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झारखंड में भी घोटाले की गूंज, ईडी की जांच में कई खुलासे सामने आए

रांची छत्तीसगढ़ के बाद अब झारखंड में भी शराब घोटाला केस में शिकंजा कसने की तैयारी है। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच कर रही वहां की ईडी ने अपने छठे पूरक आरोप पत्र में जिन्हें घोटाले का दोषी पाया है, उनका कनेक्शन झारखंड से भी है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के कार्यकाल में राज्य में छत्तीसगढ़ माडल पर लागू उत्पाद नीति में छत्तीसगढ़ के जिन पदाधिकारियों और वहां के शराब कारोबारियों का झारखंड में वर्चस्व था, सभी वहां चार्जशीटेड हैं। झारखंड में भी ईडी उनका हिसाब करेगी, क्योंकि उससे जुड़े केस झारखंड ईडी ने भी दर्ज किया है। झारखंड में ईडी ने शराब घोटाला से जुड़े केस में दो अलग-अलग इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआइआर) कर रखा है। इनमें एक ईसीआइआर रायपुर की आर्थिक अपराध इकाई में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर व दूसरी ईसीआइआर झारखंड एसीबी में 20 मई 2025 को दर्ज शराब घोटाले से संबंधित एफआइआर के आधार पर दर्ज है। दोनों ही ईसीआइआर उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग झारखंड के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के कार्यकाल से जुड़े हैं। आरोप है कि कमीशन में मोटी रकम लेकर छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के आरोपितों का झारखंड में शराब बिक्री में प्रवेश कराया। प्लेसमेंट एजेंसियों से लेकर शराब आपूर्ति कंपनियों तक को झारखंड में काम दिया। इन कंपनियों पर करोड़ों की हेराफेरी का आरोप लगा तो उन्हें बाद में ब्लैकलिस्ट किया गया। अब भी झारखंड सरकार का 450 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया छत्तीसगढ़ की उक्त आरोपित कंपनियों पर है, जिसकी वसूली के लिए सरकार प्रयासरत है। डक्यूमेंटेशन भी कर चुकी है झारखंड की ईडी, जांच जारी झारखंड की ईडी ने अपने यहां दर्ज शराब घोटाले के दोनों ही मामलों में मनी लांड्रिंग के बिंदु पर जांच के बाद निलंबित आइएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे व उनसे जुड़े अन्य आरोपितों के ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। उनसे छत्तीसगढ़ के रायपुर में दर्ज केस में भी पूछताछ की जा चुकी है। यहां भी ईडी ने उनसे पूछताछ की थी। उनके कार्यकाल में फर्जी बैंक गारंटी पर शराब की खुदरा दुकानों में मैनपावर आपूर्ति का ठेका लेने वाली प्लेसमेंट एजेंसियों के गिरफ्तार संचालकों से भी रिमांड पर पूछताछ की थी। झारखंड ईडी भी शराब घोटाले से जुड़े सबूत व बयान को जुटाती जा रही है, ताकि पुख्ता सबूत के साथ ईडी की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर सके। छत्तीसगढ़ में जिन कंपनियों पर चार्जशीट की, उन्हें झारखंड से भुगतान ईडी ने पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में जिन दो कंपनियों मेसर्स दीशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड व मेसर्स ओम साईं बिवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड पर चार्जशीट की है और उनकी चल-अचल संपत्ति जब्त की है, उनपर झारखंड के अधिकारी मेहरबान रहे हैं। पूर्व में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के तत्कालीन आयुक्त आईएएस अमित प्रकाश (अब सेवानिवृत्त) ने 11 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। यह भुगतान विभागीय मंत्री के रूप में योगेंद्र प्रसाद के शपथ ग्रहण व योगदान के कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें बताए बगैर किया गया था। यह भुगतान अमित प्रकाश ने अपनी सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले ही कर दिया था। छत्तीसगढ़ की इन दोनों ही कंपनियों ने झारखंड में वर्ष 2022 में थोक शराब की आपूर्ति की थी। उन्हें नवंबर 2024 में तत्कालीन आयुक्त ने भुगतान किया था। भुगतान वैसी स्थिति में किया गया था, जब छत्तीसगढ़ सिंडिकेट की ही झारखंड में काली सूची में डाली गई चार प्लेसमेंट एजेंसियों पर करीब 450 करोड़ रुपये का बकाया है। इन चार प्लेसमेंट एजेंसियों में मेसर्स एटूजेड इंफ्रा सविर्सस लिमिटेड, मेसर्स इगल हंटर सोल्यूशंस लिमिटेड, मेसर्स प्राइम वन वर्क फोर्स प्राइवेट लिमिटेड व मेसर्स सुमित फैसिलिटिज शामिल हैं। इस राशि की वसूली का मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

ईडी ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े नए छापों में 5.39 करोड़ रुपए की बरामदी की

रायपुर  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच तेज कर दी है और राज्य में कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाते हुए लगभग 5.39 करोड़ रुपए की नकदी और कीमती सामान जब्त किया है। इसकी जानकारी अधिकारियों ने दी। आधिकारिक बयान के अनुसार, ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस ने 30 अप्रैल को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत रायपुर, दुर्ग/भिलाई और बिलासपुर जिलों में स्थित 13 परिसरों में तलाशी अभियान चलाया। इस तलाशी अभियान में शराब व्यापारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंटों, व्यवसायियों और कॉरपोरेट संस्थाओं को निशाना बनाया गया, जिन पर घोटाले से जुड़े अपराध की आय को संभालने या छिपाने में संलिप्त होने का संदेह था। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने 53 लाख रुपए नकद और लगभग 3.234 किलोग्राम सोने के आभूषण और ईंटें बरामद कीं, जिनकी कीमत लगभग 4.86 करोड़ रुपए है। इसके अलावा, कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच चल रही है। ईडी आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) रायपुर द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर मामले की जांच कर रही है। अब तक की जांच से वरिष्ठ नौकरशाहों, शराब उत्पादकों, एफएल-10ए लाइसेंस धारकों और उनके सहयोगियों की मिलीभगत से एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का संकेत मिला है। कथित घोटाला छत्तीसगढ़ में 2019 से 2022 के बीच शराब की खरीद, लाइसेंसिंग और बिक्री में अवैध कमीशन की वसूली से संबंधित है। ईओडब्ल्यू/एसीबी के आरोप पत्रों के अनुसार, इस घोटाले के माध्यम से अर्जित अपराध की कुल धनराशि लगभग 2,883 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। ईडी ने अब तक पीएमएलए की धारा 19 के तहत नौ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक, तत्कालीन आबकारी आयुक्त, तत्कालीन आबकारी मंत्री, तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र और मुख्यमंत्री के एक उप सचिव सहित अन्य लोग शामिल हैं। इस जांच में शराब बनाने वालों, नकदी संभालने वालों, हवाला संचालकों, लाइसेंस धारकों और राजनीतिक मध्यस्थों की भूमिका सहित कई पहलुओं को शामिल किया गया है।अधिकारियों ने बताया कि पीएमएलए के तहत अब तक छह अंतरिम कुर्की आदेश (पीएओ) जारी किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 380 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों की कुर्की की गई है। इनमें आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां, बैंक खाते, वाहन, आभूषण और आरोपी तथा उनकी कथित बेनामी संस्थाओं से जुड़े शेयर शामिल हैं। नई दिल्ली स्थित न्याय निर्णायक प्राधिकरण द्वारा इनमें से कई कुर्कियों की पुष्टि की जा चुकी है। ईडी ने रायपुर स्थित पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत में 81 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ छह अभियोग भी दायर किए हैं। ये मामले फिलहाल विशेष अदालत, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय सहित विभिन्न न्यायिक मंचों में चल रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि हालिया तलाशी में और सबूत मिले हैं, और इन निष्कर्षों के आधार पर अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें और दस्तावेज जमा करना और अभियोग लगाना शामिल है। मामले में आगे की जांच जारी है।

बैज का बयान: बड़ी मछलियां अभी भी रडार से बाहर, ED की कार्रवाई जारी

रायपुर छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को रायपुर और महासमुंद में 9 ठिकानों पर दबिश दी. ईडी की कार्रवाई को लेकर सियासी बजानबाजी तेज है. मंत्री टंकराम वर्मा का कहना है कि जो भी भ्रष्टाचार करेगा, वह बचने वाला नहीं है. किसी को बक्शा नहीं जाएगा. वहीं पीसीसी चीफ दीपक बैज ने ईडी की कार्रवाई को खानापूर्ति बताया है. रायपुर और महासमुंद में 9 ठिकानों पर पड़े ईडी के छापे को लेकर मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. जो भ्रष्टाचार करेगा, वह बचाने वाला नहीं है. इस मामले में संभाग आयुक्त भी नजर रखे हुए हैं. बाकी बची सभी रिपोर्ट को मंगवाया जा रहा है. उस पर भी कार्रवाई भी होगी. इसलिए जमीन में भ्रष्टाचार रोकने के लिए विधानसभा में विधेयक लाया गया था. दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज ने ईडी की कार्रवाई को खानापूर्ति बताया. उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियां केवल छोटी मछलियों पर कार्रवाई कर रही है. भारत माला मुआवजा घोटाले में बड़ी मछलियां रडार से बाहर हैं. ईडी खानापूर्ति करने कार्रवाई कर रही है. आरोप लगाते हुए कहा कि मामले में बीजेपी के बड़े नेताओं का नाम भी आ रहा है. 9 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी बता दें कि आज सुबह रायपुर में हरमीत खनूजा और महासमुंद में कारोबारी जसबीर सिंह बग्गा के घर पर ईडी की टीम ने छापेमारी की. अधिकारियों की सात अलग-अलग टीमें जांच करने के लिए पहुंची थी. वह कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है. घर के भीतर जांच चल रही है, जबकि बाहर सुरक्षा के पुलिस बल तैनात है.

शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई: ED ने दाखिल किया 29,000+ पन्नों का अंतिम चालान, 82 आरोपी कटघरे में

रायपुर छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED ने आज कोर्ट में लगभग 29 हजार 800 से अधिक पन्नों का अंतिम चालान पेश किया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 82 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई है. अब मामले का ट्रायल शुरू होगा. क्या है शराब घोटाला ? छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है. ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है. दर्ज FIR में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है. इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है. ED ने अपनी जांच में पाया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था. अब तक इनकी हो चुकी है गिरफ्तारी शराब घोटाला मामले में अब तक कई बड़े नामों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, सौम्य चौरसिया शामिल हैं। इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

शराब घोटाले में बड़ा खुलासा: सौम्या चौरसिया को दिए गए 115 करोड़, ED ने विशेष अदालत से रिमांड की मांग

रायपुर छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य प्रशासनिक सेवा की निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद ईडी ने उन्हें विशेष अदालत में पेश किया, जहां आगे की पूछताछ के लिए तीन दिन की रिमांड मांगी गई है। ईडी का दावा है कि जांच में शराब और कोयला घोटाले से जुड़े कई अहम आर्थिक लेन-देन और डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं। बता दें कि ईडी ने सौम्या चौरसिया को मंगलवार को शराब घोटाला मामले में पूछताछ के लिए तलब किया था। घंटों चली पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद बुधवार को उन्हें रायपुर स्थित विशेष अदालत में पेश किया गया। जहां बचाव पक्ष की ओर से हर्षवर्धन परघनिया और डॉ. सौरभ कुमार पांडे ने, जबकि ईडी की ओर से पक्ष रखा गया। ईडी का दावा है कि जांच में शराब और कोयला घोटाले से जुड़े कई अहम आर्थिक लेन-देन और डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं। ईडी ने सौम्या से पूछताछ के लिए विशेष अदालत से तीन दिन की रिमांड मांगी है।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। 3200 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच ईडी के अनुसार, यह मामला करीब 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में राज्य की शराब नीति में बदलाव कर चहेती कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया। लाइसेंस की शर्तें इस तरह तय की गईं कि कुछ चुनिंदा कंपनियों को ही काम मिल सके। नकली होलोग्राम और टैक्स चोरी का खेल जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों ने नोएडा की एक फर्म के माध्यम से नकली होलोग्राम और सील तैयार करवाई। इन्हीं नकली होलोग्राम लगी महंगी शराब की बोतलों को सरकारी दुकानों के जरिए बेचा गया। चूंकि होलोग्राम फर्जी थे, इसलिए बिक्री का पूरा रिकॉर्ड शासन के सिस्टम में दर्ज नहीं हो पाया और बिना एक्साइज टैक्स दिए शराब की बिक्री होती रही। इससे राज्य सरकार को करीब 2165 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। सौम्या चौरसिया तक पहुंची 115 करोड़ की रकम ईडी के रिमांड आवेदन में दावा किया गया है कि शराब घोटाले से जुड़े करीब 115 करोड़ रुपये लक्ष्मीनारायण बंसल के माध्यम से सौम्या चौरसिया तक पहुंचे। इसके अलावा, आरोपी तांत्रिक केके श्रीवास्तव से पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि घोटाले की करीब 72 करोड़ रुपये की राशि हवाला के जरिए इधर-उधर की गई। कोयला घोटाले की डायरी से भी खुलासा ईडी ने यह भी बताया कि कोयला घोटाले की जांच के दौरान मिली एक डायरी में 43 करोड़ रुपये की ऐसी रकम का जिक्र है, जिसका संबंध शराब घोटाले से बताया जा रहा है। इस डायरी में अनवर ढेबर और पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा के नामों का भी उल्लेख है। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई ईडी के अनुसार, लक्ष्मीनारायण बंसल और केके श्रीवास्तव से मिली जानकारियों के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी की गई है। ईडी के वकील सौरभ पांडे ने अदालत को बताया कि मामले में गहन पूछताछ जरूरी है, इसलिए रिमांड की मांग की गई है। पहले भी रह चुकी हैं जेल में गौरतलब है कि सौम्या चौरसिया कोयला घोटाला मामले में भी प्रमुख आरोपियों में शामिल रही हैं। इससे पहले मई महीने में सुप्रीम कोर्ट की शर्तों पर सौम्या चौरसिया समेत छह आरोपियों को जमानत पर रिहा किया गया था। उस दौरान अदालत ने उन्हें राज्य से बाहर रहने के निर्देश भी दिए थे। अब तक कई बड़े नाम गिरफ्तार शराब घोटाला मामले में अब तक कई बड़े नामों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर शामिल हैं। इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। अब सबकी निगाहें विशेष अदालत के फैसले और ईडी की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि रिमांड मिलती है, तो जांच एजेंसी को उम्मीद है कि शराब और कोयला घोटाले के बीच कथित आर्थिक कड़ियों को लेकर और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

Retired IAS निरंजन दास गिरफ्तार, आबकारी घोटाले की प्लानिंग में शामिल होने का आरोप

 रायपुर 3,200 करोड़ के शराब घोटाले में लंबे समय से जांच एजेंसियों की रडार पर रहे रिटायर्ड आइएएस अधिकारी निरंजन दास को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। निरंजन दास पर यह है आरोप पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान आबकारी आयुक्त रहे निरंजन दास पर शराब घोटाले की पूरी रूपरेखा बनाने और उसे लागू कराने का आरोप है। विभाग प्रमुख के तौर पर उन्होंने विभाग में सक्रिय सिंडीकेट का सहयोग करते हुए, शासकीय शराब दुकानों में अन एकाउंटेंड शराब की बिक्री, अधिकारियों के ट्रांसफर, टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, दोषपूर्ण शराब नीति लाये जाने में सहयोग, अन्य तरीकों से सिंडीकेट को लाभ पहुंचाते हुए उसके एवज में करोड़ों का लाभ अर्जित किया था। दास को शुक्रवार कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी है। सुप्रीम कोर्ट ने नौ मई तक गिरफ्तारी से राहत दी थी। सूत्रों के मुताबिक ईओडब्ल्यू के अधिकारी नितेश पुरोहित, यश पुरोहित को गिरफ्तार करने गिरिराज होटल गई थी,जहां से दोनों फरार हो गए। कस्टम मिलिंग घोटाले में ईडी की छापेमारी वहीं 140 करोड़ के कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने भिलाई समेत प्रदेश के दस ठिकानों में छापेमारी की। गुरुवार की सुबह छह बजे ईडी की चार सदस्यीय टीम ने भिलाई के तालपुरी इलाके में रिटायर्ड आइएएस डॉ.आलोक शुक्ला और हुड़को में सुधाकर राव घर दबिश दी। टीम ने घर की घेराबंदी कर महत्वपूर्ण दस्तावेजों,लेनदेन से जुड़े कागजों को खंगालकर छानबीन की। छापेमारी के दौरान आलोक शुक्ला घर पर नहीं थे। उनके मप्र जाने की जानकारी दी गई थी। ईडी ने घर पर नोटिस चस्पा कर उन्हें तलब किया है। बताया जा रहा है कि आलोक शुक्ला सरेंडर करने ईडी की विशेष कोर्ट पहुंचे थे,लेकिन सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं होने पर उन्हें वापस भेज दिया गया।

हाईकोर्ट सख्त: शराब घोटाले में आरोपी 22 अफसरों को आत्मसमर्पण का आदेश

रायपुर  छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में 22 आबकारी अधिकारियों को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए सख्त रुख अपनाया। जस्टिस अरविंद वर्मा ने कहा कि इतने बड़े घोटाले में आरोपियों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने सलाह दी कि आरोपी निचली अदालत में सरेंडर करें और वहां से जमानत के लिए आवेदन करें। इस फैसले से अधिकारियों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। EOW की जांच में क्या खुलासा हुआ? आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो यानी ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच पूरी कर ली है। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि ओवर बिलिंग, नकली बारकोड और डमी कंपनियों के माध्यम से अवैध वसूली की गई। यह सब आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ। शराब दुकानों को सरकारी रिकॉर्ड में खपत दर्ज न करने के निर्देश थे, और बिना टैक्स चुकाए डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब सप्लाई होती थी। जांच के मुताबिक, फरवरी 2019 से शुरू हुए इस घोटाले में तीन साल में 60 लाख से अधिक शराब की पेटियां अवैध रूप से बेची गईं। शुरुआत में 200 ट्रक (800 पेटी प्रति ट्रक) प्रतिमाह सप्लाई होती थी। जब कोई विवाद नहीं हुआ तो इनलोगों ने 400 ट्रक तक सप्लाई कर दी। इतना ही नहीं प्रति पेटी की कीमत भी 2,840 से बढ़कर 3,880 रुपये कर दी गई। 22 आबकारी अधिकारी निशाने पर EOW ने 22 आबकारी अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। इन सभी को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है। इन पर आरोप है कि वे एक संगठित सिंडिकेट का हिस्सा थे, जिसके जरिए 88 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की गई। कोर्ट ने पहले ही इन अधिकारियों को 20 अगस्त तक पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाओं में अधिकारियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए फंसाने का आरोप लगाया और कुछ ने स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। आरोपियों ने याचिका में दावा किया कि वे निर्दोष हैं और उन्हें झूठे केस में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे EOW की जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। कई अधिकारियों ने अपनी स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देकर जमानत मांगी, लेकिन हाईकोर्ट ने इन तर्कों को नामंजूर कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे संगठित अपराध में कठोर कार्रवाई जरूरी है, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से याचिकाओं का विरोध किया गया। शासन ने कोर्ट को बताया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, जिससे चालान पेश करने में देरी हो रही है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। 22 आबकारी अधिकारियों पर EOW ने केस दर्ज किया है, जिन्हें राज्य सरकार ने पहले ही निलंबित कर दिया था। जांच में पता चला कि ये अधिकारी सिंडिकेट का हिस्सा थे, और उन्हें 88 करोड़ रुपये से अधिक की रकम मिली थी। इस घोटाले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। EOW और ACB की जांच में विदेशी शराब कमीशन, धन शोधन, और राजनीतिक संरक्षण की परतें खुल रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। विपक्षी कांग्रेस ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है। कोर्ट के इस फैसले से आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों की गिरफ्तारी से घोटाले की और परतें खुल सकती हैं। जनता की नजर अब EOW की अगली कार्रवाई पर टिकी है, जो शराब घोटाले में शामिल अन्य लोगों को भी उजागर कर सकती है। ये है आरोपी अधिकारी जनार्दन कौरव, पिता पंचम सिंह, उम्र 50 वर्ष, सहायक जिला आबकारी अधिकारी। अनिमेष नेताम, पिता आनंद नेताम, उम्र 49 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। विजय सेन शर्मा, पिता पीसी सेन शर्मा, उम्र 48 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। अरविंद कुमार पाटले, पिता नेवल सिंह पाटले, उम्र 49 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। प्रमोद कुमार नेताम, पिता स्व. श्याम लाल नेताम उम्र 60 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। रामकृष्ण मिश्रा, पिता शैलेन्द्र मिश्रा, उम्र 36 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। विकास कुमार गोस्वामी, पिता विनोद गोस्वाम, उम्र 44 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। इकबाल खान, पिता महूम मोहम्मद स्माईल खान, उम्र 56 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी। नितिन खंडुजा, पिता रवीन्द्र खंडुजा, उम्र 53 वर्ष, सहायक जिला आबकारी अधिकारी। नवीन प्रताप सिंग तोमर, पिता भगवान सिंह तोमर, उम्र 43 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। मंजुश्री कसेर, पति रामचन्द्र सारस, उम्र 47 वर्ष, सहायक आबकारी अधिकारी। सौरभ बख्शी, पिता राजीव बख्शी, उम्र 41 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। दिनकर वासनिक, पिता डॉ पीएल वासनिक, उम्र 42 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। मोहित कुमार जायसवाल, पिता रामलाल जायसवाल, उम्र 46 वर्ष, अधिकारी जिला आबकारी। नीतू नोतानी ठाकुर, पति मोहन दास नोतानी, उम्र 45 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। गरीबपाल सिंह दर्दी, पिता दिलबाग सिंह दर्दी, उम्र 59 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी। नोहर सिंह ठाकुर, पिता गौतम सिंह ठाकुर, उम्र 45 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। सोनल नेताम, पिता एम. एस. नेताम, उम्र 36 वर्ष, सहायक आयुक्त, आबकारी। प्रकाश पाल, पिता सपन कुमार पाल, उम्र 44 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। अलेख राम सिदार, पिता मुरलीधर सिदार, उम्र 34 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। आशीष कोसम, पिता बृजलाल कोसम, उम्र 50 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। राजेश जायसवाल, पिता हरीप्रसाद जायसवाल, उम्र 42 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।