड़ी फल मंडी, सोपोर फल मंडी के अध्यक्ष फैयाज अहमद मलिक ने कहा, "इससे फल उत्पादकों को फायदा होगा क्योंकि इससे परिवहन में लगने वाला समय और लागत दोनों कम हो जाएगी।" फिलहाल, दिल्ली तक फलों के एक डिब्बे की ढुलाई में 100 रुपये या उससे ज़्यादा का खर्च आता है। इस ट्रेन से हमें उम्मीद है कि यह घटकर 30 रुपये प्रति डिब्बा रह जाएगा। इसी तरह, हमें उम्मीद है कि परिवहन का समय भी 6 दिन से घटकर 30 घंटे रह जाएगा। हालांकि, मलिक ने कहा कि मालगाड़ी का लाभ फल उत्पादकों को तभी मिलेगा जब देश के विभिन्न फल मंडियों जैसे पश्चिम बंगाल, अहमदाबाद और पूर्वोत्तर के लिए सीधी ट्रेनें चलेंगी। यह मालगाड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 6 जून को यूएसबीआरएल के 63 किलोमीटर लंबे कटरा-सांगलदान खंड का उद्घाटन करने और श्रीनगर तथा कटरा के बीच विशेष रूप से डिज़ाइन की गई वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के दो महीने बाद कश्मीर आई है। इस परियोजना के पूरा होने के साथ ही कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली एक परियोजना पूरी हो गई है। 272 किलोमीटर लंबी यूएसबीआरएल तीन भागों में विभाजित है – 25 किलोमीटर उधमपुर-कटरा, 111 किलोमीटर कटरा-बनिहाल और 136 किलोमीटर बनिहाल-बारामूला लाइन। जम्मू में दो खंड उधमपुर-कटरा और कश्मीर में बनिहाल-बारामूला का निर्माण उत्तर रेलवे द्वारा किया गया था, जो भारतीय रेलवे का सबसे बड़ा क्षेत्र है, और इसे तीन चरणों में चालू किया गया था – 2009 में 118 किलोमीटर काजीगुंड-बारामूला, 2013 में 18 किलोमीटर बनिहाल-काजीगुंड और 2014 में 25 किलोमीटर उधमपुर-कटरा।

फिल्म वॉर 2 से ऋतिक और एनटीआर का नया एक्शन प्रोमो रिलीज़

मुंबई,  अयान मुखर्जी के निर्देशन में बनी यशराज फिल्म्स की 'वॉर 2' का फैंस लंबे समय से बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब यह 14 अगस्त को थिएटर्स में धूम मचाने को तैयार है। 'वॉर 2' साल 2025 की मच-अवेटेड फिल्मों में से एक हैं और इसकी इंडिया में एडवांस बुकिंग भी शुरू हो चुकी है। मेकर्स ने इसका ऐलान एक दिलचस्प प्रोमो के साथ किया है, जिसमें ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर धुआंधार एक्शन करते नजर आ रहे हैं। फिल्म 'वॉर 2' को आदित्य चोपड़ा ने प्रोड्यूस किया है और यह वाईआरएफ के स्पाई यूनिवर्स की छठी फिल्म है। इस यूनिवर्स की अभी तक की सभी फिल्में हिट रही हैं। कुछ ऐसी ही उम्मीद 'वॉर 2' से लगाई जा रही है। इसमें हैरतअंगेज एक्शन के साथ कहानी में जबरदस्त ट्विस्ट भी देखने को मिलेंगे। 'वॉर 2' में ऋतिक और जूनियर एनटीआर एक-दूसरे से भिड़ते नजर आएंगे, जिसकी झलक इस नए प्रोमो में भी है। 'वॉर 2' के नए प्रोमो के साथ एडवांस बुकिंग का ऐलान 'वॉर 2' के नए प्रोमो में पहले ऋतिक रोशन की एंट्री होती है और फिर जूनियर एनटीआर की। दोनों का ही खूंखार एक्शन अवतार देखने को मिल रहा है। बैकग्राउंड में आवाज आ रही है- एक आखिरी बार नो रुल्स, नो रॉन्ग। सिर्फ तू और मैं। जो जिंदा रहा वही फर्स्ट और सेकंड का चैप्टर हमेशा के लिए क्लोज।' फिर ऋतिक रोशन कहते हैं- चल। इसके साथ ही दोनों के बीच धुआंधार एक्शन शुरू हो जाता है। 'वॉर' ने कितनी कमाई की थी? 'वॉर 2' साल 2019 में आई इस नाम की फिल्म का सीक्वल है। 'वॉर' को सिद्धार्थ आनंद ने डायरेक्ट किया था। 'सैकनिल्क' के मुताबिक, 'वॉर' ने वर्ल्डवाइड 471 करोड़ रुपये और इंडिया में 375 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन किया था। वहीं हिंदी में इसका इंडिया में नेट कलेक्शन 318.01 करोड़ रुपये था। 'वॉर 2' की पहले दिन की एडवांस बुकिंग, टिकटों की बिक्री और कमाई 'वॉर 2' की एडवांस बुकिंग की बात करें, तो इसकी आधिकारिक तौर पर शुरुआत होने से पहले ही इसने पहले दिन की प्री-सेल्स में कुछ ही घंटो में 9,000 से अधिक टिकटों की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया। 'कोईमोई' की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले दिन सुबह 10 बजे तक 'वॉर 2' के 9300 हजार से अधिक टिकट बिक गए थे। कमाई के लिहाज से देखें तो इसने ब्लॉक सीटों को छोड़कर अन्य टिकटों की बिक्री से 36 लाख से ज्यादा की कमाई कर ली है।  

मुश्किल नहीं है मोतियाबिंद का इलाज

वृद्धावस्था में आंखों की रोशनी वैसे भी कम होने लगती है और एक अवस्था ऐसी आती है एकदम से दिखना बन्द हो जाता है। इस अवस्था में परेशानी का प्रारम्भ होता है। भारत वर्ष में अन्धत्व के प्रमुख कारणों में मोतिया बिन्द प्रमुख है। अस्सी प्रतिशत अन्धत्व का कारण मोतियाबिन्द नामक बीमारी है। मोतियाबिन्द एक रोग है जिसका संबंध हमारी आयु से होता है। वृद्धावस्था में आमतौर से मोतियाबिन्द हो जाता है। हमारी आंख में एक पारदर्शी लेन्स होता है। यह लेन्स धुंधला पड़ जाता है और अपनी पारदर्शिता खो देता है। इसी को मोतियाबिन्द कहते हैं। मोतियाबिन्द पुरूष, स्त्री किसी को भी वृद्धावस्था में हो सकता है। इसका कोई विशेष कारण नहीं है लेकिन अत्यधिक धूम्रपान, मदिरा पान, निरन्तर तेज रोशनी में कार्य करने या आंख में चोट लगने से यह रोग कम उम्र मंछ भी हो सकता है। मधुमेह के रोगियों को भी यह कम उम्र में हो सकता है। इसलिए चालीस वर्ष की उम्र के बाद आंखों की जांच के प्रति सावधानी बरतना नितान्त आवश्यक है। यदि आंखों की जांच उसके बाद होती रहे तो अच्छा है। मोतियाबिन्द एक ऐसा रोग है जिसे रोकने के लिए कोई उपचार, सावधानियां नहीं है इसलिए मोतियाबिन्द को उम्र के साथ रोका नहीं जा सकता। मोतियाबिन्द की पदचाप:- मोतियाबिन्द आपको उम्र के साथ आकर घेरे इसके पूर्व उसकी पदचाप सुन लीजिए। मोतियाबिन्द बिना किसी शोर गुल के धीरे-धीरे बिना दर्द के आता है। इसके आगमन पर कम दिखाई देने लगता है। दूर और पास की वस्तु का भेद करने में दिक्कत आती है। पुतली का रंग बदल कर धुंधला अथवा सफेद हो जाता है। कभी-कभी एक वस्तु दो वस्तु के रूप में दिखाई पड़ती है। रंगों के पहचानने में परेशानी आती है। ये संकेत यदि दिखाई दें तो यह समझ लेना चाहिए कि मोतियाबिन्द रोग का आगमन हो गया है। मोतियाबिन्द को ठीक कैसे करें:- मोतियाबिन्द का दवा के रूप में कोई उपचार नहीं है। इसका एकमात्र इलाज एक छोटा सा साधारण आपरेशन है। इस आपरेशन में आंख पर आ गई झिल्ली को (लेंस) हटा देने से पूर्ववत दिखाई देने लगता है। यही एक मात्र हल है। हमारे देश में आपरेशन शब्द का ही बड़ा डर है। हम समझते हैं कि आपरेशन में सदा खतरा रहता है। इसलिए इस भय के कारण निरक्षण ग्रामीण जन आपरेशन को टालते रहते हैं। आपरेशन टालने का खतरा:- मोतियाबिन्द आपरेशन एक छोटा सा साधारण आपरेशन है। लाखों लोग भारत में यह आपरेशन करा चुके हैं। हमारे ग्राम, शहर, मोहल्ले में ऐसे व्यक्ति मिल सकते हैं जो मोतियाबिन्द का आपरेशन कराकर देखने में सक्षम हो गए हैं। अतः मोतियाबिन्द के आपरेशन में कोई खतरा नहीं है, यह हमें समझ लेना चाहिए। लेकिन मोतियाबिन्द का आपरेशन यदि हम नहीं कराएं तो अपारदर्शी लेन्स के न हटाने से व्यक्ति अंधा हो जाता है। इस खतरे से बचने के लिए जैसे ही पता चले कि मोतियाबिन्द है, आपरेशन के लिए स्वयं अस्पताल जाकर जांच करा लेना चाहिए और आपरेशन भी करा लेना सर्वोत्तम होगा। आपरेशन का समय:- उत्तर भारत में यह अन्ध विश्वास व्याप्त है कि आपरेशन के लिए उचित समय शीत ऋतु है इसलिए अक्तूबर से फरवरी तक अधिकतम मोतियाबिन्द के आपरेशन इस अवधि में होते हैं किन्तु यह एक भ्रम है। यह इतना छोटा और साधारण आपरेशन होता है कि किसी भी समय इसे कराया जा सकता है। सम्पूर्ण दक्षिण भारत में मोतियाबिन्द के आपरेशन साल भर बिना किसी डर के होते हैं। अब उत्तर भारत में भी अन्ध विश्वास टूट रहा है किन्तु अभी व्यापक रूप से ग्रामीण ठंड में आपरेशन को ही उत्तम मान रहे हैं किन्तु वस्तु स्थिति यह है कि मोतियाबिन्द का आपरेशन वर्ष भर में कभी भी कराया जा सकता है। यदि मोतियाबिन्द के आपरेशन में विलम्ब होता है तो लाइलाज अन्धापन अवश्य हो सकता है। जैसे ही कम दिखना प्रारंभ हो, मोतियाबिन्द का आपरेशन कराने के लिए अस्पताल जाना चाहिए। एक समय में एक ही आंख का आपरेशन किया जाता है। जो आंख ज्यादा प्रभावित होती है उसका आपरेशन सबसे पहले किया जाता है। जो आंख ज्यादा प्रभावित होती है उसका आपरेशन सबसे पहले किया जाता है। जब यह आंख पूर्णतया दृष्टि पा जाती है तब ही दूसरी आंख का आपरेशन होता है। मोतियाबिन्द का आपरेशन अत्यन्त साधारण आपरेशन है। इसमें कोई दर्द और कष्ट नहीं है। आपरेशन करते वक्त व्यक्ति को बेहोश नहीं किया जाता। कोई खर्च नहीं:- इस आपरेशन के लिए शासकीय अस्पताल, मेडिकल कालेजों में निःशुल्क व्यवस्था की गई है कुछ सचल इकाइयां भी ग्रामों में जाकर इस आपरेशन की व्यवस्था करते हैं। भारत सरकार ने स्वास्थ्य के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अंधत्व निवारक कार्यक्रम को सम्मिलित कर लिया है। इसलिए इस आपरेशन के लिए हर सरकारी अस्पताल में निःशुल्क सुविधा की गई है। इतना ही नहीं, सम्पूर्ण देश में स्वयं सेवी संगठन नेत्र शिविर भी ग्रामों में आयोजित करते हैं जिसमें अनुभवी डाक्टर ग्राम में ही नेत्रों का आपरेशन कर देते हैं। इन शिविरों में न केवल मोतियाबिन्द का निःशुल्क आपरेशन होता है वरन भोजन, दवा व, चश्मे भी संगठन निःशुल्क वितरण करते हैं। इन शिविरों में रोगी को पांच दिन ठहरना पड़ता है। आपरेशन हो जाने के 4-6 सप्ताह बाद आंख की पुनः जांच करानी चाहिए। रोगी की इस जांच का बड़ा महत्व है। आपरेशन के बाद की सावधानियां:- सफल आपरेशन के बाद भी रोगी को एक माह तक सावधानी रखनी आवश्यक है। नेत्र सर्जन जो दवा देते हैं, उसे नियमित रूप से लेना, आंख को हरी पट्टी से ढक कर रखना, तेज रोशनी, धुंआ, धूल से आंख को बचाना बहुत आवश्यक है। इतना ही नहीं, यदि कोई शिकायत हो तो तत्काल डाक्टर को बताना चाहिए और सलाह अनुसार कार्य करना चाहिए। मोतियाबिन्द के आपरेशन के बाद दो सप्ताह तक सिर न धोने, भारी परिश्रम न करने, अधिक झुकने, मुड़ने के कार्य न करने की सलाह डाक्टर देते हैं। इस आपरेशन वाली आंख को छूना, दबाना, खतरनाक रहता है। आप क्या कर सकते हैं?:- मोतियाबिन्द आपरेशन के इस कार्य में उन व्यक्तियों की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है जिन्हें मोतियाबिन्द नहीं हुआ और यही से आपके सेवा कार्य का प्रारम्भ हो जाता है। आप इस सेवा कार्य में निम्नलिखित महत्वपूर्ण भूमिका को निभा सकते हैं। प्रत्येक जिले … Read more

पीएम जनमन योजना में जनजातीय बसाहटों में बढ़ी आधारभूत सुविधाएं

सहरिया, बैगा, भारिया परिवारों को मिल रहा योजनाओं का सीधा लाभ भोपाल  जनजातीय बसाहटों को आधारभूत सुविधाओं से संपन्न बनाने और जनजातीय परिवारों में खुशियां लाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन को साकार करते हुए मध्यप्रदेश ने पीएम जनमन योजना में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में पीएम जनमन योजना में 5800 जनजातीय बसाहटों में रह रहे 2 लाख 62 हजार से ज्यादा सहरिया, बैगा और भारिया परिवारों को विभिन्न विभागों की योजनाओं का सीधा लाभ मिला है। आधार कार्ड, जनधन बैंक खाता, आयुष्मान भारत, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि, राशन कार्ड देने में 100 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। वे हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ लेने में इन दस्तावेज का उपयोग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, बहुउद्देशीय केंद्र, हर घर नल से जल, हर घर बिजली, सबको पोषण, सबको स्वास्थ्य, सबको शिक्षा, गांव-गांव मोबाइल नेटवर्क, वन धन विकास केंद्र बनाने जैसी परिवर्तनकारी योजनाओं को इन बसाहटों में क्रियान्वित किया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी योजनाओं से संबंधित विभागों को दी गई है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई है। जनजातीय परिवारों को आवास सुविधा उपलब्ध कराने में शिवपुरी जिला न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में आगे है। यहां 16 हजार से ज्यादा आवास बन चुके हैं। शहडोल में 10711, श्योपुर 7639, उमरिया में 6410, छिंदवाड़ा में 5479 मंडला में 5446 आवास बने हैं। अन्य जिलों में विभिन्न स्तरों पर तेजी से काम चल रहा है। सड़क सुविधा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 1570 बसाहटों में 2265 किमी सड़कें बनाने का लक्ष्य है। राष्ट्रीय ग्रामीण अधोसंरचना विकास ऐजेंसी को 269 किमी की 117 सड़कें बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। हाल में 739 किमी लंबाई की 377 सड़कों की स्वीकृति मिल गई है। इनके निर्माण के लिये टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 17 जिलों में 125 बहुउद्देशीय केंद्रों के निर्माण का काम चल रहा है। सबसे ज्यादा 33 शिवपुरी और 24 श्योपुर में बन रहे हैं। हर घर नल से जल हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए 4843 बसाहटों में रह रहे 12 लाख 30 हजार घरों में नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य है। अब तक 8,43,258 घरों में नल से जल पहुंच रहा है। शेष घरों में दिसंबर माह तक पहुंच जाएगा। सबको स्वास्थ्य सबको स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से 3132 गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं और 1268 में मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित हैं। इस प्रकार 4400 गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच गई हैं। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से अब तक 4 लाख से अधिक रोगियों का परीक्षण किया गया है। विशेष रूप से टीबी और सिकल सेल की जांच की गई है। करीब 27000 रोगियों की फिजियोथैरेपी कराई गई। विद्युत सुविधा जनजातीय परिवारों को ग्रिड के माध्यम से हर घर बिजली देने में 24,800 घरों में विद्युत सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। दुर्गम क्षेत्रों में आफग्रिड के माध्यम से नवकरणीय ऊर्जा विभाग के सहयोग से 11 जरूरतमंद जिलों के 2060 गांवों में विद्युत सुविधा देने का काम तेजी से चल रहा है। सभी बसाहटों में पोषण देने के लिए 704 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 628 बन गये हैं और शेष अगले दो महीनों में बन जायेंगे। इसके अलावा 76 नये आंगनवाड़ी केन्द्र खोलने का भी प्रस्ताव है। इन केन्द्रों में बच्चों के पोषण का स्तर लगातार मॉनिटर किया जा रहा है। सबको शिक्षा सबको शिक्षा सुविधा देने के लिए जिन जनजातीय बसाहटों के पास प्राथमिक शाला की सुविधा दी जा रही है। वर्तमान में 16 जिलों में 106 छात्रावास स्वीकृत किए गये हैं। मोबाइल सुविधाओं को सुदृढ़ बनाते हुए 15 जिला में उपयुक्त स्थान पर 4जी मोबाइल नेटवर्क दिया जा रहा है। टावर के लिये स्थान चिन्हित कर लिये गये हैं। इसके अलावा वन एवं तकनीकी शिक्षा विभागों द्वारा 11 जिलों में 83 वन-धन विकास केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इससे 5000 जनजातीय हितग्राही जुड़े हैं। सभी को उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम और उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत वन-विकास केंद्र का बिजनेस प्लान बनाने में प्रशिक्षण दिया गया है।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले- दूरस्थ अंचलों तक बैंकिंग सेवाएं पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता

ग्राम आरा, कुडे़केला और छिछली में शुरू हुई नई बैंक शाखाएं 23 ग्राम पंचायतों एवं 48 आश्रित ग्रामों के लगभग 44 हज़ार लोगों को मिलेगा लाभ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य और जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता है, ताकि किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को वित्तीय सेवाएं उनके ही गाँव में सुलभ हों। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेवाएं न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति देती हैं, बल्कि शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का भी आधार बनती हैं। मुख्यमंत्री साय ने जशपुर जिले के बगिया ग्राम में मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से वर्चुअल माध्यम से जशपुर विकासखंड के ग्राम आरा, पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम कुडे़केला (घरजियाबथान) और बगीचा विकासखंड के ग्राम छिछली में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की नई शाखाओं का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के 12वें वार्षिक प्रतिवेदन का भी विमोचन किया। 44 हज़ार से अधिक ग्रामीण होंगे लाभान्वित मुख्यमंत्री साय ने कार्यकम को वर्चुअली संबोधित करते हुए  कहा कि जशपुर जिले में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के तीन नई शाखाओं के शुरू होने से 23 ग्राम पंचायतों और 48 आश्रित ग्रामों के लगभग 44 हज़ार लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। अब ग्रामीणों को बैंकिंग कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और धन की बचत होगी। अटल डिजिटल सुविधा केंद्र से ग्रामीणों को मिलेगी वित्तीय सेवाएं मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि जशपुर जिले की 268 पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र शुरू किए गए हैं, जिनके माध्यम से अब तक लगभग 15 करोड़ रुपये का लेन-देन हो चुका है। आगामी पंचायत दिवस तक जिले की सभी पंचायतों में ये सुविधा केंद्र प्रारंभ करने की योजना है। इन केंद्रों से ग्रामीणों को उनके गाँव में ही बैंकिंग, बीमा और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध होंगी। जशपुर जिले के ग्राम छिछली की सरपंच श्रीमती अनिमा मिंज, आरा के सरपंच श्री मनोज भगत और कुडे़केला के सरपंच श्रीमती शशिकांता पैंकरा ने कहा कि नई बैंक शाखाओं से अब उनके क्षेत्र के ग्रामीणों को सभी बैंकिंग सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी। ग्राम पंचायत आरा से वर्चुअली जुड़ी विधायक श्रीमती रायमुनी भगत  ने कहा कि बैंक खुलने से हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ सीधे बैंक के माध्यम से हितग्राहियों को मिलेगा। ग्राम कुडे़केला से वर्चुअली जुड़ी विधायक गोमती साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनधन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लोगों में वित्तीय जागरूकता बढ़ी है और अब 3 नए ग्रामीण बैंकों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में  गति आएगी। जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय ने भी मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। इन 3 नई शाखाओं के खुलने से जिले में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की कुल शाखाओं की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। कैंप कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती, जिला पंचायत सदस्य वेद प्रकाश भगत, उपेन्द्र यादव,  सुनील गुप्ता, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के चेयरमैन विनोद अरोड़ा सहित तीनों ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधिगण और ग्रामीण वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।

निवेश मित्र नीतियों से हुई मप्र के निर्यात में 6% की बढ़ोतरी

अब तक का सबसे ज्यादा 66,218 करोड रुपए का हुआ निर्यात भोपाल मध्यप्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्यात में अपनी रेंकिंग में सुधार करते हुए अब तक का सबसे ज्यादा 66,218 करोड रुपए का निर्यात किया है। निर्यात में 6% की बढ़ोतरी हुई है जो फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग गुड्स और सोया उत्पादों में निर्यात बढ़ने के फलस्वरूप हुई है। फेडेरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मर्केंडाइज एक्सपोर्ट में 66,218 करोड रुपए का योगदान है जबकि स्पेशल इकोनामिक जोन में सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों ने राज्य के एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो में 4038 करोड रुपए का योगदान दिया है। इन क्षेत्रों में आर्थिक विकास बढ़ने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर निर्यात में मध्यप्रदेश की रैंकिंग 15 से 11 हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग गुड्स और सोया आधारित कृषि उत्पाद मिलाकर मध्यप्रदेश ने विश्व बाजार के प्रतिमानों के अनुसार निर्यात रैंकिंग में बढ़ोतरी की है। निवेश मित्र औद्योगिक विकास की नीतियां, औदयोगीकरण का बढ़ता आधार मध्यप्रदेश का निर्यात बढ़ने के प्रमुख कारण है। इसके अलावा निर्यात को प्रोत्साहित करने वाली अधोसंरचना में बढ़ोतरी होना और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों का मध्यप्रदेश की ओर आकर्षित होने को भी प्रमुख है। पिछले साल तक फार्मास्यूटिकल, एनिमल फीड, मशीनरी, एल्यूमिनियम और टेक्सटाइल पांच ऐसे निर्यात सेक्टर थे जो प्रथम पांच निर्यातकों में शामिल थे। मुख्य रूप से बांग्लादेश, फ्रांस, यूएई और नीदरलैंड में मध्यप्रदेश को निर्यात का बड़ा मार्केट मिला है। फार्मास्यूटिकल और मशीनरी के निर्यात में मध्यप्रदेश के लिए सबसे बड़ा मार्केट यूएस है। मध्यप्रदेश से वर्ष 2024-25 में 11,968 करोड रुपए के फार्मास्यूटिकल्स, 6062 रुपए के एनिमल फीड, 4795 करोड रुपए के एल्युमिनियम, 4656 रुपए का निर्यात और 5497 रुपए की मशीनरी का निर्यात हुआ। पिछले छह वर्षों से मध्यप्रदेश का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2019-20 में 37,692 करोड रुपए, 2020-21 में 47,959 करोड रुपए, 2021-22 में 58,407 करोड रुपए, 2022-23 में 65,878 करोड रुपए, 2023-24 में 65,255 करोड़ रुपए और 2024-25 में 66,218 करोड रुपए का निर्यात मध्यप्रदेश से हुआ। इसमें स्पेशल इकोनामिक जोन से हुए निर्यात के आंकड़े भी शामिल है। धार जिला निर्यात में प्रथम है। यहां से 17,830 करोड रुपए का निर्यात हुआ जबकि इंदौर से 13,500 करोड रुपए का निर्यात हुआ। यहां से फार्मास्यूटिकल, ऑटोमेटिक और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से निर्यात हुआ। उज्जैन ने भी अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2,288 करोड रुपए का निर्यात किया, जिसमें इंडस्ट्रियल, कृषि आधारित उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद शामिल हैं। राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास पर फोकस रखते हुए और व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने से यह उपलब्धि हासिल हुई है। इससे न सिर्फ राज्य की आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिली है बल्कि देश के कुल निर्यात में भी मध्यप्रदेश का योगदान बढ़ा है।  

रहस्य और डर से भरी है ‘किष्किंधापुरी’ की दुनिया, फिल्म जल्द ही सिनेमाघरों में होगी रिलीज

चेन्नई, अभिनेता बेलमकोंडा साई श्रीनिवास और अनुपमा परमेश्वरन की बहुप्रतीक्षित हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘किष्किंधापुरी’ के मेकर्स ने शनिवार को घोषणा की कि यह फिल्म इस साल 12 सितंबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। प्रोडक्शन हाउस शाइन स्क्रीन्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसे रिलीज किया गया। उन्होंने लिखा, “रहस्य, रोमांच और डर से भरी दुनिया में आपका स्वागत है। ‘किष्किंधापुरी’ 12 सितंबर को दुनियाभर में रिलीज होने जा रही है! फिल्म यूनिट से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि ‘किष्किंधापुरी’ की कहानी एक खास और अनोखी दुनिया के इर्द गिर्द रची गई है, और यह फिल्म दर्शकों को रहस्य और डर की दुनिया से रूबरू कराएगी। इसकी पहली झलक अप्रैल में दिखाई गई थी, जिसने सिहरन पैदा कर दी थी। वीडियो की शुरुआत में बेलमकोंडा साई श्रीनिवास और अनुपमा परमेश्वरन एक भूतिया घर में जाते दिखाई देते हैं, जहां से अलौकिक शक्तियों का आह्वान होता है। टीजर में एक डरावनी आवाज गूंजती है, जो कहती है, “कुछ दरवाजे खोलने के लिए नहीं बने।” इसका अंत बेलमकोंडा के डरावने डायलॉग “अहम मृत्यु” (मैं मृत्यु हूं) के साथ होता है। कौशिक पेगल्लापति की कहानी को चिन्मय सालस्कर की शानदार सिनेमैटोग्राफी और सैम सीएस के संगीत ने और प्रभावशाली बना दिया है, जिसने दर्शकों के बीच और फिल्म को लेकर रोमांच और बढ़ गया है। प्रोडक्शन डिजाइन मनीषा ए दत्त ने किया है, जबकि डी शिव कामेश आर्ट डायरेक्टर हैं। निरंजन देवरमाने ने एडिटिंग की है और जी कनिष्का ने क्रिएटिव हेड की भूमिका निभाई है। दाराहास पालकोल्लू सह-लेखक और के. बाला गणेश ने पटकथा में सहयोग दिया है। ‘किष्किंधापुरी’ ने रिलीज से पहले ही माहौल बना दिया है। मेकर्स का दावा है कि हॉरर और रहस्य की दुनिया में कदम रखने की ख्वाहिश रखने वालों के लिए इसमें बहुत कुछ है। कहानी दिलचस्प है और दर्शक इससे निराश नहीं होंगे।  

सोमवार को भूलकर भी न खरीदें ये चीजें, वरना आ सकती है बड़ी परेशानी

सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित है. ज्योतिष शास्त्र में सोमवार के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं और साथ ही इस दिन कुछ चीजों को खरीदने की मनाही भी है. आइए जानते हैं कि सोमवार को कौन सी चीजें नहीं खरीदनी चाहिए. अनाज: धार्मिक मान्यता के अनुसार, सोमवार के दिन अनाज नहीं खरीदना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि सोमवार को अनाज खरीदने से घर में नकारात्मक ऊर्जा आ सकती है. कला से संबंधित चीजें: ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, सोमवार को रंग, ब्रश, वाद्य यंत्र जैसी कला से संबंधित चीजें नहीं खरीदनी चाहिए. साथ ही, पढ़ाई से संबंधित सामग्री जैसे कॉपी-किताबें, पेन, पेंसिल आदि भी सोमवार को नहीं खरीदनी चाहिए. खेल से जुड़ी चीजें: सोमवार के दिन खेल से संबंधित चीजें खरीदने से बचना चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि सोमवार को खेल से जु़ड़ी चीजें खरीदने से नकारात्मक शक्ति बढ़ सकती है. इलेक्ट्रॉनिक सामान: ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, सोमवार के दिन इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना भी अशुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि सोमवार के दिन इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने से भगवान शिव नाराज होते हैं. झाड़ू: सप्ताह के पहले दिन यानी सोमवार को झाड़ू खरीदने से बचना चाहिए. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, सोमवार के दिन झाड़ू खरीदने से घर में आर्थिक नुकसान और तंगी आ सकती है. लोहा: सोमवार के दिन लोहा खरीदना शुभ नहीं माना जाता है. सोमवार, चंद्रमा का दिन होता है और लोहा शनि ग्रह से संबंधित है. चंद्रमा और शनि के बीच दुश्मनी का संबंध माना जाता है. इसलिए, सोमवार को लोहा खरीदने से बचना चाहिए.

राहुल गांधी का डिजिटल मिशन: वोट चोरी की शिकायत अब वेबसाइट और कॉल से होगी दर्ज

नई दिल्ली  कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार निशाना साध रहे हैं। यहां तक कई बार चुनाव अधिकारियों को सत्ता में आने पर देख लेने की धमकी भी दे चुके हैं। अब लगता है कि राहुल गांधी चुनाव आयोग से 2-2 हाथ करने के मूड में पूरी तरह आ चुके हैं। कांग्रेस सांसद ने ‘वोट चोरी’ के खिलाफ मुहिम शुरू (कर डिजिटल मतदाता सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने वेबसाइट और मिस्ड कॉल नंबर जारी कर लोगों से समर्थन मांगा है। लोग पोस्ट के कमेंट बॉक्स में अपना समर्थन सर्टिफिकेट शेयर कर समर्थन भी दे रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग से हमारी मांग साफ़ है, पारदर्शिता दिखाएं और डिजिटल मतदाता सूची सार्वजनिक करें। ताकि जनता और राजनीतिक दल उसका खुद ऑडिट कर सकें। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार (10 अगस्त, 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वोट चोरी ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के बुनियादी लोकतांत्रिक सिद्धांत पर हमला है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए साफ़-सुथरी मतदाता सूची अनिवार्य है। राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग से हमारी मांग साफ़ है, पारदर्शिता दिखाएं और डिजिटल मतदाता सूची सार्वजनिक करें, ताकि जनता और राजनीतिक दल उसका खुद ऑडिट कर सकें। उन्होंने आगे कहा कि आप भी हमारे साथ जुड़ कर इस मांग का समर्थन करें – http://votechori.in/ecdemand पर जाएं या 9650003420 पर मिस्ड कॉल दें। ये लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा की है। अमित मालवीय बोले- राहुल गांधी राजनैतिक नौटंकी कर रहे हैं दूसरी तरफ बीजेपी प्रवक्ता अमित मालवीय ने चुनाव आयोग की राहुल गांधी से की गई अपील शेयर करके उनसे डिक्लेरेशन दाखिल करने की मांग की है। अमित मालवीय ने कहा, “ऐसा न करने पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनके पास कोई ठोस आधार नहीं है, और वे केवल राजनीतिक नाटक कर रहे थे। इसका उद्देश्य तथ्यों को तोड़-मरोड़ना, जनता के मन में संदेह पैदा करना और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार एक संवैधानिक संस्था को बदनाम करना था। ऐसा आचरण लापरवाही भरा और हमारे लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक है। इलेक्शन कमीशन शपथ पत्र प्रस्तुत करने की मांग की बता दें कि फर्जी मतदाता मामले पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को इलेक्शन कमीशन ने फटकार लगाते हुए कहा कि वो नियमों के अनुसार स्पष्ट घोषणा और शपथ पत्र प्रस्तुत करें या फिर अपने झूठे और भ्रामक आरोपों के लिए देश से सार्वजनिक माफी मांगें। चुनाव आयोग ने कड़ी आपत्ति जाहिर की और कहा कि राहुल गांधी ने आदित्य श्रीवास्तव के मामले का ज़िक्र किया, जबकि इस मामले में 2018 में ही कार्रवाई हो चुकी है। चुनाव आयोग के मुताबिक कांग्रेस नेता द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और इससे आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने की कोशिश की गई है। आयोग ने साफ किया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास बनाए रखने के लिए नेताओं को तथ्यों और सबूतों के साथ ही बयान देने चाहिए।