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मेधावी छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, शोध और नेतृत्व में उत्कृष्टता प्राप्त करने का अवसर देना योजना का उद्देश्यः मुख्यमंत्री

युवाओं को ग्लोबल लीडरशिप रोल के लिए तैयार करने का माध्यम बनेगी चिवनिंग-यूपी छात्रवृत्ति योजना: सीएम योगी  मेधावी छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, शोध और नेतृत्व में उत्कृष्टता प्राप्त करने का अवसर देना योजना का उद्देश्यः मुख्यमंत्री   योगी सरकार ने दिया वैश्विक शिक्षा का अवसर, अब यूपी के छात्र पढ़ेंगे यूके में अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर “चिवनिंग-यूपी छात्रवृत्ति योजना”की हुई शुरुआत मुख्यमंत्री की उपस्थिति में प्रदेश सरकार और एफसीडीओ-यूके के बीच ऐतिहासिक एमओयू  हर साल पांच मेधावी छात्रों को मिलेगी यूनाइटेड किंगडम में मास्टर डिग्री की स्कॉलरशिप 2025-26 से तीन वर्षों तक संचालित होगी योजना, 2028-29 से किया जाएगा नवीनीकृत  प्रति छात्र आएगा ₹45 से ₹48 लाख का खर्च, प्रदेश सरकार ₹23 लाख रुपए तक करेगी वहन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में उनके सरकारी आवास पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार और द फॉरेन कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (एफसीडीओ) यूके के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ। इसके तहत “चिवनिंग-भारत रत्न श्री अटल बिहारी बाजपेयी उत्तर प्रदेश राज्य सरकार छात्रवृत्ति योजना” शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत हर साल प्रदेश के पांच प्रतिभाशाली छात्रों को यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में मास्टर डिग्री के लिए छात्रवृत्ति दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी सरकार प्रतिभाशाली छात्रों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाने के लिए कार्य कर रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह छात्रवृत्ति योजना प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने और युवाओं को “ग्लोबल लीडरशिप रोल” के लिए तैयार करने का सशक्त माध्यम बनेगी। छात्रों को मिलेगा वैश्विक एक्सपोजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य मेधावी विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, शोध और नेतृत्व में उत्कृष्टता प्राप्त करने का अवसर देना है। यह योजना शैक्षणिक सत्र 2025-26 से तीन वर्षों तक (2025-26, 2026-27 और 2027-28) संचालित होगी। इसके बाद 2028-29 से योजना को नवीनीकृत किया जाएगा। भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी जी की प्रेरणा से प्रारंभ की गई यह योजना प्रदेश के युवाओं को वैश्विक शिक्षा और नेतृत्व में नई ऊंचाइयां हासिल करने का अवसर देगी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएं। पूरी पढ़ाई और खर्च का प्रावधान इस छात्रवृत्ति में पूर्ण शिक्षण शुल्क, परीक्षा व शोध शुल्क, रहने-खाने का भत्ता तथा यूके तक आने-जाने का हवाई किराया शामिल रहेगा। प्रति छात्र लगभग £38,048 से £42,076 (लगभग ₹45 से ₹48 लाख) का खर्च आएगा। इसमें से उत्तर प्रदेश सरकार लगभग £19,800 (₹23 लाख) वहन करेगी, शेष राशि का वहन एफसीडीओ यूके करेगा। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने भी पहल को सराहा ब्रिटिश हाई कमिश्नर टू इंडिया, लिंडी कैमरन ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष हुए एमओयू पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि लखनऊ आकर इस समझौते पर हस्ताक्षर करना बेहद खुशी की बात है। इस नई चिवनिंग स्कॉलरशिप के तहत अगले तीन वर्षों तक हर साल पांच छात्रों को यूके में पूर्ण छात्रवृत्ति पर पढ़ाई का अवसर मिलेगा। यह यूनाइटेड किंगडम और भारत के बीच बढ़ते रिश्तों का प्रतीक है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी जी की यूके विजिट के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा ट्रेड एग्रीमेंट और विजन 35 साइन किया गया है, जिससे शिक्षा के साथ-साथ व्यापार के शानदार अवसर भी खुलेंगे। इस साझेदारी से भारत और विशेषकर उत्तर प्रदेश के छात्रों को वैश्विक मंच पर बड़ा फायदा होगा।    

योगी सरकार गोरखपुर में बनवा रही स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट

दो माह तैयार हो जाएगा यूपी का पहला एसआईएचएम योगी सरकार गोरखपुर में बनवा रही स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट 48.39 करोड़ रुपये की आ रही लागत, निर्माण कार्य 95 प्रतिशत पूर्ण टूरिज्म, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए चलेंगे कोर्स योगी सरकार में तेजी से हुआ है हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का विकास दक्ष मानव संसाधन की मांग को पूरा करने में एसआईएचएम की होगी अहम भूमिका गोरखपुर  प्रदेश का पहला स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एसआईएचएम) दो माह में तैयार हो जाएगा। योगी सरकार द्वारा गोरखपुर में 48.39 करोड़ रुपये की लागत से बनवाए जा रहे एसआईएचएम के पहले फेज का 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो गया है। पर्यटन विभाग द्वारा अगले माह के अंत तक शत प्रतिशत कार्य पूर्ण कराया जाना लक्षित किया गया है।  बीते कुछ सालों में गोरखपुर का टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ा है। यहां कई बड़े ब्रांड के होटल्स, रेस्टोरेंट खुल चुके हैं और कई खुलने की प्रक्रिया में हैं। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में कुशल पेशेवरों की मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में प्रदेश का पहला स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एसआईएचएम) बनवा रहे हैं। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) के कार्यालय के सामने बन रहे एसआईएचएम का निर्माण सितंबर माह तक पूरा हो जाएगा और अगले शैक्षिक सत्र से यहां होटल एंड टूरिज्म मैनजमेंट से जुड़े डिप्लोमा और डिग्री के पाठ्यक्रम संचालित होने लगेंगे।  स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, पर्यटन विभाग का प्रोजेक्ट है। इसका निर्माण कार्यदायी संस्था के रूप में सी एंड डीएस यूनिट-14 द्वारा कराया जा रहा है। इस परियोजना पर निर्माण कार्य 26 सितंबर 2023 को प्रारंभ हुआ था। वर्तमान समय में 38.42 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च कर 95 प्रतिशत कार्य पूरे कर लिए गए हैं और इसी साल 25 सिंतबर तक कार्य पूर्ण किया जाना है। निर्माण के पहले चरण में दो ब्लॉकों में प्रशासनिक कक्ष, क्लास रूम, कॉमन हाल, किचन के अलावा अंडरग्राउंड पार्किंग, इलेक्ट्रिफिकेशन, फायर सेफ्टी, पाइपलाइन आदि के कार्य पूर्ण कराए जा रहे हैं। उप निदेशक पर्यटन राजेंद्र प्रसाद यादव मिश्रा बताते हैं कि कि स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट का निर्माण कार्य अगले माह (सितंबर) तक पूरा हो जाएगा, इस समय फिनिशिंग का काम चल रहा है। अगले माह के बाद कभी भी इसका लोकार्पण हो सकता है।  उम्मीद जताई जा रही है कि अगले शैक्षिक सत्र से यहां ग्लोबल डिमांड के अनुरूप होटल, टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी मैनजमेंट के कोर्स शुरू कर दिए जाएंगे। स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में कोर्स शुरू हो जाने के बाद युवाओं को रोजगारपरक पढ़ाई के लिए नए विकल्प मिल जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से गोरखपुर में जिस तरह से पर्यटन विकास हो रहा है उससे होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।  दूसरे चरण में ब्वॉयज एंड गर्ल्स हॉस्टल का भी निर्माण शुरू स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के दूसरे चरण के निर्माण में ब्वॉयज एंड गर्ल्स हॉस्टल बनाया जा रहा है। दूसरे चरण की परियोजना के निर्माण पर 46.81 करोड़ रुपये की लागत आएगी। निर्माण कार्य 15 मई से शुरू है। फिलहाल निर्माण कार्य की भौतिक प्रगति 14 प्रतिशत है। पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि मई 2027 तक कार्य पूरा करा लिया जाएगा। एसआईएचएम प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में 128 रूम का पांच मंजिला ब्वॉयज हॉस्टल और 84 रूम का पांच मंजिला गर्ल्स हॉस्टल बनाया जा रहा है।

भोपाल में 25 स्कूल बने आधार कार्ड सेंटर, बच्चों को मिलेगा नया और अपडेशन दोनों का फायदा

भोपाल बच्चों के आधार कार्ड अपडेट कराने वाले अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर है। भोपाल के स्कूलों में आधार कार्ड सेंटर शुरू होने जा रहे हैं। इन सेंटर पर नए कार्ड से लेकर सुधार और अपडेट के लिए काम किया जाएगा। आधार कार्ड में कहीं छात्र का नाम गलत था तो कहीं माता पिता के नाम में खामी मिल रही हैं। विद्यार्थियों के स्कूल में दर्ज रेकॉर्ड और आधार कार्ड में इस तरह की गड़बड़ियां सबसे ज्यादा आ रही हैं। नतीजतन करीब 20 प्रतिशत विद्यार्थियों का रेकॉर्ड अपडेट नहीं हो पाया। स्कूली बच्चों के आधार कार्ड में सुधार के लिए संकुल स्तर पर सेंटर बनेंगे। राजधानी में बीस से 25 सेंटर होंगे। यह केवल स्कूली बच्चों के लिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसके लिए विशेष व्यवस्था की है। स्कूली बच्चों के दस्तावेजों में सुधार के लिए सेंटर बनाने के लिए निर्देश दिए है। संकुलवार यह केन्द्र बनेंगे। आधार कार्ड में सुधार और अपडेशन कराने में आसानी है। अरविंद चौरगढ़े, संयुक्त संचालक सुधार करवाने में जुटे अभिभावक सुभाष नगर निवासी राकेश ने बताया कामकाज छोड़ कर बच्चों के दस्तावेजों का रिकॉर्ड सुधार करवा रहे हैं। नगर निगम और आधार कार्ड सेंटर के चक्कर काट रहे हैं। अभिभावक संगठन के पीके पांड्या ने बताया कि रिकॉर्ड सुधार करवाया जा रहा है ये बेहतर है। लेकिन इसके लिए सुविधा दी जाए। कई लोगों को दिक्कत आ रही है। सांदीपनी स्कूल रशीदिया के प्राचार्य केडी श्रीवास्तव ने बताया आधार कार्ड के लिए सेंटर बनाया गया था। आगे भी व्यवस्था रहेगी। कैंप में ये सुविधा बच्चों के फिंगर प्रिंट, आंखों की स्केनिंग और फोटो अपलोड किए जाएंगे। आज से सात साल के बच्चों का आधार कार्ड मुफ्त में अपग्रेड होगा। दो लाख बच्चों के रिकॉर्ड होने हैं दर्ज राजधानी में सरकारी और गैरसरकारी मिलाकर करीब 1500 स्कूल हैं। करीब डेढ़ से दो लाख बच्चों के रिकॉर्ड को डिजिटल कराया जा रहा है। इस रिकॉर्ड में आधार कार्ड से लेकर समग्र आइडी, अपार आइडी और जन्म प्रमाण पत्र शामिल हैं। माता पिता का ब्योरा भी इसमें शामिल किया जा रहा है। अधिकांश अभिभावक दस्तावेजों में छोटी-छोटी गलतियों में सुधार के लिए परेशान हैं। सबसे ज्यादा गलतियां आधार कार्ड में सामने आई हैं।

तीन दिनों में 23 लाख जमाबंदी पंजी की प्रतियां जनता तक पहुँची, राजस्व महा-अभियान जारी

राजस्व महा–अभियान : तीन दिनों में 23 लाख से अधिक जमाबंदी पंजी की प्रतियों का हुआ वितरण तीन दिनों में 23 लाख जमाबंदी पंजी की प्रतियां जनता तक पहुँची, राजस्व महा-अभियान जारी राजस्व महा-अभियान का बड़ा आंकड़ा: 3 दिन में 23 लाख से अधिक दस्तावेजों का वितरण जमाबंदी पंजी के वितरण में शेखपुरा पहले स्थान पर  दूसरे नंबर पर जहानाबाद, तीसरे नंबर पर कैमूर, चौथे नंबर पर  नवादा एवं पांचवें नंबर पर है पूर्णिया पटना   राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा चलाए जा रहे राजस्व महा–अभियान में महज 16 अगस्त से 18 अगस्त तक तीन दिनों में ही बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्यभर में तीन दिनों में अबतक 23 लाख से अधिक जमाबंदी पंजी की प्रतियां रैयतों के बीच वितरित की जा चुकी हैं। सर्वाधिक जमाबंदी के वितरण में शेखपुरा पहले स्थान पर है। वहां कुल जमाबंदी के 24.02 फीसदी जमाबंदी प्रतियों का वितरण किया गया है। दूसरे नंबर पर जहानाबाद, तीसरे नंबर पर कैमूर, चौथे नंबर पर  नवादा एवं पांचवें नंबर पर पूर्णिया है। जहानाबाद में 14.48 फीसदी, कैमूर में 13.78 फीसदी, नवादा में 13.72 फीसदी एवं पूर्णिया में 11.35 फीसदी जमाबंदी की प्रतियों का वितरण तीन दिनों में कर दिया गया है। छठे स्थान पर अररिया है। यहां 11.16 फीसदी वितरण हुआ है। सातवें स्थान पर खगड़िया है। यहां 11.15 फीसदी वितरण हुआ है। आठवें स्थान पर वैशाली है और यहां 10.41 फीसदी जमाबंदी की प्रति का वितरण हो गया है। नौवें स्थान पर गोपालगंज एवं दसवें स्थान पर किशनगंज है। यहां क्रमशः 10.28 फीसदी एवं 9.29 फीसदी जमाबंदी की प्रतियों का वितरण रैयतों के बीच कर दिया गया है। बताते चलें कि राज्य के सभी 38 जिलों में कुल जमाबंदी की संख्या 3 करोड़, 59 लाख, 88 हजार 935 है। तीन दिन में सभी जिलों में कुल 23 लाख 08 हजार 574 जमाबंदी प्रति का वितरण रैयतों के बीच कर दिया गया है। ये कुल जमाबंदी का 6.41 फीसदी है। इस अभियान के तहत गांव–गांव जाकर राजस्व विभाग की टीमें लोगों को उनकी जमीन से जुड़ी जमाबंदी की प्रति उपलब्ध करा रही है। टीम द्वारा जमाबंदी की प्रति के साथ–साथ आवश्यक आवेदन प्रपत्र भी मौके पर  उपलब्ध कराई जा रही है। इस राजस्व महा–अभियान के दौरान जमीन के अभिलेखों की अशुद्धियों का त्वरित सुधार, बंटवारा नामांतरण, उत्तराधिकार   नामांतरण और छूटी हुई   जमाबंदियों को ऑनलाइन करने का काम हो रहा है। इस महा–अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को अपने कागजात में सुधार के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत दिलाना है।

राशन कार्ड धारकों के लिए नई व्यवस्था, मुफ्त गेहूं अब मशीनों के जरिए मिलेगा

लुधियाना  पंजाब में मुफ्त गेहूं पाने वाले राशन कार्ड धारकों के लिए बुरी खबर है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, राशन डिपो पर लाभार्थी परिवारों को वितरित किया जा रहा गेहूं फिलहाल केवल उन्हीं लोगों को दिया जा रहा है जिन्होंने ई-के.वाई.सी. करवाया है क्योंकि ई-पॉश मशीन से केवल उनकी ही पर्चियां जारी हो रही हैं। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' से जुड़े परिवारों को दिए जा रहे मुफ्त गेहूं में लंबे समय से चल रहे घोटाले को रोकने के लिए सख्त रवैया अपनाया है, ताकि सरकारी अनाज की लगातार हो रही कालाबाजारी को रोका जा सके। सरकार ने इस योजना से जुड़े हर सदस्य को आदेश दिया है कि राशन कार्ड धारक अपने क्षेत्र के नजदीकी राशन डिपो पर जाकर मुफ्त में अपना ई-के.वाई.सी. करवा लें, अन्यथा उन्हें राशन डिपो से मिलने वाला मुफ्त गेहूं नहीं मिलेगा। यहां यह बताना महत्वपूर्ण है कि इस मौजूदा चरण के दौरान, केंद्र सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से जुड़े लाभार्थी परिवारों को जुलाई से सितंबर तक 3 महीने के लिए मुफ्त गेहूं वितरित कर रही है। 

सपा नेता को कार से खींचकर पीटा गया, प्लाजा कर्मियों पर बढ़ा गुस्सा

बाराबंकी यूपी में टोलकर्मियों की गुंडई लगातार सामने आ रही है। पहले मेरठ में सेना को पीटा गया अब बाराबंकी जिले में सपा नेता की पिटाई हुई है। जिसकी शिकायत पीड़ित ने पुलिस में दर्ज कराई है। आपको बता दें कि यह मामला लखनऊ बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग के शहाबपुर टोल प्लाजा का है। बूढ़ीपट्टी ग्राम प्रधान और सपा नेता देवेंद्र यादव घर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान टोल गेट से VIP मूमेंट हो रहा था। जिससे शहाबपुर टोल प्लाजा पर वाहनों की लम्बी कतारें लगी हुई थी, वीआईपी वाहन पास होने के बाद भी टोल गेट को चालू न करने पर सपा नेता ने टोलकर्मी से वाहन पास करने के गेट खोलने को कहा तो टोल कर्मियों से बहस शुरू हो गई। कुछ समय में टोल कर्मी आग बबूला होकर सपा नेता पर टूट पड़े। आरोप है कि सपा नेता को कार से खींच कर जमकर लात-घुसों से पिटाई कर दी। पीड़ित प्रधान ने थाना मसौली मे टोलकर्मियों के विरुद्ध मारपीट की तहरीर दी है।

हाईकोर्ट सख्त: शराब घोटाले में आरोपी 22 अफसरों को आत्मसमर्पण का आदेश

रायपुर  छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में 22 आबकारी अधिकारियों को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए सख्त रुख अपनाया। जस्टिस अरविंद वर्मा ने कहा कि इतने बड़े घोटाले में आरोपियों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने सलाह दी कि आरोपी निचली अदालत में सरेंडर करें और वहां से जमानत के लिए आवेदन करें। इस फैसले से अधिकारियों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। EOW की जांच में क्या खुलासा हुआ? आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो यानी ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच पूरी कर ली है। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि ओवर बिलिंग, नकली बारकोड और डमी कंपनियों के माध्यम से अवैध वसूली की गई। यह सब आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ। शराब दुकानों को सरकारी रिकॉर्ड में खपत दर्ज न करने के निर्देश थे, और बिना टैक्स चुकाए डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब सप्लाई होती थी। जांच के मुताबिक, फरवरी 2019 से शुरू हुए इस घोटाले में तीन साल में 60 लाख से अधिक शराब की पेटियां अवैध रूप से बेची गईं। शुरुआत में 200 ट्रक (800 पेटी प्रति ट्रक) प्रतिमाह सप्लाई होती थी। जब कोई विवाद नहीं हुआ तो इनलोगों ने 400 ट्रक तक सप्लाई कर दी। इतना ही नहीं प्रति पेटी की कीमत भी 2,840 से बढ़कर 3,880 रुपये कर दी गई। 22 आबकारी अधिकारी निशाने पर EOW ने 22 आबकारी अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। इन सभी को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है। इन पर आरोप है कि वे एक संगठित सिंडिकेट का हिस्सा थे, जिसके जरिए 88 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की गई। कोर्ट ने पहले ही इन अधिकारियों को 20 अगस्त तक पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाओं में अधिकारियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए फंसाने का आरोप लगाया और कुछ ने स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। आरोपियों ने याचिका में दावा किया कि वे निर्दोष हैं और उन्हें झूठे केस में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे EOW की जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। कई अधिकारियों ने अपनी स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देकर जमानत मांगी, लेकिन हाईकोर्ट ने इन तर्कों को नामंजूर कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे संगठित अपराध में कठोर कार्रवाई जरूरी है, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से याचिकाओं का विरोध किया गया। शासन ने कोर्ट को बताया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, जिससे चालान पेश करने में देरी हो रही है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। 22 आबकारी अधिकारियों पर EOW ने केस दर्ज किया है, जिन्हें राज्य सरकार ने पहले ही निलंबित कर दिया था। जांच में पता चला कि ये अधिकारी सिंडिकेट का हिस्सा थे, और उन्हें 88 करोड़ रुपये से अधिक की रकम मिली थी। इस घोटाले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। EOW और ACB की जांच में विदेशी शराब कमीशन, धन शोधन, और राजनीतिक संरक्षण की परतें खुल रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। विपक्षी कांग्रेस ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है। कोर्ट के इस फैसले से आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों की गिरफ्तारी से घोटाले की और परतें खुल सकती हैं। जनता की नजर अब EOW की अगली कार्रवाई पर टिकी है, जो शराब घोटाले में शामिल अन्य लोगों को भी उजागर कर सकती है। ये है आरोपी अधिकारी जनार्दन कौरव, पिता पंचम सिंह, उम्र 50 वर्ष, सहायक जिला आबकारी अधिकारी। अनिमेष नेताम, पिता आनंद नेताम, उम्र 49 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। विजय सेन शर्मा, पिता पीसी सेन शर्मा, उम्र 48 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। अरविंद कुमार पाटले, पिता नेवल सिंह पाटले, उम्र 49 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। प्रमोद कुमार नेताम, पिता स्व. श्याम लाल नेताम उम्र 60 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। रामकृष्ण मिश्रा, पिता शैलेन्द्र मिश्रा, उम्र 36 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। विकास कुमार गोस्वामी, पिता विनोद गोस्वाम, उम्र 44 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। इकबाल खान, पिता महूम मोहम्मद स्माईल खान, उम्र 56 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी। नितिन खंडुजा, पिता रवीन्द्र खंडुजा, उम्र 53 वर्ष, सहायक जिला आबकारी अधिकारी। नवीन प्रताप सिंग तोमर, पिता भगवान सिंह तोमर, उम्र 43 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। मंजुश्री कसेर, पति रामचन्द्र सारस, उम्र 47 वर्ष, सहायक आबकारी अधिकारी। सौरभ बख्शी, पिता राजीव बख्शी, उम्र 41 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। दिनकर वासनिक, पिता डॉ पीएल वासनिक, उम्र 42 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। मोहित कुमार जायसवाल, पिता रामलाल जायसवाल, उम्र 46 वर्ष, अधिकारी जिला आबकारी। नीतू नोतानी ठाकुर, पति मोहन दास नोतानी, उम्र 45 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। गरीबपाल सिंह दर्दी, पिता दिलबाग सिंह दर्दी, उम्र 59 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी। नोहर सिंह ठाकुर, पिता गौतम सिंह ठाकुर, उम्र 45 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। सोनल नेताम, पिता एम. एस. नेताम, उम्र 36 वर्ष, सहायक आयुक्त, आबकारी। प्रकाश पाल, पिता सपन कुमार पाल, उम्र 44 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। अलेख राम सिदार, पिता मुरलीधर सिदार, उम्र 34 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। आशीष कोसम, पिता बृजलाल कोसम, उम्र 50 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। राजेश जायसवाल, पिता हरीप्रसाद जायसवाल, उम्र 42 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।

3 साल में 22,500 पुलिसकर्मी भर्ती होंगे, CM यादव की घोषणा पर तेज हुई प्रक्रिया

भोपाल  मध्य प्रदेश के पुलिस थानों में खाली पड़े हजारों पद जल्दी भर लिए जायेंगे, सरकार ने इसकी तैयारियां तेज कर दी है, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बीते 15 अगस्त को घोषणा करते हुए कहा कि अगले तीन साल में ये भर्तियाँ हो जायेंगी इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने भर्तियों के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन की भी घोषणा की। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री डॉ मोहन यादव की घोषणा के बाद से प्रदेश के युवा उत्साहित हैं, विशेष रूप से उन युवाओं में बहुत उत्साह है जो लंबे समय से पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे थे और खाकी वर्दी पहनने का सपना दिल में संजोये बैठे हैं, उनके सपने जल्दी ही हकीकत में बदलने वाले हैं। सीएम डॉ मोहन यादव ने 15 अगस्त को पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मेरी जानकारी में आया है हमने  7500 पदों पर भर्ती की अनुमति दी है लेकिन अभी भी 20 हजार पद पुलिस विभाग में खाली है, उन्होंने कहा कि हम अगले तीन सालों में सभी खाली पदों को भर देंगे। सीएम ने की पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की घोषणा  सीएम ने पुलिस के आला अधिकारियों की तरफ देखते हुए कहा कि पहले ये भर्तियाँ कर्मचारी चयन मंडल करता था  जिसमें कई तरह की परेशानियाँ आती थी इसलिए आप इसके लिए बोर्ड बनाइये मैं पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की घोषणा करता हूँ, जिससे आप अपने हिसाब से भर्ती कर सकेंगे।  इससे पुलिस भर्ती में तेजी, पारदर्शिता और परफेक्शन आएगा। तीन वर्ष तक हर साल होगी 7500 पदों पर भर्ती  मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 के लिए पुलिस में स्वीकृत पदों की भर्ती मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से कर्मचारी चयन मंडल करेगा। वर्ष 2026 से ये भर्तियां पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा ही की जाएंगी। प्रतिवर्ष पुलिस के रिक्त 7500 पदों पर भर्ती की जाएगी और इस प्रकार आगामी 3 वर्ष में पुलिस विभाग के सभी रिक्त 22,500 पद भर दिए जाएंगे। वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात अफसरों के लिए ये घोषणा   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस, जेल और नगर सेवा एवं सुरक्षा तीनों विभागों के शहीदों की विधवाओं और बच्चों के लिए स्नातक स्तर के सभी पाठ्यक्रमों में विभिन्न प्राथमिकता श्रेणियां में एक अतिरिक्त सीट पर आरक्षण दिये जाने की घोषणा भी की है। वीवीआइपी ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों सहित उप पुलिस अधीक्षक और इससे उच्च अधिकारियों को भी पात्रता अनुसार निर्धारित विशेष भत्ता एवं जोखिम भत्ता दिये जाने का निर्णण भी लिया गया है।

शनि देव की कृपा पाने और साढ़ेसाती का असर कम करने के लिए पिठोरी अमावस्या पर करें ये उपाय

इस साल शुक्रवार को 22 अगस्त के दिन भाद्रपद मास की पिठोरी अमावस्या है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस समय मेष, कुंभ और मीन राशि वालों पर शनि की साढेसाती चल रही है। वहीं, सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैया का प्रभाव है। मान्यता है की पिठोरी अमावस्या पर कुछ उपाय कर लेने से शनि की साढेसाती, महा दशा और ढैया के बुरे प्रभाव को कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं पिठोरी अमावस पर शनि देव के बुरे प्रभावों से राहत पाने के लिए क्या करना चाहिए- शनि साढ़ेसाती का प्रभाव कम करने के लिए पिठोरी अमावस्या पर करें ये उपाय     पिठोरी अमावस्या पर शिव जी की उपासना करने से शनि देव के बुरे प्रभाव को कम कर सकते हैं। इस दिन भगवान शिव का विधिवत पूजन करने से विशेष फल प्राप्ति की होती है।     शिवलिंग का पंचामृत से जलाभिषेक करें।     शिव मंदिर में दीपक जलाएं।     शनि की साढ़ेसाती का बुरा प्रभाव कम करने, पितृ दोष और सर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए शिवलिंग पर धतूरा, बेलपत्र, कच्चा दूध चढ़ाएं। इससे परिवार में सुख-शांति का माहौल बना रहता है।     शिव चालीसा का पाठ करें।     शनि मंदिर में सरसों के तेल में काला तिल डालकर प्रदोष काल में दीपक जलाएं।     सरसों के तेल, काला तिल, कंबल व अन्न का दान करें।     किसी गरीब को भोजन कराएं।     शिवलिंग पर काला तिल अर्पित करें। पढ़ें श्री शनि चालीसा दोहा जय-जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महराज। करहुं कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज।। चौपाई जयति-जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला।। चारि भुजा तन श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छवि छाजै।। परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला।। कुण्डल श्रवण चमाचम चमकै। हिये माल मुक्तन मणि दमकै।। कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल विच करैं अरिहिं संहारा।। पिंगल कृष्णो छाया नन्दन। यम कोणस्थ रौद्र दुःख भंजन।। सौरि मन्द शनी दश नामा। भानु पुत्रा पूजहिं सब कामा।। जापर प्रभु प्रसन्न हों जाहीं। रंकहु राउ करें क्षण माहीं।। पर्वतहूं तृण होई निहारत। तृणहंू को पर्वत करि डारत।। राज मिलत बन रामहि दीन्हा। कैकइहूं की मति हरि लीन्हा।। बनहूं में मृग कपट दिखाई। मात जानकी गई चुराई।। लषणहि शक्ति बिकल करि डारा। मचि गयो दल में हाहाकारा।। दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग वीर को डंका।। नृप विक्रम पर जब पगु धारा। चित्रा मयूर निगलि गै हारा।। हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी।। भारी दशा निकृष्ट दिखाओ। तेलिहुं घर कोल्हू चलवायौ।। विनय राग दीपक महं कीन्हो। तब प्रसन्न प्रभु ह्नै सुख दीन्हों।। हरिशचन्द्रहुं नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी।। वैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी मीन कूद गई पानी।। श्री शकंरहि गहो जब जाई। पारवती को सती कराई।। तनि बिलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरि सुत सीसा।। पाण्डव पर ह्नै दशा तुम्हारी। बची द्रोपदी होति उघारी।। कौरव की भी गति मति मारी। युद्ध महाभारत करि डारी।। रवि कहं मुख महं धरि तत्काला। लेकर कूदि पर्यो पाताला।। शेष देव लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई।। वाहन प्रभु के सात सुजाना। गज दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना।। जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी।। गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं।। गर्दभहानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा।। जम्बुक बुद्धि नष्ट करि डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै।। जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी।। तैसहिं चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लोह चांदी अरु ताम्बा।। लोह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन सम्पत्ति नष्ट करावैं।। समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सुख मंगल भारी।। जो यह शनि चरित्रा नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै।। अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्राु के नशि बल ढीला।। जो पंडित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शान्ति कराई।। पीपल जल शनि-दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत।। कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा।।

PA की हरकतों ने चौंकाया, बड़े अफसर और CM तक पहुंचा विवाद

लुधियाना राज्य जी.एस.टी. विभाग में अधिकारियों को पसंदीदा जिले हासिल कराने के नाम पर हो रही कथित धांधली चर्चा का विषय गर्माया हुआ है। सूत्रों के अनुसार इसी सन्दर्भ में एक उच्चाधिकारी के खास इंस्पैक्टर उर्फ पी.ए. को अचानक एक सिंगल ऑर्डर के तहत पटियाला से ट्रांसफर कर दिया गया है। जानकारी मिली है कि उक्त इंस्पैक्टर अधिकारियों से बदलियों व मनचाहे जिलों के लिए पैसे वसूल कर गैर-जरूरी अधिकारियों को पसंदीदा जिलों में तैनात करवा रहा था। इसे लेकर विभाग के ईमानदार अधिकारियों में काफी राहत मिली है क्योंकि इससे कई काबिल अधिकारी दूरस्थ या छोटे जिलों में लंबे समय तक फंसे रहते थे, जबकि कई सिफारशी अधिकारी बड़े व मुख्य स्टेशनों पर बने रहते थे। वहीं यह भी जांच का विषय है कि इंस्पैक्टर स्तर का अधिकारी किस की शह पर और ट्रांसफर रुकवा और करवा रहा था, उक्त किस उच्च अधिकारी के साथ मिलकर बदलियों का नेटवर्क चला रहा था। साथ ही उच्चाधिकारी के खिलाफ डिपार्टौंटल इन्क्वायरी होनी चाहिए या विजिलेंस ब्यूरो को ट्रांसफर धांधली के पीछे मास्टरमाइंड पर बनती कार्रवाई करनी चाहिए। एक स्थानीय कारोबारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लुधियाना स्टेशन में कई ऐसे अधिकारी हैं जो लंबे समय से यहीं स्थिर हैं और अधिकतर अधिकारी इस बड़े स्टेशन से हटना ही पसंद नहीं करते। अधिकारियों का कारोबारियों के साथ अच्छी सांठ-गांठ बनी होने के कारण ही ये अधिकारी लुधियाना में टिके रहते हैं। इससे अधिकारियों को कानून का अनुपालन करने में ये अधिकारी ढील देते हैं, जिसके एवज में अधिकारी उक्त अधिकारियों की जरूरतों का ध्यान रखते है।  लुधियाना के कारोबारियों ने अधिकारियों की स्थायी तैनाती पर लगाई आपत्ति  एक कारोबारी ने लुधियाना जिले में पदस्थ कुछ अधिकारियों की 5 से 6 वर्षों से स्थायी तैनाती को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि ये अधिकारी बिना विभागीय ट्रांसफर नीति का पालन किए लंबे समय से एक ही शहर में जमे हुए हैं और इसी दौरान कई अधिकारी लुधियाना में रहकर लगातार प्रमोशन भी प्राप्त कर चुके हैं। कारोबार ने इस स्थिति को प्रशासनिक अनियमितता बताते हुए पंजाब सरकार, मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के मुख्य सचिव को लिखित शिकायत भी सौंपी है। शिकायत में पूछा गया है कि इन अधिकारियों को इतनी लंबी अवधि तक एक ही जिले और पद पर नियुक्त रखने के पीछे क्या कारण है और वे किस आधार पर ट्रांसफर नीति का उल्लंघन कर प्रदेश के अन्य हिस्सों में तैनाती से बच रहे हैं।