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बिहार में 36 हजार 7 सौ कि.मी. से अधिक ग्रामीण सड़कों का हुआ कायाकल्प

•    20 हजार करोड़ रूपये से बदल रही है सूबे के ग्रामीण सड़कों की तस्वीर •    कुल 16,171 ग्रामीण सड़कों में 15,104 की मरम्मति का काम पूर्ण पटना बिहार में गांव की गलियों से होकर खेत-खलिहान तक जाने वाली सड़कों की सूरत बदल चुकी है। बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति-2018 के तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों की कुल 16,171 सड़कों की, जिसकी कुल लम्बाई 40,259.35  किलोमीटर है, की मरम्मति और रखरखाव का लक्ष्य तय किया गया था। इसमें अबतक कुल 15,104 सड़कों की जिसकी कुल लम्बाई 36,757.22 किलोमीटर है, को चकाचक किया जा चुका है। गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि बाज़ार, अस्पताल, स्कूल और रोज़गार तक पहुंचने का सुगम मार्ग है। इस योजना के तहत 16,171  सड़कों की मरम्मति की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। जिनकी कुल लंबाई 40,259.35 किलोमीटर है। इन पर 20 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक की राशि खर्च की जा रही है। इनमें से 15,104 ग्रामीण सड़कों की मरम्मति का काम पूरा किया जा चुका है, जिनकी कुल लंबाई 36,757.22 किलोमीटर बताई गई है। माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के दिशा-निर्देश के तहत बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति-2018 का उद्देश्य केवल ग्रामीण सड़कों का निर्माण करना ही नहीं, बल्कि उन्हें लंबे समय तक दुरुस्त रखना भी है। इस कार्यक्रम के तहत राज्य की ग्रामीण सड़कों और पुलों का नियमित रख-रखाव किया जा रहा है, ताकि पूरे साल हर मौसम में गांव के लोग इन रास्तों से आसान सफर कर सकें। जिसका लाभ गांव के किसानों से लेकर स्कूल जाने वाले बच्चों तक को मिल सके। किसानों के लिए अब अपनी फसल को बाजार तक पहुंचाना आसाना हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों को इससे स्कूल आने-जाने में सुविधा हो रही है। साथ ही, बीमार लोगों को अब कच्चे रास्तों से अस्पतालों तक नहीं पहुंचाना पड़ता है। बाढ़ या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा की स्थिति में इन ग्रामीण सड़कों के माध्यम से लोगों तक राहत पहुंचाना भी अब आसान हो गया है। इतना ही नहीं, ग्रामीण सड़कों का चेहरा बदलने से बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का जीवनस्तर भी बेहतर हुआ है। सबसे अधिक पूर्वी चंपारण मेंबदली है ग्रामीण सड़कों की सूरत अनुरक्षण यानी सड़कों की मरम्मति के मामले में राज्य का पूर्वी चंपारण जिला सबसे आगे है। यहां चयनित कुल 957 सड़कों में 905 सड़कों की मरम्मति का काम पूरा कर लिया गया है। जिसकी कुल लम्बाई 2,384.03 किलोमीटर है। इसके बाद दूसरे नंबर पर मुजफ्फरपुर जिला है। मुजफ्फरपुर जिले की कुल 718 सड़कों में 657 सड़कों की मरम्मति का काम पूरा हो चुका है। मुजफ्फरपुर में कुल 1861.52 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों की मरम्मति का लक्ष्य तय किया गया था। जिसके विरुद्ध 1680.458 कि.मी. सड़क की मरम्मति का काम पूरा कर लिया गया है। ग्रामीण सड़कों के कायाकल्प के मामले में पश्चिम चंपारण जिला तीसरे स्थान पर है। यहां कुल 617 ग्रामीण सड़कों को चकाचक करने का लक्ष्य निर्धारित था। जिसकी कुल लम्बाई 2091.32 कि.मी. है। इस लक्ष्य के विरुद्ध 597 सड़कों का कायाकल्प किया जा चुका है। जिसकी कुल लम्बाई 1994.23 कि.मी. है। इसके अलावा सारण में 1,583.90 कि.मी., समस्तीपुर में 1,404.90 कि.मी., गयाजी में 1,370.45 कि.मी. और वैशाली 1,354.41 कि.मी. हैं।

निषाद पार्टी की जड़ें गोरखपुर से निकलीं, पर कुछ नेता इसे बदनाम करने में लगे हैं: डॉ संजय कुमार निषाद

“आरक्षण देना भाजपा की जिम्मेदारी है, सहयोगी के तौर पर हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” – डॉ संजय कुमार निषाद “त्रेता से ही हम प्रभु श्रीराम की विचारधारा से जुड़े हैं और आगे भी जुड़े रहेंगे।” – डॉ संजय कुमार निषाद “संजय निषाद के विरोध में जिन्हें सांसद और सुरक्षा मिली, उन्होंने समाज का आरक्षण कितनी बार उठाया?” – डॉ संजय कुमार निषाद “अगर भरोसा है तो गठबंधन निभाइए, नहीं है तो साफ कह दीजिए – हम तैयार हैं।” – डॉ संजय कुमार निषाद “सहयोगियों की ताकत को कम मत आंकिए, जीत अकेले की नहीं, सबकी साझी है।” – डॉ संजय कुमार निषाद “प्रवीण की हार पर सवाल हमसे नहीं, भाजपा नेतृत्व की रिपोर्ट से पूछिए।” – डॉ संजय कुमार निषाद गोरखपुर कैबिनेट मंत्री एवं निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद जी ने आज अपने जनपद गोरखपुर दौरे के दौरान एनेक्सी भवन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी की नींव गोरखपुर से रखी गई है, लेकिन अफसोस की बात है कि गोरखपुर और प्रदेश के कुछ नेता लगातार पार्टी और मेरी छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण का निर्णय भारतीय जनता पार्टी को लेना है, क्योंकि केंद्र और राज्य दोनों जगह उनकी ही सरकार है, और निषाद पार्टी भाजपा की सहयोगी है। केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों ही स्तर पर इस मुद्दे पर सकारात्मक पहल हो रही है। मगर कुछ तथाकथित निषाद नेता समाज और पार्टी को गुमराह कर केवल कड़वाहट फैलाने का काम कर रहे हैं। श्री निषाद ने कहा कि हमारा रिश्ता त्रेता युग से ही मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के साथ रहा है और हम उसी आदर्श को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। पत्रकारों द्वारा भाजपा नेता के इस बयान पर प्रश्न पूछे जाने पर कि भाजपा निषाद समाज को अधिक टिकट देगी, डॉ. निषाद ने कहा – “क्या ये वही लोग हैं जो ‘हाथी’ से आए और इम्पोर्ट होकर भाजपा में शामिल हुए? मैंने अखबारों में पढ़ा कि वे कह रहे थे भाजपा निषाद समाज को टिकट देगी। इसका तो हम स्वागत करते हैं। हम तो चाहते हैं कि पूरा विधानसभा ‘निषादमय’ हो जाए और 403 में से 403 विधायक निषाद जीत कर आएं। लेकिन एक सवाल है – जो लोग निषादों को टिकट दिलाने की पैरवी कर रहे हैं, क्या वे भाजपा से यह गारंटी लेकर आए हैं कि 2027 में उन्हें टिकट मिलेगा? 2024 में भी तो वे खाली हाथ ही रह गए। कभी एक कुंभ, कभी दूसरा सम्मेलन… नतीजा क्या? ज़ीरो बट्टा सन्नाटा।” उन्होंने आगे कहा कि डॉ संजय निषाद जी के विरोध जिन्हें सांसद की कुर्सी और सुरक्षा दी गई है, वे यह बताएं कि अपने कार्यकाल में उन्होंने कितनी बार मछुआ समाज के आरक्षण की आवाज़ उठाई? यदि नहीं उठाई, तो समाज सब देख रहा है और समय आने पर उचित फैसला भी करेगा। सहयोगी दलों के सम्मान को लेकर पूछे गए सवाल पर श्री निषाद ने कहा – “हम भाजपा के सहयोगी दल हैं – सुभासपा, अपना दल, निषाद पार्टी और रालोद। अगर भाजपा को हम पर भरोसा है कि हम अपने समाज को सही दिशा में ले जा रहे हैं और इसका राजनीतिक लाभ भी भाजपा को मिल रहा है, तो यह रिश्ता आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन यदि भरोसा नहीं है तो साफ कह दें और गठबंधन खत्म कर दें।         राजभर भाई के लिए बीजेपी के बड़े इम्पोर्टेड राजभर नेता, रालोद के लिए मथुराबड़े जाट नेता, और हमारे लिए? गोरखपुर में हर समय यही कोशिश रहती है कि हमें कैसे नीचे गिराया जाए। भाई आशीष पटेल जी के मामले में तो खुलासा हो ही गया है। सवाल यह है कि भाजपा नेतृत्व सीधे क्यों नहीं बोलता और छुटभैया नेताओं से ऐसे बयान क्यों दिलवाता है?”         डॉ. निषाद जी ने कहा कि किसी को इस बात का घमंड नहीं होना चाहिए कि उत्तर प्रदेश की जीत केवल भाजपा की थी। यह जीत सभी सहयोगी दलों के योगदान से मिली है। आशीष भाई पटेल समाज को, राजभर भाई राजभर समाज को, रालोद जाट समाज को और निषाद पार्टी मछुआ समाज को भाजपा से जोड़कर खड़ी है। 2018 की जीत सबको याद रखनी चाहिए। 2022 के चुनाव में जब रालोद और राजभर भाई समाजवादी पार्टी से जुड़े, तो उनकी संख्या समाजवादी पार्टी की संख्या 45 से बढ़कर 125 हो गई थी। बाकी आप सभी समझदार हैं।”         संतकबीरनगर चुनाव हारने पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा – “बार-बार ये सवाल उठता है कि प्रवीण चुनाव कैसे हारे। इस संसदीय क्षेत्र के भाजपा नेतृत्व ने क्या किया और क्या नहीं, इसकी पूरी रिपोर्ट भाजपा के पास है। उसे सार्वजनिक कर दिया जाना चाहिए।”         डॉ. निषाद जी ने कहा कि “यदि वास्तव में निषाद समाज के लिए संघर्ष की भावना है तो वे इंपोर्टेड नेता और भाजपा के निषाद नेता आरक्षण के मुद्दे पर विधानसभा का घेराव करें। मैं उनके साथ और पीछे चलने के लिए तैयार हूँ। यदि वे ऐसा नहीं करते तो यह माना जाएगा कि वे समाज और पार्टी के खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं।”

मुख्यमंत्री साय ने ओसाका की एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए किया आमंत्रित

राज्य में अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा  होगी स्थापित: कृषि मूल्य शृंखला और रोजगार को मिलेगा नया आयाम रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान ओसाका स्थित एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड को राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कंपनी को छत्तीसगढ़ में अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई तथा उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ये परियोजनाएँ न केवल कृषि मूल्य शृंखलाओं को मज़बूत करेंगी बल्कि उच्च-तकनीकी विनिर्माण को भी प्रोत्साहित करेंगी और राज्य के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर नए रोजगार अवसर सृजित करेंगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण, सुगम प्रक्रिया और प्रत्येक स्तर पर सहयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आशा व्यक्त की कि एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड की प्रस्तावित खाद्य प्रसंस्करण इकाई से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और कृषि आधारित उद्योगों को नई मजबूती प्राप्त होगी। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा राज्य को उच्च-तकनीकी उत्पादन का नया केंद्र बनाएगी और युवाओं को आधुनिक उद्योगों से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि ये निवेश परियोजनाएँ आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उद्योग और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता की समृद्धि, युवाओं का भविष्य और निवेशकों का विश्वास है, और इसी संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

जनवितरण प्रणाली के डीलरों के कमीशन में 52 फीसद की बढ़ोतरी

–    राज्य मंत्रिमंडल ने खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रस्ताव पर लगाई मुहर  –    अब खाद्यान्न डीलरों को प्रति क्विंटल मिलेगी 258.40 रूपये की कमीशन राशि   पटना  राज्य में खाद्य वितरण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत डीलर कमीशन की राशि में वृद्धि के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाकर जनवितरण प्रणाली के डीलर कमीशन की राशि में करीब 52 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है।  अबतक डीलर कमीशन मद में केन्द्रांश के रूप में प्रति क्विंटल 45 रूपये तथा राज्यांश के रूप में 45 रूपये यानी कुल 90 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित था। राज्य मंत्रिमंडल ने खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रस्ताव के अनुसार कमीशन की राशि को सितंबर, 2025 से प्रभावी करते हुए राज्य योजना से अतिरिक्त 47 रूपये प्रति क्विंटल कमीशन में वृद्धि करने का फैसला लिया है। इस निर्णय के साथ ही कुल दर (केन्द्रीय सहायता, राज्यांश व राज्य योजना मद) 211.40 रूपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 258.40 रूपये प्रति क्विंटल कर दी गई है। राज्य सरकार के इस फैसले से राज्यभर के लगभग 50 हजार जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत कार्यरत डीलरों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, राज्य में इससे खाद्यान्न वितरण की गुणवत्ता और पारदर्शिता भी पहले से बेहतर होगी। राज्य की खाद्य एवं उप्प्भोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का धन्यवाद करते हुए कहा कि बिहार सरकार गरीब एवं जरुरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न की समय पर और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि डीलर कमीशन दर में वृद्धि से सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी और उपभोक्ताओं तक खाद्यान्न अधिक सुगमता से पहुंच सके। राज्य मंत्रिमंडल के इस फैसले से जनवितरण प्रणाली के दुकानदारों की एक बहुत पुरानी मांग पूरी हुई है।

परिवहन आयुक्त ने जिलाधिकारियों को समयबद्ध कार्यक्रम के लिए भेजा पत्र

सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने पर योगी सरकार का भी फोकस लखनऊ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) व युवा कार्य-खेल मंत्रालय के सहयोग से ‘सड़क सुरक्षा मित्र (Sadak Suraksha Mitra-SSM)’ कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य MYBharat प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से युवाओं को सड़क-सुरक्षा हस्तक्षेपों में संगठित रूप से जोड़ना है। इसके लिए अनुमोदित कॉन्सेप्ट नोट व रोडमैप राज्यों/जनपदों को प्रेषित किए गए हैं। प्रथम चरण में देश के 100 चयनित जनपदों में क्रियान्वयन होगा। संबंधित जिलाधिकारियों से युवाओं के समन्वित जुड़ाव व प्रगति-रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है। परिवहन आयुक्त ने मंगलवार को सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर SSM कार्यक्रम के समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु DRSC के माध्यम से नोडल व्यवस्था,  MYBharat ऑनबोर्डिंग, स्वयंसेवक चयन-प्रशिक्षण एवं मासिक KPI-आधारित समीक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।  स्वयंसेवक के रूप में चयनित किए जाएंगे 18 से 25 वर्ष के युवा  18–28 वर्ष के उसी जनपद के युवा, जिनके विरुद्ध कोई यातायात चालान लंबित न हो, वे चुने जाएंगे। सामान्य स्वयंसेवकों के लिए 1 सप्ताह का प्रशिक्षण (फ़र्स्ट-एड सहित) और सिविल इंजीनियर स्नातकों के लिए 15 दिन का रोड सेफ़्टी ऑडिट प्रशिक्षण निर्धारित है। इनकी भूमिकाएँ—क्रैश-सीन समन्वय, रोड सेफ़्टी ऑडिट/ब्लैक-स्पॉट अध्ययन, जागरूकता एवं एंगेजमेंट के साथ EDAR, Sanjaya, Field Perception Survey जैसे टूल्स का उपयोग अनिवार्य रहेगा। उत्कृष्ट कार्य पर प्रमाण-पत्र व Good Samaritan मान्यता/पुरस्कार का भी प्रावधान है।             जिला सड़क सुरक्षा समिति करेगी कार्यक्रम की देखरेख  धारा 215B, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत प्रत्येक जनपद में जिला सड़क सुरक्षा समिति (DRSC) कार्यक्रम की देखरेख करेगी। SCCoRS (29.03.2022) के निर्देशानुसार SSM को DRSC में co-opt किया जा सकता है। MoRTH के रोडमैप में T1–T12 के स्पष्ट माइलस्टोन्स (जैसे DM का MYBharat पर ऑनबोर्डिंग, DRSC बैठक, ELP प्रकाशन, प्रशिक्षण एवं फ़ील्ड एंगेजमेंट) निर्दिष्ट हैं। कार्यक्रम के अंत में DM द्वारा MoRTH व SCCoRS को समरी रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी।       उत्तर प्रदेश के चयनित 28 जनपद (MoRTH सूची के अनुसार): कानपुर नगर, बुलंदशहर, प्रयागराज, आगरा, उन्नाव, हरदोई, मथुरा, अलीगढ़, फतेहपुर, लखनऊ, सीतापुर, बरेली, गोरखपुर, कुशीनगर, बाराबंकी, जौनपुर, बदायूँ, बिजनौर, गौतमबुद्धनगर, सहारनपुर, आज़मगढ़, मैनपुरी, फ़िरोज़ाबाद, रायबरेली, सोनभद्र, लखीमपुर खीरी, शाहजहाँपुर, बस्ती।     अपेक्षित प्रभाव: संरचित प्रशिक्षण, फील्ड-स्टडी और डेटा-आधारित रिपोर्टिंग से दुर्घटनाओं/गंभीर चोटों में कमी, आपात प्रतिक्रिया व साइट प्रबंधन में सुधार, तथा युवा-जन सहभागिता बढ़ेगी—जिससे दीर्घकाल में जिलास्तरीय सड़क-सुरक्षा तंत्र सुदृढ़ होगा। शून्य जोखिम व शून्य घर्षण की नीति पर चलते हुए सड़क सुरक्षा मित्र युवाओं की ऊर्जा को सड़क-सुरक्षा के ठोस परिणामों में बदलने का राष्ट्रीय प्रयास है। भारत सरकार एवं प्रदेश शासन चाहता है कि हर जिला समयबद्ध तरीके से DRSC के माध्यम से क्रैश-सीन मैनेजमेंट, ब्लैक-स्पॉट ऑडिट और जागरूकता की संयुक्त कार्ययोजना लागू करे, ताकि दुर्घटनाएँ व मृत्यु-दर घटे, प्रतिक्रिया-समय सुधरे और नागरिकों की सुरक्षा बढ़े। ब्रजेश नारायण सिंह, परिवहन आयुक्त

धार्मिक पर्यटन को मिली नई उड़ान, कई परियोजनाओं का हुआ शिलान्यास

महर्षि विश्वामित्र पार्क, मां मुंडेश्वरी धाम परिसर का जीर्णोद्धार, गुप्ताधाम आदि परियोजनाएं शामिल   पटना बिहार की ऐतिहासिक और पौराणिक पहचान को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ. सुनील कुमार ने सोमवार को बक्सर जिले में “महर्षि विश्वामित्र पार्क” निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। सोन नहर के स्केप चैनल के दोनों ओर विकसित होने वाला यह पार्क बक्सर की सांस्कृतिक विरासत और पौराणिक महत्व को नए अंदाज में प्रस्तुत करेगा।  पार्क में वॉकिंग ट्रैक, ओपन जिम, योगा पार्क, ओपन एयर एम्फीथिएटर, केबल-आधारित हैंगिंग ब्रिज, ग्रामीण हाट, जेन गार्डन, कैफेटेरिया और बच्चों के खेलने का जोन जैसी सुविधाएं होंगी। गंगा तट पर महर्षि विश्वामित्र की आदमकद प्रतिमा और “सिद्धाश्रम म्यूजियम” पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण होंगे। दूषित जल और कचरे के निस्तारण के लिए मिनी एसटीपी और बायो-रेमेडिएशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसी क्रम में मंत्री ने हाल ही में रोहतास जिले के पौराणिक स्थल बाबा गुप्ताधाम में 14.91 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली “गुप्ताधाम ईको-पर्यटन विकास योजना” का शिलान्यास भी किया। इस योजना के तहत दुकानों का उन्नयन, नए प्रवेश द्वार, श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला, खान-पान क्षेत्र, शौचालय और बिजली-पानी की व्यवस्था विकसित की जाएगी। शिवलिंग का लाइव टेलिकास्ट बड़े एलईडी स्क्रीन पर होगा और सभी व्यवस्थाएं सौर ऊर्जा से संचालित होंगी। इसके अलावा, हाल ही में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ सुनील कुमार ने  कैमूर जिले के मां मुण्डेश्वरी धाम परिसर के जिर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास किया। इसके तहत मंदिर तक जाने वाले रास्ते का चौड़ीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही रोहतास के दुर्गावती जलाशय स्थित करमचट डैम में बिहार की पहली बोटहाउस कैंप परियोजना का शुभारंभ भी किया गया। इस बोटहाउस में पर्यटकों के लिए एसी युक्त कमरे के साथ  किचन और 10 लोगों के बैठने की क्षमता है।  पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ सुनील कुमार ने कहा कि इसके पीछे हमारा उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है क्योंकि हमारा मानना है कि धार्मिक पर्यटन क्षेत्र लॉंग लास्टिंग होते हैं। लोगों की आस्था को देखते हुए इसमें बहुत काम करने की जरूरत है। हम बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों में भी कई योजनाएं शुरू करने वाले हैं ताकि रिजनल इम्बैलेंस ना हो। राजगीर में हमारे विभाग ने बहुत काम किया है जहां का रिजल्ट भी काफी अच्छा देखने को मिल रहा है। इसी से प्रेरित होकर कई अन्य जगहों पर भी विकास करने का प्रयास किया जा रहा है।

योगी सरकार एक लाख सूर्य सखियों से गांव-गांव तक पहुंचाएगी सौर ऊर्जा की रोशनी

सीएम योगी के निर्देश पर सोलर पैनल के इंस्टालेशन, सोलर पैनल, लाइटिंग, ईवी चार्जिंग के कार्यों में महिलाओं को जोड़ा जाएगा  – यूपीएसआरएलएम द्वारा सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उठाया गया कदम – सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपीएसआरएलएम की ओर से डीईडब्लयूईई(Decentralized Energy for Women’s Economic Empowerment) कार्यक्रम का बुधवार को किया जा रहा आयोजन – कार्यक्रम में प्रदेश के कई वरिष्ठ अधिकारी, पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञ और वैज्ञानिक लेंगे हिस्सा   लखनऊ योगी सरकार प्रदेश की बेटियों और महिलाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। वहीं ग्रामीण विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही हैं। इसी के तहत योगी सरकार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की सोलर पैनल, लाइटिंग, ईवी चार्जिंग समेत सोलर आधारित योजनाओं में भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला सूर्य सखी से जोड़ने जा रही है। इसी क्रम में सीएम योगी के मार्गदर्शन में बुधवार को यूपीएसआरएलएम की ओर से DEWEE(Decentralized Energy for Women’s Economic Empowerment)कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसका वर्ष 2030 तक 1 लाख महिला नेतृत्व वाले उद्यमों तक डीआरई (Decentralized Renewable Energy) को पहुंचाना है। इसके जरिये जहां सोलर एनर्जी के क्षेत्र में तेजी से इजाफा होगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और शहरी महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी। कार्यक्रम में देश और विदेश के सौर ऊर्जा के क्षेत्र के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे और डीआई को धरातल पर उतारने के लिए खाका खींचेंगे।  सौर ऊर्जा से रोशन होंगे प्रदेश के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाके यूपीएसआरएलएम की निदेशक दीपा रंजन ने बताया कि योगी सरकार द्वारा लगातार महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास पर जोर दिया जा रहा है। उनका यह मानना है कि अगर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तो समाज में समृद्धि का रास्ता खुल सकेगा। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में  महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें डीआरई को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण जीवन मिशन द्वारा डीआरई पहल महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs)को सशक्त बनाने की दिशा में एक नया कदम है। उन्होंने बताया कि डीआरई ऑफ-ग्रिड यानी मिनी ग्रिड ऊर्जा समाधानों से संबंधित है, ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इन इलाकों में  पारंपरिक बिजली नेटवर्क पहुंचने में काफी परेशानी होती है, वहां डीआरई घरों और समुदायों को स्वच्छ, सस्ती और विश्वसनीय ऊर्जा प्रदान करेगा। इस पहल के जरिए महिलाएं न केवल अपनी आर्थ‍िक स्थिति को सुधार सकती हैं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। महिलाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ेगी योगी सरकार डीईडब्ल्यूईई कार्यक्रम के तहत महिलाएं न केवल डीआरई समाधानों की स्थापना, रखरखाव और मरम्मत में सक्षम होंगी, बल्कि वे अपने समुदायों में स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी सेवाएं भी प्रदान करेंगी। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और वे समाज में बेहतर भूमिका निभा सकेंगी। इसके अलावा महिलाएं छोटे-छोटे उद्यमों को भी स्थापित कर सकेंगी, जिससे उन्हें सशक्त होने का एक नया अवसर मिलेगा। निदेशक ने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभाग ने कई महत्वपूर्ण संस्थाओं के साथ साझेदारी की है। इसमें पीसीआई इंडिया, एचसीबीसी, ग्लोबल एनर्जी एलायंस फॉर पीपल एंड प्लेनेट, गेट्स फाउंडेशन इंडिया और प्रेरणा ओजस जैसी संस्थाएं शामिल हैं। यह संस्थाएं प्रदेश के 20 जिलों में डीआरई को धरातल पर उतारने में अहम भूमिका निभाएंगी। इन संस्थाओं के सहयोग से महिलाओं के लिए एक समावेशी और लचीला स्वच्छ ऊर्जा तंत्र का निर्माण किया जाएगा।    कार्यक्रम में यूपीएसआरएलएम की निदेशक दीपा रंजन, पीसीआई इंडिया के जलवायु एवं रणनीति निदेशक शिशिर कुमार सिंह, ग्राम्य विकास आयुक्त जीएस प्रियदर्शी, यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह, उद्योग निदेशक एवं एमएसएमई आयुक्त कानुपर केवी पांडियन, अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास विभाग हिमांशु कुमार, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार के वरिष्ठ निदेशक-वैज्ञानिक जीवन कुमार जेठानी और गेट्स फाउंडेशन के निदेशक हरि मेनन आदि शामिल रहेंगे।  

इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी लखनऊ पहुंचे, समर्थकों में दिखा उत्साह

लखनऊ उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के साझा उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस' (इंडिया) के प्रमुख घटक दलों कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं के साथ विचार-विमर्श करने के लिए मंगलवार को लखनऊ पहुंचे। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय, पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय और वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी की अगुवाई में बड़ी संख्या में कांग्रेस व सपा कार्यकर्ताओं ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रेड्डी का हवाई अड्डे पर स्वागत किया। लखनऊ पहुंचने के बाद रेड्डी का सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ संयुक्त रूप से एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करने का भी कार्यक्रम है। देश के उपराष्ट्रपति का चुनाव आगामी नौ सितंबर को होगा जिसके लिए विपक्ष ने रेड्डी को साझा उम्मीदवार बनाया है। उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रत्याशी सी. पी. राधाकृष्णन से होगा। राधाकृष्णन तमिलनाडु से भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं, जबकि तेलंगाना से ताल्लुक रखने वाले रेड्डी उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हैं।   उपराष्ट्रपति का पद जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के कारण रिक्त हुआ है। उपराष्ट्रपति चुनाव को विपक्ष ने एक वैचारिक लड़ाई बताया है, हालांकि संख्या बल सत्तारूढ़ राजग के पक्ष में है। जुलाई 2011 में सेवानिवृत्त हुए 79 वर्षीय रेड्डी को काले धन के मामलों की जांच में ढिलाई बरतने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार की आलोचना करने सहित कई ऐतिहासिक फैसलों के लिए जाना जाता है।  उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘सलवा जुडूम' अभियान को भी असंवैधानिक करार दिया था। राजग उम्मीदवार राधाकृष्णन (67) प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान कोयंबटूर से दो बार लोकसभा सदस्य रहे और बाद में तमिलनाडु में भाजपा का नेतृत्व किया था।  

श्रमिकों के बच्चों की आधुनिक शिक्षा के लिए पारदर्शी व रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी संभव- सीएम

– प्रदेश में 57 मुख्यमंत्री अभ्युदय और कंपोजिट विद्यालयों की स्थापना का कार्य जारी- सीएम योगी – सीएम योगी ने ‘श्रम न्याय सेतु पोर्टल’, औद्योगिक न्यायाधिकरण वेबसाइट और ई-कोर्ट पोर्टल की भी शुरुआत की लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित “रोजगार महाकुंभ 2025” के अवसर पर अटल आवासीय विद्यालयों के लिए एकीकृत निगरानी प्रणाली (Integrated Monitoring System Portal) का शुभारंभ किया। इस पोर्टल के जरिए प्रदेश के 18 अटल आवासीय विद्यालयों की गतिविधियों की रीयल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल श्रमिकों के बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और अनुशासित शिक्षा दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। विद्यालयों के सभी क्रियाकलापों की हो सकेगी डिजिटल निगरानी  अटल कमांड सेंटर आधारित ERP प्रणाली के माध्यम से विद्यालयों के सभी क्रियाकलापों की डिजिटल निगरानी शुरू की गई है। इस प्रणाली की प्रमुख विशेषताएं हैं: 1.     उपस्थिति प्रबंधन : छात्र-छात्राओं और स्टाफ की दैनिक उपस्थिति रीयल-टाइम में अद्यतन होगी। 2.     शैक्षणिक निगरानी: छात्रों की प्रोफाइल, प्रगति, परीक्षा परिणाम और रिपोर्ट कार्ड ERP पर उपलब्ध होंगे, साथ ही कमांड सेंटर से शिक्षण गुणवत्ता पर नजर रखी जाएगी। 3.     स्टाफ प्रोफाइल: शिक्षकों और कर्मचारियों का विवरण जुड़ा होगा, जो जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करेगा। 4.     वित्तीय प्रबंधन: व्यय, बजट और बिलिंग की पारदर्शी जानकारी ERP पर दर्ज होगी। 5.     CCTV एकीकरण: विद्यालयों के सीसीटीवी को ERP से जोड़ा गया है, जिससे अटल कमांड सेंटर से लाइव निगरानी संभव होगी, सुरक्षा और अनुशासन को बढ़ाएगी। 6.     छात्र प्रोफाइल : प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत जानकारी और प्रगति का समग्र मूल्यांकन कमांड सेंटर से होगा। सीएम ने कहा कि यह प्रणाली 18,000 बच्चों को निशुल्क लॉजिंग, फीडिंग और आधुनिक शिक्षा प्रदान करने वाले अटल आवासीय विद्यालयों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। बीओसी बोर्ड से जुड़े श्रमिकों के बच्चों के लिए वरदान है अटल आवासीय विद्यालय- सीएम  सीएम ने कहा कि अटल आवासीय विद्याल बीओसी बोर्ड से जुड़े श्रमिकों के बच्चों के लिए वरदान है। उन्होंने कहा कि श्रमिक अपना पसीना बहाकर दूसरों के लिए घर और स्कूल बनाता था, लेकिन उसका अपना बच्चा पढ़ नहीं पाता था। यह पीड़ा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थी, जिसे पूरा करने के लिए श्रम और सेवायोजन मंत्रालय ने 18 आवासीय विद्यालय शुरू किए। इन विद्यालयों में उत्तम इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षा की व्यवस्था है, जो यूपी के किसी अन्य विद्यालय में नहीं है। सीएम योगी ने कहा कि अब उसी तर्ज पर हमने बेसिक एजुकेशन में भी इंटीग्रेटेड कैंपस की एक व्यवस्था प्रारंभ की है। पहले चरण में 57 मुख्यमंत्री अभ्युदय और कंपोजिट विद्यालयों की स्थापना का कार्य हमने प्रारंभ कर दिया है। यह डे स्कूल होंगे जहां बच्चों को आधुनिक शिक्षा प्राप्त होगी। श्रमिकों के लिए डिजिटल न्याय सेतु पोर्टल की हुई शुरुआत इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘श्रम न्याय सेतु पोर्टल’, औद्योगिक न्यायाधिकरण वेबसाइट और ई-कोर्ट पोर्टल की भी शुरुआत की। सीएम योगी ने कहा कि यह श्रमिकों के हित में बड़ी पहल है। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल से श्रमिकों को त्वरित, पारदर्शी और टाइम-बाउंड न्याय मिलेगा। श्रम विवादों का ऑनलाइन समाधान, 24 घंटे सेवाएं और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। उद्यम चले, लेकिन श्रमिकों का शोषण न हो, यह हमारी प्राथमिकता है। यह कदम उद्यमों और श्रमिकों के हित को संतुलित करने की दिशा में उठाया गया है। रोजगार महाकुंभ 2025 में सीएम योगी ने 15 अभ्यर्थियों को दिया नियुक्ति पत्र रोजगार महाकुंभ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए, जिनका चयन यूएई और अन्य विदेशी कंपनियों ने किया है। 11 कंपनियों ने सर्वाधिक नियुक्ति का आश्वासन दिया। रोजगार महाकुंभ 2025 में 1,00,000 से अधिक पंजीकरण, 50,000 नौकरियों के अवसर तथा 15,000 अंतरराष्ट्रीय रिक्तियां शामिल होंगी, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जापान और जर्मनी में प्लेसमेंट भी होंगे। इसी तरह 35,000 घरेलू अवसर देश की अग्रणी कंपनियों के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे। इस तीन दिवसीय रोजगार महाकुंभ में 100 से अधिक भर्ती साझेदार इसमें भाग ले रहे हैं, जिनमें 20 अंतर्राष्ट्रीय भर्तीकर्ता भी होंगे। इस अवसर पर 10,000 से अधिक ऑफर लेटर जारी किए जाएंगे, जिनमें से 2,000 से अधिक विदेशी प्लेसमेंट के लिए होंगे। इस अवसर पर श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, राज्यमंत्री मनोहर लाल ‘मन्नू’, प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन एमकेएस सुंदरम्, निदेशक नेहा प्रकाश, श्रम आयुक्त मार्कंडेय शाही समेत रोज़गार महाकुंभ 2025’ के रणनीतिक पार्टनर के अधिकारीगण मौजूद रहे।   

आरएसजीएल का वार्षिक कारोबार 100 करोड़ के पार, सदस्यों को 0.5 प्रतिशत लाभांश

जयपुर राज्य सरकार के संयुक्त उपक्रम राजस्थान स्टेट गैस द्वारा इस वित्तीय वर्ष के अंत तक राज्य का सार्वजनिक क्षेत्र का पहला लिक्विफाइड नेचुरल गैस प्लांट शुरु कर दिया जाएगा। प्रमुख सचिव माइन्स एवं पेट्रोलियम व चेयरमेन राजस्थान स्टेट गैस श्री टी. रविकान्त ने बताया कि कोटा में 2 नए सीएनजी स्टेशन सहित चार सीएनजी स्टेशन इसी वित्तीय वर्ष में शुरु किये जाएंगे। एजीएम में शेयर होल्डर्स को 0.5 प्रतिशत की दर से लाभांश वितरित करने का निर्णय किया गया। चेयरमेन श्री टी. रविकान्त ने आरएसजीएल के वार्षिक कारोबार को मल्टीपल करने की आवश्यकता प्रतिपादित करते हुए हरित उर्जा के क्षेत्र में विशेष हिस्सेदारी निभाने पर जोर दिया। उन्होंने  कहा कि डीपीएनजी के साथ ही व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को और अधिक संख्या में पीएनजी सुविधाओं से जोड़ने और सेवाओं में विविधिकरण लाया जाएं। आरएसजीएल के प्रबंध निदेशक श्री रणवीर सिंह ने बताया कि आरएसजीएल का वार्षिक कारोबार बढ़कर 100 करोड़ को पार कर गया है। इसी तरह से 6 करोड़ से अधिक का लाभ रहा है। उन्होंने बताया कि सीएनजी सेगमेंट में 22 प्रतिशत से अधिक की विकास दर रही है।  श्री रणवीर सिंह ने बताया कि राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र का पहला एलएनजी स्टेशन नीमराना में स्थापित होने से लंबी दूरी के परिवहन वाहनों को सुविधा मिल सकेगी वहीं आरएसजीएल और गैल द्वारा एलएनजी को लेकर अवेयरनेस कार्यक्रम आयोजित करना आरंभ कर दिया गया है। कोटा में नए डीपीएनजी कनेक्शन जारी करने की कार्ययोजना के साथ ही नए व्यावसायिक व औद्योगिक प्रतिष्ठानों को जोड़ने के प्रयास किये जा रहे हैं। एजीएम में वार्षिक अंकेक्षित लेखों का अनुमोदन किया गया।