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मौसम विभाग की चेतावनी: बिहार में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका

पटना मौसम विज्ञान केंद्र, पटना की ओर से आज जारी पूर्वानुमान के अनुसार, बिहार में आगामी 28 अगस्त तक बारिश और वज्रपात का सिलसिला जारी रह सकता है। विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें विशेष सतकर्ता बरतने की सलाह दी गई है। 28 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी शनिवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, आज दक्षिण- पश्चिम, दक्षिण- मध्य और दक्षिण- पूर्व बिहार के अधिकांश भागों में बारिश की संभावना है। वहीं, 24 से 25 अगस्त के बीच दक्षिण- पश्चिम और दक्षिण- मध्य बिहार के कई क्षेत्रों में भी तेज बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार, 23 से 24 अगस्त के दौरान बिहार के अधिकतर जिलों में कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। वहीँ 25 से 28 अगस्त तक वर्षा की तीव्रता में थोड़ी कमी आयेगी, लेकिन अधिकतर इलाकों में हल्की बारिश और कहीं- कहीं वज्रपात की आशंका बनी रहेगी।   इन जिलों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग ने शनिवार को पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण, पटना, कैमूर, रोहतास, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, नवादा, भोजपुर, समस्तीपुर, बक्सर, लखीसराय, सीवान समेत अन्य जिलों के लिए यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में हल्की से मध्यम दर्जे की मेघगर्जना, वज्रपात और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवायें चल सकती हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान सीवान में 92.6 मिमी, औरंगाबाद में 90.2 मिमी, गया में 82.2 मिमी, पश्चिम चंपारण में 80.2 मिमी, नवादा में 75.6 मिमी, रोहतास में 67.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। इससे कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति बन गई है।

आस्था का महापर्व: 25 अगस्त से शुरू होगी श्रीमद् भागवत कथा, श्रद्धालुओं में उत्साह

 रायपुर शहर में 25 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा ज्ञानयज्ञ का भव्य आयोजन होने जा रहा है. यह कार्यक्रम रामस्वरूप निरंजनलाल भवन, वी.आई.पी. रोड, रायपुर में दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक चलेगा. इस कथा का आयोजन समस्त अग्रवाल परिवार (रायपुर और कटनी) द्वारा किया जा रहा है. कथा का संचालन मथुरा के परमश्रद्धेय आचार्य बांके बिहारी गोस्वामी जी “बाँके बाबा” करेंगे. आचार्य जी अपनी ओजस्वी वाणी और रसमयी प्रवचन के माध्यम से भक्तों में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संचार करेंगे. मथुरा में जन्मे आचार्य जी ने आगरा विश्वविद्यालय और वाराणसी से साहित्य में आचार्य की उपाधि प्राप्त की है. अपने पिता और गुरु, गोस्वामी गोविंद बाबा से गुरुदीक्षा लेकर उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और भक्ति परंपरा को आगे बढ़ाया. आचार्य जी अब तक 125 श्रीमद् भागवत कथाएं पूरी कर चुके हैं और चार बार अष्टोत्तर शत् (108) सप्ताह यज्ञ का आयोजन रायपुर, जगन्नाथ पुरी, रांची और जमनीपाली में भव्य रूप से कर चुके हैं. फरवरी 2025 में जमशेदपुर में पांचवां अष्टोत्तर शत् सप्ताह यज्ञ संपन्न हुआ. इसके अलावा उन्होंने लक्ष्य यज्ञ, विष्णु यज्ञ और शतचण्डी यज्ञ जैसे कई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए हैं. कथा का शुभारंभ 25 अगस्त को मंगल कलश और श्रीमद् भागवत जी की शोभायात्रा के साथ होगा. यह शोभायात्रा सुबह 9 बजे राम मंदिर, वी.आई.पी. रोड से कथा स्थल तक जाएगी. कथा के प्रत्येक दिन विभिन्न प्रसंग जैसे कपिल भगवान चरित्र, ध्रुव चरित्र, जड़ भरत कथा, नृसिंह अवतार, श्री कृष्ण जन्म, गोवर्धन पूजा, रुक्मिणी मंगल विवाह और सुदामा चरित्र आदि प्रस्तुत किए जाएंगे. अंतिम दिन 1 सितंबर को गीत पाठ, हवन और पूर्णाहुति के साथ कथा का समापन होगा. आचार्य जी अपनी “कल्प वृक्ष चेरिटेबल गौ मानव सेवा ट्रस्ट” के माध्यम से समाज सेवा में भी सक्रिय हैं. वे गरीब बच्चों की शिक्षा, कन्या विवाह, गौ-सेवा, कुष्ठरोगियों की सहायता और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जनजागरण जैसे कार्यों में योगदान दे रहे हैं. आयोजक परिवार में ओमप्रकाश नत्थुलाल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, मुकुंद कुमार अग्रवाल, संतोष कुमार अग्रवाल, जितेंद्र कुमार अग्रवाल, अजय कुमार अग्रवाल और राजेश कुमार अग्रवाल शामिल हैं. सभी धर्मप्रेमी भक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे इस सप्ताह कथा में शामिल होकर जीवन को कृतार्थ बनाएं.

नई कार लेना हुआ आसान, 1.4 लाख तक घटे दाम और कम होगी मासिक किस्त

नई दिल्ली फेस्टिवल सीजन में सरकार का प्‍लान GST रिफॉर्म करना है और लोगों को टैक्‍स छूट करके बड़ी राहत देना है. सरकार के जीएसटी में सुधार वाले प्रस्‍ताव को मंत्र‍ियों के समूहों (GoM) ने मंजूर कर द‍िया है, लेकिन अंतिम फैसला काउंसिल की तरफ से लिया जाएगा. वहीं काउंसिल की अगली बैठक 3 से 4 सितंबर को होने वाली है.  नए GST रिफॉर्म के तहत माना जा रहा है कि 90 फीसदी वस्‍तुओं की कीमतों में कटौती हो सकती है. खासकर कार के दाम ज्‍यादा कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है. ऐसे में अगर आप भी कार खरीदने की सोच रहे हैं तो आपको थोड़ा इंतजार करना चाहिए. एक रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कार कीफायती दाम पर मिल सकते हैं, अगर जीएसटी में प्रस्‍ताव के मुताबिक बदलाव किए गए तो…  कार पर टैक्‍स इतना हो सकता है नोमुरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के मंत्रिसमूह (GoM) ने दो-स्तरीय GST ढांचे का समर्थन किया है, आवश्यक वस्तुओं के लिए 5% और मानक वस्तुओं के लिए 18%.  इस बदलाव से छोटी कारों और दोपहिया वाहनों पर GST 28% से घटकर 18% हो सकता है, जबकि बड़े वाहनों पर 43-50% से घटकर 40% हो सकता है.  1.4 लाख रुपये तक सस्‍ती हो सकती है कार  नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इसका सीधा परिणाम ये होगा कि कार की कीमतें 1.4 लाख रुपये तक कम हो सकती हैं और मासिक किस्तें 2,000 रुपये से अधिक कम हो सकती हैं.  मान लीजिए आप मारुति वैगन-R खरीदने की योजना बना रहे हैं. इसकी मौजूदा ऑन-रोड कीमत ₹7.48 लाख घटकर ₹6.84 लाख हो सकती है. वहीं मंथली EMI ₹1,047 कम हो सकती है. ब्रेजा या हुंडई क्रेटा जैसे मॉडल की कीमतों में भी मामूली कटौती और कम मासिक बचत देखने को मिलेगी, क्‍योंकि ये अभी ये हाई जीएसटी बैकेट में शामिल हैं.  दोपहिया वाहन भी पीछे नहीं हैं. होंडा एक्टिवा ₹7,452 सस्ती हो सकती है, जिससे आपकी ईएमआई लगभग ₹122 कम हो जाएगी. रॉयल एनफील्ड क्लासिक खरीदने पर आपको लगभग ₹18,000 की शुरुआती बचत हो सकती है.  Cars  पुरानी ऑन-रोड प्राइस (₹) नई ऑन-रोड प्राइस (₹) प्राइस में गिरावट (₹)  पुरानी ईएमआई (₹)  नई ईएमआई (₹)  ईएमआई ड्रॉप (₹) वैगन आर 748,228 684,426 63,802 12,281  11,234 1,047 बैलेनो  890,566 814,626  75,940 14,617 13,371  1,246 डिजायर 945,500 864,876 80,624  15,519 14,195 1,323 बोलेरो नियो 1,390,131  1,252,179  137,952  22,817 20,552 2,264 Brezza 1,156,229 1,116,359 39,870  18,977 18,323   654 क्रेटा 1,611,957 1,556,372   55,585  26,457  25,545  912 एक्सयूवी7ओओ 2,181,345 2,063,434 117,911 35,803 33,868  1,935 एक्टिवा 95,385  87,933   7,452  1,566    1,443  122 क्लासिक350   226,613 208,909 17,704  3,719  3,429  291 ऑटो सेक्‍टर्स में आएगी तेजी नोमुरा ने कहा है कि इससे सिर्फ वाहनों की कीमतों में ही कटौती नहीं होगी, बल्कि ऑटो सेक्‍टर्स को भी मजबूती मिलेगी. उम्‍मीद है कि अगर जीएसटी कटौती लागू हो जाती है तो इस साल डिमांड में 5 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी होगी. बड़ी कारों और SUV खरीदारों को सबसे ज्‍यादा लाभ हो सकता है, क्‍योंकि इस सेगमेंट में डिमांड खूब रही है. हालांकि, अल्ट्रा-लो एंट्री सेगमेंट में खरीदारों की बाढ़ आने की उम्मीद न करें, क्‍योंकि उपभोक्ता प्राथमिकताएं फीचर-पैक, स्टाइलिश वाहनों की ओर बढ़ गई हैं. 

इस बार कब है गणेश चतुर्थी? गणपति स्थापना का सही मुहूर्त और टाइमिंग नोट करें

इस महापर्व की शुरुआत भादो शुक्ल चतुर्थी को होती है और चतुर्दशी तिथि को गणेश विसर्जन के साथ इसका समापन हो जाता है. यह त्योहार भगवान गणेश को समर्पित है. ऐसा माना जाता है कि इस पवित्र घड़ी में भगवान गणेश धरती पर उतरते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इस साल ये पर्व 27 अगस्त से 6 सितंबर तक मनाया जाएगा. गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना का मुहूर्त क्या है?  हिंदू पंचांग के अनुसार, भादो शुक्ल चतुर्थी 26 अगस्त को दोपहर 01.54 बजे 27 अगस्त को दोपहर 03.44 बजे तक रहेगी. उदिया तिथि के चलते गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को मनाई जाएगी और इसी दिन गणपति जी की स्थापना होगी. चूंकि गणपति स्थापना मध्याह्न काल में शुभ होती है, इसलिए 27 अगस्त को सुबह 11 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 40 मिनट तक गणपति जी की स्थापना होगी. अलग-अलग मूर्तियां स्थापित करने का क्या है महत्व?  भगवान गणेश की अलग-अलग मूर्तियां अलग परिणाम देती हैं. पीले और लाल रंग की मूर्ति की उपासना शुभ होती है. नीले रंग के गणेश "उच्छिष्ट गणपति" कहलाते हैं. इनकी उपासना विशेष दशाओं में ही की जाती है. हल्दी से बनी मूर्ति "हरिद्रा गणपति" कहलाती है. यह कुछ विशेष मनोकामनाओं के लिए शुभ मानी जाती है. एकदंत गणपति , श्यामवर्ण के होते हैं. इनकी उपासना से अद्भुत पराक्रम मिलता है. सफेद गणपति को ऋणमोचन कहते हैं. इनकी पूजा से आदमी कर्ज मुक्त होता है. चार भुजाओं वाले रक्त वर्ण गणपति को "संकष्टहरण गणपति" कहते हैं. इनकी उपासना से संकटों का नाश होता है. त्रिनेत्रधारी, रक्तवर्ण और दस भुजाधारी गणेश "महागणपति" कहलाते हैं. इनके अंदर समस्त गणपति समाहित हैं. सामान्यतः घरों में पीले रंग या रक्त वर्ण की मध्यम आकार वाली प्रतिमा ही स्थापित करनी चाहिए. गणपति स्थापना विधि  घर की उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में एक चौकी लगाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. चौकी पर हल्दी से स्वस्तिक बनाएं और वहां अक्षत अर्पित करें. इसके बाद गणपति जी की मूर्ति को दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से स्नान कराएं. इसके बाद चौकी पर भगवान की  मूर्ति स्थापित करें. मूर्ति स्थापना के समय "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप जरूर करें. इसके बाद एक कलश में गंगाजल भरकर उसके मुख पर आम के पत्ते और नारियल रखें. दीपक और अगरबत्ती जलाएं. गणपति जी की दूर्वा, फल, फूल अर्पित करें. उन्हें मोदक या लड्डू का भोग लगाएं. इसके बाद भगवान गणेश की आरती करें. उनके मंत्रों का जाप करें और गणपति बप्पा के जयकारे लगाएं. गणेश महोत्सव में कैसे करें गणपति पूजन? यदि आपने घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की है तो नियमित रूप से दोनों वेला उनकी पूजा करें. अन्यथा सामान्य जीवनचर्या में भी दोनों वेला पूजा कर सकते हैं. सुबह और शाम के वक्त दीपक जलाकर गणेश जी की पूजा करें. उन्हें पीले फूल और दूर्वा अर्पित करें. दोनों वेला आरती करें. जितने दिन महोत्सव चल रहा है, उतने दिन पूर्ण सात्विकता का पालन करें. अनंत चतुर्दशी के दिन चाहें तो उपवास रखकर विसर्जन में शामिल हो सकते हैं.

भारतीय सेना के शक्तिशाली टैंक T-72 और T-90 का अब MP में होगा रखरखाव

भोपाल   भारतीय सेना में शामिल शाक्तिशाली रूसी मूल के टी-90 और टी 72 टैंक की जल्द मध्यप्रदेश में रिपेयरिंग होगी. इन टैंकों की रिपेयरिंग के लिए मध्यप्रदेश में जल्द ही वॉर टैंक रिपेयरिंग हब बनने जा रहा है. मध्यप्रदेश के दौरे पर आई केन्द्रीय रक्षा संयुक्त सचिव गरिमा भगत ने भोपाल में डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स की मीटिंग में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के जबलपुर, कटनी, इटारसी और सागर के बीच डिफेंस कॉरिडोर की भरपूर संभावनाएं हैं. जबलपुर में टैंक रिपेयरिंग हब के लिए करीबन 300 करोड़ का निवेश प्रस्ताव भी मिला है. डिफेंस सेक्टर का बड़ा केन्द्र बन सकता है एमपी मैन्युफैक्चरर्स और अधिकारियों से चर्चा के दौरान केन्द्रीय रक्षा संयुक्त सचिव ने कहा, '' मध्यप्रदेश के जबलपुर में 24 सितंबर को एमएसएमई कॉन्क्लेव आयोजित होने जा रही है. डिफेंस सेक्टर में जबलपुर में अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं. यहां पहले से ही व्हीकल फैक्ट्री और गन कैरिज फैक्ट्री मौजूद हैं. व्हीकल फैक्ट्री में भारतीय सेना के शक्तिशाली टैंक टी-90 और टी-72 की रिपेयरिंग का भी प्रस्ताव है. मध्यप्रदेश में रक्षा क्षेत्र में निवेश को लेकर बड़ी संभावना मौजूद है और केन्द्र सरकार इसमें प्रदेश का सहयोग कर रही है. रूसी मूल के हैं T-90, T72 टैंक     टी-90 टैंक मूल रूप से रूसी युद्धक टैंक हैं.     इसका भारतीय नाम भीष्म दिया गया है.     इसे विश्व के सबसे घातक टैंकों में से एक माना जाता है.     2003 से ही यह भारतीय सेना का मुख्य युद्ध टैंक है.     इसे लगातार अपग्रेड किया जा रहा है.     इसी तरह टी-72 टैंक अब पुराने हो चले हैं, टी 90 टैंक टी-72 का ही अपग्रेड वर्जन है.     टी-72 टैंक को भी लगातार अपग्रेड किया जा रहा है.     इन टैंकों में अब 1 हजार एचपी के इंजन लगाए जा रहे हैं.     अभी इसमें 780 एचपी के इंजन लगे हैं. देश का तीसरा बड़ा सेंटर बनेगा मध्यप्रदेश जबलपुर में मेंटेनन्स, रिपेयर और ऑपरेशन सेंटर प्रस्तावित किया गया है. यदि इसने आकार लिया तो यह दिल्ली और चेन्नई के बाद देश का तीसरा बेस टैंक ओवरहॉल फैसिलिटी सेंटर होगा, जहां टैंकों की रिपेयरिंग कर उन्हें नया रूप दिया जाएगा. दिल्ली और चेन्नई में फिलहाल यह काम हो रहा है, लेकिन काम का ज्यादा भार है. इसे देखते हुए इसका तीसरा सेंटर बनाने की ओर कदम आगे बढ़ाए जा रहे हैं. जबलपुर वैसे भी देश का बड़ा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब है. यहां गन कैरिज, बुलेटप्रूफ व्हीकल्स और गोला-बारूद बनाकर देश की सेना की बड़ी जरूरतें पूरी की जाती हैं. जबलपुर में 1904 में पहली पहली बार फैक्ट्री लगाई गई थी और सेना से जुड़े हथियार बनाना शुरू किए गए थे. 

RSS की विस्तार रणनीति में बदलाव, भैयाजी जोशी बोले- गांव से जोड़ेंगे बड़ी कंपनियों को

इंदौर  इंदौर में हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के एक दिवसीय प्रवास के बाद अब संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भैयाजी जोशी मध्यप्रदेश पहुंचे हैं। वे इंदौर में संघ पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इसमें संघ के शताब्दी वर्ष (2025-26) के दौरान प्रदेश के गांव-गांव में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। युवाओं और प्रोफेशनल्स को शाखाओं से जोड़ने पर जोर भैयाजी जोशी ने इंदौर से पहले बैतूल में बैठक की थी। इस बैठक में पंच परिवर्तन, शाखाओं का विस्तार और सेवा कार्यक्रमों पर चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, जोशी शाम तक इंदौर पहुंचेंगे और यहां संपर्क विभाग के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। संघ 2025-26 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इसकी शुरुआत इंदौर से की गई है। शताब्दी वर्ष में विशेष रूप से युवाओं और प्रोफेशनल्स को शाखाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। शाखाओं की संख्या बढ़ाने के लिए समय-निर्धारण लचीला रखा जाएगा ताकि सुबह से शाम तक किसी भी समय शाखा लगाई जा सके। इसके साथ ही गोष्ठियों और पंच परिवर्तन कार्यक्रमों का कैलेंडर भी तैयार किया गया है। प्रचारकों को गांवों में जिम्मेदारी बैतूल बैठक में भैयाजी जोशी ने प्रचारकों को निर्देश दिए कि वे गांवों में शाखाओं की संख्या बढ़ाएं और कॉलेज, आईटी के छात्रों व प्रोफेशनल्स को संघ से जोड़ें। इसके अलावा शहरों में पथ संचलन, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर संवाद और युवाओं को नगर, मंडल व बस्तियों में सक्रिय करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। विजयदशमी (2 अक्टूबर 2025) से संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम औपचारिक रूप से शुरू होंगे। पंच परिवर्तन पर फोकस मालवा प्रांत में वर्तमान में 3046 स्थानों पर 4636 शाखाएं संचालित हो रही हैं। बैतूल सम्मेलन में संघ के सामाजिक और सेवा कार्यों की भी समीक्षा की गई, जिनमें शिक्षा, चिकित्सा, स्वावलंबन और सामाजिक जागरूकता शामिल हैं। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि पंच परिवर्तन के तहत स्वदेशी, पर्यावरण, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता और कुटुंब प्रबोधन से जुड़े कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसके अलावा बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक नए लोगों को जोड़ने की रणनीति बनाई जा रही है। रिटायर अधिकारियों-कर्मचारियों को भी संघ के कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए संपर्क अभियान शुरू कर दिया गया है। 

दमोह के 3 गांवों ने आपसी सहमति से शराबबंदी का फैसला, तोड़ा तो जेब ढीली

दमोह   शराब को सामाजिक बुराई का दर्जा दिया गया है. दमोह में 3 गांव के लोगों ने मिलकर इस बुराई को दूर करने का फैसला किया है. ग्रामीणों ने आपसी सहमति से गांव में पूरी तरह से शराबबंदी का फैसला लिया है. इस फैसले को कड़ाई से लागू कराने के लिए इसका उल्लंघन करने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि शराब की वजह से कई घर-परिवार बर्बाद हो गए. गांव में आए दिन शराब पीकर मारपीट की घटनाएं सामने आती हैं. इस पर लगाम लगाने के लिए ये फैसला लिया गया है. दमोह के 3 गांवों में शराबबंदी का निर्णय विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा दमोह में शराबबंदी के लिए मुहिम चलाई जा रही है. जिसमें भगवती मानव कल्याण संगठन द्वारा किए जा रहे प्रयास अब रंग ला रहे हैं. संगठन के प्रयासों से 2 दिन के भीतर जिले के 3 ग्राम पंचायत आनू, हलगज और मुराड़ी में सर्वसम्मति से शराबबंदी का निर्णय लिया गया. इस मौके पर जनप्रतिनिधियों के अलावा स्थानीय थाने की पुलिस भी मौजूद थी. ग्रामीणों की सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय पंचायत में फैसला लिया गया कि तीनों गांवों में शराब, गांजा सहित सभी प्रकार के नशे पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. जो भी व्यक्ति इस फैसले का उल्लंघन करेगा, जैसे शराब पीकर गांव में आएगा, गांव में शराब बेचेगा या किसी भी प्रकार का नशा करने या दूसरों को करने के लिए प्रेरित करेगा, उस पर 11 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. ग्रामीणों ने नारा लगाकर इस बुराई को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया. ग्रामीणों की सर्वसम्मति से लिया गया फैसला ग्राम पंचायत मुड़ारी के सरपंच प्रतिनिधि मुकेश सिंह ने बताया "हमारे गांव में जो गांजा, शराब और अन्य नशीले पदार्थ बिक रहे हैं उन्हें बंद करना है. इससे गांव में बहुत परेशानियां हो रही हैं. शराब पीकर लोग गाली गलौज भी करते हैं. जिसके बाद सभी ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया और प्रस्ताव पारित किया है कि गांव में पूर्ण शराबबंदी लागू की जाए." आनू की ग्राम सभा में पहुंचे बांदकपुर चौकी प्रभारी एएसआई राजेंद्र मिश्रा में कहा कि "यह एक अच्छी पहल है. इस सामाजिक बुराई को दूर होना चाहिए. ग्रामीण और उनकी मुहिम में पुलिस का पूरा सहयोग है. पहले भी पुलिस ने सहयोग किया है अभी भी करेगी." शराब पीकर गाली गलौज करने पर 5 हजार का जुर्माना भगवती मानव कल्याण संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश लोधी ने कहा कि "शराब ने घर परिवार में कोहराम मचा रखा है. जिस परिवार में बाप-बेटे शराब पीते हैं, वहां मारपीट होती है लड़ाई-झगड़े होते हैं. वहां का वातावरण खराब हो गया है. इससे जब लोग परेशान हो गए तो इसके लिए सभी जाति धर्म के लोगों ने निर्णय लिया कि शराब बंदी की जाए. इसके लिए शराब पीकर गाली-गलौज करने वालों पर 5000 और 11000 रुपए का जुर्माने का प्रावधान रखा गया है." मध्य प्रदेश के कई गांवों में लागू है शराबबंदी इससे पहले भी बीते महीने दमोह की हटा तहसील के बंधा गांव में ग्रामीणों ने आपसी सहमति से शराबबंदी का निर्णय लिया था. इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के कई गांव में इसी तरह शराबबंदी का फैसला लिया गया है. बुरहानपुर के चौंड़ी और जम्बूपानी गांव में शराब बैन है. जबलपुर की तिन्हेटा तहसील के 6 गांवों में शराबबंदी लागू है. निवाड़ी के किशोरपुरा गांव में शराब बैन है. इसके अलावा भी प्रदेश में ऐसे कई गांव हैं जहां ग्रामीणों ने आपसी सहमति से गांव में शराब पीने और बेचने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.

इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग का कहर: बर्बाद हुए सैकड़ों परिवार, टूटी कई जिंदगियां

 इंदौर  ऑनलाइन गेमिंग से अपना सबकुछ गंवा रही युवा पीढ़ी और इसकी लत का शिकार हुए अपने नौनिहालों को गंवा रहे परिवारों को अब जाकर राहत मिलने की उम्मीद जागी है। प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाए जाने की राह भी साफ हो गई है। देशभर में बीस हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि गंवाने के अलावा सैकड़ों युवाओं ने आत्महत्या भी कर ली। 2020 में इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग के खिलाफ जनहित याचिका भी दायर की गई थी। इसमें केंद्र और राज्य सरकार तथा गेमिंग कंपनियों के अलावा इसका प्रचार करने वाले खिलाड़ियों और फिल्म सितारों को भी नोटिस दिए गए थे। इंदौर में पिछले कुछ वर्षों में कई दर्दनाक घटनाएं सामने आईं। 13 वर्षीय छात्र आकलन जैन ने ऑनलाइन गेम खेलते हुए अपनी मां का डेबिट कार्ड इस्तेमाल कर लगभग 2,800 रुपये गंवा दिए। डर और तनाव के कारण एक अगस्त को उसने आत्महत्या कर ली। उसके स्वजन आज भी यह दर्द नहीं भूल पाए हैं। स्वजन ने कहा कि हमारा बेटा होनहार था। अगर पहले ही सरकार गेमिंग पर सख्ती करती तो शायद वह आज जीवित होता। नशे की तरह है गेमिंग की लत गेमिंग की लत नशे जैसी होती है। मरीज जब तक गेम नहीं खेलता, बेचैन रहता है। कई मामलों में लोग सारी कमाई एक हफ्ते में ऑनलाइन गेम में उड़ा देते हैं। इलाज के दौरान उन्हें दवा के साथ-साथ काउंसलिंग और बैंक खाते में सीमित पैसे रखने जैसी सलाह दी जाती है। माता-पिता को बच्चों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। – डॉ. कृष्णा मिश्रा, मनोचिकित्सक केस 1 : मार्च में इंदौर के 16 वर्षीय छात्र प्रिंस का मामला भी पूरे शहर को झकझोर गया था। वह ऑनलाइन गेम्स का आदी था और जब उसका फोन चोरी हो गया तो उसे तुरंत नया फोन नहीं मिल सका। गुस्से और बेचैनी में उसने जहर खा लिया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। केस 2 : 25 वर्षीय जितेंद्र वास्कले इंदौर में पढ़ाई के साथ सुरक्षा गार्ड का काम करता था। ऑनलाइन गेमिंग में फंसकर उसने लोन ले लिया, लेकिन लगातार हारने के कारण कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया। दबाव और निराशा में उसने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में उसने साफ लिखा कि वह कर्ज और गेमिंग लत से टूट चुका है। केस 3 : 24 वर्षीय एक नौकरीपेशा युवक जो हर माह 50 हजार रुपये कमाता था, यह पैसा वह एक ही हफ्ते में गेम में उड़ा देता था। इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंचा। उसे ऑनलाइन गेम की लत बार-बार तलब होती थी। जब तक गेम नहीं खेलता था, बेचैन रहता था। उसके लिए गेम नशे की तरह एडिक्शन रहता है। डॉक्टरों ने खाते में कम रुपये रखवाए। इसके साथ ही दवाइयां भी दी। करीब छह माह इलाज के बाद वह अब स्वस्थ है। ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से हुई ठगी मंदसौर में ऑनलाइन गेम की लत से कई लोगों ने रुपये गंवाए हैं। लोक-लाज के भय से अधिकांश पुलिस थाने तक नहीं पहुंचे। 15 दिसंबर 2024 को इंदौर क्राइम ब्रांच ने मंदसौर के आठ सदस्यीय गिरोह को गिरफ्तार किया था, जो ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट के माध्यम से फ्राड करते थे। यह ठग लोगों से लिए रुपये अलग-अलग खातों में डालकर उन्हें आइडी और पासवर्ड देते थे। उसी आइडी से लोग वेबसाइट पर सट्टा खेलते थे। आरोपितों के पास से करोड़ों का हिसाब-किताब मिला था। पुलिस ने मंदसौर के परीक्षित लोहार, रोशन लालवानी, विजय विश्वकर्मा, अभिषेक यादव, राजेश कोतक, प्रफुल्ल सोनी, महेंद्रसिंह के साथ ही बिहार के रुचित को गिरफ्तार किया था। आरोपितों के पास से फर्जी बैंक खाते नंबर भी मिले थे। मोबाइल में दुबई मनी एक्सचेंज करने वाले लोगों के नंबर भी मिले थे।

रिपोर्ट के लिए CAG परेशान, मध्य प्रदेश के 34 विभागों से नहीं मिला खर्च का डाटा

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार के कई विभागों की हालत अच्छी नहीं है। मंत्रियों की उदासीनता और अफसरों की लापरवाही का नतीजा यह हो रहा है कि 34 विभाग अब तक बजट के बारे में जानकारी नहीं दे पा रहे। यह जानकारी ऑडिटर जनरल कार्यालय द्वारा मांगी गई है, लेकिन उसे जानकारी नहीं मिल पाई। दरअसल, महालेखाकार कार्यालय कैग ने 31 मार्च 2025 की स्थिति तक विभागों से जानकारी मांगी है। यह जानकारी मांगी गई है कि विभाग के अधीन बजट नियंत्रण अधिकारियों ने बैंकों में कितनी राशि जमा कर रखी थी? इस अवधि में कौन-कौन से बड़े कार्य और परियोजनाएं अधूरी रहीं? कई बार पत्र लिख चुका CAG महालेखाकार कार्यालय ने इसको लेकर इस वित्त वर्ष में सबसे पहले 29 अप्रैल को, फिर 20 मई और इसके बाद 24 जुलाई को पत्र लिखा था। महालेखाकार कार्यालय इस बार सीधे मुख्य सचिव को पत्र लिख चुका है। इसके बाद गुरुवार तक सभी विभागों को जानकारी भेजने के निर्देश एक बार फिर जारी किए गए थे। इसके बाद भी जवाब नहीं मिला तो एक अगस्त को वित्त विभाग को अलग और मुख्य सचिव को अलग पत्र भेजकर जानकारी दिलाने को कहा है। वित्त विभाग ने बार-बार विभागों को जानकारी भेजने के निर्देश दिए हैं। बताया जाता है कि बजट नियंत्रण अधिकारियों की इस लापरवाही का सीधा असर सरकार की वित्तीय रिपोर्टिंग पर पड़ रहा है। इससे राज्य के वित्तीय लेनदेन का ब्यौरा तैयार करने में मुश्किलें आ रही हैं। यह विभाग बने लापरवाह राजस्व विभाग, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन, एमएसएमई, जनजातीय कार्य विभाग, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, अनुसूचित जाति कल्याण, कुटीर एवं ग्रामोद्योग, महिला एवं बाल विकास, वाणिज्यिक कर, संसदीय कार्य, विमानन, लोक सेवा प्रबंधन, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, वित्त विभाग, गृह विभाग, स्कूल शिक्षा, विधि एवं विधायी कार्य, जनसंपर्क विभाग, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, संस्कृति विभाग, उच्च शिक्षा, सामान्य प्रशासन, वन विभाग, खनिज साधन, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, श्रम विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, नगरीय विकास एवं आवास, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग और लोक निर्माण विभाग। वित्त विभाग ने मांगी थी यह जानकारी तय बजट के अलावा अन्य खर्च, अनपेड बिलों से संबंधित देनदारियां, आउट साइड फंड ऑपरेशन की स्थिति, बैंकों में जमा राशि, पंचायत राज संस्थाओं को दी जाने वाली बकाया ग्रांट, अपूर्ण बड़े कार्यों की सूची, नए ऋण और अग्रिम (एडवांस) की जानकारी, ऋण की अदायगी और बकाया स्थिति, ऋण और अग्रिम का समेकित विवरण (समरी), निगमों, सरकारी कंपनियों और सहकारी संस्थाओं को दी गई सहायता, पीपीपी मोड और जनभागीदारी के तहत हुए निवेश की जानकारी, नई योजनाओं पर लिए गए नीतिगत निर्णयों का संभावित कैश फ्लो, संस्थाओं को दी गई ग्रांट की पूरी जानकारी, सिंचाई परियोजनाओं के वित्तीय परिणाम, अब तक नहीं दी गई यह महत्वपूर्ण जानकारी, बिजली योजनाओं के वित्तीय परिणाम, ऋण व लाभांश की रिपोर्ट।  

तेल नहीं, अब चुंबक है नया सोना! भारत के पास मिला खजाना, चीन की दबदबे पर लगाम

नई दिल्ली रेयर अर्थ मिनरल्‍स की वजह से वर्ल्ड वॉर तक हो सकती है. इसके दम पर चीन ने पूरी दुनिया का टेटुआ दबा रखा है. जिससे रिलेशन खराब होता है, उसे रेयर अर्थ मिनरल्‍स नहीं देता है. इससे स्‍मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक कार तक की मैन्‍यूफैक्चरिंग प्रभावित होती है. भारत के साथ संबंध जब पटरी से उतरा तो चीन ने इस अमूल्‍य खजाने के एक्‍सपोर्ट को लिमिटेड कर दिया, जिसका असर साफ तौर पर देखा गया. रेयर अर्थ मिनरल्‍स पर फिलहाल चीन की मोनोपोली यानी एकाधिकार है. अमेरिका से लेकर भारत तक इसके लिए चीन पर निर्भर हैं. क्‍लाइमेट चेंज को देखते हुए फॉसिल फ्यूल्‍स (जैसे पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट्स और कोयला आदि) के दिन लदने वाले हैं. इलेक्‍ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स का बोलबाला बढ़ने वाला है, जिसकी तस्‍वीर दिखने भी लगी है. इलेक्ट्रिक कार के बढ़ते बाजार से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. इसके अलावा स्‍मार्टफोन आज लोगों के जीवन का अ‍हम हिस्‍सा बन चुके हैं. रेयर अर्थ मिनरल्‍स के बिना इनकी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग संभव नहीं है और चीन का इसपर एकाधिकार है. लिहाजा, यह पूरी तरह से चीन पर निर्भर है कि किस देश में इस तरह की इंडस्‍ट्री फलेगी-फुलेगी. लेकिन, अब एक शुभ समाचार सामने आया है. रेयर अर्थ मिनरल्‍स के रिजर्व के मामले में भारत का तीसरा स्‍थान है और एक अनुमान के अनुसार देश में 70 लाख टन ऐसे म‍िनरल्‍स हैं अनुमान है कि चीन की जमीन में 4.4 करोड़ टन रेयर अर्थ मिनरल्‍स हैं. दूसरे नंबर पर कौन है? जी हां…दूसरे नंबर पर ब्रिक्‍स का ही एक और मेंबर कंट्री ब्राज़ील है. अनुमान है कि ब्राज़ील की जमीन में 2.1 करोड़ टन रेयर अर्थ दबे हैं यानी इस गेम में ब्राज़ील दुनिया का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है, क्योंकि आने वाला टाइम तो इलेक्ट्रिक गाड़ियों का ही दिख रहा है. पेट्रोल डीजल के जमाने लदने वाले हैं. सऊदी अरब से लेकर कतर वगैरह सब आगे की प्‍लानिंग कर रहे हैं, जब उनके तेल से कमाई के दिन खत्म होने वाले हैं. पहले देखते थे कि किस देश के पास कितना तेल का भंडार है. अब जमाना आएगा रेयर अर्थ के भंडार का. इस मामले में फिलहाल चीन बेताज बादशाह है. ब्राज़ील के पास दूसरा सबसे बड़ा भंडार है. आपको पता है कि इस मामले में तीसरे स्‍थान पर कौन है. अपना भारतवर्ष. देश में करीब 70 लाख टन रेयर अर्थ मिनरल्‍स होने का अनुमान है. भारत के लिए गेम चेंजर भारत में रेयल अर्थ मिनरल्‍स अभी भंडार ही हैं. जमीन में ही हैं. इसको निकालना, साफ़ करना, रिफ़ाइन करना, फिर उसके मैगनेट बनाने के लिए पूरा सिस्टम तैयार करना पड़ेगा. अच्‍छी बात यह है कि भारत अब इस काम में लग गया है. इसमें टाइम तो लगेगा. चीन कई साल से ऐसा कर रहा है और शुरू में तो कोई देश उतना सस्ता और उतनी क्षमता की रिफाइनिंग कर भी ना पाए, लेकिन लगे रहना पड़ेगा. एक सरकारी घोषणा आपने सुनी होगी. भारत नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन शुरू कर रहा है. ये उसी काम का मिशन है. इसमें कुछ साल लगेंगे. तब तक चीन से ही लेना होगा. अब चुंबक का आया जमाना! कैसे धरती में दबी ताकत से पूरी दुनिया का टेंटुआ दबा रहा चीन तेल के खेल से पूरी दुनिया अच्छी तरह वाक़िफ है. 70 के दशक में अरब देशों ने दिखा दिया था कि तेल पर कंट्रोल मतलब पूरी दुनिया पर दबाव. लेकिन अब ज़माना बदल गया है. खेल का नया खिलाड़ी है ‘रेयर अर्थ मिनरल‘ और नया सुपरपावर बन बैठा है चीन. रेयर अर्थ मिनरल्स आखिर हैं क्या? ये कोई जादुई चीज़ नहीं, बल्कि 17 धातुओं का एक समूह है. जैसे लोहा या तांबा होता है, वैसे ही ये भी खनिज हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इन्हें जमीन से निकालना और रिफाइन करना बेहद मुश्किल और महंगा काम है. लंबे समय तक इनका कोई बड़ा इस्तेमाल नहीं था. लेकिन जैसे ही इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक गाड़ियों का जमाना आया, इनकी कीमत आसमान छूने लगी. असली ताकत चुंबक की इन रेयर अर्थ मिनरल्स से बनते हैं सुपर मैगनेट. ये छोटे से पुर्जे दिखने वाले मैगनेट आज पूरी टेक्नोलॉजी की रीढ़ हैं. – स्मार्टफोन में – इलेक्ट्रिक गाड़ियों में – टीवी स्क्रीन में – हवाई जहाज के इंजन में – बिजली के टर्बाइन में खासकर इलेक्ट्रिक कारें इन चुंबकों के बिना असंभव हैं. मतलब इलॉन मस्क की टेस्ला हो या कोई और कंपनी, अगर रेयर अर्थ मैगनेट न मिले तो उनका काम खत्म. चीन कैसे बना राजा? 30-40 साल पहले चीन ने दूरदर्शिता दिखाई. उसने देखा कि इलेक्ट्रॉनिक्स का जमाना आने वाला है. उसने बड़े पैमाने पर खदानें खोलीं, रिफाइनिंग प्लांट लगाए और चुंबक बनाने की फैक्ट्रियां खड़ी कर दीं. नतीजा ये हुआ कि आज दुनिया का 90% रेयर अर्थ रिफाइनिंग चीन में होती है और 60-70% खदानें भी वहीं हैं. इतना ही नहीं, चीन ने म्यांमार, अफ्रीका और पाकिस्तान के बलूचिस्तान तक में खदानों पर कब्जा कर लिया है. यानी सिर्फ अपने देश ही नहीं, दूसरे देशों की जमीन से भी रेयर अर्थ निकालकर अपने कंट्रोल में कर लिया. बाकी दुनिया क्यों फंसी? अमेरिका जैसे देश पहले खुद खनन करते थे. लेकिन चीन ने इतने सस्ते दाम पर चुंबक बेचना शुरू किया कि बाकी देशों ने खदानें बंद कर दीं. 2002 में अमेरिका ने अपना बड़ा प्लांट ही बंद कर दिया. सबको लगा चीन से खरीदना आसान है. लेकिन जब इलेक्ट्रिक कारों का दौर आया तो चीन ने सप्लाई रोककर सबका टेंटुआ दबा दिया. भारत और दुनिया की स्थिति आज चीन के पास अनुमानित 4.4 करोड़ टन रेयर अर्थ मिनरल का भंडार है. दूसरे नंबर पर ब्राज़ील है 2.1 करोड़ टन के साथ. तीसरे नंबर पर आता है भारत, जहां करीब 70 लाख टन का भंडार है. फर्क बस इतना है कि चीन 40 साल से इस धंधे में है और भारत अभी शुरुआत कर रहा है. भारत ने ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ लॉन्च किया है. लक्ष्य साफ है- अपने भंडार को निकालना, रिफाइन करना और खुद मैगनेट बनाना. लेकिन इसमें वक्त लगेगा. तब तक चीन से लेना ही मजबूरी है. आने वाला समय कैसा होगा? जैसे कभी तेल पर कंट्रोल रखने वाले अरब देश पूरी दुनिया को ब्लैकमेल करते थे, वैसे ही … Read more