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जेल से बाहर आने के बाद पति ने पत्नी की हत्या, चाकू से किया गला रेतने का प्रयास

ग़ाज़ियाबाद  उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद में लोनी के अंकुर बिहार थाना क्षेत्र में सोमवार रात दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। यहां रहने वाले सुमित गुप्ता ने घरेलू विवाद के चलते अपनी पत्नी कविता गुप्ता (30) की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी। दो महीने पहले ही जमानत पर रिहा हुआ था आरोपी बता दें कि सुमित गुप्ता का विवाह करीब दो साल पहले राम पार्क एक्सटेंशन की रहने वाली कविता गुप्ता से हुआ था। विवाह के कुछ ही महीनों बाद सुमित को हरियाणा में गोली मारने के एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। करीब दो वर्ष तक जेल में रहने के बाद वह दो महीने पहले ही जमानत पर रिहा हुआ था। बाहर आने के बाद सुमित ऑटो चलाकर गुजर-बसर करने लगा। अवैध संबंधों का शक जताकर आए दिन होता था झगड़ा  परिजनों और पड़ोसियों का कहना है कि जेल से आने के बाद से ही सुमित पत्नी पर अवैध संबंधों का शक जताकर आए दिन झगड़ा करता था। सोमवार शाम भी इसी बात को लेकर दोनों में कहासुनी हुई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में सुमित ने घर की रसोई से चाकू उठाया और पत्नी का गला काट दिया। कविता की चीख सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जहां वह खून से लथपथ फर्श पर पड़ी थी। घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई। सूचना पाकर एसीपी ज्ञान प्रकाश राय समेत पुलिस बल मौके पर पहुंचा। आरोपी सुमित गिरफ्तार पुलिस ने आरोपी सुमित को गिरफ्तार कर लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल चाकू भी बरामद कर लिया है। SHO अंकुर बिहार ने बताया कि मृतका के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है, जिसके बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा।  

विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का जमीनी स्तर पर किया जाए अध्ययन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

म.प्र. जन अभियान परिषद् शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों को अधिक समाज अनुकूल बनाने में सहयोग करे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का जमीनी स्तर पर किया जाए अध्ययन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जन अभियान परिषद् से जुड़ी संस्थाएं नशामुक्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव CM की अध्यक्षता में हुई परिषद् के शासी निकाय की बैठक भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जन अभियान परिषद् से जुड़ी संस्थाएं नशामुक्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ग्राम और वार्ड स्तर तक गतिविधियां संचालित करें और प्रभावित व्यक्तियों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। जन अभियान परिषद् राज्य शासन द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता का भी जमीनी स्तर पर अध्ययन कर फीडबैक और सुझाव दे, इससे योजनाओं को अधिक समाज अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी। परिषद् से जुड़ी संस्थाओं का कार्य थर्ड पार्टी आंकलन के समान हो। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने ये निर्देश मंत्रालय में मध्‍यप्रदेश जन अभियान परिषद् के शासी निकाय की 15वीं वार्षिक सामान्‍य बैठक में दिए। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का माध्यम बनेगा 'माटी गणेश-सिद्ध गणेश' अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में स्वदेशी को प्रोत्साहित करने के लिए लघु, कुटीर उद्योग तथा स्व-सहायता समूहों से मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। जनअभियान परिषद् से जुड़ी संस्थाएं इस दिशा में सहभागिता को प्रोत्साहित करने हुए गतिविधियां संचालित करें। बैठक में सर्पदंश से सुरक्षा और सर्परक्षा के लिए थाना स्तर पर संचालित की जाने वाली जागरूकता, प्रशिक्षण और अध्ययन गतिविधियों की जानकारी दी गई। बैठक में बताया गया कि परिषद्, स्वैच्छिकता और स्वावलंबन के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के लिए पर्यावरण संरक्षण, व्यक्तित्व विकास, नागरिक एवं सामाजिक अनुशासन पर केन्द्रित गतिविधियां, सीएम सोशल इंटर्नशिप, युवा जन अभियान और पंख गतिविधियां संचालित करने जा रही है। "माटी गणेश-सिद्ध गणेश" अभियान के अंतर्गत परिषद् के प्रशिक्षित नैटवर्क द्वारा गांव और वार्डों की महिलाओं को मिट्टी से भगवान गणेश की प्रतिमा बनाने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 'माटी गणेश-सिद्ध गणेश' घर-घर विराजित और विसर्जित होंगे। इससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता बढ़ेगी। बैठक में जन अभियान परिषद् के उपाध्‍यक्ष मोहन नागर, परिषद् की शासी निकाय के सदस्‍य एवं अपर मुख्‍य सचिव नीरज मण्‍डलोई, अपर मुख्‍य सचिव संजय शुक्‍ला तथा परिषद् के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड़ उपस्थित थे।  

कानून की धज्जियां उड़ाने पर कार्रवाई, 9 दुकानों के लाइसेंस रद्द

अमृतसर पंजाब सरकार द्वारा नशों के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम के तहत जिला ड्रग द्वारा मैडीकल स्टोरों पर छापामारी जारी रखते हुए दुकानदारों से अपील की थी कि कोई भी दवा की दुकान पर पाबंदीशुदा दवाइयों की सेल न करें। विभाग ने स्पष्ट किया था कि अगर कोई भी दुकानदार पाबंदीशुदा दवा बेचता पाया गया तो उसकी दुकान का लाइसैंस रद्द किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसके तहत दुकानदार को सजा व जुर्माना दोनों हो सकती है। जोनल लाइसैसिंग अर्थारिटी कुलविंद्र सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा विगत 17 जुलाई को अड्डा कत्थूनंगल चविंडा देवी रोड पर हैरी मैडीकल स्टोर पर ड्रग कंट्रोलर अधिकारी सुखदीप सिंह के साथ पुलिस ने छापामारी की थी, जिस दौरान उक्त दुकान से 650 गोलियां ट्रामाडोल, 240 कैप्सूल प्रीगाबालीन व गाबापेटिन 300 जब्त किए गए थे, जिसका मूल्य 35,366 के करीब थे। उक्त दुकानदार इन दवाओं का कोई सेल परचेज रिकार्ड नहीं दिखा सका और न ही ट्रामाडोल की गोलियां रखने की परमिशन दिखा सका। जिस पर पुलिस ने उक्त दुकानदार पर एन.डी.पी.एस. एक्ट के अधीन केस दर्ज कर गिरफ्तार किया था। ड्रग विभाग द्वारा उस दौरान उक्त् दुकानदार को शोकॉज नोटिस जारी किया था, लेकिन इसका जवाब भी दुकानदार नहीं दे सका। कुलविंद्र सिंह ने बताया कि कानून की उल्लंघना को देखते हुए दुकान का लाइसैंस रद्द कर दिया गया है। पिछले कुछ दिनों में ड्रग विभाग द्वारा इसी तरह के करीब 9 दुकानदारों के लाइसैंस रद्द किए है। 

गौरेला-पेंड्रा- मरवाही: कलेक्टर ने किया डिजिटल क्रॉप सर्वे का आकस्मिक निरीक्षण

गौरेला पेंड्रा मरवाही फसल सर्वेक्षण को अधिक सटीक, सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से डिजिटल तकनीक की सहायता से भूमि चिन्हांकन और फसल सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मंडावी ने आज गौरेला विकासखण्ड के ग्राम पंचायत लालपुर, पटवारी हल्का नंबर 8 में किसान के खेत पहुंचकर डिजिटल क्रॉप सर्वे का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने सर्वेयर द्वारा मोबाइल से किसान देवशरण के फसल का फोटो खिंचकर भूलेख पोर्टल में अपलोड करने तथा तहसीलदार के आईडी से अप्रूवल होने आदि की जानकारी ली। कलेक्टर ने कहा कि सर्वे कार्य की सतत निगरानी हो तथा आंकलन पूरी तरह गुणवत्ता पूर्ण और वास्तविक तथ्यों पर आधारित हो। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल सर्वे से किसानों को बेहतर सुविधा और योजनाओं का लाभ मिलेगा, इसलिए कार्य को गंभीरता से संपादित किया जाए। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर श्रीमती नम्रता आनंद डोंगरे एवं तहसीलदार श्री शेषनारायण जायसवाल भी उपस्थित थे।

पन्नू का नया बयान: खालिस्तानी आतंकी ने जताया उग्र रुख

अमृतसर  खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगलते हुए वॉशिंगटन डीसी में तथाकथित खालिस्तान रेफरैंडम आयोजित किया। इस दौरान उसने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि वह हिंदुस्तान को टुकड़ों में बांटने के लिए बम बनाने की योजना बना रहा है और दिल्ली को खालिस्तान का हिस्सा बनाएगा। भारत सरकार द्वारा आतंकी घोषित पन्नू की इस हरकत ने सुरक्षा एजैंसियों को सतर्क कर दिया है। पन्नू, जो सिख फॉर जस्टिस (एस.एफ.जे.) संगठन का मुखिया है, ने अपने वीडियो में भड़काऊ बयान देते हुए कहा कि हम हिंदुस्तान को खत्म कर देंगे और दिल्ली को खालिस्तान की राजधानी बनाएंगे। उसने दावा किया कि उसके संगठन ने वॉशिंगटन में रेफरैंडम के जरिए सिख समुदाय से समर्थन जुटाया है। हालांकि, इस रेफरैंडम की तस्वीरों में खाली कुर्सियां और गिनती के लोग ही नजर आए, जिससे इसके प्रभाव पर सवाल उठ रहे हैं। भारत सरकार ने पन्नू की इन गतिविधियों को गंभीरता से लेते हुए पहले ही उसे गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकी घोषित किया है। राष्ट्रीय जांच एजैंसी (एन.आई.ए.) पन्नू के खिलाफ छह मामलों की जांच कर रही है, जिनमें भारत विरोधी साजिशें और खालिस्तान समर्थक गतिविधियां शामिल हैं। अमृतसर और चंडीगढ़ में उसकी संपत्तियां भी जब्त की जा चुकी हैं। पन्नू की इस ताजा धमकी ने भारत में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। खुफिया एजैंसियों का मानना है कि वह पाकिस्तान की खुफिया एजैंसी आई.एस.आई. के इशारे पर भारत में अस्थिरता फैलाने की कौशिश कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने पन्नू के दावों को ‘निराधार और अनुचित’ करार देते हुए कहा कि उसका संगठन भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने के लिए काम कर रहा है।   पन्नू, जो अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता रखता है, लंबे समय से भारत विरोधी प्रचार में शामिल रहा है। उसने पहले भी भारतीय संसद, तिरंगे और भारतीय नेताओं को निशाना बनाने की धमकियां दी हैं। हाल ही में उसने 15 अगस्त को वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास के बाहर खालिस्तान फ्रीडम रैली आयोजित करने का ऐलान किया था, जिसमें तिरंगा जलाने की धमकी दी थी। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पन्नू की गतिविधियां भारत के लिए गंभीर खतरा हैं, खासकर जब वह विदेशी धरती से भारत में अशांति फैलाने की कौशिश कर रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पन्नू के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, भारतीय समुदाय और सिख संगठनों ने पन्नू की हरकतों की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि पन्नू जैसे लोग सिख समुदाय की छवि को खराब करने की कोशिश कर रहा है। भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाने का फैसला किया है, ताकि पन्नू जैसे आतंकियों के खिलाफ वैश्विक सहयोग बढ़ाया जा सके।

नीतीश कैबिनेट ने दी 900 करोड़ की दो सड़क परियोजना को मंजूरी, इन क्षेत्रों का होगा विकास

राजगीर के खेल और पर्यटन को बूस्‍टर डोज, 900 करोड़ के दो प्रोजेक्‍ट पास  4-लेन की दो नई सड़कों के लिए नीतीश कैबिनेट ने किया 900 करोड़ पास!   राजगीर क्रिकेट स्टेडियम तक 4 लेन की सीधी सड़क, सरकार ने दी 364 करोड़ की मंजूरी नीतीश कैबिनेट ने दी 900 करोड़ की दो सड़क परियोजना को मंजूरी, इन क्षेत्रों का होगा विकास पटना बिहार सरकार का पूरा फोकस राज्य में सड़क और यातायात को बेहतर बनाने का है। जगह- जगह पुल और हाईवे बनाए जा रहे हैं। ताकि सड़कों पर बिहार के आर्थिक विकास का पहिया तेज रफ्तार से दौड़ सके। इस कड़ी में पथ निर्माण विभाग के दो बड़े प्रोजेक्‍ट को  मंजूरी दे दी गई है। मंगलवार को नीतीश कैबिनेट की बैठक में सालेपुर-नरसंडा-तेलमर-करौटा 4-लेन सड़क और राजगीर खेल परिसर से NH-120 तक 4-लेन की सड़क को मंजूरी मिल गई है। इन योजनाओं पर करीब 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। सालेपुर-नरसंडा-तेलमर-करौटा 4-लेन सड़क राज्‍य सरकार की ओर से सालेपुर-नरसंडा से तेलमर-करौटा जाने वाली 4-लेन की इस सड़क लंबाई 19.43 किलोमीटर होगी। जिस पर कुल 539.19 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस बीस किलोमीटर की चार लेन वाली सड़क पर 2 फ्लाईओवर, 2 बड़े पुल, 13 छोटे पुल, 19 आरसीसी बॉक्स कल्वर्ट और 34 पाइप कल्वर्ट बनाए जाएंगे। जिसका आम लोगों को बहुत फायदा मिलने वाला है। इस रूट से गुजरने वालों को न तो जाम का समाना करना होगा और न ही अवागमन में दिक्‍कत होगी। लोग फर्राटा भरते हुए 20 किलोमीटर की यह दूरी तय कर पाएंगे। NH-120 से सीधे कने‍क्‍ट होगा राजगीर खेल परिसर वहीं, दूसरी परियोजना राजगीर खेल परिसर से NH-120 तक की चार लेन सड़क बनाने की है। इस चार लेन वाली सड़क की कुल लंबाई 7.40 किलोमीटर होगी। जिसकी लागत 363.99 करोड़ रुपये होगी। चार लेन का यह मार्ग राजगीर खेल परिसर से होते हुए कुबरी, जैतीपुर, फतेहपुर और इंडो हुके होटल से NH-120 विरायतन तक जाएगा। इस कनेटिंग रोड़ पर रेल ओवर ब्रिज भी तैयार किया जाएगा। इस परियोजना का सीधा फायदा राजगीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम आने-जाने में खिलाड़ियों और दर्शकों को होगा। साथ ही आस-पास के गांवों का विकास भी तेज होगा। लोगों को होगा सीधा फायदा बताते चलें कि बिहार सरकार और मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के फोकस में अब खेल भी शामिल हो गया है। ऐसे में इन दोनों परियोजनाओं की वजह से जहां स्थानीय लोगों और यात्रियों को फायदा होगा वहीं, राजगीर में होने वाले इंटरनेशनल क्रिकेट को ध्‍यान में भी रखा गया है। 7 किलोमीटर की इस 4 लेन की सड़क सीधे NH 120 से सीधे राजगीर खेल परिसर के क्रिकेट ग्राउंड तक जाती है। इस सड़क के पूरा होने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि खेलों को भी बूस्टर डोज मिलेगा।

महिला कॉन्स्टेबल का आरोप: डिप्टी कलेक्टर ने किया शोषण, तीन बार जबरन गर्भपात कराया

बालोद छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक महिला सिपाही ने डिप्टी कलेक्टर पर शादी का झांसा देकर बार-बार शारीरिक संबंध बनाने, जबरदस्ती गर्भपात करवाने और आर्थिक शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया है। महिला ने शिकायत में बताया कि उनका संबंध करीब 8 साल तक चलता रहा। इस दौरान उसने डिप्टी कलेक्टर को लाखों रुपए की मदद भी की। सीएएफ की महिला सिपाही ने इस मामले की प्राथमिकी डौंडी थाना में दर्ज कराई है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीएसपी चित्रा वर्मा से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायत के मुताबिक पीड़िता 2017 में ग्राम अवारी, जिला बालोद निवासी दिलीप उईके के साथ डौंडी स्थित आईटीआई में पढ़ाई कर रही थी। पढ़ाई के दौरान दोस्ती प्यार में बदल गई। दिलीप ने उससे शादी का वादा किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। महिला मार्च 2017 में पहली बार गर्भवती हुई। उसने यह बात दिलीप को बताई तो उसने कहा कि अभी वह पढ़ाई कर रहे हैं। पहले कुछ बन जाएं और अपने पैरों पर खड़े हो जाएं फिर शादी और बच्चे के बारे में सोचा जाएगा। युवती के मना करने के बाद भी जबरदस्ती दवा खिलाकर गर्भपात करवाया। इसके बाद 2017 में महिला की पुलिस विभाग में नौकरी लग गई और दिलीप उईके ने आगे की पढ़ाई के लिए दुर्ग में एडमिशन लिया। शुरुआत में वह हॉस्टल में रह रहे थे। बाद में किराये पर मकान लेकर रहने लगे। महिला की नौकरी लग जाने के कारण और भविष्य में दिलीप के साथ शादी करने की उम्मीद में उसने उसकी पढ़ाई, कोचिंग और अन्य खर्चों के लिए हर माह 5 हजार रुपए उसके खाते में ट्रांसफर किया। इस दौरान जब भी दोनों की मुलाकात होती तो दिलीप शादी की बात कहकर महिला के साथ संबंध बनाता रहा। बीजापुर में डिप्टी कलेक्टर के पद पर पोस्टिंग सीजीपीएससी परीक्षा में सफल होने के बाद 2020 में दिलीप डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुए और बीजापुर में पोस्टिंग हुई। नौकरी लगने के बाद जब युवती ने शादी के लिए दबाव बनाया तो दिलीप ने कहा कि अभी नौकरी लगी है। अच्छे से सैटल हो जाऊं फिर तुमसे शादी करूंगा। इस बीच युवती एक बार फिर गर्भवती हो गई तो उसने गर्भपात करा दिया। मई 2025 में तीसरी बार गर्भवती होने पर दिलीप ने शादी का झांसा देकर 15 मई 2025 को जबरदस्ती गर्भपात की दवा खिलाई। इस बीच फोन करने पर दिलीप फोन नहीं उठाता था। 2 जून 2025 को दिलीप महिला को उसके घर छोड़कर गया और साफ-साफ कहा कि वह शादी नहीं कर सकता। तुम्हें जो करना है कर लो। इस मामले में महिला सिपाही की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। सीएसपी चित्रा वर्मा ने बताया कि डौंडी थाना में मामला दर्ज कर बयान लिया जा रहा है। वहीं डिप्टी कलेक्टर दिलीप उईके का बयान सामने आने के बाद मामला स्पष्ट होने की उम्मीद है।

साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी के आदान प्रदान से ही साइबर अपराध पर लगायी जा सकती है लगाम

विश्व में हो रहे डिजिटल खतरे को कम कर सकता है साइबर सुरक्षा और डिजिटल ऑडिट  साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी के आदान प्रदान से ही साइबर अपराध पर लगायी जा सकती है लगाम  सेमिनार में सीएम योगी द्वारा प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर किये जा रहे प्रयासों की सराहना हुई  योगी सरकार द्वारा साइबर अपराधों के खिलाफ अपनाया गया कड़ा रुख, साइबर अपराध में आई कमी लखनऊ  साइबर सुरक्षा और डिजिटल ऑडिट का महत्व दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है क्योंकि पूरे विश्व में डिजिटल खतरे का लगातार सामना कर रहा है। ऐसे में हमे साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी को अपनाना होगा। इसके लिए विश्व के विभिन्न देशों से टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान बहुत महत्व रखता है। यह मंथन यूपीएसआईएफएस द्वारा आयोजित डिजिटल ऑडिट, साइबर इंश्योरेंस, सुरक्षा और कानूनी पहलुओं पर हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर किये जा रहे विभिन्न पहलुओं को सराहा गया।  साइबर सुरक्षा, डिजिटल ऑडिट और साइबर इंश्योरेंस के क्षेत्र में मजबूत कैरियर की संभावनाएं यूपीएसआईएफएस के अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा ने बताया कि योगी सरकार द्वारा साइबर अपराधों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। उन्होंने डेटा सुरक्षा के लिए भारत के डीपीडीपी अधिनियम और जीडीपीआर जैसी नीतियों की जानकारी दी। साथ ही टीमवर्क और निरंतर शिक्षा के महत्व पर बल दिया। सेमिनार में साइबर सुरक्षा के लिए लगातार शिक्षा, व्यावहारिक अनुभव और नैतिक स्पष्टता को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, डिजिटल ऑडिट और साइबर इंश्योरेंस के क्षेत्र में एक मजबूत और टिकाऊ कैरियर की संभावना है, बशर्ते सही कौशल, कानूनी जानकारी और व्यावहारिक अनुभव को प्राथमिकता दी जाए। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इन प्रयासों को और भी सशक्त बनाया गया है, जो भारतीय डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कानूनी, नैतिक और तकनीकी ढांचे को समझना जरूरी सेमिनार में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ यूएसए के पवन शर्मा ने कहा कि डिजिटल ऑडिट किसी संगठन के जोखिम को समझने के लिए एक नींव का काम करता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ऑडिट के बारे में व्यावहारिक ज्ञान और उसे लागू करने की क्षमता आज के समय में साइबर सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। साइबर इंश्योरेंस के लिए ऑडिट रिपोर्ट की सही व्याख्या करना और उसे सही तरीके से लागू करना बेहद जरूरी हो गया है। सिस्को के प्रतिनिधि ने यह बताया कि अब पारंपरिक वार्षिक ऑडिट की बजाय संगठन लगातार, जोखिम-आधारित मूल्यांकन कर रहे हैं, जो वास्तविक समय के मापदंडों और अनुपालन ढांचे से जुड़े होते हैं। इसके साथ ही ऑटोमेशन और साइबर जोखिम मॉडलिंग जैसे कौशल अब करियर की तरक्की के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं। जेड-स्केलर के प्रतिनिधि ने कंपनियों में आंतरिक अपस्किलिंग के महत्व को बताया और साइबर सुरक्षा में अपनी विशेषज्ञता को प्रमाणित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रमाणपत्र जैसे कि CompTIA Security+ और CISSP की सिफारिश की। इन प्रमाणपत्रों को प्राप्त करने से युवाओं को अपने करियर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। यूपीएसआईएफएस के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार राय ने बताया कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कानूनी, नैतिक और तकनीकी ढांचे को समझना आवश्यक है। उन्होंने रैंसमवेयर जैसे महत्वपूर्ण उदाहरणों के माध्यम से बताया कि लगातार मूल्यांकन से ही सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने ने अंतरराष्ट्रीय साइबर खतरों के मद्देनज़र वैश्विक दृष्टिकोण की अहमियत को उजागर किया।      

बिलासपुर :अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई: प्रार्थना भवन ध्वस्त, मतांतरण के आरोप में तीन महिलाएं हिरासत में

बिलासपुर   बिलासपुर जिले में धार्मिक गतिविधियों को लेकर दो बड़े मामले सामने आए हैं। सकरी क्षेत्र के भरनी गांव में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए प्रार्थना भवन को सोमवार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर हटा दिया। यहां पहले मतांतरण के प्रयास का आरोप लगा था। वहीं, सरकंडा थाना क्षेत्र के बहतराई में प्रार्थना सभा की आड़ में मतांतरण का प्रयास होने पर हंगामा खड़ा हो गया और पुलिस ने मौके से तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया। सुर्खियों में आया था प्रार्थना भवन प्रशासन ने शासकीय भूमि पर बना यह प्रार्थना भवन पिछले माह तब सुर्खियों में आया था जब यहां मतांतरण का आरोप लगाया गया था। ग्रामीणों और संगठनों का कहना था कि भवन के भीतर कुछ लोग प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास कर रहे थे। आक्रोशित ग्रामीणों ने तीन संदिग्धों को पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया था। इसके बाद प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अतिक्रमण हटाने और मतांतरण रोकने की मांग की गई थी। शिकायत पर राजस्व विभाग ने संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया और भूमि दस्तावेज मांगे, लेकिन वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं की गई। जांच में भूमि शासकीय साबित होने पर सोमवार को प्रशासन ने बैकहो लोडर चलवाकर अतिक्रमण हटा दिया। तहसीलदार सकरी, सीएसपी और थाना प्रभारी प्रदीप आर्य के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। पास्टर सहित तीन महिलाएं गिरफ्तार इधर, सरकंडा थाना क्षेत्र के बहतराई में भी प्रार्थना सभा के दौरान मतांतरण की कोशिश का मामला सामने आया। सूचना पर विभिन्न संगठन मौके पर पहुंचे और विरोध करने लगे, जिससे हंगामा मच गया। आरोप है कि सभा में धार्मिक ग्रंथ और सामग्री के माध्यम से लोगों को धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित कर तीन महिलाओं, जिनमें एक पास्टर भी शामिल है, को गिरफ्तार किया।  

सीएम योगी के मार्गदर्शन में डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में डिजिटल साक्ष्यों पर हुई चर्चा

न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता को सुनिश्चित कर रहे डिजिटल साक्ष्य सीएम योगी के मार्गदर्शन में डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में डिजिटल साक्ष्यों पर हुई चर्चा  बोले एक्सपर्ट, न्यायिक मामलों में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका अहम, यह तब और बढ़ जाती है जब कोई विटनेस नहीं होता  सीएम योगी के निर्देश पर डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में तैयार किया जा रहा आवश्यक ढांचा   लखनऊ  न्यायिक मामलों में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका बहुत अहम होती है। यह भूमिका तब और बढ़ जाती है जब डिजिटल साक्ष्य के आलावा कोई विटनेस नहीं होता है। 26/11 मुंबई हमले के आरोपी कसाब के मामले में इंटरनेट ट्रांस्क्रिप्ट्स का उपयोग दोषसिद्धि में काफी महत्वपूर्ण था। वर्तमान डिजिटल साक्ष्य न केवल न्यायिक मामलों में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता को भी सुनिश्चित कर रहे हैं। ये बातें सेवानिवृत्त जस्टिस तलवंत सिंह ने यूपीएसआईएफएस के डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में कही।   डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में आवश्यक ढांचा तैयार किया गया सेमिनार में जस्टिस सिंह ने कहा कि प्रदेश में न्यायिक सुधारों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में न्यायपालिका को तकनीकी दृष्टिकोण से मजबूत किया जा रहा है और डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में आवश्यक ढांचा तैयार किया किया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश के न्यायालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति लाने के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इसके अलावा सीएम योगी ने प्रदेश के न्यायिक ढांचे को और भी सशक्त बनाने के लिए कई सुधारों की घोषणा की है, ताकि न्यायिक कार्यवाही तेजी से और पारदर्शी तरीके से हो सके। यह सेमिनार इसका प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश न्यायिक सुधारों में अपने कदम तेजी से बढ़ा रहा है और भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने डिजिटल साक्ष्य को परिभाषित करते हुए कहा कि यह वह सभी डेटा होते हैं, जो डिजिटल रूप में जन्म और एक जगह एकत्रित होते हैं। उन्होंने इसे बढ़ते साइबर अपराधों की चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक बताया और कहा कि अब यह लगभग हर जांच का अभिन्न हिस्सा बन गया है। चाहे मामला चोरी, लूट या साइबर अपराध का हो। मेरा मानना है कि वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्य अभियोजन की ताकत को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस प्रकार से दोषसिद्धि में मदद करते हैं। गवाहों के बयान में वीडियो कांफ्रेंसिंग वैध तरीका बना जस्टिस सिंह ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)के नये नियमों का उल्लेख करते हुए बताया कि यह अधिनियम डिजिटल साक्ष्य की स्वीकृति को आसान बनाता है, जिसमें वीडियो कॉलिंग के माध्यम से दर्ज मौखिक बयान और वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं। उन्होंने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC)की धारा 273 का उदाहरण देते हुए बताया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग अब एक वैध तरीका बन गया है, जिसके द्वारा गवाहों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं। उन्होंने डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड (जैसे स्कैन किए गए पीडीएफ, सीसीटीवी फुटेज) और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (जैसे ईमेल, एसएमएस, सर्वर लॉग्स) दो अलग-अलग प्रकार के होते हैं। उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63 का हवाला देते हुए बताया कि डिजिटल रिकॉर्ड को प्रमाणिक बनाने के लिए यह आवश्यक है कि डिवाइस नियमित रूप से इस्तेमाल में हो, डेटा सामान्य रूप से दर्ज किया गया हो और डिवाइस की कार्यशीलता सही हो।